
The Maharashtra Board 2026 Class 12 Sanskrit Question Paper with Solution PDF is available here for download. The Sanskrit exam is held on 13th February, 2026 from 11:00 am to 2:00 pm. The exam is conducted for 3 hours.
You can find the link to download the Question Paper and the Solution Pdf below.
| Maharashtra Board Class 12 Sanskrit Question Paper 2026 | Download PDF | Check Solutions |

भूमिः राज्ञे पृथवे किं उपदिष्टवती?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'पृथुवैण्यः' पाठ से लिया गया है। जब राजा पृथु अपनी प्रजा की दरिद्रता और भूख को देखकर दुखी होकर पृथ्वी को जलाने के लिए धनुष उठाते हैं, तब पृथ्वी स्त्री का रूप धारण कर उन्हें सही मार्ग बताती है।
Step 2: Detailed Explanation:
भूमि ने राजा पृथु को निम्नलिखित उपदेश दिए:
1. धनुष का त्याग: भूमि ने कहा कि धनुष को त्याग दो और प्रजा की उन्नति के लिए कार्य करो।
2. बीजों का संग्रह: भूमि ने निर्देश दिया कि विभिन्न प्रकार के अनाजों के बीजों को एकत्र कर, उन्हें परिष्कृत (संस्कारित) कर बोया जाना चाहिए।
3. कृषि कार्य: भूमि ने स्पष्ट किया कि धन, धान्य, पुष्प और फल सब मेरे उदर (गर्भ) में ही छिपे हैं। उन्हें प्राप्त करने के लिए परिश्रम और कृषि कर्म आवश्यक है।
4. जल संचयन: भूमि ने राजा को नदी के मार्ग को रोककर जल का संचयन (Water Harvesting) करने की भी प्रेरणा दी।
Step 3: Final Answer:
भूमिः राज्ञे पृथवे उपदिष्टवती यत् - "हे राजन्! तव पिता दुःशासकः आसीत्, अतः मया सर्वं धनधान्यं मम उदरे निहितम्। त्वं धनुः त्यज, प्रजाभिः सह कृषिं कुरु, तदा एव अहं प्रसन्ना भविष्यामि।"
Quick Tip: उत्तर लिखते समय 'धनुः त्यज' (धनुष छोड़ो) और 'कृषिं कुरु' (खेती करो) जैसे कीवर्ड्स का उपयोग अवश्य करें, क्योंकि यही उपदेश का सार है।
व्यसने कस्य परीक्षा भवति?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'हितोपदेश' की कथा 'चित्राङ्ग-लघुपतनक-मन्थर-हिरण्यक' (सम्बन्ध-प्रलापः) पर आधारित है। यहाँ 'व्यसन' शब्द का अर्थ है संकट या विपत्ति (Calamity/Distress)।
Step 2: Detailed Explanation:
नीतिशास्त्र के अनुसार, मनुष्य के जीवन में सुख के समय तो बहुत से लोग साथ होते हैं, परंतु सच्चे मित्र की पहचान केवल संकट काल में ही होती है।
1. संकट और मित्रता: जब मृग (हिरण) जाल में फँस जाता है, तब सियार (जम्बुक) उसे बचाने के बजाय उसके मरने की प्रतीक्षा करता है, जबकि कौआ उसे बचाने के लिए उपाय करता है।
2. श्लोक का संदर्भ: "उत्सवे व्यसने चैव दुर्भिक्षे राष्ट्रविप्लवे। राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥" अर्थात् जो उत्सव और संकट दोनों में साथ दे, वही सच्चा बान्धव या मित्र है।
Step 3: Final Answer:
विपत्तौ एव ज्ञातुं शक्यते यत् कः वास्तवतः अस्माकं हितैषी अस्ति। अतः 'व्यसने मित्रस्य परीक्षा भवति' इति सत्यम्।
Quick Tip: संस्कृत में 'व्यसन' शब्द का प्रयोग बुरी आदतों के लिए भी होता है, परंतु यहाँ संदर्भ 'आपत्ति' (संकट) से है।
“पृथुर्वैन्यः प्रजाहितदक्षः नृपः आसीत्।” — व्याख्यायत।
Step 1: Understanding the Concept:
