
UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2024 PDF (Code 801 HE) is available for download here. The Hindi exam was conducted on February 22, 2024 in the Morning Shift from 8:30 AM to 11:45 AM. The total marks for the theory paper are 70. Students reported the paper to be easy to moderate.
| UP Board Class 10 Hindi Question Paper With Answer Key | Check Solution |

'खानावालन' नाटक के नाटककार हैं:
'खानावालन' नाटक के रचनाकार हरिकृष्ण 'प्रेमी' हैं। वे हिंदी नाटक साहित्य में अपने विशिष्ट शैली और सामाजिक मुद्दों पर आधारित नाटकों के लिए प्रसिद्ध हैं।
रामधारी सिंह 'दिनकर' की रचना है:
'संस्कृति के चार अध्याय' रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध काव्य रचना है, जिसमें भारतीय संस्कृति के विविध पक्षों का विश्लेषण किया गया है।
'राग दरबारी' रचना के उपन्यासकार हैं:
'राग दरबारी' श्रीलाल शुक्ल का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें ग्रामीण भारत की राजनीतिक और सामाजिक स्थितियों का व्यंग्यात्मक चित्रण है।
'शुक्ल युग' के अन्य नाम कौन से हैं?
'शुक्ल युग' हिंदी साहित्य में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रभाव वाले काल को संदर्भित करता है। इसे 'प्रसाद युग', 'प्रेमचंद युग' और 'छायावाद युग' के नाम से भी जाना जाता है।
'विष्णु प्रभाकर' किस युग के कहानीकार हैं?
विष्णु प्रभाकर प्रगतिवादी युग के प्रसिद्ध कहानीकार हैं। उनकी रचनाएँ सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को दर्शाती हैं।
'भाव विलास' के रचनाकार हैं:
'भाव विलास' के रचनाकार देव हैं। वे हिंदी साहित्य में रीतिकालीन कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं और श्रृंगार रस के कवि माने जाते हैं।
प्रयोगवादी काव्य की विशेषता है:
प्रयोगवादी काव्य का मुख्य उद्देश्य साहित्य में नई विधाओं और विषयों का समावेश करना और रूढ़िवादिता के प्रति विद्रोह करना है।
काव्य की प्रवृत्ति एवं रचना शैली के आधार पर रीति काल की कितनी धाराएं स्वीकार की गई हैं?
रीति काल की तीन प्रमुख धाराएं हैं - ऋतिबद्ध काव्यधारा, ऋतिमुक्त काव्यधारा, और मिश्रित काव्यधारा।
'जोहर' काव्य के रचनाकार हैं:
'जोहर' काव्य के रचनाकार श्याम नारायण पांडेय हैं, जिनकी रचनाएँ वीर रस से ओतप्रोत हैं।
'चिदंबरा' के रचनाकार हैं:
'चिड़ियाँ' कविता के लेखक सुमित्रानंदन पंत हैं। वह हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि हैं और उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम और मानवता के विषयों पर गहरी समझ दिखाई देती है।
पुनि-पुनि मुनि उकसहि अकुलाहि ।
देखि दसा हर-गन मुसकाहि ।।
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रसिद्ध रस है -
उपयुक्त पंक्तियों में हास्य रस का भाव प्रमुख है, जो हल्के-फुल्के आनंद और मुस्कान को उत्पन्न करता है।
''आहुति-सी फिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी।''
उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
उक्त पंक्ति में 'ज्वाला-सी' शब्द के माध्यम से उपमा अलंकार का प्रयोग किया गया है, जिसमें चिता पर गिरी आहुति की तुलना ज्वाला से की गई है।
'दोहा' छंद का ठीक उल्टा छंद कौन-सा है?
'दोहा' और 'सोरठा' छंद में मात्राओं की व्यवस्था उल्टी होती है। दोहे में पहले चरण में 13 और दूसरे में 11 मात्राएँ होती हैं, जबकि सोरठा में यह क्रम उल्टा होता है।
'अनुरूप' शब्द में प्रयोगित उपसर्ग है:
'अनुरूप' शब्द में 'अनु' उपसर्ग का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ होता है 'संगत' या 'समकक्ष'।
'राम-कृष्ण' में कौन-सा समास है?
