
CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 1 - 2/5/1) Question Paper 2026 with Solutions PDFs is available here for download. CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 1 - 2/5/1) Paper 2026 was held on 16 March, 2026. The question paper followed the latest syllabus and exam pattern prescribed by CBSE. The examination was conducted in the first half from 10:30 AM to 1:30 PM. Students can download the official paper in PDF format for reference.
| CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 1 - 2/5/1) Question Paper 2026 | Download PDF | Check Solutions |

जीवन के लिए जागना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी सोना है। दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे के सहारे चलती हैं। नींद का न आना भी एक विकार है, जिससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं और जो प्राणी रात-दिन सोता ही रहे, वह भी निष्क्रिय हो जाता है। यदि दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की सहायता करती रहें – आदमी जागे काम करने के लिए, सोए विश्राम के लिए – तो जीवन सुखी होता है, लेकिन जागना जीवन का मुख्य लक्षण है। सोना अर्थात् विश्राम, तो केवल उसका सहायक है। इसलिए, जागृति जीवन और समृद्धि का प्रतीक है और निद्रा पतन तथा ह्रास का। जागृति सृजनात्मक क्रिया है, निद्रा में संकुचन की संभावना रहती है।
कम-से-कम सोने के लिए अनेक उपाय और साधन बताए गए हैं। अधिक-से-अधिक सोने के लिए आज तक किसी ने कोई उपाय नहीं बताया – उसी तरह, जैसे स्वस्थ रहने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं, पर बीमार होने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाता। ऐसा कभी सुना में नहीं आया। वास्तव में स्वास्थ्य नहीं होना ही बीमारी है – उसी तरह, जैसे प्रकाश का न होना ही अंधकार है। आदमी जितना ही कम सोये उतना ही जाग्रत रहे, वहाँ तक कि कई विद्वानों का मत है कि सोना कोई आवश्यक क्रिया नहीं है। यह परिस्थितियों में सोने का अभ्यास बन गया है, उनकी प्रकृति में जड़ता आ गई है।
तम की संख्या जितनी अधिक होती जाती है, उतना ही अज्ञान बढ़ता है और साधारण प्राणियों के लिए भी यही नियम लागू होता है कि मात्रा से अधिक सोने से हानि है। अतएव जब हम किसी राष्ट्र के विषय में जागृति की कामना करते हैं, तो उसका अर्थ यह होता है कि वह राष्ट्र मात्रा से अधिक सोने में न लगे और उसमें जीवन की मात्रा जरूरत से कम न हो।
Question 1:
‘जागृति’ और ‘निद्रा’ किन गुणों से संबंधित हैं?
Step 1: Understanding the Concept:
भारतीय दर्शन और सांख्य योग के अनुसार, प्रकृति के तीन मुख्य गुण होते हैं: सत्त्व (सत), रजस (रज) और तमस् (तम)।
जागृति (चेतना) और निद्रा (सुषुप्ति) इन गुणों की प्रधानता को दर्शाती हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
1. ‘सत्त्व’ (सत) गुण प्रकाश, ज्ञान और जागृति का प्रतीक है। जब मनुष्य का मन शुद्ध और चैतन्य होता है, तो वह सत्त्व गुण की प्रधानता में होता है।
2. ‘तमस्’ (तम) गुण अंधकार, भारीपन, आलस्य और निद्रा का प्रतीक है। निद्रा की अवस्था में शरीर और मन निष्क्रिय हो जाते हैं, जो तम गुण का लक्षण है।
3. ‘रजस’ (रज) गुण क्रियाशीलता और चंचलता का प्रतीक है, जो जागने और सोने के बीच की सक्रिय अवस्था में होता है।
अतः, जागृति ‘सत’ से और निद्रा ‘तम’ गुण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
Step 3: Final Answer:
विकल्प (A) सही है क्योंकि जागृति का संबंध सत्त्व (सत) गुण से और निद्रा का संबंध तमस् (तम) गुण से है।
Quick Tip: याद रखें: सत्त्व = ज्ञान/प्रकाश (जागृति), तमस् = अंधकार/अज्ञान (निद्रा)। इन गुणों के मेल से ही मनुष्य की मानसिक अवस्थाएं निर्धारित होती हैं।
गद्यांश के अनुसार सोना अर्थात् निद्रा किसकी सहायक है?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न निद्रा (नींद) के जैविक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर आधारित है। सामान्यतः गद्यांशों में निद्रा को पुनः शक्ति संचय का माध्यम माना जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के परिप्रेक्ष्य में, निद्रा केवल निष्क्रियता नहीं है, बल्कि यह शरीर और मस्तिष्क को आराम देकर पुनर्जीवित करती है।
स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद अनिवार्य है क्योंकि यह शारीरिक कोशिकाओं की मरम्मत और मानसिक शांति में सहायक होती है।
यद्यपि निद्रा से विश्राम मिलता है, परंतु उसका मुख्य लक्ष्य शरीर को निरोग और क्रियाशील बनाए रखना (स्वास्थ्य) होता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, निद्रा स्वास्थ्य की सहायक है। विकल्प (A) सही उत्तर है।
Quick Tip: अपठित गद्यांशों में अक्सर जैविक क्रियाओं (जैसे सोना, खाना) को स्वास्थ्य और जीवन की निरंतरता से जोड़ा जाता है।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए:
कथन : जागना जीवन के लिए आवश्यक है।
कारण : जाग्रत हो ध्यानपूर्वक कर्म करने से ही, व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव है।
Step 1: Understanding the Concept:
यह कथन-कारण (Assertion-Reason) प्रकार का प्रश्न है जहाँ हमें दोनों वाक्यों की सत्यता और उनके बीच के तार्किक संबंध की जाँच करनी होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. कथन का विश्लेषण: "जागना जीवन के लिए आवश्यक है।" यह पूर्णतः सत्य है क्योंकि बिना सचेत हुए जीवन में उद्देश्य की प्राप्ति संभव नहीं है।
2. कारण का विश्लेषण: "जाग्रत हो ध्यानपूर्वक कर्म करने से ही... उन्नति संभव है।" यह भी सत्य है क्योंकि कर्म ही प्रगति का आधार है और कर्म के लिए जागृत होना अनिवार्य है।
3. संबंध की जाँच: चूँकि उन्नति के लिए जागृत होकर कर्म करना पड़ता है, इसीलिए जागना जीवन के लिए आवश्यक बताया गया है। अतः कारण, कथन की पुष्टि और व्याख्या करता है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या करता है। अतः विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: कथन-कारण वाले प्रश्नों में कथन के बाद 'क्योंकि' लगाकर कारण को पढ़ें। यदि वाक्य सार्थक लगता है, तो कारण व्याख्या कर रहा है।
‘जागृति’ और ‘निद्रा’ किसके प्रतीक हैं? गद्यांश के आधार पर बताइए।
Step 1: Understanding the Concept:
साहित्यिक और दार्शनिक संदर्भों में 'जागना' और 'सोना' केवल शारीरिक क्रियाएँ नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक अर्थ रखती हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के आधार पर, ‘जागृति’ मनुष्य की उस अवस्था का प्रतीक है जिसमें वह अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत रहता है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। यह प्रकाश और सक्रियता को दर्शाती है।
इसके विपरीत, ‘निद्रा’ केवल विश्राम नहीं, बल्कि मोह-माया, प्रमाद और अकर्मण्यता का प्रतीक है। जब समाज अपने लक्ष्यों के प्रति सो जाता है, तो वह पिछड़ जाता है।
Step 3: Final Answer:
जागृति सक्रियता और विकास का प्रतीक है, जबकि निद्रा निष्क्रियता और पतन का प्रतीक है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक प्रश्नों में शब्दों के गहरे अर्थ (Metaphorical meanings) को गद्यांश के संदर्भ में ढूँढने का प्रयास करें।
‘जागना’ और ‘सोना’ दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक कैसे हैं? स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
पूरक (Complementary) होने का अर्थ है कि एक के बिना दूसरे का महत्व या अस्तित्व अधूरा है।
Step 2: Detailed Explanation:
जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए श्रम (जागना) और विश्राम (सोना) दोनों आवश्यक हैं।
यदि मनुष्य केवल जागता रहेगा, तो उसका शरीर और मन थक जाएगा और वह कुशलता से कार्य नहीं कर पाएगा।
निद्रा के दौरान शरीर ऊर्जा का संचय करता है, जिससे जागने पर मनुष्य नई स्फूर्ति के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ सकता है।
अतः, निद्रा जागृति को प्रभावी बनाती है और जागृति जीवन को उद्देश्य देती है।
Step 3: Final Answer:
ये दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं क्योंकि निद्रा से प्राप्त विश्राम ही जागृत अवस्था में कर्म करने की सामर्थ्य प्रदान करता है।
Quick Tip: जब 'पूरक' शब्द आए, तो उत्तर में दोनों के बीच के 'सकारात्मक संबंध' और 'एक-दूसरे पर निर्भरता' को स्पष्ट करें।
लेखक के अनुसार ‘किसी राष्ट्र की जागृति’ का क्या तात्पर्य है? उल्लेख कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ लेखक ने व्यक्ति की चेतना को राष्ट्र के व्यापक परिप्रेक्ष्य में जोड़ा है।
Step 2: Detailed Explanation:
किसी राष्ट्र की जागृति का तात्पर्य केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं है, बल्कि उस राष्ट्र के जनमानस की जागृति से है।
जब किसी देश के नागरिक अंधविश्वास, अज्ञान और आलस्य को त्याग कर विज्ञान, शिक्षा और नैतिकता के मार्ग पर चलते हैं, तब उसे 'राष्ट्र की जागृति' कहा जाता है।
लेखक के अनुसार, सचेत नागरिक ही एक मजबूत और उन्नत राष्ट्र की नींव रखते हैं।
Step 3: Final Answer:
राष्ट्र की जागृति का अर्थ नागरिकों की चेतना, कर्मठता और सामूहिक उन्नति की भावना से है।
Quick Tip: राष्ट्र संबंधी प्रश्नों में हमेशा 'सामूहिकता' और 'नैतिक जिम्मेदारी' जैसे शब्दों का प्रयोग उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।
निद्रा को किस गुण की प्रधानता से जोड़ा गया है और क्यों?
