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Nidhi Bamnawat

| Updated On - Mar 16, 2026

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set-29/2/2) Question Paper 2026 with Solutions PDFs is available here for download. CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set-29/2/2) Paper 2026 was held on 16 March, 2026. The question paper followed the latest syllabus and exam pattern prescribed by CBSE. The examination was conducted in the first half from 10:30 AM to 1:30 PM. Students can download the official paper in PDF format for reference.

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set-29/2/2) Question Paper 2026 with Solutions PDFs

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set-29/2/2) Question Paper 2026 Download PDF Check Solutions

CBSE 2026 Class 12 HIndi Core Question Paper with Solutions

Question 1:

मैं फिर जनम लूँगा 
फिर मैं 
इसी जगह आऊँगा 
उचटती निगाहों की भीड़ में 
अभावों के बीच 
लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा 
लंगड़ाकर चलते हुए पाँवों को 
कंधा दूँगा 
गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को 
बाँहों में उठाऊँगा। 

इस समूह में 
इस अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों में 
कैसा दर्द है 
कोई नहीं सुनता ! 
पर इन आवाज़ों को
और इन कराहों को 
दुनिया सुने मैं ये चाहूँगा । 

मेरी तो आदत है 
रोशनी जहाँ भी हो
उसे खोज लाऊँगा 
कातरता, चुप्पी या चीखें, 
या हारे हुओं की खीज 
जहाँ भी मिलेगी 
उन्हें प्यार के सितार पर बजाऊँगा 
...... मैं कल फिर जनम लूँगा 
कल फिर आऊँगा । 

1(i).
कविता का वक्ता पुनर्जन्म लेने की बात क्यों कर रहा है ?

  • (A) पूर्व जन्म की इच्छाओं की पूर्ति के लिए
  • (B) सर्वहारा वर्ग को उनके अधिकार दिलाने के लिए
  • (C) मातृभूमि की शत्रुओं से रक्षा करने के लिए
  • (D) देश का पुनरुद्धार करने के लिए
Correct Answer: (B) सर्वहारा वर्ग को उनके अधिकार दिलाने के लिए
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रस्तुत कविता में कवि एक ऐसे निस्वार्थ व्यक्ति की भावना को व्यक्त कर रहा है जो समाज के शोषित और वंचित वर्ग के दुखों को दूर करने का संकल्प लेता है।

पुनर्जन्म का विचार यहाँ किसी धार्मिक विश्वास के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता की सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

कविता की पंक्तियाँ "अभावों के बीच", "क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा", और "पराजित विवशता को बाँहों में उठाऊँगा" यह स्पष्ट करती हैं कि वक्ता का मुख्य सरोकार उन लोगों से है जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं और समाज में उपेक्षित हैं।

वक्ता का लक्ष्य इन "अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों" (शोषित वर्ग) के दर्द को दुनिया के सामने लाना है।

'सर्वहारा वर्ग' वह समूह है जिसके पास उत्पादन के साधनों का अभाव होता है और जिसका शोषण किया जाता है।

अतः, वक्ता पुनः जन्म लेकर उन्हीं के बीच आना चाहता है ताकि वह उनके कष्टों को कम कर सके और उन्हें न्याय दिला सके।


Step 3: Final Answer:

अतः, सही विकल्प (B) है क्योंकि वक्ता का संपूर्ण संकल्प समाज के पीड़ित और सर्वहारा वर्ग के कल्याण हेतु समर्पित है।
Quick Tip: जब भी कविता में 'अभाव', 'कराह', 'पराजय' और 'विवशता' जैसे शब्दों का उल्लेख हो, तो वह प्रायः समाज के शोषित या सर्वहारा वर्ग की ओर संकेत करता है।


Question 2:

1(ii).
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :


  • (A) (1-ii), (2-iii), (3-i)
  • (B) (1-iii), (2-ii), (3-i)
  • (C) (1-ii), (2-i), (3-iii)
  • (D) (1-i), (2-ii), (3-iii)
Correct Answer: (C) (1-ii), (2-i), (3-iii)
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न काव्यांश में प्रयुक्त प्रतीकात्मक शब्दों और उनके क्रियात्मक अर्थों के सही मिलान पर आधारित है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. कंधा दूँगा: कविता में वक्ता "लंगड़ाकर चलते हुए पाँवों को कंधा दूँगा" कहता है। यहाँ कंधा देने का अर्थ शारीरिक बोझ उठाना नहीं बल्कि असहाय को आगे बढ़ने के लिए 'सहारा देना' (ii) है।

2. पीठ सहलाना: "लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा" का अर्थ है उनके घावों पर मरहम लगाना और सहानुभूति प्रकट करते हुए उनका 'दर्द बाँटना' (i) है।

3. बाँहों में उठाना: "पराजित विवशता को बाँहों में उठाऊँगा" का तात्पर्य किसी लाचार व्यक्ति को सम्मान देना और उसे समाज में पूरी आत्मीयता से 'अपनाना' (iii) है।


Step 3: Final Answer:

सही मिलान (1-ii), (2-i), (3-iii) है, जो विकल्प (C) में उपलब्ध है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले उन शब्दों को जोड़ें जिनका अर्थ स्पष्ट हो (जैसे कंधा देना = सहारा देना), इससे बाकी विकल्पों को चुनना आसान हो जाता है।


Question 3:

1(iii).
'अचीन्ही आवाज़ें' किनकी हैं ?

  • (A) सर्वहारा वर्ग की
  • (B) स्वतंत्रता सेनानियों की
  • (C) साधारण आदमी की
  • (D) अपरिचित लोगों की
Correct Answer: (A) सर्वहारा वर्ग की
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Step 1: Understanding the Concept:

'अचीन्ही' शब्द का अर्थ है जिसे पहचाना न गया हो या जिसे समाज ने महत्व न दिया हो।


Step 2: Detailed Explanation:

काव्यांश में कवि कहता है - "इस अनगिनत अचीन्ही आवाज़ों में कैसा दर्द है कोई नहीं सुनता"।

ये आवाज़ें समाज के उन लोगों की हैं जो गुमनाम हैं और जिनके कष्टों की ओर दुनिया ध्यान नहीं देती।

सर्वहारा वर्ग (oppressed class) समाज का वह हिस्सा है जो सबसे अधिक संघर्ष करता है लेकिन उसकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है।

अतः ये आवाज़ें उन शोषितों की हैं जिनके प्रति वक्ता संवेदना रखता है।


Step 3: Final Answer:

विकल्प (A) सही है क्योंकि कविता का मुख्य स्वर शोषित और अभावग्रस्त (सर्वहारा) वर्ग की पीड़ा को व्यक्त करना है।
Quick Tip: हिंदी साहित्य में जब भी 'अनसुनी आवाज़ों' की बात होती है, तो वे अक्सर समाज के सबसे निचले और शोषित पायदान पर खड़े लोगों की होती हैं।


Question 4:

1(iv).
काव्यांश में प्रयुक्त 'रोशनी' से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer: रोशनी का अभिप्राय आशा, सत्य, न्याय और मानवीय चेतना से है।
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Step 1: Understanding the Concept:

साहित्य में 'रोशनी' अंधकार (अज्ञान/दुख) के विरुद्ध एक सकारात्मक प्रतीक के रूप में उपयोग की जाती है।


Step 2: Detailed Explanation:

कवि कहता है, "मेरी तो आदत है रोशनी जहाँ भी हो उसे खोज लाऊँगा"।

यहाँ 'रोशनी' का अर्थ समाज में व्याप्त उस सूक्ष्म आशा की किरण से है जो हताश लोगों के जीवन में परिवर्तन ला सकती है।

यह न्याय और ज्ञान का भी प्रतीक है जो शोषण के अंधेरे को मिटाकर समानता और प्रेम का प्रसार करती है।


Step 3: Final Answer:

रोशनी का तात्पर्य समाज की उन सकारात्मक ऊर्जाओं और मूल्यों से है जो पीड़ित मानवता के लिए कल्याणकारी सिद्ध होती हैं।
Quick Tip: प्रतीकात्मक कविताओं में 'अंधेरा' पीड़ा या अन्याय को दर्शाता है, जबकि 'रोशनी' समाधान, मुक्ति या नई शुरुआत को दर्शाती है।


Question 5:

1(v).
काव्यांश में कौन पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है ? उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

Correct Answer: काव्यांश में मानवता का हितैषी (वक्ता/कवि) पुनर्जन्म लेने की बात कर रहा है। उसकी दो विशेषताएँ परोपकारिता और अदम्य साहस/संकल्प हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

वक्ता एक ऐसा चरित्र है जो व्यक्तिगत मोक्ष या सुख के स्थान पर सामूहिक कल्याण को प्राथमिकता देता है।


Step 2: Detailed Explanation:

पुनर्जन्म की बात वह व्यक्ति कर रहा है जो समाज के दुखियारी लोगों का सहारा बनना चाहता है।

उसकी दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. गहरी संवेदनशीलता (Empathy): वह दूसरों के कष्टों को केवल देखता ही नहीं बल्कि उन्हें स्वयं अनुभव करता है और उनके घावों को सहलाने की इच्छा रखता है।

2. कर्मठता और संकल्प: वह कठिन परिस्थितियों (अभावों और विवशता) के बावजूद हार नहीं मानता और बार-बार लौटकर संघर्ष करने का साहस रखता है।


Step 3: Final Answer:

वक्ता एक मानवतावादी योद्धा है जिसकी विशेषताएँ उसकी निःस्वार्थ सेवा भावना और पीड़ितों के प्रति अगाध प्रेम हैं।
Quick Tip: वक्ता की विशेषताओं को जानने के लिए उसके द्वारा किए जाने वाले कार्यों (जैसे कंधा देना, बाँहों में उठाना) का विश्लेषण करें।


