
CBSE Class 10 Hindi Course B Question Paper (Set 3 – 4/4/3) 2026 with Solutions is available here for download. The CBSE 2026 Class 10 Hindi exam was scheduled on 2nd March, from 10:30 AM to 1:30 PM.
The CBSE Class 10 Hindi Course B exam is an 80-mark theory paper (3 hours) combined with 20 marks for internal assessment. The paper comprises four sections: Reading (Unseen Passages), Grammar, Literature (Kshitij & Kritika), and Writing, with 40% MCQs, 20% competency-based, and 40% subjective questions.
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विश्व में जल-संकट बड़ी समस्या बन चुकी है । इससे हर साल करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं । गर्मियों में यह संकट और बढ़ जाता है । गाँवों से महानगरों तक पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचने लगती है । यह संकट न केवल ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए गंभीर चुनौती है बल्कि कृषि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है । लगातार गिरता भू-जल स्तर, जल संसाधनों की बर्बादी, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन इस संकट को और विकराल बना रहे हैं । अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है । जल-संकट गहराने के कई कारण हैं । हमें पता है कि पानी सीमित है, फिर भी उसे बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं । विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है लेकिन जल संसाधनों का उतनी ही अधिक तेजी से क्षय हो रहा है । कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए भू-जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है, जिससे भू-जल का स्तर गिरता जा रहा है । नदियों, झीलों और भू-जल में औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण पीने योग्य पानी की लगातार कमी आ रही है ।
Question 1(i):
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यान से पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
• कथन : भूमिगत जल के प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है ।
• कारण : जल के विविध स्रोतों को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं ।
गद्यांश के अंतिम भाग का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि औद्योगिक कचरे, रसायनों और प्लास्टिक के बढ़ते स्तर के कारण भूमिगत जल और नदियों के प्रदूषण में भारी वृद्धि हुई है, जो कथन की सत्यता को प्रमाणित करता है । इसके विपरीत, गद्यांश में यह कहीं भी उल्लेखित नहीं है कि जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के प्रयास सफल हो रहे हैं; इसके बजाय लेखक ने संसाधनों की बर्बादी और क्षय पर चिंता व्यक्त की है । अतः कारण के रूप में दिया गया तथ्य गद्यांश के संदर्भ में गलत है क्योंकि यदि प्रयास वास्तव में सफल होते, तो प्रदूषण का स्तर बढ़ता नहीं । इस प्रकार कथन सत्य है और कारण असत्य है ।
Quick Tip: कथन-कारण वाले प्रश्नों में गद्यांश की मुख्य समस्या पर ध्यान केंद्रित करें । यहाँ मुख्य विषय 'जल संकट' और 'प्रदूषण' है, न कि 'संरक्षण' की सफलता ।
विश्व में पानी की माँग दिनोंदिन क्यों बढ़ रही है ?
गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में लेखक ने स्पष्ट रूप से माँग में वृद्धि के मुख्य कारण को रेखांकित किया है । उनके अनुसार, "विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण पानी की माँग बढ़ती जा रही है" । जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ मनुष्य की घरेलू, औद्योगिक और कृषि संबंधी आवश्यकताएं भी बढ़ती हैं, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता है । यद्यपि जलवायु परिवर्तन और गिरता भू-जल स्तर भी संकट के अंग हैं, परन्तु माँग (Demand) के बढ़ने का प्राथमिक और प्रत्यक्ष कारण उपभोग करने वाली जनसंख्या का विस्तार ही है ।
Quick Tip: गद्यांश में प्रयुक्त 'कारण' और 'परिणाम' शब्दों को रेखांकित करें, इससे माँग और आपूर्ति से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देना सरल हो जाता है ।
जल-संकट गहराने के प्रमुख कारण नहीं हैं ।
यह प्रश्न नकारात्मक चयन पर आधारित है, जहाँ हमें उस विकल्प को चुनना है जो समस्या का समाधान है न कि समस्या बढ़ाने वाला कारण । गद्यांश के अनुसार, भू-जल का गिरना, जनसंख्या का बढ़ना और संरक्षण के गलत तरीके संकट को गहरा करते हैं । परन्तु 'जल स्रोतों का सुनियोजित उपयोग' (Systematic usage) जल संकट को रोकने या कम करने की एक सकारात्मक विधि है । चूँकि यह विकल्प समस्या का निवारण है, अतः यह जल-संकट गहराने का 'कारण' नहीं हो सकता ।
Quick Tip: 'नहीं' वाले प्रश्नों में विकल्पों को ध्यान से देखें । जो विकल्प तार्किक रूप से 'समस्या' के बजाय 'समाधान' लगे, वही अक्सर सही उत्तर होता है ।
‘पानी की बूँद-बूँद बचाने के बजाए हम उसे व्यर्थ बहा रहे हैं ।’ कथन का आशय स्पष्ट कीजिए ।
लेखक इस पंक्ति के माध्यम से मानव समाज की संवेदनहीनता पर प्रहार कर रहे हैं । गद्यांश के अनुसार, जल के स्रोत अत्यंत सीमित हैं और उनका क्षय तेजी से हो रहा है । 'बूँद-बूँद बचाना' जल संरक्षण के प्रति सजगता और मितव्ययिता का प्रतीक है, जबकि 'व्यर्थ बहाना' लापरवाही और संसाधनों के प्रति अनादर को दर्शाता है । यह कथन हमें चेतावनी देता है कि यदि हमने अपनी उपभोगवादी संस्कृति को नहीं बदला, तो आने वाली पीढ़ियों को जल के भीषण अभाव का सामना करना पड़ेगा ।
Quick Tip: आशय स्पष्ट करते समय कथन के पीछे छिपे नैतिक संदेश और लेखक की भविष्यवादी चिंता को शब्दों में पिरोएँ ।
पेय जल की उपलब्धता में निरंतर गिरावट क्यों आ रही है ?
गद्यांश के विश्लेषण से पेय जल की कमी के तीन प्रमुख कारण उभर कर आते हैं । प्रथम, कृषि और उद्योगों के लिए भूमिगत जल का बेतहाशा दोहन किया जा रहा है जिससे जल स्तर नीचे चला गया है । द्वितीय, जो सतह का जल उपलब्ध है, वह भी रसायनों, प्लास्टिक और औद्योगिक मलबे के कारण प्रदूषित हो चुका है और पीने योग्य नहीं रह गया है । तृतीय, बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक जल चक्र में बाधा आ रही है, जिससे सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति निरंतर कम होती जा रही है ।
Quick Tip: दो अंक के प्रश्नों में कम से कम दो से तीन ठोस बिंदुओं का उल्लेख करना उत्तर को पूर्णता प्रदान करता है ।
फ्रैंकलिन का प्रसिद्ध कथन है - ‘वक्त को बर्बाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है ।’ समय ही जीवन है । जो अवसरों और संभावनाओं से भरा हुआ है । जो बुद्धिमानी से इसका उपयोग करते हैं, वे सफलता की नींव रखते हैं, जबकि समय को व्यर्थ करने वाले अधूरे कार्यों और अपूर्ण लक्ष्यों के साथ रह जाते हैं । शास्त्रों में कहा गया है, ‘एक-एक पैसे को जोड़कर कोई धनी बनता है, और एक-एक क्षण का उपयोग करके कोई विद्वान ।’ समय वास्तव में सीमित संसाधन है । जब हम किसी एक चीज़ के लिए ‘हाँ’ कहते हैं, तो किसी दूसरी चीज़ के लिए ‘ना’ कह रहे होते हैं । प्राचीन ज्ञान भी यही सिखाता है । अवसर को समय रहते पहचानो और उसका सदुपयोग करो । मानव जीवन एक दुर्लभ उपहार है । इसलिए हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है । जैसे विद्यार्थी परीक्षा के आने के ठीक पहले समय को अच्छी तरह समझकर पूरी निष्ठा से पढ़ाई करते हैं, वैसे ही हमें भी जीवन के हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाना चाहिए । हम अक्सर कहते हैं, ‘काश मेरे पास और समय होता ।’ यह सोच हमें थकान और असंतोष की ओर ले जाती है । विद्वानों ने सिखाया कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को केवल सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं । जो लोग हर क्षण को सार्थक बनाते हैं, वे जीवन में संतोष और सफलता का सच्चा संतुलन पाते हैं ।
Question 2(i):
निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प चुनिए :
• कथन : समय के सदुपयोग का सफलता से गहरा नाता है ।
• कारण : सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने समय को सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं ।
गद्यांश के अनुसार, समय एक सीमित संसाधन है और इसका बुद्धिमानी से उपयोग करना ही सफलता की प्राथमिक शर्त है, जिससे कथन की सत्यता पुष्ट होती है । कारण यह स्पष्ट करता है कि 'समय का सदुपयोग' वास्तव में है क्या - यह समय को गौण कार्यों के बजाय सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यों में लगाने (निवेश करने) की कला है । चूँकि सफलता प्राप्ति की प्रक्रिया ही महत्वपूर्ण कार्यों में समय नियोजन पर टिकी है, अतः कारण सीधे तौर पर कथन के पीछे के तर्क को स्पष्ट कर रहा है ।
Quick Tip: कथन-कारण प्रश्नों में यदि 'कारण' उस विधि (method) को समझा रहा है जिससे 'कथन' में दिया गया परिणाम प्राप्त होता है, तो व्याख्या सदैव सही होती है ।
गद्यांश के आधार पर लिखिए कि जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करते हैं, उनका जीवन कैसा होता है ?
