
CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 2 – 2/5/2) Question Paper 2026 with Solutions PDFs is available here for download. CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 2 – 2/5/2) Paper 2026 was held on 16 March, 2026. The question paper followed the latest syllabus and exam pattern prescribed by CBSE. The examination was conducted in the first half from 10:30 AM to 1:30 PM. Students can download the official paper in PDF format for reference.
| CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 2 – 2/5/2) Question Paper 2026 | Download PDF | Check Solutions |

Question 1: निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
दुनिया का सबसे बड़ा अधम --
हाँ, हाँ, दुनिया का सबसे बड़ा अधम नर वही था
जिसकी ज़बान से यह निकला था पहले-पहल --
भूमि यह मेरी है!
``भूमि यह मेरी है?''
झूठा, मक्कार था!
असत्य, अन्याय का अवतार था!
दुनिया का सबसे बड़ा अधम !!
नीचे की धरती और ऊपर का आसमान,
पानी और पवन --
प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए,
इन पर है सबका अधिकार;
सबका समान अधिकार
हवा को क्या बाँटोगे?
पानी को बाँटोगे?
बाँटोगे नीले आसमान को?
बाँट भी सकोगे क्या?
धरती बेचारी बेबस थी --
पैरों के नीचे
अचल पड़ी थी, निरीह;
कह दिया --
``भूमि यह मेरी है'' --
बाँट लिया टुकड़ों में,
एक मुट्ठी लोगों ने,
मानो माता के आँचल को दाँतों से चीरकर
बाँट लिया कुछ शैतान बच्चों ने;
टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़
रोती रही दुखिया बेचारी माँ !
दुनिया का सबसे बड़ा अधम !
1(i).
इस काव्यांश का केंद्रीय भाव है :
Step 1: Understanding the Concept:
काव्यांश का केंद्रीय भाव वह मुख्य विचार होता है जिसके चारों ओर पूरी कविता बुनी गई होती है।
यह कविता मुख्य रूप से यह संदेश देती है कि प्रकृति ने संसाधनों का निर्माण सभी के लिए किया है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि धरती और इसके संसाधन किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हैं।
समाज में जो 'मेरा-तेरा' का भाव व्याप्त है, वह न केवल अशांति का कारण है बल्कि मानवता के विरुद्ध भी है।
अतः, संपूर्ण भूमि पर सभी जीवों का समान रूप से अधिकार है, यही इस काव्यांश का मूल सार या केंद्रीय भाव है।
Step 3: Final Answer:
विकल्प (C) सही उत्तर है क्योंकि यह पूरी कविता के न्यायसंगत और समतावादी दृष्टिकोण को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
Quick Tip: केंद्रीय भाव की पहचान करने के लिए कविता की उन पंक्तियों पर ध्यान केंद्रित करें जो पूरी कविता का सारांश प्रस्तुत करती हैं और सार्वभौमिक सत्य को दर्शाती हैं।
1(ii).
"प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए" इस पंक्ति से कवि का अभिप्राय है :
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न पंक्ति में निहित दार्शनिक और सामाजिक अर्थ की व्याख्या करने को कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
'जीवमात्र' शब्द का अर्थ संसार के सभी जीवित प्राणियों से है, जिसमें मनुष्य, पशु और पक्षी सभी शामिल हैं।
जब कवि कहता है कि प्रकृति की देन सभी जीवों के लिए है, तो वह 'व्यक्तिगत स्वामित्व' के विपरीत 'सामूहिक स्वामित्व' (Collective Ownership) की वकालत करता है।
इसका अर्थ है कि हवा, पानी, धूप और भूमि जैसी प्राकृतिक संपदा पर किसी एक व्यक्ति या समूह का कब्ज़ा नहीं हो सकता, बल्कि यह सबकी साझा विरासत है।
Step 3: Final Answer:
अतः, इस पंक्ति का सही अभिप्राय 'सामूहिक स्वामित्व' है, जो विकल्प (D) में दिया गया है।
Quick Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय 'मात्र' और 'सबका' जैसे समावेशी शब्दों पर ध्यान दें, जो अक्सर साझा अधिकारों या सामूहिक जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हैं।
1(iii).
"माता के आँचल को दाँतों से चीरना" इस पंक्ति का आज के संदर्भ में सटीक अर्थ क्या है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक शक्तिशाली रूपक (Metaphor) के वर्तमान समय में प्रासंगिक अर्थ की व्याख्या पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
साहित्य में धरती को अक्सर 'माँ' माना गया है और उस पर फैली हरियाली या वन उसके 'आँचल' के समान रक्षक और पोषण देने वाले होते हैं।
'दाँतों से चीरना' एक हिंसक और विनाशकारी कृत्य का प्रतीक है।
आज के संदर्भ में, जिस प्रकार मनुष्य अपने आर्थिक लाभ के लिए जंगलों का विनाश कर रहा है, वह धरती माता के आँचल को नष्ट करने जैसा ही क्रूर कृत्य है।
Step 3: Final Answer:
इसलिए, यह पंक्ति आधुनिक विश्व में 'वनों की अंधाधुंध कटाई' की समस्या को चित्रित करती है, जो विकल्प (B) में वर्णित है।
Quick Tip: काव्य में प्रतीकों का अर्थ उनके द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा या हानि के संदर्भ में समझें। 'आँचल' को नष्ट करना हमेशा सुरक्षा कवच के हनन को दर्शाता है।
1(iv).
यदि 'भूमि यह मेरी है' की भावना समाज में व्याप्त नहीं होगी तो दुनिया की संरचना कैसी होगी ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक वैचारिक और कल्पनाशील स्थिति के सकारात्मक सामाजिक परिणामों का विश्लेषण करने के लिए है।
Step 2: Detailed Explanation:
संसार में अधिकांश युद्ध, सीमा विवाद और सामाजिक संघर्ष 'स्वामित्व' (Ownership) के अहंकार के कारण पैदा होते हैं।
यदि 'भूमि यह मेरी है' की संकीर्ण भावना समाज से लुप्त हो जाए, तो देशों के बीच की सीमाएँ और विवाद स्वतः समाप्त हो जाएँगे।
दुनिया एक विशाल परिवार (वसुधैव कुटुंबकम्) की तरह होगी जहाँ संसाधनों का न्यायसंगत वितरण होगा।
इससे अमीर-गरीब के बीच का भेदभाव मिटेगा और हर जीव को फलने-फूलने के समान अवसर और सुरक्षा प्राप्त होगी।
Step 3: Final Answer:
संक्षेप में, दुनिया का ढांचा ईर्ष्या और हिंसा से मुक्त होकर आपसी सहयोग और सह-अस्तित्व के वैश्विक आधार पर टिका होगा।
Quick Tip: ऐसे विश्लेषणात्मक प्रश्नों में उन समस्याओं के समाधान पर विचार करें जो वर्तमान में स्वामित्व या कब्जे की भावना के कारण उत्पन्न होती हैं।
1(v).
'दुनिया का सबसे बड़ा अधम' किसे कहा गया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
'अधम' शब्द का प्रयोग अत्यंत नीच या नैतिक रूप से गिरे हुए व्यक्ति के लिए किया जाता है। यह प्रश्न नैतिक मूल्यों के पतन के कारण की पड़ताल करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रकृति ने सभी संसाधन सभी जीवों के लिए समान रूप से उपलब्ध कराए हैं।
परंतु, जो लोग अपनी शक्ति, धन या चतुराई का उपयोग करके उस साझी विरासत (जैसे भूमि, जल, खनिज) पर अपना निजी एकाधिकार स्थापित कर लेते हैं, वे 'अधम' की श्रेणी में आते हैं।
ऐसा इसलिए है क्योंकि उनका यह कृत्य दूसरों के मुँह का निवाला छीनने और उन्हें अभाव में जीने को विवश करने के समान है।
उनका लालच पूरी मानवता और प्रकृति के चक्र को बाधित करता है, इसीलिए उन्हें सबसे बड़ा अधम माना गया है।
Step 3: Final Answer:
अतः, स्वार्थी और दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों को उनके अनैतिक और अमानवीय आचरण के कारण 'अधम' कहा गया है।
Quick Tip: साहित्यिक कृतियों में अक्सर सामाजिक और नैतिक मूल्यों के उल्लंघन को ही सबसे बड़ा पाप या 'अधम' कृत्य माना जाता है।
1(vi).
'टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़' पंक्ति में किन लोगों पर व्यंग्य किया गया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
'व्यंग्य' (Satire) के माध्यम से कवि समाज के दोहरे चरित्र और निष्क्रियता पर प्रहार कर रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
यहाँ 'शरीफ़' शब्द व्यंग्यात्मक रूप से उन लोगों के लिए प्रयुक्त हुआ है जो खुद को कानून का पालन करने वाला और सभ्य मानते हैं।
किंतु जब ताकतवर लोग प्रकृति का दोहन करते हैं या कमजोरों का हक छीनते हैं, तो ये 'शरीफ़' लोग साहस दिखाकर विरोध करने के बजाय केवल मूकदर्शक (टुकुर-टुकुर ताकने वाले) बने रहते हैं।
कवि उन पर व्यंग्य कर रहा है क्योंकि उनकी यह चुप्पी वास्तव में अपराधियों और अत्याचारियों का मौन समर्थन ही है।
उनकी यह कथित शरीफ़त वास्तव में कायरता और सामाजिक जिम्मेदारी से भागना है।
Step 3: Final Answer:
यह व्यंग्य समाज के उस मध्यम वर्ग या वर्ग-विशेष पर है जो अपनी सुरक्षा के मोह में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ नहीं उठाता।
Quick Tip: व्यंग्य को पहचानने के लिए शब्द के वास्तविक अर्थ और उसके प्रसंग में उपयोग के अंतर को समझें। यहाँ 'शरीफ़' शब्द प्रशंसा नहीं, बल्कि आलोचना का प्रतीक है।
2(i).
