
UP Board Class 12 Hindi General Question Paper 2023 Code 302 ZH with Solution PDF is available for download here. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be moderate.
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‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
Step 1: लेखक की पहचान.
‘आचारण की सभ्यता’ एक प्रसिद्ध निबंध है, जिसके लेखक अध्यापक पूर्ण सिंह हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को अपने निबंधों में प्रमुखता से प्रस्तुत किया है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) रामचन्द्र शुक्ल: इन्होंने कई महत्वपूर्ण निबंध लिखे, लेकिन ‘आचारण की सभ्यता’ के लेखक नहीं हैं।
- (B) महावीर प्रसाद द्विवेदी: इन्होंने हिंदी गद्य लेखन में योगदान किया, परंतु यह निबंध उनके द्वारा नहीं लिखा गया है।
- (C) अध्यापक पूर्ण सिंह: यह सही उत्तर है, उन्होंने ही ‘आचारण की सभ्यता’ निबंध लिखा।
- (D) सम्पूर्णानन्द: ये प्रसिद्ध लेखक और समाजसेवी थे, लेकिन इस निबंध के लेखक नहीं थे।
Step 3: निष्कर्ष.
इसलिए, सही उत्तर है (C) अध्यापक पूर्ण सिंह। Quick Tip: लेखक की पहचान करने के लिए उनके प्रमुख निबंध और योगदान याद रखना उपयोगी होता है।
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
Step 1: कथन की पहचान.
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह प्रसिद्ध कथन भारतेंदु हरिश्चन्द्र का है, जिन्हें हिंदी साहित्य का “आधुनिक काल का जनक” माना जाता है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) बालकृष्ण भट्ट: इन्होंने भी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य में योगदान दिया, लेकिन यह कथन उनका नहीं है।
- (B) बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’: हास्य-व्यंग्य लेखन में प्रसिद्ध हैं, लेकिन यह कथन उनसे संबंधित नहीं है।
- (C) भारतेंदु हरिश्चन्द्र: यह सही उत्तर है। उन्होंने हिंदी साहित्य को नयी दिशा और आधुनिक रूप दिया।
- (D) महावीर प्रसाद द्विवेदी: द्विवेदी युग के प्रवर्तक हैं, पर यह कथन उनके द्वारा नहीं कहा गया।
Step 3: निष्कर्ष.
इसलिए, सही उत्तर है (C) भारतेंदु हरिश्चन्द्र। Quick Tip: ‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ वाक्य भारतेंदु हरिश्चन्द्र के योगदान को दर्शाता है, जिन्होंने हिन्दी को आधुनिक साहित्यिक स्वरूप प्रदान किया।
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
Step 1: लेखक की पहचान.
‘उसने कहा था’ हिंदी साहित्य की पहली आधुनिक कहानी मानी जाती है। इसके लेखक चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) जयशंकर प्रसाद: इन्होंने भी कहानियाँ लिखी हैं, लेकिन ‘उसने कहा था’ उनके द्वारा नहीं लिखी गई।
- (B) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’: यह सही उत्तर है, उन्होंने ही ‘उसने कहा था’ लिखी।
- (C) भारतेंदु हरिश्चन्द्र: उन्होंने नाटक और गद्य लेखन में योगदान दिया, लेकिन यह कहानी उनके द्वारा नहीं लिखी गई।
- (D) महावीर प्रसाद द्विवेदी: निबंध और गद्य लेखन में प्रसिद्ध हैं, लेकिन कहानी के लेखक नहीं हैं।
Step 3: निष्कर्ष.
इसलिए, सही उत्तर है (B) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’। Quick Tip: ‘उसने कहा था’ हिन्दी की प्रथम आधुनिक कहानी है।
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
Step 1: लेखक की पहचान.
‘पिंजरे की मैना’ एक प्रसिद्ध निबंध संग्रह है, जिसके लेखक हज़ारी प्रसाद द्विवेदी हैं। उन्होंने निबंध, आलोचना और उपन्यास तीनों विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) महावीर प्रसाद द्विवेदी: इन्होंने भी निबंध लिखे, लेकिन यह संग्रह उनके द्वारा नहीं लिखा गया।
- (B) भारतेंदु हरिश्चन्द्र: वे आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक माने जाते हैं, परंतु इस संग्रह के लेखक नहीं हैं।
- (C) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी: यह सही उत्तर है, उन्होंने ही ‘पिंजरे की मैना’ संग्रह लिखा।
- (D) रामचन्द्र शुक्ल: आलोचना और निबंध लेखन में प्रसिद्ध, लेकिन यह संग्रह उनके द्वारा नहीं लिखा गया।
Step 3: निष्कर्ष.