(I) सफल \quad (II) व्यस्त \quad (III) सार्थक \quad (IV) अनियमित
गद्यांश में समय का सदुपयोग करने वाले व्यक्तियों के जीवन के कई सकारात्मक पहलुओं का उल्लेख है । वे सफलता की नींव रखते हैं, अतः वे 'सफल' (I) होते हैं । चूँकि वे अपने समय को महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करते हैं, इसलिए उनका जीवन 'व्यस्त' (II) रहता है । साथ ही, हर क्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाने के कारण उनका जीवन 'सार्थक' (III) बन जाता है । 'अनियमितता' (IV) समय के दुरुपयोग का लक्षण है, सदुपयोग का नहीं । अतः विकल्प (C) जिसमें पहले तीन बिंदु शामिल हैं, सबसे सटीक उत्तर है ।
Quick Tip: बहु-विकल्पीय प्रश्नों में गद्यांश में दिए गए विशेषणों (जैसे सफल, सार्थक) पर ध्यान दें, इससे चयन करना आसान हो जाता है ।
‘काश मेरे पास और समय होता ।’ ऐसी सोच किस प्रकार के व्यक्तियों की होती है ?
गद्यांश में लेखक तर्क देते हैं कि प्रकृति सबको समान रूप से 24 घंटे का समय उपहार में देती है । जो लोग अपने समय का सही प्रबंधन नहीं कर पाते और कार्यों को टालते रहते हैं (अकर्मण्य और आलसी), वे ही अंत में समय की कमी का बहाना बनाते हैं । 'समय की कद्र करने वाले' और 'परिश्रमी' लोग उपलब्ध समय का ही सदुपयोग कर लक्ष्य प्राप्त कर लेते हैं । अतः समय की कमी की शिकायत केवल आलसी मानसिकता का परिचायक है ।
Quick Tip: गद्यांश की उन पंक्तियों पर ध्यान दें जहाँ लेखक 'थकान' और 'असंतोष' को 'समय की कमी के बहाने' से जोड़ता है ।
समय को व्यर्थ गँवाने के क्या परिणाम होते हैं ?
गद्यांश के अनुसार, समय का अपव्यय करने वाला व्यक्ति संभावनाओं से भरे जीवन को खो देता है । इसके व्यावहारिक परिणाम यह होते हैं कि व्यक्ति 'अपूर्ण लक्ष्यों' के साथ संघर्ष करता रहता है । मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, समय गँवाने वाले लोग अक्सर हीन भावना और असंतोष का शिकार हो जाते हैं । वे वर्तमान क्षणों को सार्थक बनाने के बजाय बीती हुई गलतियों या भविष्य की चिंता में नकारात्मकता से घिर जाते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता और अधिक प्रभावित होती है ।
Quick Tip: परिणामों का उत्तर देते समय भौतिक (अधूरे कार्य) और मानसिक (असंतोष) दोनों पक्षों का उल्लेख करें ।
हर क्षण का विवेकपूर्ण उपयोग क्यों आवश्यक है ?
लेखक के अनुसार, समय ही वह तत्व है जिससे जीवन की संरचना हुई है । विवेक वह शक्ति है जो हमें बताती है कि किस कार्य को 'हाँ' कहना है और किसे 'ना' । यदि हम हर क्षण का विवेकपूर्वक उपयोग नहीं करते, तो हम जीवन के वास्तविक आनंद और सफलता के संतुलन को प्राप्त नहीं कर सकेंगे । जैसे परीक्षा के समय विद्यार्थी सचेत हो जाते हैं, वैसे ही हमें जीवन की दुर्लभता को समझते हुए हर पल को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि बीता हुआ पल कभी वापस नहीं आता ।
Quick Tip: 'विवेक' शब्द का अर्थ है - उचित और अनुचित का ज्ञान । समय के संदर्भ में यह प्राथमिकता (Priority) तय करना है ।
‘दूसरों की सहायता करने वाले आप महान हैं ।’ - वाक्य में से सर्वनाम पदबंध छाँटकर लिखिए ।
पदबंध शब्दों का वह समूह है जो वाक्य में एक ही व्याकरणिक इकाई (संज्ञा, सर्वनाम आदि) का कार्य करता है । सर्वनाम पदबंध वह होता है जिसका अंतिम (शीर्ष) पद सर्वनाम हो और अन्य पद उस पर आश्रित हों । दिए गए वाक्य में "आप" एक सर्वनाम है और "दूसरों की सहायता करने वाले" शब्द समूह इस 'आप' की विशेषता बता रहे हैं तथा उसी पर आकर समाप्त हो रहे हैं । अतः यह पूरा समूह सर्वनाम पदबंध कहलाएगा ।
Quick Tip: पदबंध के अंतिम शब्द को पहचानें । यदि वह 'मैं, तुम, आप, वह' है, तो वह सर्वनाम पदबंध है ।
‘हम सबको एड़ियों पर अकड़कर चलना अच्छा लगता था ।’ - रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए । (रेखांकित : एड़ियों पर अकड़कर चलना)
जब एक से अधिक पद मिलकर एक क्रिया व्यापार (Action) को पूर्ण करते हैं, तो उसे क्रिया पदबंध कहते हैं । रेखांकित अंश "एड़ियों पर अकड़कर चलना" एक कार्य या क्रिया की स्थिति का बोध करा रहा है । चूँकि यह समूह वाक्य में मुख्य क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुआ है और 'चलना' (क्रिया) पर समाप्त हो रहा है, अतः यह क्रिया पदबंध है ।
Quick Tip: वाक्य में 'क्या हो रहा है' का उत्तर देने वाला शब्द समूह अक्सर क्रिया पदबंध होता है ।
‘उसके साहसिक कारनामें आसपास के गाँवों में काफी चर्चित थे ।’ - वाक्य में रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए । (रेखांकित : उसके साहसिक कारनामें)
संज्ञा पदबंध वह शब्द समूह है जो वाक्य में संज्ञा का कार्य करता है । इसका शीर्ष पद संज्ञा होता है । इस वाक्य में "कारनामें" मुख्य संज्ञा है और "उसके साहसिक" शब्द उस संज्ञा की विशेषता बताने वाले पद हैं । चूँकि यह पूरा पद समूह संज्ञा 'कारनामें' पर ही समाप्त हो रहा है, इसलिए यह संज्ञा पदबंध की श्रेणी में आता है ।
Quick Tip: रेखांकित भाग जिस शब्द पर खत्म होता है, वह उसका मुख्य पद (Head) होता है । यदि वह संज्ञा है, तो पदबंध संज्ञा होगा ।
‘उसके पिता की प्रत्येक तीन वर्ष पर बदली होती रहती थी ।’ - वाक्य में रेखांकित पदबंध का भेद बताते हुए कारण भी स्पष्ट कीजिए । (रेखांकित : बदली होती रहती थी)
वाक्य में जब कई क्रियाएं मिलकर एक ही व्याकरणिक इकाई 'क्रिया' का कार्य करती हैं, तो उसे क्रिया पदबंध कहते हैं । यहाँ "बदली होना", "रहना" और "होना" (थी) ये सभी क्रिया पद हैं जो मिलकर एक ही कार्य व्यापार को पूर्णता दे रहे हैं । चूँकि यह पूरा समूह वाक्य के विधेय भाग में क्रिया का बोध करा रहा है, इसलिए यह क्रिया पदबंध है ।
