
UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2026 with Solution PDF is available here for download. The UP Board Class 10 Hindi exam is conducted on 18th February, 2026 from 8:30 AM – 11:45 AM. The question paper consists of a 70-mark theory paper (50 marks descriptive, 20 marks MCQs).
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| UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2026 | Download PDF | Check Solutions |

हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ निबंधकार आलोचक एवं इतिहासकार के रूप में जाने जाते है
महादेवी वर्मा द्वारा रचित रेखाचित्र है
'कोणार्क' के रचनाकार हैं
'चलो चाँद पर चलें' के रचनाकार हैं
'तूफानों के बीच' रचना की विधा है
'केशवदास' किस काल के कवि हैं?
'भारत-भारती' के रचनाकार हैं
'भारतेन्दु युग' की समयावधि है
'सुमित्रानन्दन पन्त' की रचना नहीं है
'रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं
हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है
"ज्यों आँखिनु सब देखियै, आँख न देखी जाँहि।" उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
'सोरठा' छन्द के पहले एवं तीसरे चरण में मात्राएँ होती हैं
'सुगम' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है
'नवरत्न' में समास है
'पृथ्वी' का पर्यायवाची शब्द नहीं है
'त्वाम्' शब्द में विभक्ति एवं वचन है
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद हैं
'कर्तृवाच्य' में प्रधानता होती है
जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे पद कहलाते हैं
जो वृद्ध हो गये हैं, जो अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर हट आए हैं, उन्हें अपने अतीतकाल की स्मृति बड़ी सुखद लगती है। वे अतीत का ही स्वप्न देखते हैं। तरुणों के लिए जैसे भविष्य उज्ज्वल होता है, वैसे ही वृद्धों के लिए अतीत। वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है। तरुण भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं और वृद्ध अतीत को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं। तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक। इन्हीं दोनों के कारण वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है और इसी से वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है।
उपर्युक्त अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: तरुणों के लिए जैसे भविष्य उज्ज्वल होता है, वैसे ही वृद्धों के लिए अतीत। तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक।)
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के विशिष्ट अंशों के भावार्थ और लेखक के संदेश को विस्तार से समझाने पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक का मत है कि युवा पीढ़ी और वृद्ध पीढ़ी की सोच में बुनियादी अंतर होता है।
युवाओं की आँखों में भविष्य के सुनहरे सपने होते हैं, वे आने वाले कल को उज्ज्वल बनाने की इच्छा रखते हैं।
इसके विपरीत, वृद्ध लोग अपनी बीती हुई यादों (अतीत) में खोए रहते हैं और उन्हें बीता हुआ समय ही श्रेष्ठ लगता है।
जहाँ युवा समाज में परिवर्तन और क्रान्ति लाना चाहते हैं, वहीं वृद्ध लोग अपनी पुरानी परम्पराओं और गौरव की रक्षा करना चाहते हैं।
इसी खींचतान के कारण वर्तमान का समय हमेशा सक्रिय और बदलावों से भरा रहता है।
Step 3: Final Answer:
व्याख्या में युवाओं की प्रगतिशीलता और वृद्धों की रूढ़िवादिता के बीच के संघर्ष को दर्शाया गया है।
Quick Tip: व्याख्या करते समय "क्रान्ति" शब्द को नवीनता और "संरक्षक" शब्द को पुरानी मर्यादाओं से जोड़कर लिखें।
लेखक ने वर्तमान काल को सुधारों का काल क्यों कहा है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के निष्कर्ष पर आधारित है कि समाज में सुधार कैसे उत्पन्न होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक के अनुसार, वर्तमान काल में दो विचारधाराओं का टकराव होता है।
एक ओर युवा शक्ति भविष्य के प्रति आशान्वित होकर व्यवस्था को बदलना चाहती है।
दूसरी ओर वृद्ध पीढ़ी अतीत के गौरव को बचाने का प्रयास करती है।
इन दोनों के बीच होने वाली टकराहट या संघर्ष से ही समाज में नई व्यवस्थाएँ जन्म लेती हैं।
अतः, यह निरंतर चलने वाला वैचारिक संघर्ष ही वर्तमान को 'सुधारों का काल' बनाता है।
Step 3: Final Answer:
तरुणों की क्रान्ति और वृद्धों के संरक्षण के द्वन्द्व से सुधार उत्पन्न होते हैं।
Quick Tip: उत्तर लिखते समय गद्यांश की अंतिम पंक्ति "इन्हीं दोनों के कारण वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है..." का सन्दर्भ अवश्य लें।
ईर्ष्या का सम्बन्ध प्रतिद्वन्द्विता से होता है, क्योंकि भिखमंगा करोड़पति से ईर्ष्या नहीं करता। यह एक ऐसी बात है, जो ईर्ष्या के पक्ष में भी पड़ सकती है, क्योंकि प्रतिद्वन्द्विता से भी मनुष्य का विकास होता है। किन्तु, अगर आप संसार व्यापी सुयश चाहते हैं तो आप रसेल के मतानुसार, शायद नेपोलियन से स्पर्द्धा करेंगे। मगर, याद रखिए कि नेपोलियन भी सीजर से स्पर्द्धा करता था और सीजर सिकन्दर से तथा सिकन्दर हरकूलस से, जिस हरकूलस के बारे में इतिहासकारों का यह मत है कि वह कभी पैदा ही नहीं हुआ।
उपर्युक्त अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: ईर्ष्या का सम्बन्ध प्रतिद्वन्द्विता से होता है... प्रतिद्वन्द्विता से भी मनुष्य का विकास होता है।)
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ईर्ष्या और प्रतिद्वन्द्विता (Competition) के बीच के संबंध को स्पष्ट करने पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक का मानना है कि ईर्ष्या हमेशा अपने बराबर वालों या अपने क्षेत्र के लोगों से होती है।
उदाहरण के लिए, एक गरीब भिखारी कभी अमीर व्यक्ति से ईर्ष्या नहीं करता क्योंकि उनके बीच कोई प्रतिद्वन्द्विता नहीं है।
लेखक ईर्ष्या के सकारात्मक पहलू पर ध्यान देते हुए कहते हैं कि जब यह प्रतिद्वन्द्विता का रूप लेती है, तो मनुष्य आगे बढ़ने की कोशिश करता है।
स्वस्थ प्रतियोगिता मनुष्य को नई ऊँचाइयाँ छूने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उसका विकास होता है।
Step 3: Final Answer:
ईर्ष्या जब स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बन जाती है, तो वह उन्नति का आधार बनती है।
Quick Tip: व्याख्या में "भिखमंगा" और "करोड़पति" के उदाहरण का प्रयोग करके स्पष्टता लाएं।
लेखक के अनुसार प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक पक्ष क्या है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के माध्यम से यह समझने पर आधारित है कि ईर्ष्या कब उपयोगी हो सकती है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक के अनुसार प्रतिद्वन्द्विता हमेशा बुरी नहीं होती।
यदि यह ईर्ष्या द्वेष में न बदलकर स्वयं को सुधारने की होड़ में बदल जाए, तो यह विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
किसी श्रेष्ठ व्यक्ति से स्पर्द्धा करना मनुष्य को अपने कार्य में निपुण बनाने और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।
यही प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक पक्ष है।
Step 3: Final Answer:
प्रतिद्वन्द्विता के कारण ही मनुष्य स्वयं को बेहतर बनाता है और प्रगति करता है।
Quick Tip: प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक अर्थ 'स्वस्थ प्रतियोगिता' (Healthy Competition) से है।
मैय्या हौं न चरैहौं गाइ।
सिगरे ग्वाल घिरावत मोसों, मेरे पाइ पिराइ।
जौ न पत्याहि पूँछि बलदाउहिं, अपनी सौंह दिवाइ।
यह सुनि माइ जसोदा ग्वालिनि, गारी देति रिसाइ।
मैं पठवति अपने लरिका कौं, आवै मन बहराइ।
सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ।
उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: सिगरे ग्वाल घिरावत मोसों, मेरे पाइ पिराइ। सूर स्याम मेरौ अति बालक, मारत ताहि रिंगाइ।)
Step 1: Understanding the Concept:
बाल कृष्ण अपनी माता से ग्वालों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत कर रहे हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
श्रीकृष्ण माता यशोदा से कहते हैं कि "हे माँ! अब मैं गाय चराने नहीं जाऊँगा।
सारे ग्वाले मुझसे ही अपनी गायों को घेरने (पकड़ने) के लिए कहते हैं, जिससे दौड़ते-दौड़ते मेरे पैरों में दर्द होने लगा है।"
दूसरी ओर, माता यशोदा क्रोधित होकर कहती हैं कि "मैं तो अपने बालक को मन बहलाने के लिए भेजती हूँ,
परन्तु ये ग्वाले मेरे इस नन्हे से बालक को इधर-उधर दौड़ाकर मार डालते हैं (परेशान कर देते हैं)।"
Step 3: Final Answer:
यशोदा माँ का वात्सल्य और कृष्ण की थकावट का सुंदर चित्रण यहाँ किया गया है।
