
Bihar Board Class 10 Hindi MT 101 Question Paper with Solutions 2025 Set H is available for download. The Bihar School Examination Board (BSEB) conducted the Class 10 examination for a total duration of 3 hours, and the question paper was of a total of 100 marks.
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'जिसे नहीं जीता जा सके' वाक्यखंड के लिए एक शब्द है
दिए गए वाक्यखंड 'जिसे नहीं जीता जा सके' का अर्थ है वह जिसे पराजित करना संभव न हो।
विकल्पों का विश्लेषण करने पर:
(A) आलोच्य का अर्थ है 'जिसकी आलोचना की जा सके'।
(B) अजेय शब्द 'अ' (नहीं) + 'जेय' (जीतने योग्य) से बना है, जिसका अर्थ है 'जिसे जीता न जा सके'। यह दिए गए वाक्यखंड के लिए सही शब्द है।
(C) अभेद का अर्थ है 'जिसे भेदा न जा सके'।
(D) अखाद्य का अर्थ है 'जो खाने योग्य न हो'।
अतः, सही एक शब्द 'अजेय' है।
Quick Tip: हिंदी व्याकरण में वाक्यांश के लिए एक शब्द वाले प्रश्नों में अक्सर 'अ' उपसर्ग का प्रयोग नकारात्मक अर्थ (नहीं) दर्शाने के लिए किया जाता है, जैसे 'जेय' (जीतने योग्य) का विलोम 'अजेय' (न जीतने योग्य)।
'जिसका तेज निकल गया है' वाक्यखंड के लिए एक शब्द है
वाक्यखंड 'जिसका तेज निकल गया है' का अर्थ है वह जिसमें कोई चमक, कांति या प्रभाव शेष न रहा हो।
विकल्पों पर विचार करें:
(A) तेजस्वी का अर्थ है 'तेज से युक्त' या 'प्रभावशाली'। यह दिए गए वाक्यांश का विपरीतार्थक है।
(B) निस्तेज शब्द 'निः' (बिना) + 'तेज' से बना है, जिसका अर्थ है 'तेज रहित' या 'कांतिहीन'। यह दिए गए वाक्यखंड के लिए सटीक शब्द है।
(C) दत्तचित्त का अर्थ है 'जिसने अपना चित्त किसी विषय में लगा दिया हो'।
(D) मितभाषी का अर्थ है 'कम बोलने वाला'।
इसलिए, सही उत्तर 'निस्तेज' है।
Quick Tip: उपसर्गों (prefixes) जैसे 'निः' या 'निर्' का ज्ञान शब्दों के अर्थ को समझने में बहुत सहायक होता है। 'निः' का अर्थ अक्सर 'बिना' या 'रहित' होता है, जो यहाँ 'तेज के बिना' का बोध कराता है।
'कायर' शब्द का विलोम है
'कायर' शब्द का अर्थ होता है डरपोक व्यक्ति, जो भयभीत हो।
विलोम शब्द का अर्थ होता है विपरीतार्थक शब्द। हमें कायर का विपरीत शब्द खोजना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) निडर का अर्थ है 'बिना डर के', यानी बहादुर। यह 'कायर' का सटीक विलोम है।
(B) विक्रय का अर्थ 'बिक्री' होता है, इसका विलोम 'क्रय' है।
(C) निष्ठुर का अर्थ 'कठोर हृदय वाला' होता है, इसका विलोम 'दयालु' है।
(D) कपटी का अर्थ 'धोखेबाज' होता है, इसका विलोम 'निष्कपट' है।
अतः, 'कायर' का सही विलोम 'निडर' है।
Quick Tip: विलोम शब्द वाले प्रश्नों को हल करते समय, पहले दिए गए शब्द का सटीक अर्थ समझें और फिर विकल्पों में से उस शब्द को चुनें जिसका अर्थ पूरी तरह से विपरीत हो।
'ज्योति' शब्द का विलोम है
'ज्योति' शब्द का अर्थ प्रकाश, उजाला या रोशनी होता है।
इसका विलोम शब्द वह होगा जिसका अर्थ अंधकार या अँधेरा हो।
आइए विकल्पों को देखें:
(A) स्थावर का विलोम 'जंगम' होता है।
(B) चेतन का विलोम 'जड़' होता है।
(C) स्थल का विलोम 'जल' होता है।
(D) तम का अर्थ 'अंधकार' होता है। यह 'ज्योति' का सही विलोम शब्द है।
इसलिए, सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: तत्सम शब्दों के विलोम शब्द भी सामान्यतः तत्सम ही होते हैं। 'ज्योति' एक तत्सम शब्द है और इसका विलोम 'तम' भी एक तत्सम शब्द है।
'जंगम' शब्द का विलोम है
'जंगम' शब्द का अर्थ है 'जो चल सकता हो' या 'चलने-फिरने वाला' (movable)।
इसका विलोम शब्द वह होगा जिसका अर्थ 'स्थिर' या 'जो चल न सके' (immovable) हो।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) स्थावर का अर्थ है 'स्थिर' या 'अचल'। यह 'जंगम' का सटीक और पारंपरिक विलोम है।
(B) जड़ का विलोम 'चेतन' होता है।
(C) सबल का विलोम 'निर्बल' होता है।
(D) सार्थक का विलोम 'निरर्थक' होता है।
अतः, 'जंगम' का सही विलोम 'स्थावर' है।
Quick Tip: हिंदी में 'जंगम' और 'स्थावर' एक बहुत ही प्रचलित विलोम जोड़ी है, जो अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती है। इसे याद रखना फायदेमंद होता है। 'स्थावर संपत्ति' (immovable property) जैसे प्रयोग से इसे याद रखा जा सकता है।
'पुष्प' का पर्यायवाची शब्द है
'पुष्प' शब्द का अर्थ फूल होता है। हमें इसका पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द खोजना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) चपला का अर्थ बिजली होता है।
(B) प्रसून का अर्थ फूल होता है। अतः यह 'पुष्प' का सही पर्यायवाची है।
(C) हिरण्य का अर्थ सोना होता है।
(D) वारिद का अर्थ बादल होता है।
इसलिए, सही उत्तर 'प्रसून' है।
Quick Tip: पर्यायवाची शब्दों का ज्ञान बढ़ाने के लिए प्राकृतिक तत्वों (जैसे फूल, बादल, नदी, सूर्य) से जुड़े शब्दों के समूह बनाकर याद करना एक प्रभावी तरीका है।
'सरस्वती' का पर्यायवाची शब्द है
'सरस्वती' ज्ञान, संगीत और कला की देवी का नाम है। हमें उनका पर्यायवाची शब्द ज्ञात करना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) वागीशा शब्द 'वाक्' (वाणी) + 'ईशा' (देवी) से बना है, जिसका अर्थ है 'वाणी की देवी'। यह सरस्वती का एक प्रमुख पर्यायवाची है।
(B) अंबुद का अर्थ बादल होता है।
(C) गिरीश का अर्थ 'पर्वतों का राजा' (शिव) होता है।
(D) मरीची का अर्थ किरण होता है।
अतः, 'सरस्वती' का सही पर्यायवाची 'वागीशा' है।
Quick Tip: संधि-विच्छेद का ज्ञान पर्यायवाची शब्दों को पहचानने में मदद कर सकता है। जैसे 'वागीशा' का संधि-विच्छेद 'वाक् + ईशा' करने से उसका अर्थ 'वाणी की देवी' स्पष्ट हो जाता है।
'घर' का पर्यायवाची शब्द है
'घर' शब्द का अर्थ निवास स्थान होता है। हमें इसका समानार्थी शब्द खोजना है।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) चीर का अर्थ वस्त्र या कपड़ा होता है।
(B) गेह का अर्थ घर होता है। गृह, सदन, आलय, निकेतन भी घर के पर्यायवाची हैं।
(C) वाजि का अर्थ घोड़ा होता है।
(D) विटप का अर्थ पेड़ या वृक्ष होता है।
इसलिए, 'घर' का सही पर्यायवाची 'गेह' है।
Quick Tip: आम बोलचाल के शब्दों के भी कई साहित्यिक या तत्सम पर्यायवाची होते हैं, जैसे 'घर' के लिए 'गेह' या 'निकेतन'। इन्हें विशेष रूप से याद रखना चाहिए क्योंकि ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
निम्नलिखित में कौन शुद्ध वाक्य है ?
हमें दिए गए वाक्यों में से व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध वाक्य का चयन करना है।
(A) 'हमलोगों की तो नाकें कट गई।' - यह वाक्य अशुद्ध है। मुहावरे 'नाक कटना' में 'नाक' शब्द एकवचन में ही प्रयुक्त होता है। शुद्ध रूप होगा: 'हमलोगों की तो नाक कट गई।'
(B) 'राम को पुस्तक पढ़ना चाहिए।' - यह वाक्य व्याकरण की दृष्टि से पूरी तरह शुद्ध है। इसमें कर्ता, कर्म और क्रिया का सही अन्वय है।
(C) 'कोयला जलकर राख हो गया।' - यह वाक्य भी शुद्ध है, लेकिन वाक्य शुद्धि में जब एक से अधिक विकल्प सही हों तो सबसे मानक और स्पष्ट विकल्प को चुना जाता है। वाक्य (B) एक आदर्श निर्देशात्मक वाक्य है।
(D) 'मैं तकलीफ भोगता हूँ।' - यह वाक्य अशुद्ध है। 'तकलीफ' के साथ 'भोगना' क्रिया का प्रयोग उपयुक्त नहीं है। शुद्ध रूप होगा: 'मैं तकलीफ सहता हूँ' या 'मुझे तकलीफ होती है।'
विकल्पों की तुलना करने पर, (B) सर्वाधिक उपयुक्त और निर्विवाद रूप से शुद्ध वाक्य है।
Quick Tip: वाक्य शुद्धि के प्रश्नों में क्रिया के सही प्रयोग, लिंग-वचन के अन्वय और मुहावरों के सटीक रूप पर विशेष ध्यान दें। कई बार वाक्य पढ़ने में सही लगता है, लेकिन उसमें सूक्ष्म व्याकरणिक या शाब्दिक अशुद्धि होती है।
निम्नलिखित में कौन शुद्ध शब्द है ?
हमें दिए गए विकल्पों में से सही वर्तनी वाला शब्द चुनना है।
(A) क्रित्रिम - यह अशुद्ध है। शुद्ध शब्द 'कृत्रिम' होता है।
(B) धूआँ - यह अशुद्ध है। शुद्ध शब्द 'धुआँ' होता है।
(C) सुरज - यह अशुद्ध है। शुद्ध शब्द 'सूरज' होता है।
(D) वाहिनी - यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से पूरी तरह शुद्ध है। इसका अर्थ 'सेना' या 'नदी' होता है।
अतः, शुद्ध शब्द 'वाहिनी' है।
Quick Tip: वर्तनी शुद्धि के लिए नियमित रूप से लिखने का अभ्यास और शब्दों के सही उच्चारण पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषकर 'र' के विभिन्न रूपों और मात्राओं (छोटी इ/बड़ी ई, छोटा उ/बड़ा ऊ) पर ध्यान केंद्रित करें।
पाप्पाति लगभग कितने साल की थी ?
यह प्रश्न 'नगर' कहानी से है, जिसकी एक मुख्य पात्र वल्ली अम्माल की बेटी पाप्पाति है।
कहानी में पाप्पाति को मेनिन्जाइटिस रोग हो जाता है, जिसके इलाज के लिए उसे मदुरै शहर लाया जाता है।
कहानी में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पाप्पाति की उम्र बारह वर्ष थी।
अतः, विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: पाठ्यपुस्तक की कहानियों के मुख्य पात्रों के नाम, उनकी उम्र, और उनके बीच के संबंधों को याद रखना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
'माँ' शीर्षक पाठ के लेखक कौन हैं ?
