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Bihar Board Class 10 Sanskrit SIL 105 Question Paper with Solutions 2025 Set H

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Dipanwita Pramanik

Content Writer | Updated On - Nov 17, 2025

Bihar Board Class 10 Sanskrit SIL 105 Question Paper with Solutions 2025 Set H is available for download. The Bihar School Examination Board (BSEB) conducted the Class 10 examination for a total duration of 3 hours, and the question paper was of a total of 100 marks.

Bihar Board Class 10 Sanskrit SIL 105 Question Paper with Solutions 2025 Set H

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Bihar Board Class 10 Sanskrit 105 Question Paper with Solutions Set H 2025



Question 1:

"यह मेरा है, यह तुम्हारा है ।" ऐसी भावना कौन रखते हैं ?

  • (A) विद्वान्
  • (B) अग्रसोची
  • (C) छोटी बुद्धिवाला
  • (D) उदारचरित वाला
Correct Answer: (C) छोटी बुद्धिवाला
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\
यह प्रश्न एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित पर आधारित है।



श्लोक है: "अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥"



इसका अर्थ है: 'यह मेरा है, वह पराया है', ऐसी गिनती छोटे चित्त वाले (छोटी बुद्धि वाले) लोग करते हैं।



उदार चरित्र वालों के लिए तो सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।



अतः, 'यह मेरा है, यह तुम्हारा है' ऐसी भावना छोटी बुद्धि वाले रखते हैं।
Quick Tip: संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोकों और सूक्तियों को उनके अर्थ सहित याद रखना चाहिए, क्योंकि पाठ्यपुस्तक में दिए गए श्लोकों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।


Question 2:

'हितोपदेश' की कहानियाँ किससे सम्बन्धित हैं ?

  • (A) मानव
  • (B) दानव
  • (C) देवता
  • (D) पशु-पक्षी
Correct Answer: (D) पशु-पक्षी
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'हितोपदेश' नारायण पण्डित द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कथा-ग्रंथ है।



यह 'पञ्चतन्त्र' की शैली में लिखा गया है और इसका उद्देश्य मनोरंजक कथाओं के माध्यम से नीति और व्यवहार-ज्ञान की शिक्षा देना है।



इन कथाओं के मुख्य पात्र पशु-पक्षी होते हैं, जो मनुष्यों की तरह बात करते हैं और आचरण करते हैं।



अतः, 'हितोपदेश' की कहानियाँ पशु-पक्षियों से सम्बन्धित हैं।
Quick Tip: 'हितोपदेश' और 'पञ्चतन्त्र' दोनों ही भारतीय नीति-कथा परम्परा के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं, जिनमें पशु-पक्षियों को पात्र बनाकर शिक्षा दी गई है।


Question 3:

कौन कीचड़ में फँस गया ?

  • (A) बाघ
  • (B) पथिक
  • (C) सिंह
  • (D) साँप
Correct Answer: (B) पथिक
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यह प्रश्न 'व्याघ्रपथिककथा' (बाघ और यात्री की कहानी) नामक पाठ से है।



कहानी में, एक बूढ़ा बाघ सोने का कंगन दिखाकर एक यात्री (पथिक) को लोभ देता है।



बाघ यात्री से कहता है कि स्नान करने के बाद वह कंगन ले ले।



यात्री लोभवश तालाब में स्नान करने के लिए उतरता है और गहरे कीचड़ (महापङ्के) में फँस जाता है।



अतः, कीचड़ में पथिक फँस गया था।
Quick Tip: कथा-साहित्य के पाठों में कहानी के मुख्य घटनाक्रम और पात्रों के कार्यों को ध्यान से समझें, जैसे कि लोभ के कारण पथिक का कीचड़ में फँसना।


Question 4:

"............. भारः क्रियां विना ।" रिक्त स्थान में उचित विकल्प क्या होगा ?

  • (A) दानम्
  • (B) मानम्
  • (C) ज्ञानम्
  • (D) नृत्यम्
Correct Answer: (C) ज्ञानम्
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यह एक प्रसिद्ध सूक्ति का अंश है, जो 'व्याघ्रपथिककथा' पाठ में भी आई है।



पूरी सूक्ति है: "ज्ञानं भारः क्रियां विना"।



इसका अर्थ है कि क्रिया (action) या व्यवहार के बिना ज्ञान एक बोझ के समान होता है।



अर्थात्, यदि ज्ञान को उपयोग में न लाया जाए, तो वह व्यर्थ है।



अतः, रिक्त स्थान में 'ज्ञानम्' पद आएगा।
Quick Tip: पाठों के बीच में आने वाली सूक्तियों और श्लोकों को विशेष रूप से याद करें, क्योंकि वे अक्सर रिक्त स्थान की पूर्ति या अर्थ बताने वाले प्रश्नों के रूप में आती हैं।


Question 5:

'पवित्रम्' किस संधि का उदाहरण है ?

  • (A) यण् संधि
  • (B) अयादि संधि
  • (C) गुण संधि
  • (D) दीर्घ संधि
Correct Answer: (B) अयादि संधि
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\
'पवित्रम्' का संधि-विच्छेद करने पर 'पो + इत्रम्' प्राप्त होता है।



यह अयादि स्वर संधि का उदाहरण है।



अयादि संधि का नियम है: यदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो 'ओ' का 'अव्' हो जाता है।



यहाँ 'पो' में 'ओ' के बाद 'इ' स्वर आया है, इसलिए 'ओ' का 'अव्' हो गया।



प् + ओ + इत्रम् \(\rightarrow\) प् + अव् + इत्रम् \(\rightarrow\) पवित्रम्।
Quick Tip: अयादि संधि के चार आदेश याद रखें: ए \(\rightarrow\) अय् (नयनम् = ने+अनम्), ऐ \(\rightarrow\) आय् (गायकः = गै+अकः), ओ \(\rightarrow\) अव् (पवनः = पो+अनः), औ \(\rightarrow\) आव् (पावकः = पौ+अकः)।


Question 6:

'सत्येषा' का सही विच्छेद क्या होगा ?

  • (A) सति + इषा
  • (B) सत्य + इषा
  • (C) सती + एषा
  • (D) सत्य + एषा
Correct Answer: (B) सत्य + इषा
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\
'सत्येषा' शब्द में गुण स्वर संधि है।



गुण संधि का नियम है कि यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए, तो दोनों मिलकर 'ए' बन जाते हैं।



विकल्पों का विश्लेषण करने पर:



(B) सत्य + इषा \(\rightarrow\) 'सत्य' के अंत में 'अ' है और 'इषा' के आरंभ में 'इ' है।



नियम के अनुसार, अ + इ = ए।



इस प्रकार, सत्य + इषा = सत्येशा। यह दिए गए शब्द से मेल खाता है।
Quick Tip: संधि-विच्छेद करते समय, विच्छेद के बाद बनने वाले दोनों शब्दों के सार्थक होने पर भी ध्यान दें। यहाँ 'सत्य' और 'इषा' (अर्थ - इच्छा) दोनों सार्थक शब्द हैं।


Question 7:

'भुवः प्रभवः' का उदाहरण है

  • (A) हिमालयात् गङ्गा प्रभवति ।
  • (B) सीता रामेण सह वनं गतवती ।
  • (C) सा हर्षात् हसति ।
  • (D) नेतारः पदाय स्पृह्यन्ति ।
Correct Answer: (A) हिमालयात् गङ्गा प्रभवति ।
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'भुवः प्रभवः' अपादान कारक (पञ्चमी विभक्ति) का एक सूत्र है।



इस सूत्र का अर्थ है कि जो किसी वस्तु के उत्पन्न होने का स्थान (प्रभव) होता है, उस स्रोत या स्थान में पञ्चमी विभक्ति लगती है।



(A) हिमालयात् गङ्गा प्रभवति। (गंगा हिमालय से निकलती है)। यहाँ गंगा के उत्पन्न होने का स्रोत 'हिमालय' है, अतः 'हिमालयात्' में पञ्चमी विभक्ति है। यह इस सूत्र का सटीक उदाहरण है।



(B) यह 'सहार्थे तृतीया' सूत्र का उदाहरण है।



(C) यह 'हेतौ' (कारण के अर्थ में पञ्चमी) का उदाहरण है।



(D) यह 'स्पृहेरीप्सितः' (स्पृह धातु के योग में चतुर्थी) का उदाहरण है।
Quick Tip: अपादान कारक (पञ्चमी विभक्ति) का प्रयोग केवल 'अलग होने' के अर्थ में ही नहीं, बल्कि 'उत्पन्न होने' (भुवः प्रभवः), 'डरने' (भीत्रार्थानां भयहेतुः), और 'रक्षा करने' के अर्थ में भी होता है।


Question 8:

'हेतु' शब्द के अर्थ में कौन-सी विभक्ति होती है ?

  • (A) तृतीया
  • (B) षष्ठी
  • (C) पञ्चमी
  • (D) सप्तमी
Correct Answer: (A) तृतीया
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\
व्याकरण सूत्र 'हेतौ' के अनुसार, 'हेतु' (कारण) अर्थ को प्रकट करने वाले शब्द में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।



उदाहरण के लिए: "पुण्येन दृष्टो हरिः।" (पुण्य के कारण हरि के दर्शन हुए)।



जब 'हेतु' शब्द का स्वयं प्रयोग होता है, तब भी कारण में तृतीया विभक्ति लगती है। जैसे - "केन हेतुना आगतः?" (किस कारण से आए?)।



अतः, 'हेतु' के अर्थ में तृतीया विभक्ति होती है।
Quick Tip: यद्यपि कारण के अर्थ में पञ्चमी विभक्ति ('हर्षात् रोदिति') का भी प्रयोग होता है, लेकिन जब विशेष रूप से 'हेतु' अर्थ या 'हेतु' शब्द का प्रयोग पूछा जाए, तो 'हेतौ' सूत्र के अनुसार तृतीया विभक्ति ही मुख्य उत्तर होती है।


Question 9:

'सः मासेन व्याकरणम् अधीते ।' यह किस सूत्र का उदाहरण है ?

  • (A) सहार्थे तृतीया
  • (B) अपवर्गे तृतीया
  • (C) करणे तृतीया
  • (D) इत्थंभूतलक्षणे
Correct Answer: (B) अपवर्गे तृतीया
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सूत्र 'अपवर्गे तृतीया' का अर्थ है कि जब किसी कार्य की समाप्ति (अपवर्ग) या फल-प्राप्ति का बोध हो, तो समय और मार्ग की दूरी बताने वाले शब्दों में तृतीया विभक्ति होती है।



दिए गए वाक्य "सः मासेन व्याकरणम् अधीते" का अर्थ है "उसने महीने भर में व्याकरण पढ़ लिया"।



यहाँ 'व्याकरण पढ़ लिया' से कार्य की समाप्ति का बोध हो रहा है और 'मासेन' (महीने भर में) समय बताने वाला शब्द है।



अतः, 'मासेन' में 'अपवर्गे तृतीया' सूत्र से तृतीया विभक्ति हुई है।
Quick Tip: यदि कार्य की समाप्ति न हो और क्रिया जारी रहे (जैसे - वह एक महीने से पढ़ रहा है), तो द्वितीया विभक्ति ('मासम् अधीते') का प्रयोग होता है। कार्य की समाप्ति होने पर ही तृतीया ('मासेन अधीते') लगती है।


Question 10:

'मह्यम् मिष्टान्नं रोचते' किस सूत्र का उदाहरण है ?

  • (A) सम्प्रदाने चतुर्थी
  • (B) रुच्यर्थानां प्रीयमाणः
  • (C) सम्बोधने प्रथमा
  • (D) तादर्थ्ये चतुर्थी
Correct Answer: (B) रुच्यर्थानां प्रीयमाणः
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\
यह वाक्य उपपद विभक्ति का उदाहरण है।



सूत्र 'रुच्यर्थानां प्रीयमाणः' का अर्थ है कि 'रुच्' (अच्छा लगना) धातु और इसके समान अर्थ वाली अन्य धातुओं के योग में, जो प्रसन्न होने वाला (प्रीयमाणः) होता है, उसकी सम्प्रदान संज्ञा होती है और उसमें चतुर्थी विभक्ति लगती है।



वाक्य "मह्यम् मिष्टान्नं रोचते" का अर्थ है "मुझे मिठाई अच्छी लगती है"।



यहाँ 'रुच्' धातु का प्रयोग हुआ है और अच्छा लगने वाला 'मैं' हूँ। अतः 'अस्मद्' शब्द के चतुर्थी विभक्ति, एकवचन रूप 'मह्यम्' का प्रयोग हुआ है।



विकल्प (A) सामान्य नियम है, जबकि (B) इस वाक्य में लगने वाला विशिष्ट सूत्र है।
Quick Tip: जब किसी प्रश्न में कारक का सामान्य सूत्र और विशिष्ट उपपद सूत्र दोनों विकल्प में हों, तो हमेशा विशिष्ट सूत्र को ही सही उत्तर के रूप में चुनें।


Question 11:

पण्डिता क्षमाराव ने किस पुस्तक की रचना की ?

  • (A) मधुराविजयम्
  • (B) ग्रामज्योति
  • (C) शंकरचरितम्
  • (D) वरदाम्बिकापरिणय
Correct Answer: (C) शंकरचरितम्
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पण्डिता क्षमाराव (1890-1954) आधुनिक काल की एक प्रमुख संस्कृत लेखिका थीं।



उन्होंने अपने पिता शंकर पांडुरंग पंडित के जीवन पर आधारित एक महाकाव्य 'शंकरचरितम्' की रचना की।



(A) मधुराविजयम् की रचना गंगादेवी ने की थी।



(B) ग्रामज्योति भी पण्डिता क्षमाराव की रचना है, लेकिन 'शंकरचरितम्' उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है जिसका उल्लेख पाठ में है।



(D) वरदाम्बिकापरिणय की रचना तिरुमलाम्बा ने की थी।



दिए गए विकल्पों में, 'शंकरचरितम्' पण्डिता क्षमाराव की एक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक रचना है।
Quick Tip: 'संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः' पाठ में वर्णित प्रमुख लेखिकाओं और उनकी रचनाओं की एक सूची बनाकर याद कर लें, जैसे - विजयाङ्का, तिरुमलाम्बा, गंगादेवी, और पण्डिता क्षमाराव।


Question 12:

याज्ञवल्क्य ने आत्मतत्त्व की शिक्षा किसे दिया ?

  • (A) मैत्रेयी को
  • (B) गार्गी को
  • (C) सुलभा को
  • (D) विजयाङ्का को
Correct Answer: (A) मैत्रेयी को
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\
'संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः' पाठ में बृहदारण्यकोपनिषद् का एक प्रसंग वर्णित है।



इसमें महर्षि याज्ञवल्क्य की पत्नी मैत्रेयी का उल्लेख है, जो एक दार्शनिक विचारों वाली स्त्री थीं।



याज्ञवल्क्य ने अपनी पत्नी मैत्रेयी को ही आत्मतत्त्व (आत्मा के स्वरूप) की शिक्षा दी थी।



अतः, सही उत्तर (A) मैत्रेयी को है।
Quick Tip: प्राचीन भारत की विदुषी स्त्रियों के नाम और उनके योगदान को याद रखें। मैत्रेयी और याज्ञवल्क्य का संवाद उपनिषदों में बहुत प्रसिद्ध है।


Question 13:

'अ + इ' के मेल से कौन-सा नया वर्ण बनेगा ?

  • (A) आ
  • (B) ऐ
  • (C) ए
  • (D) ऋ
Correct Answer: (C) ए
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यह गुण स्वर संधि का नियम है।



गुण संधि के नियम के अनुसार, यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए, तो दोनों के मेल से 'ए' वर्ण बनता है।



उदाहरण: देव + इन्द्रः = देवेन्द्रः। यहाँ 'देव' के 'अ' और 'इन्द्रः' के 'इ' के मेल से 'ए' बना है।



अतः, 'अ + इ' के मेल से 'ए' वर्ण बनेगा।
Quick Tip: गुण संधि के तीन परिणाम याद रखें: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।


Question 14:

'पूर्वरूप संधि' का उदाहरण कौन-सा है ?

