
UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2026 with Solution PDF is available for download here. The UP Board Class 12 Hindi exam was conducted on 18th February, 2026 from 8:30 AM – 11:45 AM. The question paper consists of a 70-mark theory paper (50 marks descriptive, 20 marks MCQs.
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| UP Board Class 12 Hindi Question Paper 2026 | Download PDF | Check Solutions |

'ध्रुवस्वामिनी' गद्य-विधा की रचना है
Step 1: Understanding the Concept:
हिन्दी साहित्य में विभिन्न 'गद्य-विधाएँ' होती हैं जैसे उपन्यास, नाटक, कहानी आदि। किसी रचना की श्रेणी उसके लेखन की शैली और मंचन की योग्यता के आधार पर तय की जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
'ध्रुवस्वामिनी' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक **नाटक** है। यह उनके तीन सर्वश्रेष्ठ नाटकों (स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त और ध्रुवस्वामिनी) में से एक माना जाता है। इसमें गुप्त वंश की पृष्ठभूमि के माध्यम से स्त्री के अधिकार और पुनर्विवाह जैसे विषयों को उठाया गया है।
Step 3: Final Answer:
'ध्रुवस्वामिनी' नाटक विधा की रचना है। Quick Tip: जयशंकर प्रसाद को हिन्दी का "सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटककार" माना जाता है। उनके अधिकांश नाटक गुप्त और मौर्य वंश के इतिहास पर आधारित हैं।
'त्यागपत्र' उपन्यास के लेखक हैं
Step 1: Understanding the Concept:
हिन्दी उपन्यास साहित्य में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का अपना एक विशेष महत्व है, जहाँ बाहरी घटनाओं के बजाय पात्रों के मन के द्वंद्व को अधिक महत्व दिया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
'त्यागपत्र' उपन्यास के लेखक **जैनेन्द्र कुमार** हैं। यह हिन्दी साहित्य का एक अत्यंत प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक उपन्यास है। इसमें 'मृणाल' नामक एक पात्र की पीड़ा और उसके सामाजिक-नैतिक संघर्ष का चित्रण किया गया है।
Step 3: Final Answer:
'त्यागपत्र' के लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं। Quick Tip: जैनेन्द्र कुमार को हिन्दी साहित्य में "मनोवैज्ञानिक उपन्यास विधा" का प्रवर्तक माना जाता है।
'वसुधा' पत्रिका के सम्पादक हैं
Step 1: Understanding the Concept:
पत्रिकाओं ने हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार और लेखकों को मंच प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाई है। सम्पादक वह व्यक्ति होता है जो पत्रिका के स्वरूप और उसमें छपने वाली सामग्री का चयन करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
'वसुधा' पत्रिका का सम्पादन प्रसिद्ध व्यंग्यकार **हरिशंकर परसाई** ने किया था। यह जबलपुर (मध्य प्रदेश) से प्रकाशित होने वाली एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका थी, जिसने प्रगतिशील विचारों और व्यंग्य लेखन को बहुत बढ़ावा दिया।
Step 3: Final Answer:
'वसुधा' पत्रिका के सम्पादक हरिशंकर परसाई हैं। Quick Tip: हरिशंकर परसाई आधुनिक हिन्दी साहित्य के सबसे बड़े व्यंग्यकार माने जाते हैं।
राहुल सांकृत्यायन की रचना है
Step 1: Understanding the Concept:
हिन्दी साहित्य में यात्रा-वृत्तांत (Travelogue) लिखने की परंपरा में राहुल सांकृत्यायन का नाम सर्वोपरि है। उन्होंने दुनिया भर की यात्रा की और उसे साहित्य का हिस्सा बनाया।
Step 2: Detailed Explanation:
राहुल सांकृत्यायन की प्रसिद्ध रचना **'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा'** है। यह उनकी घुमक्कड़ी (यात्रा) के दर्शन को स्पष्ट करती है। अन्य विकल्पों में 'परीक्षा गुरु' लाला श्रीनिवास दास का उपन्यास है और 'संयोगिता स्वयंवर' लाला श्रीनिवास दास का नाटक है।
Step 3: Final Answer:
राहुल सांकृत्यायन की रचना 'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा' है। Quick Tip: राहुल सांकृत्यायन को "महापंडित" कहा जाता है और उन्हें आधुनिक हिन्दी यात्रा-वृत्तांत का पितामह माना जाता है।
'मेरे निबंध' किसकी रचना है?