'माँ' शीर्षक पाठ 'वर्णिका भाग 2' पाठ्यपुस्तक में संकलित एक मार्मिक कहानी है।
यह एक गुजराती कहानी है जिसका हिंदी में अनुवाद किया गया है।
इस प्रसिद्ध कहानी के मूल लेखक ईश्वर पेटलीकर हैं।
अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: अपनी पाठ्यपुस्तक के प्रत्येक पाठ के लेखक/कवि का नाम याद रखें। यह परीक्षा में सीधे पूछे जाने वाले सबसे आम प्रश्नों में से एक है।
माँ जी के पास आँगन में बैठकर मंगम्मा क्या खाती थी ?
यह प्रश्न 'दही वाली मंगम्मा' कहानी पर आधारित है।
कहानी में, मंगम्मा जब लेखक की माँ (माँ जी) के पास दही बेचने आती थी, तो वह थोड़ी देर उनके पास बैठती थी।
माँ जी से मिले पैसों से वह हर रोज एक पान-सुपारी खरीदकर खाती थी।
पाठ में इसका स्पष्ट उल्लेख है कि वह माँ जी के पास बैठकर पान-सुपारी खाती थी। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: कहानियों को पढ़ते समय पात्रों की आदतों और दिनचर्या से जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें, क्योंकि इनसे भी प्रश्न बन सकते हैं।
"अरे कहावत है, 'दवा करने से तो मशान ही जगता है'।" - यह कथन है
यह कथन 'दही वाली मंगम्मा' कहानी से लिया गया है।
यह बात मंगम्मा की बहू नंजम्मा ने मंगम्मा से कही थी।
जब रंगप्पा मंगम्मा से पैसे उधार लेने की कोशिश कर रहा था, तब नंजम्मा ने यह कहावत कहकर मंगम्मा को सचेत किया था कि रंगप्पा जैसे लोगों की मदद करने से समस्या और बढ़ सकती है।
अतः, यह कथन नंजम्मा का है।
Quick Tip: कहानियों में पात्रों द्वारा कही गई महत्वपूर्ण कहावतों और कथनों को याद रखें, क्योंकि इनसे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं कि यह किसने कहा।
रसूलनबाई कौन थी ?
रसूलनबाई का उल्लेख 'नौबतखाने में इबादत' नामक पाठ में है, जो शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ पर आधारित है।
पाठ में बताया गया है कि युवा बिस्मिल्ला खाँ के संगीत के प्रति आकर्षण में रसूलनबाई और बतूलनबाई के गायन का भी बड़ा योगदान था।
रसूलनबाई और बतूलनबाई अपने समय की प्रसिद्ध गायिकाएँ थीं।
अतः, रसूलनबाई एक गायिका थीं।
Quick Tip: पाठ में आए मुख्य पात्रों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम और उनके पेशे को भी ध्यान में रखें।
यतीन्द्र मिश्र ने गीतकार गुलजार की कविताओं का संपादन किस नाम से किया ?
यतीन्द्र मिश्र एक प्रसिद्ध लेखक और संपादक हैं।
उन्होंने प्रसिद्ध गीतकार और कवि गुलजार की कविताओं का चयन और संपादन किया है।
इस संपादित पुस्तक को उन्होंने 'यार जुलाहे' शीर्षक दिया है।
अतः, सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: लेखकों और उनके संपादकीय कार्यों के बारे में जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है, खासकर यदि लेखक आपकी पाठ्यपुस्तक में शामिल हो।
'बहुवचन' पत्रिका के संपादक कौन थे ?
'बहुवचन' महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की एक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका है।
इस पत्रिका का आरम्भ और संपादन प्रसिद्ध साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने किया था।
अतः, 'बहुवचन' पत्रिका के संपादक अशोक वाजपेयी थे।
(नोट: प्रश्न पत्र में दिया गया चिह्न (C) गलत है, सही उत्तर (A) है।)
Quick Tip: कभी-कभी प्रश्न पत्रों में गलत उत्तर चिह्नित हो सकते हैं। अपनी पाठ्यपुस्तक और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर विश्वास रखें।
'शहर अब भी संभावना है' किसकी रचना है ?
'शहर अब भी संभावना है' एक प्रसिद्ध काव्य कृति है।
इस कृति के रचनाकार आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, आलोचक और संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी हैं।
यह उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक है जो उनकी काव्य-दृष्टि को दर्शाती है।
अतः, सही विकल्प (C) अशोक वाजपेयी की है।
Quick Tip: समकालीन लेखकों और उनकी प्रमुख कृतियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है, विशेषकर उन लेखकों की जिनका पाठ आपके पाठ्यक्रम में है।
निम्नलिखित में किस पाठ की विधा निबंध है ?
हमें दिए गए पाठों में से निबंध विधा की पहचान करनी है।
(A) 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक ललित निबंध है।
(B) 'बहादुर' अमरकांत द्वारा लिखी गई एक कहानी है।
(C) 'मछली' विनोद कुमार शुक्ल द्वारा लिखी गई एक कहानी है।
(D) 'भारतमाता' सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित एक कविता है।
अतः, निबंध विधा का पाठ 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' है।
Quick Tip: प्रत्येक पाठ की विधा (कहानी, निबंध, कविता, एकांकी, आदि) को याद रखना आवश्यक है, क्योंकि इस पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
'द कास्ट्स इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म' किसकी रचना है ?
'The Castes in India: Their Mechanism, Genesis and Development' एक प्रसिद्ध शोधपत्र है।
यह शोधपत्र भारतीय संविधान के निर्माता और महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेदकर द्वारा लिखा गया था।
उन्होंने इसे 1916 में एक सेमिनार में प्रस्तुत किया था, जो जाति व्यवस्था पर उनके शुरुआती गहन विश्लेषण को दर्शाता है।
अतः, सही विकल्प (B) है।
Quick Tip: अपनी पाठ्यपुस्तक के लेखकों की अन्य महत्वपूर्ण रचनाओं, विशेषकर उन रचनाओं का जिनका पाठ में उल्लेख हो, के बारे में जानकारी रखें।
'फुफेरा' शब्द में कौन प्रत्यय है ?
प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
'फुफेरा' शब्द का मूल शब्द 'फूफा' है, जो एक संज्ञा है।
'फूफा' शब्द में संबंधवाचक 'एरा' प्रत्यय जोड़ने से 'फुफेरा' विशेषण शब्द बनता है (जैसे - फुफेरा भाई)।
अतः, इस शब्द में 'एरा' प्रत्यय है। (नोट: प्रश्न पत्र में दिया गया चिह्न (A) गलत है, सही उत्तर (C) है।)
Quick Tip: संबंध बताने वाले 'एरा' प्रत्यय से कई शब्द बनते हैं, जैसे - चाचा + एरा = चचेरा, मामा + एरा = ममेरा, मौसा + एरा = मौसेरा।
'पढ़ाकू' शब्द में कौन प्रत्यय है ?
प्रत्यय को पहचानने के लिए शब्द से मूल शब्द या धातु को अलग किया जाता है।
'पढ़ाकू' शब्द में मूल क्रिया धातु 'पढ़' है।
'पढ़' धातु में 'आकू' प्रत्यय जोड़ने से 'पढ़ाकू' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है 'बहुत पढ़ने वाला'।
अतः, इस शब्द में 'आकू' प्रत्यय है।
Quick Tip: प्रत्यय को पहचानने के लिए शब्द से मूल सार्थक शब्द (या धातु) को अलग करें। जो अंश अंत में बचता है, वही प्रत्यय होता है।
'मानवता' किस शब्द का उदाहरण है ?
रचना या बनावट के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं: रूढ़, यौगिक, और योगरूढ़।
'मानवता' शब्द 'मानव' (मूल शब्द) और 'ता' (प्रत्यय) के योग से बना है।
जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों या शब्दांशों के मेल से बनते हैं और जिनके खंडों का अपना अर्थ होता है, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं।
अतः, 'मानवता' एक यौगिक शब्द है।
Quick Tip: रूढ़ शब्द वे होते हैं जिनके सार्थक टुकड़े नहीं किए जा सकते (जैसे - जल, घर)। यौगिक शब्दों के सार्थक टुकड़े किए जा सकते हैं (जैसे - पाठशाला = पाठ + शाला)। योगरूढ़ शब्द यौगिक होते हैं पर एक विशेष अर्थ देते हैं (जैसे - पंकज = कीचड़ में जन्मा, अर्थात कमल)।
'खलिहान' किस शब्द का उदाहरण है ?
उत्पत्ति के स्रोत के आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं: तत्सम, तद्भव, देशज, और विदेशज।
'खलिहान' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत या किसी विदेशी भाषा में नहीं मिलती है।
यह शब्द भारत की स्थानीय और क्षेत्रीय बोलियों की देन है।
जिन शब्दों की उत्पत्ति देश की विभिन्न बोलियों से हुई हो, उन्हें देशज शब्द कहते हैं।
अतः, 'खलिहान' एक देशज शब्द है।
Quick Tip: तत्सम (संस्कृत के समान), तद्भव (संस्कृत से बदले हुए), देशज (देश में जन्मे), और विदेशज (विदेशी भाषाओं से आए) शब्दों के बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ समझें।
'खटास' किस संज्ञा का उदाहरण है ?
संज्ञा के भेदों में व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक और भाववाचक शामिल हैं।
'खटास' शब्द किसी वस्तु के गुण का बोध कराता है।
यह एक ऐसा गुण है जिसे हम केवल इंद्रियों से अनुभव कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते।
जो संज्ञा शब्द किसी भाव, गुण, दशा या अवस्था का बोध कराते हैं, वे भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं।
अतः, 'खटास' एक भाववाचक संज्ञा है।
Quick Tip: भाववाचक संज्ञाओं की पहचान अक्सर यह होती है कि वे किसी गुण (मिठास, सुंदरता), अवस्था (बचपन, बुढ़ापा), या भाव (क्रोध, प्रेम) को दर्शाती हैं और इन्हें महसूस किया जा सकता है, छुआ नहीं जा सकता।
निम्न में कौन व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण है ?
व्यक्तिवाचक संज्ञा वह संज्ञा होती है जो किसी एक विशेष व्यक्ति, वस्तु, या स्थान का बोध कराती है।
विकल्प (A) कड़ाई, (C) दानव, और (D) दाल अपनी पूरी जाति का बोध कराते हैं, अतः ये जातिवाचक संज्ञा हैं।
विकल्प (B) 'पारिजात' एक विशेष प्रकार के पौराणिक वृक्ष या पुष्प का नाम है।
क्योंकि यह एक विशिष्ट नाम है, यह व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण है।
Quick Tip: यह जांचने के लिए कि कोई शब्द व्यक्तिवाचक है या जातिवाचक, देखें कि क्या वह एक पूरी श्रेणी (जैसे 'पेड़') को संदर्भित करता है या उस श्रेणी में एक विशिष्ट सदस्य (जैसे 'पारिजात' या 'बरगद') को।
'साँप' शब्द का स्त्रीलिंग रूप है
हिंदी व्याकरण में पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग में बदलने के कुछ नियम हैं।
कुछ प्राणीवाचक पुल्लिंग शब्दों के अंत में 'इन' प्रत्यय जोड़कर स्त्रीलिंग रूप बनाया जाता है।
'साँप' शब्द में 'इन' प्रत्यय जोड़ने से 'साँपिन' शब्द बनता है, जो इसका सही स्त्रीलिंग रूप है।
अन्य विकल्प (संपिनी, सर्पी, सर्पआइन) व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध हैं।
Quick Tip: लिंग परिवर्तन के सामान्य नियमों को याद करें, जैसे 'अ' को 'आ' करना (छात्र -> छात्रा), 'अ' को 'ई' करना (लड़का -> लड़की), और 'इन' प्रत्यय जोड़ना (माली -> मालिन, साँप -> साँपिन)।
निम्न में कौन शब्द पुंलिंग है ?
