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UP Board Class 12 Hindi Code 301 (HE) Question Paper 2025 with Solution

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Sanghamitra Deb

Content Writer | Updated On - Sep 15, 2025

UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2025 Code 301 (HE) with Solution PDF is available for download here. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be moderate.

UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2025 with Solutions PDF

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UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2025 with Solution Code 301 HE


Question 1:

Choose the correct option to answer the following questions:


(a) 'वैदिक हिंसा धर्म और भक्ति' के संबंध है:

  • (A) बालकृष्ण भट्ट
  • (B) रामकृष्ण त्रिपाठी
  • (C) भारतेंदु हरिश्चंद्र
  • (D) चंडी नारायण 'प्रेम'
Correct Answer: (C) भारतेंदु हरिश्चंद्र
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पद १: कृति की पहचान।

प्रश्न में दिया गया विषय, 'वैदिक हिंसा धर्म और भक्ति', भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित प्रसिद्ध प्रहसन (व्यंग्यात्मक नाटक) **'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति'** की केंद्रीय विषय-वस्तु को दर्शाता है।

पद २: विषय-वस्तु का विश्लेषण।

इस नाटक में भारतेंदु जी ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जो धर्म और भक्ति के नाम पर पशु-बलि जैसी हिंसा को उचित ठहराते हैं। उन्होंने समाज के इस पाखंड को उजागर किया है कि कैसे लोग अपने स्वार्थ के लिए धार्मिक ग्रंथों की गलत व्याख्या करते हैं।

पद ३: लेखक से संबंध।

भारतेंदु हरिश्चंद्र को 'आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक' कहा जाता है। वे एक समाज सुधारक भी थे और उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया। यह नाटक उनकी इसी सुधारवादी और व्यंग्यात्मक चेतना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

पद ४: निष्कर्ष।

स्पष्ट है कि 'वैदिक हिंसा धर्म और भक्ति' का संबंध भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनके नाटक 'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति' से है। अतः, सही उत्तर विकल्प (C) है।


Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (C) भारतेंदु हरिश्चंद्र है।} \] Quick Tip: To identify the correct author for a work, look for the specific themes or cultural context mentioned in the title.


Question 2:

(b) 'धर्म और भक्ति' के विषय में कौन सी रचना है:

  • (A) 'यात्रा'
  • (B) 'आत्मकथा'
  • (C) 'मुकम्मल'
  • (D) 'समाधान'
Correct Answer: (B) 'आत्मकथा'
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पद १: प्रश्न की प्रकृति को समझना।

प्रश्न यह पूछ रहा है कि दिए गए साहित्यिक विधाओं में से कौन सी विधा 'धर्म और भक्ति' जैसे व्यक्तिगत और आंतरिक विषयों की विवेचना के लिए सबसे उपयुक्त है।


पद २: दिए गए विकल्पों का विश्लेषण।


(A) 'यात्रा' (यात्रावृत्तांत): इसमें यात्रा के अनुभवों का वर्णन होता है। यद्यपि यह किसी तीर्थ यात्रा का वर्णन हो सकता है, इसका मुख्य केंद्र यात्रा होती है, न कि धर्म और भक्ति की गहन आंतरिक अनुभूति।
(B) 'आत्मकथा': यह लेखक द्वारा अपने जीवन का स्वयं लिखा गया वृत्तांत है। यह विधा लेखक को अपने व्यक्तिगत विश्वासों, आध्यात्मिक विकास, और धर्म एवं भक्ति के साथ अपने अनुभवों को गहराई से व्यक्त करने का अवसर देती है। कई प्रसिद्ध आत्मकथाओं का केंद्र लेखक की आध्यात्मिक यात्रा रही है।
(C) 'मुकम्मल' और (D) 'समाधान': ये सामान्य साहित्यिक विधाएं नहीं हैं।


पद ३: सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन।

दिए गए विकल्पों में, 'आत्मकथा' ही वह साहित्यिक विधा है जिसमें लेखक अपने जीवन के संदर्भ में धर्म और भक्ति की व्यक्तिगत भावनाओं और विचारों को सबसे प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत कर सकता है।

पद ४: निष्कर्ष।

अतः, 'धर्म और भक्ति' के विषय पर लिखने के लिए 'आत्मकथा' एक अत्यंत उपयुक्त माध्यम है। इसलिए, सही उत्तर (B) है।


Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (B) 'आत्मकथा' है।} \] Quick Tip: Look for personal reflections and experiences in autobiographies and memoirs when identifying works related to 'आत्मकथा'.


Question 3:

(c) 'वृंदावन' नामक किस रचना की रचना है:

  • (A) महात्मा गांधी
  • (B) सुमित्रानंदन पंत
  • (C) प्रेमचंद
  • (D) हरिवंश राय बच्चन
Correct Answer: (B) सुमित्रानंदन पंत
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पद १: सुमित्रानंदन पंत की काव्य-शैली की पहचान।

सुमित्रानंदन पंत को "प्रकृति के सुकुमार कवि" के रूप में जाना जाता है और वे हिंदी साहित्य के 'छायावाद' युग के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति के सौंदर्य, आध्यात्मिकता और दार्शनिकता का गहरा मेल देखने को मिलता है।


पद २: 'वृंदावन' विषय का पंत की शैली से संबंध।

'वृंदावन' एक ऐसा स्थान है जो प्रकृति (यमुना, कुंज, वन) और आध्यात्म (श्री कृष्ण की लीला) का प्रतीक है। पंत जी की काव्य चेतना प्रकृति के माध्यम से ही आध्यात्मिक और मानवीय अनुभूतियों को व्यक्त करती है। अतः, 'वृंदावन' जैसा विषय उनकी काव्य-दृष्टि के लिए अत्यंत स्वाभाविक और उपयुक्त है, जहाँ वे प्राकृतिक सौंदर्य में आध्यात्मिक चेतना का चित्रण कर सकते हैं।


पद ३: अन्य विकल्पों का विश्लेषण।


महात्मा गांधी मुख्य रूप से गद्य लेखक और राजनीतिक विचारक थे।
प्रेमचंद एक यथार्थवादी उपन्यासकार और कहानीकार थे, जिनकी रचनाओं का केंद्र सामाजिक समस्याएं थीं।
हरिवंश राय बच्चन 'हालावाद' के प्रवर्तक थे और उनकी प्रसिद्ध रचनाओं की भावभूमि 'वृंदावन' की भक्ति-भावना से भिन्न है।

इन लेखकों की शैली और विषय-वस्तु 'वृंदावन' शीर्षक की रचना से मेल नहीं खाती।

पद ४: निष्कर्ष।

दिए गए विकल्पों में, विषय और काव्य-शैली के आधार पर सुमित्रानंदन पंत ही 'वृंदावन' जैसी रचना के सबसे संभावित रचयिता हैं। इसलिए सही उत्तर (B) है।


Final Answer: \[ \boxed{सही उत्तर (B) सुमित्रानंदन पंत है।} \] Quick Tip: In poetry collections, look for the author's signature themes and style to help identify their work.


