
UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2024 PDF (Code 801 HG) is available for download here. The Hindi exam was conducted on February 22, 2024 in the Morning Shift from 8:30 AM to 11:45 AM. The total marks for the theory paper are 70. Students reported the paper to be easy to moderate.
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'देदी बिनवास' के रचनाकार हैं:
'देदी बिनवास' के रचनाकार अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं। यह रचना भारतीय संस्कृति और समाज की गहरी झलक प्रदान करती है, जो हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
'प्रयोगवाद' के कवि हैं:
'प्रयोगवाद' के कवि 'अज्ञेय' हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद की स्थापना की और नए विचारों को प्रस्तुत किया।
'भाव-विलास' के रचनाकार हैं:
'भाव-विलास' के रचनाकार देव हैं, जो संस्कृत साहित्य के प्रमुख कवि थे और उनके काव्य में भावुकता का प्रमुख स्थान था।
'छत्तीसाल दशक' किनकी रचना है?
'छत्तीसाल दशक' भूषण की रचना है। यह काव्य ग्रंथ हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में माना जाता है और इसमें नीति और भक्ति की छवियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
'कला और बहुत चैन्द' के रचनाकार हैं:
'कला और बहुत चैन्द' के रचनाकार सुमित्रानंद पंत हैं। वह हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि थे और उनकी रचनाएँ प्रकृति, प्रेम, और जीवन के सुंदर रूपों को व्यक्त करती हैं।
'नीड का निर्माण फिर किस विधा की रचना है?'
'नीड का निर्माण' आत्मकथा विधा की रचना है, जिसमें लेखक ने अपने जीवन के अनुभवों को और संघर्षों को व्यक्त किया।
निम्नलिखित में से शुल्ल-युग के लेखक हैं:
श्यामसुंदर दास शुल्ल-युग के प्रमुख लेखक थे, जिन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों और सामाजिक विषमताओं को उजागर किया।
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आलोचना साहित्य का जनक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने आलोचना को महत्वपूर्ण विधा के रूप में स्थापित किया।
'परीक्षा-गुरु' किस विधा की रचना है?
'परीक्षा-गुरु' एक उपन्यास है, जो शिक्षा, संघर्ष, और सफलता के विषय पर आधारित है। यह लेखक के जीवन के अनुभवों और समाज में शिक्षा की स्थिति को दर्शाता है।
'बाणभट् की आत्मकथा' के रचनाकार हैं:
'बाणभट् की आत्मकथा' के रचनाकार हजारीप्रसाद द्विवेदी हैं। यह रचना हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें बाणभट्ट की जीवनी और उनके साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला गया है।
रस के कितने अंग होते हैं?
रस के चार अंग होते हैं: आलंबन, उद्दीपन, निष्पत्ति और अनुभाव।
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
'पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो' पंक्ति में 'रूपक अलंकार' है, क्योंकि इसमें राम-रतन धन को वास्तविक धन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो एक रूपक के रूप में कार्य करता है।
सोरा के पहले चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
सोरा के पहले चरण में 11 मात्राएँ होती हैं। यह ग़ज़ल की मीटर व्यवस्था का हिस्सा है।
'निर्दय' शब्द में कौन-सा प्रमुख उपसर्ग है?
'निर्दय' शब्द में 'नि' उपसर्ग है, जो नकारात्मकता या विपरीतता को व्यक्त करता है।
'नीलाय' में कौन-सा समास है?
'नीलाय' में कर्मधारय समास है, जिसमें 'नील' और 'आय' शब्दों का जोड़ होता है।
'खेता' का तात्सम रूप है?
'खेता' शब्द का तात्सम रूप 'क्षेत्र' है, जो भूमि या क्षेत्र को दर्शाता है।
'दुपत' शब्द का पंचवी विभक्ति, बहुवचन का रूप होगा?
'दुपत' शब्द का पंचवी विभक्ति का रूप 'युष्मत्' होगा।
'भाववृत्त' में किसकी प्रधानता होती है?
'भाववृत्त' में 'हृदय' की प्रधानता होती है, क्योंकि यह भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करता है।
बाक्य के कितने तत्त्व होते हैं?
बाक्य में मुख्य रूप से दो तत्त्व होते हैं - कर्ता और क्रिया।
अविकारी पद को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
अविकारी पद को 'अव्यय पद' भी कहा जाता है, जो न बदलने वाला या स्थायी रूप में रहता है।
उपयुक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उपयुक्त गद्यांश का सारांश यह है कि खराब संगति न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी नकारात्मक असर डालती है। अगर व्यक्ति की संगति बुरी हो, तो वह धीरे-धीरे जीवन में अवनति की ओर बढ़ता है। इसके विपरीत, अच्छी संगति व्यक्ति को सफलता की ओर अग्रसर करती है।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
रेखांकित अंश का तात्पर्य यह है कि यदि किसी व्यक्ति की संगति खराब हो, तो वह जीवन में गिरावट की ओर अग्रसर होता है। यह उस व्यक्ति के मानसिक और बौद्धिक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
‘सुर्दृढ़ बाहु’ का क्या अर्थ है ?