'राम-कृष्ण' में द्वंद्व समास है क्योंकि इसमें दोनों पद समान महत्व रखते हैं।
वायु, समीर, बयार पर्याय हैं:
वायु, समीर, और बयार 'हवा' के पर्यायवाची शब्द हैं।
'तस्मै' शब्द में विभक्ति एवं वचन है:
'तस्य' शब्द में चतुर्थी विभक्ति और एकवचन है जिसका अर्थ 'उसके लिए' होता है।
संदेहपूर्ण कथन को कहते हैं:
संदेहपूर्ण कथन को संदेहात्मक वाक्य कहते हैं। जैसे - "शायद वह आएगा।"
'मैं पत्र लिखूँगा' वाक्य का कर्तृवाच्य में परिवर्तन है:
'मैं पत्र लिखूँगा' वाक्य को कर्तृवाच्य में बदलने पर 'मेरे द्वारा पत्र लिखा जायेगा' होगा।
स्थानवाचक क्रिया विशेषण है:
'आसपास' शब्द स्थानवाचक क्रिया विशेषण है क्योंकि यह स्थान का बोध कराता है।
दिए गए संस्कृत पदांश का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए:
नीर-शीर-विवेके हंसलक्षं त्वमेव तुभे नेत।
विश्वमिष्णुन्नयः कुलरन्तं पालिशति का।
{विवेक और भेदभाव के बिना, तुम ही वह नेतृत्व करने वाले हो, जो संसार को मार्ग दिखाते हो।
\noinden {विश्व के भले के लिए, कुल की पहचान बनाए रखता है।
(ग)
(i) 'महात्मा मुक्ति' हड़ताली के दिव्य शब्द 'दीनलाल' की कथात्मक संक्षेप में लिखिए।
'महात्मा मुक्ति' हड़ताली के शब्द 'दीनलाल' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी के संघर्ष और उनके द्वारा जन जागृति लाने का प्रतीक है। यह शब्द उन भारतीयों को संदर्भित करता है जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ विरोध और संघर्ष किया। गांधीजी के नेतृत्व में यह शब्द एक आंदोलन का प्रतीक बन गया जो भारतीयों को एकजुट करने के उद्देश्य से था।
(i).'अर्पण' हड़ताली के 'आन्दोलन' का कमान का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
'अर्पण' हड़ताली में 'आन्दोलन' का कमान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक सक्रिय भाग के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भारत के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होकर विरोध किया और स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ाए। यह आंदोलन भारतीयों की जागरूकता और संघर्ष का प्रतीक बन गया। इसके माध्यम से लोगों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया।
(i) 'जय सुभा' हड़ताली में बनित 'आज़ाद हिंद सेना' के गठन की घटना का वर्णन कीजिए।
'जय सुभा' हड़ताली में 'आज़ाद हिंद सेना' का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया। यह सेना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जो विशेष रूप से भारतीयों को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से गठित की गई थी। नेताजी ने इस सेना को संगठित किया और भारतीय राष्ट्रीयता को जागरूक करने के लिए विभिन्न संघर्षों में हिस्सा लिया। यह सेना स्वतंत्रता संग्राम का एक मजबूत हिस्सा बन गई थी।
(i).'मातृभूमि के लिए' हड़ताली के दिव्य शब्द 'संघर्ष' का सारांश लिखिए।
'मातृभूमि के लिए' हड़ताली में 'संघर्ष' शब्द का महत्त्व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में विशेष रूप से व्यक्त किया गया है। यह शब्द उन वीर सपूतों के संघर्षों का प्रतीक है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। इस काव्य में 'संघर्ष' केवल शारीरिक युद्ध का नहीं, बल्कि मानसिक और आदर्श संघर्ष का भी प्रतीक है। यह संघर्ष उन भारतीयों का था जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए असंख्य बलिदान दिए। इस शब्द के माध्यम से काव्य स्वतंत्रता संग्राम की कठिनाइयों और जुझारू संघर्ष की कहानी सुनाता है। यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए भी था, जो आज़ादी की ओर अग्रसर करने में सहायक सिद्ध हुआ।
(i).'कर्ण' हड़ताली के तत्त्व से 'श्री कृष्ण' और कर्ण के संवाद की कथात्मक संक्षेप में लिखिए।
'कर्ण' हड़ताली के तत्त्व में 'श्री कृष्ण' और कर्ण के संवाद का सारांश महाभारत के युद्ध के समय से जुड़ा हुआ है। श्री कृष्ण ने कर्ण से उसके कृत्यों के परिणामों पर चर्चा की और उसे अपने कर्मों के प्रति सचेत किया। श्री कृष्ण ने कर्ण से कहा कि वह अपने आत्ममूल्यों और धर्म के बीच चुनाव कर सके। कर्ण ने कृष्ण की सलाह को माना, लेकिन उसकी आस्था और अपने कर्तव्यों का पालन करने की दृढ़ता ने उसे आगे बढ़ने का साहस दिया। इस संवाद के माध्यम से कर्ण के चरित्र की जटिलताओं और उसके दुविधाओं को गहराई से दर्शाया गया है, जिसमें उसकी व्यक्तिगत भावना और धर्म के प्रति उसका आदर्श परिलक्षित होता है।
(i).'कमलविर भरत' हड़ताली के किसी एक कर्म का सारांश लिखिए।