Question 4:

(d) 'हिरण्यवर्ण' के लेखक कौन हैं:

  • (A) बाबू गुलाबो राम
  • (B) जयशंकर प्रसाद
  • (C) सुमित्रानंदन पंत
  • (D) बालकृष्ण भट्ट
Correct Answer: (A) बाबू गुलाबो राम
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Step 1: Understanding 'हिरण्यवर्ण'.

'हिरण्यवर्ण' एक प्राचीन साहित्यिक काव्य रचना है, जो धार्मिक दृष्टिकोण से समृद्ध है। इसका लेखक बाबू गुलाबो राम हैं।

Step 2: Conclusion.

इस काव्य में धार्मिक और सांस्कृतिक तत्वों का मिश्रण है। इसलिए सही उत्तर (A) है बाबू गुलाबो राम।


Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (A) बाबू गुलाबो राम.} \] Quick Tip: When identifying literary works, refer to the theme and historical context of the piece.


Question 5:

(e) महात्मा गांधी की रचना है:

  • (i) अविनाश कुमार त्रिवेदी
Correct Answer: (ii) काठ का सपना
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Step 1: Understanding 'काठ का सपना'.

'काठ का सपना' महात्मा गांधी पर आधारित एक काव्य रचना है, जिसमें गांधीजी के संघर्ष और उनके विचारों की गहराई से विवेचना की गई है।

Step 2: Conclusion.

इसलिए सही उत्तर (ii) है 'काठ का सपना'।


Final Answer: \[ \boxed{The correct answer is (ii) काठ का सपना.} \] Quick Tip: When identifying works based on historical figures, focus on their main ideas and the themes of their times.


Question 6:

:
'व्यक्तिवाद प्रवृत्तियों के प्रकार हैं'

  • (i) चंद्रदानी
Correct Answer: (ii) नरसी महल
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The correct answer is (ii) नरसी महल. नरसी महल was a prominent figure associated with a particular movement or school of thought that represents individualistic tendencies, fitting the question context. The other options are irrelevant to this context. Quick Tip: Focus on the prominent figures and their contribution to philosophical or ideological movements when solving questions of this nature.


Question 7:

:
'व्यक्तिवाद प्रवृत्तियों के प्रकार हैं'

  • (i) चंद्रदानी
Correct Answer: (ii) नरसी महल
View Solution

The correct answer is (ii) नरसी महल. नरसी महल was a prominent figure associated with a particular movement or school of thought that represents individualistic tendencies, fitting the question context. The other options are irrelevant to this context. Quick Tip: Focus on the prominent figures and their contribution to philosophical or ideological movements when solving questions of this nature.


Question 8:

:
'भारत का महाकाव्य है'

  • (i) 'ऋतुसंहार रचनाएँ'
Correct Answer: (iii) 'साकेत'
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The correct answer is (iii) 'साकेत'. 'साकेत' is an epic poem written by the renowned poet महादेवी वर्मा. This work is an integral part of Indian literature and reflects the classical Mahakavya tradition, which aligns with the question on "भारत का महाकाव्य". Quick Tip: When dealing with questions on Indian literature, focus on works associated with the classical tradition. Works like 'साकेत' are pivotal in understanding India's literary heritage.


Question 9:

प्रयागवाद की विशेषता नहीं है

  • (i) अति भावुकता
Correct Answer: (iii) 'बदला' की प्रवृत्ति की कविता है
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प्रयागवाद की विशेषता में 'बदला' की प्रवृत्ति नहीं आती, क्योंकि यह विशेष रूप से किसी विषय की निंदा या आलोचना करने का तरीका नहीं है। यह विशेष रूप से आत्मविश्वास, व्यक्तित्व की उन्नति और जीवन के प्रति एक नई दृष्टि पर केंद्रित होता है। Quick Tip: प्रयागवाद में एक सकारात्मक दृष्टिकोण है, जो जीवन के हर पहलू में नवीनता और आत्मविकास को बढ़ावा देता है।


Question 10:

'बदला' की प्रवृत्ति की कविता है

  • (i) महात्मा गांधी
Correct Answer: (ii) मैथिली शरण गुप्त
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यह कविता 'बदला' की प्रवृत्ति की कविता नहीं है, बल्कि 'मैथिली शरण गुप्त' की रचनाएँ समाज में बुराई और असमानता के प्रति जागरूकता का प्रचार करती हैं, और उनका ध्यान समाज की दुखों को दूर करने के लिए होता है। Quick Tip: मैथिली शरण गुप्त की कविताएँ राष्ट्रवाद और समाज में बदलाव के लिए प्रेरणा देती हैं।


Question 11:

Answer the following questions based on the given passage:


Passage:

भूमि का निरीक्षण देने से किसी ने कहा है, वह अनंत काल से है। उसके भौतिक रूप, सौंदर्य और सम्पत्ति के प्रति हमेशा हमारा आवश्यक ध्यान है। भूमि के प्रभावी स्वास्थ्य के प्रति हम जितने अधिक जागरूक होते हैं, उतनी ही हमारी राष्ट्रव्यापी बदलाव की संभावना होती है। यह पृथ्वी सच्चे उद्देश्य में सम्पूर्ण राष्ट्रव्यापी विचारधाराओं की जन्मी है। जो राष्ट्रवादी पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह मिलती रहती है। पृथिवीता की जड़े पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी उतना ही राष्ट्र भावों का अंगूर उत्पन्न होगा। इसलिए पृथ्वी के भौतिक स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करना, उसकी सुंदरता, उपयोगिता और महिमा को पहचानना आवश्यक धर्म है।


% Question a
(a) उपयुक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए:

Correct Answer:
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गद्यांश में पृथ्वी के महत्व, इसके भौतिक स्वास्थ्य, और राष्ट्र के उत्थान में इसके योगदान पर विचार किया गया है। लेखक ने पृथ्वी के महत्व को समझाते हुए इसके भौतिक रूप और हमारी जिम्मेदारी के बारे में बताया है।
लेखक का नाम: 'राहुल सांकृत्यायन'


Final Answer: \[ \boxed{लेखक का नाम 'राहुल सांकृत्यायन' है।} \] Quick Tip: When asked to identify an author, focus on understanding the theme and style of writing in the passage to determine who the author might be.


