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Nidhi Bamnawat

| Updated On - Sep 13, 2025

The CBSE 2025 Class 10 Hindi exam was held on 28th Feb, from 10:30 AM to 1:30 PM. The CBSE Class 10 Hindi Question Paper 2025 is available here with Solution PDF. The Hindi theory paper is of 80 marks, while 20 marks are allocated for the internal assessment. 

CBSE Class 10 Hindi Question Paper Set-1 3/6/1 with Solutions

CBSE Class 10 Hindi Question Paper Download PDF Check Solution

Question 1:

(i) उबयुक्त गद्यांश में लेखक की चिंता का विषय क्या है?

विकल्प:

  • (A) पिघलते हिमनद
  • (B) घटते वन प्रदेश
  • (C) प्रदूषित होती नदियाँ
  • (D) बढ़ता जल संकट
Correct Answer:
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N/A


Question 2:

(ii) गुरु को ब्रह्मा क्यों कहा गया है ?

  • (A) छात्रों के हित के भीतर छिपी कल्याण-भावना के कारण
  • (B) समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण
  • (C) छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण
  • (D) रोजगार हेतु विद्यार्थियों में कौशल विकास करने के कारण
Correct Answer: (B) \text{समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण}
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N/A


Question 3:

(iii) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए :

कथन : मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का दायित्व है।

कारण : हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही है तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (C) \text{कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।}
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कथन बिल्कुल सही है कि मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का एक महत्वपूर्ण दायित्व है। गद्यांश में भी शिक्षकों की भूमिका को नई सोच और दूरदृष्टि प्रदान करने वाला बताया गया है।

कारण भी सही है कि हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है।

हालांकि, कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है। गुरु की महानता का कारण भारतीय परंपरा में उनका उच्च स्थान है, न कि विशेष रूप से मानव जाति के लिए नई सोच विकसित करने का दायित्व। जबकि यह दायित्व भी महत्वपूर्ण है, कारण सीधे तौर पर कथन को स्पष्ट नहीं करता।


Question 4:

(iv) शिक्षक को पथ-प्रदर्शक क्यों कहा जाता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer: शिक्षक को पथ-प्रदर्शक इसलिए कहा जाता है क्योंकि: (i) वे छात्रों को सही दिशा दिखाते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। (ii) वे अपने ज्ञान और अनुभव से छात्रों को समस्याओं को हल करने और सही निर्णय लेने में सहायता करते हैं।
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गद्यांश में शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि वे छात्रों को जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का ज्ञान प्रदान करते हैं।

एक पथ-प्रदर्शक भी यही कार्य करता है - वह यात्रियों को सही रास्ते पर ले जाता है और उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचने में मदद करता है।

शिक्षक अपने छात्रों को ज्ञान की रोशनी दिखाते हैं, उन्हें सही और गलत के बीच का अंतर समझाते हैं, और उन्हें एक सफल और नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।

इसलिए, अपने छात्रों को दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करने के कारण ही शिक्षक को पथ-प्रदर्शक कहा जाता है।


Question 5:

(v) कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से क्यों की है ? किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से निम्नलिखित दो कारणों से की है: (i) कुम्हार जिस प्रकार मिट्टी के बर्तन को आकार देता है, उसी प्रकार गुरु अपने शिष्यों को ज्ञान और मार्गदर्शन से बेहतर इंसान बनाते हैं। (ii) कुम्हार बर्तन के अंदर और बाहर दोनों तरफ से सहारा देकर उसे मजबूत बनाता है, उसी प्रकार गुरु भी अपने शिष्यों को आंतरिक और बाहरी रूप से विकसित करते हैं।
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यद्यपि यह प्रश्न गद्यांश पर आधारित नहीं है, कबीरदास जी ने अपनी वाणी में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए उनकी तुलना कुम्हार से की है।

कुम्हार मिट्टी को रौंदकर और उसे आकार देकर उपयोगी बर्तन बनाता है। इसी प्रकार, गुरु अपने शिष्यों के भीतर छिपी कमियों को दूर करते हैं और उन्हें ज्ञान, नैतिकता और अच्छे गुणों से परिपूर्ण करते हैं।

कुम्हार बर्तन को बनाते समय बाहर से थपथपाता है और अंदर से सहारा देता है, जिससे बर्तन मजबूत बनता है। इसी तरह, गुरु भी अपने शिष्यों को आवश्यकतानुसार प्यार और अनुशासन से शिक्षित करते हैं, जिससे उनका चरित्र मजबूत होता है।


Question 6:

(i) कवि पूर्व निर्धारित मार्ग का अनुसरण क्यों नहीं करना चाहता है ?

  • (A) वह किसी और का अनुचर बनकर रहना चाहता है।
  • (B) किसी और के द्वारा निर्धारित मार्ग उसे अच्छा नहीं लगता है।
  • (C) कवि आत्मविश्वास से भरा है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।
  • (D) कवि अन्य द्वारा निर्मित मार्ग पर चलना उसे अनुचित लगता है।
Correct Answer: (C) \text{कवि आत्मविश्वास से भरा है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।}
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कविता की पंक्तियों में कवि अपनी स्वतंत्र इच्छा और आत्मविश्वास को व्यक्त करता है।

वह "अपनी मंजिल" की ओर अपने "दृढ़ चरण"ों से बढ़ना चाहता है, न कि किसी "निर्धारित पंथ" पर चलकर।

यह आत्मविश्वास और स्वयं के मार्ग का निर्माण करने की इच्छा दर्शाती है कि कवि पूर्व निर्धारित मार्ग का अनुसरण नहीं करना चाहता।


Question 7:

(ii) किस तरह के लोग दूसरों के सहारे जीवन जीते हैं ?

  • (A) जो आज्ञाकारी प्रवृत्ति के होते हैं।
  • (B) जो अक्षम और निराश होते हैं।
  • (C) जो जल्दी सफल होना चाहते हैं।
  • (D) जिनके सपने बहुत बड़े होते हैं।
Correct Answer: (B) \text{जो अक्षम और निराश होते हैं।}
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N/A


Question 8:

(iii) बादलों की तुलना किससे की गई है ?

  • (A) अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से
  • (B) दूसरों की धुन पर थिरकती गायक मंडली से
  • (C) अपनी ही धुन में मग्न नर्तक मंडली से
  • (D) तीव्र गति से नृत्य करती नर्तक मंडली से
Correct Answer: (A) \text{अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से}
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कविता में बादलों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि वे "अपनी ही धुन" पर "गरजते-मंडराते" हैं और "गायक-मंडली-से थिरकते" हैं।

यह बादलों की स्वतंत्र और स्वाभाविक गति को दर्शाता है, जो किसी बाहरी नियंत्रण या प्रेरणा के बिना अपनी लय में चलते हैं।


Question 9:

(iv) “हमें तो जो हमारी यात्रा से बने ऐसे अनिश्चित पंथ प्यारे हैं।” – का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: इस पंक्ति का आशय यह है कि कवि को वे रास्ते प्रिय हैं जो उसकी अपनी यात्रा और अनुभवों से निर्मित होते हैं।
उसे वे अनिश्चित मार्ग पसंद हैं जिन पर चलते हुए वह स्वयं अपनी राह बनाता है, बजाय किसी और के द्वारा बनाए गए निश्चित रास्तों पर चलने के।
यह पंक्ति आत्मनिर्भरता, स्वतंत्रता और स्वयं के अनुभवों के महत्व को दर्शाती है।
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कवि इस पंक्ति के माध्यम से यह व्यक्त करना चाहता है कि उसे पूर्व निर्धारित और दूसरों द्वारा बनाए गए रास्ते पसंद नहीं हैं।