इसलिए, सही उत्तर है (C) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी। Quick Tip: हजारी प्रसाद द्विवेदी निबंध और आलोचना के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
Step 1: लेखक की पहचान.
‘कलम का सिपाही’ प्रेमचन्द की जीवनी है, जिसे उनके पुत्र अमृतराय ने लिखा है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) प्रेमचन्द: यह उन पर आधारित रचना है, उन्होंने इसे नहीं लिखा।
- (B) अमृतराय: यह सही उत्तर है, प्रेमचन्द के पुत्र और जीवनीकार।
- (C) यशपाल: इन्होंने उपन्यास और कहानियाँ लिखीं, पर यह रचना उनकी नहीं।
- (D) जैनेन्द्र: मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हैं, पर यह रचना उनकी नहीं।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (B) अमृतराय।
Quick Tip: ‘कलम का सिपाही’ प्रेमचन्द की जीवन-कथा है।
‘प्रिय प्रवास’ के रचयिता हैं:
Step 1: काव्य की पहचान.
‘प्रिय प्रवास’ एक महाकाव्य है जिसे अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने लिखा है। यह हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) मैथिली शरण गुप्त: राष्ट्रीय कवि माने जाते हैं, पर ‘प्रिय प्रवास’ उनकी रचना नहीं।
- (B) सियाराम शरण गुप्त: प्रसिद्ध कवि हैं, पर यह रचना उनकी नहीं।
- (C) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’: यह सही उत्तर है।
- (D) जयशंकर प्रसाद: छायावाद के प्रमुख कवि हैं, पर ‘प्रिय प्रवास’ के लेखक नहीं।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (C) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
Quick Tip: ‘प्रिय प्रवास’ हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण महाकाव्य है।
निम्नलिखित में से ‘छायावाद’ के कवि हैं:
Step 1: छायावाद की पहचान.
‘छायावाद’ हिन्दी साहित्य का एक महत्वपूर्ण काव्य आंदोलन है, जिसके कवियों में जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत और मुकुटधर पांडेय शामिल हैं।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) परमानंद दास: ये भक्तिकालीन कवि हैं।
- (B) सूरदास: कृष्णभक्ति के प्रमुख कवि हैं, छायावाद से नहीं।
- (C) चतुर्भुज दास: भक्तिकाल के कवि हैं।
- (D) मुकुटधर पांडेय: इन्हें छायावाद का आरंभिक कवि माना जाता है।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (D) मुकुटधर पांडेय।
Quick Tip: छायावाद हिन्दी काव्य का वह युग है जिसमें व्यक्तिगत भावनाओं और प्रकृति-चित्रण को महत्व मिला।
निम्नलिखित में से कौन-सा कवि छायावाद युग का नहीं है?
Step 1: छायावाद के प्रमुख कवि.
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभ हैं – जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’: छायावाद के प्रमुख कवि।
- (B) जयशंकर प्रसाद: छायावाद के स्तंभ कवि।
- (C) महादेवी वर्मा: ‘छायावाद की मीराबाई’ कहलाती हैं।
- (D) अज्ञेय: यह प्रगतिवाद और प्रयोगवाद के कवि हैं, छायावाद से संबंधित नहीं।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (D) अज्ञेय।
Quick Tip: छायावाद के चार स्तंभ हैं – प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी।
‘रश्मिरथी’ किस कोटि की रचना है?
Step 1: रचना की पहचान.
‘रश्मिरथी’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित एक प्रसिद्ध खण्डकाव्य है, जिसमें महाभारत के पात्र कर्ण के जीवन का चित्रण है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) महाकाव्य: ‘रश्मिरथी’ महाकाव्य नहीं, खण्डकाव्य है।
- (B) खण्डकाव्य: यह सही उत्तर है।
- (C) मुक्तक: ‘रश्मिरथी’ मुक्तक काव्य नहीं है।
- (D) गद्यकाव्य: यह गद्यकाव्य नहीं है।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (B) खण्डकाव्य।
Quick Tip: ‘रश्मिरथी’ दिनकर की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृतियों में से एक है और इसमें कर्ण को नायक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘बादल को घिरते देखा है’ रचना है:
Step 1: रचना की पहचान.