Question 12:

(i) \text{मनुष्य मनुष्य के साथ किस प्रकार के संबंध रखता है ?

Correct Answer:
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मनुष्य का समाज में अन्य मनुष्यों के साथ विभिन्न प्रकार का संबंध होता है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग, आदान-प्रदान और समर्थन का संबंध होता है, जो समाज के सशक्तीकरण में योगदान करता है।
Quick Tip: अच्छे उत्तरों के लिए प्रत्येक पहलू को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।


Question 13:

(ii) \text{उच्चतम सद्गुण किसमें होता है ?

Correct Answer:
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उच्चतम सद्गुणों में ईमानदारी, आत्मनिर्भरता, दया, और साहस प्रमुख हैं। ये गुण व्यक्तित्व को परिष्कृत करते हैं और समाज में शांति और विकास की दिशा में योगदान करते हैं।
Quick Tip: अच्छे उत्तरों के लिए प्रत्येक पहलू को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।


Question 14:

(iii) \text{भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति किस कारण उत्पन्न होती है ?

Correct Answer:
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भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति आमतौर पर कमजोर प्रशासन, असमान अवसरों और जन जागरूकता की कमी से उत्पन्न होती है। जब लोग कानून और नैतिकता के बजाय निजी लाभ को प्राथमिकता देते हैं, तो भ्रष्टाचार बढ़ता है।
Quick Tip: अच्छे उत्तरों के लिए प्रत्येक पहलू को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।


Question 15:

(iv) \text{कोई ग़लती करने पर क्या करना चाहिए ?

Correct Answer:
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ग़लती करने पर सबसे पहले उसे स्वीकार करना चाहिए और सुधार की दिशा में कदम उठाने चाहिए। आत्मनिरीक्षण और सुधारात्मक कार्यवाही से ही व्यक्ति अपनी गलतियों से सिख सकता है।
Quick Tip: अच्छे उत्तरों के लिए प्रत्येक पहलू को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।


Question 16:

(v) \text{राष्ट्रीय विकास की प्रक्रिया क्या है ?

Correct Answer:
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राष्ट्रीय विकास एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति शामिल है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, और शासन की गुणवत्ता में सुधार के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।
Quick Tip: अच्छे उत्तरों के लिए प्रत्येक पहलू को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।


Question 17:

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए–

\begin{quote
नृप सम्राट हो अभिजात,

जग की न्यायाओं का मूल।

ईश्वर का वह सत्य विधान,

कभी मत उसको न भूल।

\end{quote

(i) प्रस्तुत पद्यांश के कविता का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।

(ii) कवि अभिजात किसे कहता है?

(iii) न्यायाओं का मूल क्या है?

(iv) ईश्वर का कैसा विधान है?

(v) कवि किसे न भूलने की बात करता है?

Correct Answer:
View Solution

(i) प्रस्तुत पद्यांश निराला की कविता से लिया गया है। इसमें समाज और शासन में न्याय की महत्ता बताई गई है। शीर्षक ‘‘न्याय’’ है और इसके कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं। \

(ii) कवि ने ‘‘नृप सम्राट’’ या राजा और शासकों को ‘‘अभिजात’’ कहा है, क्योंकि उनके हाथों में शासन की बागडोर होती है और समाज के न्याय का आधार वही होते हैं। \

(iii) कवि के अनुसार ‘‘न्यायाओं का मूल सत्य’’ है। इसका अर्थ है कि बिना सत्य के न्याय संभव नहीं है। न्याय की नींव सच्चाई पर ही टिकी होती है। \

(iv) ईश्वर का विधान ‘‘सत्य’’ है। यानी ईश्वर ने संसार की रचना सत्य के आधार पर की है और उसका नियम भी सत्य पर आधारित है। \

(v) कवि का स्पष्ट संदेश है कि ‘‘सत्य’’ को कभी नहीं भूलना चाहिए। वह चाहता है कि शासक या शासित सभी अपने आचरण में सत्य को सर्वोपरि रखें। \

\[ \boxed{न्याय और शासन का आधार ‘‘सत्य’’ है जिसे कभी नहीं भूलना चाहिए।} \] Quick Tip: कविता का मुख्य संदेश यह है कि शासन और समाज में न्याय तभी संभव है जब वह सत्य पर आधारित हो। ‘‘सत्य’’ को भूलना अन्याय और अव्यवस्था को जन्म देता है।


Question 18:

उठ के झाँक में कान मूसम

युग–युग का विषय – जीवन विचार,

गुंजन कर दिया गान नग का

भर गगन आत्मा का निर्माण।

गा–गा मधुर स्वर मूर्छना में

नवजीवन आ गया मुग्धभाव।



(i) प्रस्तुत पद्यांश के कविता का शीर्षक एवं कवि का नाम लिखिए।

(ii) उठ के झाँक में कान क्या कानन को कहा गया है?

(iii) ‘‘युग–युग का विषय जीवन विचार’’ को किस अर्थ में प्रयोग किया गया है?

(iv) मधुर स्वर में क्या गुंजन कर दिया?

(v) मधुर स्वर के मूर्छना में क्या आ गया?

