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Nidhi Bamnawat

| Updated On - Mar 18, 2026

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 3 - 2/5/3) Question Paper 2026 with Solutions PDFs is available here for download. CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 3 - 2/5/3) Paper 2026 was held on 16 March, 2026. The question paper followed the latest syllabus and exam pattern prescribed by CBSE. The examination was conducted in the first half from 10:30 AM to 1:30 PM. Students can download the official paper in PDF format for reference.

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 3 - 2/5/3) Question Paper 2026 with Solutions PDFs

CBSE Board Class 12 Hindi Core (Set 3 - 2/5/3) Question Paper 2026 Download PDF Check Solutions

CBSE 2026 Class 12 HIndi Core Question Paper with Solutions

  1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

जीवन के लिए जागना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी सोना है। दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे के सहारे पर हैं। नींद का न आना भी एक विकार है, जिससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ आ सकती हैं और जो प्राणी रात-दिन सोता ही रहे, वह तो निष्क्रिय ही है। यदि दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की सहायता करती रहें — आदमी जागे काम करने के लिए, सोये विश्राम के लिए — तो जीवन सुखी होता है, लेकिन जागना जीवन का मुख्य लक्षण है, सोना अर्थात् विश्राम, तो केवल उसका सहायक है। इसलिए, जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है और निद्रा पतन तथा हास का। जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है, निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है।

कम-से-कम सोने के लिए अनेक उपाय और साधन बताए गए हैं। अधिक-से-अधिक सोने के लिए आज तक किसी ने कोई उपाय नहीं बताया — उसी तरह, जैसे स्वस्थ रहने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न किए जाते हैं, पर बीमारी के लिए भी किसी ने कोई प्रयत्न किया हो, ऐसा कभी सुनने में नहीं आया। वास्तव में स्वास्थ्य का न होना ही बीमारी है — उसी तरह, जैसे प्रकाश का न होना ही अंधकार है।

आदमी जितना ही कम सोये उतना ही जागरूक है, यहाँ तक कि कई विद्वानों का मत है, सोना कोई आवश्यक क्रिया नहीं। संभव है तपस्वियों के लिए सोना आवश्यक न हो, उनकी प्रकृति में रज और सत्त्व ही रह जाता हो, तम की सर्वथा हानि हो जाती हो, पर साधारण प्राणियों के लिए यही नियम लागू है कि मात्रा से अधिक सोने में हानि है। ध्यातव्य जब हम किसी राष्ट्र के विषय में जागृति की कामना करते हैं, तो इसका बोध यह होता है कि वह राष्ट्र मात्रा से अधिक सोया हुआ है और उसमें जीवन की मात्रा ज़रूरत से कम है।
 

Question 1:

'जागृति' और 'निद्रा' किन गुणों से संबंधित हैं?

  • (A) सत और तम
  • (B) रज और सत
  • (C) सत और रज
  • (D) रज और तम
Correct Answer: (D) रज और तम
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रस्तुत गद्यांश सांख्य दर्शन के तीन गुणों—सत, रज और तम—के माध्यम से मानवीय क्रियाओं की व्याख्या करता है।

इसमें सक्रियता को 'रज' और शिथिलता या विश्राम को 'तम' से जोड़ा गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश की सातवीं पंक्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि:

1. "जागृति रजोगुण-प्रधान क्रिया है।" (अर्थात् जागना रज गुण से संबंधित है)

2. "निद्रा में तमोगुण की प्रधानता होती है।" (अर्थात् सोना तम गुण से संबंधित है)

अतः जागृति 'रज' और निद्रा 'तम' गुण का प्रतिनिधित्व करते हैं।


Step 3: Final Answer:

दिए गए विकल्पों में से (D) सही उत्तर है।
Quick Tip: गद्यांश के सीधे तथ्यों पर आधारित प्रश्नों के लिए संबंधित पंक्तियों को रेखांकित (underline) करें, इससे सही विकल्प चुनने में त्रुटि की संभावना कम हो जाती है।


Question 2:

गद्यांश के अनुसार सोना अर्थात् निद्रा किसकी सहायक है?

  • (A) स्वास्थ्य की
  • (B) जागने की
  • (C) विश्राम की
  • (D) मृत्यु की
Correct Answer: (B) जागने की
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Step 1: Understanding the Concept:

लेखक ने जीवन के मुख्य उद्देश्य और उसकी सहायक क्रियाओं के बीच संबंध स्थापित किया है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के अनुसार, जीवन का मुख्य लक्षण 'जागना' है क्योंकि जागने पर ही कर्म संभव है।

लेखक लिखते हैं, "जागना जीवन का मुख्य लक्षण है, सोना अर्थात् - विश्राम, तो केवल उसका सहायक है।"

यहाँ 'उसका' सर्वनाम 'जागने' के लिए प्रयुक्त हुआ है। नींद शरीर को वह ऊर्जा और आराम प्रदान करती है जो पुनः जागने और कार्य करने के लिए आवश्यक है।


Step 3: Final Answer:

अतः निद्रा 'जागने' की सहायक प्रक्रिया है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: जब किसी वाक्य में 'सहायक' या 'पूरक' जैसे शब्द आएँ, तो देखें कि वह मुख्य क्रिया (Major Activity) किसे बता रहा है। यहाँ मुख्य क्रिया 'जागना' है।


Question 3:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए:

कथन : जागना जीवन के लिए आवश्यक है।

कारण : जाग्रत हो ध्यानपूर्वक कर्म करने से ही, व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की उन्नति संभव है।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कथन सही है, किंतु कारण गलत है।
  • (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
Correct Answer: (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न कथन और उसके पीछे के तर्क की तार्किक संगति (Logical Consistency) की जाँच करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

कथन 'जागना जीवन के लिए आवश्यक है' सत्य है क्योंकि गद्यांश के अनुसार जागृति ही जीवन का चिह्न है।

कारण यह स्पष्ट करता है कि जागृति क्यों आवश्यक है—क्योंकि यह उन्नति (अभ्युदय) का मार्ग प्रशस्त करती है।

गद्यांश में 'जागृति' को 'अभ्युदय' (प्रगति) और 'निद्रा' को 'पतन' का सूचक माना गया है।

चूँकि राष्ट्र और समाज की उन्नति कर्म से होती है और कर्म जागृति से, इसलिए कारण कथन की पूर्ण व्याख्या करता है।


Step 3: Final Answer:

दोनों वाक्य सत्य हैं और कारण, कथन का सही आधार प्रस्तुत करता है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: कथन और कारण के बीच 'क्योंकि' शब्द लगाकर पढ़ें। यदि वाक्य सार्थक लगता है, तो कारण कथन की सही व्याख्या कर रहा है।


Question 4:

'जागृति' और 'निद्रा' किसके प्रतीक हैं? गद्यांश के आधार पर बताइए।

Correct Answer: जागृति 'जीवन' और 'अभ्युदय' (उन्नति) की प्रतीक है, जबकि निद्रा 'पतन' और 'ह्रास' की प्रतीक है।
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रतीक वे शब्द या स्थितियाँ होती हैं जो किसी गहरे अर्थ या परिणाम को दर्शाती हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश की पंक्तियों के अनुसार, सक्रियता ही विकास का आधार है।

लेखक ने स्पष्ट कहा है कि "जागृति जीवन और अभ्युदय का चिह्न है"। यहाँ अभ्युदय का अर्थ उन्नति या उत्थान है।

वहीं दूसरी ओर, "निद्रा पतन तथा ह्रास का" प्रतीक है। ह्रास का अर्थ है कमी आना या गिरावट।


Step 3: Final Answer:

जागृति उन्नति का और निद्रा पतन का प्रतीक है।
Quick Tip: विलोम शब्दों के जोड़े (जैसे उन्नति-पतन, जीवन-मृत्यु) अक्सर गद्यांश में प्रतीकों को समझने में मदद करते हैं।


Question 5:

'जागना' और 'सोना' दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे की पूरक कैसे हैं? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: ये दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे के सहारे टिकी हैं क्योंकि बिना नींद के शरीर कर्म के योग्य नहीं रहता और बिना जागने के जीवन निष्क्रिय हो जाता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