‘बादल को घिरते देखा है’ अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता है, जो उनकी संवेदनशीलता और प्रकृति-चित्रण को दर्शाती है।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
- (A) मुक्तिबोध: प्रगतिवादी कवि हैं, पर यह रचना उनकी नहीं।
- (B) नागार्जुन: लोकधर्मी कवि, पर यह रचना उनकी नहीं।
- (C) त्रिलोचन: जनकवि, पर यह रचना उनकी नहीं।
- (D) अज्ञेय: यह सही उत्तर है।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (D) अज्ञेय।
Quick Tip: अज्ञेय प्रयोगवाद और नयी कविता आंदोलन के प्रमुख कवि हैं।
प्रश्न:
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) अशोक को विस्मृत करने का आधार किसे माना गया है?
(iv) लेखक ने दुनिया का किस तरह का व्यवहार बताया है?
(v) स्वार्थ का अखाड़ा किसे कहा गया है?
N/A Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्न हल करते समय उत्तर सीधे पाठ से जुड़ा होना चाहिए और संक्षिप्त व स्पष्ट होना चाहिए।
प्रश्न:
(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) दृढ़ मूर्ति से आशय किसकी मूर्ति से है?
(iv) ‘उत्स’ और ‘अभ्युदय’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
(v) दीप – कच्छप में कौन-सा अलंकार है?
N/A Quick Tip: पद्यांश आधारित प्रश्नों में सबसे पहले कविता और कवि का नाम पहचानना ज़रूरी होता है, फिर शब्दार्थ और अलंकार को स्पष्ट लिखना चाहिए।
दिये गये पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
तुम मांसहीन, तुम रक्तहीन
हे अस्थिशेष, हे अस्तिहीन,
तुम शुद्ध बुद्ध आत्मा केवल,
हे चिरपुराण! हे चिर नवीन।
तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
जिसमें असार भव – शून्य लीन,
\underline{आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समसीन।
% Question text
प्रश्न:
(i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) कौन हड्डियों का ढाँचा मात्र प्रतीत होते हैं?
(iv) गाँधीजी को कवि ने चिरपुराण तथा चिर नवीन क्यों कहा है?
(v) गाँधीजी के आदर्शों पर भविष्य में किसे खड़ा होना पड़ेगा?
N/A Quick Tip: गाँधीजी के आदर्श समय से परे हैं, इसलिए कवि ने उन्हें ‘चिरपुराण’ और ‘चिर नवीन’ दोनों कहा।
‘पंचलाइट’ कहानी का सारांश लिखिए।
Step 1: भूमिका.
‘पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की प्रसिद्ध कहानी है, जो गाँव के सामूहिक जीवन और आधुनिक साधनों के प्रति आकर्षण को दिखाती है।
Step 2: कथा-सार.
कहानी में गाँव के लोग पहली बार ‘पंचलाइट’ (लालटेन) लेकर आते हैं, लेकिन उसे जलाना किसी को नहीं आता। भीखर, जिसे गाँव ने तिरस्कृत कर रखा है, उस लालटेन को जलाना जानता है। अंततः वही पंचलाइट जलाता है और सबके सामने उसकी उपयोगिता सिद्ध होती है।
Step 3: निष्कर्ष.
कहानी यह संदेश देती है कि समाज में हर व्यक्ति की अपनी उपयोगिता होती है, और हीन समझे गए लोग भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
Quick Tip: सारांश लिखते समय केवल मुख्य कथा को संक्षिप्त और क्रमबद्ध रूप में लिखें।
‘ध्रुवतारा’ कहानी का सारांश लिखिए।
Step 1: भूमिका.
‘ध्रुवतारा’ यशपाल की प्रसिद्ध कहानी है जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और आदर्शों के प्रति निष्ठा दिखाई देती है।
Step 2: कथा-सार.
कहानी का नायक जेल में है और अपने साथियों के साथ कष्ट सहते हुए भी अपने विचारों और आदर्शों पर अडिग रहता है। ‘ध्रुवतारा’ यहाँ स्थिरता और अटल विश्वास का प्रतीक है।
Step 3: निष्कर्ष.
यह कहानी बताती है कि जीवन में संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, सच्चे आदर्शों पर अडिग रहना ही वास्तविक सफलता है।
Quick Tip: ‘ध्रुवतारा’ आदर्शों और त्याग का प्रतीक है—इसे याद रखना सारांश लिखने में मदद करेगा।
‘बहादुर’ कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Step 1: भूमिका.
‘बहादुर’ प्रेमचन्द की मार्मिक कहानी है जिसमें मानवता और स्वामी-भक्ति का चित्रण है।
Step 2: उद्देश्य.
कहानी का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि स्वामी-नौकर का संबंध केवल शोषण का नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें आत्मीयता और विश्वास होना आवश्यक है। बहादुर कुत्ते के माध्यम से प्रेमचन्द निष्ठा, त्याग और सच्चे संबंधों का महत्व दिखाते हैं।
Step 3: निष्कर्ष.
कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम और निष्ठा केवल मनुष्य-मनुष्य में ही नहीं, बल्कि मनुष्य और पशु के बीच भी हो सकती है।
Quick Tip: उद्देश्य लिखते समय हमेशा कहानी के मूल संदेश को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप में लिखें।
“आलोक-वृत्त खण्डकाव्य में सत्य-अहिंसा का सुन्दर समन्वय है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
‘आलोक-वृत्त’ खण्डकाव्य का नायक कौन है? उसकी चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
N/A Quick Tip: खण्डकाव्य से संबंधित प्रश्नों में सबसे पहले नायक/विषय की पहचान करें, फिर गुण-दोष और अंत में निष्कर्ष अवश्य लिखें।
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु लिखिए।
अथवा
‘त्यागपथी’ के आधार पर हर्षवर्धन का चरित्र-चित्रण कीजिए।
N/A Quick Tip: चरित्र-चित्रण लिखते समय परिचय, गुण, दोष और निष्कर्ष का क्रम अवश्य बनाएँ ताकि उत्तर संतुलित लगे।
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य में दशरथ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य की कथावस्तु पर विचार कीजिए।
N/A Quick Tip: कथावस्तु पर विचार लिखते समय भूमिका, घटनाओं का क्रम, उनका संदेश और निष्कर्ष अवश्य लिखें।
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
% Given Passage
अथैषः शकुनिः सर्वेषां मध्यादाशयग्रहार्थं निकृत्यः अशाब्दयत। ततः एकः काकः उद्यातं दिङ्न्तं तावत् अस्य एतस्मिन् राज्याभिषेककाले एवं रूपं मुनिं, कृत्वधरं च कीरं भविष्यति? अयमेन हि कृत्वधेन अवलक्षिताः। वयं तत्कलादौ प्रक्षिप्तास्तिलाः। इदं तत् तवैतद्धधष्याम। ईश्वरो राजा ममयं न रोचते।
N/A Quick Tip: संस्कृत गद्यांश का अनुवाद करते समय पहले वाक्य का भाव समझें, फिर सरल और व्याकरण सम्मत हिन्दी में लिखें।
दिये गये संस्कृत गद्यांश का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
% Given Passage
बौद्धयुगे इमे सिद्धान्ताः वैयक्तिकजीवनस्य अभ्युदयानाय प्रयुक्ताः आसन्। परम् अद्य इमे सिद्धान्ताः राष्ट्राणां परस्पर मैत्री सहयोगकारणानि विश्वबन्धुत्वस्य विश्वशान्तेः च साधनानि सन्ति। राष्ट्रनायकस्य श्रीजवाहरलालनेहरूमहोदयस्य प्रधानमन्त्रित्वकाले चीनदेशेन सह भारतस्य मैत्री पञ्चशीलसिद्धान्ताधिष्ठिता एवा अभवत्।
N/A Quick Tip: अनुवाद लिखते समय सबसे पहले संस्कृत वाक्यों का भाव समझें और फिर सरल एवं प्रवाहपूर्ण हिन्दी में प्रस्तुत करें।
दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
% Given Passage
परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्याक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत् तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्।।
N/A Quick Tip: अनुवाद करते समय पहले शब्दार्थ समझें, फिर उसका भावार्थ सरल हिन्दी में लिखें।
दिये गये पद्यांश का समतुल्य हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
% Given Passage
वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि।
लोकॊत्तराणां चेतांसि को न विजातुमर्हति।।
N/A Quick Tip: भावार्थ लिखते समय यह ध्यान रखें कि श्लोक में निहित गुणों और संदेश को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाए।
निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
(i) जले पर नमक छिड़कना
(ii) आँख का तारा होना
(iii) अपना उल्लू सीधा करना
(iv) हवा से बातें करना
(i) जले पर नमक छिड़कना
अर्थ: दुःख या कष्ट की अवस्था में और अधिक कष्ट पहुँचाना।
वाक्य: परीक्षा में फेल होने पर मित्रों ने उसका मज़ाक उड़ाकर जले पर नमक छिड़क दिया।
(ii) आँख का तारा होना
अर्थ: बहुत प्रिय होना।
वाक्य: सीता अपने माता-पिता की आँख का तारा है।
(iii) अपना उल्लू सीधा करना
अर्थ: अपना स्वार्थ सिद्ध करना।
वाक्य: उसने सबकी मदद करने का दिखावा किया, पर वास्तव में अपना उल्लू सीधा कर रहा था।
(iv) हवा से बातें करना
अर्थ: बहुत तेज़ दौड़ना।
वाक्य: मोहन ने दौड़ प्रतियोगिता में हवा से बातें करके पहला स्थान प्राप्त किया।
Quick Tip: मुहावरों का प्रयोग करते समय उनका सही अर्थ और प्रसंग अवश्य ध्यान में रखें, तभी वाक्य प्रभावशाली बनता है।
निम्नलिखित शब्दों के संधि-विच्छेद के सही विकल्प का चयन कीजिए:
(i) 'निस्संदेह' का सही संधि-विच्छेद है –
Step 1: शब्द का विश्लेषण.