Quick Tip: वाक्य के अंत में आने वाले मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया के समूहों को पहचानना सबसे सरल है; वे सदैव क्रिया पदबंध होते हैं ।
‘वे सरल हृदय व्यक्ति थे ।’ - रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए । (रेखांकित : सरल हृदय)
विशेषण पदबंध वह शब्द समूह है जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करता है । इस वाक्य में "व्यक्ति" एक संज्ञा है और "सरल हृदय" शब्द समूह उस व्यक्ति के गुण या स्वभाव का वर्णन कर रहा है । चूँकि यह पद समूह संज्ञा की विशेषता बता रहा है और संज्ञा से ठीक पहले प्रयुक्त हुआ है, अतः यह विशेषण पदबंध है ।
Quick Tip: यदि शब्द समूह संज्ञा की गुणवत्ता, अवस्था या रूप के बारे में जानकारी दे, तो वह विशेषण पदबंध है ।
‘क्योंकि गांधी जी व्यावहारिकता की कीमत को भी पहचानते थे इसलिए वे अपने विलक्षण आदर्श को चला सके ।’ - रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए ।
मिश्र वाक्य वह होता है जिसमें एक प्रधान उपवाक्य हो और कम से कम एक आश्रित उपवाक्य हो । इस वाक्य में "क्योंकि" और "इसलिए" का जोड़ा प्रयुक्त हुआ है । यहाँ "गांधी जी व्यावहारिकता की कीमत पहचानते थे" यह कारण बताने वाला उपवाक्य है जिस पर "वे आदर्श चला सके" यह मुख्य विचार आश्रित है । जब एक उपवाक्य का अर्थ दूसरे पर निर्भर हो, तो वह मिश्र वाक्य कहलाता है ।
Quick Tip: 'क्योंकि-इसलिए', 'जब-तब', 'यद्यपि-तथापि' जैसे जोड़ों (Co-relative words) वाले वाक्य सदैव मिश्र वाक्य होते हैं ।
‘टोपी एक कोने में बैठकर रोने लगा ।’ - संयुक्त वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए ।
संयुक्त वाक्य में दो स्वतंत्र उपवाक्यों को समानाधिकरण योजक (जैसे 'और', 'परन्तु', 'किन्तु') से जोड़ा जाता है । मूल सरल वाक्य में "बैठकर" एक पूर्वकालिक क्रिया है । इसे संयुक्त बनाने के लिए हमने इसे दो स्वतंत्र क्रियाओं "बैठा" और "रोने लगा" में विभाजित किया और 'और' योजक द्वारा जोड़ दिया । अब दोनों खंडों का अपना स्वतंत्र अर्थ है ।
Quick Tip: सरल वाक्य की 'कर' वाली क्रियाओं को हटाकर 'और' लगा देने से वह संयुक्त वाक्य बन जाता है ।
‘उसकी योजना किसी तरह नेपाल पहुँचने की है ।’ - मिश्र वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए ।
मिश्र वाक्य बनाने के लिए प्रायः 'कि' योजक का प्रयोग कर एक संज्ञा उपवाक्य बनाया जाता है । सरल वाक्य में "नेपाल पहुँचने की" उद्देश्य था, जिसे रूपांतरित कर "कि वह नेपाल पहुँच जाए" आश्रित उपवाक्य बना दिया गया और "उसकी यह योजना है" को मुख्य उपवाक्य का स्वरूप दिया गया । यह संरचना वाक्य को मिश्र श्रेणी में ले जाती है ।
Quick Tip: 'कि' योजक का प्रयोग मिश्र वाक्य की एक सुलभ पहचान है, जो मुख्य और आश्रित उपवाक्य को जोड़ता है ।
‘पहले दस-पंद्रह मिनट तो मैं उलझन में पड़ा रहा ।’ - रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए ।
संरचना की दृष्टि से इस वाक्य में केवल एक ही उद्देश्य (मैं) और एक ही मुख्य समापिका क्रिया (पड़ा रहा) है । इसमें कोई भी योजक शब्द (जैसे - और, किन्तु, क्योंकि) नहीं है और न ही कोई आश्रित उपवाक्य है । चूँकि वाक्य में एक ही मुख्य विचार एक ही प्रवाह में व्यक्त किया गया है, अतः यह सरल वाक्य है ।
Quick Tip: जिस वाक्य में केवल एक ही मुख्य क्रिया और एक ही कर्ता हो, वह बिना संदेह सरल वाक्य होता है ।
‘मुझे अच्छी तरह पता है कि वह इन्हीं जंगलों में है ।’ - सरल वाक्य में रूपांतरित करके लिखिए ।
मिश्र वाक्य को सरल बनाने के लिए योजक 'कि' को हटाकर आश्रित उपवाक्य की क्रिया को संज्ञा या विशेषण के रूप में बदल दिया जाता है । यहाँ "वह इन्हीं जंगलों में है" को बदलकर "इन्हीं जंगलों में होने का" कर दिया गया, जिससे पूरा वाक्य एक ही क्रिया "पता है" के साथ सुगठित हो गया । अब इसमें कोई उपवाक्य नहीं बचा है ।
Quick Tip: सरल वाक्य बनाते समय 'कि' को लोप कर क्रिया को 'होने का', 'जाने का' जैसे रूपों में बदलें ।
‘दाल-भात’ द्वंद्व समास का उदाहरण है, कैसे ?
द्वंद्व समास में पदों के बीच का संबंध जोड़ने या विरोध का होता है । 'दाल' और 'भात' (चावल) दो स्वतंत्र खाद्य सामग्रियाँ हैं जो अक्सर सहचर्य (जोड़े) के रूप में प्रयुक्त होती हैं । समस्त पद में योजक चिन्ह का लोप करने पर 'और' शब्द लुप्त हो जाता है । चूँकि दोनों पदों की प्रधानता बराबर है, अतः यह द्वंद्व समास का एक आदर्श उदाहरण है ।
Quick Tip: यदि पदों के बीच योजक चिन्ह (-) हो और वे एक-दूसरे के पूरक या विपरीत हों, तो वह द्वंद्व समास है ।
‘लोग डरकर अपने-अपने पूजा-स्थलों में प्रार्थना करने लगे ।’ - रेखांकित पद का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए । (रेखांकित : पूजा-स्थलों)
तत्पुरुष समास वह होता है जिसमें उत्तर पद प्रधान होता है और विग्रह करते समय विभक्ति चिन्हों का प्रयोग होता है । "पूजा-स्थलों" का अर्थ है वे स्थान जो पूजा करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं । विग्रह करने पर 'के लिए' विभक्ति आती है जो संप्रदान कारक का चिन्ह है । अतः यह संप्रदान तत्पुरुष समास है ।
Quick Tip: विग्रह करने पर यदि कारक चिन्ह (का, के, की, में, पर, के लिए) आए, तो वह तत्पुरुष समास होता है ।
‘पंचानन’ पद समास के किस भेद का उदाहरण है ?