Question 6:

1(vi).
कातरता, चुप्पी या चीखों को प्यार के सितार पर बजाने से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer: इसका अभिप्राय है समाज के दर्द, आक्रोश और सन्नाटे को प्रेम के माध्यम से एक सकारात्मक अभिव्यक्ति और सामंजस्य प्रदान करना।
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Step 1: Understanding the Concept:

यहाँ 'कातरता, चुप्पी और चीखें' नकारात्मक संवेगों के प्रतीक हैं, जबकि 'प्यार का सितार' एक सुरीले और सकारात्मक माध्यम का प्रतीक है।


Step 2: Detailed Explanation:

समाज में जो लोग डरे हुए हैं (कातरता), जो अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर पाते (चुप्पी) या जो दर्द से कराह रहे हैं (चीखें), उनके प्रति वक्ता का दृष्टिकोण घृणा का नहीं बल्कि प्रेम का है।

'सितार पर बजाना' एक सुंदर कलात्मक रूपक है जिसका अर्थ है उन कष्टों को दुनिया के सामने इस तरह रखना कि लोगों के मन में सहानुभूति पैदा हो।

वह समाज की कड़वाहट और दुख को प्रेम और करुणा के सुरों से बदलकर उनमें जीवन के प्रति दोबारा आस जगाना चाहता है।


Step 3: Final Answer:

इसका अभिप्राय है कि वक्ता मानवीय करुणा और प्रेम के स्पर्श से समाज की विद्रूपताओं और दुखों का अंत कर उन्हें मधुर जीवन संगीत में बदलना चाहता है।
Quick Tip: जब किसी कष्टदायी अनुभव को वाद्य यंत्र के साथ जोड़ा जाता है, तो उसका भावार्थ अक्सर उस पीड़ा को 'सृजनात्मकता' या 'शांति' में बदलना होता है।


Question 7:

वर्षा जल संचयन के किस पारंपरिक रूप का वर्णन गद्यांश में किया गया है ?

  • (A) नदी
  • (B) तालाब
  • (C) कुआँ
  • (D) बावड़ी
Correct Answer: (B) तालाब
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न गद्यांश के मुख्य विषय वस्तु की पहचान पर आधारित है। गद्यांश मुख्य रूप से जल संचयन के पारंपरिक माध्यमों की चर्चा करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

संपूर्ण गद्यांश में "तालाब" की महत्ता, उसकी उपयोगिता और उसके ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संदर्भों का वर्णन किया गया है।

गद्यांश की पंक्तियाँ जैसे "तालाब ही हमारे सिंचाई का एकमात्र साधन थे" और "तालाब हमारे जल सरोकार के परंपरागत साधन रहे हैं" स्पष्ट रूप से तालाब को वर्षा जल संचयन के पारंपरिक रूप में प्रस्तुत करती हैं।

यद्यपि नदी और सागर का उल्लेख हुआ है, परंतु वे संचयन के 'पारंपरिक रूप' के वर्णन के संदर्भ में नहीं हैं।


Step 3: Final Answer:

अतः, सही विकल्प (B) तालाब है।
Quick Tip: अपठित गद्यांश में अक्सर मुख्य शब्द (Keywords) बार-बार दोहराए जाते हैं। यहाँ 'तालाब' शब्द केंद्रीय विषय है।


Question 8:

गद्यांश में तालाबों के लिए 'तरण-तारिणी' विशेषण का प्रयोग उसकी किस विशेषता को दर्शाने के लिए किया गया है ?

  • (A) बच्चों-बड़ों के तैरने के काम आने की
  • (B) बड़े-बुजुर्गों की बातचीत का आधार स्थल होने की
  • (C) जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत होने की
  • (D) धार्मिक रीति-रिवाजों का आधार स्थल होने की
Correct Answer: (C) जल-आपूर्ति का प्रमुख स्रोत होने की
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Step 1: Understanding the Concept:

'तरण-तारिणी' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'तारने वाली' या 'उद्धार करने वाली' होता है। गद्यांश में इसे जल संकट के समाधान के संदर्भ में प्रयुक्त किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के पहले अनुच्छेद में कहा गया है कि "जल-संक संकट के मौजूदा हालात को देखते हुए जल आपूर्ति के विकल्प के रूप में तरण-तारिणी तालाब के महत्त्व को आज समझने की ज़रूरत है।"

यहाँ 'तरण-तारिणी' विशेषण का उपयोग तालाब के उस गुण के लिए किया गया है जो प्यास बुझाने और जल की कमी को दूर करके जीवन की रक्षा करता है।

यह मुख्य रूप से जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने की इसकी क्षमता की ओर संकेत करता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, यह विशेषण जल-आपूर्ति के प्रमुख स्रोत होने की विशेषता को दर्शाता है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: विशेषणों का अर्थ हमेशा गद्यांश के प्रसंग (Context) के अनुसार निकालें, न कि केवल शाब्दिक अर्थ पर जाएँ।


Question 9:

गद्यांश में रानी सागर, बूढ़ा तालाब और विशाल सागर का उदाहरण किस उद्देश्य से दिया गया है ?

  • (A) इन तालाबों के रूपाकार से परिचित कराने के लिए
  • (B) भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता दर्शाने के लिए
  • (C) तालाबों की भव्यता का उल्लेख करने के लिए
  • (D) मध्य भारत की वास्तुकला से परिचित कराने के लिए
Correct Answer: (B) भारतीय संस्कृति में तालाबों की महत्ता दर्शाने के लिए
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रसिद्ध ऐतिहासिक तालाबों का उदाहरण अक्सर विषय की व्यापकता और उसकी सांस्कृतिक जड़ों को सिद्ध करने के लिए दिया जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के दूसरे और तीसरे अनुच्छेद में इन तालाबों का उल्लेख "सौंदर्याकरण का बेहतर मिसाल" और "लोक दर्शन के तत्त्व" के संदर्भ में किया गया है।

लेखक यह बताना चाहता है कि ये केवल जल संचय की इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक पहचान के महत्वपूर्ण अंग हैं।

विकल्प (C) भी निकट है, परंतु 'महत्ता' (Importance) शब्द में भव्यता के साथ-साथ उपयोगिता और संस्कृति दोनों समाहित हो जाते हैं।


Step 3: Final Answer:

सही उद्देश्य भारतीय संस्कृति में तालाबों की बहुआयामी महत्ता को प्रतिपादित करना है। अतः विकल्प (B) सर्वाधिक उपयुक्त है।
Quick Tip: जब उदाहरण कई क्षेत्रों (जैसे भोपाल, रायपुर) से हों, तो लेखक का उद्देश्य अक्सर एक व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव को दिखाना होता है।


Question 10:

पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने में तालाबों की क्या भूमिका है ?

Correct Answer: तालाब वायु प्रवाह को नियमित करते हैं और पारिस्थितिक तंत्र में नमी बनाए रखकर पर्यावरण के संतुलन में सहायक होते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न तालाबों के पारिस्थितिक (Ecological) लाभों से संबंधित है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के अनुसार, तालाब वायु प्रवाह और पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तालाबों से होकर गुजरने वाली हवाएँ ठंडी और स्वच्छ होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी गई हैं।

इसके अलावा, ये स्थानीय जल चक्र को बनाए रखने और जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद करते हैं।


Step 3: Final Answer:

पर्यावरण संतुलन में तालाबों की मुख्य भूमिका वायु प्रवाह को नियंत्रित करने और पर्यावरण को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में है।
Quick Tip: पर्यावरण से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में प्राकृतिक संतुलन और स्वास्थ्य संबंधी लाभों का उल्लेख अवश्य करें।


Question 11:

ग्रामीण संस्कृति में तालाबों का क्या महत्त्व है ?

Correct Answer: ग्रामीण संस्कृति में तालाब लोक व्यवहार और सूचनाओं के आदान-प्रदान के मुख्य केंद्र होते हैं, जहाँ सामुदायिक उत्सव और चर्चाएँ आयोजित होती हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि एक सामाजिक संस्था (Social Institution) के रूप में कार्य करते हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के अनुसार, ग्रामीण संस्कृति में लोक व्यवहार और ग्राम्य सूचना के दो मुख्य केंद्र हैं— चौपाल और तालाब।

तालाब वह स्थान है जहाँ लोग मंगल उत्सव (खुशी के अवसर) मनाते हैं या दुःख की घड़ी में (दारुण-गाथा) साथ बैठते हैं।

यह स्थान बिना किसी शुल्क के सूर्य दर्शन और प्राकृतिक चिकित्सा (स्वस्थ हवा) का अवसर भी प्रदान करता है।


Step 3: Final Answer:

ग्रामीण संस्कृति में तालाब सामाजिक मेलजोल, सूचनाओं के प्रसार और सांस्कृतिक उत्सवों के आधार स्तंभ हैं।
Quick Tip: सामाजिक महत्व वाले प्रश्नों में 'लोक व्यवहार' और 'सामुदायिक केंद्र' जैसे शब्दों का उपयोग उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।


Question 12:

जल-संचयन एवं जल-संरक्षण के बीच का अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: जल-संचयन का अर्थ है वर्षा के जल को एकत्रित करना (जैसे तालाब बनाना), जबकि जल-संरक्षण का अर्थ है उपलब्ध जल को प्रदूषित होने से बचाना और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना (जैसे वर्तमान तालाबों की दशा सुधारना)।
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Step 1: Understanding the Concept:

संचयन (Harvesting) प्राप्ति और भंडारण से जुड़ा है, जबकि संरक्षण (Conservation) सुरक्षा और प्रबंधन से।


Step 2: Detailed Explanation:

1. जल-संचयन: यह वर्षा के जल को बहने से रोककर उसे जमा करने की प्रक्रिया है। उदाहरण— वर्षा जल संचयन के लिए तालाबों या टैंकों की संरचना करना।

