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Nidhi Bamnawat

| Updated On - Feb 13, 2026

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 2 - 2/5/2) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 (Set 2 - 2/5/2) with Solution Pdf

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CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 (Set 2 - 2-5-2) with Solution Pdf

Question 1:

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :


जीवन का अभियान दान-बल से अजस्र चलता है,

उतनी बढ़ी ज्योति, स्नेह जितना अनल्प जलता है।

और दान में रोककर या हँसकर हम जो देते हैं,

अहंकारवश उसे स्वत्व का त्याग मान लेते हैं।

यह न स्वत्व का त्याग, दान तो जीवन का झरना है,

रखना उसको रोक, मृत्यु से पहले ही मरना है,

किस पर करते कृपा वृक्ष यदि अपना फल देते हैं ?

गिरने से उसको सँभाल, क्यों रोक नहीं लेते हैं ?

ऋतु के बाद फलों का रुकना डालों का सड़ना है,

मोह दिखाना देय वस्तु पर आत्मघात करना है।

देते तरु इसलिए कि रेशों में मत कीट समाएँ

रहें डालियाँ स्वस्थ कि उनमें नये-नये फल आएँ

जो नर आत्मदान से अपना जीवन घट भरते हैं

वही मृत्यु के मुख में भी पड़कर न कभी मरते हैं

जहाँ कहीं है ज्योति जगत में, जहाँ कहीं उजियाला

वहाँ खड़ा है कोई अंतिम मोल चुकाने वाला।


(i).
दान को जीवन का झरना क्यों कहा गया है ?

  • (A) दान कभी व्यर्थ नहीं जाता
  • (B) दान देने से कीर्ति बनी रहती है
  • (C) दान को रोकने से मृत्यु से पहले ही मृत्यु हो जाती है
  • (D) दान देने से जीवन की निरंतरता बनी रहती है
Correct Answer: (D) दान देने से जीवन की निरंतरता बनी रहती है
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पद्यांश की पंक्ति "यह न स्वत्व का त्याग, दान तो जीवन का झरना है" यह स्पष्ट करती है कि जिस प्रकार झरना निरंतर बहता रहता है, उसी प्रकार दान जीवन को गतिमान और निरंतर बनाए रखता है।

दान को रोकने को कवि ने मृत्यु के समान बताया है, जिससे स्पष्ट है कि दान जीवन की निरंतरता का प्रतीक है। Quick Tip: पद्यांश में रूपक अलंकारों (Metaphors) पर ध्यान दें।
यहाँ 'दान' की तुलना 'झरने' से की गई है, जो प्रवाह और निरंतरता का प्रतीक है।


Question 2:

'अंतिम मोल चुकाने वाला' से अभिप्राय है :

  • (A) वस्तु की अंतिम कीमत अदा करने वाला
  • (B) स्वत्व का त्याग कर, परोपकार का दीया जलाने वाला
  • (C) स्वत्व की पूर्ति हेतु कोई भी कीमत अदा करने वाला
  • (D) कीमत के आधार पर लोगों की सहायता करने वाला
Correct Answer: (B) स्वत्व का त्याग कर, परोपकार का दीया जलाने वाला
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कविता की अंतिम पंक्तियों में "जहाँ कहीं है ज्योति जगत में... वहाँ खड़ा है कोई अंतिम मोल चुकाने वाला" का अर्थ है कि संसार में जहाँ भी ज्ञान या अच्छाई का प्रकाश है, वह किसी न किसी व्यक्ति के त्याग और बलिदान (अंतिम मोल) का परिणाम है।

यहाँ 'अंतिम मोल' का अर्थ अपने निजी स्वार्थ (स्वत्व) का त्याग कर दूसरों के लिए कार्य करना है। Quick Tip: काव्यांश के प्रतीकात्मक अर्थ को समझना आवश्यक है।
यहाँ 'मोल चुकाना' का अर्थ पैसे देना नहीं, बल्कि 'बलिदान' या 'त्याग' करना है।


Question 3:

कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाला/वाले कथन है/हैं :

(I) दान से जीवन को गति मिलना

(II) परोपकार की प्रेरणा

(III) मृत्यु का वरण करना

  • (A) केवल (I)
  • (B) केवल (II)
  • (C) (I) और (II) दोनों
  • (D) (I), (II) और (III) तीनों ही
Correct Answer: (C) (I) और (II) दोनों
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चरण 1: कविता का मुख्य विषय 'दान' और 'परोपकार' है।

चरण 2: कथन (I) "दान से जीवन को गति मिलना" सही है क्योंकि कवि दान को 'जीवन का झरना' कहता है।

चरण 3: कथन (II) "परोपकार की प्रेरणा" भी सही है क्योंकि वृक्ष और फलों के उदाहरण से देने की प्रेरणा दी गई है।

चरण 4: कथन (III) "मृत्यु का वरण करना" गलत है; कवि मृत्यु से बचने के लिए (अमरता के लिए) दान की बात करता है, मृत्यु को चुनने की नहीं।

अतः, (I) और (II) सही हैं। Quick Tip: 'केंद्रीय भाव' (Central Idea) ढूँढते समय कविता के सकारात्मक संदेश पर ध्यान दें।
नकारात्मक या केवल एक हिस्से को दर्शाने वाले विकल्पों को हटा दें।


Question 4:

कवि ने लोगों के द्वारा दान को क्या मान लेने की बात कही है ?