'पूरक' होने का अर्थ है कि एक क्रिया के बिना दूसरी क्रिया पूर्ण या प्रभावी नहीं हो सकती।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के प्रारंभ में ही कहा गया है कि "दोनों क्रियाएँ एक-दूसरे के सहारे पर हैं"।

यदि कोई व्यक्ति दिन-रात सोता रहे, तो वह निष्क्रिय हो जाएगा और जीवन का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा।

परंतु, यदि नींद का अभाव (अभाव) हो जाए, तो यह एक 'विकार' बन जाता है जिससे अनेक बाधाएँ आती हैं।

नींद शरीर को विश्राम प्रदान कर उसे पुनः कर्म (जागने) के लिए तैयार करती है। इस प्रकार दोनों क्रियाएँ एक संतुलित जीवन के लिए आवश्यक हैं।


Step 3: Final Answer:

सोना शरीर को पुनः शक्ति देता है ताकि व्यक्ति जागकर कर्म कर सके, अतः ये पूरक हैं।
Quick Tip: पूरक क्रियाओं वाले प्रश्नों में हमेशा यह दिखाएँ कि कैसे एक की कमी दूसरे की प्रभावशीलता को कम कर देती है।


Question 6:

लेखक के अनुसार 'किसी राष्ट्र की जागृति' का क्या तात्पर्य है? उल्लेख कीजिए।

Correct Answer: राष्ट्र की जागृति का तात्पर्य राष्ट्र के नागरिकों में सक्रियता, कर्मठता और तमोगुण (जड़ता) के प्रभाव का कम होना है।
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Step 1: Understanding the Concept:

यहाँ 'राष्ट्र' की तुलना एक 'जीवित इकाई' से की गई है, जहाँ नागरिकों की मानसिक अवस्था राष्ट्र की स्थिति तय करती है।


Step 2: Detailed Explanation:

लेखक के अनुसार, जब हम किसी राष्ट्र में जागृति की कामना करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वह राष्ट्र आलस्य और जड़ता (तमोगुण) से मुक्त हो।

गद्यांश के अंत में उल्लेख है— "वह राष्ट्र मात्रा से अधिक तमोगुणी हो गया और उसमें जीवन की मात्रा ज़रूरत से कम है।"

अर्थात् राष्ट्र की जागृति का अर्थ है उसमें 'जीवन की मात्रा' का बढ़ना और नागरिकों का प्रगति की ओर अग्रसर होना।


Step 3: Final Answer:

राष्ट्र की जागृति का अर्थ है राष्ट्र का आलस्य त्यागकर सक्रियता (रजोगुण) और ज्ञान की ओर बढ़ना।
Quick Tip: व्यक्तिगत जागृति और राष्ट्रीय जागृति को जोड़कर उत्तर लिखें; राष्ट्र नागरिकों से ही बनता है।


Question 7:

निद्रा को किस गुण की प्रधानता से जोड़ा गया है और क्यों?

Correct Answer: निद्रा को 'तमोगुण' की प्रधानता से जोड़ा गया है क्योंकि यह अंधकार, जड़ता और कर्म के अभाव को दर्शाती है।
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Step 1: Understanding the Concept:

सांख्य दर्शन में 'तमस' का अर्थ अंधकार या भारीपन है, जो निद्रा के समय हावी होता है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश के अनुसार, निद्रा में 'तम' की सर्वथा प्रधानता होती है।

इसका कारण यह है कि निद्रा के दौरान व्यक्ति की सक्रियता (रज) और चेतना (सत) लुप्तप्राय हो जाती है।

लेखक ने इसे 'अंधकार' के समान माना है। जिस प्रकार प्रकाश का न होना अंधकार है, उसी प्रकार कर्म और जागरूकता का न होना निद्रा (तम) है।

मात्रा से अधिक निद्रा रज और सत गुणों की हानि कर देती है, जिससे व्यक्ति या राष्ट्र पतन की ओर जाता है।


Step 3: Final Answer:

निद्रा को तमोगुण से जोड़ा गया है क्योंकि इसमें चेतना और कर्म का अभाव होता है।
Quick Tip: जब 'क्यों' पूछा जाए, तो उस स्थिति के परिणामों (जैसे रज-सत की हानि) का उल्लेख अवश्य करें।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

दुनिया का सबसे बड़ा अधम - 
हाँ, हाँ, दुनिया का सबसे बड़ा अधम नर वही था 
जिसकी ज़बान से यह निकला था पहले-पहल - 
भूमि यह मेरी है! 
"भूमि यह मेरी है?" 
झूठा, मक्कार था! 
असत्य, अन्याय का अवतार था! 
दुनिया का सबसे बड़ा अधम !! 
नीचे की धरती और ऊपर का आसमान, 
पानी और पवन - 
प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए, 
इन पर है सबका अधिकार; 
सबका समान अधिकार 
हवा को क्या बाँटोगे? 
पानी को बाँटोगे? 
बाँटोगे नीले आसमान को? 
बाँट भी सकोगे क्या? 
धरती बेचारी बेबस थी - 
पैरों के नीचे 
अचल पड़ी थी, निरीह; 
कह दिया - 
"भूमि यह मेरी है" - 
बाँट लिया टुकड़ों में, 
एक मुट्ठी लोगों ने, 
मानो माता के आँचल को दाँतों से चीरकर 
बाँट लिया कुछ शैतान बच्चों ने; 
टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़ 
रोती रही दुखिया बेचारी माँ! 
दुनिया का सबसे बड़ा अधम! 

Question 8:

इस काव्यांश का केंद्रीय भाव है:

  • (A) प्राकृतिक संसाधनों का सृजन
  • (B) भूमि का वैज्ञानिक वितरण
  • (C) भूमि पर सबका समान अधिकार
  • (D) भूमि के इतिहास का वर्णन
Correct Answer: (C) भूमि पर सबका समान अधिकार
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Step 1: Understanding the Concept:

प्रस्तुत कविता प्रकृति के संसाधनों पर निजी स्वामित्व के विचार का विरोध करती है।

कवि का मानना है कि प्रकृति (धरती, आकाश, वायु, जल) किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि समस्त जीव-जगत की साझा विरासत है।


Step 2: Detailed Explanation:

पद्यांश की पंक्तियाँ "प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए, इन पर है सबका अधिकार; सबका समान अधिकार" स्पष्ट रूप से संकेत करती हैं कि काव्यांश का मुख्य संदेश भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर सार्वभौमिक और समान अधिकार की वकालत करना है।

कवि उन लोगों की आलोचना करता है जिन्होंने प्राकृतिक संसाधनों को निजी संपत्ति मानकर उनका बँटवारा कर दिया है।


Step 3: Final Answer:

अतः, इस काव्यांश का केंद्रीय भाव भूमि पर सबका समान अधिकार (विकल्प C) है।
Quick Tip: केंद्रीय भाव (Central Theme) ढूँढने के लिए कविता की उन पंक्तियों पर ध्यान दें जो बार-बार दोहराई गई हों या जो किसी सार्वभौमिक सत्य की बात करती हों।


Question 9:

"प्रकृति की देन हैं ये जीवमात्र के लिए" इस पंक्ति से कवि का अभिप्राय है:

  • (A) व्यक्तिगत अधिकार
  • (B) जातीय विभाजन
  • (C) धार्मिक आस्था
  • (D) सामूहिक स्वामित्व
Correct Answer: (D) सामूहिक स्वामित्व
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Step 1: Understanding the Concept:

'जीवमात्र' शब्द का अर्थ है सभी जीवित प्राणी।

जब कोई वस्तु किसी एक समूह या व्यक्ति के बजाय सभी के लिए उपलब्ध होती है, तो उसे 'सामूहिक स्वामित्व' कहा जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

कवि कहता है कि हवा, पानी, आसमान और धरती प्रकृति द्वारा सभी प्राणियों को उपहार स्वरूप दिए गए हैं।

जिस प्रकार हवा को कोई बाँट नहीं सकता, उसी प्रकार धरती को भी टुकड़ों में बाँटना प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है।

यह विचार 'निजी संपत्ति' के विरुद्ध 'सामूहिक स्वामित्व' (Shared/Collective Ownership) की भावना को पुष्ट करता है।


Step 3: Final Answer:

उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर सही विकल्प (D) सामूहिक स्वामित्व है।
Quick Tip: 'जीवमात्र के लिए' वाक्यांश समावेशिता (Inclusivity) को दर्शाता है, जो व्यक्तिगत (Individual) के ठीक विपरीत है।


Question 10:

"माता के आँचल को दाँतों से चीरना" इस पंक्ति का आज के संदर्भ में सटीक अर्थ क्या है?

