
UP Board Class 10 Sanskrit Question Paper 2024 PDF (Code 818 HQ) is available for download here. The Sanskrit exam was conducted on February 28, 2024 in the Morning Shift from 8:30 AM to 11:45 AM. The total marks for the theory paper are 70. Students reported the paper to be easy to moderate.
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Question 1:
पण्डितमदनमोहनमालवीयस्य जन्म एकषष्ट्युत्तराष्टादशशतमे ख्रिष्टाब्दे दिसम्बरमासस्य पञ्चविंशतितमे दिनाङ्के (25.12.1861) तीर्थराज प्रयागे अभवत् । अस्य जनकः पण्डितब्रजनाथचतुर्वेदीः संस्कृतभा-षायाः विश्रुतः विद्वानासीद् ।
उक्त गद्यांशस्य शीर्षकः अस्ति:
गद्यांश में मदनमोहन मालवीय जी के जन्म की तिथि (25.12.1861) और उनके पिता पंडित ब्रजनाथ चतुर्वेदी का उल्लेख है। अतः गद्यांश का शीर्षक "मदनमोहन मालवीय" उचित है।
रवीन्द्रस्य सृजनशैली केन नाम्ना ख्यातिं लभते?
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचनात्मक शैली को 'रवीन्द्रसृजनम्' नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है।
धीमतां कालः केन प्रकरणेन याति?
विद्वानों का समय काव्यशास्त्र के अध्ययन और विनोद में व्यतीत होता है।
कः शतं वर्षाणि जीवति?
सदाचारवान् व्यक्ति अपने उत्तम आचरण और नीति के कारण दीर्घायु होता है।
‘लक्ष्यवेधपरिक्षा’ इति पाठः महाभारतस्य कस्मात् पर्वणः उद्गतः?
महाभारत के आदिपर्व में अर्जुन द्वारा लक्ष्य वेध की परीक्षा का वर्णन है, जहाँ उसने मछली की आँख को भेदकर द्रौपदी का वरण किया था।
भूतानि केषु सम्भवं यान्ति?
भौतिक जगत की सभी वस्तुएँ पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) से उत्पन्न होती हैं।
गान्धिमहोदयः कदा दक्षिण-अफ्रीका इति देशं अवाराेहत्?
महात्मा गाँधी वर्ष 1916 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, जहाँ उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन की नींव रखी।
जातकमाला इति ग्रन्थस्य रचनाकारः कः?
'जातकमाला' ग्रन्थ के रचनाकार आर्यशूरः थे। यह ग्रन्थ बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाओं का संग्रह है।
‘ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति’ इति कस्मिन्ग्रन्थे उक्तम्?
यह श्लोक भगवद्गीता के अध्याय 18, श्लोक 61 में उल्लेखित है, जिसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को ईश्वर की सर्वव्यापकता का बोध कराते हैं।
‘ज’ प्रत्याहार के अन्तर्गत वर्ण आते हैं:
'ज' प्रत्याहार में ज्, ब्, ग, ड, द वर्ण सम्मिलित होते हैं।
‘नमस्ते’ में सन्धि है:
'नमः' + 'ते' = 'नमस्ते' में विसर्ग सन्धि का प्रयोग हुआ है।
‘नदी’ शब्द के तृतीया एकवचन का रूप है:
'नदी' शब्द का तृतीया एकवचन रूप 'नचा' होता है।
‘पा’ धातु के लट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का सही रूप होगा:
‘पा’ धातु का लट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन रूप ‘पिबाति’ होता है।
‘ळ’ वर्ण का उच्चारण स्थान है:
‘ळ’ वर्ण का उच्चारण स्थान तालु होता है।
‘गुरुर्जयति’ का सन्धि-विच्छेद होगा:
'गुरुर्जयति' में 'गुरुः' और 'जयति' का विसर्ग सन्धि हुआ है। 'गुरुः' का अंतिम विसर्ग 'ज' के साथ मिलकर 'गुरुर्' बनता है।
‘पितृ’ शब्द का षष्ठी एकवचन का रूप है:
'पितृ' शब्द का षष्ठी एकवचन रूप 'पितुः' होता है। यह पारिभाषिक रूप है।
‘वन्द’ क्रियाधातु का विधिलिङ् लकार का रूप है:
'वन्द' क्रियाधातु का विधिलिङ् लकार रूप 'वन्दय' होता है। विधिलिङ् लकार का प्रयोग आज्ञा देने के लिए किया जाता है।
‘भूतात्मा’ में समास है:
'भूतात्मा' शब्द में 'भूत' और 'आत्मा' का समास है, जिसमें दोनों पदों का अर्थ मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न करते हैं। यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
‘नवरात्रम्’ का समास-विग्रह है:
'नवरात्रम्' शब्द समाहार द्विगु समास का उदाहरण है, जिसका विग्रह 'नवानां रात्राणां समाहारः' होता है।
नैतिकमूल्यानि का सारांश हिन्दी में लिखिए।