Correct Answer:
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कवि ने कहा है कि लोग अंहकारवश दान को अपने 'स्वत्व का त्याग' (Sacrifice of ownership) मान लेते हैं।

वे सोचते हैं कि उन्होंने अपनी किसी वस्तु का त्याग किया है, जबकि वास्तव में दान जीवन के प्रवाह के लिए आवश्यक है। Quick Tip: उत्तर लिखते समय प्रश्न की भाषा और पद्यांश की शब्दावली का समन्वय करें।
यहाँ "अहंकारवश उसे स्वत्व का त्याग मान लेते हैं" पंक्ति से सीधा उत्तर मिलता है।


Question 5:

वृक्ष और फलों का उदाहरण यहाँ किस उद्देश्य से दिया गया है ?

Correct Answer:
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वृक्ष और फलों का उदाहरण निम्नलिखित उद्देश्यों से दिया गया है:

1. यह समझाने के लिए कि देना (दान) प्रकृति का नियम है। जैसे वृक्ष फलों को अपने पास रोककर नहीं रखते, वैसे ही मनुष्य को भी संचय नहीं करना चाहिए।

2. यह बताने के लिए कि यदि वृक्ष फलों को नहीं गिराएंगे (दान नहीं करेंगे), तो डालियाँ सड़ जाएंगी और कीड़े लग जाएंगे। इसी प्रकार, दान न करने से मनुष्य के जीवन में भी विकृति आ जाती है। दान आत्म-कल्याण के लिए भी आवश्यक है। Quick Tip: जब किसी उदाहरण (Example) का उद्देश्य पूछा जाए, तो देखें कि वह उदाहरण किस तर्क को सिद्ध करने के लिए प्रयोग किया गया है।


Question 6:

आत्मदान करने वाले लोग अमर क्यों हो जाते हैं ?

Correct Answer:
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आत्मदान (स्वयं का त्याग या निस्वार्थ सेवा) करने वाले लोग इसलिए अमर हो जाते हैं क्योंकि उनके कार्य समाज में एक ज्योति (प्रकाश) की तरह सदा विद्यमान रहते हैं।

वे शारीरिक रूप से मृत्यु के मुख में पड़कर भी अपने यश और सत्कर्मों के कारण लोगों की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहते हैं।

उनका भौतिक शरीर नष्ट हो सकता है, लेकिन उनकी कीर्ति अमर रहती है। Quick Tip: 'अमर' होने का अर्थ यहाँ शारीरिक अमरता नहीं, बल्कि 'यशस्वी' (Immortality through fame/deeds) होना है।


Question 7:

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :


कई बार मनुष्य अपने अनुचित कार्यों या अवांछनीय स्वभाव के संबंध में दुखी होता है और सोचता है कि उन्हें वह छोड़ दे। उन कृत्यों की प्रतिक्रिया उसने देखी-सुनी होती है। उसे परामर्श और उपदेश भी उसी प्रकार के मिलते रहते हैं, जिनमें सुधार करने की अपेक्षा रहती है। सुनने में यद्यपि वे सारगर्भित परामर्श होते हैं, किंतु जब छोड़ने के लिए मन बात आती है तो मन मुकर जाता है। अभ्यस्त प्रकृति को छोड़ने के लिए मन सहमत नहीं होता। आर्थिक तंगी, बदनामी, स्वास्थ्य की क्षति, मनोमालिन्य, आदि अनुभवों के कारण बार-बार सुधरने की बात सोचने और समय आने पर उसे न कर पाने से मनोबल टूटता है। बार-बार मनोबल टूटने पर व्यक्ति इतना दुर्बल हो जाता है कि उसे यह विश्वास ही नहीं होता कि उनका सुधार हो सकता है और यह कल्पना करने लगते हैं कि जीवन ऐसे ही बीत जाएगा और दुर्व्यसनों से किसी भी प्रकार मुक्ति नहीं मिल सकेगी।


यह सर्वविदित बात है कि मनुष्य अपने मन का स्वामी है, शरीर पर भी उसका अधिकार है। सामान्य जीवन में वह अपनी अभिरुचि के अनुसार ही सोचकर कार्य करता है। किंतु दुष्प्रवृत्तियों के संबंध में ही ऐसी क्या बात है कि वे चाहकर भी नहीं छूट पातीं और प्रयास करने के बावजूद भी सिर पर ही सवार रहती हैं।


अंधविश्वास, दिखावा, खर्चीली शादियाँ, कुप्रथाएँ, तर्कहीन रीति-रिवाजों जैसी अनेक कुरीतियाँ ऐसी हैं, जिन्हें बुद्धि-विवेक और तर्क के आधार पर हर कोई नकारता है, किंतु जब करने का समय आता है तो सभी पुराने अभ्यस्त चिंतन पर चल पड़ते हैं और वही करने लग जाते हैं जिसे न करने की बात अनेक बार सोचते रहते हैं।


(i).
मनुष्य अनुचित कार्यों को क्यों छोड़ना चाहता है ?

  • (A) दुख का कारण होने के कारण
  • (B) सुखद होने के कारण
  • (C) अवांछनीय होने के कारण
  • (D) प्रशंसनीय होने के कारण
Correct Answer: (A) दुख का कारण होने के कारण
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गद्यांश की पहली पंक्ति में लिखा है: "मनुष्य अपने अनुचित कार्यों या अवांछनीय स्वभाव के संबंध में दुखी होता है"।

चूँकि ये कार्य उसे दुख देते हैं, इसलिए वह उन्हें छोड़ना चाहता है। Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में उत्तर हमेशा गद्यांश की पहली कुछ पंक्तियों में ही मिल जाता है।
'दुखी होता है' वाक्यांश सही उत्तर की ओर संकेत करता है।


Question 8:

गद्यांश के अनुसार व्यक्ति के कृत्यों पर उसे किस प्रकार के परामर्श मिलते हैं ?