बहुव्रीहि समास में प्रयुक्त पद अपने मूल अर्थ को छोड़कर किसी तीसरे विशेष अर्थ (व्यक्ति या देवता) की ओर संकेत करते हैं । 'पंचानन' का विग्रह है - 'पाँच हैं आनन (मुख) जिसके' अर्थात् शिव या हनुमान । यहाँ 'पाँच' और 'मुख' गौण हैं और शिव प्रधान हैं । यद्यपि 'पाँच मुखों का समूह' विग्रह करने पर यह द्विगु हो सकता है, परन्तु धार्मिक संदर्भों में इसे बहुव्रीहि ही माना जाता है ।
Quick Tip: जब समस्त पद किसी विशेष पौराणिक पात्र या देवता का बोध कराए, तो बहुव्रीहि को प्राथमिकता दें ।
‘नियम के अनुसार ही कार्य करो ।’ - रेखांकित पदों के लिए उपयुक्त समस्तपद और समास के भेद का नाम लिखिए । (रेखांकित : नियम के अनुसार)
अव्ययीभाव समास में प्रथम पद अव्यय और प्रधान होता है और समस्त पद क्रिया-विशेषण का कार्य करता है । "नियम के अनुसार" के लिए समस्तपद 'यथानियम' होगा । यहाँ 'यथा' एक अव्यय है जो नियम की रीति को स्पष्ट कर रहा है । विभक्ति 'के अनुसार' का लोप होने पर यह सामासिक पद बनता है ।
Quick Tip: 'यथा' उपसर्ग से शुरू होने वाले शब्द सदैव अव्ययीभाव समास होते हैं ।
‘कर्मधारय समास’ का एक उदाहरण देकर उसका समास-विग्रह भी लिखिए ।
कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध होता है । 'नीलकमल' में 'नील' (नीला) विशेषण है और 'कमल' विशेष्य है क्योंकि प्रथम पद दूसरे पद के रंग की विशेषता बता रहा है । विग्रह करते समय 'है जो' या 'रूपी' शब्दों का प्रयोग कर गुणों को स्पष्ट किया जाता है ।
Quick Tip: यदि समस्त पद में पहला पद दूसरे की तारीफ (गुण) बता रहा हो, तो वह कर्मधारय समास है ।
‘सिर आँखों पर बिठाना’ - मुहावरे का अर्थ लिखिए और मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए ।
मुहावरा अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर एक विशेष लाक्षणिक अर्थ प्रकट करता है । 'सिर आँखों पर बिठाना' का अर्थ केवल किसी को ऊपर बैठाना नहीं, बल्कि हृदय से उसका अत्यधिक सम्मान करना है । वाक्य प्रयोग के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि जिस व्यक्ति या दल से जनता का गहरा लगाव होता है, उसके प्रति वे अपना सर्वोच्च आदर इस प्रकार व्यक्त करते हैं ।
Quick Tip: मुहावरे का वाक्य प्रयोग करते समय हमेशा 'मुहावरा' ही लिखें, उसका 'अर्थ' वाक्य में प्रयोग न करें ।
‘महंत जी को लग रहा था कि हरिहर _______ गया है ।’ - रिक्त स्थान की पूर्ति उपयुक्त मुहावरे से कीजिए ।
यह प्रश्न पाठ 'हरिहर काका' के संदर्भ में है । जब हरिहर काका ने अपनी ज़मीन ठाकुरबारी को देने से मना कर दिया या उनके व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव आया, तो महंत जी की बुद्धि काम नहीं कर रही थी । "चकरा जाना" मुहावरे का अर्थ है - हैरान होना या भ्रमित होना । अतः रिक्त स्थान में 'चकरा' शब्द मुहावरे को पूर्ण कर संदर्भ के अनुसार सटीक अर्थ देता है ।
Quick Tip: मुहावरा पूर्ति वाले प्रश्नों में पाठ के प्रसंग और पात्र की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखें ।
‘सिर पर नंगी तलवार लटकना’ - मुहावरे का वाक्य में इस तरह प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए ।
यह मुहावरा एक निरंतर और आसन्न (निकट भविष्य में होने वाले) खतरे की स्थिति को प्रकट करता है । 'नंगी तलवार' असुरक्षा और भय का प्रतीक है । वाक्य प्रयोग ऐसा होना चाहिए जो यह सिद्ध करे कि व्यक्ति किसी भी क्षण होने वाले अनिष्ट के प्रति सशंकित है । जैसे - "नौकरी से निकाले जाने की खबर के बाद से उसके सिर पर नंगी तलवार लटक रही है ।"
Quick Tip: यह मुहावरा किसी भयानक और तत्काल संकट के लिए प्रयुक्त किया जाता है ।
‘बिना परिश्रम के ही सफलता मिल जाना’ - अर्थ को व्यक्त करने वाला एक उपयुक्त मुहावरा लिखिए ।
यह मुहावरा या लोकोक्ति तब प्रयुक्त की जाती है जब किसी अयोग्य व्यक्ति को बिना किसी विशेष मेहनत या योग्यता के अचानक कोई बहुमूल्य वस्तु या बड़ी सफलता प्राप्त हो जाती है । 'बटेर' एक पक्षी है जिसे पकड़ना कठिन होता है, यदि उसे अंधा व्यक्ति पकड़ ले, तो यह केवल संयोग माना जाता है, परिश्रम नहीं । अतः यह अर्थ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है ।
Quick Tip: अप्रत्याशित और अयोग्य लाभ के लिए यह सबसे लोकप्रिय मुहावरा है ।
‘चकरा जाना’ और ‘चक्कर में पड़ना’ का अर्थ लिखकर इन दोनों मुहावरों में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
यद्यपि दोनों मुहावरे सुनने में समान लगते हैं, परन्तु 'चकरा जाना' मुख्य रूप से आश्चर्य (Surprise) की प्रतिक्रिया है, जैसे किसी अद्भुत दृश्य को देखकर बुद्धि का काम न करना । 'चक्कर में पड़ना' अक्सर एक नकारात्मक स्थिति है जहाँ व्यक्ति किसी समस्या या व्यक्ति की बातों में उलझकर सही निर्णय नहीं ले पाता । अंतर स्पष्ट है - एक विस्मय से जुड़ा है, दूसरा दुविधा से ।
Quick Tip: सूक्ष्म अर्थ भेद समझने के लिए दोनों के अलग-अलग वाक्य बनाकर देखें । विस्मय = चकराना, उलझन = चक्कर ।
गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों-से सुंदर
झरते हैं झाग भरे निर्झर !
गिरिवर के उर से उठ-उठकर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव-नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर ।
Question 7(i):
‘अनिमेष’ का अर्थ नहीं है :
'अनिमेष' शब्द का अर्थ है - बिना पलकें झपकाए देखना । विकल्प (A) एकटक, (B) लगातार और (C) निर्निमेष, ये तीनों ही इस अर्थ के पर्यायवाची हैं जो दृष्टि की एकाग्रता और स्थिरता को दर्शाते हैं । जबकि विकल्प (D) 'झाँकना' (to peep) एक विशिष्ट क्रिया है जिसका अर्थ होता है किसी आड़ से देखना, यह पलकों के झपकाने या न झपकाने की स्थिति से सीधे संबंधित नहीं है । अतः 'झाँकना' इसका अर्थ नहीं है ।
Quick Tip: 'निमेष' का अर्थ पलक झपकना होता है, 'अ' उपसर्ग जुड़ने से इसका अर्थ 'स्थिर दृष्टि' हो जाता है ।
पद्यांश में किसकी तुलना मोती की लड़ियों से की गई है ?