वह अपनी जीवन यात्रा में स्वयं अपने अनुभव और निर्णयों से जो मार्ग बनाता है, वही उसके लिए प्रिय है।

"अनिश्चित पंथ" इस बात का प्रतीक है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कोई निश्चित या तयशुदा रास्ता नहीं होता। हर व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुसार अपना मार्ग स्वयं बनाना होता है।

कवि इसी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को महत्व देता है।


Question 10:

(v) प्रकृति के विविध घटक कवि को क्या प्रेरणा देते हैं ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer: प्रकृति के विविध घटक कवि को निम्नलिखित दो प्रकार से प्रेरणा देते हैं: (i) \textbf{स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा:} जैसे बादल अपनी धुन पर चलते हैं, उसी प्रकार कवि भी अपनी राह स्वयं बनाने और स्वतंत्र रहने की प्रेरणा लेता है। (ii) \textbf{निरंतर गतिमान रहने की प्रेरणा:} जैसे नदियाँ निरंतर बहती रहती हैं, उसी प्रकार कवि भी जीवन में आगे बढ़ते रहने और कभी हार न मानने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
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कविता में प्रकृति के कई घटकों का उल्लेख किया गया है, जो कवि को विभिन्न प्रकार से प्रेरित करते हैं।

बादल अपनी स्वतंत्र गति और गर्जन से कवि को आत्मनिर्भरता और अपनी इच्छाशक्ति के अनुसार चलने की प्रेरणा देते हैं।

नदियाँ जो निरंतर बहती रहती हैं और अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं को पार करती हैं, कवि को जीवन में लगातार आगे बढ़ने और कभी भी रुकने या हार मानने की प्रेरणा देती हैं।

इसके अतिरिक्त, पेड़ जो हर मौसम में स्थिर खड़े रहते हैं, कवि को स्थिरता और अडिग रहने की प्रेरणा दे सकते हैं। हवा की स्वच्छंदता कवि को बंधनमुक्त होकर जीने की प्रेरणा दे सकती है।


Question 11:

प्रश्न 3.

निर्देशानुसार 'रचना के आधार पर वाक्य-भेद' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए :




(i) काशी में कलाधर-हनुमान हैं और नृत्य-विश्वनाथ हैं । (सरल वाक्य में बदलिए)

Correct Answer: काशी में कलाधर-हनुमान और नृत्य-विश्वनाथ हैं।
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सरल वाक्य में एक ही मुख्य क्रिया होती है। दिए गए वाक्य में दो मुख्य क्रियाएँ हैं - 'हैं'।

इसे सरल वाक्य में बदलने के लिए दोनों संज्ञाओं को 'और' समुच्चयबोधक से जोड़ा गया है और क्रिया एक ही रखी गई है।


Question 12:

(ii) शहनाई की जादुई आवाज का असर हमारे सिर चढ़कर बोलने लगता है । (मिश्र वाक्य में बदलिए)

Correct Answer: जब शहनाई की जादुई आवाज बजती है, तब उसका असर हमारे सिर चढ़कर बोलने लगता है।
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मिश्र वाक्य बनाने के लिए एक प्रधान उपवाक्य ('उसका असर हमारे सिर चढ़कर बोलने लगता है') और एक आश्रित उपवाक्य ('जब शहनाई की जादुई आवाज बजती है') को योजक 'जब...तब' से जोड़ा गया है। आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर समय के अर्थ में आश्रित है।


Question 13:

(iii) यदि कल्याण की भावना से नाता टूट जाए तो वह संस्कृति नहीं रह जाएगी । (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद का नाम लिखिए)

Correct Answer: मिश्र वाक्य
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दिए गए वाक्य में 'यदि...तो' योजक का प्रयोग हुआ है, जो एक आश्रित उपवाक्य ('यदि कल्याण की भावना से नाता टूट जाए') को प्रधान उपवाक्य ('तो वह संस्कृति नहीं रह जाएगी') से जोड़ रहा है। इसलिए, रचना की दृष्टि से यह मिश्र वाक्य है।


Question 14:

(iv) जो बातें वाला रहा है, वे पिताजी के मित्र हैं । (आश्रित उपवाक्य छाँटकर उसका भेद भी लिखिए)

Correct Answer: आश्रित उपवाक्य: जो बातें वाला रहा है भेद: संज्ञा उपवाक्य
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दिए गए वाक्य में 'वे पिताजी के मित्र हैं' प्रधान उपवाक्य है।

आश्रित उपवाक्य 'जो बातें वाला रहा है' संज्ञा का कार्य कर रहा है, क्योंकि यह प्रधान उपवाक्य की क्रिया 'हैं' का कर्ता बन रहा है।

इसलिए, यह संज्ञा आश्रित उपवाक्य है।


Question 15:

(v) खतरनाक रास्ते होने के कारण हम मौन हो गए । (संयुक्त वाक्य में बदलिए)

Correct Answer: खतरनाक रास्ते थे और इसलिए हम मौन हो गए।
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संयुक्त वाक्य बनाने के लिए दो स्वतंत्र सरल वाक्यों ('खतरनाक रास्ते थे' और 'हम मौन हो गए') को एक समुच्चयबोधक अव्यय ('और इसलिए') से जोड़ा गया है। दोनों वाक्य अपना स्वतंत्र अर्थ रखते हैं।


Question 16:

(i) पंत ने प्रकृतिपरक कविताएँ लिखी हैं । (कर्मवाच्य में बदलिए)

Correct Answer: पंत द्वारा प्रकृतिपरक कविताएँ लिखी गईं हैं।
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कर्मवाच्य में कर्ता की प्रधानता समाप्त हो जाती है और कर्म मुख्य हो जाता है।

क्रिया कर्म के लिंग, वचन और काल के अनुसार बदल जाती है।

यहाँ, 'पंत' कर्ता हैं और 'प्रकृतिपरक कविताएँ' कर्म। कर्मवाच्य में 'पंत द्वारा' किया गया है और क्रिया 'लिखी गईं हैं' कर्म के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन में बदल गई है।


Question 17:

(ii) मुझसे हँसा नहीं जाता । (वाच्य पहचानकर भेद का नाम लिखिए)

Correct Answer: भाववाच्य
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इस वाक्य में कर्ता ('मुझसे') और कर्म अनुपस्थित हैं, और क्रिया ('हँसा नहीं जाता') भाव या अवस्था को व्यक्त कर रही है।

भाववाच्य में कर्ता या कर्म की प्रधानता नहीं होती, बल्कि क्रिया का भाव मुख्य होता है।

इस प्रकार के वाक्यों में असमर्थता या भाव व्यक्त किया जाता है।


Question 18:

(iii) उनके द्वारा मुझे सच्चाई का अहसास कराया गया । (कर्तृवाच्य में बदलिए)

Correct Answer: उन्होंने मुझे सच्चाई का अहसास कराया।
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कर्तृवाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन और काल के अनुसार बदलती है।

दिए गए वाक्य में 'उनके द्वारा' कर्ता है और 'मुझे सच्चाई का अहसास कराया गया' क्रिया।

कर्तृवाच्य में बदलने पर 'उनके द्वारा' 'उन्होंने' हो गया और क्रिया 'अहसास कराया गया' कर्ता 'उन्होंने' के अनुसार पुल्लिंग एकवचन में बदल गई।


Question 19:

(iv) वह उन आटे की गोलियों को लेकर गंगा जी की ओर चल पड़ते । (वाच्य पहचानकर वाच्य-भेद का नाम लिखिए)

Correct Answer: कर्तृवाच्य
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इस वाक्य में कर्ता ('वह') प्रधान है और क्रिया ('चल पड़ते') कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार है।

कर्ता द्वारा क्रिया सीधे की जा रही है और कोई कर्म ('गंगा जी की ओर') गौण रूप से उपस्थित है।

इसलिए, यह कर्तृवाच्य है।


Question 20:

(v) किस वाच्य में क्रिया सदैव सकर्मक होती है ?