नैतिक मूल्य समाज और व्यक्ति के आदर्शों तथा कर्तव्यों को दर्शाते हैं। ये व्यक्ति के चरित्र, आचरण और सोच को सही दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। सत्य, अहिंसा, करुणा, ईमानदारी, और सहिष्णुता जैसे गुण नैतिक मूल्यों में सम्मिलित होते हैं। नैतिकता का पालन न केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए आवश्यक है, बल्कि यह समाज में शांति और सद्भावना स्थापित करने में भी सहायक होता है। जब एक व्यक्ति अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करता है, तो वह समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसके अतिरिक्त, समाज में नैतिकता का पालन करने से लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखते हैं, जिससे समाज में संघर्ष और हिंसा की संभावना घट जाती है। नैतिक मूल्यों का पालन करने से हम एक सभ्य और उन्नत समाज का निर्माण कर सकते हैं।
आदिशङ्काचार्यः का सारांश हिन्दी में लिखिए।
आदिशंकराचार्य भारतीय दर्शन के महान विचारक और अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक थे। उन्होंने जीवन के सर्वोच्च उद्देश्य के रूप में ब्रह्म के अद्वितीय और अविभाज्य स्वरूप को स्थापित किया। उनके अनुसार, संसार की सभी वस्तुएँ और जीवात्मा ब्रह्म के ही अंश हैं और इनका वास्तविक स्वरूप केवल ब्रह्म है। उनके अद्वैत वेदांत के सिद्धांत ने भारतीय दर्शन को एक नई दिशा दी। आदिशंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की और भारतीय समाज में धार्मिक और दार्शनिक जागरूकता का विस्तार किया। इसके साथ ही, उन्होंने समाज में व्याप्त अज्ञानता और पाखंड को समाप्त करने के लिए उपदेश दिए। उनकी शिक्षाएँ आज भी भारतीय समाज में आदर्श और आध्यात्मिक प्रगति का मार्गदर्शन करती हैं। आदिशंकराचार्य के दर्शन ने न केवल हिन्दू धर्म की जड़ों को मजबूत किया, बल्कि भारतीय समाज को एकता और सहिष्णुता की दिशा में प्रेरित किया।
लोकमान्य तिलकः का सारांश हिन्दी में लिखिए।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और नेता थे। उन्होंने भारतीय समाज में जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। तिलक ने 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' जैसे प्रेरणादायक नारों के माध्यम से जन-जन में स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया। उन्होंने अपने समय के अंग्रेजी शासन और साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष किया। उनका योगदान न केवल भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण था, बल्कि भारतीय समाज में राष्ट्रीयता की भावना को प्रबल करने के लिए भी था। तिलक ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए और पुणे में 'फर्ग्युसन कॉलेज' की स्थापना की। वे एक महान नेता, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी। उनकी दृष्टि ने स्वतंत्रता संग्राम को एक संगठित आंदोलन में बदल दिया और आज भी उनके विचार स्वतंत्रता, समानता और न्याय की प्रेरणा देते हैं।
निम्नलिखित श्लोकों में से किसी एक श्लोक की हिन्दी में व्याख्या कीजिए:
% (क) श्लोक
(क)
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा।।
इस श्लोक में बताया गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति अपना समय काव्य और शास्त्रों के अध्ययन में बिताते हैं, जबकि मूर्ख लोग व्यसन, निद्रा या कलह में अपना समय नष्ट कर देते हैं। जीवन का सदुपयोग करने की प्रेरणा इस श्लोक से मिलती है।
निम्नलिखित सूक्तियों में से किसी एक सूक्ति की हिन्दी में व्याख्या कीजिए:
(क) सूक्ति
शरीरं पाञ्चभौतिकम्
इस सूक्ति का अर्थ है कि मनुष्य का शरीर पांच महाभूतों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। यह सूक्ति प्रकृति और मानव शरीर के गहरे संबंध को दर्शाती है।
निम्नलिखित में से किसी एक श्लोक का अर्थ संस्कृत में लिखिए:
(क) श्लोक
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
अस्मिन श्लोके पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कथितानि — जलम्, अन्नम् च सुभाषितम्। मूढजनाः तु केवलं पाषाणखण्डेषु रत्नत्वं विदधाति।
निम्नलिखित में से किसी एक पात्र का चरित्र-चित्रण हिन्दी में लिखिए:
(i) पात्र
'धैर्यं हि साधकः' पाठ के आधार पर सुपारग का
सुपारग एक धैर्यशील और सत्पथ पर चलने वाला साधक है। वह अपने जीवन में कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना करता है और अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु अडिग रहता है। सुपारग का चरित्र हमें धैर्य और निरंतर प्रयास की महत्ता सिखाता है।
निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर संस्कृत में लिखिए:
जीमूतवाहनस्य पिता कः आसीत्?