'निस्संदेह' शब्द 'नि:' उपसर्ग और 'सन्देह' से बना है।
Step 2: संधि की पहचान.
'नि:' + 'सन्देह' में विसर्ग के बाद 'स' आने पर 'स' का द्वित्व हो जाता है।
Step 3: निष्कर्ष.
इस प्रकार 'निस्संदेह' = 'नि:' + 'सन्देह' होता है।
Quick Tip: विसर्ग + 'स' या 'श' के मेल में विसर्ग लुप्त होकर उस अक्षर का द्वित्व हो जाता है।
(ii) 'इत्यादि' का सही संधि-विच्छेद है –
Step 1: शब्द का विश्लेषण.
'इत्यादि' शब्द 'इति' और 'आदि' से बना है।
Step 2: संधि की पहचान.
'इति' + 'आदि' में 'इ' और 'आ' के मेल से 'या' का रूप बनता है।
Step 3: निष्कर्ष.
इस प्रकार 'इत्यादि' = 'इति' + 'आदि' होता है।
Quick Tip: स्वर संधि में 'इ' + 'आ' के मेल से 'या' का रूप बनता है।
'स्वागतम्' का सही संधि-विच्छेद है –
Step 1: शब्द का विश्लेषण.
'स्वागतम्' शब्द दो शब्दों 'स्वा' और 'गत' से बना है।
Step 2: संधि की पहचान.
'स्वा' + 'गत' के मेल से 'स्वागतम्' बनता है। इसमें 'स्वा' का अर्थ है 'अपना' और 'गत' का अर्थ है 'आगमन'।
Step 3: निष्कर्ष.
इस प्रकार 'स्वागतम्' = 'स्वा' + 'गत' होता है, जिसका भावार्थ है – 'आपका आगमन मंगलमय हो'।
Quick Tip: स्वागतम् शब्द का प्रयोग किसी का अभिनन्दन या स्वागत करने के लिए किया जाता है।
दिये गये निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध 'विभक्ति' और 'वचन' बताइये:
(i) 'आत्मनि' शब्द में विभक्ति और वचन
Step 1: शब्द का रूप.
'आत्मनि' शब्द 'आत्मन्' से बना है।
Step 2: विभक्ति पहचान.
'आत्मनि' रूप में 'नि' प्रत्यय लगा है जो सप्तमी एकवचन का चिन्ह है।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः 'आत्मनि' = सप्तमी विभक्ति, एकवचन।
Quick Tip: संस्कृत में सप्तमी विभक्ति स्थान या आधार सूचक होती है। जैसे – 'गृहे', 'नगरि' आदि।
निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए:
(i) अविराम - अबिराम
Step 1: अविराम का अर्थ.
'अविराम' का अर्थ है – बिना रुके, निरंतर, अनवरत।
Step 2: अबिराम का अर्थ.
'अबिराम' का अर्थ है – आकर्षक, मनोहर, रमणीय।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः 'अविराम - अबिराम' का सही अर्थ है – अनवरत और आकर्षक।
Quick Tip: शब्दों के पूर्व उपसर्ग (अ, नि, सु आदि) से उनके अर्थ में महत्वपूर्ण भिन्नता आ सकती है।
(ii) विहंग - विहंगम्
Step 1: विहंग का अर्थ.
'विहंग' का अर्थ है – पक्षी।
Step 2: विहंगम् का अर्थ.