Correct Answer: कर्मवाच्य में क्रिया सदैव सकर्मक होती है।
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कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है, और क्रिया कर्म के अनुसार बदलती है।

सकर्मक क्रिया वह होती है जिसका कोई कर्म होता है।

इसलिए, कर्मवाच्य में क्रिया का सकर्मक होना आवश्यक है क्योंकि क्रिया का प्रभाव कर्म पर पड़ता है।


Question 21:

(i) काशी में हजारों मालों का इतिहास है ।

Correct Answer: इतिहास: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन।
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'इतिहास' शब्द किसी विशेष इतिहास का बोध न कराकर एक सामान्य इतिहास की बात कर रहा है, इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा है।

यह पुल्लिंग शब्द है और एकवचन में प्रयुक्त हुआ है।


Question 22:

(ii) भवभूति संस्कृत साहित्य के प्रधान नाटककार हैं ।

Correct Answer: प्रधान: गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, 'नाटककार' विशेष्य का विशेषण।
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'प्रधान' शब्द 'नाटककार' संज्ञा की विशेषता बता रहा है, जो कि गुण संबंधी विशेषता है, अतः यह गुणवाचक विशेषण है।

यह 'नाटककार' के लिंग और वचन (पुल्लिंग, एकवचन) के अनुसार है।


Question 23:

(iii) हम लोग रोते-बिलखते भाग चले ।

Correct Answer: रोते-बिलखते: रीतिवाचक क्रियाविशेषण, 'भाग चले' क्रिया की विशेषता।
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'रोते-बिलखते' शब्द 'भाग चले' क्रिया के होने के ढंग या रीति को बता रहा है, इसलिए यह रीतिवाचक क्रियाविशेषण है।


Question 24:

(iv) चिंतकों ने समाज में लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक चेतना का विकास किया ।

Correct Answer: वैज्ञानिक: गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, 'चेतना' विशेष्य का विशेषण।
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'वैज्ञानिक' शब्द 'चेतना' संज्ञा की विशेषता बता रहा है, जो कि उसके गुण से संबंधित है, अतः यह गुणवाचक विशेषण है।

यह 'चेतना' के लिंग (स्त्रीलिंग) के अनुसार परिवर्तित नहीं हुआ है क्योंकि यह विशेषण उभयलिंगी है, लेकिन यहाँ यह चेतना के गुण को बताता है, जो पुल्लिंग (विकास) के संदर्भ में है। इसे 'चेतना' के अनुसार स्त्रीलिंग होना चाहिए।

**सुधार:** 'वैज्ञानिक' शब्द 'चेतना' की विशेषता बता रहा है। 'चेतना' स्त्रीलिंग है। अतः, यह गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'चेतना' विशेष्य का विशेषण होगा।

**अद्यतित सही उत्तर:**
वैज्ञानिक: गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन, 'चेतना' विशेष्य का विशेषण।



% Solution
Solution:
'वैज्ञानिक' शब्द 'चेतना' संज्ञा की विशेषता बता रहा है।

'चेतना' एक स्त्रीलिंग शब्द है और एकवचन में है।

इसलिए, 'वैज्ञानिक' यहाँ गुणवाचक विशेषण के रूप में स्त्रीलिंग, एकवचन, 'चेतना' विशेष्य का विशेषण है।


Question 25:

(v) उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार अपने पूरे जीवन भर खूब किया ।

Correct Answer: उन्होंने: पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष), पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, 'प्रचार किया' क्रिया का कर्ता।
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'उन्होंने' शब्द बोलने वाले और सुनने वाले के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हुआ है, इसलिए यह पुरुषवाचक सर्वनाम का 'अन्य पुरुष' भेद है।

यह कर्ता के रूप में प्रयुक्त हुआ है (प्रचार करने वाला), इसलिए कर्ता कारक है।

यह एक से अधिक व्यक्ति के लिए प्रयुक्त हो सकता है, लेकिन यहाँ यह किसी एक आदरणीय व्यक्ति के लिए बहुवचन के रूप में प्रयुक्त हुआ है (जैसे गांधीजी ने, बुद्ध ने), इसलिए बहुवचन है।

यह 'प्रचार किया' क्रिया का कर्ता है।


Question 26:

(i) अभिमन्यु-धन के निधन से कारण हुआ जो मूल

इससे हमारे हत हृदय को, हो रहा जो शूल है।

Correct Answer: उत्प्रेक्षा अलंकार
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इन पंक्तियों में अभिमन्यु के निधन से हुए दुःख को 'मूल' (जड़) के कारण हृदय में 'शूल' (काँटा) होने की संभावना व्यक्त की गई है।

'हो रहा जो शूल है' में 'जो' का प्रयोग संभावना को व्यक्त कर रहा है, जिसके कारण यह उत्प्रेक्षा अलंकार है।

उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय में उपमान की संभावना व्यक्त की जाती है, और यहाँ दुःख के कारण हृदय में शूल की संभावना है।


Question 27:

(ii) अंग-अंग नग जगमगत दीप-सिखा सी देह।

Correct Answer: उपमा अलंकार
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इस पंक्ति में देह ('देह') की तुलना 'दीप-सिखा' (दीपक की लौ) से की गई है, क्योंकि देह पर नग जगमगा रहे हैं जैसे दीपक की लौ जगमगाती है।

'सी' (समान) वाचक शब्द का प्रयोग उपमेय और उपमान के बीच समानता दर्शाने के लिए किया गया है।

अतः, यहाँ उपमा अलंकार है।


Question 28:

(iii) उदाहरण द्वारा अतिशयोक्ति अलंकार स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: अतिशयोक्ति अलंकार वह अलंकार है जहाँ किसी बात का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि लोक-मर्यादा या सामान्य तर्क की सीमा का उल्लंघन हो जाए। \textbf{उदाहरण:} हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग।
सिगरी लंका जरि गई, गए निसाचर भाग।।
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इस उदाहरण में हनुमान की पूँछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका का जल जाना और सभी राक्षसों का भाग जाना बताया गया है, जो कि अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है और असंभव प्रतीत होती है।

यह कथन सामान्य बुद्धि से परे है और किसी बात को बहुत अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए किया गया है, इसलिए यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।


Question 29:

(iv) मगर उनकी लाई चिड़ियाँ

पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ बाँचते हैं।

Correct Answer: मानवीकरण अलंकार
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इन पंक्तियों में 'पेड़-पौधे, पानी और पहाड़' जैसे निर्जीव और अमानवीय तत्वों को 'बाँचते हैं' (पढ़ते हैं) जैसी मानवीय क्रिया करते हुए दिखाया गया है।

जब किसी निर्जीव वस्तु या अमूर्त भाव पर मानवीय चेतना और क्रियाओं का आरोप किया जाता है, तब वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।


Question 30:

(v) सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।

मनहु नीले मणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।।

Correct Answer: उत्प्रेक्षा अलंकार
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इन पंक्तियों में श्रीकृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो नीलमणि पर्वत पर प्रातःकाल की धूप पड़ रही हो।

यहाँ 'मनहु' (मानो) वाचक शब्द का प्रयोग हुआ है, जो उपमेय (श्रीकृष्ण का साँवला शरीर और पीले वस्त्र) में उपमान (नीलमणि पर्वत पर प्रातःकाल की धूप) की संभावना व्यक्त कर रहा है।

यह उत्प्रेक्षा अलंकार का स्पष्ट उदाहरण है।


Question 31:

(i) हालदार साहब किस बात पर आश्चर्यचकित रह गए ?