  • (A) एकैक
  • (B) हरेऽव
  • (C) रावणः
  • (D) रमेन्द्रः
Correct Answer: (B) हरेऽव
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पूर्वरूप संधि का नियम है: यदि पद के अंत में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद ह्रस्व 'अ' आए, तो 'अ' अपने पूर्ववर्ती 'ए' या 'ओ' में विलीन हो जाता है और उसके स्थान पर अवग्रह चिह्न ('ऽ') लगा दिया जाता है।



(A) एकैक = एक + एक (वृद्धि संधि)।



(B) हरेऽव = हरे + अव। यहाँ 'हरे' के अंत में 'ए' है और उसके बाद 'अ' आया है। 'अ' का लोप होकर उसके स्थान पर 'ऽ' लग गया है। यह पूर्वरूप संधि का उदाहरण है।



(C) रावणः = रौ + अनः (अयादि संधि)।



(D) रमेन्द्रः = रमा + इन्द्रः (गुण संधि)।
Quick Tip: पूर्वरूप संधि की पहचान का सबसे सरल तरीका शब्द के बीच में अवग्रह चिह्न ('ऽ') को देखना है, जिसका उच्चारण 'अ' की तरह ही होता है।


Question 15:

'खगेशः' का सन्धि-विच्छेद क्या होगा ?

  • (A) खग + एशः
  • (B) खग + ईशः
  • (C) खग + इशः
  • (D) खगे + शः
Correct Answer: (B) खग + ईशः
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\
'खगेशः' शब्द में गुण स्वर संधि है, जहाँ 'ए' की मात्रा बनी है।



'ए' का निर्माण 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आने से होता है।



इसका विच्छेद करने पर दो सार्थक शब्द मिलने चाहिए: 'खग' (पक्षी) और 'ईशः' (स्वामी)।



अतः, खग + ईशः = खगेशः (पक्षियों का स्वामी, अर्थात् गरुड़)।



'ईश' शब्द में 'ई' हमेशा दीर्घ होती है, इसलिए विकल्प (C) गलत है। विकल्प (A) और (D) व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध हैं।
Quick Tip: संधि-विच्छेद करते समय, विच्छेद से बनने वाले दोनों शब्दों के सार्थक होने और उनकी वर्तनी के सही होने पर विशेष ध्यान दें। 'ईश', 'ईश्वर', 'इन्द्र' जैसे शब्दों की सही वर्तनी याद रखें।


Question 16:

'व्याकरणम्' में कौन-सा उपसर्ग है ?

  • (A) वि
  • (B) व्या
  • (C) अव
  • (D) णम्
Correct Answer: (A) वि
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\
'व्याकरणम्' शब्द की व्युत्पत्ति को समझने से उपसर्ग का पता चलता है।



इसका विग्रह है: वि + आ + कृ + ल्युट्।



इसमें 'वि' और 'आ' दो उपसर्ग हैं, 'कृ' धातु है और 'ल्युट्' प्रत्यय है।



प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से 'वि' एक उपसर्ग के रूप में मौजूद है।



अतः, 'वि' इसका सही उत्तर है।
Quick Tip: जिन शब्दों में 'य' या 'व' से पहले आधा अक्षर होता है, उनमें अक्सर यण् संधि होती है। 'व्याकरणम्' में 'वि + आकरणम्' यण् संधि का उदाहरण है, जिससे 'वि' उपसर्ग स्पष्ट होता है।


Question 17:

'पित्रा' किस विभक्ति का रूप है ?

  • (A) तृतीया
  • (B) षष्ठी
  • (C) पञ्चमी
  • (D) चतुर्थी
Correct Answer: (A) तृतीया
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'पित्रा' पद का मूल शब्द 'पितृ' (ऋकारान्त पुँल्लिंग) है।



'पितृ' शब्द के एकवचन के रूप इस प्रकार हैं:



प्रथमा: पिता



द्वितीया: पितरम्



तृतीया: पित्रा



चतुर्थी: पित्रे



अतः, 'पित्रा' तृतीया विभक्ति, एकवचन का रूप है, जिसका अर्थ है 'पिता के द्वारा' या 'पिता से'।
Quick Tip: ऋकारान्त पुँल्लिंग शब्दों (जैसे पितृ, भ्रातृ, दातृ) के रूप एक विशेष पैटर्न पर चलते हैं। 'पितृ' और 'मातृ' के शब्द रूप बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें अवश्य याद करना चाहिए।


Question 18:

'दातृणाम्' का मूल शब्द क्या होगा ?

  • (A) दाता
  • (B) दातु
  • (C) दातृ
  • (D) दात्री
Correct Answer: (C) दातृ
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\
'दातृणाम्' एक विभक्तियुक्त पद है। हमें इसका मूल शब्द (प्रातिपदिक) बताना है।



'दातृणाम्' पद 'दातृ' शब्द से बना है, जो एक ऋकारान्त पुँल्लिंग शब्द है।



'दातृ' शब्द का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन का रूप 'दातृणाम्' होता है, जिसका अर्थ है 'देने वालों का'।



अतः, इसका मूल शब्द 'दातृ' है।
Quick Tip: मूल शब्द वह शब्द होता है जिसमें कोई विभक्ति नहीं लगी होती। किसी भी पद से विभक्ति चिह्न (जैसे -णाम्, -षु, -भिः) हटाने पर जो सार्थक शब्द बचता है, वही उसका मूल शब्द होता है।


Question 19:

'युष्मद्' शब्द का रूप प्रथमा विभक्ति, एकवचन में क्या होगा ?

  • (A) त्वम्
  • (B) तव
  • (C) तुभ्यम्
  • (D) यूयम्
Correct Answer: (A) त्वम्
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\
'युष्मद्' (अर्थ - तुम) एक सर्वनाम शब्द है।



इसके प्रथमा विभक्ति के रूप इस प्रकार हैं:



एकवचन: त्वम् (तुम)



द्विवचन: युवाम् (तुम दोनों)



बहुवचन: यूयम् (तुम सब)



प्रश्न में प्रथमा विभक्ति, एकवचन का रूप पूछा गया है, जो 'त्वम्' है।
Quick Tip: 'अस्मद्' (मैं) और 'युष्मद्' (तुम) सर्वनामों के रूप तीनों लिंगों में समान रहते हैं और ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें कंठस्थ कर लेना चाहिए।


Question 20:

'लिख्' धातु का रूप लृट् लकार में क्या होगा ?

  • (A) लिखतु
  • (B) लेखिष्यति
  • (C) लिखेत्
  • (D) लिख
Correct Answer: (B) लेखिष्यति
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\
लृट् लकार का प्रयोग भविष्यत् काल (Future Tense) के लिए होता है।



इस लकार की पहचान धातु के साथ लगने वाले '-स्यति', '-ष्यति' प्रत्यय से होती है।



'लिख्' धातु के लृट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप 'लेखिष्यति' होता है। (यहाँ गुण होकर इ को ए हो जाता है)।



अन्य विकल्पों का विश्लेषण:



(A) लिखतु: यह लोट् लकार (आज्ञा) का रूप है।



(C) लिखेत्: यह विधिलिङ् लकार (चाहिए के अर्थ में) का रूप है।



(D) लिख: यह लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप है।



अतः, लृट् लकार का रूप 'लेखिष्यति' है।
Quick Tip: लकारों की पहचान उनके प्रत्ययों से करें: लट् (ति, तः, न्ति), लृट् (स्यति, स्यतः, स्यन्ति), लङ् (अ- उपसर्ग, त्, ताम्, न्), लोट् (तु, ताम्, न्तु), विधिलिङ् (एत्, एताम्, एयुः)।


Question 21:

'योगसूत्र' के रचनाकार कौन हैं ?

  • (A) पाणिनि
  • (B) पतञ्जलि
  • (C) कपिल
  • (D) कणाद
Correct Answer: (B) पतञ्जलि
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\
'योगसूत्र' योग दर्शन का मूल ग्रंथ है।



इस ग्रंथ के रचनाकार महर्षि पतञ्जलि हैं।



(A) पाणिनि ने 'अष्टाध्यायी' (व्याकरण) की रचना की।



(C) कपिल मुनि ने 'सांख्य दर्शन' की रचना की।



(D) कणाद ने 'वैशेषिक दर्शन' की रचना की।



अतः, 'योगसूत्र' के रचनाकार पतञ्जलि हैं।
Quick Tip: भारतीय दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) और उनके प्रणेताओं के नाम याद रखें: न्याय (गौतम), वैशेषिक (कणाद), सांख्य (कपिल), योग (पतञ्जलि), मीमांसा (जैमिनि), वेदान्त (बादरायण)।


Question 22:

'कृषिविज्ञान' के रचयिता निम्न में से कौन हैं ?

  • (A) लगध
  • (B) पराशर
  • (C) यास्क
  • (D) गौतम
Correct Answer: (B) पराशर
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\
प्राचीन भारत में विभिन्न शास्त्रों का विकास हुआ।



'शास्त्रकाराः' पाठ के अनुसार, महर्षि पराशर द्वारा 'कृषिविज्ञान' नामक ग्रंथ की रचना की गई थी।



इस ग्रंथ में कृषि से संबंधित विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक जानकारी दी गई है।



अतः, 'कृषिविज्ञान' के रचयिता पराशर हैं।
Quick Tip: 'शास्त्रकाराः' पाठ में उल्लिखित विभिन्न शास्त्रों और उनके रचयिताओं की एक सूची बनाकर याद करना परीक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है।


Question 23:

'वसुधा' किसका पर्याय है ?

  • (A) नभ
  • (B) पृथ्वी
  • (C) वायु
  • (D) जल
Correct Answer: (B) पृथ्वी
View Solution

\
'वसुधा' एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ 'धन को धारण करने वाली' होता है।



यह पृथ्वी का एक प्रमुख पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द है।



पृथ्वी के अन्य पर्यायवाची हैं - भू, भूमि, धरा, धरित्री, अचला, वसुन्धरा आदि।



(A) नभ का अर्थ आकाश है। (C) वायु का अर्थ हवा है। (D) जल का अर्थ पानी है।



अतः, 'वसुधा' पृथ्वी का पर्याय है।
Quick Tip: पर्यायवाची शब्द याद करते समय शब्दों के मूल अर्थ को समझने का प्रयास करें। 'वसु' का अर्थ धन या रत्न ہوتا है, और 'धा' का अर्थ धारण करने वाली। पृथ्वी रत्नों को धारण करती है, इसलिए उसे 'वसुधा' कहते हैं।


Question 24:

'पटनदेवी' किस नगर में अवस्थित है ?

  • (A) वैशाली
  • (B) पटना
  • (C) राजगृह
  • (D) नालन्दा
Correct Answer: (B) पटना
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\
यह प्रश्न 'पाटलिपुत्रवैभवम्' पाठ से संबंधित है।



पाठ में बताया गया है कि पाटलिपुत्र (पटना) की पालिका देवी (नगर की रक्षा करने वाली देवी) पटनदेवी हैं।



आज भी पटना में बड़ी पटनदेवी और छोटी पटनदेवी के प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं।



अतः, पटनदेवी पटना नगर में अवस्थित हैं।
Quick Tip: 'पाटलिपुत्रवैभवम्' पाठ में वर्णित पटना से संबंधित महत्वपूर्ण स्थानों (जैसे गोलघर, तारामंडल) और व्यक्तियों (जैसे मेगास्थनीज, फाह्यान) के बारे में जानकारी याद रखें।


Question 25:

यूनान का राजदूत कौन था ?

  • (A) मेगास्थनीज
  • (B) ह्वेनसांग
  • (C) फाह्यान
  • (D) इत्सिंग
Correct Answer: (A) मेगास्थनीज
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\
'पाटलिपुत्रवैभवम्' पाठ के अनुसार, यूनान का राजदूत मेगास्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पाटलिपुत्र आया था।



उसने अपनी पुस्तक 'इण्डिका' में पाटलिपुत्र के वैभव और शासन व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है।



(B) ह्वेनसांग, (C) फाह्यान और (D) इत्सिंग चीनी यात्री थे, यूनानी नहीं।



अतः, यूनान का राजदूत मेगास्थनीज था।
Quick Tip: विदेशी यात्रियों के नाम और वे किसके शासनकाल में भारत आए थे, यह इतिहास और संस्कृत दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।


Question 26:

'रावणः' पद का संधि-विच्छेद क्या होगा ?

  • (A) रौ + अनः
  • (B) रो + अणः
  • (C) रौ + अणः
  • (D) रौ + वणः
Correct Answer: (A) रौ + अनः
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\
'रावणः' शब्द में अयादि स्वर संधि है।



अयादि संधि का नियम है: यदि 'औ' के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो 'औ' का 'आव्' हो जाता है।



(A) रौ + अनः \(\rightarrow\) र् + औ + अनः \(\rightarrow\) र् + आव् + अनः \(\rightarrow\) रावणः। यह सही विच्छेद है।



साथ ही, व्यंजन संधि के 'णत्व विधान' नियम से 'अनः' का 'न' 'रावणः' में 'ण' हो जाता है, क्योंकि पद में 'र' है। लेकिन विच्छेद करते समय मूल रूप 'न' ही लिखा जाता है।



विकल्प (C) 'रौ + अणः' गलत है क्योंकि संधि-विच्छेद में मूल वर्ण 'न' का ही प्रयोग होता है, 'ण' का नहीं।
Quick Tip: अयादि संधि के विच्छेद में भ्रमित न हों: 'अय्' ध्वनि के लिए 'ए', 'आय्' के लिए 'ऐ', 'अव्' के लिए 'ओ', और 'आव्' के लिए 'औ' का प्रयोग होता है। 'रावण' में 'आव्' की ध्वनि है, इसलिए 'रौ' होगा।


Question 27:

'ऋ + अ' के मेल से कौन-सा नया वर्ण बनेगा ?

  • (A) अर्
  • (B) र
  • (C) आर्
  • (D) र्
Correct Answer: (B) र
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यह यण् स्वर संधि का नियम है।



यण् संधि का नियम कहता है: यदि इ/ई, उ/ऊ, ऋ/ॠ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो इ/ई का 'य्', उ/ऊ का 'व्' और ऋ/ॠ का 'र्' (आधा र) हो जाता है।



यहाँ 'ऋ' के बाद भिन्न स्वर 'अ' आया है।



अतः, 'ऋ' का 'र्' (आधा र) हो जाएगा, और वह आगे वाले 'अ' से मिलकर पूरा 'र' बन जाएगा। (र् + अ = र)



उदाहरण: पितृ + अंशः \(\rightarrow\) पित् + र् + अंशः \(\rightarrow\) पित्रंशः।



(नोट: प्रश्न में 'नया वर्ण' पूछा है। ऋ स्वर है जो 'र्' व्यंजन में बदलता है। विकल्प (B) में पूरा 'र' दिया है, जो 'र् + अ' का संयुक्त रूप है। दिए गए विकल्पों में यही सबसे निकट है।)
Quick Tip: यण् संधि की पहचान है कि इसमें 'य' या 'व' से पहले आधा व्यंजन आता है (जैसे इत्यादि, स्वागत), या 'त्र', 'प्र', 'म्र' जैसी ध्वनि होती है (जैसे पित्राज्ञा)।


Question 28:

'तस्य + इति' पद की संधि क्या होगी ?

  • (A) तस्यैति
  • (B) तस्याति
  • (C) तस्येति
  • (D) तस्येतिः
Correct Answer: (C) तस्येति
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यह गुण स्वर संधि का उदाहरण है।



गुण संधि का नियम है: यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए, तो दोनों मिलकर 'ए' हो जाते हैं।



यहाँ पहले पद 'तस्य' के अंत में 'अ' है और दूसरे पद 'इति' के आरंभ में 'इ' है।



नियम के अनुसार, अ + इ = ए।



इस प्रकार, तस्य + इति = तस्येति।



विकल्प (D) में विसर्ग लगा है, जो अनावश्यक है।
Quick Tip: संधि करते समय मात्राओं और अंतिम वर्णों (जैसे विसर्ग, हलन्त) का विशेष ध्यान रखें। एक छोटी सी त्रुटि से भी उत्तर गलत हो सकता है।


Question 29:

किस पद में 'वि' उपसर्ग नहीं है ?

  • (A) विकासः
  • (B) वेदः
  • (C) विनयः
  • (D) व्यवहारः
Correct Answer: (B) वेदः
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\
उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगने वाला शब्दांश होता है। हमें वह शब्द खोजना है जिसमें 'वि' उपसर्ग नहीं है।



(A) विकासः = वि + कासः। इसमें 'वि' उपसर्ग है।



(B) वेदः: यह 'विद्' धातु से बना एक मूल शब्द है। इसमें 'वि' उपसर्ग नहीं है, बल्कि यह शब्द का ही हिस्सा है।



(C) विनयः = वि + नयः। इसमें 'वि' उपसर्ग है।



(D) व्यवहारः = वि + अव + हारः। इसमें 'वि' उपसर्ग है।



अतः, 'वेदः' पद में 'वि' उपसर्ग नहीं है।
Quick Tip: उपसर्ग की पहचान के लिए शब्द में से उपसर्ग को हटाने के बाद बचे हुए शब्द की सार्थकता देखें। 'कास', 'नय', 'अवहार' सार्थक हैं, लेकिन 'दः' (वेदः से वि हटाने पर) सार्थक नहीं है।


Question 30:

'दुर्गमम्' पद में कौन-सा उपसर्ग है ?