'विहंगम्' का अर्थ है – आकाश (जिसमें पक्षी उड़ते हैं)।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः 'विहंग - विहंगम्' का सही अर्थ है – पक्षी और आकाश।
Quick Tip: संस्कृत में समान धातु से बने शब्दों के अर्थ में सूक्ष्म अंतर होता है, जैसे विहंग (पक्षी) और विहंगम् (आकाश)।
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो अर्थ लिखिए:
(i) शिखा
(ii) पूत
(iii) पक्ष
(iv) काण्ड
(i) शिखा
1. मस्तक पर बालों का छोटा गुच्छा।
2. लौ की अग्नि-जीभ या शिखर।
(ii) पूत
1. पुत्र (बेटा)।
2. पवित्र, शुद्ध।
(iii) पक्ष
1. पंख या डैने।
2. किसी विषय या विवाद का समर्थन।
(iv) काण्ड
1. किसी ग्रन्थ या महाकाव्य का भाग।
2. कोई विचित्र घटना या प्रसंग।
Quick Tip: एक ही शब्द के अनेक अर्थ हो सकते हैं; इसे बहुअर्थक शब्द कहते हैं। सही अर्थ का चयन वाक्य के सन्दर्भ से किया जाता है।
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही 'शब्द' का चयन करके लिखिए:
(i) रास्ता दिखाने वाला –
Step 1: वाक्यांश का अर्थ.
'रास्ता दिखाने वाला' का अर्थ है वह व्यक्ति जो दिशा बताता है या मार्ग दिखाता है।
Step 2: उपयुक्त शब्द का चयन.
इस अर्थ के लिए सबसे उपयुक्त शब्द है – 'मार्गदर्शक'।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः 'रास्ता दिखाने वाला' = 'मार्गदर्शक'।
Quick Tip: 'मार्गदर्शक' शब्द का प्रयोग शिक्षक, नेता या गाइड के लिए भी किया जाता है।
(ii) जिसका कोई अन्त न हो –
Step 1: वाक्यांश का अर्थ.
'जिसका कोई अन्त न हो' का अर्थ है – जिसका कभी अंत न हो, जो शाश्वत हो।
Step 2: उपयुक्त शब्द का चयन.
इस अर्थ के लिए उपयुक्त शब्द है – 'अनन्त'।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः 'जिसका कोई अन्त न हो' = 'अनन्त'।
Quick Tip: 'अनन्त' शब्द का प्रयोग ईश्वर, आकाश, समय और प्रेम जैसे शाश्वत विषयों के लिए किया जाता है।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:
(i) श्याम और मोहन बात कर रहा है।
Step 1: वाक्य (i).
'श्याम और मोहन' बहुवचन हैं, इसलिए क्रिया भी बहुवचन होनी चाहिए। 'कर रहा है' की जगह 'कर रहे हैं' सही है।
Step 2: वाक्य (ii).
'प्रधानाचार्य जी' सम्मानसूचक बहुवचन हैं, इसलिए 'कर दिया' की जगह 'कर दिए' होगा।
Step 3: वाक्य (iii).
'मैं' के साथ क्रिया 'कर लिया हूँ' गलत है, सही रूप 'मैंने गृहकार्य कर लिया है' होगा।
Step 4: वाक्य (iv).
'निकलता था' आदत या बार-बार की क्रिया दर्शाता है, पर चन्द्रमा का निकलना एक बार की घटना है, इसलिए 'निकला था' सही है।
Quick Tip: वाक्यों को शुद्ध करने के लिए कर्ता और क्रिया में संख्या तथा लिंग का सामंजस्य अवश्य देखना चाहिए।
'श्रृंगार' रस अथवा 'वात्सल्य' रस का स्थायी भाव के साथ उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए।
Step 1: श्रृंगार रस.
- स्थायी भाव: रति (प्रेम भाव)।
- यह रस नायक और नायिका के प्रेम, शृंगारिक भावनाओं और सौंदर्य पर आधारित है।
- उदाहरण: "काहे को ब्याही बिदेस, लाज लगि जाय।" (विदा के समय नायिका का भाव)
Step 2: वात्सल्य रस.
- स्थायी भाव: माता-पिता और संतान के बीच का स्नेह।
- यह रस बालक की चेष्टाओं और माता-पिता के ममत्व से उत्पन्न होता है।
- उदाहरण: यशोदा का श्रीकृष्ण को झूलाना।
Step 3: निष्कर्ष.
श्रृंगार रस जहाँ प्रेम का सौंदर्य है, वहीं वात्सल्य रस माता-पिता और संतान के स्नेह का चित्रण करता है।
Quick Tip: रस का स्थायी भाव ही उसकी आत्मा होता है। बिना स्थायी भाव के रस की पहचान नहीं हो सकती।
'यमक' अलंकार अथवा 'रूपक' अलंकार का लक्षण और उदाहरण लिखिए।
Step 1: यमक अलंकार.
- लक्षण: जब एक ही शब्द की पुनरावृत्ति भिन्न-भिन्न अर्थों में होती है, वहाँ यमक अलंकार होता है।
- उदाहरण: "राम राम सब कोई कहै, राम न चिन्है कोय।"
Step 2: रूपक अलंकार.