Step 1: Understanding the Concept:
निबंध वह गद्य रचना है जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने स्वतंत्र विचार प्रस्तुत करता है। 'मेरे निबंध' एक निबंध संग्रह है।
Step 2: Detailed Explanation:
**बाबू गुलाब राय** एक प्रसिद्ध आलोचक और निबंधकार थे। 'मेरे निबंध' उन्हीं का एक प्रसिद्ध संकलन है। उनके निबंधों में हास्य, व्यंग्य और वैचारिकता का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।
Step 3: Final Answer:
'मेरे निबंध' बाबू गुलाब राय की रचना है। Quick Tip: बाबू गुलाब राय की आत्मकथा का नाम "मेरी असफलताएं" है, जो कि विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक और लोकप्रिय रचना है।
निम्नलिखित में से तारसप्तक के कवि हैं
Step 1: Understanding the Concept:
'तारसप्तक' (Taar Saptak) हिन्दी साहित्य के 'प्रयोगवाद' (Pr प्रयोगवाद) का प्रस्थान बिंदु माना जाता है। इसका संपादन अज्ञेय (Agyeya) ने 1943 में किया था, जिसमें सात कवियों की रचनाएँ संकलित थीं।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रथम तारसप्तक (1943) के सात कवि थे: अज्ञेय, गजानन माधव 'मुक्तिबोध', नेमिचंद्र जैन, भारतभूषण अग्रवाल, प्रभाकर माचवे, गिरजाकुमार माथुर और **रामविलास शर्मा**। भवानी प्रसाद मिश्र दूसरे सप्तक के कवि हैं, जबकि शमशेर बहादुर सिंह भी दूसरे सप्तक से संबंधित हैं। सुमित्रानंदन पंत छायावादी कवि हैं।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में रामविलास शर्मा (विकल्प i) तारसप्तक के कवि हैं। Quick Tip: तारसप्तक के कवियों को याद रखने का सूत्र (Mnemonic) है: "अमुने भप्रगिरा" (अज्ञेय, मुक्तिबोध, नेमिचंद्र, भारतभूषण, प्रभाकर, गिरजाकुमार, रामविलास)।
'अब्र' उपनाम से उर्दू में गजलों की रचना की
Step 1: Understanding the Concept:
हिन्दी साहित्य के 'भारतेन्दु मंडल' के कई लेखक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और वे हिन्दी के साथ-साथ उर्दू और संस्कृत में भी उपनामों से रचनाएँ करते थे।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतेन्दु मंडल के प्रमुख लेखक **प्रताप नारायण मिश्र** ने उर्दू में 'अब्र' उपनाम से रचनाएँ की थीं। इसी प्रकार, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र 'रसा' उपनाम से उर्दू में कविताएँ लिखते थे। 'अब्र' का अर्थ 'बादल' होता है।
Step 3: Final Answer:
'अब्र' उपनाम से उर्दू में रचनाएँ प्रताप नारायण मिश्र ने की थीं। Quick Tip: प्रताप नारायण मिश्र ने "ब्राह्मण" पत्रिका का संपादन भी किया था और वे अपनी "हमारो उत्तम भारत देश" जैसी पंक्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
'यामा' के रचयिता हैं
Step 1: Understanding the Concept:
'यामा' हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है, जो छायावाद की प्रमुख कवयित्री के गीतों का संग्रह है। इस रचना के लिए उन्हें साहित्य का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ था।
Step 2: Detailed Explanation:
'यामा' **महादेवी वर्मा** का एक काव्य संग्रह है जिसमें उनके चार कविता संग्रहों (नीहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत) को संकलित किया गया है। महादेवी वर्मा को इस महान कृति के लिए 1982 में **'ज्ञानपीठ पुरस्कार'** से सम्मानित किया गया था।
Step 3: Final Answer:
'यामा' की रचयिता महादेवी वर्मा हैं। Quick Tip: महादेवी वर्मा को "आधुनिक मीरा" के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि उनके काव्य में वेदना और विरह की प्रधानता है।
'अनामिका' किसकी रचना है?
Step 1: Understanding the Concept:
छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक 'निराला' ने हिन्दी कविता को छंदों के बंधन से मुक्त किया। 'अनामिका' उनके काव्य विकास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
Step 2: Detailed Explanation:
'अनामिका' **सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'** का कविता संग्रह है। इसके दो संस्करण प्रकाशित हुए थे (1923 और 1938)। दूसरे संस्करण में 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्तिपूजा' जैसी प्रसिद्ध लंबी कविताएँ शामिल थीं।
Step 3: Final Answer:
'अनामिका' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की रचना है। Quick Tip: निराला को "मुक्त छंद का प्रवर्तक" माना जाता है। उनकी प्रसिद्ध कविता "जुही की कली" इसी संग्रह से जुड़ी चर्चाओं में रहती है।
'मैंने उसको जब-जब देखा - लोहा देखा' पंक्ति के रचयिता हैं
Step 1: Understanding the Concept:
यह पंक्ति 'प्रगतिवाद' की चेतना से ओत-प्रोत है। इसमें सामान्य जन और श्रमिक के संघर्ष को 'लोहे' के प्रतीक के माध्यम से दर्शाया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
यह प्रसिद्ध पंक्ति **केदारनाथ अग्रवाल** की कविता 'लोहा' से ली गई है। केदारनाथ अग्रवाल प्रगतिशील काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में प्रकृति और आम आदमी के संघर्ष का जीवंत चित्रण किया है। पूर्ण पंक्ति है: "मैंने उसको जब-जब देखा लोहा देखा, लोहा जैसा तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा..."।
Step 3: Final Answer:
इस पंक्ति के रचयिता केदारनाथ अग्रवाल हैं। Quick Tip: केदारनाथ अग्रवाल को "केन का कवि" भी कहा जाता है और उन्हें 'अपूर्वा' काव्य संग्रह के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक के नाम लिखिए।
(ख) राष्ट्र का तीसरा अंग क्या है?
(ग) जन का मस्तिष्क क्या है?
(घ) राष्ट्र की वृद्धि किस प्रकार सम्भव है?
(ङ) राष्ट्र के समग्र रूप में किन चीजों का महत्वपूर्ण स्थान है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह गद्यांश 'राष्ट्र' के निर्माण के अनिवार्य तत्वों पर आधारित है। लेखक के अनुसार भूमि और जन के बाद 'संस्कृति' ही वह तत्व है जो किसी राष्ट्र को जीवंतता और पहचान प्रदान करती है। संस्कृति के बिना राष्ट्र की कल्पना बिना मस्तक के शरीर के समान है।
Step 2: Detailed Explanation:
दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
(क) संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'राष्ट्र का स्वरूप' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हैं।
(ख) राष्ट्र का तीसरा महत्वपूर्ण अंग जन की संस्कृति है।
(ग) लेखक के अनुसार संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है।
(घ) राष्ट्र की वृद्धि संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही सम्भव है।
(ङ) राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि, जन और संस्कृति—इन तीनों का महत्वपूर्ण स्थान है।
Step 3: Final Answer:
राष्ट्र का स्वरूप भूमि, जन और संस्कृति के समन्वय से बनता है, जिसमें संस्कृति को राष्ट्र का 'मस्तिष्क' कहा गया है। इसके लेखक डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हैं।
Quick Tip: बोर्ड परीक्षा में संदर्भ लिखते समय लेखक का नाम और पाठ का शीर्षक हमेशा रेखांकित (Underline) करें, इससे उत्तर प्रभावशाली दिखता है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक के नाम लिखिए।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ग) भाषा किसका अटूट अंग है?
(घ) 'उद्भूत' और 'परम्परागत' शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ङ) नयी सांस्कृतिक हलचलें कैसे उत्पन्न होती हैं?