  • (A) सुधारात्मक
  • (B) प्रचारात्मक
  • (C) उपेक्षात्मक
  • (D) स्वीकारात्मक
Correct Answer: (A) सुधारात्मक
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गद्यांश में उल्लेख है: "उसे परामर्श और उपदेश भी उसी प्रकार के मिलते रहते हैं, जिनमें सुधार करने की अपेक्षा रहती है।"

अतः परामर्श 'सुधारात्मक' होते हैं। Quick Tip: प्रश्न में प्रयुक्त शब्दों (जैसे 'परामर्श') को गद्यांश में खोजें (Scanning technique) और उसके आस-पास के विशेषणों को देखें।


Question 9:

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I : मन अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने के लिए सहमत हो जाता है।

कथन II : मन को अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने के लिए कोई परामर्श नहीं मिलता।

कथन III : मन अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने से असहमत ही रहता है।

कथन IV : सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण व्यक्ति का मन अवांछनीय कृत्यों को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता।

गद्यांश के अनुसार कौन-से कथन सही हैं ?

  • (A) केवल कथन I और II सही हैं।
  • (B) केवल कथन II और III सही हैं।
  • (C) केवल कथन III और IV सही हैं।
  • (D) केवल कथन I और IV सही हैं।
Correct Answer: (C) केवल कथन III और IV सही हैं।
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विश्लेषण:

- कथन I गलत है क्योंकि गद्यांश में लिखा है, "अभ्यस्त प्रकृति को छोड़ने के लिए मन सहमत नहीं होता।"

- कथन II गलत है क्योंकि गद्यांश कहता है, "परामर्श और उपदेश... मिलते रहते हैं।"

- कथन III सही है (I का विपरीत)।

- कथन IV सही प्रतीत होता है। गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद में "दिखावा, खर्चीली शादियाँ" आदि का उल्लेख है जो सामाजिक प्रतिष्ठा (Prestige/Show-off) से जुड़े हैं और जिन्हें व्यक्ति चाहकर भी नहीं छोड़ पाता। साथ ही पहले अनुच्छेद में 'बदनामी' का डर भी एक कारक बताया गया है जो मन को कमजोर करता है।

अतः विकल्प (C) सबसे उपयुक्त है। Quick Tip: 'कथन और निष्कर्ष' वाले प्रश्नों में एलिमिनेशन विधि (Elimination Method) का प्रयोग करें।
कथन I स्पष्ट रूप से गलत है, जिससे विकल्प (A) और (D) अपने आप हट जाते हैं।


Question 10:

अवांछनीय स्वभाव की हानियाँ कौन-कौन सी हैं ?

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार अवांछनीय स्वभाव की निम्नलिखित हानियाँ हैं:

1. आर्थिक तंगी (Financial hardship)।

2. बदनामी (Infamy)।

3. स्वास्थ्य की क्षति (Health loss)।

4. मनोमालिन्य (Mental conflict/pollution)।

5. बार-बार प्रयास विफल होने पर मनोबल का टूटना (Loss of willpower)। Quick Tip: गद्यांश में जहाँ हानियों की सूची (कोमा लगाकर) दी गई हो, उसे हू-ब-हू उत्तर में लिखें।


Question 11:

मनुष्य का मनोबल टूटने का क्या परिणाम होता है ?

Correct Answer:
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मनुष्य का मनोबल टूटने के निम्नलिखित परिणाम होते हैं:

1. व्यक्ति अत्यंत दुर्बल (मानसिक रूप से कमजोर) हो जाता है।

2. उसे यह विश्वास नहीं रहता कि उसका सुधार संभव है।

3. वह यह मान लेता है कि उसका पूरा जीवन ऐसे ही (दुर्व्यसनों के साथ) बीत जाएगा और उसे इनसे कभी मुक्ति नहीं मिलेगी। Quick Tip: कारण-प्रभाव (Cause-Effect) संबंध को समझें।
यहाँ 'मनोबल टूटना' कारण है और 'निराशा/दुर्बलता' उसका प्रभाव है।


Question 12:

मनुष्य दुष्प्रवृत्तियों को क्यों नहीं छोड़ पाता ?

Correct Answer:
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मनुष्य दुष्प्रवृत्तियों को इसलिए नहीं छोड़ पाता क्योंकि:

1. उसका मन अपनी 'अभ्यस्त प्रकृति' (Habitual nature) को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता।

2. बार-बार सुधार में असफल होने से उसका आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति (Willpower) क्षीण हो जाती है।

3. 'दुष्प्रवृत्तियाँ' उस पर इस कदर हावी हो जाती हैं कि चाहकर भी और तमाम प्रयासों के बावजूद वह उनसे मुक्त नहीं हो पाता। Quick Tip: उत्तर में 'अभ्यस्त प्रकृति' (Habitual nature) जैसे कीवर्ड्स का प्रयोग अवश्य करें जो गद्यांश में दिए गए हैं।


Question 13:

जिस काम को मनुष्य नहीं करने की सोचता है, उसी काम को वह फिर से क्यों करने लग जाता है ?