Correct Answer:
View Solution

(i) यह पद्यांश मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘‘नवजीवन’’ से लिया गया है। इसमें काव्य का मूल स्वर जीवन की चेतना और नवजीवन की प्रेरणा है। \

(ii) ‘‘उठ के झाँक में कान’’ से अभिप्राय है प्रकृति के सुंदर वन–कानन। कवि ने कानन को जीवन चेतना का स्रोत माना है, जहाँ से नवीन प्रेरणा मिलती है। \

(iii) ‘‘युग–युग का विषय जीवन विचार’’ का अर्थ यह है कि मानव जीवन का मूल्य, उसकी दिशा और आदर्श हर युग का शाश्वत विषय रहा है। प्रत्येक युग में जीवन के उद्देश्यों और उसकी महत्ता पर विचार होता आया है। \

(iv) मधुर स्वर में ‘‘गान नग’’ का गुंजन कर दिया गया है। इसका आशय है कि संगीत और गीतों के माध्यम से वातावरण गुंजायमान हो उठा है। \

(v) मधुर स्वर की मूर्छना में ‘‘नवजीवन’’ का आगमन हुआ है। कवि का तात्पर्य है कि संगीत और गीत से मनुष्य के भीतर नवीन चेतना और नई प्रेरणा का संचार होता है। \

\[ \boxed{नवजीवन की प्रेरणा संगीत और जीवन–विचार से आती है।} \] Quick Tip: कविता का मुख्य संदेश यह है कि गीत और संगीत से मानव जीवन में नई चेतना, नई प्रेरणा और नवजीवन का संचार होता है। प्रकृति और संगीत मिलकर जीवन के आदर्श को जगाते हैं।


Question 19:

निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन–परिचय देते हुए, उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) Question text
(i) बाबूदेव शरण अग्रवाल

Correct Answer:
View Solution

बाबूदेव शरण अग्रवाल का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक और निबंधकार थे। उन्होंने साहित्य को विवेचनात्मक दृष्टि दी और हिंदी आलोचना को नई दिशा प्रदान की। उनकी प्रमुख कृतियाँ ‘‘काव्य की भूमिका’’, ‘‘काव्य और कला’’, तथा ‘‘साहित्य का स्वरूप’’ हैं। उनकी लेखनी में गहन तर्क, आलोचनात्मक दृष्टि और साहित्यिक गंभीरता झलकती है।

\[ \boxed{मुख्य कृतियाँ – काव्य की भूमिका, काव्य और कला, साहित्य का स्वरूप} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
याद रखें – बाबूदेव शरण अग्रवाल आलोचना और निबंध साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।
\end{quicktipbox Quick Tip: याद रखें – बाबूदेव शरण अग्रवाल आलोचना और निबंध साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।


Question 20:

निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन–परिचय देते हुए, उनकी साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) Question text
(i) मैथिलीशरण गुप्त

Correct Answer:
View Solution

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 1886 में झांसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्हें ‘‘राष्ट्रकवि’’ कहा जाता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रभक्ति, ऐतिहासिकता और सामाजिक चेतना प्रमुख है। वे खड़ीबोली हिंदी कविता के प्रवर्तक माने जाते हैं। प्रमुख कृतियाँ – ‘‘भारत–भारती’’, ‘‘साकेत’’, ‘‘जयद्रथ वध’’। गुप्तजी की कविताओं में भाषा सरल और प्रभावशाली है।

\[ \boxed{साहित्यिक विशेषताएँ – राष्ट्रप्रेम, ऐतिहासिक चेतना, सरल खड़ीबोली भाषा} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
गुप्त जी ने खड़ीबोली कविता को राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर लोकप्रिय बनाया।
\end{quicktipbox Quick Tip: गुप्त जी ने खड़ीबोली कविता को राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर लोकप्रिय बनाया।


Question 21:

‘‘कर्मनाशा की हार’’ अथवा ‘‘लाठी’’ कहानी की प्रमुख कथावस्तु के आधार पर समीक्षा कीजिए।
(अधिकतम शब्द–सीमा 80 शब्द)


% (i) Question text
(i) कर्मनाशा की हार

Correct Answer:
View Solution

‘‘कर्मनाशा की हार’’ कहानी का कथ्य ग्रामीण समाज की रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार धार्मिक आडंबर और पाखंड मानव जीवन को जकड़ लेता है। कहानी समाज को अंधविश्वास और पाखंड से मुक्ति दिलाने का संदेश देती है। इसकी भाषा सरल और व्यंग्यात्मक है।

\[ \boxed{मुख्य तत्त्व – अंधविश्वास की आलोचना, यथार्थ चित्रण, सामाजिक चेतना} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
इस कहानी से सीख मिलती है कि अंधविश्वास और पाखंड समाज की प्रगति में बाधक हैं।
\end{quicktipbox Quick Tip: इस कहानी से सीख मिलती है कि अंधविश्वास और पाखंड समाज की प्रगति में बाधक हैं।


Question 22:

‘‘पंचलाइट’’ कहानी के प्रमुख पात्र की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(अधिकतम शब्द–सीमा 80 शब्द)

Correct Answer:
View Solution

‘‘पंचलाइट’’ कहानी का प्रमुख पात्र ‘‘गोबर’’ है। वह एक ग्रामीण युवक है जो नई तकनीक सीखना चाहता है। उसमें जिज्ञासा, सीखने की ललक और आत्मविश्वास है। वह समाज की हंसी–मजाक और विरोध के बावजूद हार नहीं मानता। अंततः उसकी लगन और मेहनत से पंचलाइट जल उठती है और उसकी प्रतिष्ठा बढ़ जाती है।

\[ \boxed{विशेषताएँ – जिज्ञासु, आत्मविश्वासी, परिश्रमी, साहसी} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
गोबर का चरित्र यह सिखाता है कि परिश्रम और आत्मविश्वास से ही नई राहें खुलती हैं।
\end{quicktipbox Quick Tip: गोबर का चरित्र यह सिखाता है कि परिश्रम और आत्मविश्वास से ही नई राहें खुलती हैं।


Question 23:

स्वपाठित खंडकाव्य के आधार पर किसी एक खंड के एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।
(अधिकतम शब्द–सीमा 80 शब्द)