Step 1: Understanding the Concept:
यह गद्यांश भाषा और संस्कृति के अटूट संबंध को दर्शाता है। लेखक के अनुसार संस्कृति परिवर्तनशील है और उस परिवर्तन को व्यक्त करने के लिए भाषा का आधुनिक होना अनिवार्य है।
Step 2: Detailed Explanation:
दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
(क) संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश 'भाषा और आधुनिकता' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक जी. सुंदर रेड्डी हैं।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक का कथन है कि भाषा संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। जब संस्कृति में नए विचार या बदलाव आते हैं, तो पुरानी शब्दावली उन्हें व्यक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं होती। इसलिए भाषा को नए शब्दों और मुहावरों के माध्यम से जीवंत और आधुनिक बनाना आवश्यक है।
(ग) भाषा संस्कृति का एक अटूट अंग है।
(घ) शब्दार्थ:
- उद्भूत: उत्पन्न हुआ।
- परम्परागत: जो परम्परा से चला आ रहा हो।
(ङ) नयी सांस्कृतिक हलचलें सांस्कृतिक विकास और वैचारिक परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होती हैं।
Step 3: Final Answer:
भाषा संस्कृति का वाहक है और सांस्कृतिक विकास के साथ भाषा में नए प्रयोगों का समावेश ही उसकी आधुनिकता है। इसके लेखक जी. सुंदर रेड्डी हैं।
Quick Tip: 'भाषा और आधुनिकता' पाठ यह संदेश देता है कि भाषा को जड़ नहीं होना चाहिए; उसे नए वैज्ञानिक और सांस्कृतिक शब्दों को अपनाते रहना चाहिए।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
(क) प्रस्तुत पद्यांश के पाठ और रचयिता का नाम लिखिए।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ग) प्रस्तुत पद्यांश किस भाषा में लिखा गया है?
(घ) 'प्रभुता' और 'सनेह' शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ङ) नायिका किस बात में प्रभुता नहीं मानती है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह पद्यांश प्रेम की विलक्षण स्थिति का वर्णन करता है। इसमें एक नायिका अपने परदेस जाने वाले प्रियतम से अपनी अंतर्दशा व्यक्त कर रही है। वह इस द्वंद्व में है कि यदि वह उन्हें रोकती है तो अमंगल होगा और यदि नहीं रोकती तो प्रेम का अंत हो जाएगा।
Step 2: Detailed Explanation:
दिए गए पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
(क) संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के 'प्रेम माधुरी' शीर्षक से उद्धृत है। इसके रचयिता भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या: नायिका कहती है कि हे प्रिय! यदि मैं आपको रोकती हूँ तो टोकने के कारण अमंगल होगा, और यदि मैं आपसे यह कहूँ कि "मत जाओ" तो यह प्रेम का विनाश होगा (क्योंकि प्रेम में आदेश नहीं दिया जाता)। यदि मैं आपसे कहूँ कि "जैसा आपका मन करे वैसा करें" तो इसमें मेरा आप पर कोई अधिकार या प्रेम सिद्ध नहीं होता।
(ग) प्रस्तुत पद्यांश ब्रजभाषा में लिखा गया है।
(घ) शब्दार्थ:
- प्रभुता: प्रभुत्व, अधिकार या आज्ञा देना।
- सनेह: स्नेह या प्रेम।
(ङ) नायिका प्रियतम को "मत जाओ" कहने में अपनी प्रभुता (अधिकार जताना) नहीं मानती है, क्योंकि वह प्रेम में आज्ञा देना अनुचित समझती है।
Step 3: Final Answer:
इस पद्यांश में भारतेंदु जी ने प्रेम की अनन्य स्थिति और नायिका के मानसिक द्वंद्व का ब्रजभाषा में सुंदर चित्रण किया है।
Quick Tip: भारतेंदु हरिश्चंद्र को "आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह" कहा जाता है। उन्होंने ब्रजभाषा और खड़ी बोली दोनों में उत्कृष्ट साहित्य सृजन किया है।
(क) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ और रचयिता का नाम लिखिए।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ग) इस अवतरण में कवि किसकी गंभीर गर्जना के समूह में बात कर रहा है?
(घ) 'बेकल' और 'रेर' शब्दों के अर्थ लिखिए।
(ङ) इस पद्यांश में कवि ने किस प्रसंग का वर्णन किया है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह पद्यांश प्रकृति के रौद्र और सुंदर रूप (बादलों के आगमन) के प्रति कवि के उत्साह को दर्शाता है। बादल यहाँ विप्लव (क्रांति) और नवजीवन के प्रतीक के रूप में चित्रित हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
दिए गए पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
(क) संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश 'बादल राग' कविता से लिया गया है। इसके रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हैं।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि कहते हैं कि बादलों की गर्जना और उनके उमड़ने को देखकर मेरा हृदय नाचने लगता है। ऐसा मन करता है कि मैं भी बादलों के साथ उसी वेग से बहने लगूँ और आकाश की असीमता में विलीन हो जाऊँ।
(ग) इस अवतरण में कवि बादलों की गंभीर गर्जना के समूह में बात कर रहा है।
(घ) शब्दार्थ:
- बेकल: व्याकुल या बेचैन।
- गैर: गर्जना या शोर (यहाँ बादलों की भीषण आवाज के संदर्भ में)।
(ङ) इस पद्यांश में कवि ने वर्षा ऋतु के आगमन और बादलों के विप्लवकारी (क्रांतिकारी) स्वरूप का वर्णन किया है।
Step 3: Final Answer:
'बादल राग' कविता में निराला जी ने बादलों को क्रांति के दूत के रूप में संबोधित किया है जो शोषितों के लिए नवजीवन लेकर आते हैं।
Quick Tip: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं और अपनी ओजस्वी वाणी व मुक्त छंद के प्रयोग के लिए विख्यात हैं।