2. जल-संरक्षण: यह जल के अपव्यय को रोकने और उसे स्वच्छ रखने की प्रक्रिया है। उदाहरण— गद्यांश के अनुसार तालाबों की वर्तमान खराब दशा को सुधारना ताकि वे लंबे समय तक उपयोगी रहें।


Step 3: Final Answer:

संचयन जल को 'इकट्ठा' करना है और संरक्षण उसे 'बचाकर सही ढंग से उपयोग' करना है।
Quick Tip: अंतर स्पष्ट करते समय हमेशा दो अलग-अलग बिंदुओं (Points) का प्रयोग करें और एक-एक सटीक उदाहरण दें।


Question 13:

हमारे पूर्वज जल-संचयन और संरक्षण के मामले में हमसे अधिक समझदार थे, कैसे ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: पूर्वजों ने बड़े बाँधों के अभाव में भी तालाबों जैसी टिकाऊ और नैसर्गिक प्रणालियाँ विकसित की थीं, जो आज के कृत्रिम हार्वेस्टिंग सिस्टम का मूल आधार हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न पारंपरिक ज्ञान की आधुनिक तकनीकों से तुलना पर आधारित है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के अनुसार, जब आधुनिक बड़े बाँध नहीं थे, तब भी हमारे पूर्वजों ने तालाबों के माध्यम से सिंचाई और जल आपूर्ति का स्थायी समाधान ढूँढ लिया था।

उन्होंने तालाबों को न केवल तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया, बल्कि उन्हें संस्कृति और लोक-जीवन का हिस्सा भी बनाया जिससे उनका स्वतः ही संरक्षण होता रहा।

आज के 'हार्वेस्टिंग सिस्टम' की जो वैज्ञानिक दलीलें दी जाती हैं, वे वास्तव में प्राचीन तालाबों की ही संरचना पर आधारित हैं।


Step 3: Final Answer:

पूर्वजों की समझदारी इस बात में थी कि उन्होंने प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर 'तरण-तारिणी' तालाबों का निर्माण किया, जो सदियों तक जल संकट का समाधान बने रहे।
Quick Tip: पूर्वजों की समझदारी को सिद्ध करने के लिए 'स्थायित्व' (Sustainability) और 'प्राकृतिक सामंजस्य' जैसे तर्कों का उपयोग करें।


Question 14:

टी.बी. के संदर्भ में नेट या नेट साउंड से क्या अभिप्राय है ? इनकी क्या उपयोगिता है ? (शब्द सीमा - लगभग 20 शब्द)

Correct Answer: नेट साउंड (NAT Sound) का अर्थ है प्राकृतिक आवाज़ें। ये समाचार को विश्वसनीयता और जीवंतता प्रदान करती हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

टेलीविज़न पत्रकारिता एक दृश्य-श्रव्य माध्यम है। यहाँ केवल एंकर या रिपोर्टर की आवाज़ ही नहीं, बल्कि घटना स्थल की अपनी ध्वनियाँ भी महत्वपूर्ण होती हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

'नेट साउंड' (Natural Sound) का अर्थ है वे स्वाभाविक आवाज़ें जो शूटिंग के दौरान घटना स्थल पर मौजूद होती हैं।

उदाहरण के लिए: वर्षा का शोर, चिड़ियों का चहचहाना, गाड़ियों के हॉर्न या भीड़ का शोर।

इसकी उपयोगिता यह है कि यह खबर को विश्वसनीय (Authentic) बनाती है और दर्शकों को घटना के वास्तविक परिवेश से जोड़ती है।

बिना नेट साउंड के कोई भी न्यूज़ क्लिप निर्जीव और कृत्रिम महसूस होती है।


Step 3: Final Answer:

नेट साउंड घटना स्थल की प्राकृतिक ध्वनियाँ हैं जो टेलीविज़न समाचार को वास्तविक और प्रभावशाली बनाती हैं।
Quick Tip: नेट साउंड का सही उपयोग दृश्य के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। इसे 'एंबिएंट साउंड' भी कहा जाता है।


Question 15:

भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की स्थिति स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: भारत में इंटरनेट पत्रकारिता अपने तीसरे दौर में है और यह अत्यंत लोकप्रिय व प्रभावी हो चुकी है।
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Step 1: Understanding the Concept:

इंटरनेट पत्रकारिता (वेब पत्रकारिता) का अर्थ है विश्वव्यापी जाल (World Wide Web) पर समाचारों का प्रकाशन और आदान-प्रदान।


Step 2: Detailed Explanation:

भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का वास्तविक विकास 2003 के बाद 'दूसरे दौर' से शुरू हुआ और वर्तमान में यह 'तीसरे दौर' में है।

आज लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों के अपने वेब पोर्टल हैं जो पल-पल की खबरें अपडेट करते हैं।

स्मार्टफोन और सस्ते डेटा की उपलब्धता ने इसे जन-जन तक पहुँचा दिया है।

यूनिकोड (Unicode) के आने से हिंदी इंटरनेट पत्रकारिता में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है, जिससे फॉन्ट की समस्या समाप्त हो गई है।

यह माध्यम गति और अंतःक्रियाशीलता (Interactivity) के मामले में पारंपरिक माध्यमों से बहुत आगे निकल गया है।


Step 3: Final Answer:

भारत में इंटरनेट पत्रकारिता सूचना का सबसे तेज़ और सुलभ माध्यम बन गई है, जिसने सूचना के लोकतंत्रीकरण में बड़ी भूमिका निभाई है।
Quick Tip: उत्तर में 'यूनिकोड' और 'तीसरे दौर' का उल्लेख करना तकनीकी रूप से आपके उत्तर को श्रेष्ठ बनाता है।


Question 16:

खोजी रिपोर्ट और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के बीच का अंतर स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: खोजी रिपोर्ट छिपे हुए तथ्यों को उजागर करती है, जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों की गहराई से व्याख्या करती है।
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Step 1: Understanding the Concept:

पत्रकारिता में रिपोर्टिंग के अलग-अलग प्रकार होते हैं जो घटना की प्रकृति और गहराई के आधार पर तय किए जाते हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

1. खोजी रिपोर्ट (Investigative Report): इसमें रिपोर्टर उन सूचनाओं या तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करता है जिन्हें सार्वजनिक रूप से छुपाया गया हो। इसमें भ्रष्टाचार या अनैतिक कार्यों का पर्दाफाश किया जाता है।

2. विश्लेषणात्मक रिपोर्ट (Analytical Report): इसमें कोई नया तथ्य नहीं खोजा जाता, बल्कि सामने मौजूद घटना या समस्या के कारणों, परिणामों और प्रभावों का गहन विश्लेषण किया जाता है। इसमें डेटा और विशेषज्ञों की राय का उपयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिए, किसी घोटाले की जाँच 'खोजी रिपोर्ट' है, जबकि बजट पर चर्चा 'विश्लेषणात्मक रिपोर्ट' है।


Step 3: Final Answer:

खोजी रिपोर्ट 'अनदेखे' को 'दिखाने' का कार्य है, जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट 'देखे हुए' को 'समझाने' का कार्य है।
Quick Tip: अंतर स्पष्ट करने के लिए हमेशा दो अलग-अलग बिंदुओं का प्रयोग करें ताकि परीक्षक को स्पष्टता मिले।


Question 17:

प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप (रचनात्मक लेख)

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

रचनात्मक लेखन में विषय के प्रति संवेदनशील और कल्पनाशील दृष्टिकोण आवश्यक है।


Step 2: Detailed Explanation:

प्राकृतिक आपदाओं का विकराल रूप

प्रकृति मानव की सहचरी है, परंतु जब मनुष्य अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए उसके संतुलन को बिगाड़ता है, तो प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है। हाल के वर्षों में हमने उत्तराखंड की बाढ़, तुर्की का विनाशकारी भूकंप और चक्रवाती तूफानों की विभीषिका देखी है। ये आपदाएँ चेतावनी हैं कि विकास की अंधी दौड़ में हमने पर्यावरण की बलि चढ़ा दी है। जब पहाड़ दरकते हैं या समुद्र किनारे शहर डूबते हैं, तो वह दृश्य केवल तबाही का होता है। हज़ारों जिंदगियां पल भर में मलबे का ढेर बन जाती हैं। प्राकृतिक आपदाएँ हमें यह सिखाती हैं कि हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएँ, प्रकृति की शक्ति के सामने हम आज भी बौने हैं। हमें अब 'सतत विकास' के मार्ग पर चलना ही होगा।


Step 3: Final Answer:

यह लेख प्राकृतिक प्रकोप और मानवीय हस्तक्षेप के बीच के संबंधों को उजागर करते हुए सचेत रहने का संदेश देता है।
Quick Tip: रचनात्मक लेख की भाषा सरल परंतु प्रभावशाली होनी चाहिए। अंत में एक निष्कर्ष या संदेश अवश्य दें।


Question 18:

जब मैंने अध्यापक/अध्यापिका की भूमिका निभाई (रचनात्मक लेख)

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

यह एक अनुभव प्रधान लेख है जिसमें संस्मरण और आत्म-चिंतन का समावेश होता है।


Step 2: Detailed Explanation:

शिक्षक दिवस के उस दिन का अनुभव मेरे हृदय में आज भी ताज़ा है जब मुझे विद्यालय में एक दिन के लिए 'अध्यापक' बनने का अवसर मिला। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने जब मैं कक्षा 9 में पहुँचा, तो विद्यार्थियों के शोर ने मेरा स्वागत किया। हाथ में चाक और किताब थामे हुए उस ऊँचे मंच पर खड़ा होना मुझे गर्व और जिम्मेदारी का अहसास करा रहा था। मैंने उस दिन 'सूरदास के पद' पढ़ाए। बच्चों की जिज्ञासा और उनके प्रश्नों के उत्तर देते समय मुझे अहसास हुआ कि शिक्षक का कार्य केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि चरित्र का निर्माण करना है। उस एक घंटे के शिक्षण ने मेरे मन में अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान को कई गुना बढ़ा दिया।