Step 1: Understanding the Concept:
भारतीय मनोविज्ञान (त्रिगुण सिद्धांत) के अनुसार गुणों का स्वभाव मानसिक अवस्था को परिभाषित करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
निद्रा को ‘तम’ गुण से इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि तम गुण का मुख्य लक्षण भारीपन, अज्ञान और स्थिरता है।
नींद के समय ज्ञानेंद्रियाँ और कर्मेंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं, जिससे बाहरी जगत का बोध नहीं रहता।
यह अवस्था चेतना की अनुपस्थिति या निम्न स्तर को दर्शाती है, जिसे दर्शनशास्त्र में 'तमस' की प्रधानता माना गया है।
Step 3: Final Answer:
निद्रा को ‘तम’ गुण से जोड़ा गया है क्योंकि यह शरीर और मस्तिष्क को निष्क्रिय कर अज्ञान और विश्राम की स्थिति में ले जाता है।
Quick Tip: तम = अंधकार/निद्रा; रज = क्रिया/उत्तेजना; सत = ज्ञान/प्रकाश। इस सूत्र को याद रखने से ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना सरल हो जाता है।
इस काव्यांश का केंद्रीय भाव है :
Step 1: Understanding the Concept:
काव्यांश का केंद्रीय भाव वह मुख्य विचार या संदेश होता है जिसे कवि पूरी कविता के माध्यम से व्यक्त करना चाहता है।
प्रस्तुत काव्यांश समाज में समानता और प्राकृतिक संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की वकालत करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश के माध्यम से कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि यह पृथ्वी और प्रकृति किसी एक व्यक्ति की बपौती नहीं है।
प्रकृति ने सभी को समान रूप से संसाधन दिए हैं, परंतु मानवीय लालच ने इसे 'मेरी और तुम्हारी' सीमाओं में बाँध दिया है।
कवि का मुख्य बल इस बात पर है कि भूमि एक साझा विरासत है और इस पर प्रत्येक जीव का समान अधिकार होना चाहिए।
विकल्प (A), (B) और (D) केवल आंशिक या तकनीकी पहलुओं को छूते हैं, जबकि (C) काव्यांश की मूल संवेदना को व्यक्त करता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, काव्यांश का केंद्रीय भाव भूमि पर सबका समान अधिकार होना है। विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: केंद्रीय भाव ढूँढने के लिए कविता के उन शब्दों पर ध्यान दें जो बार-बार दोहराए गए हों या जिन पर कवि ने सबसे अधिक जोर दिया हो।
“प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए” इस पंक्ति से कवि का अभिप्राय है :
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्रकृति और मानव के बीच के संबंध और संसाधनों के स्वामित्व की अवधारणा पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
पंक्ति "प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए" यह स्पष्ट करती है कि हवा, पानी और जमीन जैसे संसाधन संपूर्ण जीव जगत के लिए हैं, न कि किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए।
जब कोई वस्तु 'जीवमात्र' के लिए होती है, तो उसका अर्थ 'सामूहिक स्वामित्व' (Collective Ownership) होता है।
व्यक्तिगत अधिकार (A) इस पंक्ति के बिल्कुल विपरीत है क्योंकि वह निजी संपत्ति को बढ़ावा देता है।
जातीय और धार्मिक आधार (B, C) प्रकृति के सार्वभौमिक नियम में कोई स्थान नहीं रखते।
Step 3: Final Answer:
यहाँ कवि का तात्पर्य सामूहिक स्वामित्व से है, जहाँ प्रकृति के संसाधनों का उपभोग सभी मिल-जुलकर कर सकें। विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: 'जीवमात्र' शब्द का अर्थ है 'सभी जीवित प्राणी'। जब लाभ सभी के लिए हो, तो अधिकार भी सामूहिक ही होता है।
“माता के आँचल को दाँतों से चीरना” इस पंक्ति का आज के संदर्भ में सटीक अर्थ क्या है ?