काव्यांश की पंक्तियाँ "मोती की लड़ियों-से सुंदर / झरते हैं झाग भरे निर्झर !" यह स्पष्ट करती हैं कि जब पर्वत से झरने झाग के साथ नीचे गिरते हैं, तो उनकी सफेद जल-बूंदें मोती की चमकदार लड़ियों की तरह प्रतीत होती हैं । यहाँ कवि ने उपमा अलंकार का प्रयोग किया है जहाँ 'निर्झर' (झरना) उपमेय है और 'मोती की लड़ियाँ' उपमान हैं ।
Quick Tip: 'से' वाचक शब्द उपमा अलंकार की पहचान है । झरने का गिरता हुआ पानी मोती जैसा सफेद और उज्ज्वल दिखता है ।
‘नीरव-नभ’ का आशय है :
'नीरव' का अर्थ है - शब्द-रहित या जहाँ कोई शोर न हो (शांत) । 'नभ' का अर्थ है - आकाश । वर्षा ऋतु के शांत वातावरण में जब बादल नहीं गरज रहे होते, तब आकाश एकदम स्थिर और मौन प्रतीत होता है । अतः नीरव-नभ का आशय एक ऐसे शांत और निःशब्द आकाश से है जो अपनी व्यापकता और नीरवता के कारण पर्वत पर उगे वृक्षों को आश्चर्यचकित कर रहा है ।
Quick Tip: 'रव' का अर्थ ध्वनि होता है, 'नी' उपसर्ग यहाँ ध्वनि के अभाव या शांति को प्रकट करता है ।
पेड़ ‘चिंतापर’ क्यों दिखाई दे रहे हैं ?
पद्यांश में वृक्षों का मानवीकरण किया गया है । उन्हें पर्वत के 'उर' (हृदय) से उठी 'उच्चाकांक्षाओं' (ऊँची इच्छाओं) का प्रतीक माना गया है । वे शांत आकाश की ओर अपलक निहार रहे हैं क्योंकि वे उस अनंत ऊँचाई को छूना चाहते हैं । उनकी यह स्थिरता और आकाश को एकटक देखना उन्हें किसी गहरे चिंतन या 'चिंता' में डूबा हुआ विचारक जैसा दिखाता है जो अपने लक्ष्य को पाने के लिए मग्न है ।
Quick Tip: वृक्षों को पर्वत की उन अनवरत बढ़ने वाली इच्छाओं का रूप माना गया है जो कभी तृप्त नहीं होतीं ।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
• कथन : एकाग्रता, अटल विश्वास और लक्ष्य पर दृष्टि सफल होने के सहायक तत्व हैं ।
• कारण : जीवन में सफलता बिना प्रयास के भाग्य से स्वयं ही प्राप्त हो जाती है ।
पद्यांश में वृक्षों को 'अटल' और 'अनिमेष' (एकाग्र) रहकर ऊपर देखते हुए दिखाया गया है, जो एकाग्रता और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं, अतः कथन सत्य है । परन्तु कारण कहता है कि सफलता बिना प्रयास के 'भाग्य' से मिलती है, जो कि तार्किक रूप से और कविता के संघर्षपूर्ण भाव के विपरीत है । सफलता के लिए निरंतर प्रयास और कर्मशीलता अनिवार्य है । भाग्य के सहारे बैठने वाला व्यक्ति कभी उन्नति की ऊँचाई नहीं पा सकता, जैसा कि वृक्षों के संघर्ष से स्पष्ट है ।
Quick Tip: सकारात्मक जीवन मूल्य (एकाग्रता, विश्वास) हमेशा 'पुरुषार्थ' या 'कर्म' पर टिके होते हैं, आलसी भाग्य पर नहीं ।
‘मनुष्यता’ कविता के आधार पर लिखिए कि ‘अखंड आत्म भाव’ रखने के क्या लाभ हैं ?
मैथिलीशरण गुप्त की 'मनुष्यता' कविता विश्व-बंधुत्व का संदेश देती है । जब मनुष्य 'अखंड आत्म भाव' (एकता की भावना) रखता है, तो वह 'पराया' और 'अपना' का संकुचित भेद भूल जाता है । इससे सामाजिक समरसता बढ़ती है और घृणा का स्थान प्रेम ले लेता है । ऐसा व्यक्ति मानवता की सेवा में ही ईश्वर के दर्शन करता है, जिससे समाज और राष्ट्र का चहुँमुखी विकास संभव होता है ।
Quick Tip: 'अखंड आत्म भाव' ही 'वसुधैव कुटुंबकम्' का आधार है, जो व्यक्तिगत शांति और विश्व शांति दोनों के लिए अनिवार्य है ।
‘साखी’ में कबीर ने प्रभु प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा किसे और क्यों बताया है ?
कबीर के अनुसार, ईश्वर और अहंकार एक ही हृदय में साथ नहीं रह सकते । साखी "जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं" यह स्पष्ट करती है कि ज्ञान का दीपक जलने पर अहंकार रूपी अंधकार स्वतः मिट जाता है । अहंकार मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित करता है और उसे अपनी लघुता का अहसास नहीं होने देता, जो भक्ति मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट है ।
Quick Tip: 'मैं' यहाँ घमंड का प्रतीक है । समर्पण और विनम्रता ही ईश्वर तक पहुँचने की पहली सीढ़ी है ।
‘आत्म त्राण’ कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है ?
रबींद्रनाथ टैगोर की इस कविता में कवि आत्मनिर्भरता और मानसिक सुदृढ़ता का संदेश देते हैं । वे ईश्वर से केवल इतनी सहायता चाहते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका 'पौरुष' या आत्म-विश्वास अक्षुण्ण रहे । वे किसी बाहरी सहारे की अपेक्षा करने के बजाय अपने भीतर की शक्ति पर भरोसा करके विपदाओं पर विजय पाना चाहते हैं । यह कविता मनुष्य को संकटों से भागने के बजाय उनके सामने डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती है ।
Quick Tip: यह कविता ईश्वर से 'मुक्ति' की नहीं बल्कि 'दुख सहने की अजेय शक्ति' और 'आत्मनिर्भरता' की माँग करती है ।
‘कर चले हम फ़िदा’ कविता से उद्धृत ‘राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियों’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ।
शहीद होता सैनिक अंतिम विदा लेते समय देशवासियों को संदेश देता है कि अब सीमा की रक्षा का 'धनुष' तुम्हारे हाथों में है । देश की पवित्रता को सुरक्षित रखना अब तुम्हारी जिम्मेदारी है । तुम्हें ही राम जैसा शौर्य और लक्ष्मण जैसा संयम व समर्पण दिखाकर देश की ओर बढ़ने वाली हर 'रावण रूपी' बुरी नज़र को रोकना है । यह पंक्ति आगामी पीढ़ी को राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक और संकल्पित रहने का आह्वान करती है ।
Quick Tip: राम-लक्ष्मण का उदाहरण यहाँ वीरता, नैतिकता और त्याग के साथ राष्ट्रीय उत्तरदायित्व निभाने का प्रतीक है ।
पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है । यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं । पहले पूरा परिवार एक परिवार के समान था, अब टुकड़ों में बँटकर एक दूसरे से दूर हो चुका है । पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिलजुलकर रहते थे, अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है । बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है । बारूद की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया । अब गर्मी में ज्यादा गर्मी, बेवक्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं । नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है । नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले मुंबई में देखने को मिला था और यह नमूना इतना डरावना था कि मुंबई निवासी डरकर अपने-अपने पूजा-स्थल में अपने खुदाओं से प्रार्थना करने लगे थे ।
Question 9(i):
अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर देने का आशय है -
'दीवारें खड़ी करना' यहाँ एक लाक्षणिक प्रयोग है जो अलगाव और स्वार्थ को दर्शाता है । लेखक का कहना है कि मनुष्य ने अपनी बुद्धि का उपयोग केवल अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किया है, जिससे उसने स्वयं को प्रकृति, अन्य प्राणियों और यहाँ तक कि अपने समाज से भी अलग कर लिया है । उसने यह भुला दिया कि इस धरती पर सबका समान अधिकार है और वह समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का केवल एक हिस्सा है । यह दूरी ही वर्तमान असंतुलन की जड़ है ।
Quick Tip: दीवार यहाँ ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि मनुष्य के मन और प्रकृति के बीच की 'स्वार्थपूर्ण सोच' की प्रतीक है ।
मुंबई निवासी ईश्वर से प्रार्थना क्यों करने लगे ?