Step 3: Final Answer:

लेख में छात्र के शिक्षक बनने के क्षणिक किंतु गहरे अनुभव का सजीव चित्रण किया गया है।
Quick Tip: व्यक्तिगत अनुभवों वाले लेखों में 'मैं' शैली का प्रयोग इसे अधिक आत्मीय बनाता है।


Question 19:

जब पिताजी का स्थानांतरण दुर्गम स्थान में हुआ (रचनात्मक लेख)

Correct Answer:
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Step 1: Understanding the Concept:

परिस्थितियों के बदलाव और अनुकूलन (Adaptation) की भावना को शब्दों में पिरोना ही इस लेख का उद्देश्य है।


Step 2: Detailed Explanation:

सरकारी सेवा में स्थानांतरण एक नियमित प्रक्रिया है, किंतु जब पिताजी का तबादला लद्दाख के एक दुर्गम सैन्य क्षेत्र में हुआ, तो हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई। शहर की सुख-सुविधाओं से दूर एक ऐसे स्थान पर जाना जहाँ ऑक्सीजन कम और ठंड बेहिसाब थी, हमारे लिए चुनौती भरा था। वहाँ पहुँचकर पहले कुछ दिन बहुत कठिन रहे। न इंटरनेट था, न बिजली की निरंतर आपूर्ति। परंतु उस एकांत ने हमें स्वयं से परिचित कराया। पहाड़ों की शांत वादियों और वहाँ के लोगों के निश्छल प्रेम ने हमें जीवन का नया दृष्टिकोण दिया। हमने सीखा कि सुख सुविधाओं में नहीं, अपनों के साथ और संतोष में होता है। वह दुर्गम स्थान आज हमारे जीवन का सबसे सुंदर अध्याय बन गया है।


Step 3: Final Answer:

यह लेख विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और जीवन के सकारात्मक पहलुओं को खोजने की कहानी है।
Quick Tip: लेख को एक भावनात्मक मोड़ पर समाप्त करना पाठकों पर गहरा प्रभाव डालता है।


Question 20:

चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती ? (लगभग 60 शब्द)

Correct Answer: कविता हृदय की स्वाभाविक अनुभूति और कल्पना की उपज है, जिसे बाहरी नियमों से पूरी तरह नहीं सिखाया जा सकता।
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Step 1: Understanding the Concept:

कलाओं के दो पक्ष होते हैं— बाह्य (शिल्प) और आंतरिक (भाव)। कविता में आंतरिक पक्ष की प्रधानता होती है।


Step 2: Detailed Explanation:

चित्रकला या संगीत में रंगों का मिश्रण या वाद्य यंत्र बजाने की तकनीक सिखाई जा सकती है।

कविता में भी शब्द चयन, छंद और अलंकार का ज्ञान तो दिया जा सकता है, किंतु कविता की जो आत्मा है— 'अनुभूति' (Feeling) और 'संवेदना', वह व्यक्ति की निजी होती है।

किसी के भीतर दुख, करुणा या प्रेम का भाव कैसे पैदा होगा, यह सिखाना संभव नहीं है।

कविता आंतरिक प्रेरणा से उपजती है, केवल यांत्रिक अभ्यास से कोई 'कवि' नहीं बन सकता।


Step 3: Final Answer:

कविता एक व्यक्तिगत संवेदना है, इसलिए इसका शिल्प तो सिखाया जा सकता है, किंतु इसकी सृजनात्मक प्रतिभा जन्मजात और स्वाभाविक होती है।
Quick Tip: भाव (Emotion) और शिल्प (Technique) का अंतर स्पष्ट करना ही इस उत्तर की कुंजी है।


Question 21:

नाटक के मंच निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों संयोजित किए जाते हैं ? उदाहरण सहित लिखिए ।

Correct Answer: नाटक एक जीवंत दृश्य विधा है जो दर्शकों के सामने वर्तमान में घटित होती है, इसलिए निर्देश भी वर्तमान काल में होते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

नाटक 'दृश्य काव्य' है जिसका वास्तविक अस्तित्व मंचन (Performance) में है।


Step 2: Detailed Explanation:

नाटक चाहे किसी भी काल की कहानी कहे, जब उसे मंच पर प्रस्तुत किया जाता है, तो वह 'अभी' और 'यहीं' घटित हो रहा होता है।

मंच निर्देश अभिनेताओं के लिए होते हैं ताकि वे मंच पर क्या करना है, उसे समझ सकें।

यदि निर्देश भूतकाल में होंगे, तो वे अभिनय के दौरान तर्कहीन लगेंगे।

उदाहरण: 'राम तलवार उठाता है और युद्ध के लिए तैयार होता है'— यहाँ 'उठाता है' वर्तमान काल का निर्देश है जो क्रिया की तत्कालिकता को दर्शाता है।


Step 3: Final Answer:

मंचन की सजीवता और अभिनेताओं की तात्कालिक क्रियाओं के कारण नाटक के मंच निर्देश सदैव वर्तमान काल में ही लिखे जाते हैं।
Quick Tip: याद रखें कि नाटक को 'समय का एक सजीव टुकड़ा' माना जाता है, इसीलिए इसमें वर्तमान काल की प्रधानता होती है।


Question 22:

कहानी किसे कहते हैं ? इसके तत्त्वों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए ।

Correct Answer: कहानी जीवन के किसी एक अंग या घटना का संक्षिप्त और प्रभावशाली गद्य चित्रण है। इसके छह प्रमुख तत्त्व होते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

कहानी मानव जीवन की विविध परिस्थितियों और संघर्षों को रोचक ढंग से प्रस्तुत करने वाली विधा है।


Step 2: Detailed Explanation:

मुंशी प्रेमचंद के अनुसार, कहानी वह रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग का प्रभाव डालना ही लेखक का उद्देश्य रहता है।

कहानी के प्रमुख तत्त्व:

1. कथानक: कहानी का पूरा ढाँचा या घटनाक्रम।

2. पात्र और चरित्र-चित्रण: कहानी के नायक-नायिका और उनके व्यवहार।

3. संवाद (कथोपकथन): पात्रों की परस्पर बातचीत।

4. देशकाल और वातावरण: समय और स्थान का परिवेश।

5. भाषा-शैली: कहानी को सुनाने का ढंग।

6. उद्देश्य: वह संदेश जो लेखक देना चाहता है।


Step 3: Final Answer:

कहानी एक संक्षिप्त गद्य रचना है जो अपने विशिष्ट तत्वों के माध्यम से पाठकों के मन पर अमिट छाप छोड़ती है।
Quick Tip: परीक्षा में तत्वों के नाम याद रखने के लिए उन्हें क्रमानुसार लिखें और एक-एक शब्द में परिभाषित करें।


Question 23:

वर्तमान समय में भारत में हिंदी नेट पत्रकारिता की स्थिति स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: हिंदी नेट पत्रकारिता आज अपने चरमोत्कर्ष पर है और यह सूचना क्रांति का प्रमुख माध्यम बन चुकी है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न विशेष रूप से हिंदी भाषा के इंटरनेट पर प्रयोग और पत्रकारिता के विकास पर केंद्रित है।


Step 2: Detailed Explanation:

शुरुआती दिनों में हिंदी के साथ 'फॉन्ट' की बड़ी समस्या थी, किंतु 'यूनिकोड' के आगमन ने इसे वैश्विक बना दिया।

आज 'वेबदुनिया' भारत का पहला शुद्ध हिंदी पोर्टल है। इसके अलावा बीबीसी हिंदी, प्रभासाक्षी और दैनिक जागरण जैसे पोर्टल्स ने हिंदी समाचारों को व्यापक बनाया है।

सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग ने हिंदी में विचारों की अभिव्यक्ति को नया मंच दिया है।

वर्तमान में करोड़ों लोग अपनी भाषा में मोबाइल पर समाचार पढ़ रहे हैं, जिससे हिंदी नेट पत्रकारिता का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल नज़र आता है।


Step 3: Final Answer:

हिंदी नेट पत्रकारिता ने भाषाई सीमाओं को तोड़कर हिंदी को वैश्विक पटल पर एक सशक्त पहचान दिलाई है।
Quick Tip: 'यूनिकोड' और 'वेबदुनिया' का उल्लेख करना उत्तर को तथ्यात्मक रूप से मजबूत बनाता है।


Question 24:

आप जया/जयेश हैं। आपके विद्यालय में 7 सितंबर से 14 सितंबर तक 'हिंदी सप्ताह' मनाया गया। स्थानीय समाचार-पत्र में प्रकाशित कराने हेतु इसकी एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए ।

Correct Answer: रिपोर्ट में कार्यक्रम की तिथियों, मुख्य अतिथि, आयोजित प्रतियोगिताओं और समापन समारोह का संक्षिप्त विवरण होना चाहिए।
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Step 1: Understanding the Concept:

रिपोर्ट (प्रतिवेदन) एक औपचारिक लेखन है जिसमें किसी घटना का वस्तुनिष्ठ और संक्षिप्त विवरण दिया जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

विद्यालय में हिंदी सप्ताह का समापन

नई दिल्ली, 15 सितंबर: राजकीय विद्यालय में 7 सितंबर से 14 सितंबर तक 'हिंदी सप्ताह' का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस दौरान कविता पाठ, निबंध लेखन और वाद-विवाद जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। छात्रों ने अपनी मातृभाषा के प्रति अपार उत्साह दिखाया। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. शर्मा ने हिंदी की वैश्विक स्थिति पर प्रकाश डाला। विजयी प्रतिभागियों को प्रधानाचार्य द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