Step 1: Understanding the Concept:
कविताओं में अक्सर 'धरती' को 'माता' और उसकी हरियाली को उसका 'आँचल' माना जाता है। इस रूपक (Metaphor) का प्रयोग विनाश को दर्शाने के लिए किया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
'आँचल को चीरना' एक अत्यंत पीड़ादायक और नकारात्मक कृत्य का प्रतीक है।
आज के युग में मनुष्य अपने स्वार्थ और औद्योगिकीकरण के लिए प्रकृति के हरित आवरण (वनों) को नष्ट कर रहा है।
वनों की अंधाधुंध कटाई धरती माता के आँचल को फाड़ने के समान है, क्योंकि यह पर्यावरण के सुरक्षा चक्र को नष्ट कर देता है।
अन्य विकल्प (A, C, D) सकारात्मक और संरक्षणवादी प्रयासों को दर्शाते हैं, जो इस मुहावरे के भाव से मेल नहीं खाते।
Step 3: Final Answer:
यह पंक्ति वनों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक दोहन की ओर संकेत करती है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: नकारात्मक शब्दावली (जैसे चीरना, फाड़ना) हमेशा पर्यावरण के विनाश या शोषण से संबंधित अर्थों को प्रकट करती है।
यदि ‘भूमि यह मेरी है’ की भावना समाज में व्याप्त नहीं होगी तो दुनिया की संरचना कैसी होगी ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वामित्व (Ownership) की भावना के सामाजिक प्रभावों पर विचार करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
यदि समाज में 'मेरा-तेरा' और व्यक्तिगत अधिकार का भाव समाप्त हो जाए, तो भूमि विवाद और युद्धों का अंत हो जाएगा।
दुनिया की संरचना एक 'वैश्विक परिवार' (Vasudhaiva Kutumbakam) की तरह होगी जहाँ संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार होगा, न कि लालच के अनुसार।
इससे आर्थिक असमानता कम होगी और मनुष्य के बीच आपसी भाईचारा और सहयोग बढ़ेगा।
Step 3: Final Answer:
दुनिया की संरचना द्वेषरहित, शांतिपूर्ण और सामूहिक कल्याण पर आधारित होगी।
Quick Tip: ऐसे वैचारिक प्रश्नों में उत्तर देते समय 'सकारात्मक बदलाव' और 'सामूहिक हित' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
‘दुनिया का सबसे बड़ा अधम’ किसे कहा गया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
'अधम' शब्द का प्रयोग अनैतिक और स्वार्थी व्यक्ति के लिए किया जाता है जो सार्वजनिक हित के विरुद्ध कार्य करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश के संदर्भ में, वह व्यक्ति अधम है जो धरती माता के उपहारों (जल, थल, नभ) को अपनी निजी संपत्ति मान लेता है।
चूँकि प्रकृति निःशुल्क और सभी के लिए है, इसलिए उस पर बाड़ लगाना या उसे केवल अपने लिए सुरक्षित कर लेना मानवता के प्रति अपराध है।
ऐसे स्वार्थी लोग समाज में गरीबी और शोषण को जन्म देते हैं, इसलिए उन्हें सबसे बड़ा अधम माना गया है।
Step 3: Final Answer:
स्वार्थी और संसाधनों का संचय करने वाला व्यक्ति ही 'अधम' है क्योंकि वह प्रकृति के न्यायसंगत वितरण को भंग करता है।
Quick Tip: हिंदी साहित्य में 'अधम' शब्द अक्सर अहंकार और परोपकार की कमी वाले व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त होता है।
‘टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़’ पंक्ति में किन लोगों पर व्यंग्य किया गया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
'शरीफ़' शब्द का यहाँ व्यंग्यात्मक प्रयोग है, जो उन लोगों के लिए है जो अपनी शांति और छवि बचाने के लिए गलत के विरुद्ध आवाज नहीं उठाते।
Step 2: Detailed Explanation:
जब शक्तिशाली और स्वार्थी लोग प्रकृति का दोहन कर रहे थे और भूमि का बँटवारा कर रहे थे, तब समाज का शिक्षित और सभ्य वर्ग मूकदर्शक बना रहा।
वे अन्याय को देखते रहे ('टुकुर-टुकुर ताकते') पर उन्होंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।
लेखक का व्यंग्य यह है कि ऐसी 'शरीफ़' चुप्पी वास्तव में अत्याचारियों को बढ़ावा देती है और पर्यावरण के विनाश का कारण बनती है।
Step 3: Final Answer:
व्यंग्य उन निष्क्रिय लोगों पर है जो अपनी नैतिकता को केवल दिखावे तक सीमित रखते हैं और अन्याय के विरुद्ध निष्क्रिय रहते हैं।
Quick Tip: व्यंग्य (Satire) की पहचान करने के लिए देखें कि कवि शब्दों के सीधे अर्थ के बजाय उनके विपरीत या छिपे हुए कड़वे सच की बात कर रहा है।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
स्वच्छता : आज की आवश्यकता
Step 1: Understanding the Concept:
यह रचनात्मक लेखन का प्रश्न है, जिसमें दिए गए विषय पर तार्किक और प्रभावशाली ढंग से विचार प्रकट करने होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
स्वच्छता का अर्थ है मन, शरीर और अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखना।
आज के युग में बढ़ते प्रदूषण और नई बीमारियों के दौर में स्वच्छता 'आज की सबसे बड़ी आवश्यकता' बन गई है।
महात्मा गांधी ने कहा था कि "स्वच्छता स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है।"
जब हम अपने परिवेश को साफ रखते हैं, तो न केवल हम बीमारियों से बचते हैं, बल्कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
भारत सरकार द्वारा चलाया गया 'स्वच्छ भारत अभियान' इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसने जन-जन को सफाई के प्रति जागरूक किया है।
गीले और सूखे कचरे का सही निस्तारण, प्लास्टिक का कम उपयोग और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
यदि हर नागरिक स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले, तो हमारा राष्ट्र निरोग और विकसित बनेगा।
Step 3: Final Answer:
स्वच्छता के माध्यम से ही हम एक स्वस्थ, सुंदर और समृद्ध भविष्य की नींव रख सकते हैं। यह हर नागरिक का संकल्प होना चाहिए।
Quick Tip: रचनात्मक लेख लिखते समय प्रसिद्ध उद्धरणों (Quotes) का प्रयोग करें और विषय को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़ें।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
प्रकृति से टूटता नाता
Step 1: Understanding the Concept:
यह विषय मनुष्य और पर्यावरण के बदलते संबंधों और उनके दुष्परिणामों पर प्रकाश डालता है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्राचीन काल में मनुष्य प्रकृति की गोद में पलता था और उसे पूजता था।
किंतु आज शहरीकरण और औद्योगिकीकरण ने हमें कंक्रीट के जंगलों में कैद कर दिया है।
मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधाओं के लिए वनों को काटा और नदियों को प्रदूषित किया।
इसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा और लुप्त होते जीव-जंतुओं के रूप में हमारे सामने है।
प्रकृति से नाता टूटने का अर्थ केवल पर्यावरण का नुकसान नहीं है, बल्कि यह हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है।
ताजी हवा और हरियाली की जगह अब एयर कंडीशनर और गैजेट्स ने ले ली है।
समय आ गया है कि हम फिर से प्रकृति की ओर लौटें, वृक्षारोपण करें और सतत विकास (Sustainable Development) के मार्ग को अपनाएं।
Step 3: Final Answer:
प्रकृति के बिना मानव जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है; अतः प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है।
Quick Tip: पर्यावरण संबंधी लेख में 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट' (सतत विकास) जैसे शब्दों का प्रयोग उत्तर को मानक बनाता है।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
मोबाइल में कैद जीवन
Step 1: Understanding the Concept:
यह विषय तकनीक के अत्यधिक उपयोग और उसके सामाजिक व व्यक्तिगत प्रभावों पर केंद्रित है।
Step 2: Detailed Explanation:
आज मोबाइल फोन हमारी बुनियादी जरूरत बन गया है, लेकिन इसकी अति ने हमें इसका गुलाम बना दिया है।
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, मनुष्य की दुनिया मोबाइल के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