गद्यांश के अनुसार, जब मुंबई में समुद्र ने अपना उग्र रूप दिखाया (जिसे 'नेचर का गुस्सा' कहा गया है), तब मनुष्य की सारी तकनीकी और भौतिक शक्ति विफल हो गई । जब प्रलयकारी विनाश और मृत्यु का भय साक्षात् सामने खड़ा दिखा, तो मनुष्य को अपनी सीमाओं का अहसास हुआ । ऐसी असहाय स्थिति में, जहाँ जीवन की कोई सुरक्षा नहीं बची थी, केवल ईश्वर ही उन्हें अंतिम रक्षा का मार्ग नजर आया । अतः विनाश के डर से उपजी बेबसी ने उन्हें प्रार्थना की ओर धकेला ।
Quick Tip: जब मनुष्य प्रकृति की अजेय शक्ति के सामने लाचार हो जाता है, तब वह आध्यात्मिकता और ईश्वर की शरण में जाता है ।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
• कथन : मानव और प्रकृति के बीच बढ़ते असंतुलन का मुख्य कारण मानव की बढ़ती स्वार्थपरता है ।
• कारण : बुद्धि के विकास ने ही मानव को अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाया जिससे अंततः पर्यावरण सकारात्मक रूप से प्रभावित हुआ ।
कथन पूर्णतः सत्य है क्योंकि मनुष्य के स्वार्थ और लालच ने ही प्रकृति के संतुलन को नष्ट किया है, जो गद्यांश का मूल विचार है । परन्तु कारण का तर्क भ्रामक है । यद्यपि बुद्धि के विकास से मनुष्य को ज्ञान मिला, परन्तु इस बुद्धि का प्रयोग उसने पर्यावरण के संरक्षण (सकारात्मक प्रभाव) के बजाय उसके दोहन और विनाश (नकारात्मक प्रभाव) के लिए किया है । चूँकि कारण में पर्यावरण पर 'सकारात्मक प्रभाव' की बात कही गई है जो गद्यांश में वर्णित विनाशलीला के विपरीत है, अतः कारण कथन की सही व्याख्या नहीं कर सकता ।
Quick Tip: कारण पढ़ते समय 'सकारात्मक' जैसे विशेषणों पर ध्यान दें । गद्यांश आपदाओं और असंतुलन की बात कर रहा है, जो कि नकारात्मक है ।
प्रकृति के असंतुलन का परिणाम नहीं है -
गद्यांश में असंतुलन के प्रत्यक्ष परिणामों की एक लंबी सूची दी गई है, जिसमें अत्यधिक गर्मी, बेवक़्त बारिश, सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोगों का उल्लेख है । 'विकास-दर' (Growth Rate) एक आर्थिक शब्द है । यद्यपि विकास की अंधाधुंध दौड़ असंतुलन का 'कारण' हो सकती है, परन्तु विकास-दर में वृद्धि को प्रकृति के असंतुलन का 'नकारात्मक परिणाम' नहीं माना जा सकता । बल्कि असंतुलन और आपदाएं अक्सर विकास-दर को बाधित ही करती हैं ।
Quick Tip: 'नहीं' वाले प्रश्नों में वह विकल्प चुनें जो गद्यांश में दिए गए संकटों के विवरण से भिन्न श्रेणी का हो ।
‘पहले पूरा संसार एक परिवार के समान था’ - का भाव है -
'संसार का परिवार के समान होना' एक दार्शनिक और मानवीय सामंजस्य को प्रकट करता है । इसका वास्तविक अर्थ यह है कि प्राचीन काल में मनुष्य, पशु, पक्षी और प्रकृति के अन्य तत्व एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील थे । वे परस्पर निर्भरता और 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत अर्थात् 'सह-अस्तित्व' (Co-existence) का सम्मान करते थे । वे दूसरों के कष्टों को अपना समझते थे, जो अब आधुनिक 'डिब्बे जैसे घरों' और स्वार्थपूर्ण जीवन में लुप्त हो गया है ।
Quick Tip: 'सह-अस्तित्व' शब्द का अर्थ है - सबका साथ होना और एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करना । यही वसुधैव कुटुंबकम् का सार है ।
वामीरो के बार-बार इंकार और उपेक्षा के बाद भी तताँरा उससे अपना गाना पूरा करने का आग्रह करता रहा, यहाँ तक कि उसका रास्ता रोककर खड़ा हो गया । वर्तमान में यदि कोई ऐसा करे तो क्या आप उसे उचित मानेंगे ?
यह प्रश्न पाठ के प्राचीन प्रसंग को आधुनिक सामाजिक और कानूनी मर्यादाओं की कसौटी पर परखता है । तताँरा-वामीरो कथा एक लोककथा है, परन्तु आज के सभ्य समाज में निजता (Privacy) और सहमति (Consent) का अत्यधिक महत्व है । किसी की उपेक्षा के बाद भी उसका मार्ग अवरुद्ध करना व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है । अतः ऐसा व्यवहार आज की नैतिकता के अनुसार सर्वथा अस्वीकार्य है ।
Quick Tip: साहित्यिक तुलना वाले प्रश्नों में उत्तर देते समय आधुनिक कानूनी अधिकारों और मानवीय गरिमा को केंद्र में रखें ।
‘गिन्नी का सोना’ पाठ पाठकों को एक जागरूक और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा देता है । कथन के पक्ष में अपने विचार लिखिए ।
लेखक का संदेश है कि 'प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट' (व्यावहारिक आदर्शवादी) ही समाज का वास्तविक कल्याण कर सकते हैं । केवल शुद्ध आदर्श (शुद्ध सोना) टिकाऊ नहीं होते और केवल स्वार्थ (ताँबा) समाज को गंदा करता है । एक सक्रिय नागरिक वह है जो ताँबे जैसी व्यावहारिकता का सहारा लेकर सोने जैसे आदर्शों को समाज में प्रतिष्ठित करता है । यह संतुलन ही राष्ट्र को मज़बूती प्रदान करता है ।
Quick Tip: शुद्ध आदर्श समाज को दिशा देते हैं, जबकि व्यावहारिकता उन्हें चलाने का माध्यम बनती है । दोनों का संतुलन ही 'जागरूकता' है ।
‘तीसरी कसम’ जैसी साहित्यिक और कलात्मक फिल्मों की व्यावसायिक सफलता संदिग्ध क्यों हो जाती है ?