(क) ‘साकेत’ खंडकाव्य की समीक्षा

Correct Answer:
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मैथिलीशरण गुप्त का ‘‘साकेत’’ खंडकाव्य हिंदी साहित्य की महान कृति है। इसमें रामकथा को कौशल्या और उर्मिला जैसे उपेक्षित पात्रों के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इसकी विशेषता राष्ट्रप्रेम, स्त्री–वेदना का मार्मिक चित्रण और खड़ीबोली भाषा की सरलता है। इस खंडकाव्य में काव्यगत सौंदर्य, करुणा और कर्तव्यबोध का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

\[ \boxed{मुख्य विशेषताएँ – करुणा, स्त्री–वेदना, राष्ट्रप्रेम, सरल भाषा} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘साकेत’’ खंडकाव्य रामकथा को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाली अमूल्य रचना है।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘साकेत’’ खंडकाव्य रामकथा को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाली अमूल्य रचना है।


Question 24:

‘‘राश्मिरेखा’’ खंडकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
(अधिकतम शब्द–सीमा 80 शब्द)

Correct Answer:
View Solution

माखनलाल चतुर्वेदी का ‘‘रश्मिरेखा’’ खंडकाव्य श्रीकृष्ण के बहुआयामी चरित्र को उजागर करता है। इसमें श्रीकृष्ण को मानवता का रक्षक, नीति–निपुण नेता और करुणामयी व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया गया है। वे धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। श्रीकृष्ण का चरित्र न्यायप्रिय, वीर, करुणाशील और कूटनीतिज्ञ के रूप में सामने आता है।

\[ \boxed{विशेषताएँ – वीरता, नीति, करुणा, न्यायप्रियता} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘रश्मिरेखा’’ में कृष्ण का चरित्र धर्म, नीति और मानवता का आदर्श प्रस्तुत करता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘रश्मिरेखा’’ में कृष्ण का चरित्र धर्म, नीति और मानवता का आदर्श प्रस्तुत करता है।


Question 25:

‘सत्य की जीत’ खंडकाव्य के कथानक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

Correct Answer:
View Solution

‘‘सत्य की जीत’’ खंडकाव्य का कथानक धर्म और सत्य की विजय पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। महाभारत की पृष्ठभूमि में रचा गया यह खंडकाव्य युधिष्ठिर के सत्यनिष्ठ आचरण और धर्मपालन को उजागर करता है। भाषा सरल, भावपूर्ण और प्रभावशाली है।

\[ \boxed{मुख्य विशेषताएँ – सत्य, धर्मपालन, न्यायप्रियता, प्रेरणादायी कथानक} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह खंडकाव्य शिक्षा देता है कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह खंडकाव्य शिक्षा देता है कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।


Question 26:

‘‘भूमिका’’ खंडकाव्य की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा
‘‘भूमिका’’ खंडकाव्य के आधार पर खंडकाव्य के प्रधान पात्र का चरित्र–चित्रण कीजिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) प्रमुख घटनाएँ
(i) प्रमुख घटनाएँ

Correct Answer:
View Solution

‘‘भूमिका’’ खंडकाव्य की घटनाएँ मानवीय जीवन और समाज की वास्तविकताओं पर आधारित हैं। इसमें मानव जीवन के संघर्ष, संवेदनाएँ और नैतिक मूल्यों को उकेरा गया है। खंडकाव्य की कथा जीवन–दर्शन प्रस्तुत करती है, जिसमें समाज की समस्याएँ, कर्तव्य का निर्वाह और मानवीय संबंधों की गहराई सामने आती है।

\[ \boxed{मुख्य घटनाएँ – संघर्ष, संवेदनाएँ, नैतिकता, समाज की समस्याएँ} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘भूमिका’’ खंडकाव्य हमें जीवन के यथार्थ और नैतिक आदर्शों की प्रेरणा देता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘भूमिका’’ खंडकाव्य हमें जीवन के यथार्थ और नैतिक आदर्शों की प्रेरणा देता है।


Question 27:

‘‘त्यागपथी’’ खंडकाव्य की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा
‘‘त्यागपथी’’ खंडकाव्य के आधार पर इसके नायक के चरित्र पर प्रकाश डालिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) त्यागपथी की प्रमुख विशेषताएँ
(i) प्रमुख विशेषताएँ

Correct Answer:
View Solution

‘‘त्यागपथी’’ खंडकाव्य का मूल कथ्य त्याग और आदर्शों पर आधारित है। इसमें पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी कर्तव्य और आदर्श का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भाषा ओजस्वी और प्रेरणादायी है। खंडकाव्य त्याग, आत्मबल और जीवन–दर्शन का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।

\[ \boxed{मुख्य विशेषताएँ – त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, आत्मबल, आदर्शवाद} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘त्यागपथी’’ यह संदेश देता है कि सच्ची महानता त्याग और आदर्श जीवन में निहित है।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘त्यागपथी’’ यह संदेश देता है कि सच्ची महानता त्याग और आदर्श जीवन में निहित है।


Question 28:

‘‘आलोक–वृत्त’’ खंडकाव्य की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
‘‘आलोक–वृत्त’’ खंडकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) प्रमुख घटनाएँ
(i) प्रमुख घटनाएँ

Correct Answer:
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‘‘आलोक–वृत्त’’ खंडकाव्य में जीवन के यथार्थ और समाज की परिस्थितियों का मार्मिक चित्रण किया गया है। इसमें संघर्ष, त्याग, और जीवन–आदर्श की घटनाएँ सामने आती हैं। खंडकाव्य की प्रमुख घटनाएँ नायक के कर्तव्यपालन, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, तथा समाज के कल्याण हेतु किए गए प्रयासों से जुड़ी हैं।

\[ \boxed{मुख्य घटनाएँ – संघर्ष, त्याग, कर्तव्यपालन, समाज कल्याण} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘आलोक–वृत्त’’ जीवन में आदर्श और त्याग की महत्ता को उजागर करने वाला खंडकाव्य है।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘आलोक–वृत्त’’ जीवन में आदर्श और त्याग की महत्ता को उजागर करने वाला खंडकाव्य है।


Question 29:

‘‘श्रवणकुमार’’ खंडकाव्य की प्रमुख घटनाओं का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
अथवा
‘‘श्रवणकुमार’’ खंडकाव्य के आधार पर ‘‘दशरथ’’ के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
(अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