  • (A) जैविक खेती को प्रोत्साहन
  • (B) वनों की अंधाधुंध कटाई
  • (C) हरित ऊर्जा का विकास
  • (D) जल संरक्षण योजनाएँ
Correct Answer: (B) वनों की अंधाधुंध कटाई
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Step 1: Understanding the Concept:

कविता में 'माता का आँचल' धरती की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली का प्रतीक है।

उसे 'दाँतों से चीरना' एक हिंसक और विनाशकारी क्रिया को दर्शाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

आज के औद्योगिक युग में, मनुष्य अपने लालच के लिए जंगलों को काट रहा है और पहाड़ों को नष्ट कर रहा है।

धरती को टुकड़ों में बाँटना और उसे नुकसान पहुँचाना 'माता के आँचल को चीरने' के समान है।

यह उपमा सीधे तौर पर पर्यावरणीय शोषण और वनों की अंधाधुंध कटाई की ओर संकेत करती है।


Step 3: Final Answer:

इस बिंब का आधुनिक संदर्भ वनों की अंधाधुंध कटाई (विकल्प B) है।
Quick Tip: रूपकों (Metaphors) को हल करते समय उनके पीछे छिपे भाव (जैसे विनाश, पीड़ा या शोषण) को वर्तमान सामाजिक या पर्यावरणीय समस्याओं से जोड़कर देखें।


Question 11:

यदि 'भूमि यह मेरी है' की भावना समाज में व्याप्त नहीं होगी तो दुनिया की संरचना कैसी होगी?

Correct Answer: यदि समाज में 'भूमि यह मेरी है' की भावना नहीं होगी, तो दुनिया एक साझा घर जैसी होगी जहाँ सीमाओं के झगड़े नहीं होंगे और प्रकृति का समान आनंद लिया जा सकेगा।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न एक आदर्शवादी (Utopian) समाज की कल्पना करने को कहता है जहाँ निजी संपत्ति का अहंकार न हो।


Step 2: Detailed Explanation:

1. सीमाओं का अभाव: राष्ट्रों और व्यक्तियों के बीच भूमि को लेकर होने वाले युद्ध और विवाद समाप्त हो जाएँगे।

2. प्राकृतिक समानता: जिस प्रकार सभी को सूर्य की रोशनी और वायु समान रूप से मिलती है, वैसे ही संसाधनों का वितरण न्यायपूर्ण होगा।

3. विश्व बंधुत्व: 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) की भावना प्रबल होगी, जिससे मनुष्य के बीच घृणा और प्रतिस्पर्धा कम होगी।

4. प्रकृति संरक्षण: जब भूमि किसी एक की संपत्ति नहीं होगी, तो उसका शोषण भी कम होगा।


Step 3: Final Answer:

दुनिया की संरचना संघर्ष-मुक्त, प्रेमपूर्ण और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने वाली होगी।
Quick Tip: ऐसे वैचारिक प्रश्नों में कविता के नकारात्मक पक्ष (जैसे 'बँटवारा', 'झूठ', 'अन्याय') के विलोम शब्दों का प्रयोग करके उत्तर लिखें।


Question 12:

'दुनिया का सबसे बड़ा अधम' किसे कहा गया है और क्यों?

Correct Answer: 'दुनिया का सबसे बड़ा अधम' उस व्यक्ति को कहा गया है जिसने सबसे पहले भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा किया था, क्योंकि यह विचार असत्य और अन्याय की बुनियाद था।
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Step 1: Understanding the Concept:

'अधम' का अर्थ है नीच या सबसे बुरा। कवि उस मूल विचार पर प्रहार कर रहा है जिसने मानवता को बाँट दिया।


Step 2: Detailed Explanation:

कवि के अनुसार, वह मनुष्य सबसे बड़ा अपराधी है जिसकी ज़बान से सबसे पहले निकला - "भूमि यह मेरी है!"।

इसे 'अधम' इसलिए कहा गया क्योंकि:

- उसने प्रकृति की उस वस्तु को अपना बताया जो सार्वभौमिक थी।

- उसके इस दावे से समाज में झूठ, मक्कारी और स्वार्थ का जन्म हुआ।

- इसी एक विचार ने धरती माँ को टुकड़ों में बाँटने और शोषण करने का रास्ता खोला।


Step 3: Final Answer:

अतः, भूमि पर निजी दावेदारी करने वाले को कवि ने मानवता और प्रकृति के प्रति सबसे बड़ा अन्यायी (अधम) माना है।
Quick Tip: कविता की पहली चार पंक्तियों में ही 'किसे' और 'क्यों' दोनों का उत्तर निहित है। उत्तर में 'असत्य' और 'अन्याय का अवतार' जैसे शब्दों का प्रयोग प्रभावशाली होता है।


Question 13:

'टुकुर-टुकुर ताकते रह गए शरीफ़' पंक्ति में किन लोगों पर व्यंग्य किया गया है और क्यों?

Correct Answer: इस पंक्ति में उन सीधे-सादे और भले लोगों पर व्यंग्य किया गया है जिन्होंने अन्याय होते हुए देखा लेकिन उसका विरोध करने के बजाय मूकदर्शक बने रहे।
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Step 1: Understanding the Concept:

'व्यंग्य' (Satire) का प्रयोग यहाँ निष्क्रियता की आलोचना करने के लिए किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. किन पर व्यंग्य: उन लोगों पर जिन्हें समाज 'शरीफ़' (Gentle/Civilized) कहता है, लेकिन वे अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस नहीं जुटा पाए।

2. क्यों: जब "एक मुट्ठी शैतान बच्चों" (लालची और शक्तिशाली लोग) ने धरती का बँटवारा किया और माता के आँचल को चीरा, तब ये शरीफ़ लोग केवल असहाय होकर देखते रहे।

3. भाव: कवि संकेत देना चाहता है कि केवल अच्छा होना पर्याप्त नहीं है; यदि अच्छाई बुराई का विरोध नहीं करती, तो वह भी विनाश में मौन भागीदार होती है।


Step 3: Final Answer:

यह व्यंग्य समाज की उस उदासीनता और कायरता पर है जो शक्तिशाली लोगों द्वारा प्रकृति के शोषण को चुपचाप स्वीकार कर लेती है।
Quick Tip: साहित्य में 'शरीफ़' शब्द का व्यंग्यात्मक प्रयोग अक्सर उन लोगों के लिए होता है जो संघर्ष से बचने के लिए तटस्थ बने रहते हैं।


Question 14:

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए उल्लेख कीजिए कि अभिव्यक्ति के अधिकार में लेखन किस प्रकार सहायक है?

Correct Answer: नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का अर्थ है ऐसे विषयों पर लिखना जो पारंपरिक या रटे-रटाए न हों। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिकता प्रदान करता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन का तात्पर्य आत्म-अभिव्यक्ति की उस विधा से है जिसमें लेखक बिना किसी पूर्व तैयारी के अपने मौलिक विचारों को शब्दों में पिरोता है। यह रटंत विद्या के विपरीत स्वतंत्र लेखन को प्रोत्साहित करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. अभिप्राय: इसमें लेखक को किसी भी तत्कालीन दृश्य, घटना या विचार पर अपने दृष्टिकोण से लिखना होता है। इससे लेखक की कल्पनाशीलता और अवलोकन क्षमता का विकास होता है।

2. अभिव्यक्ति के अधिकार में सहायक: भारत का संविधान हमें अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार देता है। लेखन इस अधिकार को मूर्तरूप प्रदान करता है।

3. विचारों की स्पष्टता: जब हम नए विषयों पर लिखते हैं, तो हमारे मन के अवचेतन विचार बाहर आते हैं, जिससे हमारी सोचने की शक्ति प्रखर होती है।