  • (A) पानवाले द्वारा कैप्टन का मजाक उड़ाने पर
  • (B) कैप्टन की शारीरिक अवस्था को देखकर
  • (C) कैप्टन को चश्मा बेचते हुए देखकर
  • (D) ड्राइवर को बेचैन होते देखकर
Correct Answer: (B) \text{कैप्टन की शारीरिक अवस्था को देखकर}
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गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा है कि "हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मजाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा।" इसके बाद, जब उन्होंने मुड़कर कैप्टन को देखा, तो वे "अवाक् रह गए।"

उनका अवाक् रह जाना कैप्टन की शारीरिक अवस्था को देखकर था: "एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी सिर पर गांधी टोपी और आँखों पर काला चश्मा लगाए..."।

यह कैप्टन की दयनीय शारीरिक स्थिति थी जिसने हालदार साहब को आश्चर्यचकित कर दिया।


Question 32:

(ii) दिव्यांग होते हुए भी कैप्टन द्वारा फेरी लगाकर अपना गुजर-बसर करना दर्शाता है कि वह \hspace{2cm} था। (रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए)

  • (A) आत्मविश्वासी
  • (B) स्वाभिमानी
  • (C) सक्षम
  • (D) निराश
Correct Answer: (B) \text{स्वाभिमानी}
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कैप्टन शारीरिक रूप से अक्षम (लँगड़ा) होते हुए भी दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं फेरी लगाकर अपना जीवन यापन करता है।

यह क्रिया उसकी स्वाभिमानी प्रवृत्ति को दर्शाती है कि वह अपनी जीविका के लिए किसी का मोहताज नहीं होना चाहता, बल्कि अपने दम पर काम करना चाहता है।

आत्मविश्वासी और सक्षम होना भी उसके गुणों में शामिल हो सकता है, लेकिन 'गुजर-बसर करना' विशेष रूप से स्वाभिमान से जुड़ा है।


Question 33:

(iii) पानवाला किसका मजाक उड़ा रहा था?

  • (A) हालदार साहब का
  • (B) नेताजी का
  • (C) चश्मेवाले का
  • (D) दुकानवाले का
Correct Answer: (C) \text{चश्मेवाले का}
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गद्यांश की पहली पंक्ति में ही कहा गया है कि "हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मजाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा।"

और आगे यह स्पष्ट होता है कि वह देशभक्त 'कैप्टन' नाम का चश्मेवाला है, जिसकी शारीरिक अवस्था देखकर हालदार साहब अवाक् रह गए।

पानवाला उसी चश्मेवाले का मजाक उड़ा रहा था।


Question 34:

(iv) हालदार साहब जीप में बैठकर क्यों चले गए ? – इस प्रश्न के उत्तर के लिए निम्नलिखित कथन पढ़िए और उचित विकल्प चुनकर लिखिए :

(i) पानवाला कैप्टन के विषय में और अधिक बात करने को तैयार नहीं था ।

(ii) कैप्टन की शारीरिक अवस्था देखकर निराश हो गए ।

(iii) उन्हें आवश्यक कार्यालयी काम निपटाना था ।

(iv) ड्राइवर बेचैन हो रहा था ।

  • (A) (i) और (iii) दोनों
  • (B) (ii) और (iv) दोनों
  • (C) (i) और (iv) दोनों
  • (D) केवल (i)
Correct Answer: (C) \text{(i) और (iv) दोनों}
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गद्यांश के अंतिम भाग में स्पष्ट रूप से उल्लेख है: "लेकिन पानवाले ने साफ बता दिया था कि अब वह इस बारे में बात करने को तैयार नहीं।" (कथन i सही)

और "ड्राइवर भी बेचैन हो रहा था। काम भी था।" (कथन iv सही)

ये दोनों कारण ही हालदार साहब के वहाँ से चले जाने का मुख्य कारण थे।


Question 35:

(v) कथन और कारण को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए:

कथन : हालदार साहब के मन में कैप्टन के प्रति सम्मान का भाव था ।

कारण : सुभाष बाबू के प्रति कैप्टन के विशेष लगाव को देखकर वह उससे प्रभावित थे ।

  • (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
  • (B) कारण गलत है किंतु कथन सही है ।
  • (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण उसकी सही व्याख्या करता है ।
  • (D) कथन सही है किंतु कारण उसकी सही व्याख्या नहीं है ।
Correct Answer: (C) \text{कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण उसकी सही व्याख्या करता है ।}
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कथन सही है क्योंकि हालदार साहब को पानवाले द्वारा एक देशभक्त (कैप्टन) का मजाक उड़ाया जाना "अच्छा नहीं लगा", जो उनके सम्मान के भाव को दर्शाता है।

कारण भी सही है कि कैप्टन का सुभाष बाबू की मूर्ति पर चश्मा लगाना उनके देशभक्तिपूर्ण 'विशेष लगाव' को दर्शाता है, जिससे हालदार साहब प्रभावित हुए।

यह 'प्रभाव' ही उनके मन में कैप्टन के प्रति सम्मान का कारण बना। अतः, कारण कथन की सही व्याख्या करता है।


Question 36:

निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:



(i) बालगोबिन भगत एक सच्चे गृहस्थ भी थे।' स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु जैसे थे। वे घर-गृहस्थी के सभी कार्य करते थे, जैसे खेती करना, बाल-बच्चों का पालन-पोषण करना, किंतु उनके अंदर साधु-संन्यासियों जैसे गुण थे। वे कबीर के सिद्धांतों का पालन करते थे, लोभ-रहित थे, और किसी दूसरे की वस्तु को बिना पूछे नहीं छूते थे। उनकी यह दिनचर्या उन्हें सच्चा गृहस्थ और साधु बनाती थी।
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बालगोबिन भगत पाठ के अनुसार, वे एक सच्चे गृहस्थ इसलिए थे क्योंकि वे अपने घर में रहते हुए भी साधुत्व के सभी गुणों को धारण करते थे।

वे खेती करते थे, उनके बाल-बच्चे थे, और वे अपनी गृहस्थी की सभी जिम्मेदारियों को निभाते थे।

इसके बावजूद, उनका व्यवहार, कबीर के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा, निर्लोभता, और सदाचार उन्हें एक सच्चे साधु के समान बनाते थे।

वे किसी के प्रति द्वेष नहीं रखते थे और अपना काम स्वयं करते थे।


Question 37:

(ii) "ई काशी छोड़कर कहीं न जाएँ" बिस्मिल्ला खाँ के मन में काशी के प्रति विशेष अनुराग के क्या कारण थे ?