साहित्यिक फिल्में अक्सर यथार्थवाद, सादगी और गहरी मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होती हैं । आम दर्शक प्रायः सिनेमा में सतही मनोरंजन, शोर-शराबा, मारधाड़ और काल्पनिक सुख ढूँढ़ता है । 'तीसरी कसम' जैसी गंभीर और धीमी गति की कलात्मक फिल्में मसाला फिल्मों की तुलना में व्यावसायिक रूप से पिछड़ जाती हैं । Quick Tip: सच्ची कला गहराई और धैर्य की अपेक्षा करती है, जो व्यावसायिकता की 'भीड़' वाली मानसिकता के विपरीत है ।
‘डायरी का एक पन्ना’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्रतीकात्मक समारोह एवं घटनाएँ भी सच्ची भावनाओं को जन्म दे सकती हैं ।
26 जनवरी 1931 को कोलकाता में मनाया गया समारोह प्रतीकात्मक था, परन्तु इसने लोगों में सुप्त देशभक्ति और संकल्प की अग्नि प्रज्वलित कर दी । पुलिस की लाठियों और रक्तपात के बावजूद लोगों का झंडा फहराने का जुनून सिद्ध करता है कि एक प्रतीक भी राष्ट्र के प्रति सच्ची भावना और असीम कुर्बानी पैदा कर सकता है । Quick Tip: प्रतीक अक्सर उस महान लक्ष्य (आजादी) की याद दिलाते हैं, जिसके लिए जनता को एकजुट होना अनिवार्य है ।
‘जिनसे अपनापन मिले, अपने वे ही होते हैं फिर चाहे वे अलग परिवार, जाति, धर्म के ही क्यों न हों’ - ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
यह कथन पूर्णतः सत्य है क्योंकि मानवीय रिश्ते भौगोलिक या धार्मिक सीमाओं के मोहताज नहीं होते । 'टोपी शुक्ला' पाठ में टोपी का अपने कट्टर ब्राह्मण परिवार से उतना लगाव नहीं था जितना अपने मुस्लिम मित्र इफ़्फ़न और उसकी दादी से था । इफ़्फ़न की दादी का निस्वार्थ स्नेह टोपी के लिए उसकी अपनी दादी के प्रेम से कहीं अधिक गहरा और शीतल था ।
रिश्ते खून के संबंधों से नहीं बल्कि 'संवेदनाओं' के जुड़ाव से बनते हैं । टोपी को इफ़्फ़न के घर में जो मानसिक शांति और सुरक्षा का अनुभव होता था, वही उसके लिए उसका वास्तविक घर बन गया था । धर्म और जाति की दीवारें मानवीय प्रेम के आगे सदैव तुच्छ साबित होती हैं । जो हमें समझे और स्वीकार करे, वही सच्चा 'अपना' है । Quick Tip: 'अपनापन' हृदय का विषय है, यह जाति या धर्म के प्रमाणपत्रों से निर्धारित नहीं होता ।
‘सपनों के-से दिन’ पाठ में लेखक और उन जैसे परिवारों की अपने बच्चों को पढ़वाने में अरुचि के क्या कारण रहे होंगे ? क्या वर्तमान में भी बच्चों की पढ़ाई को लेकर समान दृष्टिकोण है ? अपने विचार के पक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए ।
लेखक के समय में अधिकांश परिवार निम्न या मध्यम वर्ग के थे जहाँ शिक्षा को केवल 'समय की बर्बादी' माना जाता था । लोगों का मानना था कि बच्चा यदि जल्दी दुकान पर बैठेगा या कोई हुनर सीखेगा, तो वह परिवार की आय में सहायक बनेगा । शिक्षा के भविष्योन्मुखी लाभों के प्रति जागरूकता का सर्वथा अभाव था ।
परन्तु वर्तमान में यह दृष्टिकोण आमूलचूल बदल चुका है । आज शिक्षा को सफलता की पहली सीढ़ी और उज्ज्वल भविष्य की अनिवार्य शर्त माना जाता है । यहाँ तक कि अत्यंत निर्धन परिवार भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार रहते हैं ।
तर्क : वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में बिना डिग्री और ज्ञान के सम्मानजनक जीवन जीना असंभव है, इसलिए आज शिक्षा को एक 'निवेश' के रूप में देखा जाता है । Quick Tip: सामाजिक परिवर्तन के प्रश्नों में 'अज्ञानता' बनाम 'जागरूकता' के बिंदुओं को प्रभावशाली ढंग से लिखें ।
ठाकुरबारी में महंत जी की नियुक्ति अस्थायी थी फिर भी उन्होंने हरिहर काका की ज़मीन को ठाकुर जी के नाम करवाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए । उनके द्वारा किए जाने वाले इन कृत्यों के पीछे के संभावित कारणों का उल्लेख कीजिए ।
महंत जी के इन अनैतिक कृत्यों के पीछे मुख्य कारण 'सत्ता' और 'संपत्ति' का अंधा लालच था । यद्यपि उनकी नियुक्ति अस्थायी थी, परन्तु ठाकुरबारी की विशाल ज़मीन और धन पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति समाज में अत्यंत शक्तिशाली और धनी माना जाता था ।
संभावित कारण :
1. **संपत्ति का मोह:** हरिहर काका की 15 बीघे मूल्यवान ज़मीन को वे ठाकुरबारी (अर्थात् स्वयं के प्रभुत्व) में मिलाना चाहते थे ।
2. **वर्चस्व की रक्षा:** अधिक ज़मीन का अर्थ था ठाकुरबारी का बढ़ता प्रभाव और महंत की विलासी जीवनशैली की निरंतरता ।
3. **धार्मिक आडंबर:** धर्म की आड़ में वे अपने अपराधों को छिपाना चाहते थे ताकि वे समाज में सम्मानित भी बने रहें और धनी भी ।
अतः, महंत के लिए धर्म केवल एक मुखौटा था, उनका वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक लाभ और अधिकार प्राप्ति था । Quick Tip: जब व्यक्ति 'स्वार्थ' को 'धर्म' के ऊपर रखता है, तब वह अपनी आत्मा और नैतिकता का पतन कर बैठता है ।
आप उत्कर्ष/प्रगति हैं । वर्तमान में तेज़ी से बदलते परिप्रेक्ष्य में किशोरों को आजीविका (करियर) संबंधी मार्गदर्शन की नितांत आवश्यकता है । इस विषय पर आधारित श्रृंखला शुरू किए जाने का निवेदन करते हुए दूरदर्शन निदेशालय को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए ।
To : director.dd@nic.in
Subject : किशोरों हेतु करियर मार्गदर्शन श्रृंखला शुरू करने के संबंध में ।
आदरणीय महानिदेशक महोदय,
सादर प्रणाम ।
मैं उत्कर्ष, आपका ध्यान किशोरों की एक ज्वलंत समस्या 'करियर के चुनाव' की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ । वर्तमान में तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में छात्र नए करियर विकल्पों को लेकर अत्यधिक उलझन में हैं । मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि दूरदर्शन पर 'आजीविका मार्गदर्शन' नामक एक साप्ताहिक श्रृंखला शुरू की जाए, जिसमें विशेषज्ञ विभिन्न आधुनिक क्षेत्रों की जानकारी दें ।
आशा है कि दूरदर्शन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा ।
धन्यवाद,
उत्कर्ष
मोबाइल : 98XXXXXXXX Quick Tip: ई-मेल में विषय (Subject) को इतना प्रभावी रखें कि वह प्राप्तकर्ता को ई-मेल खोलने के लिए विवश कर दे ।
‘जाड़े की शाम थी । आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था । मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था ।’ - पंक्ति को आधार बनाकर लगभग 100 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए ।
अदृश्य देवदूत
जाड़े की शाम थी । आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था । मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था । हाथ-पैर ठंड से काँप रहे थे और कुछ फुट की दूरी पर भी देखना मुश्किल था । अचानक मुझे सड़क किनारे किसी के कराहने की आवाज़ सुनाई दी । मैंने रुककर देखा तो एक वृद्ध व्यक्ति कोहरे के कारण अपनी साइकिल से गिरकर घायल हो गए थे । मैंने तुरंत अपने मोबाइल से प्राथमिक चिकित्सा के लिए संपर्क किया और उन्हें सहारा देकर पास की दुकान तक ले गया । कोहरे की उस डरावनी शांति में वह मदद एक अनमोल अहसास दे गई । जब उनके बेटे वहां पहुंचे और मेरी पीठ थपथपाई, तो कोहरे की वह कड़वाहट एक मीठी मुस्कान में बदल गई । उस शाम मैंने सीखा कि घना कोहरा भी परोपकार की राह नहीं रोक सकता । Quick Tip: लघुकथा लिखते समय एक छोटा और प्रभावशाली शीर्षक (Title) अवश्य दें, जो कथा के मूल भाव को स्पष्ट करे ।
परिश्रम सफलता की कुंजी है
संकेत बिंदु : • सूक्ति का अर्थ • विद्यार्थी जीवन में महत्त्व • वर्तमान में इसकी आवश्यकता क्यों
परिश्रम सफलता की कुंजी है