'जागृति' और 'निद्रा' किन गुणों से संबंधित हैं ?
Step 1: Understanding the Concept:
गद्यांश के अनुसार मानवीय क्रियाओं को भारतीय दर्शन के तीन गुणों (सत्, रज, तम) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 'जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है'।
रजोगुण गति, कर्म और सक्रियता का प्रतीक है।
वहीं 'निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है'।
तमोगुण जड़ता, विश्राम और अंधकार का प्रतीक है।
Step 3: Final Answer:
अतः 'जागृति' रज से और 'निद्रा' तम गुण से संबंधित है। सही विकल्प (D) है।
Quick Tip: गद्यांश की पंक्तियों को ध्यान से पढ़ें: "जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है, निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है।" इससे उत्तर सीधे प्राप्त हो जाता है।
2(ii).
गद्यांश के अनुसार सोना अर्थात् निद्रा किसकी सहायक है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न जागने और सोने की क्रियाओं के पारस्परिक संबंध और उनकी निर्भरता पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश में बताया गया है कि जीवन के लिए जागना और सोना दोनों ही आवश्यक हैं।
लेखक के अनुसार, जागना जीवन का मुख्य लक्षण है, जबकि 'सोना अर्थात् विश्राम, तो केवल उसका सहायक है'।
इसका अर्थ है कि निद्रा वह माध्यम है जो शरीर को पुनः 'जागने' और कर्म करने के लिए तैयार करती है।
Step 3: Final Answer:
इसलिए, निद्रा को 'जागने की' सहायक क्रिया माना गया है। सही विकल्प (B) है।
Quick Tip: पूरक क्रियाओं में एक मुख्य होती है और दूसरी उसकी सहायक। यहाँ जागना मुख्य लक्ष्य है और सोना उसकी तैयारी।
2(iii).
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : जागना जीवन के लिए आवश्यक है।
कारण : जाग्रत हो ध्यानपूर्वक कर्म करने से ही, व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव है।
Step 1: Understanding the Concept:
कथन-कारण वाले प्रश्नों में यह देखा जाता है कि क्या कारण, कथन के होने के तार्किक आधार को स्पष्ट करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
कथन कहता है कि जागना जीवन के लिए अनिवार्य है।
कारण स्पष्ट करता है कि जागने का महत्त्व केवल आँखें खोलने से नहीं, बल्कि सजग होकर कर्म करने से है।
चूँकि यही कर्म व्यक्ति और राष्ट्र की प्रगति का आधार है, इसलिए 'जागना' जीवन की अनिवार्यता बन जाता है।
अतः कारण, कथन के महत्त्व की पूर्ण व्याख्या करता है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या है। सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: जांचें कि क्या 'जागना' और 'उन्नति' के बीच सीधा संबंध है। गद्यांश के अनुसार कर्मशीलता ही जीवन है।
2(iv).
'जागृति' और 'निद्रा' किसके प्रतीक हैं ? गद्यांश के आधार पर बताइए।
Step 1: Understanding the Concept:
प्रतीकों के माध्यम से लेखक जीवन की दो विभिन्न अवस्थाओं के परिणामों को समझाना चाह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, जागृति केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रगति का चिन्ह है।
लेखक कहता है कि 'जागृति जीवन और अभ्युदय का चिन्ह है'।
इसके विपरीत, निद्रा को 'पतन तथा ह्रास' का चिन्ह माना गया है क्योंकि अत्यधिक निद्रा अकर्मण्यता को जन्म देती है।
Step 3: Final Answer:
अतः जागृति विकास का और निद्रा अवनति का प्रतीक है।
Quick Tip: गद्यांश में प्रयुक्त 'अभ्युदय' और 'ह्रास' जैसे शब्दों के अर्थ समझें। अभ्युदय = उदय/प्रगति, ह्रास = कमी/गिरावट।
2(v).
'जागना' और 'सोना' दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक कैसे हैं ? स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
पूरक होने का अर्थ है कि एक के बिना दूसरे की सार्थकता या क्षमता प्रभावित होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश स्पष्ट करता है कि जीवन के लिए जागना और सोना दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
यदि व्यक्ति केवल जागता रहेगा और सोएगा नहीं, तो उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा और वह प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाएगा।
सोना शरीर की थकान मिटाकर उसे अगली सक्रियता (जागने) के लिए तैयार करता है।
इस प्रकार, सोना जागने की क्षमता को बढ़ाता है और जागना सोने के उद्देश्य (विश्राम) को सार्थक बनाता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, निद्रा और जागृति जीवन चक्र को संतुलित बनाए रखने के लिए एक-दूसरे पर निर्भर और पूरक हैं।
Quick Tip: पूरक संबंध दिखाने के लिए हमेशा यह बताएँ कि कैसे एक क्रिया दूसरी क्रिया की सफलता का आधार बनती है।
2(vi).
लेखक के अनुसार 'किसी राष्ट्र की जागृति' का क्या तात्पर्य है ? उल्लेख कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
राष्ट्रीय जागृति का अर्थ व्यक्तिगत चेतना के सामूहिक विस्तार से है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक के अनुसार, जब हम किसी राष्ट्र की जागृति की कामना करते हैं, तो हमारा बोध यह होता है कि वह राष्ट्र जड़ता (तमोगुण) से मुक्त हो।
यदि राष्ट्र में 'तमोगुण' की मात्रा अधिक है, तो वह पिछड़ा हुआ माना जाता है।
जागृति का अर्थ है कि राष्ट्र के लोगों में जीवन की मात्रा (सक्रियता) अधिक हो और वे उन्नति के पथ पर अग्रसर हों।
Step 3: Final Answer:
तात्पर्य यह है कि जब राष्ट्र के नागरिक सचेत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, तभी राष्ट्र जागृत कहलाता है।
Quick Tip: राष्ट्र की जागृति नागरिकों की 'कर्मशीलता' और 'जागरूकता' का प्रतिबिंब होती है।
2(vii).
निद्रा को किस गुण की प्रधानता से जोड़ा गया है और क्यों ?
Step 1: Understanding the Concept:
तमोगुण भारतीय दर्शन में अंधकार और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, निद्रा एक ऐसी स्थिति है जिसमें जीव निष्क्रिय रहता है।
तमोगुण का स्वभाव ही आलस्य, निद्रा और अज्ञान है।
चूँकि निद्रा के दौरान शरीर और मस्तिष्क अपनी सक्रियता को न्यूनतम कर देते हैं, इसलिए इसे तामसिक गुण प्रधान माना गया है।
लेखक के अनुसार, अत्यधिक निद्रा राष्ट्र और व्यक्ति के लिए पतन का कारण बनती है क्योंकि यह तमोगुण को बढ़ाती है।
Step 3: Final Answer:
अतः निष्क्रियता और जड़ता का लक्षण होने के कारण निद्रा तमोगुण से जुड़ी है।
Quick Tip: गुणों के प्रभाव को समझें: रज = क्रिया/उत्तेजना, तम = विश्राम/स्थिरता।
3(i).
'रेडियो ध्वनि, स्वर व शब्दों का खेल है' -- कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रेडियो जनसंचार का एक ऐसा माध्यम है जो पूरी तरह से 'सुनने' पर आधारित है।
इसमें दृश्य (Visuals) नहीं होते, इसलिए संचार को प्रभावी बनाने के लिए ध्वनि के विभिन्न तत्वों का प्रयोग किया जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
रेडियो में तीन मुख्य तत्व एक साथ काम करते हैं:
1. शब्द: रेडियो के लिए लिखे गए शब्द बहुत सरल, स्पष्ट और प्रवाहमयी होने चाहिए ताकि श्रोता उन्हें एक बार सुनकर ही समझ सके।
2. स्वर (आवाज़): वाचन करने वाले के स्वर में भावों के अनुसार परिवर्तन होना चाहिए। क्रोध, प्रेम, आश्चर्य या दुख को स्वर के माध्यम से ही व्यक्त किया जाता है।
3. ध्वनि प्रभाव: पृष्ठभूमि संगीत (Background Music) और अन्य ध्वनियाँ (जैसे बारिश, हवा, शोर) दृश्य का माहौल बनाने में मदद करती हैं।
जब ये तीनों तत्व सही तालमेल के साथ मिलते हैं, तो श्रोता के मन में एक काल्पनिक चित्र बन जाता है।
Step 3: Final Answer:
चूंकि रेडियो पर सब कुछ आवाज़ और शब्दों के माध्यम से ही संभव होता है, इसीलिए इसे ध्वनि, स्वर और शब्दों का खेल कहा जाता है।
Quick Tip: रेडियो लेखन में वाक्यों को छोटा और आम बोलचाल की भाषा में रखना चाहिए ताकि वे सुनने में बोझिल न लगें।
3(ii).
'एंकर विज़ुअल' का क्या अभिप्राय है ?