Correct Answer: बिस्मिल्ला खाँ के मन में काशी के प्रति विशेष अनुराग के कई कारण थे। काशी में ही उन्हें शहनाई की शिक्षा मिली, यहाँ गंगा नदी का सान्निध्य था, और यहाँ बालाजी तथा विश्वनाथ मंदिर थे जो उनके संगीत और आध्यात्मिकता के केंद्र थे। काशी की संस्कृति, उसकी परंपराएँ और उसकी गलियाँ उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गई थीं।
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बिस्मिल्ला खाँ के लिए काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि उनकी आत्मा का हिस्सा थी।

यह वह स्थान था जहाँ उन्होंने शहनाई वादन की कला सीखी और उसे पूर्णता तक पहुँचाया।

गंगा नदी का किनारा, बालाजी का मंदिर, और बाबा विश्वनाथ का दरबार उनके रियाज़ और आध्यात्मिक शांति के स्रोत थे।

काशी की संस्कृति, उसकी गलियाँ, उसके लोग, और उसकी धुनें उनके जीवन में रच-बस गई थीं, इसलिए वे इसे छोड़कर कहीं और जाने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।


Question 38:

(iii) 'संस्कृति' पाठ के आधार पर संस्कृति और असंस्कृति में अंतर बताइए।

Correct Answer: 'संस्कृति' पाठ के अनुसार, संस्कृति वह गुण है जिससे व्यक्ति कल्याण की भावना से प्रेरित होकर नई खोजें या आविष्कार करता है। यह मानव हित के लिए किए गए प्रयास हैं। जबकि असंस्कृति इसका विपरीत है, जहाँ लोग अपने पूर्वजों द्वारा खोजी गई चीजों का अंधानुकरण करते हैं या उनका गलत उपयोग करते हैं, जिससे मानव कल्याण नहीं होता बल्कि नुकसान होता है।
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'संस्कृति' पाठ के अनुसार, संस्कृति मानव कल्याण की भावना से प्रेरित होकर किए गए नए आविष्कार, खोज और ज्ञान का सृजन है।

यह मनुष्य की वह प्रवृत्ति है जो उसे निरंतर आगे बढ़ने और दूसरों के लिए कुछ नया करने को प्रेरित करती है।

इसके विपरीत, 'असंस्कृति' उस स्थिति को कहते हैं जब मनुष्य अपने पूर्वजों द्वारा विकसित की गई चीजों का दुरुपयोग करता है, या बिना समझे उनका अंधानुकरण करता है, जिससे समाज का भला नहीं होता।

यह वह स्थिति है जब मनुष्य के भीतर से कल्याण की भावना समाप्त हो जाती है।


Question 39:

(iv) 'एक कहानी यह भी' की लेखिका के जीवन पर उनकी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का क्या प्रभाव पड़ा ?

Correct Answer: 'एक कहानी यह भी' पाठ में लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन पर उनकी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का गहरा प्रभाव पड़ा। शीला अग्रवाल ने उन्हें न केवल साहित्य की दुनिया से जोड़ा, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया, उन्हें सार्वजनिक भाषण देने के लिए प्रेरित किया, और उन्हें सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मार्गदर्शन से लेखिका के व्यक्तित्व का विकास हुआ और वे एक सक्रिय लेखिका के रूप में उभर कर सामने आईं।
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लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन में शीला अग्रवाल का आगमन एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

उन्होंने मन्नू भंडारी को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उनके भीतर की साहित्यिक प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारा।

वे उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित करती थीं, उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने का साहस देती थीं, और उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए प्रोत्साहित करती थीं।

शीला अग्रवाल ने मन्नू भंडारी को एक संवेदनशील और जागरूक व्यक्ति के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे उनके लेखन में भी गहराई आई।


Question 40:

(i) गोपियों के अनुसार उद्धव द्वारा किन लोगों को योग की शिक्षा दी जानी चाहिए ?

  • (A) जिनके मन में कृष्ण के प्रति भक्ति हो
  • (B) जो योग के बारे में जानना चाहते हों
  • (C) जो भक्ति मार्ग को हृदय से अपनाना चाहते हों
  • (D) जिनका मन कृष्ण के प्रति स्थिर न हो
Correct Answer: (D) \text{जिनका मन कृष्ण के प्रति स्थिर न हो}
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काव्य-पंक्तियों के अंतिम चरण में गोपियाँ कहती हैं: "यह तो 'सूर' तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी।।"

यहाँ 'चकरी' का अर्थ है चंचल या अस्थिर मन।

गोपियाँ स्पष्ट रूप से कहती हैं कि योग की यह शिक्षा उन लोगों के लिए है जिनका मन श्रीकृष्ण के प्रति स्थिर नहीं है, बल्कि भटकता रहता है। गोपियों का मन तो श्रीकृष्ण में दृढ़ता से लीन है।


Question 41:

(ii) 'हारिल' और 'हारिल की लकड़ी' किसके प्रतीक हैं ?

  • (A) कृष्ण - कृष्ण
  • (B) कृष्ण - गोपियाँ
  • (C) गोपियाँ - कृष्ण
  • (D) कृष्ण - उद्धव
Correct Answer: (C) \text{गोपियाँ - कृष्ण}
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गोपियाँ स्वयं को हारिल पक्षी के समान बताती हैं, जो अपने पंजों में लकड़ी को दृढ़ता से पकड़े रहता है।

यहाँ 'हारिल' गोपियों का प्रतीक है, और 'हारिल की लकड़ी' श्रीकृष्ण का प्रतीक है, जिन्हें गोपियों ने अपने मन-वचन-कर्म से दृढ़तापूर्वक पकड़ रखा है, ठीक वैसे ही जैसे हारिल पक्षी अपनी लकड़ी को नहीं छोड़ता।


Question 42:

(iii) पद्यांश में व्याधि किसे बताया गया है ?

  • (A) कृष्ण के मित्र उद्धव को
  • (B) उद्धव के बताए योग को
  • (C) कटुक स्वाद वाली ककड़ी को
  • (D) कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को
Correct Answer: (B) \text{उद्धव के बताए योग को}
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गोपियाँ उद्धव से कहती हैं, "सु तो ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।"

यहाँ 'ब्याधि' (रोग) का प्रयोग उद्धव द्वारा लाए गए योग-संदेश के लिए किया गया है, जो गोपियों को कड़वी ककड़ी के समान अप्रिय लगता है और जिसे उन्होंने पहले कभी न देखा न सुना।

गोपियाँ योग को अपने लिए एक अनावश्यक और कष्टदायक बीमारी मानती हैं।


Question 43:

(iv) दिए गए कथनों में से काव्यांश के संदर्भ में सही विकल्प का चयन कीजिए :

  • (A) गोपियाँ दिन-रात कृष्ण का नाम का जप करती रहती हैं ।
  • (B) गोपियाँ उद्धव को भी योग त्यागने की सलाह देती हैं ।
  • (C) गोपियाँ उद्धव को भी भक्ति मार्ग अपनाने को कहती हैं ।
  • (D) गोपियाँ कृष्ण से प्रेम करके बहुत पछता रही हैं ।
Correct Answer: (A) \text{गोपियाँ दिन-रात कृष्ण का नाम का जप करती रहती हैं ।}
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पंक्ति "जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जकरी।" स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि गोपियाँ जागते, सोते, सपने में, दिन-रात, हर समय कृष्ण का ही नाम जपती रहती हैं।

यह उनकी कृष्ण के प्रति अटूट निष्ठा और अनन्य प्रेम को व्यक्त करता है। अन्य विकल्प पद्यांश के भाव से मेल नहीं खाते।


Question 44:

(v) कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही विकल्प चुनकर लिखिए:

कथन : गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपने अगाध प्रेम के कारण भ्रमित थीं ।

कारण : प्रेम और विश्वास की गहराई से व्यक्ति में सूझ-बूझ की कमी हो जाती है ।

  • (A) कथन गलत है किंतु कारण सही है ।
  • (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
  • (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है ।
  • (D) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है ।
Correct Answer: (A) \text{कथन गलत है किंतु कारण सही है ।}
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कथन गलत है। गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपने अगाध प्रेम के कारण भ्रमित नहीं थीं, बल्कि वे अपने प्रेम में दृढ़ और अटूट थीं। वे योग को अस्वीकार कर रही थीं क्योंकि उनका मन कृष्ण में स्थिर था।

कारण सही है। प्रेम और विश्वास की गहराई कभी-कभी व्यक्ति में अन्य बातों के प्रति सूझ-बूझ की कमी ला सकती है, क्योंकि वह अपने प्रेम में इतना लीन हो जाता है कि अन्य बातों पर ध्यान नहीं दे पाता। हालांकि, यह कथन के गलत होने का कारण नहीं है।


Question 45:

(i) 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?