Correct Answer:
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मनुष्य तार्किक रूप से (बुद्धि-विवेक से) जिन कुरीतियों या कार्यों को गलत मानता है और नहीं करने की सोचता है, उन्हें भी वह फिर से करने लग जाता है क्योंकि:

1. 'पुराने अभ्यस्त चिंतन' (Deep-rooted habits/thinking) का प्रभाव उस पर हावी हो जाता है।

2. सामाजिक दबाव, दिखावा या अंधविश्वास के कारण समय आने पर उसका विवेक दब जाता है और वह लकीर का फकीर बनकर वही पुरानी गलतियाँ दोहराने लगता है। Quick Tip: यह प्रश्न गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद पर आधारित है।
'पुराने अभ्यस्त चिंतन' वाक्यांश यहाँ मुख्य उत्तर है।


Question 14:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :


(i).
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन-सा है ? उसकी सबसे बड़ी विशेषता का उल्लेख करते हुए लिखिए कि इसकी भाषा कैसी होनी चाहिए।

Correct Answer:
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जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम प्रिंट मीडिया (मुद्रित माध्यम) है, जैसे - समाचार पत्र और पत्रिकाएँ।

विशेषता: इसमें 'स्थायित्व' होता है; इसे धीरे-धीरे पढ़ा जा सकता है और सुरक्षित रखा जा सकता है।

भाषा: इसकी भाषा सरल, सहज, रोचक और व्याकरण सम्मत (शुद्ध) होनी चाहिए ताकि आम पाठक इसे आसानी से समझ सकें। Quick Tip: प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी शक्ति 'लिखित शब्द का स्थायित्व' है।


Question 15:

समाचार लेखन के छह ककारों से आप क्या समझते हैं ? इन ककारों की समाचार लेखन में भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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समाचार लिखते समय छह मुख्य प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं जिन्हें 'छह ककार' कहते हैं: क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों और कैसे।

भूमिका:


पहले चार ककार (क्या, कौन, कहाँ, कब) समाचार के 'इंट्रो' (मुखड़ा) में सूचनात्मक जानकारी देते हैं।
अंतिम दो ककार (क्यों, कैसे) समाचार की 'बॉडी' में विवरणात्मक और विश्लेषणात्मक जानकारी प्रदान करते हैं। ये समाचार को पूर्णता प्रदान करते हैं। Quick Tip: क्रम याद रखें: 4 ककार (सूचनात्मक) + 2 ककार (विवराणात्मक)।


Question 16:

विशेष लेखन क्या है ? विशेष लेखन और डेस्क का क्या संबंध है ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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विशेष लेखन: किसी खास विषय (जैसे - खेल, व्यापार, विज्ञान, मनोरंजन) पर सामान्य लेखन से हटकर किया गया गहन और विश्लेषणात्मक लेखन 'विशेष लेखन' कहलाता है।

डेस्क से संबंध: समाचार पत्रों में अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग 'डेस्क' होते हैं (जैसे - स्पोर्ट्स डेस्क, बिजनेस डेस्क)। विशेष लेखन इन्हीं डेस्कों पर काम करने वाले विशेषज्ञ पत्रकारों द्वारा किया जाता है। Quick Tip: 'बीट' (Beat) रिपोर्टिंग और विशेष लेखन में अंतर होता है, लेकिन विशेष लेखन डेस्क पर ही संपादित होता है।


Question 17:

नाट्य रूपांतरण करते समय कहानी के किन तत्त्वों को नाटक में ढालना मुश्किल होता है ?

Correct Answer:
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कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय सबसे अधिक मुश्किल मनोवैज्ञानिक चित्रण और विवरणात्मक अंशों को नाटक में ढालने में होती है।

कहानी में लेखक पात्रों के मन की बातों या परिवेश का लंबा वर्णन कर सकता है, लेकिन नाटक में सब कुछ संवादों और दृश्य-बंध (Visuals) के माध्यम से दिखाना होता है।

मानसिक द्वंद्व (Mental conflict) को दृश्य में बदलना चुनौतीपूर्ण होता है। Quick Tip: कहानी 'कही' जाती है, नाटक 'दिखाया' जाता है।
अमूर्त भावों को मूर्त दृश्य में बदलना ही मुख्य चुनौती है।


Question 18:

नए और अप्रत्याशित विषय पर लिखने से आप क्या समझते हैं ? इसका अभ्यास न होने पर क्या हानि होती है ?

Correct Answer:
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अर्थ: किसी ऐसे विषय पर अपने विचार व्यक्त करना जो पहले से तय न हो या पारंपरिक न हो (जैसे - 'दीवार घड़ी', 'बारिश की एक शाम'), नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन कहलाता है। यह रटंत विद्या नहीं, बल्कि मौलिक चिंतन है।

हानि: यदि इसका अभ्यास न हो, तो परीक्षा या जीवन में अचानक कोई नया विषय मिलने पर विचार क्रमबद्ध नहीं हो पाते, भाषा लड़खड़ाने लगती है और हम अपनी बात को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त नहीं कर पाते। Quick Tip: इसे 'Creative Writing' कहते हैं।
इसमें 'मैं' शैली का प्रयोग स्वीकार्य होता है।


Question 19:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :


(i).
वैज्ञानिक आविष्कारों का आधुनिक भारत

Correct Answer:
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वैज्ञानिक आविष्कारों का आधुनिक भारत


आधुनिक भारत की नींव विज्ञान और तकनीक पर टिकी है। बैलगाड़ी के युग से निकलकर भारत अब 'गगनयान' और 'मंगलयान' जैसे मिशनों की तैयारी कर रहा है। यह परिवर्तन वैज्ञानिक आविष्कारों का ही परिणाम है।


सूचना प्रौद्योगिकी (IT) में भारत ने विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ अब गाँव-गाँव तक पहुँच रही हैं। 5G तकनीक ने संचार क्रांति को नई गति दी है। कृषि क्षेत्र में उन्नत बीजों, ड्रोन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों ने 'हरित क्रांति' के बाद एक नया अध्याय जोड़ा है।


चिकित्सा के क्षेत्र में, भारत ने स्वदेशी टीके (Vaccines) बनाकर न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि दुनिया की मदद भी की। रक्षा क्षेत्र में मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भरता भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है।