Step 1: Understanding the Concept:
टेलीविजन पत्रकारिता में समाचारों को केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं होता, उन्हें दृश्यों के माध्यम से प्रमाणित करना आवश्यक होता है।
Step 2: Detailed Explanation:
एंकर विज़ुअल समाचार लेखन का वह चरण है जिसमें एंकर किसी घटना के बारे में जानकारी देता है और साथ ही उस घटना की रिकॉर्ड की गई वीडियो फुटेज भी दिखाई जाती है।
इससे दर्शकों को समाचार की वास्तविकता का अनुभव होता है।
उदाहरण के लिए, यदि एंकर किसी पुल के उद्घाटन की खबर पढ़ रहा है और स्क्रीन पर फीता कटने या पुल के दृश्य चल रहे हैं, तो इसे एंकर विज़ुअल कहा जाएगा।
यह दर्शकों की रुचि बनाए रखने और सूचना को बेहतर तरीके से समझाने में सहायक होता है।
Step 3: Final Answer:
एंकर विज़ुअल वह तकनीक है जो श्रव्य सूचना (Audio) को दृश्य (Video) के साथ जोड़कर समाचार की विश्वसनीयता बढ़ाती है।
Quick Tip: विज़ुअल का अर्थ होता है 'दृश्य'। एंकर के बोलते समय दृश्यों का चलना ही एंकर विज़ुअल है।
3(iii).
'नेट साउंड' किसे कहते हैं ? दूरदर्शन के संदर्भ में समझाइए।
Step 1: Understanding the Concept:
दूरदर्शन एक दृश्य-श्रव्य माध्यम है जहाँ दृश्यों के पीछे की असली आवाज़ें उसे जीवंत बनाती हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
जब कोई रिपोर्टर किसी घटनास्थल की कवरेज करता है, तो कैमरे के माइक में वहां के परिवेश की आवाज़ें भी रिकॉर्ड होती हैं, जैसे - पक्षियों का चहचहाना, गाड़ियों का हॉर्न, बारिश की आवाज़ या लोगों के नारों का शोर।
इन ध्वनियों को ही पत्रकारिता की भाषा में 'नेट साउंड' कहते हैं।
दूरदर्शन में इन आवाज़ों का बहुत महत्त्व है क्योंकि ये दर्शकों को घटना के स्थान पर होने का वास्तविक अहसास कराती हैं।
अक्सर रिपोर्ट के बीच में एंकर या रिपोर्टर चुप हो जाते हैं ताकि दर्शक उस 'नेट साउंड' को स्पष्ट सुन सकें।
Step 3: Final Answer:
अतः नेट साउंड वह वास्तविक परिवेशीय ध्वनि है जो दूरदर्शन के दृश्यों को मौलिकता और प्रभाव प्रदान करती है।
Quick Tip: नेट साउंड को कई बार 'एम्विएंस' (Ambience) भी कहा जाता है, जो खबर की सत्यता का प्रमाण होती है।
3(iv).
फ़ीचर की लेखन शैली समाचार की लेखन शैली से किस प्रकार भिन्न है ? किन्हीं दो भिन्नताओं का उल्लेख कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
समाचार का मुख्य काम सूचना देना है, जबकि फ़ीचर का काम सूचना के साथ मनोरंजन और ज्ञानवर्धन करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रमुख दो भिन्नताएं निम्नलिखित हैं:
1. लेखन शैली: समाचार हमेशा 'उल्टा पिरामिड' (Inverted Pyramid) शैली में लिखे जाते हैं, जहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात सबसे पहले आती है। फ़ीचर लेखन में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती; इसे कहानी की तरह शुरू, मध्य और अंत के क्रम में लिखा जा सकता है।
2. विषयपरकता: समाचारों में लेखक के अपने विचारों या भावनाओं के लिए कोई स्थान नहीं होता (Objectivity)। फ़ीचर लेखन में लेखक अपनी राय, कल्पना और भावनाओं को व्यक्त कर सकता है (Subjectivity)।
समाचार की भाषा सपाट और तथ्यात्मक होती है, जबकि फ़ीचर की भाषा आकर्षक और कलात्मक होती है।
Step 3: Final Answer:
अतः समाचार ढाँचाबद्ध और वस्तुनिष्ठ होते हैं, जबकि फ़ीचर स्वतंत्र और सृजनात्मक लेखन शैली है।
Quick Tip: याद रखें कि फ़ीचर लेखन की कोई निश्चित समय-सीमा (Deadline) समाचारों की तरह कठोर नहीं होती।
3(v).
विशेष लेखन के अंतर्गत कौन-सी सामग्री आती है ? उल्लेख कीजिए । समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लिए विशेष लेखन का कार्य कौन करता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
जब पत्रकारिता सामान्य सूचनाओं से आगे बढ़कर किसी खास विषय पर गहराई से प्रकाश डालती है, तो उसे विशेष लेखन कहते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
सामग्री: इसके अंतर्गत खेल जगत, आर्थिक मामले (शेयर बाज़ार, बजट), विज्ञान, स्वास्थ्य, तकनीक, शिक्षा, फिल्म और कला जैसे विषयों पर आधारित लेख, स्तंभ (Columns) और विशेष रिपोर्ट आती हैं।
कार्यकर्ता: समाचार पत्र-पत्रिकाओं में यह कार्य 'विशेषज्ञ पत्रकार' (Specialized Reporters) करते हैं। इन पत्रकारों को संबंधित विषय की शब्दावली और बारीक जानकारियों का पूरा ज्ञान होता है।
कभी-कभी उस क्षेत्र के पेशेवर विशेषज्ञ (जैसे कोई डॉक्टर या खिलाड़ी) भी पत्रिकाओं के लिए विशेष लेख लिखते हैं।
Step 3: Final Answer:
विशेष लेखन का आधार विशिष्ट ज्ञान और तार्किक विश्लेषण होता है, जिसे विशेषज्ञ पत्रकारों द्वारा पूरा किया जाता है।
Quick Tip: विशेष लेखन को 'बीट रिपोर्टिंग' से भी ऊँचा स्तर माना जाता है क्योंकि इसमें केवल जानकारी नहीं, बल्कि 'निष्कर्ष' और 'विश्लेषण' महत्वपूर्ण होते हैं।
4(i).
स्वच्छता : आज की आवश्यकता (रचनात्मक लेख)
Step 1: Understanding the Concept:
स्वच्छता मानवीय सभ्यता और स्वास्थ्य का आधार है। आज के प्रदूषित युग में इसकी प्रासंगिकता बढ़ गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
"स्वच्छता ही सेवा है" - यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि सुखी जीवन का मंत्र है। आज जिस तरह से कचरा प्रबंधन की समस्या बढ़ रही है, वह चिंताजनक है। गंदगी न केवल वातावरण को दूषित करती है, बल्कि महामारी और गंभीर रोगों को भी आमंत्रण देती है।
भारत सरकार का 'स्वच्छ भारत अभियान' एक महान पहल है, जिसने आम जनता को जागरूक किया है। लेकिन स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं है। यह हमारे विचारों और जीवनशैली की शुद्धता से भी जुड़ी है। सूखे और गीले कचरे का अलग निस्तारण करना और प्लास्टिक के उपयोग को बंद करना आज अनिवार्य हो गया है। जब हर नागरिक अपने घर की तरह सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई का संकल्प लेगा, तभी हमारा देश वास्तविक रूप से स्वस्थ और प्रगतिशील बनेगा।
Step 3: Final Answer:
अतः स्वच्छता को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ही हम एक उज्ज्वल और रोगमुक्त भविष्य की नींव रख सकते हैं।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में मुहावरों और प्रसिद्ध नारों का प्रयोग करने से लेखन प्रभावशाली बनता है।
4(ii).
प्रकृति से टूटता नाता (रचनात्मक लेख)
Step 1: Understanding the Concept:
प्रकृति मनुष्य की सहचरी है, परंतु आधुनिक जीवनशैली ने इस मधुर संबंध में दरार डाल दी है।
Step 2: Detailed Explanation:
विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य ने वनों को काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए हैं। शुद्ध हवा और खुले मैदान अब दुर्लभ होते जा रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी प्रकृति की गोद के बजाय मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन में खो गई है। इस टूटते नाते का परिणाम ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते प्रदूषण और मानसिक तनाव के रूप में हमारे सामने है।
हम भूल गए हैं कि हमारा अस्तित्व प्रकृति पर ही निर्भर है। पेड़ों की चहचहाहट और नदियों का शोर अब केवल यादों में सिमट रहा है। यदि हमने समय रहते अपने इस व्यवहार को नहीं बदला, तो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति केवल किताबों और तस्वीरों में ही देखने को मिलेगी। हमें फिर से पेड़ों से प्यार करना होगा और जल-जंगल-ज़मीन का संरक्षण करना होगा।
Step 3: Final Answer:
प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही मानवता के बचे रहने का एकमात्र विकल्प है।
Quick Tip: प्रकृति पर लिखते समय भावनात्मक शब्दों का प्रयोग करें ताकि पाठक उस विषय की गंभीरता को महसूस कर सकें।
4(iii).