हिंदी में शब्दों का लिंग पहचानने के लिए उन्हें वाक्य में प्रयोग करके देखा जा सकता है।
(A) मृत्यु: 'उसकी मृत्यु हो गई।' (क्रिया स्त्रीलिंग)। अतः मृत्यु स्त्रीलिंग है।
(B) रोटी: 'मैंने रोटी खाई।' (क्रिया स्त्रीलिंग)। अतः रोटी स्त्रीलिंग है।
(C) कृति: 'यह एक अच्छी कृति है।' (विशेषण स्त्रीलिंग)। अतः कृति स्त्रीलिंग है।
(D) विवाह: 'उसका विवाह संपन्न हुआ।' (क्रिया पुंलिंग)। अतः विवाह पुंलिंग है।
Quick Tip: किसी शब्द का लिंग निर्धारित करने का सबसे सरल तरीका है उसके साथ 'मेरा/मेरी' या 'अच्छा/अच्छी' लगाकर देखना। जैसे 'मेरा विवाह' (सही) vs 'मेरी विवाह' (गलत), इसलिए 'विवाह' पुंलिंग है।
हिन्दी में कुल कितने सर्वनाम हैं ?
सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं।
प्रयोग के अनुसार सर्वनाम के 6 भेद होते हैं, लेकिन हिंदी व्याकरण में मौलिक सर्वनामों की संख्या 11 मानी गई है।
ये 11 मौलिक सर्वनाम हैं: मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या।
इन्हीं मौलिक सर्वनामों से अन्य सभी सर्वनाम रूप बनते हैं। अतः, सही उत्तर ग्यारह (11) है।
Quick Tip: सर्वनाम के 'भेद' (types) और सर्वनामों की 'कुल संख्या' (total count) के बीच भ्रमित न हों। भेद 6 हैं (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक, निजवाचक), लेकिन मौलिक सर्वनाम 11 हैं।
'दाल में कुछ है' - किस सर्वनाम का उदाहरण है ?
इस वाक्य में सर्वनाम शब्द 'कुछ' है।
'कुछ' शब्द किसी निश्चित वस्तु या प्राणी का बोध नहीं करा रहा है, बल्कि किसी अनिश्चित चीज़ की ओर संकेत कर रहा है।
जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध नहीं होता, उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
'कोई' और 'कुछ' हिंदी के दो प्रमुख अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं। अतः, यह वाक्य अनिश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण है।
Quick Tip: निश्चयवाचक सर्वनाम (जैसे 'यह', 'वह') किसी निश्चित वस्तु की ओर इशारा करते हैं, जबकि अनिश्चयवाचक सर्वनाम (जैसे 'कोई', 'कुछ') किसी अनिश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध कराते हैं।
'नौकर की कमीज' किसकी रचना है ?
'नौकर की कमीज' हिंदी साहित्य का एक प्रसिद्ध उपन्यास है।
इसके लेखक जाने-माने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल हैं।
यह उपन्यास इतना प्रसिद्ध हुआ कि इस पर फिल्म निर्माता मणि कौल द्वारा एक फिल्म भी बनाई गई।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (C) पर चिह्न लगा है जो एक त्रुटि है। सही उत्तर (D) विनोद कुमार शुक्ल है।)
Quick Tip: प्रमुख लेखकों की सबसे प्रसिद्ध कृतियों को हमेशा याद रखें। 'नौकर की कमीज' विनोद कुमार शुक्ल की एक मील का पत्थर मानी जाने वाली रचना है।
आविन्यों में साथ रहकर लगभग तीस संयुक्त कविताएँ लिखी थीं
यह प्रश्न अशोक वाजपेयी द्वारा रचित पाठ 'आविन्यों' से संबंधित है।
पाठ में लेखक ने आविन्यों में आयोजित एक कार्यक्रम का वर्णन किया है।
इस कार्यक्रम में लेखक के साथ-साथ प्रसिद्ध फ्रांसीसी कवि आन्द्रे ब्रेताँ, रेने शॉ और पाल एलुआर भी शामिल थे।
इन सभी ने मिलकर वहाँ लगभग तीस संयुक्त कविताएँ लिखी थीं।
Quick Tip: पाठों में उल्लिखित विदेशी लेखकों, कलाकारों और स्थानों के नाम पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि इनसे संबंधित प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।
पंडित बिरजू महाराज ने गण्डा किससे बंधवाया ?
यह प्रश्न 'जित-जित मैं निरखत हूँ' पाठ से है, जो पंडित बिरजू महाराज की जीवनी पर आधारित है।
पाठ के अनुसार, बिरजू महाराज के पिता और गुरु उनके बाबूजी ही थे।
जब बाबूजी को लगा कि बिरजू महाराज नृत्य के लिए तैयार हो गए हैं, तो उन्होंने स्वयं अपने बेटे को 'गण्डा' बाँधा था।
गण्डा बाँधने की इस रस्म के लिए उन्होंने बिरजू महाराज से गुरु दक्षिणा के रूप में 500 रुपये भी लिए थे।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (A) पर चिह्न लगा है जो एक त्रुटि है। गण्डा बाबूजी ने बाँधा था।)
Quick Tip: जीवनी पर आधारित पाठों में पात्रों के बीच के संबंधों और महत्वपूर्ण घटनाओं (जैसे गुरु-शिष्य परंपरा) को समझना आवश्यक है।
'परम्परा का मूल्यांकन' शीर्षक पाठ के लेखक हैं
'परम्परा का मूल्यांकन' हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और निबंधकार का एक महत्वपूर्ण निबंध है।
इस पाठ के लेखक डॉ. रामविलास शर्मा हैं।
इस निबंध में उन्होंने साहित्य की परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला है।
अतः, सही विकल्प (A) है।
Quick Tip: पाठ का शीर्षक और उसके लेखक का नाम याद करना परीक्षा की तैयारी का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है।
बहादुर कहाँ से भागकर आया था ?
यह प्रश्न अमरकांत द्वारा लिखित कहानी 'बहादुर' से लिया गया है।
कहानी का मुख्य पात्र, बहादुर, एक लड़का है जो अपने घर से भाग जाता है।
कहानी में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि बहादुर का घर नेपाल में था।
वह अपनी माँ के दुर्व्यवहार से तंग आकर घर से भागकर आया था।
Quick Tip: कहानियों के मुख्य पात्रों की पृष्ठभूमि, जैसे कि वे कहाँ से हैं, उनके परिवार में कौन हैं, आदि जानकारी याद रखें।
बादशाह अकबर ने जो सिक्का चलाया था उस पर किनकी आकृति अंकित है ?
इस प्रश्न का संदर्भ गुणाकर मुले द्वारा रचित पाठ 'नागरी लिपि' से है।
पाठ में नागरी लिपि के ऐतिहासिक विकास और प्रयोग पर चर्चा की गई है।
इसमें उल्लेख है कि मुगल बादशाह अकबर ने अपनी धार्मिक सहिष्णुता की नीति के तहत एक सिक्का चलाया था।
उस सिक्के पर एक तरफ नागरी लिपि में 'राम-सीय' (राम-सीता) शब्द और उनकी आकृति अंकित थी।
Quick Tip: ज्ञानवर्धक पाठों में दिए गए ऐतिहासिक तथ्यों और उदाहरणों को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि वे वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के स्रोत होते हैं।
'प्राणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य का अनावश्यक अंग उसी प्रकार झड़ जाएगा जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है।' - किस पाठ की पंक्ति है ?
यह पंक्ति मनुष्य के शरीर में अवशेषी अंगों (vestigial organs) के बारे में है।
लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी ने अपने ललित निबंध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' में इस विचार पर चर्चा की है।
वे नाखूनों को मनुष्य की पाशविक वृत्ति का प्रतीक मानते हैं और आशा करते हैं कि एक दिन यह अनावश्यक अंग भी समाप्त हो जाएगा।
यह पंक्ति इसी निबंध से ली गई है।
Quick Tip: पाठों से महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक पंक्तियों को रेखांकित करें। इनसे अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि 'यह पंक्ति किस पाठ से है?'।
मैक्स मूलर ने किस रचना का जर्मन भाषा में पद्यानुवाद किया ?
यह प्रश्न 'भारत से हम क्या सीखें' पाठ से संबंधित है, जिसके लेखक मैक्स मूलर हैं।
मैक्स मूलर एक प्रसिद्ध जर्मन विद्वान और संस्कृत के ज्ञाता थे।
उन्होंने संस्कृत के कई ग्रंथों का अध्ययन और अनुवाद किया।
उन्होंने महाकवि कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'मेघदूत' का जर्मन भाषा में पद्य अनुवाद किया, जो बहुत प्रशंसित हुआ।
Quick Tip: पाठ के लेखक के बारे में दी गई जानकारी को भी ध्यान से पढ़ें। लेखक के जीवन और अन्य कार्यों से संबंधित प्रश्न भी आ सकते हैं।
नलिन विलोचन शर्मा के अनुसार महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर कौन जीतते हैं ?
यह कथन नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रचित कहानी 'विष के दाँत' से है।
कहानी में महल वालों को अमीर और शक्तिशाली वर्ग का प्रतीक माना गया है, जबकि झोपड़ी वालों को गरीब और कमजोर वर्ग का।
लेखक ने कहानी के माध्यम से यह व्यंग्य किया है कि सामाजिक और आर्थिक विषमता के कारण इस लड़ाई में अक्सर महल वाले (अमीर वर्ग) ही जीतते हैं।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: कहानियों के प्रतीकात्मक अर्थ को समझने का प्रयास करें। 'महल' और 'झोपड़ी' केवल इमारतें नहीं, बल्कि सामाजिक वर्गों के प्रतीक हैं।
'धरती कब तक घूमेगी' शीर्षक पाठ की नायिका कौन है ?
'धरती कब तक घूमेगी' साँवर दइया द्वारा रचित एक राजस्थानी कहानी है।
कहानी की मुख्य पात्र और नायिका एक वृद्ध विधवा 'सीता' है।
पूरी कहानी सीता और उसके बेटों के बीच संबंधों और उसकी पीड़ा के इर्द-गिर्द घूमती है।
अतः, कहानी की नायिका सीता है।
Quick Tip: 'वर्णिका भाग 2' की सभी कहानियों के मुख्य पात्रों के नाम और उनकी केंद्रीय समस्या को याद रखें।
रामधारी सिंह 'दिनकर' का जन्म कहाँ हुआ था ?
रामधारी सिंह 'दिनकर' हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक, कवि और निबंधकार थे, जिन्हें 'राष्ट्रकवि' के नाम से भी जाना जाता है।
उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था।
अतः, सही विकल्प (A) है।
Quick Tip: प्रमुख कवियों और लेखकों के जन्मस्थान और जन्मतिथि जैसे तथ्यात्मक विवरणों को याद रखना सामान्य ज्ञान और परीक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
किनके पिता एक प्रख्यात पुरातत्त्ववेत्ता थे ?
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हिंदी के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और निबंधकार थे।
उनके पिता का नाम हीरानंद शास्त्री था।
हीरानंद शास्त्री एक बहुत ही प्रसिद्ध और प्रख्यात पुरातत्त्ववेत्ता (archaeologist) और मुद्राशास्त्री थे।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: लेखकों के पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में रोचक तथ्य उनके जीवन और लेखन को समझने में मदद करते हैं और अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
'एक वृक्ष की हत्या' शीर्षक कविता के कवि कौन हैं ?
'एक वृक्ष की हत्या' एक मार्मिक कविता है जिसमें कवि ने एक पेड़ के कट जाने पर अपनी संवेदना व्यक्त की है।
यह कविता पर्यावरण चेतना का एक सशक्त उदाहरण है।
इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध कवि कुँवर नारायण हैं।
अतः, सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई सभी कविताओं के शीर्षक और उनके कवियों के नाम की एक सूची बनाकर याद करें।
जीवनानंद दास किस भाषा के सम्मानित कवि हैं ?
जीवनानंद दास 20वीं सदी के एक प्रमुख कवि, लेखक और निबंधकार थे।
वे मूल रूप से बाँग्ला (बंगाली) भाषा में लिखते थे।
उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर के बाद बाँग्ला भाषा का सबसे महत्वपूर्ण कवि माना जाता है।
उनकी कविता 'लौटकर आऊँगा फिर' आपके पाठ्यक्रम में शामिल है।
Quick Tip: पाठ्यक्रम में शामिल अनुवादित रचनाओं के मूल लेखक और उनकी भाषा के बारे में जानना महत्वपूर्ण है।
'बीजाक्षर' किसकी रचना है ?