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए: (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(i) पं० दीनदयाल उपाध्याय (ii) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' (iii) वासुदेवशरण अग्रवाल
Step 1: Understanding the Concept:
जीवन-परिचय के अंतर्गत लेखक के जन्म, शिक्षा, साहित्यिक योगदान और उनकी प्रमुख रचनाओं का संक्षिप्त विवरण दिया जाता है। यहाँ डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल का परिचय प्रस्तुत है।
Step 2: Detailed Explanation:
डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल (1904-1966):
भारतीय संस्कृति और पुरातत्व के विद्वान डॉ० अग्रवाल का जन्म मेरठ जिले के खेड़ा ग्राम में हुआ था। इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एम.ए. और लखनऊ विश्वविद्यालय से 'पाणिनीकालीन भारत' पर पी-एच.डी. की। इन्होंने मुख्य रूप से शोध, संपादन और निबंध लेखन के क्षेत्र में कार्य किया। इनकी भाषा शुद्ध और परिमार्जित खड़ी बोली है।
प्रमुख कृतियाँ:
निबंध संग्रह: पृथ्वी-पुत्र, कल्पवृक्ष, भारत की एकता, कला और संस्कृति।
शोध: पाणिनीकालीन भारत।
संपादन: जायसीकृत 'पद्मावत' की संजीवनी व्याख्या।
Step 3: Final Answer:
डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल राष्ट्रप्रेमी लेखक थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय गौरव का पुनः अन्वेषण किया। 'राष्ट्र का स्वरूप' उनका अत्यंत प्रसिद्ध निबंध है।
Quick Tip: परीक्षा में जीवन-परिचय लिखते समय जन्म और मृत्यु की तिथि को काले पेन (Black Pen) से लिखें ताकि वे स्पष्ट रूप से उभर कर दिखें।
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डालिए: (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(i) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (ii) जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' (iii) सुमित्रानंदन पंत
Step 1: Understanding the Concept:
कवि परिचय में कवि की काव्यगत विशेषताओं और उनके द्वारा रचित काव्य-संग्रहों का उल्लेख किया जाता है। यहाँ सुमित्रानंदन पंत का परिचय प्रस्तुत है।
Step 2: Detailed Explanation:
सुमित्रानंदन पंत (1900-1977):
प्रकृति के सुकुमार कवि पंत जी का जन्म अल्मोड़ा के कौसानी में हुआ था। ये छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई। इनके काव्य में प्रकृति चित्रण, मानवतावाद और प्रगतिशीलता का अद्भुत समन्वय मिलता है। 'चिदम्बरा' के लिए इन्हें 'भारतीय ज्ञानपीठ' पुरस्कार मिला था।
प्रमुख कृतियाँ:
काव्य संग्रह: वीणा, पल्लव, गुंजन, युगांत, ग्राम्या, स्वर्ण-किरण और चिदम्बरा।
महाकाव्य: लोकायतन।
Step 3: Final Answer:
सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के अनन्य प्रकृति-प्रेमी और संवेदनशील कवि थे। उनका काव्य 'शब्द-शिल्प' और कोमल कल्पनाओं के लिए जाना जाता है।
Quick Tip: सुमित्रानंदन पंत को "प्रकृति का सुकुमार कवि" कहा जाता है; यह उपाधि उनके उत्तर में शामिल करना प्रभावी होता है।
'खून का रिश्ता' कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
अथवा
'लाटी' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
Step 1: Understanding the Concept:
चरित्र-चित्रण में पात्र की विशेषताओं का विश्लेषण किया जाता है। 'खून का रिश्ता' कहानी में **बाबूजी (मंगलसेन)** प्रमुख पात्र हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
बाबूजी (मंगलसेन) का चरित्र-चित्रण:
बाबूजी कहानी के सबसे जीवंत पात्र हैं। उनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
स्वाभिमानी: वे निर्धन होने के बावजूद भी अपने आत्म-सम्मान के साथ समझौता नहीं करते।
सामाजिक अपमान के शिकार: परिवार में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे पात्र हैं।
पारिवारिक लगाव: वे परिवार के हर सदस्य के प्रति स्नेह रखते हैं, भले ही उन्हें उपेक्षित किया जाए।
मार्मिक अंत: कहानी के अंत में उनकी पीड़ा पाठकों को भावुक कर देती है।
अथवा ('लाटी' कहानी का उद्देश्य):
शिवानी द्वारा रचित 'लाटी' कहानी का मुख्य उद्देश्य एक नारी के अटूट प्रेम, त्याग और विषम परिस्थितियों में उसके धैर्य को दर्शाना है। कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम केवल दैहिक नहीं बल्कि मानसिक और आत्मिक होता है। कैप्टन प्रभात और लाटी का प्रेम इस बात का प्रतीक है।
Step 3: Final Answer:
'खून का रिश्ता' सामाजिक उपेक्षा और रिश्तों की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जबकि 'लाटी' प्रेम की पराकाष्ठा और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है।
Quick Tip: चरित्र-चित्रण लिखते समय मुख्य विशेषताओं को 'पॉइंट्स' (Points) में लिखने से उत्तर अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट प्रतीत होता है।
स्वपदित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर दीजिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(क) 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के अंतिम सर्ग की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'कुन्ती' की चरित्र-चित्रण कीजिए।
(ख) 'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
(ग) 'आलोक-वृत्त' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा
'आलोक-वृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(घ) 'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