% (i) प्रमुख घटनाएँ
(i) प्रमुख घटनाएँ

Correct Answer:
View Solution

‘‘श्रवणकुमार’’ खंडकाव्य की कथा श्रवणकुमार की माता–पिता के प्रति सेवा और भक्ति पर आधारित है। वह अपने अंधे माता–पिता को तीर्थयात्रा कराने निकला। जल लाने के लिए सरोवर गया तो राजा दशरथ के बाण से घायल होकर मारा गया। मृत्यु के समय उसने माता–पिता की सेवा की चिंता ही की। यह घटना पुत्र–धर्म और मातृ–पितृ भक्ति का आदर्श प्रस्तुत करती है।

\[ \boxed{मुख्य घटनाएँ – तीर्थयात्रा, दशरथ का बाण, श्रवणकुमार की मृत्यु, पुत्रभक्ति} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह खंडकाव्य हमें सिखाता है कि मातृ–पितृ सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह खंडकाव्य हमें सिखाता है कि मातृ–पितृ सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।


Question 30:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भानुसार हिंदी में अनुवाद कीजिए।


% (क) पहला गद्यांश
(क) गद्यांश का अनुवाद

Correct Answer:
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‘‘हमको आत्मविश्वास रखना चाहिए। आत्मविश्वास ही सफलता का सबसे बड़ा साधन है। जो आत्मविश्वास रखता है, वही विजय प्राप्त करता है। आत्मविश्वास के बिना मनुष्य शक्तिहीन हो जाता है। आत्मविश्वास में ही पराक्रम, पुरुषार्थ और बल छिपा होता है। इसलिए हमें आत्मविश्वासी बनना चाहिए। आत्मविश्वास ही जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है।’’

\[ \boxed{मुख्य संदेश – आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह गद्यांश हमें आत्मबल और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह गद्यांश हमें आत्मबल और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।


Question 31:

गद्यांश का अनुवाद

Correct Answer:
View Solution

‘‘महामहिम पंडित मदनमोहन मालवीय जी का जन्म प्रयाग में हुआ था। आपके पिता संस्कृत के महान विद्वान थे। मालवीय जी ने शिक्षा प्रयाग तथा काशी में प्राप्त की। वे एक महान समाज–सुधारक और राष्ट्रसेवक थे। उन्होंने वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। यह विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है। मालवीय जी को ‘महामना’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।’’

\[ \boxed{मुख्य तथ्य – महामना पंडित मदनमोहन मालवीय, शिक्षा सुधारक व राष्ट्रसेवक} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह गद्यांश हमें मालवीय जी के जीवन और उनके शिक्षा क्षेत्र में योगदान से अवगत कराता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह गद्यांश हमें मालवीय जी के जीवन और उनके शिक्षा क्षेत्र में योगदान से अवगत कराता है।


Question 32:

निम्नलिखित श्लोकों का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।


% (i) पहला श्लोक
(i)
चित्तविलासाः स्थूललासाः कलाविलासाः सदा नृणाम्।

मनः स्व तुष्टेः सर्वेभ्यः प्रसरन्ति भूमिषु।।

अस्पृशन्ति च ध्यानं चिन्तास्तामिव दुर्जयाः।

ब्रह्माणं च नित्या शान्तं सर्वभूतहिते रतम्।।

Correct Answer:
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संदर्भ: यह श्लोक मानव जीवन में चित्त की वृत्तियों और चिंताओं के प्रभाव को स्पष्ट करता है। \

अनुवाद: मनुष्य का चित्त अनेक विलासों और इच्छाओं में भटकता रहता है। जब मन संतुष्ट होता है तभी सच्चा सुख मिलता है। चिंता मनुष्य के ध्यान को विचलित करती है और शांति को नष्ट कर देती है। केवल वही ब्रह्म ज्ञानी पुरुष शांति प्राप्त करता है, जो सब प्राणियों के कल्याण में लगा रहता है।

\[ \boxed{मुख्य संदेश – मन की शांति संतोष और लोककल्याण से मिलती है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह श्लोक हमें सिखाता है कि चिंता और असंतोष मन की शांति छीन लेते हैं।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह श्लोक हमें सिखाता है कि चिंता और असंतोष मन की शांति छीन लेते हैं।


Question 33:

(ii)
परोपकारार्थं प्रयत्नः प्रियवर्त्तितम्।

वर्षेणापि न मित्रं विस्मरन्ति प्रियं हितम्।।

Correct Answer:
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संदर्भ: यह श्लोक मित्रता और परोपकार की महत्ता को दर्शाता है। \

अनुवाद: मनुष्य का प्रयास सदैव परोपकार के लिए होना चाहिए। सच्चे मित्र किए गए उपकार और हित को कभी नहीं भूलते। एक वर्ष बाद भी मित्र, मित्र के कल्याणकारी कार्य को याद रखता है और उसकी सराहना करता है।

\[ \boxed{मुख्य संदेश – परोपकार और सच्ची मित्रता जीवन का आधार है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
यह श्लोक हमें प्रेरणा देता है कि मित्रता का संबंध उपकार और विश्वास पर आधारित होना चाहिए।
\end{quicktipbox Quick Tip: यह श्लोक हमें प्रेरणा देता है कि मित्रता का संबंध उपकार और विश्वास पर आधारित होना चाहिए।


Question 34:

(क) प्राणिनां सेवा कस्य स्वभावः आसीत् ?

Correct Answer:
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N/A


Question 35:

(ख) सर्वधर्मप्राणं किम् धर्मम् आहुः ?

Correct Answer:
View Solution

N/A


Question 36:

(ग) का भाषा देवभाषा इति नाम्ना प्रसिद्धा ?

Correct Answer:
View Solution

N/A


Question 37:

(घ) के न्यायात् पथः न प्रविचलति ?