राजा पृथु को भारतीय संस्कृति में प्रथम 'अभिषिक्त सम्राट' और कृषि विद्या का जनक माना जाता है। "प्रजाहितदक्षः" का अर्थ है वह राजा जो अपनी प्रजा की भलाई के लिए पूरी तरह समर्पित और कुशल हो।
Step 2: Detailed Explanation:
पृथु की प्रजाहितदक्षता निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट होती है:
1. प्रजा की चिन्ता: जब उन्होंने देखा कि उनकी प्रजा अन्न के अभाव में अशक्त और दुबली हो रही है, तो वे राजा के रूप में विलासी होने के बजाय चिन्तित हो गए।
2. संसाधनों का विकास: उन्होंने केवल कर (Tax) नहीं लिया, बल्कि भूमि को समतल किया, जल संचयन की व्यवस्था की और कृषि की नई तकनीक विकसित की।
3. निस्वार्थ भाव: उन्होंने पृथ्वी का दोहन प्रजा के हित के लिए किया, अपने व्यक्तिगत कोष भरने के लिए नहीं।
4. अग्रणी कार्य: वे स्वयं खेती के कार्यों में संलग्न हुए और प्रजा को आत्मनिर्भर बनाया। इसी कारण पृथ्वी का नाम 'पृथ्वी' उन्हीं के नाम पर पड़ा।
Step 3: Final Answer:
पृथुर्वैन्यः केवलं शासकः न अपितु प्रजानां सेवकः आसीत्। सः कृषि-संशोधनं कृत्वा प्रजानां बुभुक्षां निवारितवान्। अतः सः 'प्रजाहितदक्षः' इति कथ्यते।
Quick Tip: 'व्याख्यायत' वाले प्रश्नों में उदाहरण देना आवश्यक है। पृथु द्वारा कृषि कार्य का आरम्भ करना उनकी प्रजाहितदक्षता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
“मृगः काकस्य कपटेन प्रभावितः अभवत्।” — व्याख्यायत।
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'चित्राङ्ग-लघुपतनक-मन्थर-हिरण्यक' (सम्बन्ध-प्रलापः) कथा से संबंधित है। यहाँ जम्बुक (सियार) कपट के माध्यम से मृग (हिरण) को अपने वश में करना चाहता है ताकि वह उसका मांस खा सके, जबकि कौआ एक सच्चे मित्र के रूप में उसे सचेत करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
इस वाक्य की व्याख्या निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है:
1. जम्बुक का स्वार्थ: जम्बुक ने जब वन में हट्टे-कट्टे मृग को देखा, तो उसके मन में उसे खाने की इच्छा हुई। वह कपटपूर्ण बातें करके मृग के पास गया और स्वयं को उसका मित्र घोषित कर दिया।
2. काक (कौआ) की चेतावनी: मृग का पुराना मित्र काक (लघुपतनक) उसे चेतावनी देता है कि अज्ञात कुल और स्वभाव वाले व्यक्ति पर विश्वास नहीं करना चाहिए—"अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचित्।"
3. मृग का मोह: मृग जम्बुक की चिकनी-चुपड़ी बातों और उसके द्वारा दिखाए गए 'शस्यपूर्ण क्षेत्र' (अनाज से भरे खेत) के लालच में आ जाता है। वह काक की बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह को अनसुना कर देता है।
4. परिणाम: मृग के कपट से प्रभावित होने का परिणाम यह होता है कि वह अंततः शिकारी के जाल में फँस जाता है।
Step 3: Final Answer:
अतः मृगः जम्बुकस्य (शृगालस्य) मधुराभिः वाग्भिः कपटेन च प्रभावितः भूत्वा तस्मिन् विश्वासं करोति, यस्य फलं सः संकटकाले प्राप्नोति। Quick Tip: इस उत्तर में कौवे की चेतावनी वाले श्लोक का संदर्भ देना आपकी व्याख्या को अधिक अंकदायी और प्रभावशाली बनाता है।
भूपालः = ______ , मित्रम् = ______ .
Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ समानार्थक शब्द (Synonyms) लिखने हैं। संस्कृत साहित्य में एक ही अर्थ को व्यक्त करने के लिए अनेक शब्द प्रयुक्त होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
1. भूपालः: भू (धरती) का पालन करने वाला। इसके अन्य पर्याय हैं— नृपः, राजा, महीपतिः, भूपतिः।
2. मित्रम्: जो हृदय को आनंद दे और हित चाहे। इसके अन्य पर्याय हैं— सखा, सुहृद्, वयस्यः, बान्धवः। (ध्यान दें: 'मित्रम्' नपुंसकलिंग शब्द है जिसका अर्थ दोस्त होता है, जबकि 'मित्रः' पुल्लिंग शब्द का अर्थ सूर्य होता है।)
Step 3: Final Answer:
भूपालः = राजा , मित्रम् = सखा ।
Quick Tip: समानार्थक शब्द चुनते समय पाठ के संदर्भ का ध्यान रखें। राजा पृथु के लिए 'नृपः' और कौवे-हिरण के लिए 'सखा' शब्द अत्यंत उपयुक्त हैं।
सत्यम् x ______ , उपकारः x ______ .
Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ विरुद्धार्थक शब्द (Antonyms) लिखने हैं। संस्कृत में 'अ' या 'अप' उपसर्ग लगाकर अक्सर विलोम शब्द बनाए जाते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
1. सत्यम्: जो यथार्थ है। इसका विलोम 'असत्यम्' (जो झूठ है) या 'अनृतम्' होता है।
2. उपकारः: दूसरों की भलाई करना। इसका विलोम 'अपकारः' (दूसरों का बुरा करना या अहित करना) होता है।
Step 3: Final Answer:
सत्यम् x असत्यम् , उपकारः x अपकारः ।
Quick Tip: विलोम शब्द लिखते समय शब्द के लिंग और विभक्ति का ध्यान रखें। यदि शब्द नपुंसकलिंग (सत्यम्) है, तो विलोम भी उसी रूप में होना चाहिए।
मम प्रिया भाषा (निबंधलेखनम्)
Step 1: Understanding the Concept:
निबंध लेखन के माध्यम से भाषा के प्रति प्रेम और उसके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं व्याकरणिक महत्व को व्यक्त किया जाता है। यहाँ 'संस्कृत' को प्रिय भाषा मानकर निबंध प्रस्तुत है।
Step 2: Detailed Explanation:
मम प्रिया भाषा - संस्कृतम्
१. परिचयः: "संस्कृतं नाम दैवी वागन्वाख्याता महर्षिभिः।" संसारे अनेकाः भाषाः सन्ति, परन्तु तासु संस्कृतभाषा मम अतीव प्रिया अस्ति। इयं भाषा विश्वस्य प्राचीनतमा वैज्ञानिकी च भाषा वर्तते।
२. सांस्कृतिकं महत्त्वम्: अस्माकं सर्वे प्राचीनग्रन्थाः— वेदाः, उपनिषदः, रामायणं, महाभारतं च— अस्यामेव भाषायां लिखिताः सन्ति। संस्कृतं विना भारतीयसंस्कृतेः ज्ञानं असम्भवं अस्ति।
३. व्याकरणं वैशिष्ट्यं च: संस्कृतस्य व्याकरणं अतीव परिष्कृतं सुनिश्चितं च अस्ति। पाणिनिना विरचिता 'अष्टाध्यायी' अस्य प्रमाणं वर्तते। सङ्गणक-तन्त्रांशाय (Computer Software) अपि इयं भाषा उत्तमा मन्यते।
४. मधुरता: संस्कृतभाषायाः शब्दाः सुमधुराः सन्ति। "भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा।" इयं भाषा केवलं सम्भाषणस्य माध्यमं नास्ति, अपितु जीवनस्य संस्कारं अपि ददाति।
Step 3: Final Answer:
अतः मम दृष्टौ संस्कृतभाषा न केवलं भारतस्य अपितु सम्पूर्णविश्वस्य अमूल्यनिधिः अस्ति। अतः एषा एव मम प्रिया भाषा। Quick Tip: निबंध को प्रभावशाली बनाने के लिए बीच-बीच में सूक्तियों (जैसे- "संस्कृतिः संस्कृताश्रिता") का प्रयोग करें। इससे आपकी भाषा प्रवीणता झलकती है।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.