'बीजाक्षर' एक काव्य संकलन है।
यह काव्य संकलन समकालीन हिंदी कवयित्री अनामिका द्वारा लिखा गया है।
उनकी कविता 'अक्षर-ज्ञान' इसी संकलन से ली गई है और आपके पाठ्यक्रम में शामिल है।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: जब कोई कविता किसी बड़े काव्य-संग्रह का हिस्सा होती है, तो उस संग्रह का नाम भी याद रखना उपयोगी होता है।
रेनर मारिया रिल्के की माता का नाम क्या था ?
रेनर मारिया रिल्के एक ऑस्ट्रियाई कवि और उपन्यासकार थे।
उनकी कविता 'मेरे बिना तुम प्रभु' आपके पाठ्यक्रम में है।
उनके जीवन परिचय के अनुसार, उनकी माता का नाम सोफिया (Sophie 'Phia' Rilke) था।
अतः, सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: लेखकों और कवियों के जीवन से जुड़े मुख्य तथ्य, जैसे माता-पिता का नाम या जन्मस्थान, अक्सर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का हिस्सा होते हैं।
'जिजीविषा' शब्द का अर्थ है
'जिजीविषा' शब्द वाक्यांश 'जीने की इच्छा' के लिए एक शब्द है।
यह एक प्रबल और तीव्र इच्छा को दर्शाता है।
अतः, इसका सही अर्थ 'जीने की लालसा' या 'जीने की प्रबल इच्छा' है।
अन्य विकल्प इसके अर्थ से मेल नहीं खाते।
Quick Tip: 'वाक्यांश के लिए एक शब्द' वाले हिस्से में कुछ विशेष शब्द जैसे जिजीविषा (जीने की इच्छा), मुमुक्षा (मोक्ष की इच्छा), युयुत्सा (युद्ध की इच्छा) बहुत महत्वपूर्ण हैं और अक्सर पूछे जाते हैं।
बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर का जन्म किस परिवार में हुआ था ?
डॉ. भीमराव अंबेदकर, जिन्हें बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है, भारतीय संविधान के निर्माता थे।
उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।
वे महार जाति में जन्मे थे, जिसे उस समय एक अछूत या दलित समुदाय माना जाता था।
अतः, उनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था।
Quick Tip: महान व्यक्तियों की सामाजिक पृष्ठभूमि और उनके संघर्षों को जानना न केवल परीक्षा के लिए बल्कि एक जागरूक नागरिक बनने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
महात्मा गाँधी का निधन कब हुआ था ?
महात्मा गाँधी, जिन्हें राष्ट्रपिता कहा जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे।
उनकी हत्या 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे द्वारा की गई थी।
इस दिन को भारत में 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (C) पर चिह्न लगा है जो एक गंभीर तथ्यात्मक त्रुटि है। सही उत्तर (A) है।)
Quick Tip: राष्ट्रीय महत्व की तिथियाँ, जैसे महात्मा गाँधी की जन्मतिथि (2 अक्टूबर) और पुण्यतिथि (30 जनवरी), को हमेशा सही-सही याद रखें।
बिस्मिल्ला खाँ साहब अस्सी बरस से प्रार्थना में क्या माँगते थे ?
यह प्रश्न 'नौबतखाने में इबादत' पाठ से है, जो उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन पर आधारित है।
पाठ में बताया गया है कि बिस्मिल्ला खाँ सच्चे संगीत साधक थे।
वे अस्सी वर्ष की उम्र में भी जब नमाज़ पढ़ते थे, तो खुदा से हमेशा एक ही चीज मांगते थे - 'एक सच्चा सुर'।
वे धन-दौलत या शोहरत के बजाय संगीत की पूर्णता के लिए प्रार्थना करते थे।
Quick Tip: किसी व्यक्ति पर आधारित पाठ में उसके चरित्र की सबसे प्रमुख विशेषता को पहचानें। बिस्मिल्ला खाँ के लिए यह उनकी संगीत के प्रति सच्ची लगन और साधना थी।
निम्नलिखित में कौन अशुद्ध शब्द है ?
हमें दिए गए शब्दों में से गलत वर्तनी वाले शब्द को पहचानना है।
(A) दुस्कर: यह शब्द अशुद्ध है। विसर्ग संधि के नियम के अनुसार, इसका शुद्ध रूप 'दुष्कर' (दुः + कर) होता है।
(B) संशोधन: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
(C) वैदेही: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
(D) सीढ़ियाँ: यह शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है।
अतः, अशुद्ध शब्द 'दुस्कर' है।
Quick Tip: विसर्ग संधि के नियमों पर ध्यान दें, विशेषकर जब विसर्ग के बाद 'क', 'ख', 'प', 'फ' आए तो विसर्ग का 'ष्' हो जाता है, जैसे दुः + कर = दुष्कर।
'दोष' शब्द का विशेषण है
विशेषण वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं।
'दोष' एक भाववाचक संज्ञा है। इससे बनने वाला विशेषण वह शब्द होगा जो 'दोष से युक्त' का अर्थ दे।
(A) दूषित का अर्थ है 'खराब किया हुआ', जो 'दोष' से सीधे नहीं बना है।
(B) दोषिल का अर्थ है 'दोष से युक्त'। यह 'दोष' का सही विशेषण रूप है। (प्रचलित रूप 'दोषी' भी है, जो विकल्प में नहीं है)।
(C) दोषियालु और (D) दुषांत निरर्थक शब्द हैं।
अतः, सही विशेषण 'दोषिल' है।
Quick Tip: संज्ञा से विशेषण बनाते समय सही प्रत्यय का प्रयोग महत्वपूर्ण है। 'दोष' में 'इल' प्रत्यय लगकर 'दोषिल' बनता है, जैसे 'पंक' से 'पंकिल'।
'नेह' शब्द का विशेषण है
'नेह' एक तद्भव शब्द है जिसका अर्थ 'स्नेह' या 'प्रेम' होता है।
इसका विशेषण वह शब्द होगा जिसका अर्थ 'स्नेह से युक्त' या 'प्रेम करने वाला' हो।
'स्नेह' का विशेषण 'स्नेही' होता है। उसी प्रकार, 'नेह' का विशेषण 'नेही' होगा।
अन्य विकल्प (नाहक, नास्तिक, नाशक) दिए गए शब्द से संबंधित नहीं हैं।
अतः, सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: तत्सम शब्दों के विशेषण तत्सम होते हैं (स्नेह -> स्नेही) और तद्भव शब्दों के विशेषण तद्भव होते हैं (नेह -> नेही)।
'तामस' का पर्यायवाची शब्द है
'तामस' का अर्थ होता है 'तमोगुण', 'अंधकार', या 'क्रोध'।
हमें इसका पर्यायवाची या समान अर्थ वाला शब्द खोजना है।
(A) तामरस का अर्थ कमल होता है।
(B) त्रैमासिक का अर्थ 'तीन महीने में एक बार होने वाला' है।
(C) तामासू एक निरर्थक शब्द है।
(D) तामसिक का अर्थ है 'तमोगुण से संबंधित' या 'तामस से युक्त'। गुण बताने के बावजूद, यह 'तामस' के भाव को ही प्रकट करता है और दिए गए विकल्पों में सबसे निकटतम पर्यायवाची है।
Quick Tip: कभी-कभी संज्ञा का विशेषण रूप भी पर्यायवाची के तौर पर पूछ लिया जाता है, यदि वह उस भाव या गुण को सबसे अच्छे से व्यक्त कर रहा हो।
'मेरी बहन स्वाति अपनी सहेली के घर गई है।' - यह किस वाक्य का उदाहरण है ?
रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद होते हैं: सरल, संयुक्त और मिश्र।
सरल वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होता है, अर्थात एक ही मुख्य क्रिया होती है।
दिए गए वाक्य में, उद्देश्य 'मेरी बहन स्वाति' है और विधेय 'अपनी सहेली के घर गई है' है।
चूंकि इसमें एक ही कर्ता और एक ही क्रिया है, यह एक सरल वाक्य का उदाहरण है।
Quick Tip: वाक्य की पहचान के लिए क्रियाओं की संख्या देखें। यदि एक ही मुख्य क्रिया है तो वह सरल वाक्य है। यदि दो स्वतंत्र उपवाक्य 'और', 'या', 'इसलिए' जैसे योजकों से जुड़े हैं तो वह संयुक्त वाक्य है। यदि एक मुख्य और एक आश्रित उपवाक्य है तो वह मिश्र वाक्य है।
निम्नलिखित में कौन कर्मवाच्य का उदाहरण है ?
वाच्य के तीन प्रकार हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य।
कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है और क्रिया का लिंग और वचन कर्म के अनुसार होता है। इसमें कर्ता के साथ 'से' या 'द्वारा' विभक्ति लगती है।
(A) रवि विद्यालय जाता है। - यह कर्तृवाच्य है (क्रिया कर्ता 'रवि' के अनुसार)।
(B) थकान के मारे चला नहीं जाता। - यह भाववाच्य है (अकर्मक क्रिया)।
(C) संगीता द्वारा रोटी पकाई गई। - यहाँ 'द्वारा' का प्रयोग है और क्रिया 'पकाई गई' कर्म 'रोटी' (स्त्रीलिंग) के अनुसार है। यह कर्मवाच्य है।
(D) मेरी बातों पर ध्यान दें। - यह आज्ञार्थक वाक्य है, जो कर्तृवाच्य का ही एक रूप है।
Quick Tip: कर्मवाच्य की पहचान का सबसे सरल तरीका है 'द्वारा' शब्द का प्रयोग देखना और यह जाँचना कि क्रिया का लिंग/वचन कर्म के अनुसार बदल रहा है या नहीं।
'पर्याप्त' शब्द में कौन उपसर्ग है ?
उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़ते हैं।
'पर्याप्त' शब्द का संधि-विच्छेद करने पर 'परि + आप्त' प्राप्त होता है।
यहाँ 'परि' उपसर्ग है और 'आप्त' मूल शब्द है।
अतः, 'पर्याप्त' में 'परि' उपसर्ग है।
Quick Tip: 'य' या 'व' से पहले आधा अक्षर आने पर अक्सर यण संधि होती है। संधि-विच्छेद करने से उपसर्ग को पहचानना आसान हो जाता है, जैसे पर्याप्त (परि+आप्त), अन्वेषण (अनु+एषण)।
'आघात' शब्द में कौन उपसर्ग है ?
'आघात' शब्द में मूल शब्द 'घात' है, जिसका अर्थ है 'प्रहार'।
इस मूल शब्द के आरंभ में 'आ' उपसर्ग जुड़ा हुआ है।
'आ' उपसर्ग 'तक', 'समेत' या 'पूर्ण' का अर्थ देता है।
अतः, 'आघात' में 'आ' उपसर्ग है।
Quick Tip: उपसर्ग पहचानने के लिए शब्द में से मूल सार्थक शब्द को अलग करने का प्रयास करें। शेष बचा आरंभिक भाग ही उपसर्ग होता है। जैसे आघात में 'घात' एक सार्थक शब्द है।
'कुपात्र' शब्द में कौन उपसर्ग है ?
'कुपात्र' शब्द में मूल शब्द 'पात्र' है, जिसका अर्थ 'योग्य' या 'बर्तन' होता है।
इसके आरंभ में 'कु' उपसर्ग जुड़ा है।
'कु' उपसर्ग का अर्थ 'बुरा' या 'हीन' होता है।
अतः, 'कुपात्र' (बुरा पात्र) में 'कु' उपसर्ग है।
Quick Tip: 'कु' और 'सु' उपसर्ग एक दूसरे के विलोम हैं। 'कु' बुरे अर्थ में (कुपुत्र, कुकर्म) और 'सु' अच्छे अर्थ में (सुपुत्र, सुकर्म) प्रयोग होता है।
'लुटिया' शब्द में कौन प्रत्यय है ?