मोबाइल में कैद जीवन (रचनात्मक लेख)
Step 1: Understanding the Concept:
मोबाइल फोन जो सुविधा के लिए बना था, आज मनुष्य की परतंत्रता का कारण बनता जा रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
आज हर उम्र का व्यक्ति मोबाइल स्क्रीन के मोहजाल में फंसा हुआ है। हम साथ बैठकर भी एक-दूसरे से दूर हैं क्योंकि हमारा ध्यान नोटिफिकेशन की आवाज़ पर रहता है। सोशल मीडिया की 'वर्चुअल' दुनिया ने वास्तविक रिश्तों की गर्माहट को खत्म कर दिया है। लोग अपनी खुशियाँ और गम अब केवल 'स्टेटस' और 'लाइक्स' के माध्यम से साझा करते हैं।
इस लत के कारण न केवल शारीरिक स्वास्थ्य (जैसे आँखों की कमजोरी, गर्दन में दर्द) प्रभावित हो रहा है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बच्चे मैदानों में खेलने के बजाय मोबाइल गेम्स में व्यस्त हैं। हमने अपनी प्राइवेसी को एक गैजेट के हवाले कर दिया है। मोबाइल एक उपकरण होना चाहिए था, न कि जीवन का स्वामी।
Step 3: Final Answer:
हमें मोबाइल का उपयोग अपनी आवश्यकतानुसार करना चाहिए, न कि उसे अपनी आज़ादी छीनने का जरिया बनने देना चाहिए।
Quick Tip: वर्तमान जीवन की विडंबनाओं (जैसे डाइनिंग टेबल पर फोन का उपयोग) को उदाहरण के रूप में लिखें।
5(i).
नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए उल्लेख कीजिए कि अभिव्यक्ति के अधिकार में लेखन किस प्रकार सहायक है ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह लेखन का एक ऐसा प्रकार है जहाँ रटी-रटाई सामग्री काम नहीं आती, बल्कि लेखक की अपनी रचनात्मकता की परीक्षा होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
अभिप्राय: अप्रत्याशित विषयों पर लेखन छात्रों की तार्किक और सृजनात्मक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें किसी तात्कालिक दृश्य, भाव या घटना पर अपने शब्दों में विचार प्रकट करने होते हैं।
अभिव्यक्ति के अधिकार में सहायता: भारतीय संविधान हमें 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' का अधिकार देता है। लेखन इस अधिकार का सबसे सशक्त औजार है।
1. लेखन के माध्यम से एक व्यक्ति समाज की कुरीतियों के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठा सकता है।
2. यह हमारे अंतर्मन के विचारों को एक निश्चित ढांचा प्रदान करता है, जिससे वे अधिक प्रभावशाली बनते हैं।
3. जब हम नए विषयों पर लिखते हैं, तो हम अपनी बौद्धिक दासता से मुक्त होते हैं और स्वतंत्र रूप से सोचना और बोलना सीखते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः अप्रत्याशित लेखन न केवल कौशल बढ़ाता है, बल्कि एक नागरिक के रूप में हमें अपनी बात निर्भीकता से रखने में सक्षम बनाता है।
Quick Tip: ऐसे लेखन में विषय के प्रति अपनी पहली प्रतिक्रिया (First Impression) से शुरुआत करना सबसे अच्छा रहता है।
5(ii).
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
Step 1: Understanding the Concept:
कहानी एक श्रव्य/पठन विधा है, जबकि नाटक एक दृश्य विधा है। रूपांतरण के दौरान विवरणात्मक अंशों को क्रियाओं और संवादों में बदलना पड़ता है।
Step 2: Detailed Explanation:
रूपांतरण के समय निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना अनिवार्य है:
1. दृश्य विभाजन: कहानी की लंबी कथा को छोटे-छोटे प्रभावी दृश्यों में बाँटना चाहिए। प्रत्येक दृश्य का एक आरंभ, मध्य और अंत होना चाहिए।
2. संवाद लेखन: कहानी के वर्णनों को पात्रों के बीच होने वाली बातचीत में बदलना चाहिए। संवाद संक्षिप्त और पात्र की प्रकृति के अनुसार होने चाहिए।
3. द्वंद्व (Conflict): नाटक में संघर्ष का होना ज़रूरी है, जो कहानी के तनाव को मंच पर जीवंत कर सके।
4. मंच सज्जा और निर्देश: कहानी के वातावरण को मंच पर कैसे दिखाया जाएगा, इसके लिए कोष्ठक में स्पष्ट निर्देश (Stage Directions) देने चाहिए।
Step 3: Final Answer:
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय उसकी मूल संवेदना को सुरक्षित रखते हुए उसे दृश्य और संवाद के माध्यम से प्रभावशाली बनाना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
Quick Tip: नाटक में 'विवरण' से अधिक 'अभिनय' और 'ध्वनि' का महत्त्व होता है, इसलिए लंबे भाषणों से बचना चाहिए।
5(iii).
रेडियो नाटकों में संवादों पर विशेष ध्यान देना क्यों आवश्यक है ? तर्क सहित लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रेडियो एक अंधा माध्यम है जहाँ श्रोता केवल कल्पना के आधार पर नाटक का आनंद लेता है।
Step 2: Detailed Explanation:
संवादों का महत्त्व निम्नलिखित तर्कों से स्पष्ट होता है:
1. पात्रों का परिचय: चूंकि पात्र दिखाई नहीं देते, उनके संवादों के लहज़े और भाषा से ही उनकी उम्र, स्थिति और स्वभाव का पता चलता है।
2. दृश्य का बोध: संवाद ही श्रोता को बताते हैं कि दृश्य कहाँ का है। उदाहरण के लिए - "कितना अंधेरा है इस गुफा में!" जैसा संवाद दृश्य का वर्णन कर देता है।
3. कथानक की गति: नाटक में क्या हो रहा है और क्या होने वाला है, यह सब संवादों की कड़ियों से जुड़ा होता है।
4. भावनाओं की अभिव्यक्ति: पात्र के रोने, हंसने या घबराहट को स्वर और संवाद के माध्यम से ही श्रोता तक पहुँचाया जा सकता है।
Step 3: Final Answer:
अतः रेडियो नाटक में संवाद ही 'आँखें' बनकर श्रोता को पूरी कहानी से जोड़ते हैं, इसलिए इनका सशक्त होना अनिवार्य है।
Quick Tip: रेडियो संवादों में अक्सर पात्रों के नाम का प्रयोग किया जाता है ताकि श्रोता भ्रमित न हों कि कौन बोल रहा है।
6(i).
'आत्मपरिचय' कविता में कवि के व्यवहार में कवि की किन असंगतियों का उल्लेख हुआ है ? स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
हरिवंश राय बच्चन की कविता 'आत्मपरिचय' में कवि ने अपने व्यक्तित्व के उन विरोधाभासी गुणों को प्रस्तुत किया है, जो सामान्यतः एक साथ नहीं देखे जाते।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि के व्यवहार में प्रमुख रूप से निम्नलिखित असंगतियाँ (विरोधाभास) दिखाई देती हैं:
1. संसार से प्रेम और विरक्ति: कवि कहता है कि वह 'जग-जीवन का भार' लेकर फिरता है, लेकिन फिर भी उसके हृदय में सबके प्रति प्रेम है। वह दुनिया में रहकर भी दुनिया की परवाह नहीं करता।
2. शीतल वाणी में आग: कवि की भाषा और वाणी सुनने में कोमल और शीतल है, परंतु उसके भीतर विचारों की तीव्रता और सामाजिक विसंगतियों के प्रति विद्रोह की 'आग' समाहित है।
3. रुदन और राग: वह अपने दुखों और आँसुओं (रुदन) में भी काव्य का संगीत (राग) ढूँढ लेता है।
4. उन्माद और अवसाद: वह अपनी मस्ती और पागलपन (उन्माद) के बीच भी एक टीस या गहरा दुख (अवसाद) छुपाए रहता है।
Step 3: Final Answer:
अतः कवि का जीवन 'विरोधाभासों का सामंजस्य' है, जहाँ वह दुख और सुख, प्रेम और विरक्ति को एक साथ साधकर चलता है।
Quick Tip: असंगति को स्पष्ट करने के लिए कविता की उन पंक्तियों का उल्लेख करें जहाँ दो विपरीत स्थितियाँ एक साथ दिखाई गई हों, जैसे - "शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ"।
6(ii).
पतंग के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग कवि ने किया है, उन्हें लिखते हुए उसके पीछे के उद्देश्य को भी कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
आलोक धन्वा की कविता 'पतंग' में पतंग को बच्चों की उमंगों, सपनों और उनके सुकुमार व्यक्तित्व के प्रतीक के रूप में उपयोग किया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
विशेषण: कवि ने पतंग को 'सबसे हल्की', 'सबसे रंगीन', 'सबसे पतला कागज़' और 'बाँस की सबसे पतली कमानी' कहा है।
उद्देश्य: इन विशेषणों के प्रयोग के पीछे कवि का उद्देश्य बच्चों के कोमल मन और उनकी असीमित कल्पनाओं को चित्रित करना है:
1. पतंग की 'हल्की और पतली' संरचना बच्चों की मासूमियत और उनकी भावनाओं की नाजुकता को दर्शाती है।
2. 'रंगीन' शब्द बच्चों के जीवन की खुशियों और उनके रंग-बिरंगे सपनों का प्रतीक है।
3. जिस तरह पतंग ज़रा सी हवा में ऊँचा उठने का साहस रखती है, उसी तरह बच्चे भी कठिन परिस्थितियों के बीच अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए उत्साहित रहते हैं।
Step 3: Final Answer:
कवि ने पतंग की भौतिक विशेषताओं को बच्चों की मानसिक अवस्था से जोड़कर उनकी निर्भयता और अटूट उत्साह को अभिव्यक्त किया है।
Quick Tip: पतंग यहाँ एक 'मेटाफर' (रूपक) है। उसके गुणों को बच्चों की 'बाल-सुलभ' प्रवृत्तियों से जोड़कर उत्तर लिखने पर अधिक अंक मिलते हैं।
6(iii).