4. आत्मविश्वास में वृद्धि: यह लेखन व्यक्ति को अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से रखने का साहस देता है, जो लोकतंत्र में एक नागरिक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, अप्रत्याशित विषयों पर लेखन व्यक्ति के बौद्धिक विकास और उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में 'मौलिकता' और 'तार्किक सोच' जैसे शब्दों का प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाता है।


Question 15:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Correct Answer: कहानी को नाटक में बदलते समय दृश्यों का विभाजन, संवादों की रचना और मंचन की संभावनाओं का मुख्य ध्यान रखना चाहिए।
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Step 1: Understanding the Concept:

कहानी एक श्रव्य/पठ्य विधा है, जबकि नाटक एक दृश्य विधा है। रूपांतरण के दौरान कहानी के वर्णनात्मक अंशों को दृश्यों और अभिनय में बदलना मुख्य चुनौती होती है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. दृश्य विभाजन: कहानी की घटनाओं को अलग-अलग दृश्यों में विभाजित करना चाहिए ताकि मंच पर निरंतरता बनी रहे।

2. संवाद लेखन: कहानी के लंबे वर्णनों को पात्रों के बीच छोटे और प्रभावी संवादों में बदलना चाहिए। संवाद पात्रों के स्वभाव के अनुकूल होने चाहिए।

3. पात्रों का चरित्र-चित्रण: कहानी में लेखक पात्रों के बारे में बताता है, जबकि नाटक में पात्रों के कार्यों और संवादों के माध्यम से उनका चरित्र उभरना चाहिए।

4. मंचीय निर्देश: मंच की सजावट, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभावों के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि दर्शक जुड़ाव महसूस कर सकें।

5. द्वंद्व का विकास: नाटक में संघर्ष या द्वंद्व (Conflict) का होना अनिवार्य है, जो कहानी के कथानक को रोचक बनाता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय उसे दृश्यता, गतिशीलता और संवाद-प्रधानता के आधार पर पुनर्गठित करना आवश्यक है।
Quick Tip: याद रखें: कहानी 'बताई' जाती है, जबकि नाटक 'दिखाया' जाता है। रूपांतरण का मूल मंत्र यही है।


Question 16:

रेडियो नाटकों में संवादों पर विशेष ध्यान देना क्यों आवश्यक है? तर्क सहित लिखिए।

Correct Answer: रेडियो केवल श्रव्य माध्यम है, यहाँ पात्रों की पहचान, परिवेश का ज्ञान और कथा का विकास केवल संवादों के माध्यम से ही संभव है।
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Step 1: Understanding the Concept:

रेडियो नाटकों में दृश्य गायब होते हैं। श्रोता की 'मानसिक आँखों' के सामने चित्र उभारने का एकमात्र साधन शब्द और ध्वनियाँ ही होती हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

1. पात्र परिचय: रेडियो पर हम पात्र को देख नहीं सकते, इसलिए उनके नाम, उम्र और संबंधों का बोध उनके संवादों से ही होता है।

2. परिवेश का निर्माण: संवादों के माध्यम से ही यह पता चलता है कि घटना कहाँ घट रही है (जैसे- पार्क, अस्पताल या घर)।

3. दृश्यता का अभाव: संवादों को इतना वर्णनात्मक होना चाहिए कि वे दृश्य की कमी को पूरा कर सकें।

4. क्रियात्मकता: पात्र क्या कर रहा है (जैसे- चाय पी रहा है या पत्र लिख रहा है), यह उसके बोलने के ढंग या किसी अन्य पात्र के संवाद से ही स्पष्ट होता है।

5. ध्वनि प्रभाव का पूरक: संवाद और पार्श्व ध्वनि (Background Sound) मिलकर कहानी को आगे बढ़ाते हैं।


Step 3: Final Answer:

अतः, रेडियो नाटक की सफलता पूरी तरह संवादों की स्पष्टता और उनमें निहित सूचनात्मकता पर निर्भर करती है।
Quick Tip: रेडियो के लिए 'दृश्यहीनता' (Invisible medium) शब्द का प्रयोग तर्क को मजबूती देता है।


Question 17:

'रेडियो ध्वनि, स्वर व शब्दों का खेल है' - कैसे? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: रेडियो में सूचनाओं के संप्रेषण के लिए दृश्य नहीं होते, अतः सारा प्रभाव ध्वनि की गुणवत्ता, स्वर के उतार-चढ़ाव और शब्दों के चयन पर टिका होता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

रेडियो एक 'अंधे' का माध्यम है जहाँ श्रोता केवल सुनकर अर्थ ग्रहण करता है। यहाँ श्रव्य तत्व ही सर्वोपरि होते हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

1. ध्वनि (Sound Effects): पदचाप, बारिश की आवाज़ या ट्रैफिक का शोर बिना बोले ही दृश्य का निर्माण कर देते हैं।

2. स्वर (Voice/Tone): बोलने वाले का लहजा भावनाओं (गुस्सा, ख़ुशी, दुख) को संप्रेषित करता है।

3. शब्द (Words): शब्दों का चयन सरल और बोलचाल वाला होना चाहिए क्योंकि श्रोता के पास डिक्शनरी देखने का समय नहीं होता।


Step 3: Final Answer:

अतः, इन तीनों तत्वों के सटीक संयोजन से ही रेडियो पर एक जीवंत परिवेश बनाया जा सकता है।
Quick Tip: रेडियो लेखन के लिए 'सरल भाषा' और 'स्पष्ट उच्चारण' अनिवार्य शर्त हैं।


Question 18:

'एंकर विजुअल' का क्या अभिप्राय है?

Correct Answer: जब एंकर समाचार पढ़ता है और उस खबर से संबंधित दृश्य (फुटेज) स्क्रीन पर दिखाए जाते हैं, तो उसे 'एंकर विजुअल' कहते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह टेलीविजन समाचार के चरणों में से एक है जहाँ सूचना को दृश्यों के माध्यम से पुष्ट किया जाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. इसमें एंकर की आवाज़ (Voice Over) चलती रहती है लेकिन पर्दे पर एंकर के बजाय घटना से जुड़े दृश्य चलते हैं।

2. यह समाचार की विश्वसनीयता बढ़ाता है क्योंकि दर्शक घटना को अपनी आँखों से देख पा रहा होता है।

3. यह 'एंकर बाइट' से पहले का चरण हो सकता है जहाँ घटना की पृष्ठभूमि दिखाई जाती है।


Step 3: Final Answer:

अतः, दृश्यों के आधार पर लिखे गए और पढ़े जाने वाले समाचार को ही 'एंकर विजुअल' कहा जाता है।
Quick Tip: टीवी पत्रकारिता में विजुअल का अर्थ 'दृश्य' होता है, इसे याद रखने से परिभाषा आसान हो जाती है।


Question 19:

'नेट साउंड' किसे कहते हैं? दूरदर्शन के संदर्भ में समझाइए।

Correct Answer: टीवी रिपोर्टिंग के दौरान घटनास्थल की अपनी वास्तविक ध्वनियों को 'नेट साउंड' (Natural Sound) कहा जाता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

समाचार की प्रामाणिकता और माहौल को जीवंत बनाने के लिए घटनास्थल की प्राकृतिक आवाज़ों का उपयोग अनिवार्य है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. उदाहरण के लिए, यदि रिपोर्टर किसी रैली की खबर दे रहा है, तो पीछे से आने वाली नारों की आवाज़ 'नेट साउंड' है।

2. यह आवाज़ रिपोर्टर के शब्दों को दृश्य के साथ जोड़कर एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करती है।

3. इसे अक्सर पत्रकार अपनी रिपोर्ट में थोड़ी जगह देकर (Anchor pause) सुनाते हैं।


Step 3: Final Answer:

अतः, 'नेट साउंड' टेलीविजन समाचारों में वास्तविकता और प्रभाव पैदा करने का एक सशक्त माध्यम है।
Quick Tip: 'नेट साउंड' को 'प्राकृतिक ध्वनि' (Natural sound) के रूप में भी जाना जाता है।


Question 20:

एक सफल साक्षात्कारकर्ता में साक्षात्कार हेतु कौन-सी विशेषताएँ होना आवश्यक है?