प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं जो शब्द के अंत में जुड़ते हैं।
'लुटिया' शब्द 'लोटा' शब्द का लघुतावाचक (छोटा रूप) है।
'लोटा' शब्द में 'इया' प्रत्यय जोड़ने से 'लुटिया' शब्द बनता है (लोट् + इया)।
अतः, इसमें 'इया' प्रत्यय है।
Quick Tip: 'इया' प्रत्यय का प्रयोग अक्सर संज्ञा शब्दों का छोटा या प्यारा रूप बनाने के लिए होता है, जैसे - खाट से खटिया, डिब्बा से डिबिया, लोटा से लुटिया।
सुमित्रानंदन पंत किस वाद के कवि हैं ?
सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे।
उन्हें जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महादेवी वर्मा के साथ हिंदी साहित्य में 'छायावाद' के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है।
उन्हें 'प्रकृति के सुकुमार कवि' के रूप में भी जाना जाता है।
अतः, वे छायावाद के कवि हैं।
Quick Tip: छायावाद के चार स्तंभों के नाम हमेशा याद रखें: प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी वर्मा।
'हिरोशिमा' शीर्षक पाठ के रचनाकार हैं
'हिरोशिमा' एक प्रसिद्ध कविता है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम की त्रासदी का मार्मिक चित्रण करती है।
इस कविता के रचनाकार प्रयोगवाद के प्रवर्तक कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हैं।
यह कविता उनके काव्य-संग्रह 'सदानीरा' में संकलित है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख कविताओं की विषय-वस्तु को याद रखने से उनके कवि का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। 'हिरोशिमा' जैसी आधुनिक और युगीन समस्या पर लिखी कविता प्रयोगवादी कवि 'अज्ञेय' की शैली से मेल खाती है।
निम्न में कौन कवि आदिवासी लोक कविताओं के भी अनुवादक हैं ?
सुमित्रानंदन पंत मूल रूप से छायावादी कवि थे, लेकिन उन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं में काम किया।
उन्होंने लोक साहित्य में भी गहरी रुचि दिखाई।
पंत जी ने कुछ आदिवासी लोक कविताओं का संचयन और भावानुवाद भी किया था, जो उनके लोक-संस्कृति के प्रति अनुराग को दर्शाता है।
दिए गए विकल्पों में, पंत जी इस कार्य के लिए जाने जाते हैं।
Quick Tip: प्रमुख लेखकों के मुख्य साहित्यिक योगदान के अलावा उनके अन्य साहित्यिक कार्यों, जैसे अनुवाद, संपादन आदि पर भी ध्यान दें।
'नेमत' शब्द का अर्थ है
'नेमत' अरबी भाषा का शब्द है जो हिंदी में भी प्रचलित है।
इसका शाब्दिक अर्थ होता है 'वरदान', 'कृपा', 'अनुग्रह' या 'उपहार'।
आमतौर पर इसका प्रयोग ईश्वर द्वारा दिए गए उपहारों या कृपा के लिए किया जाता है।
अतः, दिए गए विकल्पों में सबसे सटीक अर्थ 'ईश्वर की देन' है।
Quick Tip: हिंदी में अरबी-फारसी के कई शब्द प्रचलित हैं। इन शब्दों के अर्थ जानने से आपका शब्द-भंडार समृद्ध होता है।
'उदात्त' शब्द का अर्थ है
'उदात्त' एक विशेषण शब्द है।
इसका अर्थ होता है 'ऊँचा', 'श्रेष्ठ', 'महान', 'उत्कृष्ट' या 'उन्नत'।
यह ऊँचे विचारों या भावों के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे 'उदात्त विचार'।
दिए गए विकल्पों में 'उन्नत' इसका सबसे निकटतम समानार्थी है।
Quick Tip: 'उदात्त' और 'उद्धत' (जिसका अर्थ है उद्दंड) जैसे मिलते-जुलते शब्दों के अर्थ में भ्रमित न हों। सही वर्तनी और अर्थ पर ध्यान दें।
'सयानप' शब्द का अर्थ है
'सयानप' एक तद्भव शब्द है जो 'सयानापन' का एक रूप है।
'सयाना' होने का अर्थ है समझदार या चतुर होना।
अतः, 'सयानप' का अर्थ 'समझदारी', 'होशियारी' या 'चतुराई' होता है।
दिए गए विकल्पों में 'चतुराई' सबसे उपयुक्त अर्थ है।
Quick Tip: तद्भव शब्दों का अर्थ समझने के लिए उनके तत्सम रूप को याद करने का प्रयास करें। 'सयानप' का संबंध संस्कृत शब्द 'सज्ञान' से भी जोड़ा जा सकता है।
गुरु नानक को किस मुगल सम्राट से मुलाकात हुई थी ?
गुरु नानक देव जी का जीवनकाल 1469 से 1539 ईस्वी तक था।
मुगल वंश के संस्थापक बाबर का भारत पर शासनकाल 1526 से 1530 ईस्वी तक था।
ऐतिहासिक साक्ष्यों और गुरु नानक देव जी की रचनाओं ('बाबरवाणी') के अनुसार, बाबर के आक्रमण के समय गुरु नानक की उनसे भेंट हुई थी।
अतः, गुरु नानक की मुलाकात मुगल सम्राट बाबर से हुई थी।
Quick Tip: प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तियों के जीवनकाल की तुलना करके यह पता लगाया जा सकता है कि वे किसके समकालीन थे।
'हाटक मैं देखहु भरा, बसे अंगरेजी माल' - पंक्ति के कवि हैं
यह पंक्ति भारतेंदु युग के प्रमुख कवि बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' द्वारा रचित 'स्वदेशी' शीर्षक कविता से ली गई है।
इस पंक्ति का अर्थ है कि बाजार विदेशी वस्तुओं से भरे पड़े हैं।
कवि इस पंक्ति के माध्यम से देश में विदेशी वस्तुओं के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हैं।
अतः, इस पंक्ति के कवि 'प्रेमघन' हैं।
Quick Tip: 'स्वदेशी' कविता की मुख्य भावना विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी को अपनाना है। इस भाव से जुड़ी पंक्तियाँ प्रेमघन की रचना हो सकती हैं।
'हस्तलिपि' किसे कहते हैं ?
'हस्तलिपि' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: 'हस्त' (जिसका अर्थ है हाथ) और 'लिपि' (जिसका अर्थ है लिखावट)।
इस प्रकार, 'हस्तलिपि' का शाब्दिक अर्थ 'हाथ की लिखावट' (handwriting) होता है।
इसे 'पांडुलिपि' (manuscript) भी कहते हैं।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: सामासिक शब्दों का अर्थ समझने के लिए उनके constituent शब्दों का अर्थ जानना सहायक होता है।
'साखी (साक्षी)' शब्द का अर्थ है
'साखी' शब्द संस्कृत के 'साक्षी' शब्द का तद्भव रूप है।
'साक्षी' का अर्थ होता है 'गवाह' (witness) या 'प्रत्यक्षदर्शी'।
भक्तिकाल के कवि कबीर की रचनाओं को 'साखी' कहा जाता है क्योंकि वे उनके द्वारा देखे गए और अनुभव किए गए सत्य की गवाही देती हैं।
अतः, 'साखी' का सबसे सटीक अर्थ 'गवाही' है।
Quick Tip: तत्सम (साक्षी) और तद्भव (साखी) रूपों को एक साथ याद रखने से अर्थ स्पष्ट हो जाता है। साक्षी का अर्थ गवाह होता है, जो किसी घटना की गवाही देता है।
निम्न में कौन पंचमाक्षर है ?
पंचमाक्षर का अर्थ है 'पाँचवाँ अक्षर'।
हिंदी वर्णमाला के वर्गीय व्यंजनों (क वर्ग, च वर्ग, ट वर्ग, त वर्ग, प वर्ग) के प्रत्येक वर्ग के पाँचवें वर्ण को पंचमाक्षर या नासिक्य व्यंजन कहते हैं।
(A) छ - यह 'च' वर्ग का दूसरा अक्षर है।
(B) त - यह 'त' वर्ग का पहला अक्षर है।
(C) स - यह एक ऊष्म व्यंजन है, वर्गीय व्यंजन नहीं।
(D) ण - यह 'ट' वर्ग का पाँचवाँ अक्षर है (ट, ठ, ड, ढ, ण)। अतः यह एक पंचमाक्षर है।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (A) पर लगा चिह्न गलत है।)
Quick Tip: पाँच पंचमाक्षर हैं: ङ (क-वर्ग), ञ (च-वर्ग), ण (ट-वर्ग), न (त-वर्ग), और म (प-वर्ग)। इन्हें याद रखें।
'त्र' किन वर्षों के मेल से बना है ?
'त्र' एक संयुक्त व्यंजन है।
संयुक्त व्यंजन दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं।
'त्र' का निर्माण आधे 'त' (त्) और पूरे 'र' के मिलने से होता है।
अतः, त्र = त् + र।
विकल्प (C) भी सही है (त् + र + अ), लेकिन जब वर्ण-विच्छेद के रूप में न पूछकर केवल मेल पूछा जाए, तो (B) अधिक सटीक उत्तर होता है।
Quick Tip: चार संयुक्त व्यंजन याद रखें: क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ, श्र = श् + र।
निम्न में कौन दीर्घ स्वर है ?
उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वर के दो मुख्य भेद हैं: ह्रस्व स्वर और दीर्घ स्वर।
ह्रस्व स्वर: जिनके उच्चारण में कम समय लगता है। ये हैं - अ, इ, उ, ऋ।
दीर्घ स्वर: जिनके उच्चारण में ह्रस्व स्वर से अधिक समय लगता है। ये हैं - आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
दिए गए विकल्पों में 'ई' एक दीर्घ स्वर है, जबकि 'अ', 'उ', और 'ऋ' ह्रस्व स्वर हैं।
Quick Tip: दीर्घ स्वरों को मूल स्वरों के युग्म के रूप में याद रख सकते हैं: अ+अ=आ, इ+इ=ई, उ+उ=ऊ।
'ऊ' का उच्चारण-स्थान है
वर्णों का उच्चारण मुख के विभिन्न भागों से होता है, जिन्हें उच्चारण-स्थान कहते हैं।
'उ' और 'ऊ' स्वरों का उच्चारण करते समय होंठ (ओष्ठ) गोलाकार होते हैं।
अतः, इनका उच्चारण-स्थान 'ओष्ठ' है। इन्हें ओष्ठ्य वर्ण कहते हैं।
Quick Tip: वर्णों का स्वयं उच्चारण करके देखें। 'ऊ' बोलते समय आप महसूस करेंगे कि आपके होंठ सक्रिय हैं और गोल हो रहे हैं, जिससे उच्चारण-स्थान का पता लगाना आसान हो जाता है।
निम्न में कौन ऊष्म व्यंजन है ?
ऊष्म व्यंजन वे व्यंजन होते हैं जिनके उच्चारण में मुख से गर्म हवा (ऊष्मा) निकलती है।
हिंदी वर्णमाला में चार ऊष्म व्यंजन हैं: श, ष, स, ह।
(A) ऋ - यह एक स्वर है।
(B) त्र - यह एक संयुक्त व्यंजन है।
(C) ष - यह एक ऊष्म व्यंजन है।
(D) म - यह एक स्पर्श और नासिक्य व्यंजन है।
अतः, 'ष' ऊष्म व्यंजन है।
Quick Tip: अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) और ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) के समूह को याद कर लें, क्योंकि इनसे अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
'जपुजी' किसकी रचना है ?
'जपुजी साहिब' सिख धर्म का एक प्रमुख और पवित्र ग्रंथ है।
यह श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आरंभ में संकलित है और इसे सिख धर्म की मूल शिक्षा माना जाता है।
इसकी रचना सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी ने की थी।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख भक्तिकालीन कवियों की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं को याद रखें, जैसे कबीर की 'बीजक', जायसी की 'पद्मावत', तुलसीदास की 'रामचरितमानस' और गुरु नानक की 'जपुजी साहिब'।
रसखान किस छंद में सिद्ध थे ?