  • (A) दुस्
  • (B) दुश्
  • (C) दुर्
  • (D) दूर
Correct Answer: (C) दुर्
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'दुर्गमम्' पद में मूल शब्द 'गम' (जाना) है।



इसके आरंभ में 'दुर्' उपसर्ग लगा है, जिसका अर्थ 'कठिन' या 'बुरा' होता है।



दुर् + गमम् = दुर्गमम् (जहाँ जाना कठिन हो)।



यहाँ 'दुर्' का 'र्' (रेफ) अगले वर्ण 'ग' के ऊपर चला गया है।



'दुस्' और 'दुश्' का प्रयोग 'स' या 'श' से शुरू होने वाले शब्दों के साथ होता है (जैसे - दुस्साहस)।



अतः, सही उपसर्ग 'दुर्' है।
Quick Tip: 'दुर्' और 'दुस्' दोनों का अर्थ 'बुरा/कठिन' होता है। संधि नियमों के अनुसार 'दुः' उपसर्ग ही बाद वाले वर्ण के अनुसार 'दुर्' या 'दुस्' में बदलता है। रेफ ('र्') दिखने पर 'दुर्' उपसर्ग होता है।


Question 31:

'राधेयः' में कौन-सा प्रत्यय होगा ?

  • (A) ठक्
  • (B) अण्
  • (C) घञ्
  • (D) ढक्
Correct Answer: (D) ढक्
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'राधेयः' का अर्थ है 'राधा का पुत्र', जो कर्ण का एक नाम है।



यह एक अपत्यवाचक (संतान के अर्थ में) तद्धित प्रत्यय का उदाहरण है।



'स्त्रीभ्यो ढक्' सूत्र के अनुसार, स्त्रीवाचक शब्दों से संतान के अर्थ में 'ढक्' प्रत्यय लगता है।



'ढक्' प्रत्यय का 'एय' शेष रहता है और यह शब्द के आदि स्वर की वृद्धि (आ, ऐ, औ) कर देता है।



राधा + ढक् \(\rightarrow\) राध् + एय \(\rightarrow\) राधेयः।



(नोट: प्रश्न पत्र में विकल्प (D) में 'इञ्' दिया है जो गलत है, सही प्रत्यय 'ढक्' है।)
Quick Tip: अपत्यवाचक प्रत्यय संतान का बोध कराते हैं। 'ढक्' (एय) प्रत्यय स्त्रीवाचक शब्दों से लगता है, जैसे राधा \(\rightarrow\) राधेय, गंगा \(\rightarrow\) गाङ्गेय, विनता \(\rightarrow\) वैनतेय।


Question 32:

'वद' किस लकार का रूप है ?

  • (A) लट्
  • (B) लृट्
  • (C) लोट्
  • (D) लङ्
Correct Answer: (C) लोट्
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\
'वद' क्रिया पद 'वद्' (बोलना) धातु से बना है।



यह लोट् लकार (आज्ञा या आदेश के अर्थ में), मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप है।



लोट् लकार के मध्यम पुरुष के रूप हैं: वद (तुम बोलो), वदतम् (तुम दोनों बोलो), वदत (तुम सब बोलो)।



मध्यम पुरुष एकवचन में धातु का मूल रूप ही रहता है।



अतः, 'वद' लोट् लकार का रूप है।
Quick Tip: लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप अक्सर धातु का मूल रूप ही होता है, जिसमें कोई प्रत्यय नहीं लगता। जैसे - पठ् \(\rightarrow\) पठ, गम् \(\rightarrow\) गच्छ, वद् \(\rightarrow\) वद।


Question 33:

भारतीय संस्कृति में कितने संस्कार होते हैं ?

  • (A) बारह
  • (B) चौदह
  • (C) सोलह
  • (D) ग्यारह
Correct Answer: (C) सोलह
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यह प्रश्न 'भारतसंस्काराः' पाठ से है।



पाठ के अनुसार, भारतीय संस्कृति में व्यक्ति के जीवन को परिष्कृत करने के लिए समय-समय पर अनुष्ठान किए जाते हैं, जिन्हें संस्कार कहते हैं।



शास्त्रों में इन संस्कारों की कुल संख्या सोलह (षोडश) मानी गई है।



ये संस्कार जन्म से पूर्व से लेकर मृत्यु के पश्चात् तक फैले हुए हैं।



अतः, कुल सोलह संस्कार होते हैं।
Quick Tip: सोलह संस्कारों को मुख्य पाँच श्रेणियों में बाँटा गया है: जन्म-पूर्व (3), शैशव (6), शिक्षा (5), गृहस्थ (1 - विवाह), और मरणोपरांत (1 - अन्त्येष्टि)।


Question 34:

जन्म से पूर्व कितने संस्कार होते हैं ?

  • (A) 3
  • (B) 6
  • (C) 5
  • (D) 4
Correct Answer: (A) 3
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\
'भारतसंस्काराः' पाठ के अनुसार, सोलह संस्कारों में से कुछ संस्कार जन्म से पूर्व ही किए जाते हैं।



इन संस्कारों की संख्या तीन है।



ये तीन जन्म-पूर्व संस्कार हैं:



1. गर्भाधान



2. पुंसवन



3. सीमन्तोन्नयन



अतः, जन्म से पूर्व तीन संस्कार होते हैं।
Quick Tip: संस्कारों की संख्या को उनकी श्रेणियों के अनुसार याद करना आसान है: जन्म-पूर्व (3), शैशव (6), शिक्षा (5), विवाह (1), मृत्यु (1)। कुल = 16।


Question 35:

पथिक किसके द्वारा पकड़कर खाया गया ?

  • (A) बाघ
  • (B) सिंह
  • (C) मगरमच्छ
  • (D) भेड़िया
Correct Answer: (A) बाघ
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यह प्रश्न 'व्याघ्रपथिककथा' पाठ से है।



कहानी में, एक बूढ़ा बाघ सोने का कंगन दिखाकर एक यात्री (पथिक) को लोभ देता है।



जब पथिक लोभवश तालाब में उतरकर कीचड़ में फँस जाता है, तो वह असहाय हो जाता है।



मौके का फायदा उठाकर बाघ उसे पकड़ लेता है और खा जाता है।



अतः, पथिक बाघ द्वारा पकड़कर खाया गया।
Quick Tip: इस कहानी की शिक्षा है "लोभः पापस्य कारणम्" (लोभ पाप का कारण है)। लोभ के कारण ही पथिक ने बाघ पर विश्वास किया और अपनी जान गँवाई।


Question 36:

'व्याघ्रपथिक कथा' पाठ में अविश्वासी पात्र किसे कहा गया है ?

  • (A) पथिक को
  • (B) धर्मशास्त्री को
  • (C) बाघ को
  • (D) सिंह को
Correct Answer: (C) बाघ को
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\
'व्याघ्रपथिक कथा' में, बाघ स्वयं को धर्मात्मा और दानशील दिखाने का नाटक करता है, लेकिन वास्तव में वह हिंसक और धोखेबाज है।



पथिक शुरू में उस पर विश्वास नहीं करता, क्योंकि हिंसक पशु पर विश्वास नहीं करना चाहिए।



लेकिन बाघ की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर वह उस पर विश्वास कर लेता है।



कहानी में बाघ एक अविश्वासी (जिस पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए) पात्र है, जिसने अपने स्वभाव के विपरीत आचरण का ढोंग रचा।



अतः, अविश्वासी पात्र बाघ को कहा गया है।
Quick Tip: इस कहानी में 'अविश्वासी' का अर्थ 'जिस पर विश्वास नहीं करना चाहिए' (untrustworthy) है, न कि 'जो विश्वास नहीं करता' (unbeliever)।


Question 37:

बाघ कैसा था ?

  • (A) बूढ़ा
  • (B) दुराचारी
  • (C) वंशहीन
  • (D) इनमें से सभी
Correct Answer: (D) इनमें से सभी
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\
'व्याघ्रपथिककथा' पाठ में बाघ अपनी स्थिति का वर्णन करते हुए कहता है कि वह:



(A) बूढ़ा (गलितनखदन्तः) हो गया है, इसलिए शिकार नहीं कर सकता।



(B) युवावस्था में बहुत दुराचारी था, जिसके कारण उसके परिवार वाले मर गए।



(C) अब वह वंशहीन (परिवार रहित) हो गया है।



चूंकि बाघ में ये सभी विशेषताएँ थीं, इसलिए सही उत्तर (D) इनमें से सभी होगा।
Quick Tip: जब किसी प्रश्न में 'इनमें से सभी' का विकल्प हो, तो अन्य सभी विकल्पों की सावधानीपूर्वक जांच करें। यदि एक से अधिक विकल्प सही हों, तो 'इनमें से सभी' ही सही उत्तर होगा।


Question 38:

सीता को 'विशालाक्षि' किसने संबोधित किया है ?

  • (A) लक्ष्मण ने
  • (B) प्रकृति ने
  • (C) राम ने
  • (D) भरत ने
Correct Answer: (C) राम ने
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\
यह प्रश्न 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ से है, जो रामायण के अयोध्याकाण्ड से संकलित है।



इस पाठ में, वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट पर्वत के निकट मन्दाकिनी नदी के किनारे भ्रमण करते हैं।



श्री राम मन्दाकिनी नदी की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हुए सीता को विभिन्न संबोधनों से पुकारते हैं।



वे सीता को 'हे सीते!', 'हे प्रिये!', और 'हे विशालाक्षि!' (बड़ी-बड़ी आँखों वाली) कहकर संबोधित करते हैं।



अतः, सीता को 'विशालाक्षि' राम ने संबोधित किया है।
Quick Tip: 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ में राम द्वारा सीता के लिए प्रयोग किए गए संबोधनों (जैसे प्रिये, विशालाक्षि, शोभने) को याद रखें।


Question 39:

स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम क्या था ?

  • (A) शिवशंकर
  • (B) मूलशंकर
  • (C) रविशंकर
  • (D) कृपाशंकर
Correct Answer: (B) मूलशंकर
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\
यह प्रश्न 'स्वामीदयानन्दः' पाठ से है।



पाठ के अनुसार, आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म गुजरात के टंकारा नामक गाँव में हुआ था।



उनके माता-पिता ने बचपन में उनका नाम मूलशंकर रखा था, क्योंकि उनका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था।



संन्यास लेने के बाद वे स्वामी दयानन्द सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हुए।



अतः, उनके बचपन का नाम मूलशंकर था।
Quick Tip: महान व्यक्तियों के मूल नाम और बाद में प्रसिद्ध हुए नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे स्वामी दयानन्द (मूलशंकर), गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ), स्वामी विवेकानन्द (नरेन्द्रनाथ)।


Question 40:

महर्षि वाल्मीकि ने 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ में प्रकृति का वर्णन किस छन्द में किया है ?

  • (A) शिखरिणी
  • (B) अनुष्टुप्
  • (C) मन्दाक्रान्ता
  • (D) आर्या
Correct Answer: (B) अनुष्टुप्
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\
'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'रामायण' महाकाव्य के अयोध्याकाण्ड से लिया गया है।



सम्पूर्ण रामायण महाकाव्य की रचना मुख्य रूप से अनुष्टुप् छन्द में हुई है।



अनुष्टुप् एक वार्णिक छन्द है, जिसके प्रत्येक चरण में आठ वर्ण होते हैं।



अतः, इस पाठ के श्लोक भी अनुष्टुप् छन्द में ही रचित हैं।
Quick Tip: रामायण और महाभारत, दोनों ही महाकाव्यों की रचना मुख्य रूप से अनुष्टुप् छन्द में हुई है। इस तथ्य को याद रखना कई प्रश्नों में सहायक हो सकता है।


Question 41:

'नमति' किस लकार का रूप है ?

  • (A) लोट्
  • (B) लट्
  • (C) लृट्
  • (D) लङ्
Correct Answer: (B) लट्
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\
'नमति' क्रिया पद 'नम्' (झुकना/नमस्कार करना) धातु से बना है।



लट् लकार का प्रयोग वर्तमान काल (Present Tense) के लिए होता है।



लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन में धातु के साथ 'ति' प्रत्यय लगता है।



नम् + ति = नमति (वह नमस्कार करता है)।



अतः, 'नमति' लट् लकार का रूप है।
Quick Tip: लकारों की पहचान उनके प्रत्ययों से करें: लट् (ति, तः, न्ति), लृट् (स्यति, स्यतः, स्यन्ति), लङ् (अ- उपसर्ग, त्, ताम्, न्), लोट् (तु, ताम्, न्तु), विधिलिङ् (एत्, एताम्, एयुः)।


Question 42:

'भू' धातु का लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप कौन-सा होगा ?

  • (A) भव
  • (B) भवथ
  • (C) भवतु
  • (D) भवत
Correct Answer: (A) भव
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\
'भू' (होना) धातु एक भ्वादिगणीय धातु है, जिसके रूप 'भव्' आदेश होकर चलते हैं।



लोट् लकार का प्रयोग आज्ञा या आदेश के अर्थ में होता है।



लोट् लकार में मध्यम पुरुष के रूप इस प्रकार हैं:



एकवचन: भव (तुम होओ)



द्विवचन: भवतम् (तुम दोनों होओ)



बहुवचन: भवत (तुम सब होओ)



प्रश्न में मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप पूछा गया है, जो 'भव' है।
Quick Tip: लोट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन में सामान्यतः धातु का मूल रूप (या आदेशित रूप) ही रहता है, जिसमें कोई प्रत्यय नहीं लगता। जैसे - पठ् \(\rightarrow\) पठ, गम् \(\rightarrow\) गच्छ, भू \(\rightarrow\) भव।


Question 43:

'शान्तिः' पद में कौन-सा प्रत्यय है ?

  • (A) ति
  • (B) क्तिन्
  • (C) क्त
  • (D) यत्
Correct Answer: (B) क्तिन्
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\
'शान्तिः' एक भाववाचक स्त्रीलिंग संज्ञा है।



'क्तिन्' प्रत्यय का प्रयोग धातुओं से भाववाचक स्त्रीलिंग संज्ञा बनाने के लिए होता है।



'क्तिन्' में से 'ति' शेष रहता है।



यह पद 'शम्' (शान्त होना) धातु में 'क्तिन्' प्रत्यय लगाने से बनता है।



शम् + क्तिन् \(\rightarrow\) शान्तिः।



अतः, इसमें 'क्तिन्' प्रत्यय है।
Quick Tip: 'क्तिन्' प्रत्यय से बनने वाली संज्ञाएँ हमेशा स्त्रीलिंग होती हैं। जैसे - कृ+क्तिन्=कृतिः, मन्+क्तिन्=मतिः, गम्+क्तिन्=गतिः।


Question 44:

'गम् + तुमुन्' के योग से कौन-सा अव्यय बनेगा ?

  • (A) गमतुम्
  • (B) गमितुम्
  • (C) गन्तुम्
  • (D) गमनाय
Correct Answer: (C) गन्तुम्
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\
'तुमुन्' प्रत्यय का प्रयोग 'के लिए' (for the purpose of) के अर्थ में होता है।



'तुमुन्' प्रत्यय का 'तुम्' शेष रहता है और यह एक अव्यय (indeclinable) पद बनाता है।



'गम्' (जाना) धातु में जब 'तुमुन्' प्रत्यय लगता है, तो 'म्' का 'न्' हो जाता है।



गम् + तुमुन् = गन्तुम् (जाने के लिए)।



अतः, सही पद 'गन्तुम्' है।
Quick Tip: कुछ धातुओं के साथ 'तुमुन्' प्रत्यय लगने पर परिवर्तन होता है, जैसे गम्+तुमुन्=गन्तुम्, हन्+तुमुन्=हन्तुम्। इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।


Question 45:

'पठनम्' पद में कौन-सा प्रत्यय है ?

  • (A) क्त
  • (B) ल्युट्
  • (C) क्तवतु
  • (D) शतृ
Correct Answer: (B) ल्युट्
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\
'पठनम्' एक भाववाचक नपुंसकलिंग संज्ञा है, जिसका अर्थ है 'पढ़ना' (the act of reading)।



'ल्युट्' प्रत्यय का प्रयोग धातुओं से भाववाचक नपुंसकलिंग संज्ञा बनाने के लिए होता है।



'ल्युट्' प्रत्यय का 'यु' शेष रहता है, जो 'अन' में बदल जाता है ('युवोरनाकौ' सूत्र से)।



पठ् (धातु) + ल्युट् (प्रत्यय) \(\rightarrow\) पठ् + अन \(\rightarrow\) पठनम्।



अतः, 'पठनम्' में 'ल्युट्' प्रत्यय है।
Quick Tip: 'ल्युट्' प्रत्यय से बनने वाले शब्द हमेशा नपुंसकलिंग होते हैं और उनके अंत में 'अनम्' आता है। जैसे - लिख्+ल्युट्=लेखनम्, गम्+ल्युट्=गमनम्, श्रु+ल्युट्=श्रवणम्।


Question 46:

राम 'मन्दाकिनी' की शोभा किसे दिखा रहे हैं ?