(ङ) 'त्यागपथी' खण्डकाव्य की वह घटना जो आपको प्रेरणादायी लगी हो, उसका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
'त्यागपथी' खण्डकाव्य के प्रमुख नारी पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
(च) 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर 'युधिष्ठिर' का चरित्रांकन कीजिए।
अथवा
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
खण्डकाव्य किसी महाकाव्य का वह अंश होता है जिसमें नायक के जीवन की किसी एक घटना या चारित्रिक विशेषता का प्रभावशाली वर्णन किया जाता है। यहाँ हम उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण खण्डकाव्य **'त्यागपथी'** और **'आलोक-वृत्त'** के उत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
(ङ) 'त्यागपथी' के प्रमुख नारी पात्र (राज्यश्री) का चरित्र-चित्रण:
रामकुमार वर्मा द्वारा रचित इस खण्डकाव्य की नायिका राज्यश्री हैं। उनकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
ममतामयी और आदर्श नारी: राज्यश्री एक आदर्श पुत्री, पत्नी और बहन हैं। पति की मृत्यु के बाद वे सती होने का प्रयास करती हैं, जो उनके अटूट प्रेम को दर्शाता है।
देशभक्त और परोपकारी: हर्षवर्धन के समझाने पर वे संन्यास का विचार त्यागकर लोक-कल्याण के मार्ग पर चलती हैं। वे अपने दुखों को भूलकर प्रजा की सेवा में लीन हो जाती हैं।
अथवा
(ग) 'आलोक-वृत्त' के आधार पर 'महात्मा गाँधी' का चरित्र-चित्रण:
गुलाब खण्डेलवाल द्वारा रचित इस खण्डकाव्य के नायक महात्मा गाँधी हैं:
सत्य और अहिंसा के प्रतीक: गाँधीजी ने पूरे विश्व को यह सिखाया कि बिना शस्त्र उठाए भी बड़े से बड़े साम्राज्य को झुकाया जा सकता है।
मानवतावादी दृष्टिकोण: वे छुआछूत, ऊंच-नीच और सांप्रदायिकता के कट्टर विरोधी थे। उन्होंने हमेशा दलितों और पिछड़ों के उद्धार के लिए कार्य किया।
Step 3: Final Answer:
खण्डकाव्य का चयन अपने जिले के अनुसार करना चाहिए। 'त्यागपथी' की राज्यश्री त्याग और सेवा की प्रतिमूर्ति हैं, वहीं 'आलोक-वृत्त' के गाँधीजी सत्य और अहिंसा के वैश्विक प्रेरणास्रोत हैं।
Quick Tip: खण्डकाव्य का उत्तर लिखते समय ध्यान रखें कि यह प्रश्न आपके जिले (District) के लिए निर्धारित काव्य पर ही आधारित होना चाहिए। अनावश्यक रूप से दूसरे खण्डकाव्य का उत्तर न लिखें।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
(क) संस्कृतस्य साहित्यं सरसं व्याकरणं च सुनिश्चितम्। तस्य गद्ये पद्ये च लालित्यं, भावबोधसामर्थ्यम्, अद्वितीयं श्रुतिमधुर्यं च वर्तते। किंबहुना, चरित्रनिर्माणार्था यादृशीं सत्प्रेरणां संस्कृतवाङ्मयं ददाति न तादृशीं किञ्चिदन्यत्। मूलभूतानां मानवीयगुणानां यादृशी विवेचना संस्कृतसाहित्ये वर्तते नान्यत्र तादृशी। दया, दानम्, शौचम्, औदार्यम्, अनसूया, क्षमा अन्ये चानेके गुणा अस्य साहित्यस्य अनुशीलनेन सञ्जायते।
अथवा
अतीते प्रथमकल्पे चतुष्पदाः सिंहं राजानमकुर्वन्। मत्स्या आनन्दमत्स्यं, शकुनयः सुवर्णहंसम्। तस्य पुनः सुवर्णराजहंसस्य दुहिता हंसपोतिका अतीव रूपवती आसीत्। स तस्यै वरमदात् यत् सा आत्मनश्चित्तरुचितं स्वामिनं वृणुयात् इति। हंसराजस्तस्यै वरं दत्त्वा हिमवति शकुनिसङ्घे संन्यपतत्। नानाप्रकारा हंसमयूरदयः शकुनिगणाः समागत्य एकस्मिन् महति पाषाणतले संन्यपतन्।
Step 1: Understanding the Concept:
संस्कृत गद्यांश का अनुवाद करते समय सबसे पहले 'सन्दर्भ' लिखा जाता है, जिसमें पाठ का नाम और पुस्तक का उल्लेख होता है। उसके बाद गद्यांश के भाव को स्पष्ट करते हुए हिन्दी अनुवाद किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत भाग में संकलित 'संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्' नामक पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद: संस्कृत का साहित्य सरस और व्याकरण सुनिश्चित है। इसके गद्य और पद्य में लालित्य (सुन्दरता), भावों को बोध कराने की शक्ति और अद्वितीय श्रवण-माधुर्य है। अधिक क्या कहें, चरित्र-निर्माण की जैसी अच्छी प्रेरणा संस्कृत साहित्य देता है, वैसी कोई अन्य (साहित्य) नहीं। मूलभूत मानवीय गुणों की जैसी विवेचना संस्कृत साहित्य में है, वैसी अन्यत्र नहीं है। दया, दान, पवित्रता, उदारता, ईर्ष्या न करना, क्षमा तथा अन्य अनेक गुण इस साहित्य के अध्ययन से उत्पन्न होते हैं।
अथवा (जातक-कथा - नृत्यजातकम):
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के संस्कृत भाग में संकलित 'जातक-कथा' पाठ के 'नृत्यजातकम' खण्ड से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद: बीते हुए समय के प्रथम कल्प में चौपायों (पशुओं) ने शेर को राजा बनाया। मछलियों ने आनन्द मछली को और पक्षियों ने सुवर्ण हंस को। उस सुवर्ण राजहंस की पुत्री 'हंसपोतिका' अत्यधिक रूपवती (सुन्दर) थी। उस (राजहंस) ने उसे वर दिया कि वह अपने मनपसंद स्वामी का चुनाव करे। हंसराज उसे वर देकर हिमालय पर पक्षियों के समूह में उतरा। नाना प्रकार के हंस, मोर आदि पक्षियों के समूह आकर एक विशाल पत्थर के तल पर इकट्ठे हो गए।
Step 3: Final Answer:
उपरोक्त दोनों गद्यांशों में से प्रथम गद्यांश संस्कृत भाषा की गौरवगाथा बताता है, जबकि दूसरा गद्यांश 'जातक कथा' के माध्यम से प्राचीन लोक कथा का वर्णन करता है।
Quick Tip: संस्कृत अनुवाद में शब्दों के अर्थों पर ध्यान दें; जैसे 'सञ्जायते' का अर्थ 'उत्पन्न होते हैं' और 'दुहिता' का अर्थ 'पुत्री' होता है। सन्दर्भ के लिए 2 अंक और अनुवाद के लिए 5 अंक निर्धारित होते हैं।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए।
(क) धीमतां कालः कथम् गच्छति?