- लक्षण: जब उपमेय (जिसकी उपमा दी जा रही है) को सीधे उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) मान लिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
- उदाहरण: "चन्द्र मुख तव, कमल नयन।" (मुख को चन्द्र और नेत्रों को कमल कहा गया है)
Quick Tip: यमक अलंकार में शब्द-योजना पर बल होता है जबकि रूपक अलंकार में भाव और कल्पना पर।
'चौपाई' छन्द अथवा 'सोरठा' छन्द का मात्रा सहित लक्षण तथा उदाहरण लिखिए।
Step 1: चौपाई छन्द.
- लक्षण: प्रत्येक पंक्ति (चरण) में 16 मात्राएँ होती हैं। यह छन्द प्रायः रामचरितमानस में प्रयुक्त हुआ है।
- उदाहरण:
"मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।"
Step 2: सोरठा छन्द.
- लक्षण: इसमें प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, जिनका क्रम (13 + 11) होता है।
- उदाहरण:
"बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।"
Quick Tip: चौपाई छन्द की पहचान इसकी 16 मात्राओं से होती है, जबकि सोरठा छन्द 24 मात्राओं वाला होता है।
(i) शिक्षा ऋण प्राप्त करने के लिए बैंक प्रबंधक को आवेदन पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रबंधक महोदय
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
शाखा – लखनऊ
विषय: शिक्षा ऋण प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैंने इस वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय में बी.टेक. पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया है। मेरी पारिवारिक आर्थिक स्थिति साधारण है। मेरे पिताजी की आय से उच्च शिक्षा का खर्च वहन करना कठिन है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया मुझे शिक्षा ऋण प्रदान करने की कृपा करें ताकि मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ।
भवदीय
(हस्ताक्षर)
नाम – राम कुमार
दिनांक – 25 सितम्बर 2025
Quick Tip: आवेदन पत्र संक्षिप्त, स्पष्ट और विनम्र भाषा में लिखा जाना चाहिए।
(i) नगर में अतिक्रमण की समस्या के निवारण हेतु महापौर को पत्र लिखिए।
सेवा में,
माननीय महापौर महोदय
नगर निगम, लखनऊ
विषय: अतिक्रमण समस्या के निवारण हेतु निवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे नगर की मुख्य सड़कों और गलियों में अतिक्रमण की समस्या अत्यधिक बढ़ गई है। दुकानदारों ने सड़क पर ही सामान फैला दिया है, जिससे लोगों के आने-जाने में भारी कठिनाई होती है। आए दिन जाम की समस्या उत्पन्न होती है और दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान कराकर नगरवासियों को राहत प्रदान करें।
भवदीय
(हस्ताक्षर)
नाम – राम कुमार
दिनांक – 25 सितम्बर 2025
Quick Tip: शिकायत या निवेदन पत्र में समस्या को स्पष्ट रूप से लिखें और समाधान की अपेक्षा विनम्र भाषा में करें।
(i) पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता
प्रस्तावना:
पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। वायु, जल, मृदा, वृक्ष, पशु-पक्षी और प्राकृतिक संपदा ही हमारे जीवन को संभव बनाते हैं। किन्तु आज के युग में विकास की अंधी दौड़ ने पर्यावरण को अत्यंत हानि पहुँचाई है। इसी कारण पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।
मुख्य भाग:
1. प्रदूषण की समस्या: औद्योगीकरण, मोटर वाहनों का धुआँ, प्लास्टिक का प्रयोग और रासायनिक अपशिष्टों ने वायु, जल और भूमि को प्रदूषित कर दिया है।
2. वनों की कटाई: वनों के अंधाधुंध कटान से जैव-विविधता नष्ट हो रही है और जलवायु असंतुलन बढ़ रहा है।
3. जीव-जंतुओं का विलुप्त होना: असंतुलन के कारण अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो रही हैं।
4. संरक्षण के उपाय: वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा का प्रयोग, प्लास्टिक पर नियंत्रण और पर्यावरणीय कानूनों का पालन।
उपसंहार:
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का ही नहीं, प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि समय रहते हम जागरूक न हुए तो जीवन असंभव हो जाएगा।
Final Answer: \[ \boxed{पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।} \]
% Quicktip
\begin{quicktipbox
निबंध लिखते समय हमेशा प्रस्तावना, मुख्य भाग और उपसंहार का ध्यान रखें।