— जयेश, छात्र प्रतिनिधि


Step 3: Final Answer:

प्रस्तुत रिपोर्ट हिंदी सप्ताह की सभी प्रमुख गतिविधियों को प्रभावी ढंग से समाचार-पत्र के प्रारूप में प्रस्तुत करती है।
Quick Tip: रिपोर्ट के अंत में अपना नाम और पद अवश्य लिखें। समाचार की भाषा में 'क्या, कब, कहाँ और कौन' का उत्तर होना चाहिए।


Question 25:

आर्थिक पत्रकार को समाचार लेखन करते समय विशेष सावधानी क्यों बरतनी पड़ती है ? स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: आर्थिक समाचारों का सीधा प्रभाव शेयर बाज़ार और आम जनता की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए इसमें तथ्यात्मक शुद्धता अनिवार्य है।
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Step 1: Understanding the Concept:

आर्थिक पत्रकारिता (Financial Journalism) केवल सूचना नहीं देती, बल्कि वह निवेशकों और अर्थव्यवस्था को दिशा भी प्रदान करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

आर्थिक पत्रकारिता में 'आंकड़ों' का खेल होता है। एक छोटे से शून्य की गलती या गलत प्रतिशत का आंकड़ा बाज़ार में हड़कंप मचा सकता है।

गलत समाचार से किसी कंपनी के शेयर गिर सकते हैं या बाज़ार में 'पैनिक' (घबराहट) की स्थिति पैदा हो सकती है।

पत्रकार को आर्थिक शब्दावली (जैसे जीडीपी, रेपो रेट, राजकोषीय घाटा) की सटीक जानकारी होनी चाहिए।

जल्दबाजी में दिया गया आधा-अधूरा विश्लेषण आम जनता के निवेश को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए यहाँ अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है।


Step 3: Final Answer:

आर्थिक पत्रकारिता में 'सटीकता' और 'विश्वसनीयता' सर्वोपरि है क्योंकि यह सीधे देश की वित्तीय स्थिरता और जनहित से जुड़ी होती है।
Quick Tip: 'आंकड़ों की शुद्धता' (Numerical Accuracy) को अपने उत्तर का मुख्य बिंदु बनाएँ।


Question 26:

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए :

"यह मधु है - स्वयं काल की मौना का युग संचय,

यह गोरस - जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत-पय,

यह अंकुर - फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,

यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुत: इसको भी शक्ति दे दो।

यह दीप, अकेला, स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।"

Correct Answer: व्याख्या के लिए प्रस्तुत काव्यांश सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित कविता 'यह दीप अकेला' से उद्धृत है।
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Step 1: Understanding the Concept:

कवि ने इस कविता में 'दीप' को व्यक्ति (अहं) का और 'पंक्ति' को समाज का प्रतीक माना है।

यहाँ व्यक्ति की विशिष्टता और उसके गुणों का वर्णन किया गया है, साथ ही यह संदेश दिया गया है कि व्यक्ति कितना भी गुणवान क्यों न हो, उसकी सार्थकता समाज के साथ जुड़ने में ही है।


Step 2: Detailed Explanation:

संदर्भ एवं प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग-2' की कविता 'यह दीप अकेला' से ली गई हैं। कवि दीप रूपी व्यक्ति के गुणों की तुलना प्राकृतिक और पवित्र वस्तुओं से करते हुए उसे समाज को समर्पित करने की बात कह रहा है।

व्याख्या:

1. मधु और गोरस: कवि कहते हैं कि यह दीप (व्यक्ति) काल रूपी मौन पिटारे में युगों से संचित शहद (मधु) के समान मीठा और मूल्यवान है। यह जीवन रूपी कामधेनु का पवित्र अमृत जैसा दूध (गोरस) है, जो संस्कारों से शुद्ध है।

2. अंकुर और साहस: यह उस अंकुर के समान है जो पूरी शक्ति के साथ धरती का सीना चीरकर बाहर निकलता है और सूरज को निडर होकर देखता है। अर्थात्, व्यक्ति मौलिक और साहसी है।

3. स्वयंभू और ब्रह्म: वह स्वयं उत्पन्न (स्वयंभू) है और ब्रह्मा के समान असीम शक्तियों का पुंज है। वह भीड़ में होकर भी अकेला (अयुत) और विशिष्ट है।

4. समर्पण: यद्यपि यह दीप स्नेह और गर्व से भरा हुआ है, किंतु अकेला होने के कारण इसकी शक्ति सीमित है। जब इसे 'पंक्ति' (समाज) में शामिल किया जाएगा, तभी इसकी लौ का प्रकाश सार्थक होगा और इसे वास्तविक शक्ति प्राप्त होगी।


Step 3: Final Answer:

अतः, कवि व्यक्ति के 'अहं' को 'व्यष्टि' से 'समष्टि' (समाज) की ओर ले जाने का आह्वान करता है।
Quick Tip: सप्रसंग व्याख्या में काव्य-सौंदर्य जैसे - तत्सम शब्दावली, प्रतीकात्मकता (दीप=व्यक्ति, पंक्ति=समाज) और रूपक अलंकार का उल्लेख अवश्य करें।


Question 27:

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए :

"बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा॥

यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनी समझि साधु सुचि को भा॥

मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली॥

फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकता प्रसब कि संबुक काली॥"

Correct Answer: प्रस्तुत पद गोस्वामी तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' के अयोध्या कांड (भरत-राम का प्रेम) से लिया गया है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रसंग चित्रकूट का है, जहाँ भरत श्री राम को वापस अयोध्या ले जाने के लिए आए हैं। भरत अत्यंत ग्लानि और पश्चाताप में हैं और वे अपनी माता कैकेयी के कृत्य के लिए स्वयं को दोषी मान रहे हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

संदर्भ एवं प्रसंग: भरत मुनियों और सभा के सामने अपने हृदय की पीड़ा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि राम के प्रति मेरा प्रेम विधाता को सहन नहीं हुआ।

व्याख्या:

1. नियति का प्रहार: भरत कहते हैं कि विधाता मेरा और राम का दुलार सहन नहीं कर सका, इसलिए उसने 'नीच' माता कैकेयी के माध्यम से हम भाइयों के बीच दूरी पैदा कर दी।

2. आत्म-चिंतन: वे आगे कहते हैं कि आज मेरे मुँह से यह शोभा नहीं देता कि मैं स्वयं को 'साधु' (पवित्र) कहूँ और माता को 'नीच'। अपनी बुद्धि से स्वयं को साधु मान लेने से कोई पवित्र नहीं हो जाता।

3. ग्लानि का भाव: यदि मैं हृदय में यह सोचता हूँ कि "माता बुरी है और मैं भला हूँ", तो यह विचार ही मेरे लिए करोड़ों बुराइयों (कुचाली) के समान है।

4. दृष्टांत: वे उदाहरण देते हैं कि क्या 'कोदों' (एक घटिया अनाज) की बाली से उत्तम धान (सुसाली) पैदा हो सकता है? क्या काली घोंघा (संबुक) कभी बहुमूल्य मोती को जन्म दे सकती है? आशय यह है कि नीच माता का पुत्र होने के नाते मुझमें भी अवगुण ही होंगे।


Step 3: Final Answer:

भरत का यह कथन उनकी अगाध भक्ति, विनम्रता और उच्च नैतिक चरित्र को दर्शाता है।
Quick Tip: तुलसीदास की अवधी भाषा के माधुर्य और दृष्टांत अलंकार (कोदों-धान, घोंघा-मोती) के प्रयोग को विशेष रूप से रेखांकित करें।


Question 28:

गद्यांश में किस खेल के खत्म होने की बात हो रही है ?

  • (A) लोगों की लगने वाली भीड़ के
  • (B) भाइयों के बीच बैर-भाव के
  • (C) हवेली में लगने वाले तमाशों के
  • (D) बड़ी हवेली की सुख-समृद्धि के
Correct Answer: (D) बड़ी हवेली की सुख-समृद्धि के
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Step 1: Understanding the Concept:

गद्यांश में 'खेल खत्म होना' एक मुहावरे के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जो किसी वैभवशाली समय के अंत को सूचित करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश की पंक्ति "बड़े भैया के मरने के बाद ही जैसे सब खेल खत्म हो गया" स्पष्ट करती है कि बड़े भाई हवेली के गौरव और संपन्नता के आधार थे।

उनकी मृत्यु के बाद हवेली का वैभव, नौकर-चाकर, मान-सम्मान और आर्थिक संपन्नता— सब कुछ समाप्त हो गया।

भाइयों के बँटवारे ने उस हवेली को खंडहर जैसा बना दिया, जहाँ कभी सुख और समृद्धि का वास था।


Step 3: Final Answer:

अतः 'खेल खत्म होना' बड़ी हवेली की सुख-समृद्धि और गरिमा के लुप्त होने का संकेत है। सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: जब किसी शक्तिशाली पात्र की मृत्यु के बाद गिरावट आए, तो 'खेल खत्म होना' उसके साम्राज्य या वैभव के अंत को दर्शाता है।


Question 29:

'भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं' - कथन के समर्थन में विकल्प है -

  • (A) बड़ी हवेली का नाममात्र का ही बड़ी रहना
  • (B) कठिन घड़ी में नौकर-चाकरों का चले जाना
  • (C) बड़े भैया का अचानक मृत्यु को प्राप्त हो जाना
  • (D) बड़ी बहुरिया से साड़ी और ज़ेवर छीन लेना
Correct Answer: (C) बड़े भैया का अचानक मृत्यु को प्राप्त हो जाना
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Step 1: Understanding the Concept:

यह वाक्य ग्रामीण समाज की उस धारणा को व्यक्त करता है जहाँ अच्छे लोगों के साथ होने वाली अनहोनी को ईश्वर की इच्छा मान लिया जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश में बड़ी बहुरिया की मानसिक पीड़ा का वर्णन है। वह बड़े भैया को एक आदर्श और 'भला आदमी' मानती थी।

उनकी मृत्यु अचानक "एक घंटे की बीमारी" में हो गई, जिसने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया।

लेखक ने इसी अचानक और असमय मृत्यु को आधार बनाकर कहा है कि ईश्वर अक्सर भले लोगों की परीक्षा लेता है या उन्हें जल्दी कष्ट देता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, बड़े भैया की आकस्मिक मृत्यु ही इस कथन का मुख्य आधार है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: गद्यांश में 'भले आदमी' शब्द का प्रयोग बड़े भैया के लिए किया गया है, इसलिए उनके साथ हुई घटना ही सही उत्तर होगी।


Question 30:

'रैयतों ने जमीन पर दावे करके दखल किया' - वाक्य में प्रयुक्त 'रैयत' शब्द का अर्थ है -

  • (A) प्रजा
  • (B) राजा
  • (C) जमींदार
  • (D) महाजन
Correct Answer: (A) प्रजा
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Step 1: Understanding the Concept:

'रैयत' एक प्रशासनिक और ऐतिहासिक शब्द है जो पुराने समय में जमींदारी प्रथा के अंतर्गत आने वाले किसानों या जनता के लिए उपयोग किया जाता था।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश में उल्लेख है कि जैसे ही हवेली की पकड़ कमजोर हुई, वहाँ की 'रैयत' ने जमीन पर कब्ज़ा कर लिया।

यहाँ रैयत का अर्थ उस जनता या उन किसानों से है जो हवेली के अधीन थे।

जब स्वामी निर्बल हुआ, तो शासित वर्ग (प्रजा) ने अपने हितों के लिए जमीन पर अपना दावा पेश कर दिया।


Step 3: Final Answer:

अतः, रैयत शब्द का संदर्भ यहाँ हवेली के अधीन रहने वाली 'प्रजा' या किसानों से है। विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: इतिहास और हिंदी साहित्य में 'रैयतवाड़ी' व्यवस्था का संबंध सीधे किसानों और प्रजा से रहा है।


Question 31:

'नाममात्र की ही बड़ी हवेली है' - से अभिप्राय है -

  • (A) बड़ी हवेली की अवस्था जर्जर हो गई है।
  • (B) बड़ी हवेली में अब कोई नहीं रहता।
  • (C) बड़ी हवेली की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
  • (D) बड़ी हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है।
Correct Answer: (D) बड़ी हवेली की शानो-शौकत खत्म हो गई है।
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Step 1: Understanding the Concept:

'नाममात्र' शब्द उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जहाँ केवल बाहरी शीर्षक बचा हो, परंतु उसकी आंतरिक शक्ति या प्रतिष्ठा लुप्त हो गई हो।


Step 2: Detailed Explanation:

हवेली को लोग अभी भी 'बड़ी हवेली' कहते हैं क्योंकि वह अतीत में बहुत वैभवशाली थी।

परंतु वर्तमान में बँटवारे, आपसी कलह और भाइयों के शहर चले जाने के कारण उसकी पुरानी चमक-धमक और रसूख खत्म हो चुका है।

वहाँ अब केवल अभाव और सन्नाटा है, इसलिए वह केवल नाम की 'बड़ी' रह गई है।


Step 3: Final Answer:

अतः, इस वाक्यांश का तात्पर्य हवेली के मान-सम्मान और वैभव के विनाश से है। विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: जब किसी संज्ञा के आगे 'नाममात्र' लगा हो, तो वह उस वस्तु की वर्तमान दयनीय स्थिति की ओर संकेत करता है।


Question 32:

गद्यांश में 'द्रौपदी - चीर-हरण' प्रसंग का उल्लेख क्यों किया गया है ?

  • (A) महाभारत के प्रसंग से अवगत कराने हेतु
  • (B) बड़ी बहुरिया की दीन-हीन स्थिति से अवगत कराने हेतु
  • (C) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के साथ हुए अन्याय को दर्शाने हेतु
  • (D) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के देवरों की निर्दयता को दर्शाने हेतु
Correct Answer: (D) संपत्ति बँटवारे के दौरान बड़ी बहुरिया के देवरों की निर्दयता को दर्शाने हेतु
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Step 1: Understanding the Concept:

लेखक ने महाभारत के प्रसिद्ध प्रसंग 'द्रौपदी चीर-हरण' का उपयोग एक रूपक (Metaphor) के रूप में किया है ताकि वर्तमान स्थिति की गंभीरता को दिखाया जा सके।


Step 2: Detailed Explanation:

बड़ी बहुरिया के देवरों ने संपत्ति के बँटवारे के समय उसकी साड़ी के तीन टुकड़े किए और उसके शरीर से ज़ेवर तक छीन लिए।

यह व्यवहार अमानवीय और अत्यंत क्रूर था।

जैसे कौरवों ने भरी सभा में द्रौपदी को अपमानित किया था, वैसे ही इन भाइयों ने अपनी भाभी (बड़ी बहुरिया) की गरिमा को तार-तार कर दिया।

विकल्प (C) भी सही लगता है, लेकिन 'चीर-हरण' का प्रसंग विशेष रूप से उस 'निर्दयता' और 'अपमान' पर बल देने के लिए लाया गया है जो अपनों द्वारा किया गया।


Step 3: Final Answer:

अतः, यह प्रसंग बड़ी बहुरिया के देवरों के कठोर और असंवेदनशील व्यवहार को रेखांकित करता है। विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: साहित्य में पौराणिक संदर्भों का प्रयोग अक्सर किसी पात्र की चरम निर्दयता या विवशता को दर्शाने के लिए किया जाता है।


Question 33:

फागुन मास की शीत को चौगुना कौन बढ़ा रहा है ?

  • (A) वृक्षों से झरने वाले पत्ते
  • (B) पवन के झंकोरे
  • (C) वनों की ढाँखें
  • (D) होली का पर्व
Correct Answer: (B) पवन के झंकोरे
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा रचित 'पद्मावत' के 'बारहमासा' अंश (नागमती वियोग खंड) से लिया गया है।

इसमें विरहिणी नागमती की फागुन मास की विरह वेदना का वर्णन किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

काव्यांश की पहली पंक्ति "फागुन पवन झंकोरे बहा। चौगुन सीउ जाइ किमि सहा॥" स्पष्ट करती है कि फागुन के महीने में चलने वाले ठंडी हवा के झोंके शीत (ठंड) को चार गुना बढ़ा रहे हैं।

नागमती के लिए यह शीत असहनीय हो गई है क्योंकि उनके पति रत्नसेन उनके पास नहीं हैं।


Step 3: Final Answer:

अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: काव्यांश की प्रथम पंक्ति में ही 'पवन झंकोरे' का उल्लेख है, जो सीधे उत्तर की ओर संकेत करता है।


Question 34:

वृक्षों से झरने वाली बन ढाँखों से विरहिणी नायिका का क्या संबंध है ?

  • (A) विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं।
  • (B) राजा रत्नसेन की याद दिला रही हैं।
  • (C) प्रिय मिलन की धूमिल आशाओं को दर्शा रही हैं।
  • (D) उसे अतीत की स्मृतियों में ले जा रही हैं।
Correct Answer: (A) विरहिणी की विरह-वेदना को बढ़ा रही हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रकृति का उद्दीपन रूप विरहिणी नायिका के दुखों को और अधिक बढ़ा देता है।


Step 2: Detailed Explanation:

काव्यांश में उल्लेख है - "तरिवर झरै झरै बन ढाँखा। भइ अनपत फूल फर साखा॥"

फागुन में पतझड़ के कारण वृक्षों के पत्ते गिर रहे हैं और वन ढाँक (पलाश) विहीन हो रहे हैं।

जहाँ पूरी प्रकृति और वनस्पति उल्लसित (हुलासू) है, वहीं नागमती को यह दृश्य देखकर अपना जीवन भी उन्हीं सूखे पत्तों की तरह रिक्त और पीला महसूस होता है।

प्रकृति का यह परिवर्तन उसकी आंतरिक पीड़ा को तीव्र कर देता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, यह दृश्य नागमती की विरह-वेदना को और अधिक उद्दीप्त कर रहा है। विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: विरह काव्य में प्रकृति की हलचल अक्सर नायिका के कष्ट को बढ़ाने का कार्य करती है (उद्दीपन विभाव)।


Question 35:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : नागमती अपने शरीर को जलाकर राख कर देना चाहती है।

कारण : राख के रूप में प्रिय के चरण स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त करना चाहती है।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है, लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है, लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न नागमती के चरम उत्सर्ग और उसके समर्पण भाव पर आधारित है।


Step 2: Detailed Explanation:

काव्यांश की अंतिम दो पंक्तियाँ हैं - "यह तन जारौँ छार कै, कहौँ कि पवन उड़ाउ। मकु तेहि मारग होइ परौँ, कंत धरैं जहँ पाउ॥"

यहाँ नागमती स्पष्ट रूप से इच्छा व्यक्त करती है कि वह अपने शरीर को विरह की अग्नि में जलाकर राख (छार) कर दे।

उसका उद्देश्य यह है कि पवन उस राख को उड़ाकर उस मार्ग पर फैला दे जहाँ से उसके प्रिय (कंत) गुजरेंगे, ताकि वह धूल बनकर उनके चरणों का स्पर्श पा सके।

अतः कथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण पूरी तरह से कथन की पुष्टि करता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: 'छार' (राख) और 'कंत धरैं जहँ पाउ' (जहाँ प्रिय पाँव रखें) शब्दों का संबंध सीधे समर्पण और चरण स्पर्श की इच्छा से है।


Question 36:

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :


  • (A) (1-i), (2-iii), (3-ii)
  • (B) (1-iii), (2-i), (3-ii)
  • (C) (1-ii), (2-iii), (3-i)
  • (D) (1-ii), (2-i), (3-iii)
Correct Answer: (B) (1-iii), (2-i), (3-ii)
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न काव्यांश के बिम्बों और उनके प्रतीकात्मक अर्थों के मिलान पर आधारित है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. शरीर को जलाकर राख कर देना: यह नागमती के 'सर्वस्व त्याग और समर्पण' (iii) का प्रतीक है।

2. वृक्षों से झरे पीले पत्ते: कविता में "तन जस पियर पात भा मोरा" कहा गया है, जो 'नागमती के कांतिहीन और दुर्बल शरीर' (i) की उपमा है।

3. सबका चाँचरि जोर कर खेलना: "फाग करहिं सब चाँचरि जोरी" का अर्थ है लोक में 'होली के अवसर पर सामूहिक प्रसन्नता' (ii) का वातावरण।


Step 3: Final Answer:

सही मिलान 1-iii, 2-i, 3-ii है। अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'पियर पात' (पीला पत्ता) हमेशा बीमारी या विरह के कारण होने वाली शारीरिक दुर्बलता का प्रतीक होता है।


Question 37:

काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला कथन नहीं है -

  • (A) फागुन आते ही सब रेशमी वस्त्र धारण कर श्रृंगार करने लगते हैं।
  • (B) फागुन का प्राकृतिक उल्लास नागमती के दुख को दोगुना कर रहा है।
  • (C) होली का पर्व नायिका की विरह-अग्नि को बढ़ा रहा है।
  • (D) नागमती दिन-रात राजा रत्नसेन से मिलन की कामना करती है।
Correct Answer: (A) फागुन आते ही सब रेशमी वस्त्र धारण कर श्रृंगार करने लगते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

काव्यांश का मूल भाव विरह (जुदाई) का कष्ट है, न कि उल्लासपूर्ण श्रृंगार का वर्णन।


Step 2: Detailed Explanation:

विकल्प (B), (C) और (D) काव्यांश में वर्णित विरह वेदना की पुष्टि करते हैं।

नागमती कहती है "मो कहँ भा जग दून उदासू" अर्थात् उसके लिए संसार उदास है।

विकल्प (A) में 'रेशमी वस्त्र धारण कर श्रृंगार' की बात कही गई है, जिसका विरहिणी नागमती की स्थिति से कोई मेल नहीं है। वह तो विरह की अग्नि में जल रही है।


Step 3: Final Answer:

अतः, विकल्प (A) काव्यांश के मूल भाव (करुण रस/विप्रलंभ श्रृंगार) के विपरीत है।
Quick Tip: वियोग श्रृंगार के पदों में सुख-सुविधाओं और श्रृंगारिक प्रसाधनों का निषेध होता है।


Question 38:

आचार्य शुक्ल की बाल बुद्धि भारतेंदु हरिश्चंद्र और राजा हरिश्चंद्र नाटक के नायक हरिश्चंद्र में अंतर क्यों नहीं कर पाती थी ? पाठ के आधार पर लिखिए ।

Correct Answer: बचपन में शुक्ल जी की बाल बुद्धि 'लेखक भारतेंदु' और 'सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र' के बीच के ऐतिहासिक अंतर को नहीं समझ पाती थी और दोनों को एक ही मानती थी।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न रामचंद्र शुक्ल के संस्मरण 'प्रेमघन की छाया स्मृति' से लिया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

शुक्ल जी के घर का माहौल साहित्यिक था। बचपन में उन्होंने सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के नाटक सुने थे।

जब उनके पिता का तबादला मिर्जापुर हुआ, तो उन्होंने वहां आधुनिक भारतेंदु हरिश्चंद्र के बारे में सुना।

बालक की सहज बुद्धि को लगता था कि जिस राजा हरिश्चंद्र की कथा उन्होंने सुनी है, वही भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं।

उनके लिए 'हरिश्चंद्र' शब्द एक ऐसी महान छवि थी जिसमें पौराणिक राजा और आधुनिक लेखक का व्यक्तित्व एकरूप हो गया था।


Step 3: Final Answer:

नाम की समानता और दोनों के प्रति अपार श्रद्धा के कारण शुक्ल जी की बाल बुद्धि उनमें अंतर नहीं कर पाती थी।
Quick Tip: बाल सुलभ जिज्ञासा और नाम की समानता ही इस भ्रम का मुख्य कारण थी।


Question 39:

'मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे' - 'शेर' कहानी से उद्धृत इस कथन का क्या आशय है ? लेखक शहर से जंगल की ओर क्यों भागा था ?

Correct Answer: 'सींग निकलना' व्यवस्था से अलग होने या क्रांतिकारी विचार रखने का प्रतीक है। लेखक भ्रष्ट और शोषणकारी शहरी व्यवस्था से ऊबकर शांति की तलाश में जंगल भागा था।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह असगर वजाहत की लघु कथा 'शेर' पर आधारित है, जो सत्ता के प्रति अंधभक्ति और व्यवस्था के डर पर व्यंग्य करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

कहानी में शेर 'सत्ता' का प्रतीक है। शहर की व्यवस्था में जब लोग बिना सोचे-समझे शेर के मुँह में समा रहे थे, तब लेखक को लगा कि वह अलग है।

'सींग निकलना' मुहावरे का प्रयोग यहाँ विशिष्टता या व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाने के संदर्भ में हुआ है।

लेखक शहर के पाखंड और वहां की अमानवीयता से दूर प्राकृतिक शांति और सत्य की खोज में जंगल की ओर गया था, किंतु वहां भी उसने सत्ता (शेर) का वही खौफनाक रूप देखा।


Step 3: Final Answer:

इसका आशय है कि जो व्यक्ति व्यवस्था के अनुकूल नहीं चलता, समाज उसे 'सींग वाला' (अजीब या विद्रोही) समझने लगता है।
Quick Tip: शेर कहानी में जानवर सत्ता के विभिन्न अंगों (लालच, भय) के प्रतीक हैं।


Question 40:

अतुलित प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद सिंगरौली 'कालापानी' के नाम से क्यों जाना जाता है ? पाठ के संदर्भ में लिखिए ।

Correct Answer: दुर्गम रास्तों, घने जंगलों और यातायात के साधनों के अभाव के कारण यहाँ पहुँचना अत्यंत कठिन था, इसलिए इसे 'कालापानी' कहा जाता था।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न निर्मल वर्मा के यात्रा वृत्तांत 'जहाँ कोई वापसी नहीं' से लिया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

सिंगरौली अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ था।

यहाँ चारों ओर ऊँचे पर्वत और घने जंगल थे। उस समय न सड़कें थीं और न ही रेल मार्ग।

एक बार यहाँ पहुँचने के बाद वापस निकलना बहुत मुश्किल होता था।

इसी अलगाव और दुर्गमता के कारण लोग इसे अंडमान की जेल (कालापानी) की तरह भयावह मानते थे, भले ही यहाँ की प्रकृति अत्यंत सुंदर थी।


Step 3: Final Answer:

भौगोलिक दुर्गमता और एकांतवास के कारण इसे 'कालापानी' की संज्ञा दी गई थी।
Quick Tip: 'कालापानी' शब्द यहाँ सजा के लिए नहीं बल्कि 'पहुँच से बाहर' होने के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।


Question 41:

'बहुत दिनान को' - कवित्त के आधार पर घनानंद की स्थिति का वर्णन कीजिए ।

Correct Answer: घनानंद की स्थिति अत्यंत दयनीय और विरह से व्याकुल है। उनके प्राण केवल प्रिय सुजान के दर्शन की प्रतीक्षा में अटके हुए हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

रीतिमुक्त कवि घनानंद की कविता प्रेम की पीड़ा और प्रतीक्षा की पराकाष्ठा का वर्णन करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

कवि घनानंद लम्बे समय से अपनी प्रेमिका सुजान के विरह में जल रहे हैं।

उनके प्राण अब कंठ तक आ गए हैं, अर्थात् वे मृत्यु के द्वार पर हैं, किंतु वे शरीर छोड़ नहीं रहे हैं।

उनकी आत्मा सुजान के आने का संदेश सुनने को बेताब है।

उनकी आँखों में केवल प्रिय की छवि बसी है और वे अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोकर विलाप कर रहे हैं।


Step 3: Final Answer:

कवि की स्थिति 'आस' और 'प्रतीक्षा' के बीच झूलती हुई विरह की चरम अवस्था है।
Quick Tip: घनानंद के काव्य में 'सुजान' के प्रति उनका अनन्य और निष्काम प्रेम ही प्रमुख विषय है।


Question 42:

'वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' - पंक्ति में प्रयुक्त 'लता और कली' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer: यहाँ 'लता' सरोज की माता (कवि की पत्नी) का प्रतीक है और 'कली' पुत्री सरोज का। इसका आशय है कि सरोज का पालन-पोषण उसके ननिहाल में हुआ जहाँ उसकी माँ का जन्म हुआ था।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह पंक्ति निराला की शोकगीत 'सरोज स्मृति' से ली गई है, जो उन्होंने अपनी दिवंगत पुत्री की याद में लिखी थी।


Step 2: Detailed Explanation:

निराला कहते हैं कि सरोज की माता (लता) का बचपन अपने मायके (सरोज के ननिहाल) में बीता था।

सरोज भी अपनी माता की मृत्यु के बाद अपने ननिहाल में ही पली-बढ़ी।

जैसे एक कली उसी लता पर खिलती है जिससे उसका जुड़ाव होता है, वैसे ही सरोज ने भी अपने ननिहाल के उसी स्नेहपूर्ण वातावरण में विकास पाया जहाँ उसकी माँ ने पाया था।