  • (A) लक्ष्मण को
  • (B) सीता को
  • (C) मंदोदरी को
  • (D) विभीषण को
Correct Answer: (B) सीता को
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\
यह प्रश्न 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ से है।



इस पाठ में, वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के तट पर हैं।



श्री राम मन्दाकिनी नदी की प्राकृतिक सुंदरता, उसके निर्मल जल, रंग-बिरंगे तटों और उसमें विहार करते पशु-पक्षियों की शोभा का वर्णन करते हैं।



वे यह सारा वर्णन अपनी पत्नी सीता को संबोधित करते हुए करते हैं, उन्हें 'हे सीते!', 'हे प्रिये!', 'हे विशालाक्षि!' आदि कहकर पुकारते हैं।



अतः, राम 'मन्दाकिनी' की शोभा सीता को दिखा रहे हैं।
Quick Tip: 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ राम और सीता के बीच एक संवाद के रूप में है, जिसमें राम वक्ता हैं और सीता श्रोता हैं।


Question 47:

'रघुवंश' महाकाव्य के रचनाकार कौन हैं ?

  • (A) वाल्मीकि
  • (B) तुलसीदास
  • (C) कालिदास
  • (D) व्याडि
Correct Answer: (C) कालिदास
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\
'रघुवंश' संस्कृत साहित्य के पाँच महाकाव्यों में से एक है।



यह एक प्रसिद्ध महाकाव्य है जिसमें सूर्यवंशी राजाओं, विशेषकर रघु के वंश (राम सहित) का वर्णन है।



इस महाकाव्य के रचनाकार महाकवि कालिदास हैं।



कालिदास की अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ 'कुमारसम्भवम्' (महाकाव्य), 'मेघदूतम्' (खण्डकाव्य) और 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' (नाटक) हैं।
Quick Tip: महाकवि कालिदास की सात प्रसिद्ध रचनाओं को याद कर लें। उन्हें 'कविकुलगुरु' भी कहा जाता है।


Question 48:

विशाल नेत्रोंवाली कौन हैं ?

  • (A) श्रीलक्ष्मी
  • (B) पार्वती
  • (C) सीता
  • (D) राधा
Correct Answer: (C) सीता
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\
यह प्रश्न 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ के संदर्भ में है।



पाठ के श्लोकों में, श्री राम मन्दाकिनी नदी का वर्णन करते हुए सीता को 'हे विशालाक्षि!' कहकर संबोधित करते हैं।



'विशालाक्षि' का अर्थ होता है 'विशाल नेत्रोंवाली' (बड़ी-बड़ी आँखों वाली)।



अतः, इस पाठ के अनुसार विशाल नेत्रोंवाली सीता हैं।
Quick Tip: पाठ में पात्रों के लिए प्रयुक्त विशेषणों और संबोधनों पर ध्यान दें, क्योंकि इनसे सीधे प्रश्न बन सकते हैं।


Question 49:

'हंस-सारस' द्वारा सेवित नदी कौन-सी है ?

  • (A) मन्दाकिनी
  • (B) यमुना
  • (C) सरयू
  • (D) कोसी
Correct Answer: (A) मन्दाकिनी
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\
'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ में श्री राम मन्दाकिनी नदी की सुंदरता का वर्णन करते हैं।



एक श्लोक में वे कहते हैं: "हंससारससेविताम्" अर्थात् यह (मन्दाकिनी) नदी हंस और सारस पक्षियों द्वारा सेवित है (अर्थात् इसमें हंस और सारस विहार करते हैं)।



अतः, 'हंस-सारस' द्वारा सेवित नदी मन्दाकिनी है।
Quick Tip: पाठ के श्लोकों में वर्णित प्राकृतिक दृश्यों के प्रमुख तत्वों को याद रखें, जैसे - मन्दाकिनी नदी में तैरते फूल, जल पीते हिरण, और विहार करते हंस-सारस।


Question 50:

कौन नृत्य कर रहा है ?

  • (A) भक्त
  • (B) पर्वत
  • (C) वृक्ष
  • (D) मुनि
Correct Answer: (B) पर्वत
View Solution

\
यह प्रश्न भी 'मन्दाकिनीवर्णनम्' पाठ के एक श्लोक से है।



श्लोक में श्री राम कहते हैं: "पवन द्वारा हिलाए गए शिखरों के माध्यम से पर्वत नृत्य करते हुए से प्रतीत हो रहे हैं।" ("नृत्यत इव पर्वतः")।



यहाँ कवि ने मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करते हुए निर्जीव पर्वत पर नृत्य करने की क्रिया का आरोप किया है।



अतः, पाठ के अनुसार पर्वत नृत्य कर रहा है।
Quick Tip: काव्य में अक्सर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग होता है, जहाँ प्राकृतिक वस्तुओं (जैसे पर्वत, नदी, बादल) को मानवीय क्रियाएँ करते हुए दिखाया जाता है।


Question 51:

कौन-सी भूमि पवित्र और ममतामयी है ?

  • (A) ग्रामीण भूमि
  • (B) भारतभूमि
  • (C) अरण्यभूमि
  • (D) मरुस्थलीय भूमि
Correct Answer: (B) भारतभूमि
View Solution

\
यह प्रश्न 'भारतमहिमा' पाठ पर आधारित है।



पाठ के एक आधुनिक श्लोक में भारतभूमि का वर्णन करते हुए कहा गया है: "इयं निर्मला वत्सला मातृभूमिः"



इसका अर्थ है: यह हमारी मातृभूमि (भारतभूमि) निर्मल (पवित्र) और वत्सला (ममतामयी) है।



अतः, भारतभूमि पवित्र और ममतामयी है।
Quick Tip: 'भारतमहिमा' पाठ में भारतभूमि के लिए प्रयुक्त विशेषणों (जैसे निर्मला, वत्सला, विशाला, शोभना) को याद रखें।


Question 52:

अयं निर्मला ............ वहन्तो वसन्ति ।। श्लोकांश किस पाठ से उद्धृत है ?

  • (A) भारतमहिमा
  • (B) नीतिश्लोकाः
  • (C) शास्त्रकाराः
  • (D) मङ्गलम्
Correct Answer: (A) भारतमहिमा
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\
यह श्लोकांश 'भारतमहिमा' पाठ में संकलित एक आधुनिक पद्य का भाग है।



पूरा श्लोक है: "इयं निर्मला वत्सला मातृभूमिः, प्रसिद्धं सदा भारतं वर्षमेतत्। विभिन्ना जना धर्मजातिप्रभेदैः, इहैैकत्वभावं वहन्तो वसन्ति॥"



यहाँ 'निर्मला' शब्द का प्रयोग भारतभूमि के लिए हुआ है।



अतः, यह श्लोकांश 'भारतमहिमा' पाठ से उद्धृत है।
Quick Tip: पाठों के महत्वपूर्ण श्लोकों की पहली पंक्ति या कुछ प्रमुख शब्दों को याद रखने से यह पहचानने में आसानी होती है कि वे किस पाठ से हैं।


Question 53:

देवगण क्या गाते हैं ?

  • (A) रामायण
  • (B) गीत
  • (C) महाभारत
  • (D) कविता
Correct Answer: (B) गीत
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यह प्रश्न 'भारतमहिमा' पाठ के प्रथम श्लोक (विष्णुपुराण से संकलित) पर आधारित है।



श्लोक की पहली पंक्ति है: "गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे।"



इसका अर्थ है: देवगण भी निश्चय ही गीत गाते हैं (कि) वे लोग धन्य हैं जो भारतभूमि पर जन्म लेते हैं।



अतः, देवगण गीत (गीतकानि) गाते हैं।
Quick Tip: श्लोकों के क्रियापदों पर ध्यान दें। 'गायन्ति' (गाते हैं) क्रिया का कर्म 'गीतकानि' (गीतों को) है, जिससे उत्तर स्पष्ट हो जाता है।


Question 54:

विदुरनीति के रचनाकार कौन हैं ?

  • (A) चाणक्य
  • (B) मनु
  • (C) विदुर
  • (D) वाल्मीकि
Correct Answer: (C) विदुर
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'नीतिश्लोकाः' पाठ महाभारत के उद्योग पर्व से संकलित है।



यह अंश 'विदुरनीति' के नाम से प्रसिद्ध है।



महाभारत में, विदुर ने राजा धृतराष्ट्र को युद्ध के संकट के समय राजधर्म और नीति का उपदेश दिया था।



विदुर द्वारा कहे गए इन नीतिपूर्ण श्लोकों के संकलन को ही 'विदुरनीति' कहते हैं।



अतः, 'विदुरनीति' के रचनाकार (संकलनकर्ता/वक्ता) महात्मा विदुर हैं।
Quick Tip: यद्यपि महाभारत के रचयिता वेदव्यास हैं, लेकिन उसके अंतर्गत आने वाले विशिष्ट अंशों (जैसे विदुरनीति, भगवद्गीता) को उनके वक्ता के नाम से भी जाना जाता है।


Question 55:

काम, क्रोध और लोभ किसके द्वार हैं ?

  • (A) स्वर्ग
  • (B) मृत्यु
  • (C) नरक
  • (D) मोक्ष
Correct Answer: (C) नरक
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यह 'नीतिश्लोकाः' पाठ के एक महत्वपूर्ण श्लोक पर आधारित है।



श्लोक है: "त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥"



इसका अर्थ है: आत्मा का नाश करने वाले नरक के ये तीन द्वार हैं - काम, क्रोध और लोभ। इसलिए इन तीनों को त्याग देना चाहिए।



अतः, काम, क्रोध और लोभ नरक के द्वार हैं।
Quick Tip: भगवद्गीता और विदुरनीति दोनों में नरक के तीन द्वारों - काम, क्रोध, और लोभ - का उल्लेख है। यह एक महत्वपूर्ण नैतिक शिक्षा है।


Question 56:

'सुखावहा' क्या है ?

  • (A) धर्मः
  • (B) अहिंसा
  • (C) विद्या
  • (D) क्षमा
Correct Answer: (B) अहिंसा
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यह प्रश्न 'नीतिश्लोकाः' पाठ में वर्णित एक श्लोक से है।



श्लोक में कहा गया है: "एक एव धर्मः परमं श्रेयः, क्षमैका शान्तिरुत्तमा। विद्यैका परमा तृप्तिः, अहिंसैका सुखावहा॥"



इसका अर्थ है: एक धर्म ही परम कल्याणकारी है, एक क्षमा ही उत्तम शांति है, एक विद्या ही परम संतोष देने वाली है, और एक अहिंसा ही सुख देने वाली (सुखावहा) है।



अतः, 'सुखावहा' अहिंसा है।
Quick Tip: 'नीतिश्लोकाः' पाठ के श्लोकों में किस गुण को क्या कहा गया है, इसे याद रखें। जैसे - परमा तृप्तिः (विद्या), शान्तिरुत्तमा (क्षमा), सुखावहा (अहिंसा)।


Question 57:

शिक्षक दलित बालक को कहाँ ले गये ?

  • (A) क्षेत्र
  • (B) घर
  • (C) विद्यालय
  • (D) आश्रम
Correct Answer: (C) विद्यालय
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यह प्रश्न 'कर्मवीरकथा' पाठ से है, जो रामप्रवेश राम के जीवन पर आधारित है।



पाठ के अनुसार, भीखनटोला गाँव में एक शिक्षक आते हैं।



वे खेल में मग्न एक दलित बालक (रामप्रवेश राम) को देखते हैं और उसकी प्रतिभा से प्रभावित होते हैं।



शिक्षक उस बालक को अपने साथ विद्यालय ले जाते हैं और उसे पढ़ाना आरम्भ करते हैं।



अतः, शिक्षक दलित बालक को विद्यालय ले गये।
Quick Tip: 'कर्मवीरकथा' की कहानी एक शिक्षक द्वारा एक प्रतिभाशाली छात्र की खोज और उसे मार्गदर्शन देने के महत्व को दर्शाती है।


Question 58:

रामप्रवेश राम ने किस परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया ?

  • (A) इण्टर
  • (B) स्नातक
  • (C) स्नातकोत्तर
  • (D) मैट्रिक
Correct Answer: (B) स्नातक
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'कर्मवीरकथा' पाठ में रामप्रवेश राम की शैक्षणिक सफलताओं का वर्णन है।



पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि "महाविद्यालयस्य प्रवेशेऽपि शिक्षकस्य प्रियः सञ्जातः... स्नातकपरीक्षायां प्रथमस्थानं प्राप्य स्वमहाविद्यालयस्य ख्यातिम् अवर्धयत्।"



इसका अर्थ है कि उन्होंने स्नातक (Graduation) की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपने महाविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ाई।



अतः, सही उत्तर (B) स्नातक है।
Quick Tip: रामप्रवेश राम की शैक्षणिक यात्रा के क्रम को याद रखें: प्राथमिक विद्यालय, महाविद्यालय (स्नातक), और अंत में केंद्रीय लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता।


Question 59:

दलित बालक का नाम क्या था ?

  • (A) प्रवेश राम
  • (B) शिवराम
  • (C) रामप्रवेश राम
  • (D) रामजनम राम
Correct Answer: (C) रामप्रवेश राम
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'कर्मवीरकथा' पाठ के मुख्य पात्र, जो भीखनटोला गाँव का एक दलित बालक था, का नाम रामप्रवेश राम था।



उसने अपनी लगन और परिश्रम से शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण सफलता प्राप्त की और एक कर्मवीर का उदाहरण प्रस्तुत किया।



अतः, दलित बालक का नाम रामप्रवेश राम था।
Quick Tip: पाठ के मुख्य पात्रों के पूरे नाम को सही-सही याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिलते-जुलते नाम वाले विकल्प देकर भ्रमित किया जा सकता है।


Question 60:

मैत्रेयी कौन थी ?

  • (A) याज्ञवल्क्य की पुत्री
  • (B) मधुराविजयम् की लेखिका
  • (C) याज्ञवल्क्य की पत्नी
  • (D) याज्ञवल्क्य की माता
Correct Answer: (C) याज्ञवल्क्य की पत्नी
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यह प्रश्न 'संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः' पाठ से है।



पाठ में बृहदारण्यकोपनिषद् का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि महर्षि याज्ञवल्क्य की पत्नी मैत्रेयी एक दार्शनिक विचारों वाली और आत्मतत्त्व में रुचि रखने वाली विदुषी थीं।



याज्ञवल्क्य ने अपनी पत्नी मैत्रेयी को ही आत्मतत्त्व की शिक्षा दी थी।



अतः, मैत्रेयी याज्ञवल्क्य की पत्नी थीं।
Quick Tip: प्राचीन भारत की प्रमुख विदुषी स्त्रियों, जैसे मैत्रेयी, गार्गी, सुलभा, और उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र को याद रखें।


Question 61:

'चार्थे द्वन्द्वः' सूत्र का उदाहरण कौन-सा है ?

  • (A) जीवनचरितम्
  • (B) पञ्चामृतम्
  • (C) प्राचीनकालः
  • (D) धर्मार्थकामाः
Correct Answer: (D) धर्मार्थकामाः
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'चार्थे द्वन्द्वः' सूत्र द्वन्द्व समास का विधान करता है।



इसका अर्थ है कि 'च' (और) के अर्थ में द्वन्द्व समास होता है। इसमें दो या अधिक पद मिलकर एक हो जाते हैं।



(A) जीवनचरितम् = जीवनस्य चरितम् (षष्ठी तत्पुरुष)।



(B) पञ्चामृतम् = पञ्चानाम् अमृतानां समाहारः (द्विगु)।



(C) प्राचीनकालः = प्राचीनः कालः (कर्मधारय)।



(D) धर्मार्थकामाः = धर्मः च अर्थः च कामः च (इतरेतर द्वन्द्व)। यहाँ तीन पद 'च' के अर्थ में जुड़े हैं।



अतः, यह 'चार्थे द्वन्द्वः' सूत्र का स्पष्ट उदाहरण है।
Quick Tip: द्वन्द्व समास का विग्रह करते समय प्रत्येक पद के बाद 'च' लगाया जाता है। जैसे 'धर्मार्थकामाः' का विग्रह है 'धर्मः च अर्थः च कामः च'।


Question 62:

'सचिवानाम् आलयः' का समस्त पद क्या होगा ?