Correct Answer: 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु की दंतुरित मुस्कान देखकर कवि का मन अत्यंत प्रसन्न हो उठता है। उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनका कठोर हृदय पिघलकर जल बन गया हो। उन्हें लगता है जैसे उनके जीवन में आशा का संचार हो गया है और मुरझाए हुए कमल तालाब छोड़कर उनकी झोपड़ी में खिल उठे हों। यह अनुभूति उन्हें जीवन के प्रति सकारात्मक बनाती है।
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'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु की दंतुरित मुस्कान देखकर कवि नागार्जुन को अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है।

वे इस मुस्कान को देखकर इतने भाव-विभोर हो जाते हैं कि उन्हें लगता है जैसे उनके भीतर से सारी उदासी और निराशा समाप्त हो गई हो।

कवि को ऐसा महसूस होता है मानो पत्थर पिघलकर जल बन गया हो और तालाब छोड़कर कमल उनकी झोपड़ी में खिल गए हों।

यह मुस्कान कवि के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भर देती है।


Question 46:

(ii) 'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?

Correct Answer: 'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि मंगलेश डबराल ने यह सत्य उजागर किया है कि किसी भी बड़ी सफलता या प्रसिद्धि के पीछे कई गुमनाम लोगों का योगदान होता है। संगतकार मुख्य गायक की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन उसका योगदान अक्सर unnoticed रह जाता है। यह कविता उन सहायक व्यक्तियों के महत्व और निस्वार्थ त्याग को रेखांकित करती है, जो बिना किसी श्रेय की अपेक्षा के दूसरों की सफलता में भागीदार होते हैं।
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'संगतकार' कविता समाज के उस यथार्थ को उजागर करती है जहाँ किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पर बैठे व्यक्ति की सफलता में अनेकों सहायक व्यक्तियों का निस्वार्थ योगदान होता है।

संगतकार मुख्य गायक को सहारा देता है, उसके भटके हुए सुर को संभालता है, और उसकी आवाज में जान भरता है, लेकिन उसे कभी भी मुख्य गायक जैसी प्रसिद्धि नहीं मिलती।

कवि ने इस कविता के माध्यम से ऐसे गुमनाम सहायकों के महत्व और उनके त्याग को सबके सामने लाने का प्रयास किया है, जो बिना किसी लोभ के दूसरों की सफलता में योगदान करते हैं।


Question 47:

(iii) "आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन" 'उत्साह' कविता से उद्धृत इस पंक्ति में बादलों को 'अनंत के घन' क्यों कहा गया है ?

Correct Answer: 'उत्साह' कविता में बादलों को 'अनंत के घन' इसलिए कहा गया है क्योंकि वे किसी एक निश्चित दिशा से नहीं आते, बल्कि वे असीम आकाश के किसी भी कोने से उमड़ सकते हैं। 'अनंत' शब्द उनकी विशालता, असीमता और रहस्यमयता को दर्शाता है। वे जहाँ से भी आते हैं, अपने साथ क्रांति और नवजीवन का संदेश लाते हैं, जिसका स्रोत अज्ञात और असीमित होता है।
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'उत्साह' कविता में बादलों को 'अनंत के घन' कहने का कारण यह है कि वे किसी ज्ञात या निश्चित दिशा से नहीं आते।

उनकी उत्पत्ति और आगमन का कोई निश्चित स्रोत नहीं होता; वे असीमित आकाश के किसी भी भाग से आ सकते हैं।

'अनंत' शब्द उनकी विशालता, उनकी सर्वव्यापकता और उनकी रहस्यमय प्रकृति को दर्शाता है, जो मानव के नियंत्रण से परे है।

ये बादल केवल जल नहीं बरसाते, बल्कि अपने साथ क्रांति, परिवर्तन और नवजीवन का संदेश भी लाते हैं, जिसकी शक्ति भी असीमित है।


Question 48:

(iv) "तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे – यह गागर रीती ।" कहकर कवि ने अपने जीवन के किस पहलू पर प्रकाश डाला है ?

Correct Answer: इस पंक्ति में कवि ने अपने जीवन की खालीपन, अभाव और दुःख भरे पहलू पर प्रकाश डाला है। 'गागर रीती' का अर्थ है जीवन में सुखों, उपलब्धियों या प्रेम की कमी। कवि कहना चाहता है कि उसके जीवन में ऐसा कुछ विशेष नहीं है जिसे सुनाकर दूसरों को सुख मिले, बल्कि उनका जीवन अभावों और निराशाओं से भरा है। यह उनके जीवन के दुखद और अप्रकाशित हिस्से को दर्शाता है।
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यह पंक्ति कवि के जीवन के व्यक्तिगत दुःख, निराशा और अभाव के पहलू पर प्रकाश डालती है।

'गागर रीती' का प्रतीकात्मक अर्थ है जीवन का खालीपन, जहाँ सुख, प्रेम, या उपलब्धि जैसी चीजें नहीं हैं।

कवि का मानना है कि उसके जीवन में ऐसा कुछ भी स्मरणीय या सुखद नहीं है जिसे वह दूसरों को सुनाकर उन्हें प्रसन्न कर सके।

इसके विपरीत, उसका जीवन दुखद अनुभवों और अभावों से भरा है, जिन्हें सुनकर शायद लोग दुख ही महसूस करेंगे।

यह पंक्ति कवि के अंतर्मन की वेदना और उनकी आत्मग्लानि को भी दर्शाती है।


Question 49:

(i) 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर लिखिए कि कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का लेखन में क्या महत्त्व है ?

Correct Answer: 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के अनुसार, कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का लेखन में अत्यंत महत्त्व है। कृतिकार का स्वभाव उसे किसी विषय पर सोचने और लिखने के लिए प्रेरित करता है; उसकी आंतरिक विवशता ही उसे कलम उठाने पर मजबूर करती है। यह स्वभाव उसे संवेदनशीलता प्रदान करता है, जिससे वह बाहरी घटनाओं को गहराई से महसूस कर पाता है। वहीं, आत्मानुशासन लेखक को अपनी अनुभूतियों और विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने में सहायता करता है। यह लेखन को परिष्कृत और प्रभावशाली बनाता है, जिससे लेखक अपनी बात को स्पष्टता और दृढ़ता से पाठकों तक पहुँचा पाता है। इन दोनों के बिना कोई भी रचना उच्च कोटि की नहीं बन सकती।
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'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ में लेखक अज्ञेय ने लेखन प्रक्रिया में कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन के महत्व पर बल दिया है।

कृतिकार का स्वभाव ही उसे किसी विषय पर लिखने के लिए प्रेरित करता है। उसकी आंतरिक विवशता या संवेदनशीलता उसे कुछ भी लिखने के लिए मजबूर करती है।

यह स्वभाव उसे बाहरी दुनिया के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिससे वह घटनाओं और अनुभवों को गहराई से आत्मसात कर पाता है।

दूसरी ओर, आत्मानुशासन लेखन को व्यवस्थित रूप देता है। यह लेखक को अपने विचारों को संगठित करने, भाषा को नियंत्रित करने और अनावश्यक विस्तार से बचने में मदद करता है।

आत्मानुशासन के बिना लेखन बिखरा हुआ और अप्रभावी हो सकता है, चाहे लेखक कितना भी संवेदनशील क्यों न हो।

इस प्रकार, एक सफल और सार्थक लेखन के लिए कृतिकार के स्वभाव (आंतरिक प्रेरणा) और आत्मानुशासन (बाहरी नियंत्रण) का सामंजस्य अत्यंत आवश्यक है।


Question 50:

(ii) "जितेंद्र नार्गे जैसे गाइड के साथ किसी भी पर्यटन स्थल का भ्रमण अधिक आनंददायक और यादगार हो सकता है।" इस कथन के समर्थन में 'साना साना हाथ जोड़ि .......' पाठ के आधार पर तर्कसंगत उत्तर दीजिए।

Correct Answer: 'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर यह कथन पूर्णतः सत्य है। जितेंद्र नार्गे जैसे गाइड न केवल रास्ते और स्थलों की जानकारी देते हैं, बल्कि वे उस स्थान के भूगोल, इतिहास, संस्कृति और वहाँ के लोगों के जीवन-दर्शन से भी परिचित कराते हैं। उनकी गहरी समझ और स्थानीय ज्ञान यात्रियों को उस स्थान से भावनात्मक रूप से जोड़ता है। वे खतरों से आगाह करते हैं, प्राकृतिक सौंदर्य का मर्म बताते हैं, और यात्रियों के अनुभवों को समृद्ध बनाते हैं। उनकी उपस्थिति यात्रा को मात्र पर्यटन से कहीं अधिक 'तीर्थ यात्रा' जैसा बना देती है, जो जीवनभर यादगार रहता है।
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'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ में जितेंद्र नार्गे एक आदर्श गाइड के रूप में उभरकर सामने आते हैं।

वे केवल रास्ता बताने वाले नहीं थे, बल्कि वे उस स्थान की आत्मा से परिचित कराते थे।

उन्होंने सिक्किम की प्रकृति, वहाँ के लोगों के जीवन, उनकी मान्यताओं और परंपराओं का गहन ज्ञान लेखिका को दिया।

उन्होंने बताया कि कैसे पहाड़ी लोग कठिनाइयों के बावजूद जीवन को जीते हैं, कैसे उनके लिए सब कुछ पवित्र है।

उन्होंने 'कटाओ' को भारत का स्विट्जरलैंड बताया और उसकी तुलना स्विट्जरलैंड से की, जिससे उस स्थान का महत्व बढ़ गया।

एक ऐसा गाइड जो केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि यात्रियों को स्थान के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है, यात्रा को सचमुच अधिक आनंददायक और यादगार बनाता है।

जितेंद्र नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की सुंदरता के साथ-साथ वहाँ के दर्शन से भी अवगत कराया, जिससे उनकी यात्रा अविस्मरणीय बन गई।


Question 51:

(iii) 'माता का अंचल' पाठ में बाबूजी माताजी से कब और क्यों नाराज हो जाते थे ? संतान के प्रति इस प्रकार का व्यवहार क्या आपको अपने घर या घर के आसपास भी दिखाई देता है ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Correct Answer: 'माता का अंचल' पाठ में बाबूजी माताजी से तब नाराज़ हो जाते थे जब माताजी भोलानाथ (बच्चे) के खेल को बिगाड़ देती थीं या उसे अनावश्यक रूप से परेशान करती थीं। उदाहरण के लिए, जब भोलानाथ और उसके साथी खेलते हुए पकड़े जाते थे और माताजी उन्हें जबरन पकड़कर कपड़े पहनाती थीं या उन पर दबाव डालती थीं, तो बाबूजी को यह पसंद नहीं आता था। वे बच्चे को उसकी स्वतंत्रता और खेलने का अधिकार देना चाहते थे। आज भी कई घरों में माता-पिता के बीच बच्चों के पालन-पोषण को लेकर ऐसे मतभेद देखने को मिलते हैं। कुछ माता-पिता बच्चों को अधिक स्वतंत्रता देना चाहते हैं, जबकि कुछ अधिक अनुशासन और नियंत्रण पसंद करते हैं, जिससे कई बार छोटी-मोटी नोकझोंक होती है।
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'माता का अंचल' पाठ में बाबूजी माताजी से तब नाराज़ हो जाते थे जब माताजी भोलानाथ के खेल में हस्तक्षेप करती थीं या उसे अनावश्यक रूप से बाधित करती थीं।

विशेषकर, जब भोलानाथ अपने साथियों के साथ खेलने में लीन होता था और माताजी उसे जबरदस्ती पकड़कर कपड़े पहनाती थीं या उसे नहाने-धोने के लिए खींचती थीं, तो बाबूजी को यह व्यवहार अनुचित लगता था।

बाबूजी बच्चे की स्वाभाविक प्रवृत्ति को समझते थे और चाहते थे कि वह खुलकर खेले, जबकि माताजी को उसकी साफ-सफाई और अनुशासन की अधिक चिंता रहती थी।

हाँ, संतान के प्रति इस प्रकार का व्यवहार आज भी अनेक घरों में देखने को मिलता है।

कई बार माता-पिता के बीच बच्चे की परवरिश, उसकी आदतों, पढ़ाई या खेलने-कूदने की आदतों को लेकर भिन्न राय होती है।

एक अभिभावक बच्चे को अधिक स्वतंत्रता देना चाहता है, जबकि दूसरा उसे अधिक अनुशासित और नियंत्रित रखना चाहता है।

यह स्थिति अक्सर परिवार में छोटी-मोटी नोंक-झोंक का कारण बनती है, हालाँकि इसका उद्देश्य बच्चे का भला ही होता है।


Question 52:

(i) पर्यावरण की आत्मा : वृक्ष

संकेत बिंदु -

पर्यावरण क्या है
पर्यावरण में वृक्षों का महत्त्व
वृक्षारोपण अभियान

Correct Answer:पर्यावरण की आत्मा : वृक्ष पर्यावरण हमारे चारों ओर का वह आवरण है जिसमें हम सांस लेते हैं, जीवन जीते हैं। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे और जीव-जंतु सभी शामिल हैं। स्वस्थ जीवन के लिए एक स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण में वृक्षों का महत्त्व अतुलनीय है। वृक्षों को 'पर्यावरण की आत्मा' कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। ये हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। वृक्ष वर्षा लाने में सहायक होते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, और भूमिगत जल स्तर को बढ़ाते हैं। वे अनेक जीव-जंतुओं और पक्षियों को आश्रय प्रदान करते हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बना रहता है। वृक्षों से हमें फल, फूल, लकड़ी, औषधियाँ और अनेक उपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं। आज शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण अभियान की अत्यंत आवश्यकता है। यह अभियान लोगों को पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करता है। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, क्योंकि वृक्ष ही हमारे भविष्य की नींव हैं। वृक्षारोपण केवल एक सरकारी कार्यक्रम न होकर जन आंदोलन बनना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ लगाकर उसकी सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए, तभी हम एक स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित कर पाएंगे। वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं, इनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

Question 53:

(ii) डिजिटल इंडिया

संकेत बिंदु -

डिजिटल इंडिया क्या है
डिजिटल होने के लाभ
सरकार द्वारा उठाए गए कदम

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डिजिटल इंडिया डिजिटल इंडिया भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसका लक्ष्य सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना, डिजिटल साक्षरता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुँचाना है। यह कार्यक्रम देश के सभी नागरिकों को डिजिटल रूप से जोड़ने और उन्हें विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाने पर केंद्रित है। डिजिटल होने के अनेक लाभ हैं। यह पारदर्शिता बढ़ाता है, भ्रष्टाचार कम करता है, और सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक आसानी से पहुँचाता है। डिजिटल भुगतान से लेन-देन सुरक्षित और तेज़ होता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसी सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच पाती हैं। इससे व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है। डिजिटल होने से समय की बचत होती है और जीवन अधिक सुविधाजनक बनता है। डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 'जन धन योजना' के तहत बैंक खाते खोलना, 'आधार' को सेवाओं से जोड़ना, और 'यूपीआई' जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म विकसित करना इसके कुछ उदाहरण हैं। 'डिजिलॉकर' जैसी पहल से महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखना संभव हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए 'भारतनेट' परियोजना शुरू की गई है। 'प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान' द्वारा लोगों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाया जा रहा है। ये सभी कदम भारत को एक डिजिटल भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।