रसखान कृष्ण-भक्ति शाखा के एक प्रमुख कवि थे।
उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में हैं और वे अपनी मधुरता और प्रवाह के लिए प्रसिद्ध हैं।
रसखान ने अपनी भक्ति को व्यक्त करने के लिए मुख्य रूप से 'सवैया' और 'कवित्त' छंदों का प्रयोग किया, लेकिन वे 'सवैया' छंद के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
उनके सवैये आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (C) पर लगा चिह्न गलत है। चौपाई के लिए तुलसीदास प्रसिद्ध हैं।)
Quick Tip: कवियों को उनके प्रिय छंदों से जोड़कर याद करें। जैसे - रसखान को सवैया से, घनानंद को घनाक्षरी से, और तुलसीदास को चौपाई-दोहा से।
किसने 'जीर्ण जनपद' नामक एक काव्य लिखा, जिसमें ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी चित्रण है ?
'जीर्ण जनपद' एक प्रबंध-काव्य है।
इसकी रचना भारतेंदु युग के प्रमुख कवि बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' ने की थी।
इस काव्य में उन्होंने ग्रामीण जीवन और वहाँ की दुर्दशा का यथार्थवादी चित्रण किया है।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (B) पर लगा चिह्न गलत है।)
Quick Tip: भारतेंदु युग के कवियों की रचनाओं में अक्सर सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना के स्वर मिलते हैं, जैसे 'प्रेमघन' के काव्य 'जीर्ण जनपद' में ग्रामीण दुर्दशा का चित्रण।
घनानंद किस भाषा में लिखते थे ?
घनानंद रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के सर्वप्रमुख कवि थे।
रीतिकाल में काव्य की प्रमुख भाषा ब्रजभाषा थी।
घनानंद ने अपनी प्रेम की पीर को अभिव्यक्त करने के लिए अत्यंत परिष्कृत और लाक्षणिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया।
अतः, वे ब्रजभाषा में लिखते थे।
Quick Tip: याद रखें कि रीतिकाल की प्रमुख काव्य भाषा ब्रजभाषा थी, जबकि भक्तिकाल में ब्रजभाषा और अवधी दोनों का प्रयोग हुआ। आधुनिक काल में खड़ीबोली प्रमुख हो गई।
सुमित्रानंदन पंत की माता का नाम क्या था ?
सुमित्रानंदन पंत का जन्म उत्तराखंड के कौसानी में हुआ था।
उनके पिता का नाम गंगादत्त पंत था।
उनकी माता का नाम सरस्वती देवी था, जिनका निधन पंत जी के जन्म के कुछ ही घंटों बाद हो गया था।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (A) पर लगा चिह्न गलत है।)
Quick Tip: प्रमुख लेखकों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं (जैसे पंत जी की माता का शीघ्र निधन) को याद रखें, क्योंकि इसका उनके साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।
निम्नलिखित में कौन शब्द विसर्ग संधि का उदाहरण है ?
हम सभी विकल्पों का संधि-विच्छेद करेंगे:
(A) नयन = ने + अन (अयादि स्वर संधि)
(B) अन्वित = अनु + इत (यण् स्वर संधि)
(C) मनोयोग = मनः + योग (विसर्ग संधि)। यहाँ विसर्ग (:) का 'ओ' हो गया है।
(D) उल्लंघन = उत् + लंघन (व्यंजन संधि)
अतः, 'मनोयोग' विसर्ग संधि का उदाहरण है।
Quick Tip: यदि शब्द के बीच में 'ओ' की मात्रा हो और उसे हटाने पर 'मनः', 'यशः', 'सरः' जैसे सार्थक शब्द बनें, तो वहाँ विसर्ग संधि की संभावना होती है। जैसे - मनोहर (मनः+हर), यशोदा (यशः+दा)।
'उप + ईक्षा' पदों की संधि है
यह गुण स्वर संधि का उदाहरण है।
गुण संधि का नियम है: यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए तो दोनों मिलकर 'ए' हो जाते हैं।
यहाँ, 'उप' के अंत में 'अ' है और 'ईक्षा' के आरंभ में 'ई' है।
अतः, अ + ई = ए।
उप + ईक्षा = उपेक्षा।
Quick Tip: गुण संधि के तीन परिणाम याद रखें: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।
'नारायण' शब्द का संधि-विच्छेद है
'नारायण' शब्द में दीर्घ स्वर संधि और व्यंजन संधि का एक विशेष नियम दोनों लागू होते हैं।
पहले दीर्घ संधि होती है: नार + अयन = नारायण।
इसके बाद व्यंजन संधि के नियम के अनुसार, यदि एक ही पद में 'ऋ', 'र', या 'ष' के बाद 'न' आए, तो 'न' का 'ण' हो जाता है।
यहाँ 'र' के बाद 'न' आ रहा है, इसलिए 'न' का 'ण' हो गया।
सही विच्छेद होगा 'नार + अयन'। लेकिन दिए गए विकल्पों में 'नारा + अयण' को भी सही माना जाता है, जिसका अर्थ है 'जल है जिसका घर'। यहाँ 'नार' का अर्थ 'जल' होता है। (नार + अयन = नारायण)। विकल्प B सही है।
यदि विकल्प A 'नारा + अयण' को देखें, तो यह भी 'नार + अयन' के समान ही है और प्रचलित है। प्रश्न पत्र के अनुसार, (A) को सही माना गया है।
Quick Tip: 'रामायण' (राम + अयन) और 'नारायण' (नार + अयन) में 'ण' का प्रयोग व्यंजन संधि के एक विशेष नियम के कारण होता है।
'तद्धित' शब्द का संधि-विच्छेद है
यह व्यंजन संधि का एक विशेष नियम है।
नियम के अनुसार, यदि 'त्' के बाद 'ह' आए, तो 'त्' का 'द्' और 'ह' का 'ध्' हो जाता है।
इस प्रकार, 'त्' + 'ह' = 'द्ध'।
अतः, तत् + हित = तद्धित।
यह उसी नियम का उदाहरण है जैसे उत् + हार = उद्धार।
Quick Tip: व्यंजन संधि के कुछ विशेष नियमों को उदाहरणों के साथ याद करें, जैसे 'त्' + 'ह' = 'द्ध' (उद्धार, तद्धित) और 'त्' + 'श' = 'च्छ' (उच्छ्वास)।
'राहखर्च' शब्द का समास-विग्रह है
'राहखर्च' एक सामासिक पद है।
इसका विग्रह करने पर अर्थ निकलता है 'राह के लिए खर्च', यानी यात्रा के लिए किया जाने वाला खर्च।
यहाँ 'के लिए' विभक्ति चिह्न का लोप हुआ है, जो संप्रदान कारक का चिह्न है।
अतः, यह संप्रदान तत्पुरुष समास का उदाहरण है और इसका सही विग्रह 'राह के लिए खर्च' है।
Quick Tip: समास-विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच सही कारक विभक्ति या संबंधवाचक शब्द लगाकर देखें कि कौन सा सबसे सटीक अर्थ देता है।
'शरणागत' शब्द में कौन समास है ?
'शरणागत' का समास-विग्रह होता है 'शरण में आगत'।
'आगत' का अर्थ है 'आया हुआ'। तो पूरा अर्थ है 'शरण में आया हुआ'।
यहाँ 'में' विभक्ति चिह्न का लोप हुआ है।
'में' और 'पर' अधिकरण कारक के चिह्न हैं। अतः, यह अधिकरण तत्पुरुष समास है।
Quick Tip: तत्पुरुष समास के भेद को पहचानने के लिए विग्रह करें और देखें कि किस कारक की विभक्ति का लोप हुआ है। (कर्म-को, करण-से, संप्रदान-के लिए, अपादान-से, संबंध-का/के/की, अधिकरण-में/पर)।
'समक्ष' शब्द किस समास का उदाहरण है ?
अव्ययीभाव समास में पहला पद प्रधान होता है और वह अव्यय (जैसे उपसर्ग) होता है।
'समक्ष' का विग्रह होता है 'अक्षि के सामने'। (अक्षि = आँख)।
यहाँ 'स' उपसर्ग का प्रयोग 'सामने' के अर्थ में हुआ है, और पूरा पद 'समक्ष' एक क्रिया-विशेषण अव्यय की तरह कार्य करता है।
अतः, यह अव्ययीभाव समास का उदाहरण है।
Quick Tip: जिन सामासिक शब्दों का पहला पद उपसर्ग हो (जैसे- यथा, प्रति, आ, सम्, निर्), वे अक्सर अव्ययीभाव समास होते हैं।
'दुपहर' शब्द किस समास का उदाहरण है ?
द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और पूरा पद एक समूह का बोध कराता है।
'दुपहर' शब्द का विग्रह है 'दो पहरों का समाहार (समूह)'।
यहाँ पहला पद 'दु' (दो) संख्यावाची है।
अतः, यह द्विगु समास का उदाहरण है।
Quick Tip: जिस समास का पहला पद संख्या हो, वह द्विगु समास होता है। जैसे - चौराहा (चार राहों का समूह), त्रिलोक (तीन लोकों का समूह)।
'गर्दन पर सवार होना' मुहावरे का अर्थ है
'गर्दन पर सवार होना' एक प्रचलित मुहावरा है।
इसका लाक्षणिक अर्थ होता है किसी काम के लिए किसी के पीछे पड़ जाना या उसे लगातार परेशान करना।
दिए गए विकल्पों में 'पीछा न छोड़ना' इसका सबसे सटीक अर्थ है।
Quick Tip: मुहावरों का अर्थ शाब्दिक नहीं, बल्कि लाक्षणिक होता है। उनके अर्थ को वाक्य में प्रयोग करके समझने का प्रयास करें। जैसे: "वह अपना काम करवाने के लिए मेरी गर्दन पर सवार हो गया है।"
'होनहार बिरवान के होत चीकने पात' लोकोक्ति का अर्थ है
यह एक प्रसिद्ध लोकोक्ति (कहावत) है।
इसका शाब्दिक अर्थ है कि जो पौधा होनहार (स्वस्थ और बढ़ने वाला) होता है, उसके पत्ते शुरू से ही चिकने और सुंदर होते हैं।
इसका लाक्षणिक अर्थ है कि जो व्यक्ति भविष्य में महान या सफल होने वाला होता है, उसके गुण या प्रतिभा बचपन में ही प्रकट होने लगते हैं।
अतः, सही अर्थ है 'होनहार के लक्षण पहले से ही दिखाई पड़ने लगते हैं'।
Quick Tip: लोकोक्तियाँ लोक-अनुभव पर आधारित होती हैं और पूरे वाक्य के रूप में होती हैं। उनके शाब्दिक अर्थ से लाक्षणिक अर्थ तक पहुँचने का प्रयास करें।
'यह घर नवीन का है' - यह किस विशेषण का उदाहरण है ?
इस वाक्य में 'यह' शब्द 'घर' (संज्ञा) की ओर संकेत कर रहा है।
जब कोई सर्वनाम शब्द संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बताने या उसकी ओर संकेत करने का कार्य करता है, तो वह 'सार्वनामिक विशेषण' कहलाता है।
यहाँ 'यह' सर्वनाम 'घर' संज्ञा के लिए विशेषण का कार्य कर रहा है।
अतः, यह सार्वनामिक विशेषण का उदाहरण है।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (C) पर लगा चिह्न गलत है। प्रविशेषण वह होता है जो विशेषण की विशेषता बताए, जैसे 'बहुत सुंदर' में 'बहुत'।)
Quick Tip: सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में अंतर: यदि 'यह', 'वह' आदि शब्द संज्ञा के स्थान पर अकेले आएं तो वे सर्वनाम हैं (जैसे, 'यह मेरा है।')। यदि वे संज्ञा के ठीक पहले आएं तो सार्वनामिक विशेषण हैं (जैसे, 'यह घर मेरा है।')।
'थानभर कपड़ा' - यह किस विशेषण का उदाहरण है ?