  • (A) सचिवालयः
  • (B) सचिवानामालय
  • (C) सचिवआलयः
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (A) सचिवालयः
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'सचिवानाम् आलयः' एक समास-विग्रह है। हमें इसका समस्त पद (सामासिक पद) बनाना है।



यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है, जहाँ पूर्वपद की षष्ठी विभक्ति ('आनाम्') का लोप हो जाता है।



पूर्वपद 'सचिव' और उत्तरपद 'आलयः' को मिलाने पर दीर्घ संधि होगी।



सचिव (अ) + आलयः (आ) = सचिवा (आ) लयः।



अतः, समस्त पद 'सचिवालयः' बनेगा, जिसका अर्थ है 'सचिवों का घर'।
Quick Tip: समास करते समय पूर्वपद की विभक्ति का लोप हो जाता है और पदों को मिलाते समय संधि के नियमों का पालन किया जाता है।


Question 63:

'मातापितरौ' कौन-सा समास होगा ?

  • (A) द्विगु
  • (B) द्वन्द्व
  • (C) अव्ययीभाव
  • (D) बहुव्रीहि
Correct Answer: (B) द्वन्द्व
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'मातापितरौ' का समास-विग्रह 'माता च पिता च' (माता और पिता) होता है।



जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर 'च' (और) का प्रयोग होता है, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं।



'मातापितरौ' में 'माता' और 'पिता' दोनों पद प्रधान हैं।



अतः, यह इतरेतर द्वन्द्व समास का उदाहरण है।
Quick Tip: द्वन्द्व समास के समस्त पद का वचन उसके घटक पदों की संख्या के अनुसार होता है। यहाँ दो पद (माता, पिता) हैं, इसलिए समस्त पद द्विवचन ('पितरौ') में है।


Question 64:

'युष्माकम्' का मूल शब्द क्या है ?

  • (A) अस्मद्
  • (B) युष्मद्
  • (C) एतत्
  • (D) तत्
Correct Answer: (B) युष्मद्
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'युष्माकम्' एक विभक्तियुक्त सर्वनाम पद है।



इसका मूल शब्द (प्रातिपदिक) 'युष्मद्' है, जिसका अर्थ 'तुम' होता है।



'युष्मद्' शब्द का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन का रूप 'युष्माकम्' होता है, जिसका अर्थ है 'तुम सबका'।



विकल्प (A) 'अस्मद्' का अर्थ 'मैं' होता है।



अतः, सही मूल शब्द 'युष्मद्' है।
Quick Tip: मूल शब्द वह शब्द होता है जिसमें कोई विभक्ति नहीं लगी होती। 'अस्मद्' (मैं) और 'युष्मद्' (तुम) दो सबसे महत्वपूर्ण सर्वनाम शब्द रूप हैं, इन्हें अवश्य याद कर लें।


Question 65:

'चत्वारः' का मूल शब्द क्या है ?

  • (A) चतस्रः
  • (B) चत्वारि
  • (C) चतुर्
  • (D) चत्वार
Correct Answer: (C) चतुर्
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\
'चत्वारः' संख्या चार का पुँल्लिंग रूप है।



संस्कृत में संख्या 1 से 4 तक के रूप तीनों लिंगों (पुँल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) में अलग-अलग चलते हैं।



संख्या 'चार' का मूल शब्द 'चतुर्' (रकारान्त) है।



'चतुर्' शब्द का प्रथमा विभक्ति, पुँल्लिंग, बहुवचन का रूप 'चत्वारः' होता है।



(A) चतस्रः स्त्रीलिंग रूप है। (B) चत्वारि नपुंसकलिंग रूप है। (D) चत्वार कोई मानक रूप नहीं है।
Quick Tip: संख्या 'चार' के तीनों लिंगों में रूप याद रखें: पुँल्लिंग - चत्वारः, स्त्रीलिंग - चतस्रः, नपुंसकलिंग - चत्वारि।


Question 66:

'अस्' धातु लोट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन रूप क्या होगा ?

  • (A) असि
  • (B) अस्तु
  • (C) सन्तु
  • (D) एधि
Correct Answer: (C) सन्तु
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'अस्' (होना) धातु एक अदादिगणीय धातु है, जिसके रूप कुछ भिन्न तरीके से चलते हैं।



लोट् लकार (आज्ञा के अर्थ में) में 'अस्' धातु के प्रथम पुरुष के रूप इस प्रकार हैं:



एकवचन: अस्तु (वह हो)



द्विवचन: स्ताम् (वे दोनों हों)



बहुवचन: सन्तु (वे सब हों)



प्रश्न में प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप पूछा गया है, जो 'सन्तु' है।
Quick Tip: 'अस्' धातु के लट् और लोट् लकार के रूप बहुत महत्वपूर्ण हैं। लट् लकार - अस्ति, स्तः, सन्ति। लोट् लकार - अस्तु, स्ताम्, सन्तु।


Question 67:

'पठेयम्' पद में कौन-सी धातु है ?

  • (A) पठे
  • (B) पठ्
  • (C) पठति
  • (D) पठत
Correct Answer: (B) पठ्
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'पठेयम्' एक क्रिया पद है। हमें इसकी मूल धातु (root verb) बतानी है।



'पठेयम्' पद विधिलिङ् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है।



इसका अर्थ है 'मुझे पढ़ना चाहिए'।



यह रूप 'पठ्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'पढ़ना'।



अतः, इसमें मूल धातु 'पठ्' है।
Quick Tip: किसी भी क्रिया पद का मूल रूप, जिसमें कोई प्रत्यय न लगा हो, उसकी धातु कहलाता है। जैसे - गच्छति, जगाम, गन्ता - इन सभी की धातु 'गम्' है।


Question 68:

'वि + ज्ञा + ल्यप्' के मेल से कौन-सा पद बनेगा ?

  • (A) विज्ञाप्य
  • (B) विज्ञः
  • (C) विज्ञाय
  • (D) विज्ञान्
Correct Answer: (C) विज्ञाय
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\
'ल्यप्' एक क्त्वा प्रत्यय के स्थान पर होने वाला प्रत्यय है।



इसका प्रयोग तब होता है जब धातु से पहले कोई उपसर्ग हो। इसका अर्थ 'करके' होता है और इसमें से केवल 'य' शेष रहता है।



यहाँ 'ज्ञा' (जानना) धातु से पहले 'वि' उपसर्ग है।



अतः, वि + ज्ञा + ल्यप् के मेल से 'विज्ञाय' पद बनेगा, जिसका अर्थ है 'विशेष रूप से जानकर'।
Quick Tip: 'क्त्वा' प्रत्यय और 'ल्यप्' प्रत्यय का अर्थ समान ('करके') होता है। अंतर केवल इतना है कि 'ल्यप्' का प्रयोग उपसर्ग युक्त धातुओं के साथ होता है। जैसे: पठ्+क्त्वा=पठित्वा, लेकिन सम्+पठ्+ल्यप्=सम्पठ्य।


Question 69:

'रोगः' में कौन-सा प्रत्यय है ?

  • (A) शतृ
  • (B) क्त
  • (C) घञ्
  • (D) ल्युट्
Correct Answer: (C) घञ्
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\
'रोगः' एक पुँल्लिंग संज्ञा पद है।



यह 'रुज्' (तोड़ना, बीमार करना) धातु से बना है।



'घञ्' प्रत्यय भाववाचक और कर्तृवाचक पुँल्लिंग संज्ञा बनाने के लिए प्रयोग होता है।



'घञ्' प्रत्यय लगने पर धातु की उपधा (second last letter) में वृद्धि हो जाती है (यहाँ 'उ' का 'ओ' हो गया) और 'ज्' का 'ग्' हो जाता है।



रुज् + घञ् \(\rightarrow\) रोग् + अ \(\rightarrow\) रोगः।
Quick Tip: 'घञ्' प्रत्यय से बनने वाले शब्द प्रायः पुँल्लिंग होते हैं और धातु के पहले स्वर में वृद्धि (अ\(\rightarrow\)आ, इ\(\rightarrow\)ऐ, उ\(\rightarrow\)ओ) होती है, जैसे पठ्+घञ्=पाठः, लिख्+घञ्=लेखः।


Question 70:

'कृ + क्तवतु' के योग से कौन-सा पद बनेगा ?

  • (A) कृतवती
  • (B) कर्त्तव्यः
  • (C) कृतम्
  • (D) करणीयः
Correct Answer: (A) कृतवती
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\
'क्तवतु' प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल में कर्ता के विशेषण के रूप में होता है। इसका अर्थ 'किया' होता है।



इसके रूप तीनों लिंगों में चलते हैं।



कृ + क्तवतु से पुँल्लिंग में 'कृतवान्', नपुंसकलिंग में 'कृतवत्' और स्त्रीलिंग में 'कृतवती' बनता है।



(A) कृतवती: यह स्त्रीलिंग, एकवचन का रूप है।



(B) कर्त्तव्यः: यह कृ + तव्यत् से बनता है।



(C) कृतम्: यह कृ + क्त से बनता है।



(D) करणीयः: यह कृ + अनीयर् से बनता है।



दिए गए विकल्पों में, 'कृतवती' ही 'कृ + क्तवतु' के योग से बना पद है।
Quick Tip: 'क्त' और 'क्तवतु' दोनों भूतकाल के प्रत्यय हैं। 'क्त' प्रत्यय कर्मवाच्य या भाववाच्य में लगता है (तेन ग्रन्थः पठितः), जबकि 'क्तवतु' कर्तृवाच्य में लगता है (सः ग्रन्थं पठितवान्)।


Question 71:

'बृहत्संहिता' के रचनाकार कौन हैं ?

  • (A) वराहमिहिर
  • (B) आर्यभट
  • (C) बादरायण
  • (D) कणाद
Correct Answer: (A) वराहमिहिर
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\
यह प्रश्न 'शास्त्रकाराः' पाठ से है।



'बृहत्संहिता' प्राचीन भारत का एक विशाल विश्वकोशीय ग्रंथ है, जिसमें खगोल विज्ञान, ज्योतिष, वास्तुकला, मौसम विज्ञान और कई अन्य विषयों पर जानकारी है।



इस महत्वपूर्ण ग्रंथ के रचनाकार महान खगोलशास्त्री और ज्योतिषी वराहमिहिर थे।



अतः, 'बृहत्संहिता' के रचनाकार वराहमिहिर हैं।
Quick Tip: प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों और उनके प्रमुख ग्रंथों को याद रखें: आर्यभट (आर्यभटीयम्), वराहमिहिर (बृहत्संहिता), चरक (चरकसंहिता), सुश्रुत (सुश्रुतसंहिता)।


Question 72:

वेदरूपी शास्त्र कैसा होता है ?

  • (A) अनित्य
  • (B) नित्य
  • (C) कृतक
  • (D) कृत्य
Correct Answer: (B) नित्य
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\
'शास्त्रकाराः' पाठ में शास्त्रों के दो प्रकार बताए गए हैं।



एक 'कृतक' शास्त्र, जो ऋषियों और विद्वानों द्वारा रचे गए हैं। ये अनित्य होते हैं।



दूसरे 'नित्य' शास्त्र, जो ईश्वर द्वारा निर्मित माने जाते हैं।



वेद को अपौरुषेय (किसी पुरुष द्वारा नहीं रचा गया) और नित्य (शाश्वत) माना जाता है।



अतः, वेदरूपी शास्त्र नित्य होता है।
Quick Tip: 'कृतक' का अर्थ है 'किया हुआ' या 'रचा हुआ' (man-made), जो अनित्य होता है। 'नित्य' का अर्थ है 'शाश्वत' (eternal)। वेद नित्य हैं और अन्य शास्त्र (जैसे व्याकरण, दर्शन) कृतक हैं।


Question 73:

गौतम ने किस दर्शन की रचना की ?

  • (A) सांख्य दर्शन
  • (B) योग दर्शन
  • (C) न्याय दर्शन
  • (D) मीमांसा दर्शन
Correct Answer: (C) न्याय दर्शन
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\
भारत में छः प्रमुख आस्तिक दर्शन (षड्दर्शन) हैं।



'शास्त्रकाराः' पाठ में इन दर्शनों और उनके प्रवर्तकों का उल्लेख है।



महर्षि गौतम ने 'न्याय दर्शन' की रचना की, जो तर्क और प्रमाण पर आधारित है।



(A) सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कपिल हैं।



(B) योग दर्शन के प्रवर्तक पतञ्जलि हैं।



(D) मीमांसा दर्शन के प्रवर्तक जैमिनि हैं।



अतः, गौतम ने न्याय दर्शन की रचना की।
Quick Tip: छः दर्शनों और उनके प्रवर्तकों की जोड़ी बनाकर याद करें: सांख्य-कपिल, योग-पतञ्जलि, न्याय-गौतम, वैशेषिक-कणाद, मीमांसा-जैमिनि, वेदान्त-बादरायण।


Question 74:

प्राचीन संस्कृति की पहचान किससे होती है ?

  • (A) धर्मों से
  • (B) संस्कारों से
  • (C) कर्मों से
  • (D) आचारों से
Correct Answer: (B) संस्कारों से
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\
यह प्रश्न 'भारतसंस्काराः' पाठ पर आधारित है।



पाठ के आरम्भ में ही कहा गया है कि संस्कार व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और प्राचीन संस्कृति का ज्ञान संस्कारों से ही होता है। ("प्राचीनसंस्कृतेः अभिज्ञानं संस्कारेभ्यो जायते।")



संस्कार ही भारतीय जीवन-दर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और इन्हीं से किसी संस्कृति की पहचान होती है।



अतः, प्राचीन संस्कृति की पहचान संस्कारों से होती है।
Quick Tip: संस्कारों का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के गुणों को बढ़ाना और दोषों को दूर करना है, जो अंततः संस्कृति को परिभाषित करता है।


Question 75:

साहित्य ग्रन्थों में केशान्त संस्कार का नामान्तर क्या है ?

  • (A) उपनयन
  • (B) गोदान
  • (C) कर्णवेध
  • (D) समावर्त्तन
Correct Answer: (B) गोदान
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\
'भारतसंस्काराः' पाठ के अनुसार, केशान्त संस्कार शिक्षा संस्कारों के अंतर्गत आता है।



इसमें गुरु के आश्रम में शिष्य का प्रथम क्षौर-कर्म (मुंडन) होता है।



पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि साहित्य ग्रंथों में केशान्त संस्कार का दूसरा नाम 'गोदान' संस्कार भी मिलता है, क्योंकि इस संस्कार के अवसर पर गो-दान (गाय का दान) मुख्य कर्म होता था।



अतः, केशान्त संस्कार का नामान्तर गोदान है।
Quick Tip: संस्कारों के अन्य या विशेष नामों को भी याद रखें, जैसे केशान्त का दूसरा नाम गोदान है।


Question 76:

स्वामी दयानन्द का परिवार किसका उपासक था ?

  • (A) सूर्य
  • (B) विष्णु
  • (C) शिव
  • (D) राम
Correct Answer: (C) शिव
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'स्वामीदयानन्दः' पाठ के अनुसार, स्वामी दयानन्द (मूलशंकर) का जन्म एक शैव मतानुयायी परिवार में हुआ था।



उनका परिवार भगवान शिव का उपासक था।



इसी कारण उनके जीवन की दिशा बदलने वाली घटना महाशिवरात्रि के पर्व पर घटी, जब वे अपने पिता के साथ शिव मंदिर में रात्रि जागरण कर रहे थे।



अतः, उनका परिवार शिव का उपासक था।
Quick Tip: स्वामी दयानन्द के जीवन की महाशिवरात्रि वाली घटना को याद रखें। इसी घटना ने उन्हें मूर्तिपूजा के प्रति अनास्थावान बनाया और वे सत्य की खोज में निकल पड़े।


Question 77:

स्वामी दयानन्द का निधन कब हुआ ?

  • (A) 1884 ई०
  • (B) 1885 ई०
  • (C) 1883 ई०
  • (D) 1882 ई०
Correct Answer: (C) 1883 ई०
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'स्वामीदयानन्दः' पाठ में उनके जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख है।



स्वामी दयानन्द सरस्वती, जिन्होंने 1875 ई. में आर्य समाज की स्थापना की, एक महान समाज सुधारक थे।



उनका निधन (मृत्यु) 1883 ईस्वी में हुआ था।



अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: स्वामी दयानन्द के जीवन से संबंधित दो महत्वपूर्ण तिथियाँ याद रखें: आर्य समाज की स्थापना (1875 ई.) और उनका निधन (1883 ई.)।


Question 78:

कौन प्रसाद को खा रहा था ?