Correct Answer: एक सफल साक्षात्कारकर्ता को जिज्ञासु, धैर्यवान, विषय का जानकार और संवेदनशील होना चाहिए।
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Step 1: Understanding the Concept:

साक्षात्कार (Interview) एक कला है जिसमें प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति उत्तरदाता से महत्वपूर्ण जानकारी निकलवाता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. पूर्व तैयारी: विषय और व्यक्ति के बारे में गहरा ज्ञान होना चाहिए।

2. धैर्य: उत्तरदाता की बात को बिना बीच में काटे ध्यान से सुनना।

3. स्पष्टता: प्रश्न सीधे, छोटे और स्पष्ट होने चाहिए।

4. प्रत्युत्पन्नमतित्व (Presence of Mind): उत्तर में से ही नए और प्रासंगिक प्रश्न निकालने की क्षमता।

5. संवेदनशीलता: कठिन या निजी प्रश्नों को शालीनता से पूछना।


Step 3: Final Answer:

अतः, ज्ञान और व्यवहारकुशलता का मेल ही एक व्यक्ति को कुशल साक्षात्कारकर्ता बनाता है।
Quick Tip: 'सक्रिय श्रवण' (Active Listening) एक अच्छे साक्षात्कारकर्ता का सबसे बड़ा गुण है।


Question 21:

विशेष लेखन की भाषा शैली कैसी होती है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: विशेष लेखन की भाषा विषय के अनुकूल, तकनीकी शब्दों से युक्त परंतु पाठकों के लिए बोधगम्य होनी चाहिए।
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Step 1: Understanding the Concept:

विशेष लेखन (Specialized Writing) किसी खास विषय जैसे अर्थशास्त्र, खेल, विज्ञान या कला पर केंद्रित होता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. शब्दावली: इसमें उस विशेष क्षेत्र की तकनीकी शब्दावली (Terminology) का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए, आर्थिक लेखन में 'जीडीपी', 'सेंसेक्स' आदि।

2. सरलता: यद्यपि भाषा तकनीकी होती है, फिर भी इसे इतना सरल रखा जाता है कि सामान्य पाठक भी भाव समझ सके।

3. शैली: यह अक्सर वर्णनात्मक या विश्लेषणात्मक होती है।

4. तथ्यात्मकता: इसमें कल्पना के बजाय आँकड़ों और ठोस तथ्यों को प्राथमिकता दी जाती है।


Step 3: Final Answer:

अतः, विशेष लेखन की भाषा शैली विषय की गंभीरता और पाठक की समझ के बीच संतुलन बनाती है।
Quick Tip: याद रखें: विशेष लेखन के लिए 'बीट' (Beat) की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।


Question 22:

‘छोटा मेरा खेत’ कविता के मूल भाव के बारे में सही कथन है:

  • (A) कविता को व्यवसाय के रूप में देखा गया है।
  • (B) इसमें श्रव्य बिंब का प्रयोग किया गया है।
  • (C) यह ऐसा खेत है जिसके चार कोने हैं।
  • (D) यह सृजन कर्म के शाश्वत भाव की कविता है।
Correct Answer: (D) यह सृजन कर्म के शाश्वत भाव की कविता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

कवि उमाशंकर जोशी ने इस कविता में 'कागज के पन्ने' की तुलना 'खेत' से की है। यहाँ कृषि-कर्म और लेखन-कर्म (सृजन) के बीच एक रूपक स्थापित किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. कविता के अंत में पंक्ति है 'लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती', जो साहित्य या कला की अक्षय प्रकृति को दर्शाती है।

2. फसल एक बार कटने के बाद समाप्त हो जाती है, लेकिन काव्य का रस अनंत काल तक मिलता रहता है।

3. अतः, यह कविता सृजन (Creation) के उस आनंद और शाश्वतता (Immortality) की बात करती है जो समय के साथ कम नहीं होता।


Step 3: Final Answer:

उपरोक्त कारणों से विकल्प (D) सबसे उपयुक्त है।
Quick Tip: जहाँ भी 'अक्षय पात्र' या 'अमरता' की बात आए, वहाँ उत्तर 'शाश्वतता' से संबंधित होता है।


Question 23:

कविता की रचना-प्रक्रिया के संदर्भ में 'अंधड़' क्या है?

  • (A) अलंकारों की अधिकता
  • (B) भाषा की कठिनता
  • (C) भावनाओं का आवेग
  • (D) पंक्तियों की अधिकता
Correct Answer: (C) भावनाओं का आवेग
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Step 1: Understanding the Concept:

'अंधड़' शब्द का शाब्दिक अर्थ आँधी है। कविता में इसे प्रतीकात्मक रूप में प्रयोग किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

जिस प्रकार खेत में बीज बोने से पहले आँधी या वर्षा जैसा प्राकृतिक बदलाव होता है, उसी प्रकार कवि के मन में कविता लिखने से पहले विचारों और भावनाओं का एक तीव्र तूफान या आवेग आता है। यह 'अंधड़' ही कवि को रचना के लिए प्रेरित करता है और एक 'बीज' (विचार) उसके मस्तिष्क रूपी कागज़ पर गिरता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, 'अंधड़' यहाँ मन में उठने वाले तीव्र भावों का प्रतीक है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: प्रतीकों को हमेशा संदर्भ में देखें; यहाँ 'अंधड़' विनाशकारी नहीं बल्कि सृजनात्मक आवेग है।


Question 24:

कवि अपने छोटे खेत में कौन-से बीज बोता है?

  • (A) चावल के
  • (B) विचारों के
  • (C) ईर्ष्या के
  • (D) कागज़ के
Correct Answer: (B) विचारों के
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Step 1: Understanding the Concept:

कविता में खेत कागज़ का पन्ना है। स्पष्टतः कागज़ पर अनाज नहीं उगाया जा सकता।


Step 2: Detailed Explanation:

पंक्ति 'क्षण का बीज वहाँ बोया गया' संकेत करती है कि किसी विशेष क्षण में उपजा कोई 'विचार' या 'भाव' ही वह बीज है जिसे कवि कागज़ पर उतारता है। यह विचार रूपी बीज बाद में कल्पना के रसायनों को पीकर एक पूरी कविता के रूप में विकसित होता है।


Step 3: Final Answer:

अतः, कवि अपने वैचारिक खेत में 'विचारों के बीज' बोता है। विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: कागज़ = खेत, विचार = बीज, कल्पना = खाद/पानी। यह तुलना याद रखें।


Question 25:

कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है?

  • (A) भवन-निर्माण से
  • (B) कृषि-कर्म से
  • (C) शिक्षा-दीक्षा से
  • (D) व्यवसाय से
Correct Answer: (B) कृषि-कर्म से
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Step 1: Understanding the Concept:

पूरी कविता एक विस्तृत रूपक (Extended Metaphor) है जहाँ लेखन की प्रक्रिया को खेती की प्रक्रिया के समान दिखाया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

जैसे किसान खेत जोतता है, बीज बोता है, खाद-पानी देता है और अंत में फसल काटता है; वैसे ही कवि कागज़ रूपी खेत पर विचार रूपी बीज बोता है, कल्पना का सहारा लेता है और अंत में कविता रूपी फल प्राप्त करता है। यह समानता स्पष्ट रूप से 'कृषि-कर्म' की ओर संकेत करती है।


Step 3: Final Answer:

विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: रूपक अलंकार वाले प्रश्नों में दो अलग-अलग क्षेत्रों की समानताओं को ढूँढना ही उत्तर की कुंजी है।


Question 26:

'कटाई अनंतता की' का प्रतीक अर्थ है:

  • (A) रोपाई के बाद कटाई
  • (B) कटाई कर्म अनंत
  • (C) साहित्य कालजयी
  • (D) फलों की काट-छाँट
Correct Answer: (C) साहित्य कालजयी
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Step 1: Understanding the Concept:

साधारण फसल एक बार कटने पर खत्म हो जाती है, लेकिन कविता रूपी फसल 'अनंत' होती है।


Step 2: Detailed Explanation:

'अनंतता' का अर्थ है जिसका अंत न हो। कालजयी साहित्य वह होता है जो समय की सीमाओं को लाँघ कर युगों-युगों तक पाठकों को रस (आनंद) प्रदान करता रहता है। 'कटाई अनंतता की' का अर्थ है कि इस फसल (कविता) का आनंद कितनी भी बार लिया जाए, यह कभी समाप्त नहीं होती। यह अक्षय है।