Question 54:

(iii) डेंगू बुखार की मार

संकेत बिंदु -

डेंगू क्या है
डेंगू के कारण
लक्षण एवं बचाव के उपाय

Correct Answer:डेंगू बुखार की मार. डेंगू एक मच्छर जनित वायरल बीमारी है जो एडीस एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडीस एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) नामक मच्छरों के काटने से फैलती है। यह एक गंभीर बीमारी है जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है, खासकर बरसात के मौसम में। यह बीमारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। डेंगू के कारण मुख्य रूप से संक्रमित एडीस मच्छर का काटना है। ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटते हैं और रुके हुए पानी में पनपते हैं, जैसे कि कूलर, गमलों, टायर और पानी की टंकियों में। जब एक संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो डेंगू का वायरस उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है, जिससे वह बीमार हो जाता है। डेंगू के सामान्य लक्षणों में अचानक तेज़ बुखार, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते (रैश) और मतली या उल्टी शामिल हैं। कुछ गंभीर मामलों में, यह डेंगू रक्तस्रावी बुखार (Dengue Hemorrhagic Fever) में बदल सकता है, जिससे रक्तस्राव, अंगों का फेल होना और मृत्यु भी हो सकती है। डेंगू से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरे बाजू के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले स्प्रे या क्रीम का उपयोग भी सहायक हो सकता है। यदि डेंगू के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित उपचार लें। समय पर पहचान और उपचार से डेंगू के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।

Question 55:

(i) आप अदिति / आदित्य हैं। आपकी दादीजी को खेलों में अत्यधिक रुचि है। ओलंपिक खेल-2024 में भारत के प्रदर्शन के बारे में जानकारी देते हुए लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए।

View Solution

Question 56:

(i) आप नव्या / भव्य हैं। आपने पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक डिग्री (बी.लिब.) प्राप्त की है। आपके क्षेत्र के सार्वजनिक पुस्तकालय में पुस्तकालय अध्यक्ष का पद रिक्त है। उक्त पद के लिए आवेदन हेतु लगभग 80 शब्दों में अपना एक स्ववृत्त तैयार कीजिए।

Correct Answer:
\textbf{\Huge स्ववृत्त (Resume)} 1. \textbf{नाम:} नव्या / भव्य
2. \textbf{पिता का नाम:} श्री [पिता का नाम]
3. \textbf{जन्मतिथि:} DD/MM/YYYY
4. \textbf{पता:} [आपका पता], [शहर], [राज्य]
5. \textbf{ईमेल:} [आपका ईमेल आईडी]
6. \textbf{संपर्क नंबर:} [आपका मोबाइल नंबर]
\textbf{शैक्षणिक योग्यता:} पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक (बी.लिब.) - [विश्वविद्यालय/संस्थान का नाम], [वर्ष] [अन्य प्रासंगिक डिग्री/योग्यता] - [विश्वविद्यालय/संस्थान का नाम], [वर्ष] \textbf{कार्य अनुभव:} यदि कोई अनुभव हो तो यहाँ लिखें (जैसे: [संस्थान का नाम] में इंटर्नशिप/स्वयंसेवी कार्य) \textbf{कौशल:} पुस्तकालय प्रबंधन सॉफ्टवेयर का ज्ञान पुस्तकों के वर्गीकरण और सूचीकरण में निपुणता कंप्यूटर और इंटरनेट का अच्छा ज्ञान उत्कृष्ट संचार कौशल \textbf{उद्देश्य:}
एक सार्वजनिक पुस्तकालय में पुस्तकालय अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज को शिक्षित करने और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में करना।
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Question 57:

(ii) आप नव्या / भव्य हैं। विद्यालय में नामांकन के समय आपकी जन्मतिथि गलत दर्ज हो गई है। दसवीं के पंजीकरण से पहले आप इसे सुधरवाना चाहते हैं। जन्मतिथि में सुधार हेतु निवेदन करते हुए प्रधानाचार्य को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए।

Correct Answer:
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
[विद्यालय का नाम],
[विद्यालय का पता]
\textbf{विषय: जन्मतिथि में सुधार हेतु।} आदरणीय महोदय/महोदया,
मैं नव्या/भव्य, आपके विद्यालय की कक्षा दसवीं 'अ' की छात्रा/छात्र हूँ। मैं आपको सूचित करना चाहता/चाहती हूँ कि विद्यालय में मेरे नामांकन के समय मेरी जन्मतिथि गलती से \textbf{[गलत जन्मतिथि]} दर्ज हो गई थी, जबकि मेरी सही जन्मतिथि \textbf{[सही जन्मतिथि]} है। जैसा कि दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए पंजीकरण होने वाला है, मैं चाहता/चाहती हूँ कि पंजीकरण से पहले यह त्रुटि सुधर जाए। इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र) संलग्न हैं। अतः, आपसे विनम्र निवेदन है कि आप मेरी जन्मतिथि में सुधार करने की कृपा करें। आपके इस सहयोग के लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा/रहूँगी। सधन्यवाद,
[1em] भवदीय,
नव्या/भव्य
कक्षा: दसवीं 'अ'
रोल नंबर: [आपका रोल नंबर]
दिनांक: 21 मई, 2025
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Question 58:

(i) सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता हेतु ट्रैफिक पुलिस की ओर से जनहित में जारी एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 100 शब्दों में तैयार कीजिए।

Correct Answer:
\Huge\textbf{|| जनहित में जारी ||}
\LARGE\textbf{|| यातायात पुलिस, दिल्ली ||}
\Large\textbf{सुरक्षित सफर, खुशियों भरा जीवन!}
\large\textbf{सड़क सुरक्षा - आपका संकल्प, हमारी जिम्मेदारी}
\textbf{क्या आप जानते हैं?}
हर 4 मिनट में एक सड़क दुर्घटना होती है!
सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण - \textbf{हमारी लापरवाही!} \textbf{सावधानी बरतें:} गति सीमा का पालन करें हेलमेट अवश्य पहनें (दोपहिया वाहन चालक) सीट बेल्ट लगाएँ (चारपहिया वाहन चालक) नशे में गाड़ी न चलाएँ मोबाइल पर बात करते हुए वाहन न चलाएँ जेब्रा क्रॉसिंग पर ही सड़क पार करें ट्रैफिक नियमों का पालन करें \textbf{याद रखें:}
\textquotedblleft सावधानी हटी, दुर्घटना घटी! \textquotedblright
आपके घर पर कोई आपका \textbf{इंतजार} कर रहा है!
\textbf{आपकी सुरक्षा, आपके हाथ!} \textbf{अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:}
\textbf{दिल्ली ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन: 1073}
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Question 59:

(ii) प्रादेशिक स्तर पर आयोजित होने वाली 100 मीटर की बाधा दौड़ में आपके मित्र को प्रथम स्थान मिला है। उसे बधाई देते हुए लगभग 40 शब्दों में एक संदेश लिखिए।

Correct Answer:
\textbf{\LARGE संदेश} \textbf{दिनांक:} 21 मई, 2025
\textbf{समय:} सुबह 10:30 बजे
प्रिय [मित्र का नाम],
तुम्हें 100 मीटर बाधा दौड़ में प्रादेशिक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए \textbf{हार्दिक बधाई}! तुम्हारी इस शानदार उपलब्धि से मैं बहुत खुश हूँ। यह तुम्हारी कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम है। भविष्य के लिए शुभकामनाएँ! ऐसे ही आगे बढ़ते रहो। तुम्हारा/तुम्हारी मित्र,
[आपका नाम]
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*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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