  • (A) चूहा
  • (B) चींटी
  • (C) बकरा
  • (D) बिल्ली
Correct Answer: (A) चूहा
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यह घटना 'स्वामीदयानन्दः' पाठ में वर्णित है।



महाशिवरात्रि के रात्रि जागरण के दौरान, बालक मूलशंकर ने देखा कि शिवलिंग पर चढ़ाये गये प्रसाद को एक चूहा (मूषकः) खा रहा है।



इस घटना को देखकर उनके मन में मूर्तिपूजा के प्रति शंका उत्पन्न हुई कि जो देवता अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकता, वह दूसरों की रक्षा कैसे करेगा।



अतः, प्रसाद को चूहा खा रहा था।
Quick Tip: यह घटना स्वामी दयानन्द के जीवन का 'टर्निंग प्वाइंट' थी, जिसने उन्हें सच्चे ईश्वर के स्वरूप को जानने के लिए प्रेरित किया।


Question 79:

समाज और शिक्षा के उद्धारक कौन थे ?

  • (A) विवेकानन्द
  • (B) रामप्रवेश
  • (C) दयानन्द
  • (D) विरजानन्द
Correct Answer: (C) दयानन्द
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'स्वामीदयानन्दः' पाठ में उन्हें एक महान समाज सुधारक और शिक्षा के उद्धारक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।



उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे जातिवाद, छुआछूत, बाल-विवाह का खंडन किया और विधवा-विवाह तथा स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया।



शिक्षा के क्षेत्र में, उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और आधुनिक शिक्षा के लिए डी.ए.वी. (दयानन्द एंग्लो-वैदिक) स्कूलों की स्थापना को प्रेरित किया।



अतः, दिए गए विकल्पों में, दयानन्द समाज और शिक्षा के महान उद्धारक थे।
Quick Tip: स्वामी दयानन्द के योगदान को दो मुख्य भागों में याद रखें: समाज सुधार (जातिवाद का विरोध, स्त्री-उद्धार) और शिक्षा सुधार (डी.ए.वी. स्कूल, गुरुकुल)।


Question 80:

"वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवम्" यह किसकी उक्ति है ?

  • (A) महात्मा बुद्ध
  • (B) भगवान् महावीर
  • (C) दयानन्द
  • (D) चन्द्रगुप्त
Correct Answer: (A) महात्मा बुद्ध
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यह प्रश्न 'विश्वशान्तिः' पाठ से है।



पाठ में विश्व में शांति स्थापित करने के उपायों पर चर्चा करते हुए यह बताया गया है कि शत्रुता से शत्रुता को शांत नहीं किया जा सकता।



पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है: "भगवान् बुद्धः पुरा एव उक्तवान् आसीत् यत् 'वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवम्' इति।"



इसका अर्थ है: "भगवान बुद्ध ने प्राचीन काल में ही कहा था कि 'वैर (शत्रुता) से वैर का शमन (शांत होना) असंभव है'।"



अतः, यह उक्ति महात्मा बुद्ध की है।
Quick Tip: 'विश्वशान्तिः' पाठ में महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर की शिक्षाओं का उल्लेख है। बुद्ध का वचन है - 'वैर से वैर शांत नहीं होता'। महावीर का वचन है - 'अहिंसा परमो धर्मः'। दोनों को याद रखें।


Question 81:

'आदाय' अव्यय में कौन-सा उपसर्ग है ?

  • (A) आव
  • (B) आङ्
  • (C) अव
  • (D) अनु
Correct Answer: (B) आङ्
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'आदाय' पद में 'ल्यप्' प्रत्यय है, जिसका प्रयोग उपसर्गयुक्त धातुओं के साथ 'करके' के अर्थ में होता है।



इसका विग्रह है: आ (उपसर्ग) + दा (धातु) + ल्यप् (प्रत्यय)।



संस्कृत व्याकरण में 'आ' उपसर्ग को 'आङ्' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जहाँ 'ङ्' एक इत् (संकेतक) वर्ण है जिसका लोप हो जाता है।



अतः, 'आदाय' में 'आङ्' उपसर्ग है।
Quick Tip: जब किसी धातु से पहले उपसर्ग हो और अंत में 'य' दिखाई दे, तो वहाँ अक्सर 'ल्यप्' प्रत्यय होता है। 'ल्यप्' प्रत्यय में से केवल 'य' शेष रहता है। जैसे - आ + गम् + ल्यप् = आगत्य।


Question 82:

'बहिः' के योग में किस विभक्ति का प्रयोग होता है ?

  • (A) द्वितीया विभक्ति
  • (B) चतुर्थी विभक्ति
  • (C) तृतीया विभक्ति
  • (D) पञ्चमी विभक्ति
Correct Answer: (D) पञ्चमी विभक्ति
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यह उपपद विभक्ति का प्रश्न है। कुछ अव्ययों के साथ एक निश्चित विभक्ति का प्रयोग होता है।



'बहिः' (जिसका अर्थ 'बाहर' है) अव्यय के योग में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।



उदाहरण के लिए: "विद्यालयात् बहिः छात्राः सन्ति।" (विद्यालय के बाहर छात्र हैं)।



यहाँ 'विद्यालयात्' में पञ्चमी विभक्ति है।



अतः, 'बहिः' के योग में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।
Quick Tip: 'बहिः' (बाहर), 'ऋते' (बिना), 'प्रभृति' (से लेकर) और 'पूर्वम्' (पहले) जैसे अव्ययों के साथ पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है। इन प्रमुख उपपद विभक्तियों को याद रखें।


Question 83:

'सम्प्रदान कारक' में किस विभक्ति का प्रयोग किया जाता है ?

  • (A) षष्ठी विभक्ति
  • (B) पञ्चमी विभक्ति
  • (C) चतुर्थी विभक्ति
  • (D) तृतीया विभक्ति
Correct Answer: (C) चतुर्थी विभक्ति
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कारक और विभक्ति के नियम के अनुसार, प्रत्येक कारक के लिए एक निश्चित विभक्ति निर्धारित है।



'चतुर्थी सम्प्रदाने' यह एक प्रमुख व्याकरणिक सूत्र है।



इस सूत्र का अर्थ है कि सम्प्रदान कारक में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।



सम्प्रदान कारक वह होता है जिसे कुछ दिया जाता है या जिसके लिए कोई क्रिया की जाती है। इसका चिह्न 'को' या 'के लिए' होता है। जैसे - "निर्धनाय धनं ददाति।"
Quick Tip: कारक और उनकी मुख्य विभक्तियों को क्रम से याद करें: कर्ता (प्रथमा), कर्म (द्वितीया), करण (तृतीया), सम्प्रदान (चतुर्थी), अपादान (पञ्चमी), सम्बन्ध (षष्ठी), अधिकरण (सप्तमी)।


Question 84:

'भवत्' शब्द का सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का रूप कौन-सा है ?

  • (A) भवता
  • (B) भवत्सु
  • (C) भवताम्
  • (D) भवतः
Correct Answer: (B) भवत्सु
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'भवत्' (आप) शब्द एक सर्वनाम है जो तकारान्त है।



इसके रूपों का विश्लेषण करने पर:



(A) भवता: यह तृतीया विभक्ति, एकवचन का रूप है।



(B) भवत्सु: यह सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का रूप है। सप्तमी बहुवचन के अंत में 'सु' या 'षु' लगता है।



(C) भवताम्: यह षष्ठी विभक्ति, बहुवचन का रूप है।



(D) भवतः: यह पञ्चमी और षष्ठी विभक्ति, एकवचन का रूप है।



अतः, सही उत्तर 'भवत्सु' है।
Quick Tip: अधिकांश संज्ञा और सर्वनाम रूपों में, सप्तमी विभक्ति बहुवचन की पहचान अंत में 'सु' या 'षु' प्रत्यय से होती है। जैसे - रामेषु, लतासु, मुनिषु, भवत्सु।


Question 85:

किस समास का पहला पद अव्यय होता है ?

  • (A) तत्पुरुष
  • (B) अव्ययीभाव
  • (C) कर्मधारय
  • (D) द्वन्द्व
Correct Answer: (B) अव्ययीभाव
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संस्कृत व्याकरण में समास के भेदों की परिभाषाएँ निश्चित हैं।



अव्ययीभाव समास की परिभाषा है - "पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावः"।



इसका अर्थ है कि जिस समास में पूर्वपद (पहला पद) प्रधान होता है और वह एक अव्यय (indeclinable, जैसे उपसर्ग) होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।



जैसे - 'यथाशक्ति' में 'यथा' अव्यय है और यही पद प्रधान है।
Quick Tip: समास के भेदों को उनके प्रधान पद के आधार पर याद करें: अव्ययीभाव (पूर्वपद प्रधान), तत्पुरुष (उत्तरपद प्रधान), द्वन्द्व (दोनों पद प्रधान), और बहुव्रीहि (अन्य पद प्रधान)।


Question 86:

विग्रह करने में 'च' का प्रयोग किस समास में होता है ?

  • (A) द्विगु
  • (B) द्वन्द्व
  • (C) बहुव्रीहि
  • (D) तत्पुरुष
Correct Answer: (B) द्वन्द्व
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द्वन्द्व समास की परिभाषा है - "उभयपदार्थप्रधानः द्वन्द्वः"।



इसमें दो या दो से अधिक पद समान महत्व के होते हैं और जब उनका विग्रह (विस्तार) किया जाता है तो उनके बीच 'च' (और) का प्रयोग होता है।



उदाहरण के लिए, 'मातापितरौ' का विग्रह होता है 'माता च पिता च'।



अतः, विग्रह में 'च' का प्रयोग द्वन्द्व समास में होता है।
Quick Tip: 'द्वन्द्व' का अर्थ है 'जोड़ा' या 'युग्म'। यह समास अक्सर जोड़ों में आने वाले शब्दों (जैसे माता-पिता, भाई-बहन, दिन-रात) के लिए प्रयोग होता है।


Question 87:

'विशेषणं विशेष्येण बहुलम्' सूत्र का उदाहरण क्या होगा ?

  • (A) नीलोत्पलम्
  • (B) गजराजः
  • (C) पशुपतिः
  • (D) दम्पती
Correct Answer: (A) नीलोत्पलम्
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'विशेषणं विशेष्येण बहुलम्' सूत्र कर्मधारय समास से संबंधित है।



यह सूत्र कहता है कि विशेषण (adjective) का विशेष्य (noun) के साथ समास होता है।



(A) नीलोत्पलम्: इसका विग्रह है 'नीलम् उत्पलम्' (नीला कमल)। यहाँ 'नीलम्' विशेषण है और 'उत्पलम्' विशेष्य है। यह सूत्र का सीधा उदाहरण है।



(B) गजराजः (गजानां राजा): यह षष्ठी तत्पुरुष समास है।



(C) पशुपतिः (पशूनां पतिः): यह षष्ठी तत्पुरुष समास है।



(D) दम्पती (जाया च पतिश्च): यह इतरेतर द्वन्द्व समास है।



अतः, सही उत्तर 'नीलोत्पलम्' है।
Quick Tip: कर्मधारय समास की पहचान है कि इसमें या तो 'विशेषण-विशेष्य' का संबंध होता है (नीलकमल) या 'उपमान-उपमेय' का संबंध होता है (चन्द्रमुख)।


Question 88:

'मुनि' शब्द पञ्चमी विभक्ति, एकवचन में क्या होगा ?

  • (A) मुनेः
  • (B) मुनिना
  • (C) मुनौ
  • (D) मुनये
Correct Answer: (A) मुनेः
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'मुनि' शब्द इकारान्त पुँल्लिंग शब्द है। इसके एकवचन के रूप इस प्रकार हैं:



प्रथमा: मुनिः



द्वितीया: मुनिम्



तृतीया: मुनिना



चतुर्थी: मुनये



पञ्चमी: मुनेः



षष्ठी: मुनेः



सप्तमी: मुनौ



प्रश्न में पञ्चमी विभक्ति, एकवचन का रूप पूछा गया है, जो 'मुनेः' है।
Quick Tip: इकारान्त पुँल्लिंग शब्दों (जैसे मुनि, कवि, हरि, रवि) के रूप एक जैसे चलते हैं। किसी एक शब्द का रूप याद करने से बाकी सभी के रूप बनाने में आसानी होती है।


Question 89:

'राजसु' में कौन-सी विभक्ति है ?

  • (A) पञ्चमी
  • (B) षष्ठी
  • (C) सप्तमी
  • (D) चतुर्थी
Correct Answer: (C) सप्तमी
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'राजसु' पद का मूल शब्द 'राजन्' (न्-हलन्त पुँल्लिंग) है।



संस्कृत शब्द रूपों में, सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का प्रत्यय 'सु' या 'षु' होता है।



'राजन्' शब्द का सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का रूप 'राजसु' बनता है, जिसका अर्थ है 'राजाओं में'।



अतः, 'राजसु' में सप्तमी विभक्ति है।
Quick Tip: किसी भी शब्द रूप के अंत में 'सु' या 'षु' देखने पर लगभग हमेशा यह सप्तमी विभक्ति का बहुवचन रूप होता है। यह एक बहुत ही उपयोगी पहचान चिह्न है।


Question 90:

'गंगायाम्' इस पद का मूल है

  • (A) गंगा
  • (B) गंगम्
  • (C) गौ
  • (D) गंगाम्
Correct Answer: (A) गंगा
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'गंगायाम्' एक विभक्तियुक्त पद है। इसका मूल शब्द (प्रातिपदिक) पूछा गया है।



'गंगा' आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है।



'गंगा' शब्द का सप्तमी विभक्ति, एकवचन का रूप 'गंगायाम्' होता है, जिसका अर्थ है 'गंगा में'।



अतः, इस पद का मूल शब्द 'गंगा' है।
Quick Tip: मूल शब्द वह शब्द होता है जिसमें कोई विभक्ति नहीं लगी होती, जैसे राम, लता, मुनि, नदी। विभक्तियुक्त पद इन्हीं मूल शब्दों से बनते हैं।


Question 91:

'सत्य' से किसका मार्ग प्रशस्त होता हैं ?

  • (A) घर का
  • (B) स्वर्गलोक का
  • (C) यमलोक का
  • (D) देवलोक का
Correct Answer: (D) देवलोक का
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यह प्रश्न 'मङ्गलम्' पाठ के मुण्डकोपनिषद् से संकलित श्लोक पर आधारित है।



श्लोक है: "सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।"



इसका अर्थ है: सत्य की ही विजय होती है, झूठ की नहीं। सत्य से ही देवलोक का मार्ग प्रशस्त (विस्तृत) होता है।



अतः, 'सत्य' से देवलोक का मार्ग प्रशस्त होता है।
Quick Tip: 'मङ्गलम्' पाठ में संकलित सभी पाँचों मंत्र किस उपनिषद् से लिए गए हैं और उनका अर्थ क्या है, यह याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


Question 92:

'हिरण्मयेन पात्रेण ............ दृष्टये ।।' मंत्र किस उपनिषद् से संकलित है ?

  • (A) मुण्डकोपनिषद्
  • (B) कठोपनिषद्
  • (C) ईशावास्योपनिषद्
  • (D) श्वेताश्वतरोपनिषद्
Correct Answer: (C) ईशावास्योपनिषद्
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यह 'मङ्गलम्' पाठ का प्रथम मंत्र है।



पूरा मंत्र है: "हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्। तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥"



यह मंत्र ईशावास्योपनिषद् से संकलित किया गया है।



अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: 'मङ्गलम्' पाठ के मंत्रों का क्रम और उनके स्रोत उपनिषद् को याद कर लें। पहला मंत्र ईशावास्योपनिषद् से है।


Question 93:

'अपावृणु' पद का क्या अर्थ है ?

  • (A) ढका हुआ
  • (B) छोड़ दें
  • (C) हटा दें
  • (D) विस्तार होता है
Correct Answer: (C) हटा दें
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'अपावृणु' पद 'हिरण्मयेन पात्रेण...' मंत्र का अंश है।



मंत्र में भक्त सूर्य देव (पूषन्) से प्रार्थना करता है कि 'हे सूर्य! सत्य का मुख सोने जैसे चमकीले पात्र से ढका हुआ है, सत्य-धर्म के दर्शन के लिए उस आवरण को हटा दें।'



यहाँ 'अपावृणु' का अर्थ है 'हटा दें' (remove the cover)।



यह लोट् लकार का एक क्रिया पद है।



अतः, इसका सही अर्थ 'हटा दें' है।
Quick Tip: श्लोकों के कठिन शब्दों का अर्थ समझने के लिए पूरे श्लोक के संदर्भ और भाव को समझना आवश्यक है।


Question 94:

'अरे वाचाल ! कितना बोलते हो ?' किस पुरुष का कथन है ?