‘सुर्दृढ़ बाहु’ का अर्थ है वह सक्षम और शक्ति प्रदान करने वाली बाहु, जो किसी व्यक्ति की उन्नति के मार्ग में सहायक होती है। यह संदर्भ अच्छे साथी और सहायक की ओर इशारा करता है, जो व्यक्ति को आत्मविश्वास और बल प्रदान करता है।
उपयुक्त गद्यांश के पाठ का शीर्षक एवं लेखक का नाम लिखिए।
उपयुक्त गद्यांश का शीर्षक "ईश्वर से बचने का उपाय" है और इसके लेखक का नाम "अज्ञेय" है।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
रेखांकित अंश का तात्पर्य यह है कि मानसिक अनुशासन के बिना कोई व्यक्ति अपने जीवन में ईश्वर का सही उद्देश्य नहीं समझ सकता। एक व्यक्ति को अपने आदतों पर काबू पाना चाहिए और उसकी सोच में परिवर्तन लाना चाहिए, ताकि वह मानसिक रूप से सही मार्ग पर चल सके।
ईश्वर से बचने के लिए लेखक किस आदत को छोड़ने की सलाह देता है ?
लेखक ईश्वर से बचने के लिए उन फालतू बातों के बारे में सोचने की आदत को छोड़ने की सलाह देता है। इस आदत को छोड़ने से व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
उपयुक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उपयुक्त पद्यांश में राजा और रानी के कष्टों और आंतरिक संघर्ष का चित्रण किया गया है, जिसमें उनके कार्यों और यात्रा के परिणामों की व्याख्या की गई है।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
रेखांकित अंश में यह बताया गया है कि राजा और रानी के कार्यों के परिणामस्वरूप उनके जीवन में कुछ मोड़ आए हैं।
पद्यांश में ‘ऐसी मनोरह मूर्ति’ किसके लिए प्रयुक्त है तथा इसमें कौन सा अलंकार है ?
‘ऐसी मनोरह मूर्ति’ का प्रयोग राजा और रानी के चित्रित रूप के लिए किया गया है। इसमें रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है।
उपयुक्त गद्यांश में कवि एवं श्रीकंन का नाम लिखिए।
उपयुक्त गद्यांश में कवि का नाम "कवि" है और श्रीकंन का नाम "श्रीकंन" है।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
रेखांकित अंश का तात्पर्य यह है कि जब युद्ध भूमि में वीरता का प्रदर्शन किया जाता है, तब वह प्रेरणा देती है। यह वीरता ही जीवित रहने का कारण बनती है और युद्ध में सफलता की ओर मार्गदर्शन करती है। यह अंश मानसिक और शारीरिक साहस को उजागर करता है।
उपयुक्त पाठांश में किस योद्धा का वर्णन किया गया है ?
उपयुक्त पाठांश में वीर योद्धा की वीरता और संघर्ष का वर्णन किया गया है। यह योद्धा युद्ध भूमि में नायक की तरह लड़ते थे, और उनकी वीरता और उत्साह युद्ध की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः धोतते। अनुज्ञापि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानम् वर्द्धयति। अत्र अनेकैः आचार्यैः मूर्धन्यैः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययनें अध्ययनें च इदानीं निरता। न केवलं भारतीयाः अपितु विदेशीका: गीर्वाणवाण्या: अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, नि:शुल्कं च विद्या गृह्णन्ति।
वाराणसी में प्राचीन काल से ही घर-घर में ज्ञान का दिव्य प्रकाश फैलता आया है। आज भी यहाँ संस्कृत भाषा की धारा सतत प्रवाहित होती है, जो लोगों के ज्ञान को बढ़ाती है। यहाँ अनेक आचार्य और विद्वान वेदों और शास्त्रों के अध्ययन एवं अध्यापन में निरंतर लगे हुए हैं। न केवल भारतीय विद्यार्थी, बल्कि विदेशी छात्र भी संस्कृत भाषा का अध्ययन करने के लिए यहाँ आते हैं और नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करते हैं।
‘विश्वस्य ग्रथा ईश्वरः एक एव’ इति भारतीयसंस्कृतेः मूलम्। विभिन्नमतावलम्बिनः विविधैः नामभिः एकम् एव ईश्वरं भजन्ते। अग्निः, इन्द्रः, कृष्णः, करीमः, रामः, रहीमः, जिनः, बुद्धः, ख्रिस्तः इत्यादीनि नामानि एकस्य एव परमात्मनः सन्ति। तम् एव ईश्वरं जना: गुरु: इत्यपि मन्यते। अतः सर्वेषां मतानां समभावः समानश्च अस्माकं संस्कृतेः सन्देशः।
‘विश्व का अधिष्ठाता ईश्वर एक ही है’ — यह भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत है। विभिन्न मतों का पालन करने वाले लोग विभिन्न नामों से उसी एक ईश्वर की आराधना करते हैं। कोई उसे अग्नि, इन्द्र, कृष्ण, करीम, राम, रहीम, जिन, बुद्ध या ख्रिस्त के नाम से पुकारता है। ये सभी नाम उसी एक परमात्मा के हैं। लोग उस ईश्वर को गुरु के रूप में भी मानते हैं। अतः सभी मतों का समान भाव और सद्भाव भारतीय संस्कृति का संदेश है।
प्रतिनिर्गम्यति भविष्यति शुभ्रभातं भास्वानुदेश्यति हसिष्यति पंकजालिः।
प्रभात होते ही सूर्य उदित होगा और उसके प्रकाश में कमल खिल उठेंगे। यह प्रकृति के सौंदर्य और नवनिर्माण का प्रतीक है।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर उसके प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य का प्रमुख पात्र एक साहसी और निर्भीक व्यक्तित्व का धनी है। वह समाज में व्याप्त कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। उसकी प्रेरणा नायकत्व, स्वतंत्रता की चाहत और समाज में समानता स्थापित करने की इच्छा से जुड़ी होती है। वह अपने आदर्शों पर अडिग रहता है, भले ही उसे अपने रास्ते में कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
अपनी पाठ्यपुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।
यहाँ एक उदाहरण स्वरूप श्लोक दिया गया है:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ: केवल कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मफलों का कारण मत बनो और न ही कर्म न करने में आसक्ति रखो।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए:
(i) सर्वे यात्रीणः किं दृष्ट्वा अहसन् ?