Step 3: Final Answer:

अतः, इसका सटीक प्रतीकात्मक अर्थ 'साहित्य का कालजयी' होना है। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: 'कालजयी' (Time-transcending) शब्द साहित्य की महानता को दर्शाने के लिए सबसे सटीक विशेषण है।


Question 27:

भक्तिन के जीवन में धर्म और आस्था की क्या भूमिका थी? पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer: भक्तिन के जीवन में धर्म और आस्था का गहरा स्थान था, जो उसके पारंपरिक संस्कारों और कठोर जीवन-नियमों से झलकता था।
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Step 1: Understanding the Concept:

महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'भक्तिन' पाठ में मुख्य पात्र भक्तिन के व्यक्तित्व के धार्मिक और आध्यात्मिक पहलुओं का चित्रण किया गया है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. बाह्य वेशभूषा: भक्तिन ने संन्यासिनों की तरह अपना सिर मुँडवा रखा था और गले में कंठी माला धारण करती थी, जो उसकी धार्मिक आस्था का प्रतीक था।

2. नियमों की कठोरता: वह अपने खान-पान और रसोई की शुद्धता को लेकर बहुत कट्टर थी। वह किसी अन्य द्वारा छुए गए भोजन को ग्रहण नहीं करती थी और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन निष्ठा से करती थी।

3. समर्पण: लेखिका के प्रति उसकी सेवा भावना भी एक प्रकार की श्रद्धा और निष्ठा से प्रेरित थी, जिसे वह अपना धर्म मानती थी।


Step 3: Final Answer:

भक्तिन के लिए धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं बल्कि एक जीवन शैली थी, जिसमें शुचिता, परंपरा और अटूट विश्वास समाहित था।
Quick Tip: चरित्र-चित्रण संबंधी प्रश्नों में पात्र की आदतों (जैसे सिर मुँडवाना या रसोई की छुआछूत) का उल्लेख करने से उत्तर अधिक सटीक होता है।


Question 28:

‘बिना त्याग के दान नहीं होता।’ ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के इस कथन के आधार पर जीवन में त्याग और दान के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: दान का वास्तविक अर्थ वही है जिसमें व्यक्ति अपनी अत्यंत प्रिय या आवश्यक वस्तु का त्याग दूसरों के कल्याण के लिए करता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

धर्मवीर भारती के संस्मरण में 'जीजी' के माध्यम से लेखक ने त्याग और दान के गहरे दार्शनिक अर्थ को समझाया है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. त्याग की परिभाषा: यदि हमारे पास बहुत अधिक धन है और हम उसमें से थोड़ा दान कर दें, तो वह महान त्याग नहीं है। वास्तविक त्याग तब है जब हमारे पास स्वयं किसी वस्तु (जैसे पानी) की कमी हो, फिर भी हम उसे लोक-कल्याण के लिए दे दें।

2. दान का फल: जीजी का मानना है कि जैसे किसान पाँच सेर गेहूँ बोकर बड़ी फसल काटता है, वैसे ही अपनी कमी में किया गया दान भविष्य में फलदायी होता है।

3. सामाजिक दृष्टिकोण: यह विचार समाज में स्वार्थ से ऊपर उठकर परोपकार करने की प्रेरणा देता है।


Step 3: Final Answer:

त्याग और दान एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना निस्वार्थ त्याग के किया गया दान केवल औपचारिकता है, वास्तविक दान आत्मिक सुख प्रदान करता है।
Quick Tip: 'इंद्र सेना' पर पानी फेंकने के तर्क को 'बीज बोने' के उदाहरण से जोड़कर समझाना परीक्षा में अच्छे अंक दिलाता है।


Question 29:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर उन तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिनके कारण प्रायः समाज में असमानताएँ दृष्टिगोचर होती हैं।

Correct Answer: समाज में असमानता के मुख्य कारण जन्मजात पेशा निर्धारण, अरुचिपूर्ण कार्य का थोपा जाना और सामाजिक ऊँच-नीच की भावना हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने जाति प्रथा को श्रम विभाजन का एक दूषित रूप माना है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. पूर्व-निर्धारण: जाति प्रथा में व्यक्ति का पेशा उसके जन्म से पहले ही (माता के गर्भ में ही) निर्धारित कर दिया जाता है, जो उसकी व्यक्तिगत प्रतिभा की उपेक्षा करता है।

2. गत्यात्मकता का अभाव: व्यक्ति को अपना पेशा बदलने की अनुमति नहीं होती, जिससे बेरोजगारी और भुखमरी की स्थिति पैदा होती है क्योंकि वह अपनी योग्यता के अनुसार कार्य नहीं कर पाता।

3. श्रमिकों का श्रेणीकरण: जाति प्रथा न केवल श्रम का विभाजन करती है, बल्कि श्रमिकों को भी ऊँच-नीच के खाँचों में बाँट देती है, जो समाज में स्थायी असमानता पैदा करता है।


Step 3: Final Answer:

जाति आधारित श्रम विभाजन मनुष्य की रुचि और क्षमता के विरुद्ध होने के कारण सामाजिक पतन और असमानता का कारण बनता है।
Quick Tip: 'श्रम विभाजन' (Division of labor) और 'श्रमिक विभाजन' (Division of laborers) के बीच के अंतर को स्पष्ट करना इस पाठ का मुख्य बिंदु है।


Question 30:

गद्यांश के अनुसार 'आँख फोड़ना' का अभिप्राय है:

  • (A) शारीरिक विकलांगता को बढ़ावा देना
  • (B) लोभ से बचने हेतु साधन को ही नष्ट कर देना
  • (C) दृष्टि को स्थायी रूप से खो देना
  • (D) तपस्या का सबसे उच्च स्थान प्राप्त करना
Correct Answer: (B) लोभ से बचने हेतु साधन को ही नष्ट कर देना
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Step 1: Understanding the Concept:

गद्यांश में लेखक जैनेंद्र कुमार ने बाहरी इंद्रियों के दमन के बजाय मन के संयम पर ज़ोर दिया है।


Step 2: Detailed Explanation:

लेखक का तर्क है कि यदि हम लोभ से बचने के लिए अपनी आँखें फोड़ लें (अर्थात् देखने का साधन नष्ट कर दें), तो यह समस्या का समाधान नहीं है।

मन के भीतर की लालसा आँखें बंद होने पर भी सक्रिय रह सकती है।

अतः 'आँख फोड़ना' यहाँ प्रतीकात्मक रूप से उन बाह्य क्रियाओं के लिए प्रयुक्त हुआ है जहाँ व्यक्ति समस्या की जड़ के बजाय माध्यम को नष्ट करने की कोशिश करता है।


Step 3: Final Answer:

विकल्प (B) सही है क्योंकि यह लोभ के साधन को नष्ट करने की निरर्थक कोशिश को दर्शाता है।
Quick Tip: जब गद्यांश में मुहावरेदार भाषा का प्रयोग हो, तो उसका अर्थ संदर्भ के अनुसार निकालें, शाब्दिक अर्थ (जैसे आँखों की रोशनी खोना) अक्सर गलत होता है।


Question 31:

लेखक के अनुसार 'मन को बंद कर देना' क्यों सही नहीं है?

  • (A) इससे मन प्रतिष्ठित रूप से शांत हो जाता है।
  • (B) इससे लोभ का नाश हो जाता है।
    (C) इससे मन जड़ हो जाता है।
  • (D) इससे मन सपने देखना बंद कर देता है।
Correct Answer: (C) इससे मन जड़ हो जाता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

जीवन का लक्षण गतिशीलता है, जबकि पूर्ण विराम या जड़ता मृत्यु का सूचक है।


Step 2: Detailed Explanation:

लेखक के अनुसार "ठाठ देकर मन को बंद कर रखना जड़ता है"।

केवल परमात्मा ही 'शून्य' (पूर्णतः इच्छा रहित) हो सकता है क्योंकि वह संपूर्ण है।

मनुष्य अपूर्ण है, अतः उसके मन का बंद होना उसकी सक्रियता और चेतना को समाप्त कर उसे 'जड़' बना देता है।


Step 3: Final Answer:

अतः मन को बंद करना जड़ता का प्रतीक है, संयम का नहीं। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: गद्यांश में 'जड़ता' शब्द पर ध्यान दें, जो 'मन को बंद करने' के परिणाम के रूप में सीधे तौर पर दिया गया है।


Question 32:

गद्यांश के अनुसार 'सच्चा ज्ञान' किस प्रकार की भावना से प्राप्त हो सकता है?