क्रांति की गर्जना से शोषक वर्ग पर पड़ने वाले प्रभाव को 'बादल राग' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'बादल राग' में बादल 'क्रांति' का प्रतीक है, जो शोषितों के लिए आशा और शोषकों के लिए विनाश का संदेश लाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
क्रांति की गर्जना (बादलों की गूँज) का शोषक वर्ग (अमीर/पूंजीपति) पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है:
1. भय का वातावरण: बादलों की भयंकर गर्जना सुनकर शोषक वर्ग का हृदय काँप उठता है। उन्हें आभास हो जाता है कि अब उनकी सत्ता डगमगाने वाली है।
2. महलों में असुरक्षा: कवि के अनुसार, शोषक अपनी 'अट्टालिकाओं' (ऊँचे महलों) में दुबके रहते हैं। उन्हें अपना धन और वैभव छिन जाने का डर सताता है।
3. पराजय का बोध: वे डर के मारे आँखें बंद कर लेते हैं क्योंकि वे क्रांति के तेज को सहन करने की शक्ति नहीं रखते।
जबकि गरीब किसान इस गर्जना को सुनकर प्रसन्न होता है क्योंकि उसे शोषण से मुक्ति की आशा दिखाई देती है।
Step 3: Final Answer:
अतः क्रांति की आहट शोषक वर्ग के सुख-चैन को छीन लेती है और उन्हें अपनी अकर्मण्यता व अत्याचारों के परिणाम का डर दिखाती है।
Quick Tip: 'बादल राग' प्रगतिवादी कविता है। इसमें बादलों को 'क्रांतिदूत' के रूप में देखा गया है, जो समाज में व्यवस्था परिवर्तन का प्रतीक है।
7(i).
'छोटा मेरा खेत' कविता के मूल भाव के बारे में सही कथन है :
Step 1: Understanding the Concept:
उमाशंकर जोशी की यह कविता सृजन (निर्माण) की प्रक्रिया को खेती के रूपक के माध्यम से समझाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि कहता है कि जिस प्रकार खेत में बीज बोने से फल प्राप्त होते हैं, उसी प्रकार कागज़ के पन्ने पर विचार बोने से कविता बनती है।
खेती की फसल एक बार कटने पर समाप्त हो जाती है, परंतु कविता (सृजन) एक ऐसी फसल है जिसे पाठक युगों-युगों तक पढ़ते हैं और उसका रस कभी कम नहीं होता।
यही सृजन का 'शाश्वत' (Eternal) गुण है।
Step 3: Final Answer:
अतः विकल्प (D) सही है क्योंकि यह कविता साहित्य की अमरता और निर्माण प्रक्रिया को दर्शाती है।
Quick Tip: 'शाश्वत' का अर्थ है जो समय के साथ समाप्त न हो। साहित्य की फसल हमेशा अक्षय रहती है।
7(ii).
कविता की रचना-प्रक्रिया के संदर्भ में 'अंधड़' क्या है ?
Step 1: Understanding the Concept:
'अंधड़' यहाँ प्राकृतिक तूफान के लिए नहीं, बल्कि कवि के मन की स्थिति के लिए प्रयुक्त हुआ है।
Step 2: Detailed Explanation:
कविता की रचना अचानक नहीं होती; इसके लिए मन में किसी विचार या भावना का तीव्र वेग आवश्यक है।
कवि जब "कोई अंधड़ कहीं से आया" कहता है, तो उसका तात्पर्य उन 'तीव्र भावनाओं' या 'प्रेरणा' से है जो अचानक मन में उठती हैं और शब्द रूपी बीज बोने के लिए मजबूर करती हैं।
यह आवेग ही सृजन का आरंभिक बिंदु है।
Step 3: Final Answer:
इसलिए, रचना-प्रक्रिया में 'अंधड़' का अर्थ भावनाओं का तीव्र आवेग है। अतः विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: प्रतीकों को पहचानें: अंधड़ = प्रेरणा/भाव-वेग, बीज = विचार।
7(iii).
कवि अपने छोटे खेत में कौन-से बीज बोता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
खेती में बीज बोया जाता है ताकि फसल उगे, साहित्य में 'बीज' सृजनात्मक सोच का प्रतीक है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि ने कागज़ के पन्ने को अपना खेत माना है। इस वैचारिक खेत में वह भौतिक अनाज के बीज नहीं बो सकता।
यहाँ 'बीज' से तात्पर्य उन 'विचारों' या 'भावों' से है जो कवि के मन में उत्पन्न होते हैं और जिन्हें वह पन्ने पर उतारता है।
यही विचार कल्पना के खाद-पानी से कविता के रूप में विकसित होते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः कवि के खेत में बोए जाने वाले बीज 'विचारों' के प्रतीक हैं। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: काव्य में प्रतीकार्थ (Symbolic meaning) शब्दों के शाब्दिक अर्थ से भिन्न होता है।
7(iv).
कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है ?
Step 1: Understanding the Concept:
पूरी कविता एक विस्तृत रूपक (Extended Metaphor) पर आधारित है जहाँ कविता लिखने और खेती करने की प्रक्रियाओं के बीच तुलना की गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि ने कविता लेखन (कवि-कर्म) को खेती (कृषि-कर्म) के समान बताया है:
1. पन्ना = चौकोर खेत
2. विचार = बीज
3. कल्पना = खाद/रसायन
4. शब्द/कविता = अंकुर और फसल
जिस प्रकार किसान मेहनत से बीज उगाकर फल प्राप्त करता है, कवि भी अपने चिंतन से कविता रूपी फल तैयार करता है।
Step 3: Final Answer:
अतः कवि-कर्म की तुलना कृषि-कर्म से की गई है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: दोनों कार्यों में धैर्य, सृजन और पोषण की आवश्यकता होती है, यही इनकी मुख्य समानता है।
7(v).
'कटाई अनंतता की' का प्रतीकार्थ है :
Step 1: Understanding the Concept:
'अनंतता' का अर्थ है जो समय की सीमा से परे हो। 'कालजयी' वह रचना है जो युगों तक जीवित रहे।
Step 2: Detailed Explanation:
खेत की फसल काटने के बाद समाप्त हो जाती है।
परंतु कवि कहता है कि उसके खेत की कटाई 'अनंत' है। इसका तात्पर्य यह है कि साहित्य एक बार रच दिया जाए, तो वह पीढ़ियों तक पाठकों को प्रेरणा और रस देता रहता है।
इसे कितनी भी बार 'पढ़ा' या 'काटा' जाए, इसका मूल्य और रस कभी कम नहीं होता। साहित्य समय पर विजय प्राप्त कर लेता है।
Step 3: Final Answer:
अतः 'कटाई अनंतता की' साहित्य के 'कालजयी' या 'अमर' होने की ओर संकेत करती है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: साहित्य और कला कभी पुरानी नहीं होती; उनका आस्वादन अनंत काल तक चलता रहता है।
8(i).
फूलों के खिलने से कविता का क्या संबंध है ? 'कविता के बहाने' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
कुँवर नारायण द्वारा रचित 'कविता के बहाने' में कविता की अपार संभावनाओं को प्रकृति के विभिन्न तत्वों (जैसे फूल, चिड़िया) के माध्यम से समझाया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि के अनुसार, फूल खिलकर अपनी सुगंध और सौंदर्य बिखेरते हैं, जो कविता के 'खिलने' (भावों के प्रकटीकरण) के समान प्रतीत होता है।
परंतु, फूलों और कविता के बीच एक बुनियादी अंतर है:
1. फूलों के खिलने की एक समय-सीमा होती है; वे खिलने के बाद एक निश्चित समय में मुरझा जाते हैं।
2. इसके विपरीत, कविता एक बार रचे जाने के बाद बिना मुरझाए सदियों तक अपनी वैचारिक महक और संदेश बिखेरती रहती है।
3. फूल केवल बाहरी वातावरण को सुगंधित करते हैं, जबकि कविता मनुष्य के अंतर्मन को प्रभावित कर उसे नई दिशा प्रदान करती है।
कवि कहता है कि "फूल क्या जाने", अर्थात फूल अपनी सीमित आयु के कारण कविता की अनंत यात्रा और उसकी कालजयी प्रकृति को समझ नहीं सकता।
Step 3: Final Answer:
अतः फूलों का खिलना कविता के लिए एक प्रेरक दृश्य तो है, परंतु कविता का प्रभाव और उसकी आयु फूलों की तुलना में असीमित और अमर होती है।
Quick Tip: उत्तर में 'कविता की अमरता' और 'फूलों की नश्वरता' के बीच के द्वंद्व को स्पष्ट करना आवश्यक है।
8(ii).