निष्कर्षतः, वैज्ञानिक आविष्कार आधुनिक भारत के विकास का इंजन हैं। यदि हम विज्ञान का उपयोग सतत विकास (Sustainable Development) के लिए करें, तो भारत शीघ्र ही विश्व की अग्रणी महाशक्ति बनेगा। Quick Tip: निबंध में 'आत्मनिर्भर भारत' और 'डिजिटल इंडिया' जैसे वर्तमान संदर्भों को जोड़ना अंकदायी होता है।


Question 20:

लुप्त हो रहे जंगलों का दुष्परिणाम

Correct Answer:
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लुप्त हो रहे जंगलों का दुष्परिणाम


प्रकृति और मानव का रिश्ता सदियों पुराना है, लेकिन आधुनिक विकास की दौड़ में मनुष्य ने इस रिश्ते को तार-तार कर दिया है। आज 'लुप्त हो रहे जंगल' केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व पर मंडराता हुआ संकट है।


जंगलों की अंधाधुंध कटाई के दुष्परिणाम अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव 'ग्लोबल वार्मिंग' के रूप में सामने आया है। पेड़ों की कमी से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और मौसम का चक्र बिगड़ गया है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे की स्थिति, वनों के विनाश का ही नतीजा है।


इसके अलावा, जंगलों के लुप्त होने से वन्य जीवों का आवास छिन गया है, जिससे वे शहरों की ओर भाग रहे हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जिससे भूमि बंजर हो रही है। ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण के कारण नई-नई बीमारियाँ जन्म ले रही हैं।


निष्कर्षतः, यदि हमने अभी भी वनों के संरक्षण की ओर ध्यान नहीं दिया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह हरी-भरी धरती एक रेगिस्तान में बदल जाएगी। 'वृक्ष हैं तो हम हैं' – इस मंत्र को जीवन में उतारना ही होगा। Quick Tip: रचनात्मक लेख में तीन भाग होने चाहिए: भूमिका (Introduction), मुख्य विषय (Body), और निष्कर्ष (Conclusion)।
भाषा प्रवाहपूर्ण होनी चाहिए।


Question 21:

हमारे अधिकार और कर्तव्य

Correct Answer:
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हमारे अधिकार और कर्तव्य


किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य एक ही गाड़ी के दो पहियों के समान हैं। एक के बिना दूसरा अधूरा है। भारतीय संविधान ने हमें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए छह मौलिक अधिकार दिए हैं, जैसे समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा और शोषण के विरुद्ध अधिकार। ये अधिकार हमारे व्यक्तित्व के विकास के लिए अनिवार्य हैं।


परंतु, अक्सर हम अधिकारों की मांग तो करते हैं, लेकिन कर्तव्यों को भूल जाते हैं। यदि हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, तो हमारा कर्तव्य है कि हम किसी की भावनाओं को आहत न करें। यदि हमें स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार है, तो प्रदूषण न फैलाना हमारा कर्तव्य है। सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, संविधान का सम्मान और देश की एकता बनाए रखना हमारे मौलिक कर्तव्य हैं।


गांधीजी ने सही कहा था, "सच्चा अधिकार कर्तव्य पालन से ही प्राप्त होता है।" जब हम अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करेंगे, तो अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाएंगे। एक आदर्श नागरिक वही है जो अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहे। Quick Tip: 'अधिकार' और 'कर्तव्य' का संतुलन (Balance) ही लोकतंत्र की सफलता है।
गांधीजी का उद्धरण (Quote) उत्तर को प्रभावी बनाता है।


Question 22:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में लिखिए :


(i).
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे प्राचीन माध्यम कौन-सा है ? उसकी दो-दो खूबियों और खामियों के बारे में लिखिए।

Correct Answer:
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जनसंचार का सबसे प्राचीन माध्यम प्रिंट मीडिया (मुद्रित माध्यम) है। (जैसे- समाचार पत्र, पत्रिकाएँ)।


खूबियाँ (Strengths):

1. स्थायित्व: मुद्रित शब्दों को सुरक्षित रखा जा सकता है और अपनी सुविधानुसार कभी भी, कितनी भी बार पढ़ा जा सकता है।

2. गहन चिंतन: यह माध्यम जटिल और गंभीर विषयों पर विस्तार से सोचने और विश्लेषण करने का अवसर देता है।


खामियाँ (Weaknesses):

1. निरक्षरों के लिए व्यर्थ: यह माध्यम केवल साक्षर (पढ़े-लिखे) लोगों के लिए है; अनपढ़ लोग इसका लाभ नहीं उठा सकते।

2. तुरंत अपडेट नहीं: यह रेडियो या टीवी की तरह 'ब्रेकिंग न्यूज़' नहीं दे सकता। इसमें समाचार प्रकाशित होने के लिए एक निश्चित समय सीमा (Deadline) का इंतज़ार करना पड़ता है। Quick Tip: खूबियाँ और खामियाँ आमने-सामने (Bullet points में) लिखने से उत्तर स्पष्ट और आकर्षक बनता है।


Question 23:

समाचार लेखन और फ़ीचर लेखन के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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समाचार और फ़ीचर में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:


1. उद्देश्य: समाचार का मुख्य उद्देश्य पाठकों को तात्कालिक घटनाओं की सूचना देना होता है, जबकि फ़ीचर का उद्देश्य सूचना देने के साथ-साथ पाठकों को शिक्षित करना और उनका मनोरंजन करना भी होता है।

2. शैली: समाचार 'उल्टा पिरामिड शैली' (Inverted Pyramid Style) में लिखा जाता है (सबसे महत्वपूर्ण बात सबसे पहले)। वहीं, फ़ीचर की कोई एक निश्चित शैली नहीं होती; यह कथात्मक (Narrative) शैली में लिखा जाता है और इसमें लेखक अपनी राय भी दे सकता है।

3. शब्द सीमा: समाचार में शब्द सीमा का कड़ाई से पालन होता है, जबकि फ़ीचर में विस्तार की गुंजाइश अधिक होती है (250 से 2000 शब्दों तक)। Quick Tip: एक मुख्य अंतर याद रखें: समाचार 'तथ्य' (Fact) पर आधारित होता है, फ़ीचर 'तथ्य + भावना/मनोरंजन' (Fact + Feeling) पर।


Question 24:

वर्तमान समय में समाचार-पत्रों या दूसरे जनसंचार माध्यमों में खेलों को बहुत अधिक महत्त्व क्यों दिया जाने लगा है ?