परिमाणवाचक विशेषण वे शब्द होते हैं जो किसी संज्ञा की मात्रा, नाप या तौल बताते हैं।
इस वाक्यांश में 'थानभर' शब्द 'कपड़ा' (संज्ञा) की मात्रा या नाप बता रहा है।
यह कपड़े की एक निश्चित मात्रा (पूरा थान) का बोध करा रहा है, अतः यह निश्चित परिमाणवाचक विशेषण है।
(नोट: प्रश्न पत्र में उत्तर (A) पर लगा चिह्न गलत है। यह गुण नहीं, बल्कि मात्रा बता रहा है।)
Quick Tip: जिन वस्तुओं को गिना नहीं जा सकता, बल्कि नापा या तौला जाता है (जैसे कपड़ा, दूध, चीनी), उनकी विशेषता बताने वाले शब्द परिमाणवाचक विशेषण होते हैं।
'शाश्वत खाता होगा' - किस वर्तमान काल का उदाहरण है ?
क्रिया के जिस रूप से वर्तमान काल में कार्य के होने में संदेह या अनिश्चितता का बोध हो, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं।
इसकी पहचान क्रिया के साथ 'ता होगा', 'ती होगी', 'ते होंगे' का प्रयोग है।
वाक्य 'शाश्वत खाता होगा' में खाने की क्रिया के वर्तमान में होने पर संदेह प्रकट किया जा रहा है।
अतः, यह संदिग्ध वर्तमान काल का उदाहरण है।
Quick Tip: संदिग्ध (Doubtful) और संभाव्य (Probable) में अंतर: संदिग्ध में '...ता होगा' (अनिश्चितता) और संभाव्य में 'शायद...ता हो' (संभावना) का प्रयोग होता है।
निम्न में कौन वाक्य अकर्मक क्रिया का उदाहरण है ?
अकर्मक क्रिया वह होती है जिसमें क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है, कर्म पर नहीं। इसकी पहचान के लिए क्रिया से पहले 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करते हैं। यदि उत्तर न मिले तो क्रिया अकर्मक है।
(A) (क्या) खाता है? - उत्तर: बिस्कुट (कर्म है, अतः सकर्मक)।
(B) (क्या) सोती है? - उत्तर: नहीं मिला (अतः अकर्मक)।
(C) (क्या) गाती है? - उत्तर: गीत (कर्म है, अतः सकर्मक)।
(D) (क्या) खाती है? - उत्तर: घास (कर्म है, अतः सकर्मक)।
अतः, 'प्रेमा सोती है' अकर्मक क्रिया का उदाहरण है।
Quick Tip: सोना, रोना, हँसना, चलना, दौड़ना, उड़ना जैसी स्वाभाविक क्रियाएँ प्रायः अकर्मक होती हैं।
'खरगोश बिल से बाहर निकला' - इस वाक्य में कौन कारक है ?
कारक संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया से संबंध बताते हैं।
अपादान कारक का चिह्न 'से' होता है और यह अलग होने (separation), निकलने, डरने, तुलना करने आदि के भाव में प्रयुक्त होता है।
इस वाक्य में खरगोश 'बिल से' अलग हो रहा है या बाहर निकल रहा है।
यहाँ 'से' विभक्ति अलग होने का भाव प्रकट कर रही है, अतः यहाँ अपादान कारक है।
Quick Tip: 'से' विभक्ति करण कारक (साधन के अर्थ में, जैसे 'चाकू से') और अपादान कारक (अलग होने के अर्थ में, जैसे 'पेड़ से') दोनों में आती है। वाक्य के अर्थ से इनके भेद को पहचानें।
जिस छंद में चार चरण और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं, उसे कौन छंद कहते हैं ?
यह चौपाई छंद की परिभाषा है।
चौपाई एक सम मात्रिक छंद है।
इसके चार चरण (पाद) होते हैं और प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
अतः, सही उत्तर चौपाई है।
Quick Tip: प्रमुख छंदों की मात्राओं को याद रखें: चौपाई (प्रत्येक चरण में 16), दोहा (पहले और तीसरे में 13, दूसरे और चौथे में 11), सोरठा (दोहे का उल्टा)।
जहाँ वर्षों की एक या अनेक बार आवृत्ति हो वहाँ कौन अलंकार होता है ?
अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व होते हैं।
अनुप्रास अलंकार में किसी वर्ण (letter) की बार-बार आवृत्ति होती है, जिससे काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है।
जैसे - 'चारु चंद्र की चंचल किरणें', यहाँ 'च' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
अतः, वर्णों की आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है।
Quick Tip: अलंकारों में अंतर समझें: अनुप्रास (वर्ण की आवृत्ति), यमक (एक शब्द अनेक बार आए और हर बार अर्थ अलग हो), श्लेष (एक शब्द के अनेक अर्थ चिपके हों)।
किसे हम 'वर्गीय व्यंजन' भी कहते हैं ?
हिंदी वर्णमाला में 'क' से लेकर 'म' तक के 25 व्यंजनों को स्पर्श व्यंजन कहा जाता है क्योंकि इनके उच्चारण में जिह्वा मुख के किसी न किसी भाग को स्पर्श करती है।
इन 25 व्यंजनों को पाँच-पाँच के पाँच वर्गों (क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग, प-वर्ग) में बाँटा गया है।
वर्गों में विभाजित होने के कारण ही इन्हें 'वर्गीय व्यंजन' भी कहा जाता है।
अतः, स्पर्श व्यंजन को ही वर्गीय व्यंजन कहते हैं।
Quick Tip: स्पर्श व्यंजन = वर्गीय व्यंजन। ये 'क' से 'म' तक कुल 25 होते हैं।
निम्न में कौन अल्पप्राण व्यंजन है ?
प्राण (श्वास वायु) के आधार पर व्यंजन के दो भेद हैं: अल्पप्राण और महाप्राण।
अल्पप्राण: जिनके उच्चारण में कम श्वास वायु लगती है। प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा, पाँचवाँ वर्ण और सभी अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) अल्पप्राण होते हैं।
महाप्राण: जिनके उच्चारण में अधिक श्वास वायु लगती है। प्रत्येक वर्ग का दूसरा, चौथा वर्ण और सभी ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) महाप्राण होते हैं।
(A) ठ - ट वर्ग का दूसरा वर्ण (महाप्राण)।
(B) ब - प वर्ग का तीसरा वर्ण (अल्पप्राण)।
(C) भ - प वर्ग का चौथा वर्ण (महाप्राण)।
(D) फ - प वर्ग का दूसरा वर्ण (महाप्राण)।
अतः, 'ब' अल्पप्राण व्यंजन है।
Quick Tip: वर्गों के लिए अल्पप्राण-महाप्राण का क्रम याद रखें: 1(अल्प), 2(महा), 3(अल्प), 4(महा), 5(अल्प)।
निम्न में कौन महाप्राण व्यंजन है ?
प्राण (श्वास वायु) के आधार पर व्यंजन के दो भेद हैं: अल्पप्राण और महाप्राण।
महाप्राण व्यंजनों के उच्चारण में अधिक श्वास वायु की आवश्यकता होती है।
प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण तथा सभी ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) महाप्राण होते हैं।
(A) क - क वर्ग का पहला वर्ण (अल्पप्राण)।
(B) च - च वर्ग का पहला वर्ण (अल्पप्राण)।
(C) ध - त वर्ग का चौथा वर्ण (त, थ, द, ध) (महाप्राण)।
(D) ञ - च वर्ग का पाँचवाँ वर्ण (अल्पप्राण)।
अतः, 'ध' महाप्राण व्यंजन है।
Quick Tip: महाप्राण व्यंजनों की पहचान का एक सरल तरीका यह है कि उनके उच्चारण में 'ह' जैसी ध्वनि (h-sound) सुनाई देती है, जैसे - ख (kh), घ (gh), छ (chh), झ (jh), ध (dh) आदि।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।
(क) प्रेमचंद हिन्दी के महान् साहित्यकार हैं । इनकी रचनाओं में भारतीय समाज और संस्कृति की झलक दिखाई पड़ती है । प्रेमचंद की रचनाएँ आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का उदाहरण हैं । प्रेमचंद एक सफल उपन्यासकार एवं कहानीकार दोनों ही रूपों में समान रूप से चर्चित हैं। इन्हें 'कथा सम्राट' एवं 'उपन्यास सम्राट' कहकर भी पुकारा जाता है । उपन्यास एवं कहानी के क्षेत्रों में किए गये इनके अवदानों के लिए हिन्दी साहित्य सर्वदा ऋणी रहेगा । प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियों को लिखा है । 'मानसरोवर' के आठ भागों में इनकी कहानियाँ संकलित हैं।
(i) प्रेमचंद कौन हैं ?
उत्तर:
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार, प्रेमचंद हिन्दी के महान् साहित्यकार हैं।
उन्हें 'कथा सम्राट' एवं 'उपन्यास सम्राट' के रूप में भी जाना जाता है।
(ii) प्रेमचंद की रचनाओं में किसकी झलक दिखाई पड़ती है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, प्रेमचंद की रचनाओं में भारतीय समाज और संस्कृति की झलक दिखाई पड़ती है।
(iii) प्रेमचंद किन रूपों में चर्चित हैं ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, प्रेमचंद एक सफल उपन्यासकार एवं कहानीकार, दोनों ही रूपों में समान रूप से चर्चित हैं।
(iv) प्रेमचंद ने लगभग कितनी कहानियों को लिखा है ?
उत्तर:
दिए गए गद्यांश के अनुसार, प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियों को लिखा है।
(v) प्रेमचन्द की कहानियाँ कहाँ संकलित हैं ?
उत्तर:
गद्यांश की अंतिम पंक्ति के अनुसार, प्रेमचंद की कहानियाँ 'मानसरोवर' के आठ भागों में संकलित हैं।
Quick Tip: अपठित गद्यांश के प्रश्नों का उत्तर देते समय, केवल गद्यांश में दी गई जानकारी का ही प्रयोग करें। अपनी ओर से कोई अतिरिक्त जानकारी न जोड़ें।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।
(ख) मिथेन एक प्राकृतिक, रंगहीन और गंधहीन गैस है। ग्रीनहाउस गैस होने के कारण यह वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए भी जवाबदेह है। आजकल मिथेन गैस का उपयोग ईंधन के साथ-साथ यातायात की सुविधाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा किया जा रहा है । पशुपालन, कोयला, बिजली-घर एवं दलदल भूमि आदि मिथेन गैस के प्रमुख उत्सर्जन स्रोत हैं । मिथेन गैस को मार्श गैस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अत्यंत ज्वलनशील गैस है इसलिए इसको सावधानीपूर्वक उपयोग में लाना चाहिए । मिथेन गैस जल में अघुलनशील है। कोयला की खानों में मिथेन गैस के एकत्रित होने से अग्नि दुर्घटना घटित होने का भी भय रहता है। मिथेन गैस का रासायनिक सूत्र 'CH₄' है।
(i) मिथेन क्या है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, मिथेन एक प्राकृतिक, रंगहीन और गंधहीन गैस है।
यह एक ग्रीनहाउस गैस और अत्यंत ज्वलनशील गैस है।
(ii) आजकल मिथेन गैस का उपयोग किन रूपों में किया जा रहा है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, आजकल मिथेन गैस का उपयोग ईंधन के साथ-साथ यातायात की सुविधाओं के लिए भी किया जा रहा है।
(iii) मिथेन गैस के प्रमुख उत्सर्जन स्रोत कौन हैं ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, मिथेन गैस के प्रमुख उत्सर्जन स्रोत पशुपालन, कोयला, बिजली-घर एवं दलदल भूमि आदि हैं।
(iv) मार्श गैस के नाम से किसे जाना जाता है ?
उत्तर:
दिए गए गद्यांश के अनुसार, मिथेन गैस को मार्श गैस के नाम से भी जाना जाता है।
(v) मिथेन गैस का रासायनिक सूत्र क्या है ?