(ख) आधुनिक जगति पञ्चशील सिद्धान्ताः किम् स्वरूपम् गृहीतवन्तः?
(ग) हिन्दू विश्वविद्यालयस्य संस्थापकः कः आसीत्?
(घ) के न्याय्यात् पथः न प्रविचलन्ति?
Step 1: Understanding the Concept:
संस्कृत प्रश्नों के उत्तर देते समय व्याकरण की शुद्धता और विभक्ति का सही प्रयोग अनिवार्य है।
Step 2: Detailed Explanation:
(क) उत्तरम्: धीमतां (विद्वानों) कालः काव्यशास्त्रविनोदेन गच्छति।
(ख) उत्तरम्: आधुनिक जगति पञ्चशील सिद्धान्ताः राष्ट्रस्य अभ्युदयाय परराष्ट्रसंबंधाय च स्वरूपम् गृहीतवन्तः।
(ग) उत्तरम्: हिन्दू विश्वविद्यालयस्य संस्थापकः महामना मदनमोहन मालवीयः आसीत्।
(घ) उत्तरम्: धीराः (धैर्यवान् पुरुषाः) न्याय्यात् पथः न प्रविचलन्ति।
Step 3: Final Answer:
विद्वानों का समय काव्य चर्चा में बीतता है, पञ्चशील सिद्धांत राष्ट्रों के मैत्री संबंध के लिए हैं, मालवीय जी विश्वविद्यालय के संस्थापक थे और धैर्यवान लोग न्याय के मार्ग से विचलित नहीं होते।
Quick Tip: संस्कृत में उत्तर देते समय प्रश्नवाचक शब्द (जैसे- कः, कथम्, के) के स्थान पर उत्तर वाला शब्द लिखकर पूर्ण वाक्य लिखें।
(क) 'हास्य' रस अथवा 'करुण' रस की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
(ख) 'उपमा' (Prompted: उमग) अलंकार अथवा 'श्लेष' अलंकार की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
(ग) 'सोरठा' छन्द अथवा 'वसन्ततिलका' छन्द की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
काव्यशास्त्र में रस, अलंकार और छन्द काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। रस आनन्द प्रदान करता है, अलंकार आभूषण का कार्य करता है और छन्द लयबद्धता लाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
(क) हास्य रस:
परिभाषा: किसी व्यक्ति की विकृत वेशभूषा, वाणी या चेष्टा को देखकर हृदय में जो 'हास' नामक स्थायी भाव जाग्रत होता है, वही विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से 'हास्य रस' कहलाता है।
उदाहरण:
"विंध्य के वासी उदासी तपोव्रतधारी महा बिनु नारि दुखारे।"
(ख) उपमा अलंकार (Prompt corrected from 'उमग'):
परिभाषा: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरे प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति से समान गुणधर्म के आधार पर की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
उदाहरण:
"पीपर पात सरिस मन डोला।"
(यहाँ मन की तुलना पीपल के पत्ते से की गई है।)
(ग) सोरठा छन्द:
परिभाषा: यह एक अर्ध-सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे का उल्टा होता है।
उदाहरण:
"जो सुमिरत सिधि होय, गन नायक करिवर वदन।
करहु अनुग्रह सोय, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥"
Step 3: Final Answer:
काव्यगत सौन्दर्य के तत्वों में हास्य रस प्रसन्नता देता है, उपमा समानता दर्शाती है और सोरठा छन्द अपनी विशिष्ट मात्राओं के लिए जाना जाता है।
Quick Tip: सोरठा और दोहे में भ्रम न हो इसके लिए याद रखें: दोहा (13, 11) और सोरठा (11, 13)। मात्राएँ गिनने का अभ्यास उत्तर को सटीक बनाता है।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए।
(क) सोशल मीडिया : वरदान या अभिशाप
(ख) जीवन और समय प्रबन्धन
(ग) वन-संरक्षण का महत्व
(घ) राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
(ङ) विश्व में हिन्दी के बढ़ते कदम।
Step 1: Understanding the Concept:
निबंध लेखन एक ऐसी कला है जिसमें किसी विषय पर अपने विचारों को क्रमबद्ध, सुगठित और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जाता है। एक अच्छे निबंध में प्रस्तावना, मुख्य विषय का विस्तार और उपसंहार का होना अनिवार्य है। यहाँ हम **'विश्व में हिन्दी के बढ़ते कदम'** विषय पर निबंध प्रस्तुत कर रहे हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
विषय: विश्व में हिन्दी के बढ़ते कदम
1. प्रस्तावना:
"निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।" भारतेंदु हरिश्चंद्र की ये पंक्तियाँ हिन्दी की महत्ता को प्रतिपादित करती हैं। आज हिन्दी केवल भारत की संपर्क भाषा नहीं, बल्कि एक वैश्विक भाषा के रूप में उभर रही है।
2. वैश्विक स्तर पर हिन्दी का विस्तार:
हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। फिजी, मॉरीशस, गयाना, सूरीनाम और नेपाल जैसे देशों में हिन्दी बहुतायत में बोली जाती है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तो हिन्दी को अपनी अदालतों की तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी है।
3. तकनीक और सोशल मीडिया की भूमिका:
डिजिटल क्रांति ने हिन्दी को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। आज गूगल, फेसबुक और यूट्यूब जैसे वैश्विक मंचों पर हिन्दी सामग्री (Content) की माँग बढ़ी है। इंटरनेट पर हिन्दी का प्रयोग करने वालों की संख्या अंग्रेजी के बराबर पहुँच रही है।
4. शिक्षा और रोजगार:
विश्व के 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। वैश्वीकरण के दौर में विदेशी कंपनियाँ भारतीय बाजार में पैठ बनाने के लिए हिन्दी भाषी विशेषज्ञों को प्राथमिकता दे रही हैं।