Correct Answer:
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वर्तमान में खेलों को जनसंचार माध्यमों में अत्यधिक महत्त्व मिलने के कारण:


1. व्यापक रुचि: खेल हर उम्र और वर्ग के लोगों को आकर्षित करते हैं। इससे मीडिया की पाठक संख्या (Readership) और टीआरपी (TRP) बढ़ती है।

2. राष्ट्रवाद और गौरव: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल उपलब्धियाँ देश के गौरव से जुड़ी होती हैं, जिससे भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है।

3. व्यावसायीकरण: खेलों में अब बहुत पैसा और ग्लैमर आ गया है। विज्ञापनदाता (Advertisers) खेल पृष्ठों या कार्यक्रमों पर विज्ञापन देने के लिए उत्सुक रहते हैं, जिससे मीडिया को आर्थिक लाभ होता है।

4. युवा वर्ग: भारत एक युवा देश है और युवाओं की खेलों में विशेष रुचि होती है, जिसे मीडिया भुनाना चाहता है। Quick Tip: अधिकांश समाचार पत्रों में अब खेल के लिए एक अलग 'स्पोर्ट्स पेज' अनिवार्य हो गया है, जो इसके महत्त्व को दर्शाता है।


Question 25:

निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :


कल्पना के रसायनों को पी

बीज गल गया निःशेष;

शब्द के अंकुर फूटे,

पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

झूमने लगे फल,

रस अलौकिक,

अमृत धाराएँ फूटतीं

रोपाई क्षण की,

कटाई अनंतता की

लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती।

रस का अक्षय पात्र सदा का

छोटा मेरा खेत चौकोना।


(i). कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :


  • (A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
  • (B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
  • (D) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
Correct Answer: (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
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कविता में रूपक अलंकार के माध्यम से खेती और लेखन की तुलना की गई है।

'छोटा मेरा खेत' की तुलना 'कागज के पन्ने' (1-i) से की गई है।
'अंकुर फूटना' का अर्थ है मन में उमड़ती भावनाओं को 'शब्द मिलना' (2-iii)।
'पल्लवित पुष्पित होना' का अर्थ है रचना का पूर्ण होकर 'साहित्यिक कृति का रूप धारण करना' (3-ii)।

अतः विकल्प (C) सही है। Quick Tip: 'छोटा मेरा खेत' कविता में रूपकों (Metaphors) को याद रखें: खेत = पन्ना, बीज = विचार, रसायन = कल्पना, फल = कृति का आनंद।


Question 26:

कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है :

  • (A) विचार और अभिव्यक्ति का
  • (B) कवि के परिश्रम का
  • (C) कल्पना का
  • (D) शब्दों का
Correct Answer: (A) विचार और अभिव्यक्ति का
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खेती में जैसे बीज बोया जाता है, वैसे ही काव्य-रचना में किसी 'विचार' (Idea) या 'अभिव्यक्ति' का बीज मन में बोया जाता है। यही विचार बाद में कल्पना के सहारे विकसित होकर कविता बनता है। Quick Tip: कविता की शुरुआती पंक्तियाँ अक्सर मूल तत्व (Root element) की ओर इशारा करती हैं। यहाँ 'बीज' रचना का मूल आधार है।


Question 27:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।

कारण : असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है, लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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कविता की पंक्ति "कटाई अनंतता की, लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती" स्पष्ट करती है कि साहित्य का रस (आनंद) कभी समाप्त नहीं होता (कालजयी है)। और इसका कारण यही है कि इसे युगों-युगों तक असंख्य पाठक पढ़ते हैं, फिर भी इसका आनंद कम नहीं होता। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं और व्याख्या भी सही है। Quick Tip: 'अक्षय पात्र' शब्द का अर्थ है 'कभी न खत्म होने वाला बर्तन'। साहित्य इसी अक्षय पात्र के समान है।


Question 28:

‘झूमने लगे फल’ का आशय है :

  • (A) बीज अंकुरित होने लगे
  • (B) फल हवा के संपर्क से झूमने लगे
  • (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
  • (D) बीज फूलों का रूप धारण करने लगे
Correct Answer: (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
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काव्यांश के संदर्भ में, जब कृति (कविता) पूरी तरह तैयार हो जाती है और पाठकों को आनंद (रस) देने लगती है, तो इसे 'फल झूमना' कहा गया है। यह कवि के सृजनात्मक परिश्रम का सुखद परिणाम (प्रतिफल) है। Quick Tip: साहित्यिक संदर्भ में 'फल' हमेशा 'परिणाम' या 'आनंद' का प्रतीक होता है, भौतिक फल का नहीं।


Question 29:

‘बीज गल गया निःशेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है ?