सोशल मीडिया के आभासी संसार में खोकर हम अपने बगल में बैठे व्यक्ति से बात करना भूल गए हैं।
बच्चों का खेल के मैदान से नाता टूट गया है और बड़ों की फुर्सत मोबाइल की स्क्रॉलिंग में बीत रही है।
इससे न केवल आंखों की रोशनी और एकाग्रता पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि अवसाद और अकेलेपन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
मोबाइल एक साधन होना चाहिए, न कि हमारा मालिक। हमें तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करना सीखना होगा।
Step 3: Final Answer:
हमें मोबाइल की कैद से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया के रिश्तों और अनुभवों का आनंद लेना चाहिए।
Quick Tip: गैजेट्स और तकनीक पर आधारित लेख में 'आभासी दुनिया' (Virtual World) बनाम 'वास्तविक दुनिया' का अंतर स्पष्ट करना प्रभावशाली रहता है।
‘रेडियो ध्वनि, स्वर व शब्दों का खेल है’ – कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रेडियो संचार का एक ऐसा माध्यम है जहाँ श्रोता केवल सुन सकता है, देख नहीं सकता।
Step 2: Detailed Explanation:
1. ध्वनि: रेडियो में ध्वनि (Sound effects) का बहुत महत्व है। जैसे- बारिश की आवाज या दरवाजे के खुलने की आवाज से स्थिति का पता चलता है।
2. स्वर: प्रस्तोता (Broadcaster) की आवाज का उतार-चढ़ाव (Modulation) भावनाओं को व्यक्त करता है। स्वर में उत्साह या दुख होने से श्रोता जुड़ाव महसूस करता है।
3. शब्द: चूँकि यहाँ चित्र नहीं होते, इसलिए शब्दों का चयन ऐसा होना चाहिए जो श्रोता के मन में चित्र बना सके (Imagery)।
Step 3: Final Answer:
इन तीनों के सटीक मेल से ही रेडियो का संदेश प्रभावी बनता है, इसीलिए इसे ध्वनि, स्वर और शब्दों का खेल कहा जाता है।
Quick Tip: रेडियो के उत्तर में 'श्रव्य माध्यम' (Audio Medium) और 'कल्पनाशीलता' (Imagination) शब्दों का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।
‘एंकर विज़ुअल’ का क्या अभिप्राय है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह टेलीविज़न पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण शब्दावली है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब समाचार के बारे में कुछ सूचनाएं प्राप्त हो जाती हैं, तो एंकर उन प्राप्त दृश्यों (Visuals) के आधार पर खबर पढ़ता है।
इसमें पहले एंकर खबर की मुख्य बात बताता है और फिर उस घटना से संबंधित वीडियो या फुटेज दिखाए जाते हैं।
यह खबर को प्रामाणिकता प्रदान करता है क्योंकि दर्शक घटना को अपनी आँखों से देख पा रहे होते हैं।
Step 3: Final Answer:
एंकर द्वारा विज़ुअल्स (दृश्यों) के साथ समाचार पढ़ना ही 'एंकर विज़ुअल' कहलाता है।
Quick Tip: टीवी पत्रकारिता के चरणों को याद रखें: फ्लैश (ब्रेकिंग न्यूज), ड्राई एंकर, फोन-इन, एंकर विज़ुअल, एंकर बाइट।
‘नेट साउंड’ किसे कहते हैं ? दूरदर्शन के संदर्भ में समझाइए।
Step 1: Understanding the Concept:
दृश्य माध्यमों में वास्तविकता का प्रभाव पैदा करने के लिए केवल वॉयस ओवर काफी नहीं होता, परिवेश की ध्वनियां भी जरूरी होती हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
जब दूरदर्शन के लिए कोई रिपोर्टिंग की जाती है, तो रिपोर्टर की आवाज के पीछे चिड़ियों का चहचहाना, गाड़ियों का शोर या लोगों की बातें सुनाई देती हैं।
इन वास्तविक ध्वनियों को ही 'नेट साउंड' या 'प्राकृतिक ध्वनि' कहते हैं।
यह खबर को जीवंत बनाता है और दर्शक को ऐसा महसूस होता है जैसे वह खुद उस जगह पर मौजूद है।
Step 3: Final Answer:
नेट साउंड खबर के दृश्यों को प्रामाणिक और प्रभावशाली बनाने के लिए आवश्यक ध्वनि प्रभाव है।
Quick Tip: नेट साउंड = नेचुरल साउंड। यह 'वॉयस ओवर' से अलग होता है जो बाद में स्टूडियो में रिकॉर्ड किया जाता है।
समाचार लेखन की मानक शैली कौन-सी है ? इसकी विशेषताएँ बताइए।
Step 1: Understanding the Concept:
दुनिया भर में समाचार लिखने का एक विशिष्ट ढांचा अपनाया जाता है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य को प्राथमिकता दी जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
विशेषताएँ:
1. महत्वपूर्ण जानकारी पहले: इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात पहले लिखी जाती है और फिर घटते क्रम में जानकारी दी जाती है।
2. तीन हिस्से: इसके तीन मुख्य भाग होते हैं— मुखड़ा (Lead/Intro), बॉडी और समापन।
3. निष्कर्ष का अभाव: इस शैली में कहानी की तरह कोई क्लाइमेक्स अंत में नहीं होता।
Step 3: Final Answer:
उल्टा पिरामिड शैली समाचार लेखन की सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय शैली है।
Quick Tip: उल्टा पिरामिड शैली में 6 ककारों (क्या, कब, कहाँ, कौन, क्यों, कैसे) का प्रयोग किया जाता है।
समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विशेष लेखन के लिए अलग डेस्क क्यों होती है ? कारण सहित बताइए।
Step 1: Understanding the Concept:
विशेष लेखन (Specialized Reporting) सामान्य खबरों से अलग होता है और इसमें किसी विषय का गहन विश्लेषण किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. विशेषज्ञता (Expertise): खेल, अर्थशास्त्र, विज्ञान या कला जैसे विषयों के लिए विशेष ज्ञान की जरूरत होती है।
2. कार्य विभाजन: अलग डेस्क होने से काम का बंटवारा स्पष्ट होता है और खबरों की गुणवत्ता बनी रहती है।
3. पाठकों की रुचि: कुछ पाठक केवल खेल या बिजनेस की खबरें पढ़ना चाहते हैं, अलग डेस्क से उन्हें सटीक जानकारी मिलती है।
Step 3: Final Answer:
जटिल विषयों के सरल और सटीक विश्लेषण के लिए समाचार पत्रों में विशेष डेस्क (जैसे- खेल डेस्क, आर्थिक डेस्क) अनिवार्य है।
Quick Tip: विशेष लेखन = सामान्य लेखन + विशेषज्ञता। यह सूत्र याद रखने से उत्तर लिखना आसान हो जाएगा।
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए उल्लेख कीजिए कि अभिव्यक्ति के अधिकार में लेखन किस प्रकार सहायक है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सृजनात्मकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्संबंध पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अभिप्राय: नए और अप्रत्याशित विषय वे होते हैं जिनके बारे में पहले से तैयारी नहीं होती। ऐसे विषयों पर लेखन रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर मौलिक चिंतन (Original Thinking) को बढ़ावा देता है।
अभिव्यक्ति के अधिकार में सहायता:
1. लेखन मनुष्य को अपने विचारों को बिना किसी डर के स्पष्ट रूप से रखने का साहस देता है।
2. यह व्यक्ति की तर्क शक्ति को बढ़ाता है जिससे वह समाज और राजनीति के विभिन्न पहलुओं पर अपनी स्वतंत्र राय बना पाता है।
3. जब कोई व्यक्ति नए विषयों पर लिखता है, तो वह अपनी आंतरिक संवेदनाओं और अनुभवों को शब्द देता है, जो लोकतंत्र में एक सशक्त नागरिक की पहचान है।
Step 3: Final Answer:
नए विषयों पर लेखन न केवल रचनात्मकता बढ़ाता है, बल्कि अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को सार्थक भी करता है।
Quick Tip: अभिव्यक्ति का अर्थ है 'प्रकट करना'। लेखन इसी 'प्रकट करने' की प्रक्रिया को व्यवस्थित और स्थाई बनाता है।
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
Step 1: Understanding the Concept:
कहानी एक वर्णन (Narration) प्रधान विधा है, जबकि नाटक एक दृश्य (Visual) और अभिनय प्रधान विधा है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. दृश्य विभाजन: कहानी की घटनाओं को अलग-अलग दृश्यों में बांटना चाहिए ताकि उन्हें मंच पर दिखाया जा सके।
2. संवाद लेखन: कहानी के वर्णनात्मक हिस्सों को प्रभावशाली संवादों (Dialogues) में बदलना चाहिए।
3. द्वंद्व (Conflict): नाटक के लिए संघर्ष या द्वंद्व बहुत जरूरी है, इसलिए कहानी के तनावपूर्ण बिंदुओं को मंच पर उभारना चाहिए।