"कैमरे में बंद अपाहिज" कविता हर ऐसे व्यक्ति की ओर इशारा करती है, जो दुख-दर्द, यातना-वेदना को बेचना चाहता है।" कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
रघुवीर सहाय की यह कविता मीडिया के बाज़ारीकरण और उसकी संवेदनहीनता पर तीखा प्रहार करती है, जहाँ किसी की बेबसी केवल एक 'व्यावसायिक उत्पाद' बन कर रह जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
कविता में एक साक्षात्कारकर्ता (Interviewer) एक अपाहिज व्यक्ति से उसकी अपंगता पर अत्यंत संवेदनहीन सवाल पूछता है।
उसका मुख्य उद्देश्य अपाहिज की सहायता करना नहीं, बल्कि उसे कैमरे के सामने रुलाकर दर्शकों की सहानुभूति बटोरना है ताकि उसका कार्यक्रम 'सफल' और लोकप्रिय हो सके।
लेखक के अनुसार, यह 'दुख-दर्द को बेचना' है क्योंकि यहाँ मानवीय संवेदनाएँ व्यापार का साधन बन गई हैं।
"हम समर्थ शक्तिवान / और हम एक दुर्बल को लाएँगे" - ये पंक्तियाँ मीडिया के अहंकारी और शोषक रवैये को दर्शाती हैं।
जब भावनाओं का बाज़ारीकरण होता है, तो व्यक्ति की गरिमा खत्म हो जाती है और केवल आर्थिक स्वार्थ शेष रह जाते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः यह कविता उन सभी प्रवृत्तियों की निंदा करती है जो निजी लाभ या मीडिया की लोकप्रियता के लिए दूसरों की व्यक्तिगत पीड़ा का शोषण करते हैं।
Quick Tip: उत्तर लिखते समय 'संवेदनहीनता', 'व्यावसायिक क्रूरता' और 'मानवीय गरिमा का हनन' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
8(iii).
'कवितावली' में तुलसीदास ने अपने समाज की किन सामाजिक बुराइयों का उल्लेख किया है ?
Step 1: Understanding the Concept:
तुलसीदास की 'कवितावली' के उत्तरकांड के छंदों में तत्कालीन मध्यकालीन समाज की दयनीय आर्थिक स्थिति और अकाल जैसे संकटों का सजीव वर्णन मिलता है।
Step 2: Detailed Explanation:
तुलसीदास जी ने समाज की निम्नलिखित बुराइयों और संकटों का उल्लेख किया है:
1. भयंकर बेरोजगारी: "खेती न किसान को, भिखारी को न भीख बली" - अर्थात किसान के पास खेती नहीं है और भिखारी को भीख भी नहीं मिल रही है।
2. आर्थिक हाहाकार: व्यापारियों का व्यापार ठप है और नौकरों के पास कोई काम नहीं है। जीविका के अभाव में लोग दुखी होकर एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि कहाँ जाएँ।
3. नैतिक पतन: पेट की भूख इतनी तीव्र है कि लोग अपनी संतानों तक को बेचने को मजबूर हैं। लोग ऊँचे-नीचे अनैतिक कर्म करने पर उतारू हैं।
4. गरीबी का रावण: कवि ने गरीबी की तुलना रावण से की है (दरिद्र-दशानन), जो पूरी दुनिया को अपने चंगुल में फंसा रहा है।
Step 3: Final Answer:
निष्कर्षतः, तुलसीदास ने अपने समाज के उस कठिन दौर को चित्रित किया है जहाँ लोग बुनियादी आवश्यकताओं के अभाव में तड़प रहे थे और समाज में अस्थिरता व्याप्त थी।
Quick Tip: तुलसीदास को केवल भक्त कवि न मानकर एक 'समाज-द्रष्टा' के रूप में देखें जिन्होंने 'पेट की आग' को सबसे बड़ा संकट माना है।
9(i).
भक्तिन की जीवन-स्थितियाँ उस समय के ग्रामीण समाज की किस वास्तविकता को प्रकट करती हैं ?
Step 1: Understanding the Concept:
महादेवी वर्मा द्वारा रचित संस्मरण 'भक्तिन' के माध्यम से ग्रामीण पितृसत्तात्मक समाज में एक स्त्री के कठिन संघर्ष और उसकी विवशताओं को दर्शाया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
भक्तिन के जीवन से तत्कालीन ग्रामीण समाज की निम्नलिखित वास्तविकताएँ सामने आती हैं:
1. पुत्र-प्राप्ति का दबाव: भक्तिन को केवल पुत्रियाँ होने के कारण अपनी सास और जेठानियों द्वारा अपमानित किया जाता था, क्योंकि समाज में पुत्र को ही कुल का वारिस माना जाता था।
2. स्त्री शिक्षा की उपेक्षा: भक्तिन की बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा गया और उन्हें बचपन से ही घर और खेत के कामों में झोंक दिया गया।
3. विधवाओं की दुर्दशा: पति की मृत्यु के बाद भक्तिन को अपनी संपत्ति और सम्मान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। उसके जेठ और रिश्तेदारों ने उसकी संपत्ति हड़पने के लिए अनेक कुचक्र रचे।
4. कठोर परंपराएँ: ग्रामीण समाज में विधवा स्त्री का पुनर्विवाह वर्जित था और उन्हें हर अमंगल का जिम्मेदार माना जाता था।
Step 3: Final Answer:
अतः भक्तिन का चरित्र ग्रामीण भारत की उन असंख्य स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने दमघोंटू सामाजिक परंपराओं के बीच अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ी।
Quick Tip: भक्तिन के संघर्ष के पीछे 'संपत्ति' और 'पितृसत्ता' (Patriarchy) के आपसी संबंधों को समझना उत्तर को बेहतर बनाता है।
9(ii).
'काले मेघा पानी दे' पाठ के आधार पर बारिश न होने से उत्पन्न संकटों को स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
धर्मवीर भारती के इस पाठ में सूखे के समय ग्रामीण जनजीवन की बेबसी और वर्षा के लिए अपनाए जाने वाले लोक-विश्वासों (इंदर सेना) का सजीव चित्रण है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक ने अकाल के कारण उत्पन्न निम्नलिखित भयानक संकटों का उल्लेख किया है:
1. जल स्रोतों का सूखना: गाँव के कुएँ सूख गए थे और नलों से पानी के बजाय केवल भाप या कीचड़ जैसा पानी निकलता था।
2. कृषि का विनाश: खेतों की मिट्टी पत्थर की तरह सख्त हो गई थी और उसमें बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई थीं, जिससे फसलों के उगने की कोई उम्मीद नहीं बची थी।
3. पशुओं का कष्ट: मवेशी और अन्य जानवर प्यास के कारण तड़प-तड़प कर प्राण त्याग रहे थे।
4. मानवीय हाहाकार: भीषण लू और धूल के कारण लोगों का जीवन दूभर हो गया था। लोग व्याकुल होकर पूजा-पाठ और टोटकों (जैसे इंदर सेना पर पानी डालना) का सहारा ले रहे थे ताकि भगवान प्रसन्न हों।
Step 3: Final Answer:
निष्कर्षतः, बारिश का न होना केवल एक प्राकृतिक कमी नहीं थी, बल्कि यह गाँव की पूरी अर्थव्यवस्था और जीवन के आधार को समाप्त कर देने वाला संकट था।
Quick Tip: इस संकट के दौरान 'विज्ञान' और 'परंपरा' के बीच का संघर्ष भी लेखक ने बहुत प्रभावी ढंग से दिखाया है।
9(iii).
'समता' का आशय स्पष्ट करते हुए 'मेरी कल्पना का आदर्श समाज' पाठ के आधार पर लिखिए कि राजनीतिज्ञ के संदर्भ में समता को पाठ में कैसे स्पष्ट किया गया है ?
Step 1: Understanding the Concept:
डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार, एक न्यायपूर्ण समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता (भाईचारे) पर टिका होना चाहिए। यहाँ समता एक आदर्श और व्यावहारिक सिद्धांत दोनों है।
Step 2: Detailed Explanation:
समता का आशय: इसका अर्थ यह है कि मनुष्य के साथ उसके वंश, जाति या पैतृक संपत्ति के आधार पर भेदभाव न किया जाए, बल्कि सबको समान सुविधाएँ मिलें।
राजनीतिज्ञ के संदर्भ में व्याख्या:
1. एक राजनीतिज्ञ को बहुत बड़ी जनसंख्या के साथ व्यवहार करना पड़ता है। उसके पास प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग प्रतिभा या आवश्यकता के अनुसार अलग व्यवहार करने का समय नहीं होता।
2. इसलिए, एक 'व्यावहारिक नियम' के रूप में उसे सभी मनुष्यों को एक ही श्रेणी में मानकर उनके साथ समान व्यवहार करना पड़ता है।
3. लेखक तर्क देते हैं कि हालांकि सभी मनुष्य जन्म से समान नहीं होते (बौद्धिक या शारीरिक रूप से), फिर भी समाज का कर्तव्य है कि वह सबको आगे बढ़ने के 'समान अवसर' दे ताकि वे अपनी क्षमता सिद्ध कर सकें।
Step 3: Final Answer:
अतः राजनीतिज्ञ के लिए समता एक कल्पित वस्तु होते हुए भी शासन और व्यवहार का एकमात्र सफल मार्ग है।
Quick Tip: अंबेडकर जी का मुख्य बिंदु यह है कि समाज को केवल 'उत्तम' लोगों को ही विशेष सुविधाएँ नहीं देनी चाहिए, बल्कि सबको समान मंच देना चाहिए।
10(i).