'कमलविर भरत' हड़ताली में भरत का महान कर्म उन कर्तव्यों और संघर्षों को दर्शाता है, जो उन्होंने अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए किए। भरत का चरित्र न केवल अपने देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आदर्शों के अनुरूप राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। भरत का जीवन सच्चे नेतृत्व, संघर्ष और बलिदान का प्रतीक था, जो देश की रक्षा के लिए अनवरत प्रयासरत रहते हुए दूसरों के लिए प्रेरणा बना।
(i).'तुलसी' काव्य के आधार पर 'दर्शन' की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
'तुलसी' काव्य में 'दर्शन' का स्थान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यहाँ पर भगवान श्रीराम का आदर्श प्रस्तुत किया गया है, जिनका जीवन सत्य, न्याय और धर्म से ओत-प्रोत है। तुलसीदास ने राम के माध्यम से 'दर्शन' की यथार्थता और धार्मिक मार्ग का उद्घाटन किया। उनके 'रामकाव्य' में जीवन के सारे रूपों की सटीक व्याख्या की गई है।
दिये गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उसकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
[(i)] पद्मलाल ज़ुलालाल बकली
पद्मलाल ज़ुलालाल बकली हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। उनका योगदान हिंदी साहित्य में बहुत ही महत्वपूर्ण है। बकली जी ने समाज की नब्ज़ को पहचानते हुए अपने लेखन के माध्यम से समाज के कई जटिल पहलुओं पर रोशनी डाली और जन जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। उनकी प्रमुख रचना 'राजनीति की असलियत' है, जिसमें उन्होंने समाज के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हालात पर अपनी तीव्र आलोचना की है। इस काव्य ने समाज में भ्रष्टाचार और शोषण की ओर ध्यान आकर्षित किया और उन पर सुधार लाने की आवश्यकता की बात की। बकली जी ने भारतीय समाज के सुधार के लिए हमेशा आवाज उठाई और इसी कारण उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उसकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
[(i)] मैथिलीशरण गुप्त
मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म 1886 में हुआ था। उन्होंने अपनी कविताओं में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता को प्रोत्साहित किया। मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में देशभक्ति, समाज के प्रति जागरूकता और भारतीय संस्कृति की गहरी श्रद्धा नज़र आती है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'भारत भारती' और 'यशोधरा' शामिल हैं। 'भारत भारती' में उन्होंने भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता और राष्ट्रप्रेम को अभिव्यक्त किया है। उनका लेखन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक प्रेरणा था।
अपनी पाठ्यपुस्तक में से किसी एक कठिनस्थ को एक स्लोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।
मुझे अपनी पाठ्यपुस्तक से एक कठिनस्थ श्लोक चुनकर प्रस्तुत करने का कार्य दिया गया है। यहाँ मैंने भगवद गीता के 18वें अध्याय का श्लोक लिया है, जो जीवन के महानतम तत्व को प्रस्तुत करता है:
\begin{quote
"शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नर:।
न्याय्यं वा विपरीतं वा पापं वा पुनरपि।।"
\end{quote
इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने कर्म की महत्ता को बताया है और बताया है कि जो कार्य हम शरीर, वाणी और मन के द्वारा प्रारंभ करते हैं, वही हमारे भाग्य को प्रभावित करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के Solution संस्कृत में लिखिए :
[(i)] सुर्निर्वचं किं मुख्यं दुःखं?
सर्वाधिक दुःखं संसारबन्धनस्य कारणं अस्ति। जन्म, मरण, वृद्धत्व, रोगाः च दुःखस्य कारणानि भवन्ति।
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निम्नलिखित तरीके से लिखिए:
[(i)] किसी यात्रा का वर्णन
किसी यात्रा का वर्णन:
मेरी एक सबसे यादगार यात्रा कश्मीर की थी। श्रीनगर की डल झील पर शिकारे में सवारी करना, गुलमर्ग की बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर बर्फबारी का अनुभव और पहलगाम में स्थित सुरम्य घाटियाँ यह सब किसी स्वप्न से कम नहीं थे। कश्मीर के शांत वातावरण में समय बिताना, वहाँ के सुंदर बाग-बगिचों और बर्फीली चोटियों की अद्भुत सुंदरता ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य और वहाँ के लोग जिनकी मेज़बानी अतुलनीय थी, ने मेरी यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.