यह पंक्ति सरोज और उसकी माता के बीच के अटूट संबंध और ननिहाल के ममत्व को दर्शाती है।


Step 3: Final Answer:

लता (माँ) और कली (बेटी) के माध्यम से कवि ने सरोज के ननिहाल के प्रति जुड़ाव को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया है।
Quick Tip: 'सरोज स्मृति' हिंदी साहित्य का सबसे प्रसिद्ध और कारुणिक 'शोकगीत' (Elegy) माना जाता है।


Question 43:

वसंत आगमन पर बनारस शहर की जागृति और चेतना का वर्णन कविता के आधार पर कीजिए ।

Correct Answer: वसंत आने पर बनारस में अचानक धूल भरी हवाएँ चलने लगती हैं, गंगा के घाटों पर भीड़ बढ़ जाती है और भिखारी के कटोरे भी चमक उठते हैं, जिससे पूरा शहर चैतन्य हो उठता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

केदारनाथ सिंह की कविता 'बनारस' इस प्राचीन शहर के जीवंत स्वरूप और वहां होने वाले परिवर्तनों को रेखांकित करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

बनारस में वसंत का आगमन अन्य शहरों जैसा नहीं होता। यहाँ अचानक लहरतारा या मडुआडीह की तरफ से धूल का बवंडर उठता है।

भिखारियों के कटोरों में 'निचाट खालीपन' भर जाता है, अर्थात् उन्हें भी दान मिलने की उम्मीद जागती है।

दशाश्वमेध घाट पर भीड़ उमड़ पड़ती है और लोग श्रद्धा के साथ गंगा में स्नान करते हैं।

शहर के कण-कण में एक अजीब सी हलचल और ठिठकन एक साथ महसूस होती है, जो इसकी शाश्वत चेतना को दर्शाती है।


Step 3: Final Answer:

वसंत बनारस को उसकी आलस भरी नींद से जगाकर एक नई ऊष्मा और भक्तिमय ऊर्जा से भर देता है।
Quick Tip: 'बनारस' कविता में शहर की आध्यात्मिकता और आधुनिकता के अद्भुत मेल का वर्णन है।


Question 44:

कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

Correct Answer: यह गद्यांश जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित 'बालक बच गया' लघु कथा से लिया गया है। इसमें बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के दमन के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह पाठ शिक्षा पद्धति के उस दोष पर प्रहार करता है जहाँ बच्चों को उनकी उम्र से पहले ही 'विद्वान' बनाने का दबाव डाला जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

प्रसंग: एक आठ साल के बालक से जब ईनाम मांगा गया, तो उसके पिता और शिक्षक को उम्मीद थी कि वह कोई ज्ञानवर्धक पुस्तक मांगेगा, किंतु बालक ने अपनी सहज इच्छा से 'लड्डू' मांग लिया।

व्याख्या:

लेखक कहता है कि जब बालक ने 'लड्डू' कहा, तो वह उसके ऊपर थोपे गए ज्ञान के कृत्रिम बोझ (नकली परदे) का हटना था।

पिता और शिक्षक निराश थे क्योंकि उनकी महत्वाकांक्षा हार गई थी, लेकिन लेखक खुश था क्योंकि बालक के भीतर का 'बचपन' अभी मरा नहीं था।

बालक की सहज इच्छाएँ (लड्डू की मांग) प्रकृति के जीवंत रूप (हरे पत्तों की मर्मर) के समान हैं, जबकि रटा-रटाया ज्ञान निर्जीव काठ (अलमारी) की तरह बोझिल होता है।

बालक 'बच गया' का अर्थ है कि उसकी मौलिकता और मासूमियत शिक्षा के कठोर ढांचे में दबने से बच गई।


Step 3: Final Answer:

गद्यांश का मुख्य संदेश है कि शिक्षा को बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का पोषक होना चाहिए, शोषक नहीं।
Quick Tip: 'काठ की अलमारी' और 'हरे पत्तों की मर्मर' जैसे प्रतीकों का अर्थ स्पष्ट करना व्याख्या को प्रभावशाली बनाता है।


Question 45:

निराशा, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खाते सूरदास को ऐसा कौन सा मंत्र मिला कि रोते-रोते उठ खड़ा हो वह विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा ? 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के आधार पर लिखिए ।

Correct Answer: सूरदास को अपने पोते मिट्ठुआ की बात "खेल में रोते हो?" से जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा मिली। इसी ने उसे निराशा से उबारा।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह पाठ प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का अंश है, जो सूरदास के अदम्य साहस और जुझारू व्यक्तित्व को दर्शाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

भैरो ने सूरदास की झोंपड़ी जला दी थी और उसकी जीवन भर की जमापूँजी चोरी कर ली थी। सूरदास अत्यंत दुखी होकर हार मान चुका था।

तभी उसने बच्चों को खेलते हुए सुना। मिट्ठुआ जब खेल में हारकर रोने लगा, तो उसके साथी घीसू ने कहा - "खेल में रोते हो?"

ये शब्द सूरदास के हृदय में बिजली की तरह कौंध गए। उसे अहसास हुआ कि जीवन भी एक खेल है और खिलाड़ी हारने पर रोया नहीं करते।

खिलाड़ी का काम है फिर से खड़ा होना और फिर से खेलना। इसी बोध ने उसे 'विजय-गर्व' से भर दिया।

उसने संकल्प लिया कि वह अपनी झोंपड़ी फिर से बनाएगा, चाहे उसे सौ बार या हजार बार क्यों न जलाया जाए।


Step 3: Final Answer:

मिट्ठुआ की मासूम बात सूरदास के लिए एक महान जीवन-मंत्र बन गई, जिसने उसे एक बेबस अंधे भिखारी से एक अजेय योद्धा में बदल दिया।
Quick Tip: सूरदास का पात्र 'गाँधीवादी' विचारधारा और 'संघर्षशीलता' का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।


Question 46:

'बिस्कोहर की माटी' पाठ में वर्णित बरसात की तुलना अपने क्षेत्र की बरसात से कीजिए ।

Correct Answer: बिस्कोहर की बरसात प्रकृति के रौद्र और मोहक रूप का मेल है, जबकि आधुनिक क्षेत्रों की बरसात अक्सर जल-जमाव और असुविधा का कारण बनती है।
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Step 1: Understanding the Concept:

विश्वनाथ त्रिपाठी की आत्मकथा 'नंगातलाई का गाँव' से लिए गए इस पाठ में ग्रामीण जीवन और प्रकृति का सजीव चित्रण है।


Step 2: Detailed Explanation:

बिस्कोहर की बरसात: यहाँ की बरसात में बिजली कड़कती है, धरती से सोंधी महक उठती है और हरियाली छा जाती है।

लेखक ने बरसात में भीगने के साथ-साथ बिच्छू, सांप और बीमारियों के खतरे का भी वर्णन किया है। वहां लोग प्रकृति के सीधे संपर्क में रहते हैं।

हमारे क्षेत्र की बरसात: आज के शहरी या विकसित क्षेत्रों में बरसात का अर्थ जल-भराव, ट्रैफिक जाम और कीचड़ हो गया है।

हम लोग पक्के मकानों में सुरक्षित रहते हैं, इसलिए प्रकृति के उस कच्चे और असली रूप का आनंद नहीं ले पाते जो बिस्कोहर में मिलता है।

आज के समय में प्रदूषण के कारण 'पहली बारिश' में भीगना भी खतरनाक माना जाता है, जबकि बिस्कोहर में लोग इसे उत्सव की तरह मनाते थे।


Step 3: Final Answer:

बिस्कोहर की बरसात 'प्राकृतिक और साहसिक' है, जबकि हमारे क्षेत्र की बरसात 'सुविधा-असुविधा और कंक्रीट' के बीच सिमट गई है।
Quick Tip: तुलना करते समय 'प्रकृति बनाम आधुनिकता' के बिंदुओं को स्पष्ट करना आवश्यक है।


Question 47:

विकास की औद्योगिक सभ्यता के विनाश की अपसभ्यता बनने के क्या कारण हैं ? पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उपायों का उल्लेख कीजिए ।

Correct Answer: प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, विस्थापन और पर्यावरण की अनदेखी ही विकास को 'अपसभ्यता' (विनाशकारी सभ्यता) में बदल देती है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न आधुनिक विकास के मॉडल और उसके पारिस्थितिक परिणामों पर केंद्रित है।


Step 2: Detailed Explanation:

अपसभ्यता बनने के कारण:

1. अंधाधुंध शहरीकरण: पेड़ों की कटाई और कंक्रीट के जंगलों का निर्माण।

2. विस्थापन: बांधों और उद्योगों के नाम पर हज़ारों गांवों का विनाश और उनकी संस्कृति का नाश।

3. प्रदूषण: कारखानों का जहरीला पानी नदियों में मिलना।

संतुलन बनाए रखने के उपाय:

1. सतत विकास (Sustainable Development): विकास ऐसा हो जो भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता न करे।

2. वृक्षारोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाना और वनों का संरक्षण करना।

3. प्रदूषण नियंत्रण: कचरा प्रबंधन और जल शोधन प्रणालियों का प्रभावी उपयोग।

4. जन-जागरूकता: प्रकृति के प्रति मनुष्य की संवेदना को पुनर्जीवित करना।


Step 3: Final Answer:

सच्चा विकास वही है जो प्रकृति और मनुष्य के बीच सामंजस्य बिठा सके, अन्यथा वह केवल विनाश का मार्ग प्रशस्त करेगा।
Quick Tip: विकास की 'अपसभ्यता' का अर्थ है - वह विकास जो सभ्यता के आधार (प्रकृति) को ही नष्ट कर दे।

CBSE Class 12 Hindi Answer Key 2026 | Hindi All Set Solution | Hindi Paper Analysis

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