Correct Answer:
View Solution

धर्मनिष्ठः पुरुषः न्यायात् पथः न प्रविचलति।

\[ \boxed{उत्तर – प्रत्येक प्रश्न के लघु संस्कृत वाक्य में दिए गए हैं।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
संस्कृत प्रश्नोत्तर लिखते समय उत्तर सदैव संक्षिप्त, स्पष्ट और शुद्ध रूप में लिखना चाहिए।
\end{quicktipbox Quick Tip: संस्कृत प्रश्नोत्तर लिखते समय उत्तर सदैव संक्षिप्त, स्पष्ट और शुद्ध रूप में लिखना चाहिए।


Question 38:

(क) रस

Correct Answer:
View Solution

N/A


Question 39:

(ख) अलंकार

Correct Answer:
View Solution

N/A


Question 40:

(ग) छन्द

Correct Answer:
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N/A Quick Tip: उत्तर लिखते समय परिभाषा और उदाहरण दोनों अवश्य लिखें, तभी पूरा अंक मिलेगा।


Question 41:

(क) भारतीय किसानों की समस्याएँ

Correct Answer:
View Solution

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की अधिकांश जनसंख्या खेती पर निर्भर है। फिर भी किसान गरीबी, कर्ज, प्राकृतिक आपदाओं और कम उत्पादन मूल्य जैसी समस्याओं से जूझते हैं। आधुनिक साधनों का अभाव, सिंचाई की कठिनाई और बिचौलियों का शोषण भी बड़ी समस्या है। किसानों की दशा सुधारने के लिए सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन, तकनीकी साधन और उचित मूल्य मिलना आवश्यक है।

\[ \boxed{किसानों की समस्याओं का समाधान ही राष्ट्र की उन्नति है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
किसानों की दशा सुधारना भारत की आर्थिक प्रगति का आधार है।
\end{quicktipbox Quick Tip: किसानों की दशा सुधारना भारत की आर्थिक प्रगति का आधार है।


Question 42:

(ख) व्यावसायिक शिक्षा के विविध आयाम

Correct Answer:
View Solution

आधुनिक युग में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि रोजगार भी है। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। इससे आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है। भारत जैसे देश में व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार बेरोजगारी को दूर करने में सहायक है।

\[ \boxed{व्यावसायिक शिक्षा आधुनिक भारत की आवश्यकता है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
व्यावसायिक शिक्षा से बेरोजगारी घटेगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
\end{quicktipbox Quick Tip: व्यावसायिक शिक्षा से बेरोजगारी घटेगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।


Question 43:

(ग) पर्यावरण प्रदूषण के कारण

Correct Answer:
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पर्यावरण प्रदूषण आज एक गंभीर समस्या है। इसका मुख्य कारण औद्योगिकीकरण, वाहन धुआँ, वृक्षों की कटाई, रासायनिक पदार्थों का प्रयोग और जनसंख्या वृद्धि है। वायु, जल, ध्वनि और भूमि प्रदूषण से मानव जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसका समाधान वृक्षारोपण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और जनजागरूकता से ही संभव है।

\[ \boxed{स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
प्रदूषण को रोकना हर नागरिक का कर्तव्य है।
\end{quicktipbox Quick Tip: प्रदूषण को रोकना हर नागरिक का कर्तव्य है।


Question 44:

(घ) जनसंख्या वृद्धि की भयावह स्थिति

Correct Answer:
View Solution

भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन, जनजागरूकता और शिक्षा पर बल देना आवश्यक है। तभी संतुलित विकास संभव होगा।

\[ \boxed{जनसंख्या नियंत्रण ही समृद्धि की कुंजी है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
परिवार नियोजन अपनाना हर नागरिक का दायित्व है।
\end{quicktipbox Quick Tip: परिवार नियोजन अपनाना हर नागरिक का दायित्व है।


Question 45:

(ङ) राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त

Correct Answer:
View Solution

मैथिलीशरण गुप्त हिंदी के राष्ट्रकवि कहलाते हैं। उनका जन्म 1886 में झाँसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक घटनाओं का सुंदर चित्रण है। ‘‘भारत-भारती’’, ‘‘साकेत’’ और ‘‘जयद्रथ वध’’ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्होंने खड़ीबोली हिंदी को काव्य भाषा बनाकर हिंदी साहित्य को नई दिशा दी।

\[ \boxed{गुप्त जी की कविता राष्ट्रप्रेम और जनजागरण का प्रतीक है।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य राष्ट्रीय चेतना का अमूल्य स्रोत है।
\end{quicktipbox Quick Tip: मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य राष्ट्रीय चेतना का अमूल्य स्रोत है।


Question 46:

निम्नलिखित शब्दों का संधि–विच्छेद कीजिए और सही विकल्प चुनिए।


% Question text
(i) ‘उज्ज्वल’ का संधि–विच्छेद है –

Correct Answer: (स) \(\, उष् + ज्वल \)
View Solution

‘‘उज्ज्वल’’ शब्द ‘‘उष्’’ (जलना) और ‘‘ज्वल’’ (प्रज्वलित होना) से बना है। यहाँ विसर्ग संधि होती है, जिससे ‘‘उज्ज्वल’’ रूप प्राप्त होता है।

\[ \boxed{अर्थ – अत्यन्त चमकदार, दीप्तिमान।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘उज्ज्वल’’ में विसर्ग संधि है। याद रखें – ‘‘उष् + ज्वल = उज्ज्वल’’।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘उज्ज्वल’’ में विसर्ग संधि है। याद रखें – ‘‘उष् + ज्वल = उज्ज्वल’’।


Question 47:

(ii) ‘सन्ध्याः’ का संधि–विच्छेद होगा –

Correct Answer: (स) \(\, सत् + धा \)
View Solution

‘‘सन्ध्या’’ शब्द ‘‘सत्’’ और ‘‘धा’’ से मिलकर बना है। इसमें यण् संधि होती है। संध्या का अर्थ दिन और रात के बीच का समय है।

\[ \boxed{अर्थ – संधिकाल (दिन और रात के मिलने का समय)} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘सन्ध्या’’ = सत् + धा (यण् संधि का उदाहरण)।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘सन्ध्या’’ = सत् + धा (यण् संधि का उदाहरण)।


Question 48:

(iii) ‘कश्चित्’ का संधि रूप होगा –

Correct Answer: (अ) \(\, कः + चित् = कश्चित् \)
View Solution

‘‘कश्चित्’’ = कः + चित्। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है। यहाँ ‘‘ः’’ के बाद ‘‘च’’ आने से ‘‘कश्चित्’’ रूप बनता है। इसका अर्थ है ‘‘कोई’’।

\[ \boxed{अर्थ – कोई एक व्यक्ति या वस्तु।} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
‘‘कः + चित् = कश्चित्’’ (विसर्ग संधि)।
\end{quicktipbox Quick Tip: ‘‘कः + चित् = कश्चित्’’ (विसर्ग संधि)।


Question 49:

निम्नलिखित में से किसी एक शब्द का विग्रह करके उसके समास का नाम लिखिए।


(i) कृष्णसारः

(ii) अनुरूपम्

(iii) यमलोकः

Correct Answer:
View Solution

(i) कृष्णसारः
विग्रह – कृष्णः इव सारः = कृष्णसारः।
यह उपमान उपमेय का संबंध है। \[ \boxed{समास भेद – उपमान उपमेय (तत्पुरुष समास)} \]


(ii) अनुरूपम्
विग्रह – अनुगतः रूपम् यस्य सः = अनुरूपम्।
यहाँ विशेषण और विशेष्य का संबंध है। \[ \boxed{समास भेद – कर्मधारय समास} \]


(iii) यमलोकः
विग्रह – यमस्य लोकः = यमलोकः।
यहाँ षष्ठी विभक्ति का लोप हुआ है। \[ \boxed{समास भेद – षष्ठी तत्पुरुष समास} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
समास पहचानने का सरल तरीका है – पहले विग्रह कीजिए, फिर देखें कौन-सा विभक्ति लुप्त हुई है।
\end{quicktipbox Quick Tip: समास पहचानने का सरल तरीका है – पहले विग्रह कीजिए, फिर देखें कौन-सा विभक्ति लुप्त हुई है।


Question 50:

निम्नलिखित में से किसी एक शब्द के धातु एवं प्रत्यय का योग स्पष्ट कीजिए –
(i) कवितम् \quad (ii) कृपा \quad (iii) गन्तव्यः

Correct Answer:
View Solution

(i) कवितम् – धातु ‘‘कु’’ + क्त (प्रत्यय) = कवितम्।
अर्थ – बनाया गया काव्य।

(ii) कृपा – धातु ‘‘कृ’’ (करना) + घञ् (प्रत्यय) = कृपा।
अर्थ – दया करना।

(iii) गन्तव्यः – धातु ‘‘गम्’’ (जाना) + तव्यत् (प्रत्यय) = गन्तव्यः।
अर्थ – जहाँ जाना उचित है / जाना योग्य।

\[ \boxed{सही उदाहरण – गम् + तव्यत् = गन्तव्यः} \]


% Quicktip
\begin{quicktipbox
धातु से जब प्रत्यय जुड़ता है तो उससे अर्थपूर्ण शब्द का निर्माण होता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: धातु से जब प्रत्यय जुड़ता है तो उससे अर्थपूर्ण शब्द का निर्माण होता है।


Question 51:

निम्नलिखित में से किसी एक शब्द में प्रत्यय लिखिए –
(i) गृहीत्वा \quad (ii) कार्यम् \quad (iii) दर्शनीयः

Correct Answer:
View Solution

(i) गृहीत्वा – धातु ‘‘ग्रह्’’ + क्त्वा (प्रत्यय) = गृहीत्वा।
अर्थ – ग्रहण करके।

(ii) कार्यम् – धातु ‘‘कृ’’ + \underline{य (प्रत्यय) = कार्यम्।
अर्थ – करने योग्य।

(iii) दर्शनीयः – धातु ‘‘दृश्’’ + \underline{णीय (प्रत्यय) = दर्शनीयः।
अर्थ – जिसे देखना उचित हो।

\[ \boxed{उदाहरण – दृश् + णीय = दर्शनीयः \]


% quicktip
\begin{quicktipbox
संस्कृत शब्दों में प्रत्यय जोड़ने से उनका अर्थ विशेष रूप से निर्धारित हो जाता है।
\end{quicktipbox Quick Tip: संस्कृत शब्दों में प्रत्यय जोड़ने से उनका अर्थ विशेष रूप से निर्धारित हो जाता है।


Question 52:

रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा तत्सम्बन्धी नियम का उल्लेख कीजिए –

(i) कृष्णं पश्यति। \quad गावः चरन्ति।
(ii) पाणिना लिखति। \quad अग्निं जुहोति।
(iii) वृक्षात् फलानि पतन्ति।

Correct Answer:
View Solution

(i) कृष्णं पश्यति।
‘‘कृष्णं’’ शब्द द्वितीया विभक्ति (एकवचन) में है।
नियम – कर्तृकर्मणोर्द्वितीया – कर्ता और कर्म के लिए द्वितीया विभक्ति होती है।
\[ \boxed{कृष्णं = द्वितीया विभक्ति, कर्म कारक} \]


(ii) पाणिना लिखति।
‘‘पाणिना’’ शब्द तृतीया विभक्ति (एकवचन) में है।
नियम – करण करणाय तृतीया – जिससे कार्य संपन्न होता है, उसके लिए तृतीया विभक्ति।
\[ \boxed{पाणिना = तृतीया विभक्ति, करण कारक} \]


(iii) वृक्षात् फलानि पतन्ति।
‘‘वृक्षात्’’ शब्द पञ्चमी विभक्ति (एकवचन) में है।
नियम – अपादाने पञ्चमी – जहाँ से गमन होता है, उसके लिए पञ्चमी विभक्ति।
\[ \boxed{वृक्षात् = पञ्चमी विभक्ति, अपादान कारक} \]


% quicktip
\begin{quicktipbox
विभक्ति पहचानने के लिए हमेशा पद की समाप्ति (अन्त्याक्षर) और उसका कारक देखें।
\end{quicktipbox Quick Tip: विभक्ति पहचानने के लिए हमेशा पद की समाप्ति (अन्त्याक्षर) और उसका कारक देखें।


Question 53:

(क) असामाजिक तत्वों के प्रवेश से क्षेत्र में अशांति फैलने की आशंका को देखते हुए क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को प्रार्थना पत्र लिखिए।

Correct Answer:
View Solution

N/A Quick Tip: पत्र लिखते समय विषय और निवेदन स्पष्ट व संक्षिप्त लिखना चाहिए।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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