  • (A) पूर्णता की भावना से
  • (B) अपूर्णता के बोध से
  • (C) पूर्णता के नाश से
  • (D) मनमानी छूट से
Correct Answer: (B) अपूर्णता के बोध से
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Step 1: Understanding the Concept:

सच्चा ज्ञान मनुष्य को उसकी सीमाओं और वास्तविकता से परिचित कराता है।


Step 2: Detailed Explanation:

गद्यांश की अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं - "सच्चा ज्ञान सदा अपूर्णता के बोध को हम में गहरा करता है।"

जब मनुष्य स्वीकार कर लेता है कि वह अपूर्ण है और उसे अभी बहुत कुछ सीखना या पाना शेष है, तभी वह सच्चे ज्ञान की दिशा में अग्रसर होता है।

स्वयं को पूर्ण मान लेना अहंकार है, जो ज्ञान के मार्ग में बाधक है।


Step 3: Final Answer:

अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: दार्शनिक गद्यांशों में 'अपूर्णता' और 'पूर्णता' जैसे शब्दों के बीच के द्वंद्व को समझना उत्तर के लिए महत्वपूर्ण होता है।


Question 33:

गद्यांश के अनुसार लोभ से बचने का क्या उपाय है?

  • (A) मन को बंद रखना
  • (B) मन को भरा रखना
  • (C) मन को संयमित रखना
  • (D) मन की इच्छा पूरी करना
Correct Answer: (B) मन को भरा रखना
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Step 1: Understanding the Concept:

लोभ तब हमला करता है जब मन खाली होता है और उसे पता नहीं होता कि उसे क्या चाहिए।


Step 2: Detailed Explanation:

यद्यपि गद्यांश में 'मन भरा रखना' शब्द का प्रयोग सीधे नहीं है, लेकिन लेखक ने 'मन खाली न रहने' की सलाह दी है।

'मन को भरा रखना' का अर्थ है मन में एक निश्चित लक्ष्य या उद्देश्य का होना।

जब मन अपने लक्ष्यों से भरा होता है, तो बाज़ार का आकर्षण या लोभ उसे विचलित नहीं कर पाता।

संयमित रहने (विकल्प C) के लिए भी मन का 'भरा' होना (दृढ़ संकल्प युक्त होना) प्राथमिक शर्त है।


Step 3: Final Answer:

अतः लोभ से बचने का प्रभावी उपाय मन को सकारात्मक लक्ष्यों से 'भरा' रखना है। विकल्प (B) उपयुक्त है।
Quick Tip: गद्यांश में 'खाली मन' को लोभ का घर बताया गया है, इसलिए उसका विलोम 'भरा मन' ही उपाय होगा।


Question 34:

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

I. लोभ का नकार ही लोभ की जड़ है और यह व्यक्ति की हार है।

II. लोभ को दबाना ही उसे जीतना है।

III. संयमित मन ही लोभ पर विजय पा सकता है।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?

  • (A) कथन I सही है, कथन II गलत है।
  • (B) कथन I गलत है, कथन II सही है।
  • (C) कथन I और III सही हैं।
  • (D) कथन II और III सही हैं।
Correct Answer: (C) कथन I और III सही हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:

यह प्रश्न गद्यांश के सूक्ष्म तर्कों के विश्लेषण पर आधारित है।


Step 2: Detailed Explanation:

- कथन I: गद्यांश कहता है, "जहाँ लोभ होता है... वहाँ नकार हो! यह तो लोभ की ही जीत है और आदमी की हार।" अतः यह कथन सही है।

- कथन II: लेखक के अनुसार केवल दबाना या आँख फोड़ लेना जीत नहीं है, अतः यह गलत है।

- कथन III: पूरे गद्यांश का सार यही है कि मन को बंद करने के बजाय सही बोध के साथ संयमित करना ही विजय है।


Step 3: Final Answer:

चूँकि कथन I और III गद्यांश के संदेश के अनुरूप हैं, विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: कथन-कारण वाले प्रश्नों में गद्यांश की विशिष्ट शब्दावली (जैसे 'आदमी की हार') को वाक्यों से मिलाकर जाँचें।


Question 35:

श्रम विभाजन और श्रमिक-विभाजन में अंतर 'जाति प्रथा और श्रम विभाजन' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: श्रम विभाजन कार्य कुशलता के लिए कार्यों का बँटवारा है, जबकि श्रमिक-विभाजन जन्म के आधार पर मनुष्यों का ऊँच-नीच के खाँचों में बँटवारा है।
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Step 1: Understanding the Concept:

डॉ. अंबेडकर ने आधुनिक सभ्य समाज के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक माना है, लेकिन जाति प्रथा द्वारा किए गए 'श्रमिकों के विभाजन' को अप्राकृतिक और हानिकारक बताया है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. श्रम विभाजन (Division of Labor): यह एक आर्थिक आवश्यकता हो सकती है जहाँ समाज के विभिन्न कार्यों को अलग-अलग लोगों में उनकी रुचि और कौशल के अनुसार बाँटा जाता है।

2. श्रमिक-विभाजन (Division of Laborers): जाति प्रथा में न केवल कार्य बँटते हैं, बल्कि उन कार्यों को करने वाले लोगों को भी श्रेणियों में बाँट दिया जाता है। इसमें एक श्रमिक को दूसरे से श्रेष्ठ या निम्न माना जाता है।

3. परिणाम: श्रमिक विभाजन में व्यक्ति की रुचि का कोई स्थान नहीं होता, जिससे समाज में विमुखता पैदा होती है।


Step 3: Final Answer:

अतः श्रम विभाजन कार्य की उन्नति के लिए है, जबकि श्रमिक-विभाजन सामाजिक शोषण और असमानता का यंत्र है।
Quick Tip: याद रखें: श्रम विभाजन में 'काम' बँटता है, श्रमिक विभाजन में 'इंसान' बँटता है।


Question 36:

‘शिरीष के फूल’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने शिरीष के फूलों के माध्यम से जीवन के किस सत्य को उजागर किया है और क्यों?

Correct Answer: लेखक ने शिरीष के माध्यम से संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में भी धैर्य, जिजीविषा और अनासक्त भाव से जीने के सत्य को उजागर किया है।
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Step 1: Understanding the Concept:

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के फूल को एक 'अवधूत' (संन्यासी) के रूप में चित्रित किया है जो विपरीत मौसम में भी खिला रहता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. कठिन परिस्थितियों में अडिगता: शिरीष जेठ की तपती दुपहरी और लू में भी लहलहाता है। यह मनुष्य को सिखाता है कि दुख और कष्टों में घबराना नहीं चाहिए।

2. अनासक्ति: जैसे शिरीष के पुराने फूल नए फूलों के आने पर अपना स्थान छोड़ देते हैं, वैसे ही मनुष्य को मोह-माया त्यागकर परिवर्तन को स्वीकार करना चाहिए।

3. गांधीजी से तुलना: लेखक ने शिरीष की तुलना महात्मा गांधी से की है, जो हिंसा और नफरत की आग के बीच भी अहिंसा और प्रेम के साथ खड़े रहे।


Step 3: Final Answer:

लेखक स्पष्ट करना चाहते हैं कि जीवन की सार्थकता संघर्ष के बीच शांत रहकर सृजन करने में है।
Quick Tip: 'अवधूत' शब्द का अर्थ संन्यासी होता है, शिरीष को यह उपाधि उसकी सहनशक्ति के कारण दी गई है।


Question 37:

पहलवान की ढोलक मृतप्राय गाँव वालों के लिए कैसे जीवनदायिनी थी? ‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के संदर्भ में लिखिए।

Correct Answer: ढोलक की आवाज़ महामारी और अकाल से मरते हुए गाँव वालों के भीतर जीने की इच्छा और संजीवनी शक्ति भर देती थी।
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Step 1: Understanding the Concept:

फणीश्वर नाथ रेणु की इस कहानी में ढोलक केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि संघर्ष और जिजीविषा का स्वर है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. भय का अंत: गाँव में मलेरिया और हैजे के कारण मौत का सन्नाटा छाया था। रात के उस भयावह अंधकार में लुट्टन पहलवान की ढोलक बजती थी, जो लोगों के मन से मौत का डर कम करती थी।

2. संजीवनी शक्ति: ढोलक की आवाज़ "चटाक्-चिट्-धा" (उठाकर पटक दे) लोगों की शिथिल नसों में बिजली भर देती थी। यद्यपि वह बीमारी को ठीक नहीं कर सकती थी, पर मरते हुए व्यक्ति को शांति से मरने का साहस देती थी।

3. मनोवैज्ञानिक सहारा: जब दवा और उपचार काम नहीं कर रहे थे, तब ढोलक का स्वर एकमात्र मानसिक सहारा था।


Step 3: Final Answer:

अतः ढोलक की थाप गाँव वालों के लिए एक आशा की किरण और मृत्यु के विरुद्ध जीवन का संगीत थी।
Quick Tip: ढोलक की आवाज़ के साथ जुड़़े 'बोल' (जैसे - चटाक्-चिट्-धा) का उल्लेख उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाता है।


Question 38:

“आधुनिकता की ओर बढ़ता हमारा समाज एक ओर कई नई उपलब्धियों को समेटे हुए है तो दूसरी ओर मनुष्य को मनुष्य बनाए रखने वाले मूल्य कहीं घिसते चले गए हैं।” ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के संदर्भ में लिखिए कि संबंधों में दूरी के क्या कारण हैं? संबंधों को कैसे मज़बूत किया जा सकता है?

Correct Answer: संबंधों में दूरी का मुख्य कारण पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) और पाश्चात्य आधुनिकता का अंधानुकरण है। इसे आपसी संवाद और सम्मान से मज़बूत किया जा सकता है।
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Step 1: Understanding the Concept:

मनोहर श्याम जोशी की कहानी 'सिल्वर वैडिंग' यशोधर बाबू और उनके आधुनिक विचारों वाले बच्चों के बीच के वैचारिक मतभेद को दर्शाती है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. दूरी के कारण: यशोधर बाबू पुराने मूल्यों ('किशनदा' की परंपरा) से बँधे हैं, जबकि उनके बच्चे 'सिल्वर वैडिंग' जैसी पाश्चात्य रीतियों को अपना रहे हैं। बच्चों को पिता का सादगी भरा जीवन 'आउटडेटेड' लगता है, और पिता को बच्चों की आधुनिकता 'समहाउ इम्प्रॉपर' लगती है।

2. मूल्यों का ह्रास: आधुनिकता की दौड़ में बुजुर्गों के अनुभव और सम्मान की जगह आर्थिक प्रगति और दिखावे ने ले ली है।

3. समाधान (मज़बूत करने के उपाय):
- लचीलापन: दोनों पीढ़ियों को अपने हठ का त्याग करना होगा। यशोधर बाबू को समय के साथ थोड़ा बदलना चाहिए और बच्चों को पिता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
- संवाद: केवल औपचारिकता के बजाय दिल से बातचीत करना ज़रूरी है।
- संतुलन: आधुनिकता अपनाते समय अपनी जड़ों और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए।


Step 3: Final Answer:

अतः, आपसी समझ और एक-दूसरे के विचारों को स्वीकार करने से ही संबंधों की खाई को पाटा जा सकता है।
Quick Tip: यशोधर बाबू के जुमले 'समहाउ इम्प्रॉपर' (Somehow improper) का संदर्भ देकर आधुनिकता के प्रति उनकी दुविधा को स्पष्ट करें।


Question 39:

‘जूझ’ कहानी से उद्धृत ‘दादा के हरेक तर्क को दत्ता जी राव ने काट दिया।’ - पंक्ति के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि दादा ने कौन-से तर्क दिए जिससे उन्हें पाठशाला न भेजना पड़े? उन तर्कों की दत्ता जी राव ने क्या प्रतिक्रिया दी?

Correct Answer: दादा ने आनंदा के चरित्र पर झूठे आरोप लगाए और घर के काम का बहाना बनाया, जिन्हें दत्ता जी राव ने कड़ी फटकार और तर्कों के साथ खारिज कर दिया।
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Step 1: Understanding the Concept:

आनंद यादव की आत्मकथात्मक कहानी 'जूझ' एक किशोर के शिक्षा प्राप्त करने के संघर्ष की गाथा है। इसमें दत्ता जी राव एक प्रगतिशील पात्र के रूप में उभरते हैं।


Step 2: Detailed Explanation:

1. दादा के तर्क: आनंदा के पिता (दादा) उसे स्कूल नहीं भेजना चाहते थे क्योंकि वे खुद सारा दिन गाँव में घूमना चाहते थे। उन्होंने तर्क दिया कि -
- लड़का घर के काम से भागता है।
- वह सिनेमा देखने जाता है और कंडे बेचकर पैसे उड़ाता है।
- उसे पढ़ा-लिखकर क्या करना है? खेती ही तो करनी है।
2. दत्ता जी राव की प्रतिक्रिया: दत्ता जी राव ने दादा की खूब क्लास ली। उन्होंने कहा -
- तुम अपनी अय्याशी के लिए बच्चे की पढ़ाई रोक रहे हो।
- आजकल खेती से जीवन नहीं चलता, शिक्षा ज़रूरी है।
- उन्होंने आनंदा को विश्वास दिलाया कि यदि दादा स्कूल न भेजें, तो वह सीधे उनके पास आए।
- अंततः, उन्होंने दादा को धमकाकर आनंदा का स्कूल जाना तय करवाया।


Step 3: Final Answer:

दत्ता जी राव ने शिक्षा के महत्त्व को समझा और दादा के स्वार्थी तर्कों को कुचलकर आनंदा के भविष्य की राह प्रशस्त की।
Quick Tip: दत्ता जी राव के पात्र को 'उद्धारक' के रूप में चित्रित करें क्योंकि उनके बिना आनंदा की पढ़ाई संभव नहीं थी।


Question 40:

लेखक ने ‘अतीत में दबे पाँव’ शीर्षक ही क्यों चुना? इस पाठ से उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer: यह शीर्षक मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की प्राचीन सभ्यता के अवशेषों में छिपे इतिहास और उनकी जीवंतता को खोजने की यात्रा का परिचायक है।
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Step 1: Understanding the Concept:

ओम थानवी का यह यात्रा वृत्तांत सिंधु घाटी सभ्यता के वैभव और उसकी उन्नत नगर नियोजन प्रणाली का वर्णन करता है।


Step 2: Detailed Explanation:

1. शीर्षक की सार्थकता: 'अतीत में दबे पाँव' का अर्थ है पुरानी स्मृतियों या सभ्यताओं के निशानों का पीछा करना। आज भी वहाँ की गलियाँ, घर और स्नानागार इस तरह मौजूद हैं जैसे वे कल ही उपयोग में थे।
2. उदाहरण 1: नगर नियोजन: मोहनजोदड़ो की गलियों में घूमते हुए लेखक को ऐसा महसूस होता है जैसे वह आज की किसी आधुनिक कॉलोनी में हो। खण्डहरों में भी तत्कालीन वैभव की पदचाप सुनाई देती है।
3. उदाहरण 2: खेती और व्यापार: वहाँ मिले अन्न भंडार और सूती कपड़े के साक्ष्य बताते हैं कि वह सभ्यता कितनी विकसित थी।
4. अप्रत्यक्ष मौजूदगी: लेखक को अजायबघर में रखी वस्तुओं को देखकर लगता है कि उस समय के लोग वहीं कहीं आसपास हैं।


Step 3: Final Answer:

लेखक ने मलबे और खण्डहरों के माध्यम से एक पूरी सभ्यता की 'पदचाप' (Footprints) को पहचाना है, इसलिए यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक और कलात्मक है।
Quick Tip: 'दबे पाँव' मुहावरे का प्रयोग इतिहास की खामोश लेकिन स्पष्ट मौजूदगी को दर्शाने के लिए किया गया है।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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