‘परिश्रम सफलता की कुंजी है’ यह सूक्ति का अर्थ स्पष्ट करती है कि बिना मेहनत के इस संसार में कुछ भी प्राप्त करना असंभव है । परिश्रम वह शक्ति है जो भाग्य की सोई हुई रेखाओं को भी बदल सकती है । विद्यार्थी जीवन में इसका महत्त्व सर्वाधिक है । एक विद्यार्थी अपनी मेधा के बल पर नहीं, बल्कि अपनी निरंतर मेहनत के बल पर ही उच्च लक्ष्य प्राप्त कर सकता है । आलस्य विद्यार्थी का सबसे बड़ा शत्रु है । वर्तमान में इसकी आवश्यकता क्यों है, इसे समझना बहुत आसान है । आज के दौर में कड़ी प्रतिस्पर्धा (Competition) है । केवल प्रतिभावान होना काफी नहीं है, बल्कि निरंतर कठिन परिश्रम ही व्यक्ति को भीड़ से अलग खड़ा करता है । इतिहास गवाह है कि जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं, उनके पीछे उनके अनथक परिश्रम की कहानी छिपी है । अतः हमें फल की चिंता किए बिना कर्मठता को अपनाना चाहिए । Quick Tip: अनुच्छेद लेखन में उदाहरणों (जैसे चींटी का उदाहरण) का प्रयोग उत्तर की गुणवत्ता और शब्द सीमा को संतुलित रखता है ।
भीड़ भरे बाज़ार का दृश्य
संकेत बिंदु : • चारों तरफ लोगों की गरमागर्मी • दुकानदारों की आवाज • खरीद-फरोख्त करते लोग
भीड़ भरे बाज़ार का दृश्य
त्योहारों के समय बाज़ार का दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं होता । चारों तरफ लोगों की गरमागर्मी देखते ही बनती है । संकरी गलियों में पैदल चलना भी दूभर हो जाता है, परन्तु लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आती । हर ओर दुकानदारों की आवाज गूँजती रहती है, जो चिल्ला-चिल्लाकर अपने सामान की खूबियां बताते हुए ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास करते हैं । बाज़ार में खरीद-फरोख्त करते लोग रंग-बिरंगे परिधानों, मिठाइयों और सजावटी सामानों के बीच खोए रहते हैं । कहीं मोल-भाव की आवाज़ें आती हैं, तो कहीं बच्चों की ज़िद । यह भीड़ केवल व्यापार का प्रतीक नहीं है, बल्कि मानवीय मेल-जोल और जीवंतता का भी केंद्र है । हर चेहरा किसी न किसी योजना में व्यस्त दिखता है, जो बाज़ार को एक अनोखी ऊर्जा प्रदान करता है । Quick Tip: दृश्य वर्णन वाले अनुच्छेदों में विशेषणों और क्रिया-विशेषणों का प्रयोग इसे और अधिक सजीव बनाता है ।
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा
संकेत बिंदु : • भुगतान करने का नया तरीका • देश की अर्थव्यवस्था में सहायक • सावधानी अपेक्षित
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा
आज के डिजिटल युग में भुगतान करने का नया तरीका 'ऑनलाइन भुगतान' हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन गया है । मोबाइल एप्स और क्यूआर कोड के माध्यम से अब हम घर बैठे ही बिजली का बिल, राशन और अन्य सेवाओं का भुगतान क्षण भर में कर सकते हैं । यह पद्धति देश की अर्थव्यवस्था में सहायक है क्योंकि इससे पारदर्शिता बढ़ी है और नकद लेनदेन पर निर्भरता कम हुई है । यह 'कैशलेस इकोनॉमी' की दिशा में एक बड़ा कदम है । हालाँकि, इस सुविधा के साथ सावधानी भी अपेक्षित है । डिजिटल जालसाज़ी और साइबर ठगी से बचने के लिए हमें अपने पिन और ओटीपी को गुप्त रखना चाहिए । सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का प्रयोग और अनजान लिंक पर क्लिक न करना ही हमें इस आधुनिक सुविधा का सुरक्षित आनंद दे सकता है । Quick Tip: तकनीकी विषयों पर अनुच्छेद लिखते समय लाभ (Benefits) और जोखिम (Risks) दोनों का संतुलित वर्णन करना चाहिए ।
आप दसवीं कक्षा के विद्यार्थी शोभा/शोभित हैं । विद्यालय में योग की कक्षाओं की नियमित व्यवस्था हेतु प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखिए ।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
अ.ब.स. विद्यालय,
नई दिल्ली ।
दिनांक : 15 मार्च, 2024
विषय : योग की नियमित कक्षाओं की व्यवस्था हेतु प्रार्थना-पत्र ।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की दसवीं कक्षा का छात्र शोभित हूँ । आज के तनावपूर्ण शैक्षिक माहौल में जहाँ विद्यार्थियों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना अनिवार्य है, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि हमारे विद्यालय की समय-सारिणी में योग की नियमित कक्षाओं के लिए स्थान दिया जाए ।
योग न केवल छात्रों की एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि यह अनुशासन और सर्वांगीण विकास में भी सहायक है । विद्यालय परिसर में एक अनुभवी योग शिक्षक के मार्गदर्शन में योग अभ्यास होने से सभी विद्यार्थी लाभान्वित होंगे ।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की कृपा करें ।
सधन्यवाद,
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
शोभित
कक्षा - दसवीं 'अ' Quick Tip: औपचारिक पत्रों में विषय (Subject) को रेखांकित करना और भाषा में विनम्रता (सविनय, महोदय) रखना अनिवार्य है ।
आप शोभा/शोभित हैं । अपने क्षेत्र में पेयजल के बढ़ते संकट की ओर ध्यान दिलाने के लिए किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए ।
सेवा में,
संपादक महोदय,
दैनिक भास्कर,
रोहिणी, दिल्ली ।
दिनांक : 15 मार्च, 2024
विषय : क्षेत्र में पेयजल के बढ़ते संकट के संबंध में ।
महोदय,
मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से जल विभाग के अधिकारियों और प्रशासन का ध्यान हमारे क्षेत्र 'रोहिणी' में बढ़ते पेयजल संकट की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ ।
पिछले कई सप्ताहों से हमारे क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति अनियमित हो गई है । जो पानी आता भी है, वह गंदा और दुर्गंधयुक्त होता है । इससे क्षेत्र में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है । निवासी निजी टैंकरों पर निर्भर होने के लिए विवश हैं ।
मेरा अनुरोध है कि आप अपने समाचार-पत्र में इस जन-समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित करें ताकि सोए हुए अधिकारी जागें और समस्या का स्थायी समाधान हो सके ।
सधन्यवाद,
भवदीय,
शोभित Quick Tip: संपादकीय पत्र में हमेशा यह वाक्य जोड़ें: "आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से मैं प्रशासन का ध्यान..." ।
‘स्वदेशी अपनाओ, आत्मनिर्भर बनो’ - स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के प्रति जन-जागरूकता के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए ।
Quick Tip: विज्ञापन में चित्रों के स्थान पर आकर्षक प्रतीकों (जैसे तिरंगा) का प्रयोग उसे जीवंत और विश्वसनीय बना देता है ।
मिट्टी के बर्तन बनाने वाली कंपनी ‘विरासत’ की ओर से अपने उत्पादों की जानकारी देने तथा बिक्री बढ़ाने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए ।
Quick Tip: व्यावसायिक विज्ञापनों में 'छूट' (Discount) और 'धमाका सेल' जैसे शब्दों का प्रयोग ग्राहकों को अधिक आकर्षित करता है ।
Question 16(i):
आप स्वयंसेवी संस्था ‘रोशनी’ की/के अध्यक्ष प्रणीति/प्रणीष हैं । ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ के अवसर पर मादक द्रव्यों से होने वाले नुकसान के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए संस्था द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है । जन साधारण को इस बात की जानकारी देने के लिए एक सूचना तैयार कीजिए ।
Quick Tip: सूचना में \(5W\) (क्या, कब, कहाँ, किसके द्वारा, क्यों) का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त होना चाहिए ।
आप अ.ब.स. विद्यालय के वरिष्ठ विज्ञान अध्यापिका/अध्यापक प्रणीति/प्रणीष हैं । आपके विद्यालय में ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर विज्ञान मेले का आयोजन होने वाला है । इस बारे में सभी विद्यार्थियों को जानकारी देने के लिए एक सूचना तैयार कीजिए ।
Quick Tip: विद्यालयी सूचनाओं में नाम देने की 'अंतिम तिथि' का उल्लेख करना अनिवार्य होता है ताकि व्यवस्था सुचारू रहे ।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.