Quick Tip: 'पाइ पिराइ' का अर्थ है पैरों का दर्द करना। ब्रजभाषा के इन शब्दों का सटीक अर्थ व्याख्या को प्रभावी बनाता है।
बाल कृष्ण गाय चराने क्यों नहीं जाना चाहते हैं?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न कृष्ण के गाय न चराने जाने के कारणों के स्पष्टीकरण से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
बाल कृष्ण गाय चराने इसलिए नहीं जाना चाहते क्योंकि वन में अन्य ग्वाल-बाल उनसे ही गायों को हँकवाते हैं।
दिन भर दौड़-धूप करने के कारण उनके कोमल पैरों में बहुत पीड़ा होने लगती है।
साथ ही, वे ग्वालों के व्यवहार से दुखी और चिड़चिड़े हो गए हैं।
Step 3: Final Answer:
अत्यधिक थकावट और ग्वालों के तंग करने के कारण कृष्ण ने वन जाने से मना कर दिया।
Quick Tip: उत्तर में 'पाइ पिराइ' और 'रिंगाइ' (दौड़ाना) शब्दों का उल्लेख करना प्रभावी रहता है।
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।
उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ में देना तुम फेंक। मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।)
Step 1: Understanding the Concept:
यह व्याख्या फूल के माध्यम से व्यक्त किए गए देशप्रेम और त्याग के भाव को स्पष्ट करती है।
Step 2: Detailed Explanation:
फूल माली से प्रार्थना करता है कि उसे न तो सम्राटों के शवों पर चढ़ना है और न ही देवताओं की मूर्तियों पर।
उसकी एकमात्र इच्छा है कि माली उसे तोड़कर उस रास्ते पर बिखेर दे,
जिस रास्ते से होकर देश के वीर सिपाही मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान देने जाते हैं।
फूल वीर सैनिकों के पैरों के नीचे आकर भी स्वयं को गौरवान्वित महसूस करना चाहता है।
Step 3: Final Answer:
फूल ने देश के वीरों के चरणों की धूल बनने को अपना सर्वोच्च सम्मान माना है।
Quick Tip: इस व्याख्या में "त्याग" और "देशभक्ति" के भाव को प्रमुखता से लिखना चाहिए।
उपर्युक्त अवतरण में पुष्प किसका प्रतीक है? पुष्प को किन चीजों की चाह नहीं है, और क्यों?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न पद्यांश के प्रतीकार्थ और उसके केन्द्रीय भाव को समझने पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
यहाँ पुष्प एक सच्चे देशभक्त और बलिदान का प्रतीक है।
पुष्प को अप्सराओं के गहनों, प्रेमियों की मालाओं, राजाओं के मृत शरीरों या देवताओं के मस्तक पर चढ़ने की चाह नहीं है।
इसका कारण यह है कि ये सभी भोग-विलास और व्यक्तिगत मान-सम्मान की वस्तुएँ हैं।
पुष्प की दृष्टि में मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों का सम्मान इन सबसे कहीं ऊँचा है।
Step 3: Final Answer:
पुष्प भौतिक सुखों की जगह वीरों के सम्मान को प्राथमिकता देता है।
Quick Tip: पुष्प का त्याग भारतीय जनमानस की नि:स्वार्थ सेवा भावना को दर्शाता है।
'विश्वस्य स्रष्टा ईश्वर: एक एव' इति भारतीयसंस्कृते: मूलम्। विभिन्नमतावलम्बिन: विविधै: नामभि: एकम् एव ईश्वरं भजन्ते। अग्नि:, इन्द्र:, कृष्ण:, करीम:, राम:, रहीम:, जिन:, बुद्ध:, ख्रिस्त:, अल्लाह: इत्यादीनि नामानि एकस्य एव परमात्मन: सन्ति। तम् एव ईश्वरं जना: गुरु: इत्यपि मन्यते। अत: सर्वेषां मतानां समभाव: सम्मानश्च अस्माकं संस्कृते: सन्देश:। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए)
ताडित: चन्द्रशेखर: पुन: पुन: 'भारतं जयतु' इति वदति। (एवं स पञ्चदशकशाघातै: ताडित:) यदा चन्द्रशेखर: कारागारात् मुक्त: बहि: आगच्छति, तदैव सर्वे जना: तं परित: वेष्टयन्ति, बहव: बालका: तस्य पादयो: पतन्ति, तं मालाभि: अभिनन्दयन्ति च। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए)
नितरां नीचोऽस्मीति त्वं खेदं कूप! कदापि मा कृथा:।
अत्यन्तसरसहृदयो यत: परेषां गुणग्रहीताऽसि।। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए)
सार्थ: प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए)
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के 'पंचम सर्ग' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' के चरित्र की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए: रामधारी सिंह 'दिनकर'
निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए: मैथिलीशरण गुप्त
अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।
अपने निवास स्थान के आसपास / मोहल्ले की नालियों की समुचित सफाई के लिए नगर/जनपद के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.