  • (A) खेतों में फ़सल उगाने के लिए बीजों को मिट्टी में बोना पड़ता है।
  • (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
  • (C) बीजों के गलने पर ही खेतों में फ़सल के अंकुर फूटते हैं।
  • (D) कल्पना के संसर्ग बिना साहित्यिक कृति की रचना असंभव है।
Correct Answer: (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
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'बीज गल गया निःशेष' का प्रतीकात्मक अर्थ है 'अहंकार का नाश'। जिस प्रकार बीज को पेड़ बनने के लिए अपना अस्तित्व मिटाना पड़ता है, उसी प्रकार एक रचनाकार को उत्कृष्ट कृति रचने के लिए अपने 'मैं' (Ego) को विसर्जित कर कल्पना और भावों में डूबना पड़ता है। यह नवनिर्माण के लिए त्याग का संकेत है। Quick Tip: 'निःशेष' का अर्थ है 'पूरी तरह से'। सृजन के लिए समर्पण (Total Surrender) आवश्यक है।


Question 30:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :


(i).
क्या ‘बादल राग’ कविता को लघुमानव की खुशहाली का राग कहा जा सकता है ? पक्ष या विपक्ष में तर्क लिखिए।

Correct Answer:
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हाँ, 'बादल राग' कविता को निश्चित रूप से लघुमानव (आम आदमी/किसान/गरीब) की खुशहाली का राग कहा जा सकता है।

शोषण से मुक्ति: कविता में बादल क्रांति का प्रतीक है। जब क्रांति (बादल) आती है, तो बड़े-बड़े पूँजीपति (पर्वत/अट्टालिकाएँ) घबराते हैं, लेकिन छोटे पौधे (लघुमानव) प्रसन्न होकर हाथ हिलाते हैं।
नवनिर्माण की आशा: गर्मी और शोषण से झुलसे किसान बादलों को उम्मीद की नज़र से देखते हैं क्योंकि वर्षा ही उनके जीवन में हरियाली और समृद्धि लाती है।
क्रांति का लाभ: विप्लव का सबसे अधिक लाभ शोषित और दलित वर्ग को ही मिलता है, जो इस कविता का मूल स्वर है। Quick Tip: निराला की इस कविता में 'समीर सागर' और 'रण-भेरी' जैसे शब्दों का प्रयोग क्रांति के संदर्भ में हुआ है, जो गरीबों के हित में है।


Question 31:

तुलसीदास ने संसार के समस्त लीला प्रपंचों का आधार किसे तथा क्यों बताया है और इसका समाधान उन्होंने किस प्रकार सुझाया है ? लिखिए।

Correct Answer:
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तुलसीदास ने संसार के समस्त लीला प्रपंचों (कार्यों/व्यापारों) का मूल आधार 'पेट की आग' (भूख) को बताया है।

कारण: कवि के अनुसार, मजदूर, किसान, व्यापारी, चोर, बाजीगर यहाँ तक कि लोग अपनी संतान को बेचने जैसे अनैतिक कार्य भी केवल अपनी पेट की आग बुझाने के लिए करते हैं। संसार की हर गतिविधि के पीछे पापी पेट का ही हाथ है।
समाधान: तुलसीदास ने इसका एकमात्र समाधान 'राम-भक्ति' रूपी घनश्याम (बादल) को बताया है। उनके अनुसार, पेट की आग समुद्र की आग (बड़वानल) से भी बड़ी है, जिसे केवल राम की कृपा रूपी वर्षा ही शांत कर सकती है। Quick Tip: 'कवित्ताव-ली' के पदों में यथार्थवाद (Realism) और भक्ति (Devotion) का अद्भुत समन्वय है। 'दारिद-दसानन' (गरीबी रूपी रावण) रूपक का उल्लेख उत्तर को प्रभावी बनाएगा।


Question 32:

‘रक्षाबंधन की सुबह रस की पुतली’ रुबाइयाँ से उद्धृत इस पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि शायर ने राखी के कच्चे धागों और बिजली के लच्छों का भाई-बहन से क्या संबंध स्थापित किया है।

Correct Answer:
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शायर फिराक गोरखपुरी ने 'रुबाइयाँ' में रक्षाबंधन के पावन पर्व का बहुत ही कोमल चित्रण किया है।

स्नेह का बंधन: राखी के कच्चे धागे भाई-बहन के पवित्र और निश्छल प्रेम के प्रतीक हैं। ये धागे भले ही कच्चे (कोमल) हों, लेकिन प्रेम का बंधन अटूट है।
बिजली की चमक: 'बिजली के लच्छे' का प्रयोग राखी की चमक-दमक के लिए किया गया है। शायर ने संबंध स्थापित किया है कि जब बहन भाई की कलाई पर चमकती हुई राखी बांधती है, तो उस क्षण जो बिजली (खुशी/चमक) राखी के लच्छों में होती है, वही चमक भाई-बहन के प्रेम और आँखों में भी दिखाई देती है। यह संबंध अदृश्य किंतु प्रकाशमान है। Quick Tip: 'रस की पुतली' शब्द का प्रयोग बच्ची (बहन) के लिए किया गया है जो मिठास और आनंद का स्रोत है।


Question 33:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :


(i).
‘उषा’ कविता में भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौका क्यों कहा गया है ?

Correct Answer:
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कवि शमशेर बहादुर सिंह ने भोर (सूर्योदय से पूर्व) के आकाश को 'राख से लीपा हुआ चौका' इसलिए कहा है क्योंकि:
1. रंग की समानता: भोर के समय आकाश का रंग गहरा सलेटी (Gray) होता है, जो राख के रंग जैसा दिखता है।
2. पवित्रता और ताजगी: 'अभी गीला पड़ा है' – यह उपमान वातावरण में मौजूद नमी (ओस) और सुबह की पवित्रता को दर्शाता है, जैसे गाँव में रसोई (चौका) को लीपने के बाद वह ताजा और पवित्र लगता है। Quick Tip: यह एक 'बिंब' (Imagery) प्रधान कविता है। यहाँ 'राख' और 'गीलापन' ग्रामीण संस्कृति के जीते-जागते चित्र हैं।