4. मंच सज्जा व निर्देश: रूपांतरण करते समय प्रकाश व्यवस्था और पात्रों की गतिविधियों के निर्देश स्पष्ट होने चाहिए।
Step 3: Final Answer:
कहानी के मूल कथ्य को सुरक्षित रखते हुए उसे दृश्यात्मक और संवादात्मक बनाना ही सफल नाट्य रूपांतरण की कुंजी है।
Quick Tip: याद रखें: कहानी पढ़ी/सुनी जाती है, नाटक देखा जाता है। अतः 'दृश्यात्मकता' सबसे जरूरी तत्व है।
रेडियो नाटकों में संवादों पर विशेष ध्यान देना क्यों आवश्यक है ? तर्क सहित लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रेडियो नाटक केवल श्रवण इंद्रियों के लिए होता है, इसलिए भाषा ही वहाँ 'आँखें' बनती है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. दृश्य निर्माण: संवादों के माध्यम से ही पता चलता है कि पात्र कहाँ खड़े हैं (जैसे- "कितना सुंदर पहाड़ है")।
2. चरित्र चित्रण: पात्र की भाषा, लहजे और शब्दों के चयन से उसकी उम्र, सामाजिक स्थिति और स्वभाव का पता चलता है।
3. कथानक की गति: रेडियो में लंबी खामोशी 'डेड एयर' कहलाती है, इसलिए संवादों के जरिए ही कहानी को आगे बढ़ाना पड़ता है।
4. स्पष्टता: संवाद संक्षिप्त और सरल होने चाहिए ताकि श्रोता उलझ न जाए।
Step 3: Final Answer:
रेडियो नाटक में संवाद ही 'सब कुछ' होते हैं, जो दृश्यहीन होने की कमी को पूरा करते हैं।
Quick Tip: रेडियो नाटक के संवादों में 'एक्शन' शब्दों का प्रयोग करें ताकि श्रोता बिना देखे ही गतिविधि को समझ सके।
‘छोटा मेरा खेत’ कविता के मूल भाव के बारे में सही कथन है :
Step 1: Understanding the Concept:
कवि उमाशंकर जोशी ने इस कविता में रूपक अलंकार के माध्यम से रचना प्रक्रिया (सृजन कर्म) की तुलना कृषि कार्य से की है।
Step 2: Detailed Explanation:
यहाँ 'खेत' कागज़ का पन्ना है और 'बीज' विचार या अभिव्यक्ति का क्षण है।
लेखक स्पष्ट करता है कि जिस प्रकार फसल पककर कट जाती है, परंतु कविता की फसल 'अनंत' होती है।
कविता का रस कभी समाप्त नहीं होता और वह युगों-युगों तक पाठकों को आनंद देती रहती है।
अतः यह सृजन (Creation) के अमर और शाश्वत (Eternal) होने का संदेश देती है।
Step 3: Final Answer:
सही उत्तर विकल्प (D) है।
Quick Tip: जब भी 'अनंतता' या 'लुटने पर कम न होना' जैसे शब्द आएं, तो समझ लें कि बात साहित्य की कालजयी (Timeless) प्रकृति की हो रही है।
कविता की रचना-प्रक्रिया के संदर्भ में ‘अंधड़’ क्या है ?
Step 1: Understanding the Concept:
कविता की रचना अचानक मन में उठने वाले विचारों या भावनाओं के तूफान से शुरू होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि 'अंधड़' शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप से भावनाओं के तीव्र प्रवाह के लिए करता है।
जैसे अंधड़ बीज को उड़ाकर कहीं से लाता है, वैसे ही मन में उठा भावों का आवेग हृदय में कविता का बीज बो देता है।
विकल्प (A), (B) और (D) तकनीकी पक्ष हैं, जबकि अंधड़ एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है।
Step 3: Final Answer:
अंधड़ का अर्थ भावनाओं का वह तीव्र वेग है जो सृजन की प्रेरणा देता है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: सृजनात्मक विषयों में प्राकृतिक उपमाओं (जैसे अंधड़, घटा) का प्रयोग अक्सर आंतरिक मानसिक अवस्थाओं के लिए किया जाता है।
कवि अपने छोटे खेत में कौन-से बीज बोता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ 'बीज' शब्द एक प्रतीक है जो कविता की मूल विचार-वस्तु (Idea) को दर्शाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि का खेत कागज़ का पन्ना है। इस पन्ने पर वह अनाज के बीज नहीं, बल्कि अपने अनुभवों और विचारों के बीज बोता है।
यही विचार कल्पना के रसायनों से मिलकर शब्द रूपी अंकुर के रूप में विकसित होते हैं।
Step 3: Final Answer:
कवि विचारों के बीज बोता है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: कविता में 'विचार' ही वह मूल इकाई है जिससे पूरी रचना का विकास होता है।
कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है ?
Step 1: Understanding the Concept:
पूरी कविता एक विस्तारित रूपक (Extended Metaphor) है जहाँ लेखन और खेती की प्रक्रियाओं में समानता दिखाई गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
खेत = कागज़ का पन्ना।
खेती का बीज = विचार/क्षण का बीज।
खाद-पानी = कल्पना के रसायन।
फसल = तैयार कविता।
जिस प्रकार किसान मेहनत कर फसल उगाता है, कवि भी मानसिक श्रम से कविता का सृजन करता है।
Step 3: Final Answer:
अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'आरोह' भाग 2 की इस कविता का मुख्य आधार ही 'लेखन बनाम कृषि' की तुलना है।
‘कटाई अनंतता की’ का प्रतीकार्थ है :
Step 1: Understanding the Concept:
खेती की फसल एक बार कटने पर समाप्त हो जाती है, परंतु कविता का आनंद कभी खत्म नहीं होता।
Step 2: Detailed Explanation:
'अनंतता की कटाई' का अर्थ है कि कविता से मिलने वाला रस और ज्ञान शाश्वत है।
एक बार रची गई श्रेष्ठ कविता सदियों तक पाठकों द्वारा पढ़ी और सराही जाती है।
यह समय की सीमाओं (काल) को जीत लेती है, इसीलिए इसे 'कालजयी' (Timeless) कहा जाता है।
Step 3: Final Answer:
साहित्य का प्रभाव और अस्तित्व कभी खत्म नहीं होता। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: 'कालजयी' वह होता है जो समय की परवाह किए बिना हमेशा प्रासंगिक बना रहे।
फूलों के खिलने से कविता का क्या संबंध है ? ‘कविता के बहाने’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
कुँवर नारायण की कविता 'कविता के बहाने' में कविता की अपार संभावनाओं की तुलना प्रकृति के विभिन्न रूपों से की गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि कहता है कि फूल खिलते हैं और अपनी सुगंध फैलाते हैं, पर एक समय के बाद वे मुरझा जाते हैं।
फूल के खिलने और सुगंध फैलाने की एक निश्चित समय सीमा और सीमा (Location) होती है।
दूसरी ओर, कविता एक बार 'खिल' जाए (रच दी जाए), तो वह बिना मुरझाए हमेशा महकती रहती है।
फूल 'मुरझाकर' खत्म हो जाता है, पर कविता बिना मुरझाए सदियों तक घर-आँगन महकाती है।
Step 3: Final Answer:
फूलों का खिलना कविता के सृजन का बहाना तो बन सकता है, पर कविता के खिलने की कोई समय सीमा नहीं होती।
Quick Tip: 'कविता के बहाने' का मुख्य संदेश है: कविता की कोई सीमा नहीं होती (न स्थान की, न काल की)।
“कैमरे में बंद अपाहिज” कविता हर ऐसे व्यक्ति की ओर इशारा करती है, जो दुख-दर्द, यातना-वेदना को बेचना चाहता है।” कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रघुवीर सहाय की यह कविता दिखाती है कि कैसे किसी की मजबूरी का उपयोग टेलीविजन रेटिंग (TRP) बढ़ाने के लिए किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
मीडिया कर्मी एक दिव्यांग व्यक्ति को स्टूडियो में बुलाते हैं और उससे बेतुके प्रश्न पूछते हैं जैसे "आप अपाहिज होकर कैसा महसूस करते हैं?"।
उनका उद्देश्य उस व्यक्ति की पीड़ा को दूर करना नहीं, बल्कि उसे रुलाकर दर्शकों की सहानुभूति बटोरना है।
यह 'यातना को बेचना' है क्योंकि यहाँ मानवीय संवेदना से अधिक महत्व व्यावसायिक सफलता को दिया जा रहा है।
कवि इस क्रूरता को 'करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता' कहता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, यह कविता व्यावसायिक लाभ के लिए दूसरों के दुख के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करती है।
Quick Tip: इस कविता के उत्तर में 'संवेदनहीनता' और 'व्यावसायिकता' (Commercialization) शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
‘कवितावली’ में तुलसीदास ने अपने समाज की किन सामाजिक बुराइयों का उल्लेख किया है ?