श्रम विभाजन और श्रमिक-विभाजन में अंतर 'जाति प्रथा और श्रम विभाजन' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
अंबेडकर जी स्पष्ट करते हैं कि आधुनिक समाज में श्रम विभाजन आवश्यक है, परंतु भारत की जाति प्रथा इसे 'श्रमिकों का अलोकतांत्रिक विभाजन' बना देती है।
Step 2: Detailed Explanation:
श्रम विभाजन (Division of Labor): यह किसी भी कार्य को कुशलता से पूरा करने के लिए विशेषज्ञों के बीच कार्य का बँटवारा है। यह व्यक्ति की रुचि, शिक्षा और क्षमता पर आधारित होता है और परिवर्तनशील है।
श्रमिक-विभाजन (Division of Laborers):
1. जाति प्रथा कार्यों के साथ-साथ मनुष्यों का भी स्थायी विभाजन कर देती है।
2. यह विभाजन व्यक्ति की पसंद के बजाय उसके 'जन्म' पर आधारित होता है।
3. यह लोगों को एक-दूसरे की तुलना में ऊँचा या नीचा ठहराता है, जो विश्व के किसी अन्य आधुनिक समाज में नहीं है।
4. यह श्रमिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी ऐसे पेशे से जीवन भर के लिए बाँध देता है जिसमें उसकी कोई रुचि नहीं होती, जिससे वह अकर्मण्य हो जाता है।
Step 3: Final Answer:
अतः श्रम विभाजन सकारात्मक है, किंतु जाति आधारित श्रमिक-विभाजन विकास में बाधक और मनुष्य की गरिमा के विरुद्ध है।
Quick Tip: मुख्य अंतर 'स्वैच्छिकता' (Voluntary choice) का है। श्रम विभाजन स्वैच्छिक होता है, जबकि श्रमिक-विभाजन अनिवार्य और जन्मजात होता है।
10(ii).
'शिरीष के फूल' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से जीवन के किस सत्य को उजागर किया है और क्यों?
Step 1: Understanding the Concept:
हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने शिरीष के फूल को एक 'अवधूत' (Sanyasi) के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है जो बाहरी गर्मी (संघर्ष) के बावजूद अंदर से कोमल बना रहता है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक ने शिरीष के माध्यम से निम्नलिखित सत्यों को स्पष्ट किया है:
1. धैर्य और शांति: जेठ की जलती धूप में भी शिरीष लहलहाता है। यह जीवन का सत्य है कि बाहर कितनी ही मुश्किलें हों, मनुष्य को अपने भीतर की शांति नहीं खोनी चाहिए।
2. परिवर्तनशीलता का नियम: शिरीष के पुराने फल तब तक डाल नहीं छोड़ते जब तक नए धक्के मार कर उन्हें निकाल नहीं देते। लेखक कहते हैं कि समय के साथ जो अपनी जगह नहीं छोड़ता, उसका विनाश निश्चित है।
3. अनासक्ति: शिरीष हवा से अपना रस खींचता है। इसी प्रकार मनुष्य को भी सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी उनसे ऊपर उठकर (अनासक्त होकर) कर्म करना चाहिए।
4. मृत्यु का सत्य: जो जन्मा है, वह गिरेगा ही। शिरीष हमें याद दिलाता है कि मृत्यु अटल है, इसलिए जीवन को गरिमा और कोमलता के साथ जीना चाहिए।
Step 3: Final Answer:
शिरीष प्रतिकूलताओं में अडिग रहने वाले 'मानवीय हौसले' का प्रतीक है, जो संघर्ष के बीच भी मुस्कुराने की प्रेरणा देता है।
Quick Tip: शिरीष की तुलना कवि ने महात्मा गांधी और कबीर से की है, क्योंकि वे भी अपने समय के 'अनासक्त योगी' थे।
10(iii).
पहलवान की ढोलक मृतप्राय गाँव वालों के लिए कैसे जीवनदायिनी थी? 'पहलवान की ढोलक' पाठ के संदर्भ में लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
फणीश्वरनाथ रेणु की इस कहानी में ढोलक की आवाज़ को कला की उस अदृश्य शक्ति के रूप में दिखाया गया है जो घोर निराशा में भी जीवन की आशा जगाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
गाँव में मलेरिया और हैजा जैसी महामारियों के कारण मौत का तांडव मच रहा था। लोग भयभीत और हताश थे।
1. रात के गहरे सन्नाटे में जब लुट्टन की ढोलक "चट-धा, गिड़-धा" की गूँज पैदा करती, तो ग्रामीणों के ठंडे पड़ते शरीर में गर्मी आ जाती थी।
2. वह आवाज़ उन्हें याद दिलाती थी कि वे अभी जीवित हैं। वह बीमार लोगों की नसों में बिजली की तरह दौड़ती थी।
3. हालांकि ढोलक किसी को ठीक नहीं कर सकती थी, लेकिन वह लोगों को 'कायरता' से मरने के बजाय 'वीरता' के साथ मौत का सामना करने की प्रेरणा देती थी।
4. मरते हुए लोग भी उस लय के सहारे अपनी असहनीय पीड़ा को कुछ पलों के लिए भूल जाते थे।
Step 3: Final Answer:
अतः लुट्टन की ढोलक एक मानसिक औषधि थी जो गाँव के खौफनाक सन्नाटे को चीरकर लोगों के भीतर जीने की प्रबल इच्छाशक्ति का संचार करती थी।
Quick Tip: ढोलक की आवाज़ यहाँ 'संगीत' और 'कला' के उस महत्त्व को दर्शाती है जो विज्ञान की पहुँच से बाहर की मानवीय संवेदनाओं को सहलाती है।
11(i).
गद्यांश के अनुसार 'आँख फोड़ना' का अभिप्राय है :
Step 1: Understanding the Concept:
जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित 'बाजार दर्शन' के इस गद्यांश में 'आँख फोड़ना' एक मुहावरेदार प्रयोग है जो पलायनवादी समाधान को दर्शाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक कहते हैं कि लोभ को मन से जीतना चाहिए। यदि हम लोभ जगाने वाली सुंदर वस्तुओं को न देखने के लिए अपनी आँखें ही फोड़ लें, तो यह कोई समाधान नहीं है।
यह तो केवल उस 'साधन' (आँख) को नष्ट करना है जिससे हम दुनिया को देखते हैं।
अंदर का लोभ वैसे ही जीवित रहेगा क्योंकि समस्या का केंद्र आँख नहीं, बल्कि नियंत्रणहीन मन है।
Step 3: Final Answer:
अतः 'आँख फोड़ना' का अर्थ बाहरी साधनों को नष्ट करके सच्चाई से भागना है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: समस्या का समाधान 'मन के भीतर' खोजना चाहिए, 'बाहरी अंगों' या 'परिस्थितियों' को दोष देने से कुछ नहीं होता।
11(ii).
लेखक के अनुसार 'मन को बंद कर देना' क्यों सही नहीं है ?
Step 1: Understanding the Concept:
मनुष्य का मन निरंतर क्रियाशील रहता है। उसे पूरी तरह शून्य कर देना प्राकृतिक रूप से असंभव है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, "ठाठ देकर मन को बंद कर रखना जड़ता है।"
शून्य होने का अधिकार केवल परमात्मा का है क्योंकि वही संपूर्ण है। मनुष्य अपूर्ण है, इसलिए उसके मन में इच्छाएँ उठेंगी ही।
यदि हम बलपूर्वक मन को बंद करेंगे, तो वह 'जड़' (Inert/Lifeless) हो जाएगा, जिससे मनुष्य की सोचने-समझने की शक्ति समाप्त हो जाएगी। यह मोक्ष का रास्ता नहीं है।
Step 3: Final Answer:
अतः मन को बंद करना उसे निर्जीव बनाना है, जो गलत है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: 'शून्य' (Emptiness) ईश्वर का गुण है, जबकि 'जड़ता' (Inertia) अस्वाभाविक अवरोध का परिणाम है।
11(iii).
गद्यांश के अनुसार 'सच्चा ज्ञान' किस प्रकार की भावना से प्राप्त हो सकता है ?
Step 1: Understanding the Concept:
ज्ञान का अर्थ अहंकार का अभाव और अपनी सीमाओं को पहचानना है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक कहते हैं कि "सच्चा ज्ञान सदा अपूर्णता के बोध को हम में गहरा करता है।"
जब हमें यह अहसास होता है कि हम अभी पूर्ण नहीं हैं और हमें बहुत कुछ सीखना और सुधारना है, तभी हम सच्चे ज्ञान के मार्ग पर चलते हैं।
अपूर्णता को स्वीकार करना ही विकास की पहली सीढ़ी है। जो स्वयं को पूर्ण मान लेता है, उसका विकास रुक जाता है।
Step 3: Final Answer:
सच्चा ज्ञान स्वयं की अपूर्णता को स्वीकार करने से ही आता है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: अहंकार पूर्णता का स्वाँग करता है, जबकि ज्ञान अपूर्णता को स्वीकार कर निरंतर सीखने की प्रेरणा देता है।
11(iv).
गद्यांश के अनुसार लोभ से बचने का क्या उपाय है ?