5. उपसंहार:
हिन्दी हमारी संस्कृति और गौरव की संवाहिका है। 10 जनवरी को मनाया जाने वाला 'विश्व हिन्दी दिवस' इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रतीक है। यदि हम अपनी भाषा का गर्व से प्रयोग करें, तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी विश्व पटल पर सर्वश्रेष्ठ भाषा के रूप में प्रतिष्ठित होगी।
Step 3: Final Answer:
उपरोक्त निबंध हिन्दी की वैश्विक स्वीकार्यता और इसके आधुनिक महत्व को दर्शाता है। अन्य विषयों पर भी इसी प्रकार बिन्दुओं (Points) के आधार पर निबंध लिखे जा सकते हैं।
Quick Tip: निबंध को प्रभावी बनाने के लिए उसमें सूक्तियों (Quotes), मुहावरों और काव्य पंक्तियों का प्रयोग करें। शब्द-सीमा का ध्यान रखते हुए लिखा गया संतुलित निबंध अच्छे अंक दिलाता है।
(i) 'निश्चयः' का सन्धि-विच्छेद है
(अ) निश् + चयः \quad (ब) नि: + चयः \quad (स) निस् + चयः \quad (द) निश + चयः
(ii) 'प्रोषति' (Prompt corrected from 'प्रोफीति') का सन्धि-विच्छेद है
(अ) प्र + ओषति \quad (ब) प्रो + ओषति \quad (स) प्रौ + ओषति \quad (द) प्र + ऊषति
(iii) 'गायति' का सन्धि-विच्छेद है
(अ) गै + अति \quad (ब) गे + अति \quad (स) गो + अति \quad (द) गा + यति
Step 1: Understanding the Concept:
सन्धि दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को कहते हैं। विसर्ग सन्धि में विसर्ग के बाद स्वर या व्यंजन आने पर परिवर्तन होता है। पररूप सन्धि 'एङि पररूपम्' सूत्र से होती है, और अयादि सन्धि 'एचोऽयवायावः' सूत्र से होती है।
Step 2: Key Formula or Approach:
निश्चयः: विसर्ग के बाद 'च' होने पर विसर्ग का 'श' हो जाता है (इचुयशानां तालु)।
प्रोषति: अकारान्त उपसर्ग के बाद 'ओ' आने पर पररूप एकादेश हो जाता है।
गायति: 'ऐ' के बाद 'अ' आने पर 'ऐ' का 'आय्' हो जाता है (\(ai + a = āy\)).
Step 3: Detailed Explanation:
(i) नि: + चयः = निश्चयः (विसर्ग का 'श' हो गया)।
(ii) प्र + ओषति = प्रोषति (पररूप सन्धि, जहाँ उपसर्ग का 'अ' बाद वाले 'ओ' में मिल जाता है)।
(iii) गै + अति = गायति (अयादि सन्धि के नियमानुसार ऐ \(\to\) आय्)।
Step 4: Final Answer:
निश्चयः का विच्छेद 'नि: + चयः', प्रोषति का 'प्र + ओषति' तथा गायति का 'गै + अति' है। Quick Tip: अयादि सन्धि को याद रखने का सरल तरीका: ए = अय्, ऐ = आय्, ओ = अव्, औ = आव्। उदाहरण: ने + अन = नयन, गै + अक = गायक।
निम्नलिखित में से किसी एक पद का विग्रह करके समास स्पष्ट कीजिए:
(i) महादेवः
(ii) नीलकमलम्
(iii) अनुरूपम्
Step 1: Understanding the Concept:
समास का अर्थ है संक्षिप्तीकरण। दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को सामासिक पद कहते हैं। विग्रह उस पद को विस्तार से लिखने की प्रक्रिया है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रश्नानुसार विग्रह और समास के नाम निम्नलिखित हैं:
\begin{table[h!]
\centering
\begin{tabular{|l|l|l|l|
\hline
क्रमांक & सामासिक पद & समास विग्रह & समास का नाम
\hline
(i) & महादेवः & महान् असौ देवः (महान है जो देव) & कर्मधारय समास
\hline
(ii) & नीलकमलम् & नीलम् कमलम् (नीला कमल) & कर्मधारय समास
\hline
(iii) & अनुरूपम् & रूपस्य योग्यम् (रूप के योग्य) & अव्ययीभाव समास
\hline
\end{tabular
\end{table
Step 3: Detailed Explanation:
- कर्मधारय: जहाँ विशेषण और विशेष्य का संबंध हो (जैसे महान देव, नीला कमल)।
- अव्ययीभाव: जहाँ पहला पद अव्यय (जैसे अनु) हो और वह प्रधान हो।
Step 4: Final Answer:
महादेवः और नीलकमलम् में कर्मधारय समास है, जबकि अनुरूपम् में अव्ययीभाव समास है। Quick Tip: यदि किसी पद का पहला शब्द 'उपसर्ग' (जैसे- अनु, प्रति, यथा, भर) हो, तो वह प्रायः \textbf{अव्ययीभाव समास} ही होता है।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों में प्रत्यय बताइए:
(i) 'खादितः' (Prompt corrected from 'खादिला') शब्द में प्रत्यय है
(अ) क्त \quad (ब) क्त्वा \quad (स) अनीयर् \quad (द) शतृ
(ii) 'गन्तव्यः' शब्द में प्रत्यय है
(अ) तव्यत् \quad (ब) क्त \quad (स) अनीयर् \quad (द) तुमुन्
(iii) 'श्रीमान्' शब्द में प्रत्यय है
(अ) क्त \quad (ब) वतुप् \quad (स) मतुप् \quad (द) इनि
Step 1: Understanding the Concept:
प्रत्यय वे शब्द या वर्ण समूह होते हैं जो धातुओं या शब्दों के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं। क्रिया में लगने वाले प्रत्यय 'कृत्' और संज्ञा शब्दों में लगने वाले प्रत्यय 'तद्धित' कहलाते हैं।
Step 2: Key Formula or Approach:
क्त प्रत्यय: भूतकाल के अर्थ में धातुओं से जुड़ता है (शेष 'त' रहता है)।
तव्यत् प्रत्यय: 'चाहिए' के अर्थ में जुड़ता है (शेष 'तव्य' रहता है)।
मतुप् प्रत्यय: 'वाला' या 'युक्त' के अर्थ में संज्ञा से जुड़ता है (शेष 'मान्' या 'वान्' रहता है)।
Step 3: Detailed Explanation:
(i) खादितः: खाद् (धातु) + क्त (प्रत्यय) = खादितः। यह निष्ठा संज्ञक प्रत्यय है।
(ii) गन्तव्यः: गम् (धातु) + तव्यत् (प्रत्यय) = गन्तव्यः। यह कृत्य प्रत्यय की श्रेणी में आता है।