Step 1: Understanding the Concept:
तुलसीदास केवल भक्त कवि नहीं थे, बल्कि वे समाज के सूक्ष्म दृष्टा भी थे। 'कवितावली' के उत्तरकांड में उनके समय की आर्थिक बदहाली का यथार्थ चित्रण है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. बेरोजगारी: किसान के पास खेती नहीं थी, भिखारी को भीख नहीं मिलती थी और व्यापारियों का व्यापार ठप था।
2. भुखमरी: लोग पेट की आग बुझाने के लिए इतने लाचार थे कि वे अपने बच्चों तक को बेचने के लिए विवश थे।
3. नैतिक पतन: भूख के कारण लोग धर्म-अधर्म का विचार छोड़कर किसी भी कार्य को करने को तैयार थे।
तुलसीदास के अनुसार, इस 'पेट की आग' को केवल राम रूपी घनश्याम (बादल) की कृपा ही शांत कर सकती है।
Step 3: Final Answer:
तुलसीदास ने तत्कालीन समाज में व्याप्त अकाल, बेकारी और दरिद्रता का मार्मिक चित्रण किया है।
Quick Tip: तुलसीदास की आर्थिक दृष्टि को समझने के लिए 'पेट की आग' और 'राम की कृपा' के बीच के संबंध को ध्यान में रखें।
संसार में विभिन्न कष्टों और दु:खों से घिरकर भी अपने आस-पास खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है ? ‘आत्म परिचय’ कविता के आधार पर बताइए।
Step 1: Understanding the Concept:
हरिवंश राय बच्चन की यह कविता व्यक्तिवाद और प्रेम के दर्शन पर आधारित है, जहाँ कवि कष्टों को स्वीकार करते हुए जीने की कला सिखाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि कहता है कि वह "जग-जीवन का भार" लेकर चलता है, फिर भी उसके जीवन में प्रेम की तरंग है।
1. प्रेम का संचार: यदि हम अपने हृदय में सबके लिए प्रेम रखें, तो दुनिया की कड़वाहट हमें प्रभावित नहीं करेगी।
2. संतोष: कवि सांसारिक अभावों की परवाह नहीं करता। वह अपनी मस्ती में मस्त रहता है ("मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ")।
3. स्वयं की पहचान: दुनिया क्या कहेगी, इसकी चिंता छोड़कर अपनी धुन में रहने से ही खुशी का माहौल बन सकता है।
Step 3: Final Answer:
सकारात्मक सोच और प्रेमपूर्ण व्यवहार ही कष्टों के बीच भी मस्ती और खुशी का वातावरण बना सकते हैं।
Quick Tip: 'आत्म परिचय' का सार है - दुनिया को प्रेम से जीतना और स्वयं के अस्तित्व का आनंद लेना।
‘पतंग’ कविता में कवि ने बाल-मनोविज्ञान को किस प्रकार चित्रित किया है ?
Step 1: Understanding the Concept:
आलोक धन्वा की कविता 'पतंग' बच्चों की इच्छाओं और उनकी दुनिया के सुंदर बिंब प्रस्तुत करती है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. चंचलता और उमंग: शरद ऋतु के आगमन पर बच्चे उत्साहित होकर पतंग उड़ाते हैं। उनकी खुशी की कोई सीमा नहीं रहती।
2. निर्भयता: बच्चे पतंग उड़ाते समय छतों के खतरनाक किनारों पर भी बेख़ौफ़ दौड़ते हैं। उन्हें गिरने का डर नहीं होता, बल्कि वे गिरकर और भी निडर हो जाते हैं।
3. कल्पनाशीलता: जैसे पतंग आकाश की ऊंचाइयों को छूती है, वैसे ही बच्चों के सपने भी ऊंचे होते हैं।
4. एकाग्रता: पतंग उड़ाते समय उनका पूरा ध्यान केवल उस धागे और पतंग की गति पर होता है, जो उनकी तन्मयता को दिखाता है।
Step 3: Final Answer:
कविता बच्चों के कोमल मन और उनकी साहसी प्रवृत्तियों का जीवंत चित्रण करती है।
Quick Tip: पतंग उड़ाना बच्चों की कल्पनाओं और उनकी 'हदों' को पार करने की इच्छा का प्रतीक है।
कवि बादल का आह्वान किस रूप में कर रहा है और क्यों ? ‘बादल राग’ कविता के संदर्भ में लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ एक क्रांतिकारी कवि थे। उनके लिए बादल केवल वर्षा का साधन नहीं, बल्कि शोषक वर्ग के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
1. क्रांति का प्रतीक: बादल गर्जना करते हैं और बिजली गिराते हैं, जो सत्ता परिवर्तन और क्रांति का संकेत है।
2. गरीबों का मसीहा: बादलों की वर्षा से 'धनी' वर्ग तो अपनी ऊँची अट्टालिकाओं में डरा रहता है, परंतु 'गरीब' किसान और छोटे पौधे खुशी से लहलहा उठते हैं।
3. शोषकों का अंत: कवि चाहता है कि बादल रूपी क्रांति आए और उन लोगों के महलों को ढहा दे जिन्होंने गरीबों का खून चूसा है।
Step 3: Final Answer:
बादल यहाँ 'विप्लव' (Rebellion) के प्रतीक हैं जो पुराने सड़े-गले तंत्र को खत्म कर नए जीवन का संचार करते हैं।
Quick Tip: निराला की कविताओं में बादल हमेशा शक्ति, ऊर्जा और सामाजिक परिवर्तन के वाहक होते हैं।
गद्यांश के अनुसार ‘आँख फोड़ना’ का अभिप्राय है :
Step 1: Understanding the Concept:
लेखक जैनेंद्र कुमार यहाँ दार्शनिक तर्क दे रहे हैं कि इंद्रियों का दमन करना समस्या का समाधान नहीं है।
Step 2: Detailed Explanation:
'आँख फोड़ना' एक रूपक है। यदि कोई सुंदर वस्तु को देखकर ललचाता है और उस लालच से बचने के लिए अपनी आँखें ही बंद कर ले या नष्ट कर ले, तो यह मूर्खता है।
इसका अर्थ है कि हम समस्या की जड़ (मन के लोभ) को सुधारने के बजाय उस माध्यम (आँख) को खत्म कर रहे हैं।
लेखक कहते हैं कि आँख फूटने से लोभ खत्म नहीं होता, बल्कि मन के भीतर की कल्पनाएँ और भी बढ़ सकती हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: इंद्रिय दमन (Suppression) के बजाय इंद्रिय संयम (Control) ही सही मार्ग है।
लेखक के अनुसार ‘मन को बंद कर देना’ क्यों सही नहीं है ?