Step 1: Understanding the Concept:
लोभ पर विजय का अर्थ इच्छाओं का अंत नहीं, बल्कि उन पर नियंत्रण (Self-control) है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अनुसार, लोभ को 'नकारने' (Denial) से लोभ नहीं हारता।
सच्चा उपाय यह है कि हम सचेत रहें और अपनी अपूर्णता को स्वीकार करते हुए मन को संतुलित या संयमित रखें।
संयमित मन ही यह निर्णय ले सकता है कि बाजार की कौन सी वस्तु उसकी वास्तविक आवश्यकता है और कौन सी केवल व्यर्थ का आकर्षण।
Step 3: Final Answer:
अतः लोभ से मुक्ति का मार्ग 'संयम' है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: पूरे पाठ का सार यह है कि 'मन का खाली न होना' और 'संयम' ही बाज़ार के जादू से बचने की दवा है।
11(v).
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. लोभ का नकार ही लोभ की जीत है और यह व्यक्ति की हार है।
II. लोभ को दबाना ही उसे जीतना है।
III. संयमित मन ही लोभ पर विजय पा सकता है।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं ?
Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के वैचारिक सार और लेखक के तर्कों की पहचान करने के लिए है।
Step 2: Detailed Explanation:
1. कथन I: गद्यांश कहता है, "लोभ का यह जीतना नहीं है कि... वहाँ नकार हो! यह तो लोभ की ही जीत है।" अर्थात केवल मना करने से लोभ नहीं मरता। यह कथन सही है।
2. कथन II: लोभ को दबाना 'जड़ता' है, जीत नहीं। लेखक ने इसे गलत बताया है। अतः यह कथन गलत है।
3. कथन III: लेखक के अनुसार सचेत रहकर और अपनी सीमाएँ जानकर मन को वश में रखना (संयम) ही लोभ को जीतने का सही मार्ग है। यह कथन सही है।
Step 3: Final Answer:
कथन I और III गद्यांश के सिद्धांतों के पूर्णतः अनुकूल हैं। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: जब 'नकार' या 'दमन' की बात आए, तो समझें कि वह लेखक की दृष्टि में नकारात्मक है। 'संयम' और 'स्वीकृति' सकारात्मक हैं।
12(i).
'सिल्वर वैडिंग' कहानी में आधुनिक पारिवारिक मूल्यों के विघटन की यथार्थ प्रस्तुति है।" इस कथन के आधार पर वर्तमान प्रसंगों में विघटित हो रहे मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्हें बचाने के उपाय लिखिए।
Step 1: Understanding the Concept:
मनोहर श्याम जोशी की यह कहानी पुरानी पीढ़ी के सिद्धांतों और नई पीढ़ी की पाश्चात्य जीवनशैली के बीच होने वाले अंतर्द्वंद्व को यशोधर बाबू के माध्यम से दिखाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
विघटित हो रहे मूल्य:
1. संयुक्त परिवार का अभाव: यशोधर बाबू अपने रिश्तेदारों और संयुक्त परिवार को महत्त्व देते हैं, जबकि उनके बच्चे 'एकल परिवार' (Nuclear family) और अपनी प्राइवेसी को अधिक प्रधानता देते हैं।
2. दिखावे की संस्कृति: सिल्वर वेडिंग जैसी महँगी पार्टियाँ यशोधर बाबू को 'समहाउ इम्प्रॉपर' लगती हैं, परंतु नई पीढ़ी इसे प्रतिष्ठा मानती है।
3. बुजुर्गों की राय का अनादर: बच्चों द्वारा पिता के अनुभवों को "पुराना" और "बेकार" कह देना आज के समाज की बड़ी कड़वी सच्चाई है।
बचाने के उपाय:
1. खुला संवाद (Open Communication): माता-पिता और बच्चों को एक-दूसरे की बात धैर्य से सुननी चाहिए।
2. समन्वय: पुरानी पीढ़ी को समय के साथ कुछ बदलाव स्वीकार करने चाहिए और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों का आदर करना चाहिए।
3. आर्थिक और मानसिक सहयोग: परिवार को केवल एक मकान नहीं, बल्कि स्नेह और त्याग का केंद्र बनाना चाहिए।
Step 3: Final Answer:
पारिवारिक मूल्यों की रक्षा तभी संभव है जब हम 'आधुनिक' होते हुए भी अपने 'मानवीय और सांस्कृतिक संस्कारों' को जीवित रखें।
Quick Tip: यशोधर बाबू का तकियाकलाम "समहाउ इम्प्रॉपर" उनके उस विरोध को दर्शाता है जो वे नई संस्कृति के प्रति महसूस करते हैं।
12(ii).
"कवि भी अपने जैसा ही एक हाड़-मांस का; क्रोध-लोभ का मनुष्य ही होता है।" 'जूझ' कहानी के लेखक को यह अहसास कब हुआ और इस अहसास का क्या परिणाम निकला?
Step 1: Understanding the Concept:
आनंद यादव की आत्मकथात्मक कहानी 'जूझ' एक किशोर की संघर्षपूर्ण शिक्षा और उसके रचनात्मक विकास की गाथा है।
Step 2: Detailed Explanation:
अहसास का क्षण: लेखक के स्कूल में मराठी पढ़ाने वाले मास्टर सोंदलगेकर जी खुद एक कवि थे। वे जब कक्षा में कविताएँ गाते थे, तो उसमें पूरी तरह रम जाते थे। लेखक ने देखा कि वे भी एक सामान्य इंसान हैं जो अपने आस-पास की प्रकृति पर कविताएँ लिखते हैं। लेखक ने तब महसूस किया कि कवि कोई अलौकिक या जादुई प्राणी नहीं है, बल्कि वह हमारे जैसा ही एक संवेदनशील मनुष्य है।
सुखद परिणाम:
1. आत्मविश्वास का उदय: लेखक के मन से कवियों के प्रति जो एक भय या दूरी थी, वह खत्म हो गई। उसने सोचा कि यदि मास्टर जी कविता लिख सकते हैं, तो वह भी लिख सकता है।
2. रचनात्मक सक्रियता: लेखक अब खेतों में काम करते हुए या भैंस चराते हुए कविताएँ रचने और गुनगुनाने लगा। उसने पत्थर या भैंस की पीठ पर लकड़ी से तुकबंदी करना शुरू किया।
3. अकेलेपन की समाप्ति: पहले लेखक को खेत में अकेले काम करना बुरा लगता था, अब उसे एकांत अच्छा लगने लगा क्योंकि वह अपनी कविताओं की दुनिया में व्यस्त रहने लगा।
Step 3: Final Answer:
कवि को 'मनुष्य' के रूप में देखने से लेखक के भीतर के सृजन का द्वार खुला और वह एक महान साहित्यकार बनने की दिशा में अग्रसर हुआ।
Quick Tip: इस कहानी में शिक्षक सोंदलगेकर जी 'कैटालिस्ट' (Catalyst) की भूमिका निभाते हैं, जिन्होंने एक ग्रामीण लड़के की सुप्त प्रतिभा को जगाया।
12(iii).
'अतीत में दबे पाँव' पाठ में लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को 'अनुशासित' क्यों कहा है ? सिंधु घाटी सभ्यता की संस्कृति व सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कीजिए।
Step 1: Understanding the Concept:
ओम थानवी का यह पाठ मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई से मिले साक्ष्यों के आधार पर प्राचीन भारतीय सभ्यता की भव्यता और उसकी आधुनिकता का वर्णन करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
अनुशासन के प्रमाण:
1. नगर नियोजन: वहाँ की सड़कें ग्रिड प्लॉन (Grid Plan) पर आधारित थीं। जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था इतनी उन्नत थी कि आधुनिक शहर भी उसके सामने फीके लगते हैं।
2. शक्ति का अभाव: वहाँ किसी बड़े महल, विशाल मंदिर या राजा की भव्य मूर्तियों के अवशेष नहीं मिले। इससे सिद्ध होता है कि वहाँ सत्ता का डंडा नहीं था, बल्कि लोग स्वयं के नियमों से बंधे थे।
3. एकरूपता: घरों की ईंटों का आकार, सड़कों की चौड़ाई और कूपों का निर्माण पूरे नगर में एक व्यवस्थित अनुशासन को दर्शाता है।
संस्कृति व सामाजिक संरचना:
1. समतावादी समाज: घरों और सार्वजनिक अनाज कोठारों की बनावट से एक न्यायपूर्ण और समान समाज का संकेत मिलता है।
2. कलात्मक अभिरुचि: सिंधु सभ्यता 'लो-प्रोफाइल' (सादगीपूर्ण) थी। वहाँ दिखावे के स्थान पर 'कार्यक्षमता' को महत्त्व दिया गया था। मुहरें, खिलौने और मिट्टी के बर्तन उनकी उत्कृष्ट कला के गवाह हैं।
3. प्रकृति से तालमेल: उनकी खेती और सिंचाई व्यवस्था पर्यावरण के अनुकूल थी।
Step 3: Final Answer:
अतः सिंधु सभ्यता 'राज-पोषित' या 'धर्म-पोषित' होने के बजाय 'समाज-पोषित' थी, जहाँ नागरिक अनुशासन ही प्रगति का आधार था।
Quick Tip: लेखक का मुख्य तर्क यह है कि भव्यता के बिना भी कोई सभ्यता कितनी अनुशासित और सुरुचिपूर्ण हो सकती है, सिंधु घाटी इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.