(iii) श्रीमान्: श्री (शब्द) + मतुप् (प्रत्यय) = श्रीमान्। यहाँ 'श्री' से युक्त होने का भाव है।
Step 4: Final Answer:
खादितः में 'क्त', गन्तव्यः में 'तव्यत्' और श्रीमान् में 'मतुप्' प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है। Quick Tip: यदि किसी शब्द के अंत में 'मान्' या 'वान्' लगा हो, तो वहाँ प्रायः मतुप् या वतुप् प्रत्यय होता है। जैसे: बुद्धिमान्, धनवान्।
रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा सम्बन्धित नियम लिखिए:
(अ) कृष्णम् अभितः गंगा।
(ब) त्वं मया सार्धम् आपणं चल।
(स) प्रजाभ्यः स्वस्ति।
Step 1: Understanding the Concept:
विभक्ति का निर्धारण कारक चिह्नों या कुछ विशेष शब्दों (उपपद) के योग के आधार पर किया जाता है। इसे 'उपपद विभक्ति' कहते हैं।
Step 2: Key Formula or Approach:
अभितः/परितः योगे: द्वितीया विभक्ति।
सह/सार्धम् योगे: तृतीया विभक्ति।
नमः/स्वस्ति योगे: चतुर्थी विभक्ति।
Step 3: Detailed Explanation:
प्रश्नानुसार किसी एक का चयन कर विवरण निम्नलिखित है:
(अ) कृष्णम् अभितः गंगा: इसमें 'कृष्णम्' पद में द्वितीया विभक्ति है।
नियम: "अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि" सूत्र के अनुसार 'अभितः' (दोनों ओर) शब्द के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
(ब) त्वं मया सार्धम् आपणं चल: इसमें 'मया' पद में तृतीया विभक्ति है।
नियम: "सहयुक्तेऽप्रधाने" सूत्र के अनुसार सह, साकम्, सार्धम् (साथ) शब्दों के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
(स) प्रजाभ्यः स्वस्ति: इसमें 'प्रजाभ्यः' पद में चतुर्थी विभक्ति है।
नियम: "नमः स्वस्ति स्वाहा स्वधा अलंवषड्योगाच्च" सूत्र के अनुसार 'स्वस्ति' (कल्याण हो) शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
Step 4: Final Answer:
अभितः के योग में 'कृष्णम्' में द्वितीया, सार्धम् के योग में 'मया' में तृतीया तथा स्वस्ति के योग में 'प्रजाभ्यः' में चतुर्थी विभक्ति प्रयुक्त हुई है। Quick Tip: संस्कृत अनुवाद करते समय 'सह' (साथ) और 'नमः' (नमस्कार) के नियमों को विशेष रूप से याद रखें क्योंकि ये परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
मुहूर्ते (मुहल्ले) में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम को एक पत्र लिखिए।
अथवा
कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने मित्र को बधाई देते हुए पत्र लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
पत्र लेखन दो प्रकार के होते हैं: औपचारिक (Formal) और अनौपचारिक (Informal)। नगर निगम को लिखा जाने वाला पत्र 'शिकायती/औपचारिक' पत्र है, जबकि मित्र को लिखा गया पत्र 'व्यक्तिगत/अनौपचारिक' पत्र की श्रेणी में आता है।
Step 2: Detailed Explanation:
(प्रथम विकल्प: नगर निगम को पत्र)
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी,
नगर निगम, [शहर का नाम]
विषय: मुहल्ले में आवारा कुत्तों की समस्या के संबंध में।
महोदय,
मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान [मुहल्ले का नाम] में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और उससे उत्पन्न खतरे की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों से मुहल्ले में आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि बच्चों और वृद्धों का शाम के समय घर से निकलना कठिन हो गया है। ये कुत्ते राहगीरों पर झपटते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि जनहित में शीघ्र कार्रवाई करते हुए इन कुत्तों को पकड़ने या उनके उचित प्रबंधन हेतु संबंधित विभाग को आदेश देने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
[आपका नाम/निवासी गण]
दिनांक: 22 फरवरी 2026
अथवा
(द्वितीय विकल्प: मित्र को बधाई पत्र)
परीक्षा भवन,
[शहर का नाम]
दिनांक: 22 फरवरी 2026
प्रिय मित्र [मित्र का नाम],
सप्रेम नमस्ते।
आज सुबह समाचार पत्र में तुम्हारी कक्षा का परिणाम देखा। यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ कि तुमने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। तुम्हारी इस शानदार सफलता पर मेरी और मेरे परिवार की ओर से तुम्हें बहुत-बहुत बधाई!
तुम्हारी कड़ी मेहनत और लगन का ही यह सुखद परिणाम है। मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में भी तुम इसी प्रकार सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करोगे। अपनी इस जीत की खुशी में अपने माता-पिता को मेरा सादर प्रणाम कहना।
तुम्हारा प्रिय मित्र,
[आपका नाम]
Step 3: Final Answer:
शिकायती पत्र में विषय (Subject) स्पष्ट होना चाहिए, जबकि बधाई पत्र में भाषा आत्मीय और सरल होनी चाहिए। दोनों ही पत्रों का प्रारूप (Format) सही होना अंक प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।
Quick Tip: औपचारिक पत्र (जैसे नगर निगम को) लिखते समय 'विषय' को संक्षिप्त और प्रभावशाली रखें। अनौपचारिक पत्र (जैसे मित्र को) में संबोधन और अभिवादन का विशेष ध्यान रखें।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.