Step 1: Understanding the Concept:
मन की सजीवता उसके विचारों और इच्छाओं में है। पूर्णतः शून्य होना मनुष्य के वश में नहीं है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, 'शून्य' होने का अधिकार केवल परमात्मा का है क्योंकि वह पूर्ण है।
मनुष्य अपूर्ण है, इसलिए उसके मन में इच्छाएं उठना स्वाभाविक है।
यदि हम हठपूर्वक मन को बंद कर देंगे, तो वह 'जड़' (Lifeless/Static) हो जाएगा, जो कि उन्नति का मार्ग नहीं है।
Step 3: Final Answer:
अतः विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: जड़ता विकास की विरोधी है। सजीव मन ही क्रियाशील रह सकता है।
गद्यांश के अनुसार ‘सच्चा ज्ञान’ किस प्रकार की भावना से प्राप्त हो सकता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
ज्ञान की शुरुआत इस स्वीकृति से होती है कि हम अभी सब कुछ नहीं जानते।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की अंतिम पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि "सच्चा ज्ञान सदा अपूर्णता के बोध को हम में गहरा करता है।"
जब हम यह स्वीकार करते हैं कि हम अपूर्ण हैं, तभी हम कुछ नया सीखने या बेहतर बनने की कोशिश करते हैं।
अहंकार (पूर्ण होने का भ्रम) ज्ञान के द्वार बंद कर देता है।
Step 3: Final Answer:
अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में सीधे तौर पर अंतिम पंक्तियों में उत्तर छिपे होते हैं।
गद्यांश के अनुसार लोभ से बचने का क्या उपाय है ?
Step 1: Understanding the Concept:
लेखक 'बाजार दर्शन' में बताते हैं कि लोभ को दबाना या पूरी छूट देना, दोनों ही गलत हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
उपाय यह है कि मन को 'बंद' न किया जाए, बल्कि उसे 'संयमित' (Disciplined) रखा जाए।
संयमित मन का अर्थ है कि हम अपनी आवश्यकताओं को पहचानें और बाजार की चकाचौंध के वश में न आएं।
इच्छाओं का गला घोंटना 'जड़ता' है, जबकि उन्हें सही दिशा देना 'विवेक' है।
Step 3: Final Answer:
विकल्प (C) सबसे सटीक उत्तर है।
Quick Tip: 'बाजार दर्शन' का मुख्य मंत्र है: मन भरा हो, पर वह बाजार की माया में न फंसे।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. लोभ का नकार ही लोभ की जड़ है और यह व्यक्ति की हार है।
II. लोभ को दबाना ही उसे जीतना है।
III. संयमित मन ही लोभ पर विजय पा सकता है।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
Step 1: Understanding the Concept:
यहाँ गद्यांश के दार्शनिक निष्कर्षों का परीक्षण किया जा रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
- कथन I: गद्यांश कहता है कि मन में केवल 'नकार' (No) भर लेना लोभ की जीत और आदमी की हार है। अतः यह सही है।
- कथन II: गद्यांश के अनुसार लोभ को हठपूर्वक दबाना 'जड़ता' है, जीत नहीं। अतः यह गलत है।
- कथन III: लेखक के पूरे विवेचन का सार यही है कि विवेकपूर्ण संयम ही लोभ का वास्तविक समाधान है। अतः यह सही है।
Step 3: Final Answer:
चूँकि I और III दोनों सही हैं, विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में हर कथन को गद्यांश की पंक्तियों से मिलाकर देखें। 'नकार' और 'दबाना' को लेखक ने नकारात्मक माना है।
‘भक्तिन’ पाठ के आधार पर भक्तिन के चरित्र की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिन्होंने आपको प्रभावित किया ?
Step 1: Understanding the Concept:
महादेवी वर्मा द्वारा रचित संस्मरण 'भक्तिन' एक ग्रामीण महिला के संघर्ष और उसके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. स्वामी-भक्ति: भक्तिन अपनी मालकिन (महादेवी जी) के प्रति पूरी तरह समर्पित थी। वह जेल जाने तक के लिए तैयार थी और उनके हर सुख-दुख में छाया की तरह साथ रहती थी।
2. स्वाभिमान और संघर्ष: ससुराल में उपेक्षा और अपमान सहने के बाद भी उसने हार नहीं मानी। उसने अकेले अपनी बेटियों का पालन-पोषण किया और स्वाभिमान के साथ जीती रही।
3. तर्कशीलता: वह अपनी हर बात को 'शास्त्रों' के बहाने सिद्ध करने में माहिर थी। यद्यपि वह अनपढ़ थी, पर उसकी बुद्धि बहुत प्रखर थी।
Step 3: Final Answer:
इन गुणों के कारण भक्तिन का चरित्र एक सशक्त और अविस्मरणीय ग्रामीण महिला के रूप में उभरता है।
Quick Tip: भक्तिन के चरित्र में 'सेवक धर्म' और 'स्वाभिमान' का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।
“माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं पर त्याग का कहीं नामोनिशान नहीं है।” इस पंक्ति से लेखक का क्या तात्पर्य है ? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
धर्मवीर भारती ने इस पाठ में लोक-विश्वास और विज्ञान के द्वंद्व को दिखाया है। यहाँ 'त्याग' को फल प्राप्ति की अनिवार्य शर्त माना गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक कहते हैं कि आज हर व्यक्ति भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अभावों की शिकायत तो करता है, पर स्वयं कोई बलिदान देने को तैयार नहीं है।
पाठ में 'जीजी' तर्क देती हैं कि यदि हमें बादलों से पानी चाहिए, तो हमें पहले उन्हें थोड़ा पानी 'अर्घ्य' के रूप में देना होगा।
बिना 'त्याग' के 'दान' नहीं होता और बिना दान के फल नहीं मिलता।
आज का समाज केवल अधिकार माँगता है, कर्तव्यों या त्याग की ओर ध्यान नहीं देता, यही वर्तमान समाज का दोगलापन है।
Step 3: Final Answer:
सच्चा फल तभी मिलता है जब हम अपनी प्रिय वस्तु का लोक-कल्याण के लिए त्याग करते हैं।
Quick Tip: इस पाठ का मूल संदेश है - 'यथा बीजे तथा फले' (जैसा बोओगे वैसा काटोगे)।
अंबेडकर की कल्पना के अनुसार एक ‘आदर्श समाज’ कैसा होना चाहिए ?