उत्तर:
गद्यांश के अंत में दिए गए अनुसार, मिथेन गैस का रासायनिक सूत्र 'CH₄' है।
Quick Tip: वैज्ञानिक विषयों पर आधारित गद्यांशों में तथ्यात्मक जानकारी पर विशेष ध्यान दें, जैसे परिभाषा, उपयोग, स्रोत, और सूत्र।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।
(क) प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता। पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से प्रेम करते हुए उनकी शिक्षा आरंभ हुई । जगदीशचंद्र बसु बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। ये भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में महारथी थे । जगदीशचंद्र बसु पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिसने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी विषय पर कार्य किया । वनस्पति विज्ञान में भी इन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खोजें कीं। भारत के पहले वैज्ञानिक शोधकर्ता जगदीशचन्द्र बसु ही थे । इनको रेडियो विज्ञान का पिता कहा जाता है ।
(i) जगदीशचन्द्र बसु का बचपन कैसे बीता ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता।
(ii) बहुमुखी प्रतिभा के धनी कौन थे ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, जगदीशचंद्र बसु बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
(iii) जगदीशचन्द्र बसु किनमें महारथी थे ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, जगदीशचंद्र बसु भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में महारथी थे।
(iv) जगदीशचन्द्र बसु ने किस विषय पर कार्य किया ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, जगदीशचंद्र बसु ने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी विषय पर कार्य किया।
(v) जगदीशचन्द्र बसु को किसका पिता कहा जाता है ?
उत्तर:
दिए गए गद्यांश के अनुसार, जगदीशचंद्र बसु को रेडियो विज्ञान का पिता कहा जाता है।
Quick Tip: जीवनी पर आधारित गद्यांशों में व्यक्ति के जीवन, उपलब्धियों और योगदानों से संबंधित मुख्य बिंदुओं को रेखांकित कर लें।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।
(ख) मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे। इनकी गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ियों में की जाती है। मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' भी कहा जाता है । भारत को ओलंपिक खेलों में तीन स्वर्ण पदक दिलाने में इनकी अहम भूमिका रही है । मेजर ध्यानचंद को भारत सरकार ने देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' प्रदान किया । इनके सम्मान में भारत सरकार ने स्मारक डाक टिकट भी जारी किया है। मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को 'राष्ट्रीय खेल दिवस' के रूप में मनाया जाता है। भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार 'खेल रत्न' उनके नाम पर ही दिया जाता है।
(i) मेजर ध्यानचंद कौन थे ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे।
(ii) मेजर ध्यानचंद की गिनती किसमें की जाती है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, मेजर ध्यानचंद की गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ियों में की जाती है।
(iii) 'हॉकी का जादूगर' किसको कहा जाता है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता है।
(iv) मेजर ध्यानचंद की अहम भूमिका किसमें रही है ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, भारत को ओलंपिक खेलों में तीन स्वर्ण पदक दिलाने में मेजर ध्यानचंद की अहम भूमिका रही है।
(v) भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद को कौन-सा नागरिक सम्मान प्रदान किया ?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद को देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' प्रदान किया।
Quick Tip: गद्यांश में किसी व्यक्ति को दी गई उपाधियों (जैसे 'हॉकी का जादूगर') और सम्मानों (जैसे 'पद्म भूषण') पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये अक्सर प्रश्न बनते हैं।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 250 - 300 शब्दों में निबंध लिखें।
(क) आजादी का अमृत महोत्सव
संकेत बिंदु: (i) भूमिका, (ii) कारण, (iii) महत्त्व, (iv) उपसंहार
उत्तर:
(i) भूमिका
आजादी का अमृत महोत्सव भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार द्वारा आयोजित एक भव्य उत्सव है।
यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने, अपने इतिहास को फिर से जानने और एक नए भारत के निर्माण का संकल्प लेने का एक अवसर है।
इस महोत्सव का आरंभ 12 मार्च 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा साबरमती आश्रम से किया गया, जो गाँधीजी के प्रसिद्ध दांडी मार्च की वर्षगाँठ का दिन है।
यह महोत्सव 15 अगस्त 2023 तक चला, जो हमें हमारी आजादी के गौरवपूर्ण क्षणों की याद दिलाता है।
(ii) कारण
इस महोत्सव को मनाने का मुख्य कारण भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ का जश्न मनाना है।
इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और उनके बलिदानों से परिचित कराना है।
यह महोत्सव हमें यह याद दिलाता है कि यह आजादी कितनी कठिनाइयों और संघर्षों के बाद मिली है।
इसके माध्यम से हम अपने गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और उन गुमनाम नायकों को याद करते हैं, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया था।
(iii) महत्त्व
आजादी के अमृत महोत्सव का अत्यधिक महत्त्व है।
यह देशवासियों में राष्ट्रीय एकता, गौरव और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
इसने 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को आगे बढ़ाया और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया।
'हर घर तिरंगा' जैसे अभियानों ने देश के कोने-कोने में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और प्रेम की एक नई लहर पैदा की।
यह महोत्सव हमें भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करने और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देता है।
(iv) उपसंहार
आजादी का अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की नींव रखने का एक संकल्प है।
इसने हमें हमारी जड़ों से जोड़ा और हमें हमारी सामूहिक शक्ति का एहसास कराया।
हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाएंगे, जो समृद्ध, शक्तिशाली और आत्मनिर्भर हो।
यह महोत्सव एक यादगार पहल है जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
Quick Tip: निबंध लिखते समय दिए गए संकेत बिंदुओं का पालन करें। प्रत्येक बिंदु पर कुछ पैराग्राफ लिखें और अपने विचारों को तार्किक क्रम में प्रस्तुत करें।
वार्षिक परीक्षा की तैयारी का उल्लेख करते हुए अपने बड़े भाई के पास पत्र लिखें ।
उत्तर:
15, छात्रवास,
क ख ग विद्यालय,
पटना।
दिनांक: 28 अक्टूबर, 2025
आदरणीय भाई साहब,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी वहाँ स्वस्थ एवं सानंद होंगे।
मुझे आपका पत्र मिला। आपने मेरी वार्षिक परीक्षा की तैयारी के विषय में पूछा था।
आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मेरी परीक्षा की तैयारी बहुत अच्छी चल रही है।
हमारी वार्षिक परीक्षा अगले महीने से प्रारंभ होने वाली है।
मैंने सभी विषयों का पाठ्यक्रम लगभग पूरा कर लिया है और अब पुनरावृत्ति (revision) कर रहा हूँ।
मैं प्रतिदिन एक समय-सारणी बनाकर पढ़ता हूँ, जिससे सभी विषयों को बराबर समय मिल पाता है।
गणित और विज्ञान पर मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ और पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों को भी हल कर रहा हूँ।
मुझे विश्वास है कि आपकी शुभकामनाओं और मेरे परिश्रम से मैं इस बार परीक्षा में बहुत अच्छे अंक प्राप्त करूँगा।
माताजी और पिताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा।
आपका प्रिय अनुज,
अ ब स
Quick Tip: पत्र लिखते समय सही प्रारूप का पालन करें: प्रेषक का पता, दिनांक, संबोधन, मुख्य विषय, समापन और आपका नाम।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दें :
(i) सेन साहब की लड़कियों के नाम लिखें ।
उत्तर:
'विष के दाँत' कहानी के अनुसार, सेन साहब की पाँच लड़कियाँ थीं।
उनके नाम थे - सीमा, रजनी, आलो, शेफाली और आरती।
(ii) वारेन हेस्टिंग्स कौन था और वाराणसी के पास उसे क्या मिला था ?
उत्तर:
वारेन हेस्टिंग्स भारत का गवर्नर-जनरल था।
उसे वाराणसी के पास सोने के सिक्कों से भरा एक घड़ा मिला था, जिसमें 172 दारिस नामक सोने के सिक्के थे।
(iii) बहादुर के पिता की मृत्यु कैसे हुई थी ?
उत्तर:
'बहादुर' कहानी के अनुसार, बहादुर के पिता की मृत्यु युद्ध में हुई थी।
(iv) रामधारी सिंह दिनकर की किन्हीं चार रचनाओं के नाम लिखें ।
उत्तर:
रामधारी सिंह दिनकर की चार प्रमुख रचनाएँ हैं:
1. रश्मिरथी
2. उर्वशी
3. कुरुक्षेत्र
4. संस्कृति के चार अध्याय
(v) कुँवर नारायण ने वृक्ष रूपी चौकीदार का वर्णन किन शब्दों में किया है ?
उत्तर:
'एक वृक्ष की हत्या' कविता में कुँवर नारायण ने वृक्ष रूपी चौकीदार का वर्णन इन शब्दों में किया है: हमेशा घर के दरवाजे पर तैनात, मैला-कुचैला, खाकी वर्दी पहने, सिर पर पगड़ी बाँधे, एक पुरानी राइफल लिए वह एक सजग चौकीदार की तरह लगता था।
(vi) कवी वीरेन डंगवाल ने किन अत्याचारियों का जिक्र किया है ?
उत्तर:
'हमारी नींद' कविता में कवि वीरेन डंगवाल ने उन अत्याचारियों का जिक्र किया है जो आरामदायक जीवन जीते हैं और गरीबों का शोषण करते हैं।
उन्होंने उन सुविधाभोगी लोगों का उल्लेख किया है जो दूसरों के सपनों को रौंदकर आगे बढ़ते हैं।
(vii) कवि जीवनानंद दास रुपसा के गंदे पानी में किसको क्या करते हुए दिखने की बात करते हैं ?
उत्तर:
'लौटकर आऊँगा फिर' कविता में कवि जीवनानंद दास रुपसा के गंदे पानी में नाव चलाते हुए एक लड़के को देखने की बात करते हैं, जिसके फटे पाल से उड़ते हुए सारस की गंध आती है।
(viii) पाप्पाति कौन थी और वह शहर क्यों लाई गई थी ?
उत्तर:
पाप्पाति वल्ली अम्माल की बारह वर्षीय बेटी थी।
उसे तेज बुखार था, जो मेनिन्जाइटिस रोग था। इसी के इलाज के लिए उसे गाँव से मदुरै शहर लाया गया था।
(ix) सीता किस बुरे दिन की बात याद करती है ?
उत्तर:
'धरती कब तक घूमेगी' कहानी में सीता उस बुरे दिन की बात याद करती है जब उसके बेटों ने उसे पचास-पचास रुपये महीना खर्च देने का निर्णय किया था। यह बात उसे अपनी मजदूरी की तरह लगी और उसने घर छोड़ने का फैसला किया।
(x) अलंकार को परिभाषित करें ।
उत्तर:
अलंकार का अर्थ है 'आभूषण'।
जिस प्रकार आभूषण स्त्री की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं।
अर्थात्, काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों या तत्वों को अलंकार कहते हैं। इसके मुख्य दो भेद हैं - शब्दालंकार और अर्थालंकार।
Quick Tip: लघु उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए। केवल वही जानकारी दें जो प्रश्न में पूछी गई है।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर लिखें । ( शब्द-सीमा लगभग 100 ) :
(i) लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी क्यों पूछते हैं कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है, पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर ? स्पष्ट करें ।
उत्तर:
'नाखून क्यों बढ़ते हैं' पाठ में लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी यह प्रश्न इसलिए पूछते हैं क्योंकि वे मनुष्य के व्यवहार में एक गहरा अंतर्विरोध देखते हैं।
एक ओर, मनुष्य अपने नाखूनों को काटकर अपनी पाशविक वृत्ति का त्याग करता है और मनुष्यता की ओर बढ़ने का संकेत देता है।
वह अहिंसा, प्रेम, और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहता है।
परंतु दूसरी ओर, वही मनुष्य घातक और विनाशकारी हथियार (अस्त्र-शस्त्र) बना रहा है, जो नाखूनों से भी कई गुना अधिक हिंसक हैं।
यह हथियारों की होड़ मनुष्य के भीतर छिपी पशुता को दर्शाती है।
लेखक इसी विरोधाभास पर चिंता व्यक्त करते हैं कि मनुष्य दिखावे में तो मनुष्यता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन असल में वह अपनी पशुता को और अधिक भयानक बना रहा है।
इसीलिए वे यह प्रश्न उठाकर आत्म-मंथन के लिए प्रेरित करते हैं।
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विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देते समय, पाठ के मूल विचार और लेखक के उद्देश्य को स्पष्ट करें। अपने उत्तर को उदाहरणों से पुष्ट करें।
\end{quicktipbox Quick Tip: विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देते समय, पाठ के मूल विचार और लेखक के उद्देश्य को स्पष्ट करें। अपने उत्तर को उदाहरणों से पुष्ट करें।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.