सर्वे यात्रीणः सिंहं दृष्ट्वा अहसन्।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए:
(i) विज्ञान: वरदान या अभिशाप
विज्ञान के बिना आज का मानव जीवन कल्पना से परे है। यह हमारे जीवन को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ अनेक समस्याओं का समाधान प्रदान करता है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके योगदान से असाध्य रोगों का इलाज संभव हुआ, जैसे कि पोलियो और चेचक का उन्मूलन। विज्ञान ने संचार के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, जैसे मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से पूरी दुनिया एक दूसरे से जुड़ी हुई है। परिवहन क्षेत्र में विज्ञान ने हवाई जहाज और अन्य यातायात साधनों के विकास से यात्रा को सुलभ और त्वरित बना दिया है।
हालांकि, विज्ञान का दुरुपयोग भी चिंता का विषय है। परमाणु हथियारों के निर्माण, प्रदूषण और जैविक हथियारों के खतरे ने मानवता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विज्ञान का असंतुलित और अनुचित उपयोग पर्यावरण और मानवता के लिए अभिशाप बन सकता है। इसलिए, यह जरूरी है कि विज्ञान का उपयोग केवल मानव कल्याण और प्रगति के लिए किया जाए, न कि विनाश के लिए।
\begin{tcolorbox[quicktip]
विज्ञान से जुड़े सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का संतुलित विश्लेषण करें और उदाहरण दें।
\end{tcolorbox
(ii) नारी-शशक्तिकरण
नारी-शशक्तिकरण का तात्पर्य महिलाओं को समान अधिकार, अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करना है, ताकि वे समाज में अपनी भूमिका सशक्त रूप से निभा सकें। भारतीय समाज में महिलाएं सदियों से भेदभाव और अत्याचार का सामना करती आई हैं, लेकिन आज का समय महिलाओं के सशक्तिकरण का समय है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी में महिलाएं अब अपनी आवाज़ उठा रही हैं।
आज की महिला अब घर की सीमाओं को पार कर करियर की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'सुकन्या समृद्धि योजना' जैसी सरकारी योजनाओं ने नारी सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से लड़कियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की सुविधा मिल रही है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाने में मदद कर रही हैं।
हालांकि, नारी सशक्तिकरण के रास्ते में कई सामाजिक कुरीतियाँ और परंपराएँ अभी भी बाधा बनी हुई हैं, जिनका उन्मूलन आवश्यक है। महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, न्याय, और समाज में सम्मान मिलना चाहिए ताकि वे पूरी तरह से सशक्त हो सकें।
\begin{tcolorbox[quicktip]
महिला सशक्तिकरण से जुड़े सरकारी प्रयासों और ऐतिहासिक उदाहरणों को शामिल करें।
\end{tcolorbox
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
(i) अपने जन्मदिन पर मित्र द्वारा भेजे गए उपहार के लिए धन्यवाद पत्र लिखिए।
प्रिय मित्र [मित्र का नाम],
सप्रेम नमस्कार।
मेरा जन्मदिन याद रखने और इतने सुंदर उपहार भेजने के लिए तुम्हारा हृदय से धन्यवाद। तुम्हारा भेजा हुआ उपहार वास्तव में मेरे लिए बहुत खास है और मुझे यह अत्यंत प्रिय लगा। तुम्हारी मित्रता मेरे जीवन का अमूल्य उपहार है।
काश तुम मेरे जन्मदिन पर स्वयं उपस्थित होते, तो खुशी दुगनी हो जाती। फिर भी तुम्हारा उपहार और शुभकामनाएं मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। आशा है कि शीघ्र ही मुलाकात होगी।
एक बार पुनः धन्यवाद सहित।
तुम्हारा मित्र,
[आपका नाम]
[तारीख]
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