\end{quicktipbox Quick Tip: निबंध लिखते समय हमेशा \textbf{प्रस्तावना, मुख्य भाग और उपसंहार} का ध्यान रखें।
(ii) महामारियों के सम्बन्ध में जागरूकता के उपाय
प्रस्तावना:
महामारी मानव इतिहास में बार-बार आती रही है और करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करती रही है। कोविड-19 ने हमें यह सिखाया कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
मुख्य भाग:
1. स्वच्छता: हाथ धोना, मास्क पहनना और साफ-सफाई रखना आवश्यक है।
2. टीकाकरण: समय पर वैक्सीन लगवाना।
3. सामाजिक दूरी: भीड़ से बचना और अनुशासन बनाए रखना।
4. सरकारी दिशा-निर्देश: नियमों का पालन करना और अफवाहों से बचना।
उपसंहार:
महामारी से बचाव का सबसे प्रभावी साधन जागरूकता है। जनता सतर्क रहे तो किसी भी महामारी का प्रभाव कम किया जा सकता है।
Final Answer: \[ \boxed{महामारी से बचाव का मूलमंत्र है जागरूकता और अनुशासन।} \]
% Quicktip
\begin{quicktipbox
महामारियों पर निबंध लिखते समय कारण, प्रभाव और उपाय अवश्य लिखें।
\end{quicktipbox Quick Tip: महामारियों पर निबंध लिखते समय \textbf{कारण, प्रभाव और उपाय} अवश्य लिखें।
(iii) मेरे प्रिय उपन्यासकार
प्रस्तावना:
साहित्य समाज का दर्पण है। उसमें उपन्यास प्रमुख विधा है। मेरे प्रिय उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद हैं जिन्हें उपन्यास सम्राट कहा जाता है।
मुख्य भाग:
1. विषय-वस्तु: किसानों की समस्या, सामाजिक विषमता और मानवीय संवेदनाएँ।
2. प्रमुख रचनाएँ: "गोदान", "गबन", "रंगभूमि", "सेवासदन"।
3. भाषा-शैली: सरल, सहज और मार्मिक।
4. विशेषता: यथार्थ का चित्रण और समाज सुधार का संदेश।
उपसंहार:
प्रेमचंद के उपन्यास आज भी समाज को दर्पण दिखाते हैं और हमें प्रेरित करते हैं।
Final Answer: \[ \boxed{प्रेमचंद मेरे प्रिय उपन्यासकार हैं।} \]
% Quicktip
\begin{quicktipbox
उपन्यासकार पर निबंध में जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान शामिल करें।
\end{quicktipbox Quick Tip: उपन्यासकार पर निबंध में \textbf{जीवन, रचनाएँ और साहित्यिक योगदान} शामिल करें।
(iv) भारतीय कृषकों की समस्या एवं समाधान
प्रस्तावना:
भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की अधिकांश जनता कृषि पर निर्भर है, परन्तु किसान आज भी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है।
मुख्य भाग:
1. भूमि और तकनीक: छोटे खेत और आधुनिक साधनों का अभाव।
2. सिंचाई की कमी: वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता।
3. आर्थिक संकट: कर्ज़ का बोझ और साहूकारों का शोषण।
4. समाधान: आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग, सिंचाई के साधनों का विकास, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सहकारी संस्थाओं का सहयोग।
उपसंहार:
किसान को सशक्त और समृद्ध बनाना भारत की प्रगति की पहली शर्त है।
Final Answer: \[ \boxed{किसानों की उन्नति ही भारत की उन्नति है।} \]
% Quicktip
\begin{quicktipbox
किसान सम्बन्धी निबंध में हमेशा समस्या और समाधान दोनों को लिखना चाहिए।
\end{quicktipbox Quick Tip: किसान सम्बन्धी निबंध में हमेशा \textbf{समस्या और समाधान} दोनों को लिखना चाहिए।
(v) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व
प्रस्तावना:
विद्यार्थी जीवन शिक्षा प्राप्त करने का समय है। इस काल में अनुशासन सफलता की कुंजी है।
मुख्य भाग:
1. समय का पालन: अनुशासन से समय का सही उपयोग होता है।
2. अध्ययन में एकाग्रता: अनुशासन से मन एकाग्र होता है।
3. चरित्र निर्माण: अनुशासन से आत्म-नियंत्रण और कर्तव्य-निष्ठा आती है।
4. जीवन में सफलता: अनुशासन के बिना शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता।
उपसंहार:
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
Final Answer: \[ \boxed{अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सफलता की कुंजी है।} \]
% Quicktip
\begin{quicktipbox
विद्यार्थी जीवन पर निबंध में अनुशासन और चरित्र-निर्माण का अवश्य उल्लेख करें।
\end{quicktipbox Quick Tip: विद्यार्थी जीवन पर निबंध में \textbf{अनुशासन और चरित्र-निर्माण} का अवश्य उल्लेख करें।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.