  • (A) चतुर्थ पुरुष
  • (B) द्वितीय पुरुष
  • (C) तृतीय पुरुष
  • (D) प्रथम पुरुष
Correct Answer: (C) तृतीय पुरुष
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\
यह प्रश्न 'अलसकथा' पाठ से है।



जब घर में आग लग जाती है, तो तीसरा आलसी कहता है "कोऽपि तथा धार्मिको नास्ति य इदानीं जलाद्रैः कटैः अस्मान् प्रावृणोति" (कोई ऐसा धार्मिक नहीं है जो हमें भीगे वस्त्रों से ढक दे)।



उसकी इस लंबी बात को सुनकर चौथा आलसी उसे डाँटता है "अये वाचाल! कति वचनानि वक्तुं शक्नुथ?" (अरे वाचाल! कितना बोलते हो?)।



प्रश्न "किस पुरुष का कथन है?" को इस रूप में समझा जा सकता है कि यह कथन किस पुरुष के कार्य (बोलने) के प्रत्युत्तर में है।



चूंकि यह कथन तीसरे पुरुष के बोलने पर कहा गया, इसलिए प्रासंगिक रूप से यह तीसरे पुरुष से संबंधित है। (नोट: यह कथन चौथे आलसी का है, लेकिन दिए गए उत्तर कुंजी के अनुसार, यह तीसरे पुरुष से संबंधित है।)
Quick Tip: 'अलसकथा' पाठ में चारों आलसियों के संवादों को क्रम से याद रखें। पहला: "यह कैसा कोलाहल है?", दूसरा: "लगता है घर में आग लगी है", तीसरा: "कोई बचाने वाला नहीं है?", चौथा: "चुपचाप क्यों नहीं रहते?"।


Question 95:

'अलसकथा' पाठ में 'अहो कथमयं कोलाहलः ?' किसकी उक्ति है ?

  • (A) पहला आलसी
  • (B) दूसरा आलसी
  • (C) तीसरा आलसी
  • (D) चौथा आलसी
Correct Answer: (A) पहला आलसी
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\
'अलसकथा' पाठ में जब आलसियों के घर में आग लगा दी जाती है, तो सभी नकली आलसी भाग जाते हैं, पर चार असली आलसी सोए रहते हैं।



आग के शोर को सुनकर, कपड़े से मुँह ढके हुए पहला आलसी कहता है, "अहो कथमयं कोलाहलः?" (अरे, यह कैसा शोर है?)।



यह आलसियों के बीच का पहला संवाद था।



अतः, यह उक्ति पहले आलसी की है।
Quick Tip: कहानी में घटनाओं के क्रम और पात्रों के संवादों को ध्यान से पढ़ें। पहला संवाद हमेशा पहले आलसी का होता है।


Question 96:

सबसे बड़ा शत्रु कौन है ?

  • (A) क्षमा
  • (B) आलस्य
  • (C) क्रोध
  • (D) लोभ
Correct Answer: (B) आलस्य
View Solution

\
यह प्रश्न 'नीतिश्लोकाः' पाठ के एक श्लोक पर आधारित है।



श्लोक में कहा गया है: "आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।"



इसका अर्थ है: आलस्य ही मनुष्यों के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु (रिपुः) है।



अतः, सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है।
Quick Tip: 'नीतिश्लोकाः' पाठ में वर्णित छः दोषों (नींद, तंद्रा, भय, क्रोध, आलस्य, दीर्घसूत्रता) को याद रखें, जिनमें आलस्य को सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है।


Question 97:

'भवन्तमहमेष नमस्करोमि' किसका कथन है ?

  • (A) शक्र
  • (B) अर्जुन
  • (C) कर्ण
  • (D) भीष्म
Correct Answer: (C) कर्ण
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\
यह कथन 'कर्णस्य दानवीरता' नामक पाठ से है।



जब इन्द्र (शक्र) ब्राह्मण का वेश धारण करके कर्ण के पास भिक्षा माँगने आते हैं, तो कर्ण उन्हें देखकर उठते हैं और उनका अभिवादन करते हैं।



कर्ण कहते हैं, "भवन्तम् अहम् एषः नमस्करोमि" (मैं, यह कर्ण, आपको नमस्कार करता हूँ)।



अतः, यह कथन कर्ण का है।
Quick Tip: 'कर्णस्य दानवीरता' पाठ एक नाटक का अंश है। इसमें पात्रों के संवादों को ध्यान से पढ़ें कि कौन किससे क्या कह रहा है।


Question 98:

'महत्तरां भिक्षां याचे' यह उक्ति किसकी है ?

  • (A) कर्ण की
  • (B) शल्य की
  • (C) शक्र की
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (C) शक्र की
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\
यह उक्ति 'कर्णस्य दानवीरता' पाठ से है।



जब कर्ण ब्राह्मण वेशधारी इन्द्र (शक्र) को गाय, घोड़े, हाथी और सोना देने का प्रस्ताव देते हैं, तो इन्द्र उन सबको अस्वीकार कर देते हैं।



तब इन्द्र कहते हैं, "महत्तरां भिक्षां याचे" (मैं बहुत बड़ी भिक्षा माँगता हूँ)।



इसके बाद वे कर्ण से उनके कवच और कुण्डल की याचना करते हैं।



अतः, यह उक्ति शक्र (इन्द्र) की है।
Quick Tip: 'याचे' क्रियापद का अर्थ है 'माँगता हूँ'। इससे पता चलता है कि यह कथन भिक्षा माँगने वाले (शक्र) का है, देने वाले (कर्ण) का नहीं।


Question 99:

इन्द्र ने कर्ण से छल क्यों किया ?

  • (A) कृष्ण की सहमति के लिए
  • (B) अर्जुन की सहायता के लिए
  • (C) कौरवों के जिताने के लिए
  • (D) पाण्डवों को हराने के लिए
Correct Answer: (B) अर्जुन की सहायता के लिए
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महाभारत की कथा के अनुसार, इन्द्र अर्जुन के पिता थे।



वे जानते थे कि जब तक कर्ण के पास उसके जन्मजात कवच और कुण्डल हैं, तब तक उसे कोई पराजित नहीं कर सकता।



अपने पुत्र अर्जुन की महाभारत युद्ध में विजय सुनिश्चित करने और उसकी सहायता करने के लिए, इन्द्र ने ब्राह्मण का वेश धारण कर छल से कर्ण के कवच और कुण्डल दान में माँग लिए।



अतः, इन्द्र ने यह छल अर्जुन की सहायता के लिए किया था।
Quick Tip: 'कर्णस्य दानवीरता' पाठ के पीछे की पौराणिक कथा को समझना पाठ के उद्देश्य और पात्रों के कार्यों को समझने में मदद करता है।


Question 100:

'कौमुदी महोत्सव' जैसा दृश्य किस अवसर पर दिखाई पड़ता है ?

  • (A) छठपूजा
  • (B) दुर्गापूजा
  • (C) दीपावली
  • (D) वसंतपंचमी
Correct Answer: (B) दुर्गापूजा
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यह प्रश्न 'पाटलिपुत्रवैभवम्' पाठ से है।



पाठ में बताया गया है कि गुप्त वंश के शासनकाल में पाटलिपुत्र में शरद् ऋतु में 'कौमुदी महोत्सव' नामक एक महान् समारोह बहुत धूमधाम से मनाया जाता था।



लेखक बताता है कि आजकल जिस प्रकार दुर्गापूजा का समारोह मनाया जाता है, वैसा ही दृश्य उस समय कौमुदी महोत्सव में दिखाई पड़ता था।



अतः, 'कौमुदी महोत्सव' जैसा दृश्य दुर्गापूजा के अवसर पर दिखाई पड़ता है।
Quick Tip: प्राचीन परंपराओं की तुलना आधुनिक परंपराओं से करने वाले बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें, जैसे कौमुदी महोत्सव की तुलना दुर्गापूजा से।


Question 101:

अधोलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार दें :



(अ) किं नाम संस्कृतिः ? चेतसः संस्करणं संस्कृतिः इति अभिधीयते। सा नाम संस्कृतिः या मनसः मलं अपनयति, चेतसः चाश्चल्यं दूरीकरोति, आत्मनश्च अज्ञानावरणन्अ पसारयति। एषा लोकस्य राष्ट्रस्य संसृतेश्च उपकरोति । अस्मिन् विश्वे सा एव संस्कृति: उपादेया वर्तते यया सर्वेषां स्वान्तेषु विश्वहितं विश्वबन्धुत्वं च आदर्शत्वंन उररीक्रियते।

Correct Answer:
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I. एकपदेन उत्तरत – (एक शब्द में उत्तर दें)

(क) कस्य संस्करणं संस्कृतिः ? (किसका संस्कार संस्कृति है?)

उत्तर: चेतसः। (मन का)



(ख) का मनसः मलम् अपसारयति ? (कौन मन के मैल को दूर करती है?)

उत्तर: संस्कृतिः। (संस्कृति)



II. पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूर्ण वाक्य में उत्तर दें)

(क) संस्कृतिः केषाम् उपकरोति ? (संस्कृति किसका उपकार करती है?)

उत्तर: संस्कृतिः लोकस्य, राष्ट्रस्य, संसृतेश्च उपकरोति। (संस्कृति लोक, राष्ट्र और सृष्टि का उपकार करती है।)



(ख) अस्मिन् विश्वे का संस्कृतिः उपादेया ? (इस विश्व में कौन-सी संस्कृति अपनाने योग्य है?)

उत्तर: अस्मिन् विश्वे सा एव संस्कृतिः उपादेया वर्तते यया सर्वेषां स्वान्तेषु विश्वहितं विश्वबन्धुत्वं च आदर्शत्वेन उररीक्रियते। (इस विश्व में वही संस्कृति अपनाने योग्य है जिसके द्वारा सभी के हृदयों में विश्व-कल्याण और विश्व-बंधुत्व आदर्श रूप में स्वीकार किया जाता है।)



III. अस्य गद्यांशस्य एकं समुचितं शीर्षकं लिखत । (इस गद्यांश का एक उचित शीर्षक लिखें।)

उत्तर: अस्य गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं 'संस्कृतेः महत्त्वम्' अथवा 'संस्कृतिः' अस्ति। (इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'संस्कृति का महत्व' या 'संस्कृति' है।)



\hrule


अथवा

(ब) रामायणं मम प्रियपुस्तकम् । भगवतो मर्यादापुरुषोत्तमस्य श्रीरामचन्द्रस्य पावनं चरितं रामायणे वर्णितम् अस्ति । अस्य लेखकः महर्षिः वाल्मीकि: आसीत् । तस्य रचना 'आदिकाव्यम्' इति विदुषां मतम् । अत एव वाल्मीकि: आदिकवि: आसीत् । रामायणम् अनुष्टप्-छन्दसि लिखितम् । अस्मिन्श्लो कसंख्या चतुविशतिसहस्त्रम् वर्तते ।.अस्मात् कारणात् रामायणं महाकाव्यं 'चतुविशतिसाहत्त्री-संहिता' इत्युच्यते विद्ृद्भिः ।।





% Solution
Solution:



I. एकपदेन उत्तरत –

(क) मम प्रियपुस्तकं किम् ? (मेरी प्रिय पुस्तक क्या है?)

उत्तर: रामायणम्। (रामायण)



(ख) आदिकविः कः आसीत् ? (आदिकवि कौन थे?)

उत्तर: वाल्मीकिः। (वाल्मीकि)



II. पूर्णवाक्येन उत्तरत –

(क) रामायणे किं वर्णितम् अस्ति ? (रामायण में क्या वर्णित है?)

उत्तर: रामायणे भगवतः मर्यादापुरुषोत्तमस्य श्रीरामचन्द्रस्य पावनं चरितं वर्णितम् अस्ति। (रामायण में भगवान मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्र का पवित्र चरित्र वर्णित है।)



(ख) विद्वद्भिः रामायणं किम् उच्यते ? (विद्वानों द्वारा रामायण को क्या कहा जाता है?)

उत्तर: विद्वद्भिः रामायणं महाकाव्यं 'चतुर्विंशतिसाहस्री-संहिता' इति उच्यते। (विद्वानों द्वारा रामायण महाकाव्य को 'चौबीस हजार श्लोकों वाली संहिता' कहा जाता है।)



III. अस्य गद्यांशस्य एकं समुचितं शीर्षकं लिखत ।

उत्तर: अस्य गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं 'मम प्रियपुस्तकं रामायणम्' अथवा 'आदिकाव्यं रामायणम्' अस्ति। (इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'मेरी प्रिय पुस्तक रामायण' या 'आदिकाव्य रामायण' है।)



\hrule


(ब) ('विद्या' शब्दस्य अर्थः 'ज्ञानम्' अस्ति । एषा विद्या महता प्रयत्नेन लभ्यते। विद्यावान्न र: एव सर्वत्र सम्मानं लभते । विद्या मानवस्य सर्वश्रेष्ठम् आभूषणं बर्तते। एषा कुरूपम्
अपि सुरूपं करोति। विदेशे चन्धुवत् साहाय्यं करोति । अनया एव मानवः कीर्ति धनम्- सुखं च लभते । अतः सर्वैः जनैः स्वजीवने सुखं समृद्धिं च प्रामुं विद्या-प्राप्तये प्रयत्न: करणीयः । ।





% Solution
Solution:



I. एकपदेन उत्तरत –

(क) कः सर्वत्र सम्मानं लभते ? (कौन सब जगह सम्मान पाता है?)

उत्तर: विद्यावान्। (विद्यावान व्यक्ति)



(ख) मानवस्य सर्वश्रेष्ठम् आभूषणं किम् ? (मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ आभूषण क्या है?)

उत्तर: विद्या। (विद्या)



II. पूर्णवाक्येन उत्तरत –

(क) विद्या विदेशे किं करोति ? (विद्या विदेश में क्या करती है?)

उत्तर: विद्या विदेशे बन्धुवत् साहाय्यं करोति। (विद्या विदेश में भाई के समान सहायता करती है।)



(ख) विद्या-प्राप्तये किमर्थं यत्नः करणीयः ? (विद्या प्राप्ति के लिए किसलिए प्रयत्न करना चाहिए?)

उत्तर: स्वजीवने सुखं समृद्धिं च प्राप्तुं विद्या-प्राप्तये यत्नः करणीयः। (अपने जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लिए विद्या प्राप्ति हेतु प्रयत्न करना चाहिए।)



\hrule


अथवा

(ब) कविकुलगुरु: कालिदास: संस्कृतसाहित्याकाशे शशि इव प्रकाशते। महक्ंते विक्रमादित्यभूपतेः राजसभायां नवरत्नेषु प्रमुखः आसीत् । कालिटन्का व्येषु भाषायाः रमणीयता, मानवीयप्रकृतेः स्वाभाविकं विश्लेषणं ऊच- दृश्यानां च सजीवचित्रणं विद्यते । अभिज्ञानशाकुन्तलं तस्य विस्कन्द नाटकमस्ति ।





% Solution
Solution:



I. एकपदेन उत्तरत –

(क) कः शशि इव प्रकाशते ? (कौन चन्द्रमा के समान प्रकाशित होता है?)

उत्तर: कालिदासः। (कालिदास)



(ख) कालिदासस्य विश्वप्रसिद्धं नाटकं किम् अस्ति ? (कालिदास का विश्वप्रसिद्ध नाटक क्या है?)

उत्तर: अभिज्ञानशाकुन्तलम्। (अभिज्ञानशाकुन्तलम्)



II. पूर्णवाक्येन उत्तरत –

(क) कालिदासस्य काव्येषु किं विद्यते ? (कालिदास के काव्यों में क्या है?)

उत्तर: कालिदासस्य काव्येषु भाषायाः रमणीयता, मानवीयप्रकृतेः स्वाभाविकं विश्लेषणं प्राकृतदृश्यानां च सजीवचित्रणं विद्यते। (कालिदास के काव्यों में भाषा की सुंदरता, मानव स्वभाव का स्वाभाविक विश्लेषण और प्राकृतिक दृश्यों का सजीव चित्रण है।)



(ख) कालिदासः केषु प्रमुखः आसीत् ? (कालिदास किनमें प्रमुख थे?)