जीमूतवाहनस्य पिता जिमूतकेतुः आसीत्।
निम्नलिखित में से किसी एक का वाच्य-परिवर्तन कीजिए:
(क) बालकः चंद्रं पश्यति।
चंद्रः बालकेन दृश्यते।
निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं तीन वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए:
(क) वे सब घर जाते हैं।
ते सर्वे गृहनं गच्छन्ति।
विद्या
विद्या जीवनस्य दीपः अस्ति।
विद्या एव शक्तिः।
विद्यया मनुष्यः सम्मानं प्राप्नोति।
विद्या आत्मबलं यच्छति।
विद्यया विज्ञानं विकसितं भवति।
सर्वेभ्यः दानानां विद्यादानं श्रेष्ठम्।
विद्यावान् नरः सर्वत्र पूज्यते।
विद्या एव समृद्धेः मूलम्।
अहिंसा परमो धर्मः
अहिंसा परमो धर्मः इति गीता उक्तिः।
अहिंसा सत्यस्य सहचरी अस्ति।
अहिंसा धर्मस्य मूलं अस्ति।
अहिंसया विश्वं शान्तिं प्राप्नोति।
अहिंसया जीवनं सुदृढं भवति।
महात्मा गान्धिः अहिंसायाः उदाहरणम्।
यत्र अहिंसा, तत्र शान्तिः।
अहिंसया मानवः देवत्वं प्राप्नोति।
पर्यावरणम्
पर्यावरणं जीवनस्य आधारः अस्ति।
वनानि पृथिव्याः भूषणानि।
पर्यावरणस्य संरक्षणं अस्माकं कर्तव्यं।
वृक्षाः वायुम् शुद्धं कुर्वन्ति।
जलम् जीवनस्य मूलं अस्ति।
पर्यावरणं सुरक्षितं चेत् मानवः सुरक्षितः।
वृक्षरोपणं परं धर्मः अस्ति।
नदीः, पर्वताः, वनानि च संरक्षितव्यानि।
जनसङ्ख्या
जनसङ्ख्या अतीव महत्त्वपूर्णः विषयः अस्ति।
अत्यधिकं जनसंख्या राष्ट्राय भारः भवति।
जनसंख्या नियन्त्रणं आवश्यकम्।
जनसंख्यायाः वृद्धि संसाधनक्षयः।
जनसंख्या एवं विकासः सहगच्छतः।
जनसंख्या शिक्षया नियन्त्रणं प्राप्नोति।
योजनायाः अभावे जनसङ्ख्या समस्या भवति।
जनसंख्या संतुलनं राष्ट्रस्य समृद्धिः।
सत्सङ्गतिः
सत्सङ्गतिः जीवनस्य प्रकाशः।
सज्जनानां सङ्गतिः आत्मविकासाय हितकरः।
सत्सङ्गतिः बुद्धिं प्रबोधयति।
दुर्जनानां सङ्गतिः विनाशाय भवति।
सज्जनानां संगतिः धर्ममार्गे प्रेरयति।
विद्यार्थिनः सत्सङ्गतिं पालनीयम्।
सत्सङ्गतिः सर्वदा शुभफलदायिनी।
यथा संगतिः तथा भवति जीवनम्।
सर्वाणि
सर्वाणि पुष्पाणि सुगन्धिनि भवन्ति।
यूयम्
यूयम् विद्यालयं गच्छथ।
दातुम्
गुरुः शिष्येभ्यः ज्ञानं दातुम् इच्छति।
सर्वम्
सर्वम् जगत् ब्रह्ममयम् अस्ति।
आगच्छ
भवतः गृहं शीघ्रं आगच्छ।
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