Step 1: Understanding the Concept:
डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने जाति प्रथा के विकल्प के रूप में एक समतामूलक समाज की रूपरेखा प्रस्तुत की है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. भ्रातृता (Fraternity): समाज में दूध और पानी के मिश्रण की तरह भाईचारा होना चाहिए ताकि एक का दुख सबका दुख बन सके।
2. स्वतंत्रता (Liberty): व्यक्ति को अपना पेशा चुनने और कहीं भी आने-जाने की पूरी आजादी होनी चाहिए।
3. समता (Equality): जन्म या वंश के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर सबको समान अवसर मिलने चाहिए।
अंबेडकर मानते हैं कि लोकतंत्र केवल शासन की पद्धति नहीं है, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति है।
Step 3: Final Answer:
अतः, आदर्श समाज वह है जहाँ ऊँच-नीच का भेदभाव न हो और सबको विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
Quick Tip: अंबेडकर के आदर्श समाज के तीन स्तंभ हैं: स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व।
श्रम विभाजन और श्रमिक-विभाजन में अंतर ‘जाति प्रथा और श्रम विभाजन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
जाति प्रथा के समर्थक इसे 'श्रम विभाजन' का ही रूप मानते हैं, जिसका अंबेडकर ने कड़ा विरोध किया है।
Step 2: Detailed Explanation:
- श्रम विभाजन: यह आधुनिक औद्योगिक समाज की आवश्यकता है जहाँ कार्य कुशलता के लिए काम को बाँटा जाता है। इसमें व्यक्ति की रुचि का ध्यान रखा जा सकता है।
- श्रमिक-विभाजन: जाति प्रथा में केवल काम नहीं बँटता, बल्कि काम करने वाले लोगों को भी ऊँचे और नीचे वर्गों में स्थायी रूप से बाँट दिया जाता है।
यह विभाजन जन्म पर आधारित होता है और व्यक्ति की क्षमता या इच्छा की अनदेखी करता है। यह अस्वाभाविक और भेदभावपूर्ण है।
Step 3: Final Answer:
श्रम विभाजन वैज्ञानिक है, पर श्रमिक-विभाजन (जाति प्रथा) एक सामाजिक अभिशाप है जो मनुष्य की प्रगति रोकता है।
Quick Tip: श्रम विभाजन = कार्य का बँटवारा; श्रमिक विभाजन = लोगों का श्रेणीबद्ध बँटवारा।
‘शिरीष के फूल’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से जीवन के किस सत्य को उजागर किया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के फूल को एक 'अवधूत' (संन्यासी) की तरह माना है जो भीषण गर्मी में भी लहलहाता रहता है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब चारों ओर लू चलती है और अन्य पेड़-पौधे सूख जाते हैं, तब भी शिरीष अपने भीतर से रस खींचकर खिला रहता है।
यह जीवन का सत्य है कि जो व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों (दुख, संघर्ष) से विचलित हुए बिना अपने भीतर शांति बनाए रखता है, वही वास्तविक विजेता है।
कवि इसकी तुलना गांधी जी से भी करते हैं जिन्होंने हिंसा के दौर में भी अहिंसा और सत्य का साथ नहीं छोड़ा।
Step 3: Final Answer:
शिरीष धैर्य, सहनशीलता और शाश्वत जिजीविषा का प्रतीक है, जो हमें विषम परिस्थितियों में मुस्कुराना सिखाता है।
Quick Tip: शिरीष = अनासक्त योगी। यह पाठ हमें सिखाता है कि समय के परिवर्तन को सहज स्वीकार करना चाहिए।
पहलवान की ढोलक मृतप्राय गाँव वालों के लिए कैसे जीवनदायिनी थी ? ‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के संदर्भ में लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
फणीश्वर नाथ रेणु की इस कहानी में ढोलक संगीत की उस शक्ति का प्रतीक है जो मृत्यु के सन्नाटे को चुनौती देती है।
Step 2: Detailed Explanation:
गाँव में हैजा और मलेरिया फैला था, लोग रोज मर रहे थे। चारों ओर मातम और सन्नाटा था।
ऐसी स्थिति में लुट्टन पहलवान की ढोलक रात भर गूँजती रहती थी।
ढोलक की थाप (जैसे- चट धा, गिड़ धा) मरते हुए लोगों की शिथिल नसों में बिजली जैसा संचार करती थी।
वह उन्हें बीमारी तो ठीक नहीं करती थी, पर कम से कम उन्हें बिना डरे और शांति से प्राण त्यागने की मानसिक शक्ति प्रदान करती थी।
Step 3: Final Answer:
ढोलक की आवाज़ गाँव वालों के लिए संजीवनी का काम करती थी और उन्हें याद दिलाती थी कि जीवन अभी बाकी है।
Quick Tip: कला और संगीत अक्सर भौतिक अभावों के बीच मानसिक संबल प्रदान करने का सबसे बड़ा साधन होते हैं।
“यशोधर जी चाहते हैं कि उन्हें समाज का सम्मानित बुजुर्ग माना जाए।” ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी में यह कथन किस संदर्भ में आया है ? इस कथन के संदर्भ में यशोधर बाबू के मनोभावों को स्पष्ट कीजिए। क्या यशोधर बाबू की ऐसी चाह अनुचित है ?
Step 1: Understanding the Concept:
मनोहर श्याम जोशी की यह कहानी आधुनिकता और परंपरा के बीच फंसे एक व्यक्ति की मानसिक उथल-पुथल का चित्रण है।
Step 2: Detailed Explanation:
- संदर्भ: यशोधर बाबू अपने आदर्श किशनदा की परंपराओं का पालन करते हैं। वे चाहते हैं कि घर में उनका दबदबा वैसा ही हो जैसा उनके पिता का था।
- मनोभाव: उन्हें दुख होता है जब उनके बच्चे बिना उनसे पूछे घर का सामान खरीदते हैं या पार्टी करते हैं। वे उपेक्षित महसूस करते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चे उन्हें 'गुरु' की तरह सम्मान दें।
- औचित्य: यशोधर बाबू की चाह अनुचित नहीं है, क्योंकि हर माता-पिता सम्मान चाहते हैं। परंतु, उनका जिद पर अड़े रहना और आधुनिक बदलावों को बिल्कुल स्वीकार न करना (Somehow Improper कहना) उनके और परिवार के बीच की दूरी बढ़ाता है।
Step 3: Final Answer:
यशोधर बाबू की चाहत स्वाभाविक है, परंतु उन्हें बदलते समय के साथ थोड़ा सामंजस्य बैठाना चाहिए था ताकि वे अकेलेपन से बच सकें।
Quick Tip: 'सिल्वर वैडिंग' का मुख्य द्वंद्व 'संस्कार' और 'सुविधा' के बीच का संघर्ष है।
“मैं अपनी आँखों और कानों में प्राणों की सारी शक्ति लगा कर — दम रोककर मास्टर के हाव-भाव, ध्वनि, गति, चाल और रस पीता रहता था।” ‘जूझ’ कहानी के इस कथन को स्पष्ट करते हुए लिखिए कि एक अध्यापक कैसे अपने छात्रों का आदर्श-स्वरूप हो सकता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
आनंद यादव की कहानी 'जूझ' एक ग्रामीण बालक के संघर्ष और शिक्षा के प्रति उसके लगाव की गाथा है। यहाँ शिक्षक एक मार्गदर्शक की भूमिका में है।
Step 2: Detailed Explanation:
- कथन का अर्थ: जब मास्टर जी कविता पढ़ाते थे, तो वे उसमें डूब जाते थे। लेखक उन्हें बड़े ध्यान से देखता और उनकी नकल करता था। यहीं से लेखक के मन में कविता के प्रति रुचि जागी।
- आदर्श शिक्षक के गुण:
1. विषय पर पकड़: मास्टर जी खुद कविता रचते थे और बड़े सुरीले ढंग से गाते थे, जिससे छात्र आकर्षित हुए।
2. व्यक्तिगत प्रोत्साहन: उन्होंने लेखक की कविताओं में सुधार किया और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
3. सरल व्यवहार: शिक्षक ने एक गरीब छात्र की प्रतिभा को पहचाना और उसे आत्मविश्वास दिया।
Step 3: Final Answer:
एक अध्यापक केवल पढ़ाता नहीं, बल्कि अपने आचरण और प्रतिभा से छात्र के जीवन की दिशा बदल देता है, जैसा मास्टर सौंदलगेकर ने किया।
Quick Tip: शिक्षक और छात्र का संबंध केवल किताबी नहीं, बल्कि भावनात्मक और प्रेरणादायक होना चाहिए।
‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में मुअनजो-दड़ो के किन भौतिक अवशेषों का वर्णन किया गया है ? उस सभ्यता की जीवन-शैली, सामाजिक संरचना और संस्कृति को भी स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
ओम थानवी का यह यात्रा वृत्तांत सिंधु घाटी सभ्यता की भव्यता और उसकी योजनाबद्ध बनावट का सजीव वर्णन करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
- भौतिक अवशेष: खुदाई में मिले चौड़े रास्ते, पक्की ईंटों के घर, अनाज रखने के कोठार और विकसित ड्रेनेज सिस्टम यह दिखाते हैं कि वह दुनिया का सबसे पुराना नियोजित शहर था।
- जीवन-शैली: लोग सुसंस्कृत थे। वहाँ कृषि और व्यापार दोनों उन्नत थे। सूती कपड़ों का प्रयोग होता था।
- सामाजिक संरचना: शहर दो भागों में बँटा था— गढ़ी (जहाँ शासक या रईस रहते थे) और निचला शहर (जहाँ आम नागरिक रहते थे)।
- संस्कृति: यह सभ्यता 'लो-प्रोफाइल' (सादगीपूर्ण) थी। वहाँ राजमहलों या भव्य मंदिरों के बजाय उपयोगिता (Utility) को अधिक महत्व दिया गया था।
Step 3: Final Answer:
मुअनजो-दड़ो की सभ्यता एक ऐसी सभ्यता थी जो भव्यता के दिखावे के बजाय जीवन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर केंद्रित थी।
Quick Tip: सिंधु घाटी सभ्यता की पहचान उसकी 'नियोजित शहरी व्यवस्था' और 'जल संरक्षण' प्रणाली से की जाती है।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.