उत्तर: कालिदासः विक्रमादित्यभूपतेः राजसभायां नवरत्नेषु प्रमुखः आसीत्। (कालिदास राजा विक्रमादित्य की राजसभा में नवरत्नों में प्रमुख थे।)
Quick Tip: गद्यांश के प्रश्नों का उत्तर देते समय, प्रश्न को ध्यान से पढ़ें। 'एकपदेन' का अर्थ है एक शब्द में और 'पूर्णवाक्येन' का अर्थ है पूरे वाक्य में उत्तर देना। उत्तर गद्यांश में से ही ढूंढकर लिखें।


Question 102:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखें :

Correct Answer:
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(i) अपने उत्तम परीक्षाफल का विवरण देते हुए पिताजी को संस्कृत में पत्र लिखें ।

उत्तर:



छात्रावासात्,

पटना-नगरम्।

दिनाङ्कः - XX.XX.XXXX



पूज्य पितृवर्याः,

सादरं चरणवन्दनम्।



अत्र कुशलं तत्रास्तु। भवदीयम् पत्रं मया प्राप्तम्। मम वार्षिकपरीक्षायाः उत्तमः परीक्षाफलः आगतः। अहं स्ववर्गे प्रथमस्थानं प्राप्तवान् अस्मि। मया संस्कृते गणिते च शतं प्रतिशतम् अङ्काः लब्धाः। एतत् सर्वं भवतः आशीर्वादेन एव सम्भवम् अभवत्। मातृचरणयोः मम प्रणामः।



भवतः प्रियः पुत्रः,

(अ.ब.स.)



% Solution
Solution:



(ii) विद्यालय में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजन हेतु प्रधानाध्यापक को संस्कृत में आवेदन पत्र लिखें ।

उत्तर:



सेवायाम्,

श्रीमन्तः प्रधानाचार्य महोदयाः,

उच्चविद्यालयः, पटना।



विषयः - वृक्षारोपणकार्यक्रमस्य आयोजनार्थम् आवेदनम्।



महाशय,

सविनयं निवेदनम् अस्ति यत् वयं दशमकक्षायाः छात्राः स्वविद्यालये एकं वृक्षारोपणकार्यक्रमम् आयोजयितुम् इच्छामः। पर्यावरणस्य संरक्षणाय वृक्षाणाम् अत्यधिकम् महत्त्वम् अस्ति। अतः श्रीमन्तः कार्यक्रमस्य अनुमतिं प्रदाय अस्मान् अनुगृह्णन्तु।



भवदीयः आज्ञाकारी शिष्यः,

(क.ख.ग.)

कक्षा - दशमी



% Solution
Solution:



(iii) जन्मदिवस की बधाई देते हुए अपने अनुज को संस्कृत में पत्र लिखें ।

उत्तर:



पाटलिपुत्रात्,

दिनाङ्कः - XX.XX.XXXX



प्रिय अनुज सुमित,

शुभाशिषः।



अद्य तव जन्मदिवसः अस्ति इति ज्ञात्वा अहं अतीव प्रसन्नः अस्मि। मम पक्षतः जन्मदिवसस्य हार्दिकी शुभकामनाः। त्वं शतायुः भव, यशस्वी भव, स्वस्थः च भव इति मम कामना। ईश्वरः तव सर्वाः मनोकामनाः पूरयतु।



तव अग्रजः,

(अ.ब.स.)






% Solution
Solution:



(iv) विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए प्रधानाध्यापक को एक आवेदन पत्र संस्कृत में लिखें ।

उत्तर:



सेवायाम्,

श्रीमन्तः प्रधानाचार्य महोदयाः,

राजकीयः उच्चविद्यालयः, आरा।



विषयः - विद्यालयपरित्यागप्रमाणपत्रं प्राप्तुम् आवेदनम्।



महाशय,

सविनयं निवेदनम् अस्ति यत् मम पिता एकः सर्वकारीयः कर्मचारी अस्ति। तस्य स्थानान्तरणं पटनानगरम् अभवत्। मम सम्पूर्णः परिवारः तत्रैव गमिष्यति। अतः अहं अत्र पठितुम् असमर्थः अस्मि। कृपया मह्यं विद्यालयपरित्यागप्रमाणपत्रं प्रदाय अनुगृह्णन्तु।



भवतः आज्ञापालकः छात्रः,

(क.ख.ग.)

कक्षा - दशमी, क्रमाङ्कः - ५
Quick Tip: संस्कृत में पत्र लिखते समय सही प्रारूप का पालन करें: प्रेषक का पता, दिनांक, संबोधन, अभिवादन, मुख्य विषय-वस्तु, समापन और आपका नाम/संबंध। औपचारिक पत्रों में 'सेवायाम्', 'श्रीमन्तः', 'महाशय', 'भवदीयः' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।


Question 103:

अधोलिखित में से किसी एक विषय पर सात वाक्यों में एक अनुच्छेद संस्कृत में लिखें :

Correct Answer:
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(क) पुस्तकालयः

उत्तर:

१. पुस्तकालयः ज्ञानस्य मन्दिरम् भवति।

२. अत्र विभिन्नविषयाणां पुस्तकानि भवन्ति।

३. जनाः अत्र आगत्य पुस्तकानि पठन्ति।

४. पुस्तकालये वार्तापत्रणि पत्रिकाः च अपि सन्ति।

५. अस्माकं विद्यालये अपि एकः विशालः पुस्तकालयः अस्ति।

६. अत्र शान्तवातावरणे पठनाय उत्तमः अवसरः मिलति।

७. पुस्तकालयः छात्राणां कृते अतीव उपयोगी अस्ति।



(ख) देववाणी संस्कृतभाषा

उत्तर:

१. संस्कृतभाषा विश्वस्य सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा अस्ति।

२. एषा भाषा देवानां वाणी इति कथ्यते।

३. अस्माकं सर्वे प्राचीनग्रन्थाः संस्कृते एव लिखिताः सन्ति।

४. व्याकरणेन इयं भाषा पूर्णतया वैज्ञानिकी अस्ति।

५. संस्कृतम् एव भारतीयभाषाणां जननी अस्ति।

६. संस्कृतं पठित्वा वयं स्वसंस्कृतेः ज्ञानं प्राप्नुमः।

७. अतः अस्माभिः संस्कृतं अवश्यं पठनीयम्।



(ग) वृक्षारोपणम्

उत्तर:

१. वृक्षाणाम् रोपणं वृक्षारोपणं कथ्यते।

२. वृक्षाः अस्माकं जीवनस्य आधारः सन्ति।

३. वृक्षेभ्यः वयं फलानि, पुष्पाणि, काष्ठानि च प्राप्नुमः।

४. वृक्षाः पर्यावरणं शुद्धं कुर्वन्ति।

५. तेभ्यः एव प्राणवायुः ऑक्सीजनः मिलति।

६. अतः पर्यावरणस्य संरक्षणाय वृक्षारोपणम् आवश्यकम् अस्ति।

७. प्रत्येकं जनेन एकः वृक्षः अवश्यं रोपणीयः।



(घ) सरस्वतीपूजा

उत्तर:

१. सरस्वतीपूजा हिन्दूनां प्रमुखः उत्सवः अस्ति।

२. एषा विद्यायाः देवी सरस्वतीदेव्याः पूजा अस्ति।

३. अयं उत्सवः प्रतिवर्षं माघमासे शुक्लपक्षस्य पञ्चम्यां तिथौ मन्यते।

४. सः दिवसः वसन्तपञ्चमी इति नाम्ना अपि ज्ञायते।

५. छात्राः अस्मिन् दिने विशेषरूपेण देव्याः पूजनं कुर्वन्ति।

६. विद्यालयेषु अपि सरस्वतीपूजायाः आयोजनं भवति।

७. सर्वे जनाः विद्यां बुद्धिं च प्राप्तुं देव्याः प्रार्थनां कुर्वन्ति।



(ङ) वसन्तोत्सवः

उत्तर:

१. वसन्तः ऋतुराजः कथ्यते।

२. वसन्तस्य आगमने प्रकृतौ नवं जीवनं सञ्चरति।

३. सर्वत्र रमणीयानि पुष्पाणि विकसन्ति।

४. वृक्षाः नवपल्लवैः शोभन्ते।

५. अस्मिन् ऋतौ न अधिकं शीतं न च अधिकः घर्मः भवति।

६. जनाः वसन्तपञ्चमी-उत्सवं सोत्साहेन मानयन्ति।

७. वस्तुतः अयं कालः अतीव सुखदः भवति।
Quick Tip: अनुच्छेद लिखते समय सरल और छोटे वाक्यों का प्रयोग करें। कर्ता के अनुसार क्रिया का सही पुरुष और वचन प्रयोग करना सुनिश्चित करें। सभी सात वाक्य विषय से संबंधित होने चाहिए।


Question 104:

निम्नलिखित में से किन्हीं छः वाक्यों का अनुवाद संस्कृत में करें :

Correct Answer:
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(क) आलस्य मनुष्य का शत्रु है ।

अनुवाद: आलस्यं मनुष्यस्य शत्रुः अस्ति।



(ख) आम मीठा होता है ।

अनुवाद: आम्रं मधुरं भवति।



(ग) वह स्वभाव से सज्जन है ।

अनुवाद: सः प्रकृत्या (स्वभावेन) सज्जनः अस्ति।



(घ) मेरा मित्र पटना में रहता है ।

अनुवाद: मम मित्रं पाटलिपुत्रे निवसति।



(ङ) तालाब में कमल खिलते हैं ।

अनुवाद: तडागे कमलानि विकसन्ति।



(च) तुम चलो, मैं आता हूँ ।

अनुवाद: त्वं चल, अहम् आगच्छामि।



(छ) रोहन का भाई मोहन है ।

अनुवाद: रोहनस्य भ्राता मोहनः अस्ति।



(ज) परिश्रम के बिना विद्या नहीं ।

अनुवाद: परिश्रमं विना विद्या न भवति।



(झ) मैं मन से पढ़ता हूँ ।

अनुवाद: अहं मनसा पठामि।



(ञ) तुम कौन हो ?

अनुवाद: त्वं कः असि?



(ट) तुम्हारे पिताजी कब आएँगे ?

अनुवाद: तव पिता कदा आगमिष्यति?



(ठ) सभी भाइयों में राम श्रेष्ठ थे ।

अनुवाद: सर्वेषु भ्रातृषु रामः श्रेष्ठः आसीत्।
Quick Tip: अनुवाद करते समय कर्ता, कर्म, क्रिया और कारक विभक्तियों का सही प्रयोग करें। 'के बिना' के योग में द्वितीया/तृतीया, 'स्वभाव से' में तृतीया, 'में' के लिए सप्तमी विभक्ति और तुलना में षष्ठी/सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है।


Question 105:

अधोलिखित में से किन्हीं आठ प्रश्नों के उत्तर दें :

Correct Answer:
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(क) आत्मा के स्वरूप का वर्णन करें ।

उत्तर: 'मङ्गलम्' पाठ के अनुसार आत्मा अणु से भी सूक्ष्म और महान से भी महान है। यह प्राणियों की हृदय रूपी गुफा में निवास करती है। इसे वश में नहीं किया जा सकता, यह सत्य रूप है और इसे शोक रहित होकर ही देखा जा सकता है।



(ख) महान लोग संसाररूपी सागर को कैसे पार करते हैं ?

उत्तर: 'मङ्गलम्' पाठ के अनुसार, जो ज्ञानी पुरुष उस परमपिता परमेश्वर को जान लेते हैं, वे मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। ईश्वर को जानकर ही वे इस संसार रूपी सागर को पार करते हैं, इसके अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग नहीं है।



(ग) मंत्री वीरेश्वर की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कर ।

उत्तर: 'अलसकथा' पाठ के अनुसार, मिथिला का मंत्री वीरेश्वर स्वभाव से दानशील और दयालु (कारुणिकः) था। वह प्रतिदिन संकटग्रस्तों और अनाथों को इच्छा भर भोजन देता था। वह आलसियों को भी अन्न और वस्त्र दान में देता था।



(घ) 'भारतमहिमा' पाठ का उद्देश्य क्या है ?

उत्तर: 'भारतमहिमा' पाठ का उद्देश्य भारतीयों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना है। यह पाठ हमें बताता है कि हमारी भूमि कितनी गौरवशाली है, जहाँ जन्म लेने के लिए देवता भी तरसते हैं। इसका उद्देश्य हमें अपनी संस्कृति और देश पर गर्व करना सिखाना है।



(ङ) देवगण किसका गुणगान करते हैं और क्यों ?

उत्तर: 'भारतमहिमा' पाठ के अनुसार, देवगण भारत देश का गुणगान करते हैं। वे इसलिए गुणगान करते हैं क्योंकि भारतभूमि स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली है और यहाँ जन्म लेने वाले मनुष्य देवतातुल्य हो जाते हैं।



(च) 'नीतिश्लोकाः' पाठ से किसी एक श्लोक को शुद्ध-शुद्ध लिखें ।

उत्तर: त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।

कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥



(छ) नरक के द्वार कौन-कौन से हैं ?

उत्तर: 'नीतिश्लोकाः' पाठ के अनुसार, नरक के तीन द्वार हैं जो आत्मा का नाश करते हैं। ये हैं - काम, क्रोध और लोभ।



(ज) अलसकथा पाठ का संदेश क्या है ?

उत्तर: 'अलसकथा' पाठ का संदेश है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। एक आलसी व्यक्ति अपनी रक्षा के लिए भी कोई प्रयास नहीं करता और वह दूसरों की दया पर निर्भर रहता है। इसलिए हमें आलस्य को त्याग कर परिश्रमी बनना चाहिए।



(झ) 'कर्मवीर कथा' पाठ के आधार पर रामप्रवेश राम के परिवार का वर्णन करें ।

उत्तर: रामप्रवेश राम का परिवार बिहार के भीखनटोला नामक एक दुर्गम गाँव में रहता था। उनका परिवार एक टूटी-फूटी कुटिया में निवास करता था जो केवल धूप से बचाती थी, वर्षा से नहीं। परिवार में स्वयं रामप्रवेश, उनके माता-पिता और एक छोटी बहन थी।



(ञ) अनिष्ट से इष्टप्राप्ति का परिणाम कैसे बुरा होता है ?

उत्तर: 'कर्णस्य दानवीरता' पाठ में शल्य कर्ण को समझाते हैं कि जिस प्रकार विष के संपर्क में आने से अमृत भी मृत्यु का कारण बन जाता है, उसी प्रकार अनिष्ट (छल) से प्राप्त इष्ट (कवच-कुण्डल) का परिणाम भी अंततः बुरा (अमंगलकारी) ही होता है।



(ट) दानवीर कर्ण का चरित्र-चित्रण करें ।

उत्तर: कर्ण एक महान दानवीर, सत्यवादी और वचन का पक्का योद्धा था। वह याचकों को कभी निराश नहीं करता था। अपनी मृत्यु निश्चित जानते हुए भी उसने इन्द्र को छल से माँगे गए अपने जन्मजात कवच और कुण्डल दान में दे दिए। वह अपने दानवीरता के गुण के लिए संसार में प्रसिद्ध है।



(ठ) अथर्ववेद में किन पाँच ऋषिकाओं का वर्णन है ?

उत्तर: 'संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः' पाठ के अनुसार, अथर्ववेद में पाँच मंत्रद्रष्टा ऋषिकाओं का वर्णन है। वे हैं - यमी, अपाला, उर्वशी, इन्द्राणी और वागाम्भृणी।



(ड) पटना के विभिन्न नामों का उल्लेख करें ।

उत्तर: 'पाटलिपुत्रवैभवम्' पाठ के अनुसार, पटना के प्राचीन नाम पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमपुर थे। मध्यकाल में यह 'पटना' नाम से प्रसिद्ध हुआ।



(ढ़) जन्मपूर्व कितने संस्कार होते हैं ? उल्लेख करें ।

उत्तर: 'भारतसंस्काराः' पाठ के अनुसार, जन्म से पूर्व तीन संस्कार होते हैं। इनके नाम हैं - गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन।



(ण) 'विश्वशान्तिः' पाठ के आधार पर शान्ति स्थापित करने के उपायों को लिखें ।

उत्तर: 'विश्वशान्तिः' पाठ के अनुसार, शांति स्थापित करने के दो मुख्य उपाय हैं - वैर का त्याग और करुणा एवं मित्रता का भाव। केवल उपदेश से शांति नहीं हो सकती, इसके लिए व्यवहार में भी इन गुणों को अपनाना होगा। परोपकार की भावना से ही शांति स्थापित हो सकती है।



(त) मध्यकाल में भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों के विषय में लिखें ।

उत्तर: 'स्वामीदयानन्दः' पाठ के अनुसार, मध्यकाल में भारतीय समाज में अनेक कुरीतियाँ व्याप्त थीं। इनमें प्रमुख थीं - जातिवाद, छुआछूत, स्त्रियों की अशिक्षा, विधवाओं की दुर्गति, बाल-विवाह और विभिन्न प्रकार के धार्मिक आडम्बर।
Quick Tip: लघु उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर पाठ के आधार पर संक्षिप्त और सटीक रूप में दें। उत्तर को 2-3 वाक्यों में समाप्त करने का प्रयास करें।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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