Question 34:

जब शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति से उसके दुख के बारे में पूछा जाता है, तो वह अपने दुख को क्यों नहीं व्यक्त कर पाता ? ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के संदर्भ में लिखिए।

Correct Answer:
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शारीरिक चुनौती का सामना कर रहा व्यक्ति अपने दुख को इसलिए व्यक्त नहीं कर पाता क्योंकि:
1. संवेदनहीनता: मीडियाकर्मी उससे सहानुभूतिपूर्ण प्रश्न पूछने के बजाय क्रूर और बेतुके प्रश्न पूछते हैं, जिससे वह आहत और असहज हो जाता है।
2. प्रदर्शन का दबाव: उसे एहसास होता है कि उसका दुख केवल एक तमाशा (कार्यक्रम की टीआरपी) बनाने के लिए कुरेदा जा रहा है। कैमरा और रोशनी के सामने घबराहट और आत्मसम्मान पर चोट के कारण वह चुप रह जाता है। Quick Tip: कविता मीडिया की 'करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता' को उजागर करती है।


Question 35:

कोई बात पेचीदा कैसे हो जाती है ? ‘बात सीधी थी’ कविता के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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कुंवर नारायण के अनुसार, कोई भी सीधी-सादी बात तब पेचीदा (जटिल) हो जाती है जब हम उसे सरल शब्दों में कहने के बजाय चमत्कारपूर्ण, कठिन और भारी-भरकम शब्दों (भाषा के चक्कर) में फँसा देते हैं। अपनी विद्वता दिखाने के प्रयास में भाषा को तोड़ने-मरोड़ने से बात का मूल अर्थ खो जाता है और वह प्रभावहीन होकर उलझ जाती है। Quick Tip: 'बात की चूड़ी मर जाना' मुहावरे का अर्थ है बात का प्रभावहीन हो जाना। सहजता ही भाषा की शक्ति है।


Question 36:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :


(i).
‘आवश्यकता से अधिक खरीदारी ही बाज़ार में शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में तर्क सहित उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
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जैनेंद्र कुमार के 'बाज़ार दर्शन' पाठ के अनुसार यह कथन पूर्णतः सत्य है।

बाज़ारूपन: जब हम आवश्यकता से अधिक खरीदारी करते हैं, तो हम अपनी 'पर्चेजिंग पावर' (क्रय शक्ति) का प्रदर्शन करते हैं। इससे बाज़ार में 'बाज़ारूपन' बढ़ता है, जिसका अर्थ है कपट और शोषण।
महंगाई और अभाव: अनावश्यक मांग बढ़ने से वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, जो अंततः आम आदमी के शोषण का कारण बनते हैं।
सद्भाव की कमी: दुकानदार और ग्राहक के बीच 'मित्र' का संबंध न रहकर केवल 'लाभ-हानि' का संबंध रह जाता है, जहाँ एक की हानि में ही दूसरे का लाभ होता है। यही शोषण की जड़ है। Quick Tip: 'मनीबैग' या 'पैसे की गर्मी' जैसे शब्दों का प्रयोग उत्तर में करना इसे अधिक प्रभावी बनाता है।


Question 37:

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में अनावृष्टि को दूर करने के लिए अंतिम उपाय के रूप में क्या किया जाता है ? इस उपाय के प्रति लेखक के दृष्टिकोण के विषय में अपनी राय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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अंतिम उपाय: जब पूजा-पाठ और सारे वैज्ञानिक प्रयास विफल हो जाते थे, तब गाँव में 'इंदर सेना' (युवा लड़कों की टोली) घर-घर जाकर पानी मांगती थी। इस पानी को उन पर फेंका जाता था, जिसे वे इंद्रदेव को दिया गया अर्घ्य मानते थे ताकि बारिश हो।

लेखक का दृष्टिकोण: लेखक (धर्मवीर भारती) इसे तर्कहीन 'अंधविश्वास' और पानी की निर्मम बर्बादी मानते थे। उनकी वैज्ञानिक सोच कहती थी कि जब पहले से पानी की कमी है, तो बचे हुए पानी को भी कीचड़ में क्यों बहाया जाए? हालाँकि, जीजी के तर्कों के आगे उन्हें झुकना पड़ता था, जो इसे 'त्याग' और 'दान' मानती थीं। Quick Tip: पाठ में 'विज्ञान और विश्वास' (Science vs Faith) का द्वंद्व मुख्य विषय है। लेखक का मत विज्ञान के पक्ष में था।


Question 38:

‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि गाँव में फैली महामारी के समय प्रकृति भी मनुष्य के दुख में दुखी थी।

Correct Answer:
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फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी में महामारी के समय प्रकृति का चित्रण अत्यंत भयावह और शोकपूर्ण है, मानो वह भी मनुष्य के दुख में शामिल हो:

1. अमावस्या की रात: रातें इतनी अंधेरी और डरावनी होती थीं कि तारे भी अपनी रोशनी से धरती का दुख नहीं मिटा पाते थे।

2. सन्नाटा: चारों तरफ मृतवत सन्नाटा छाया रहता था। केवल सियारों का रोना और उल्लू की डरावनी आवाज़ें ही सुनाई देती थीं, जो शोक को गहरा करती थीं।

3. निस्तब्धता: गाँव के झोपड़ियों से कोई आवाज़ नहीं आती थी, यहाँ तक कि बीमार लोग कराहने की भी हिम्मत खो चुके थे। प्रकृति की यह नीरवता मनुष्य की बेबसी का प्रतिबिंब थी। Quick Tip: 'रात्रि की विभीषिका' और 'मृत्यु का सन्नाटा' जैसे वाक्यांशों का प्रयोग करें। केवल ढोलक की आवाज़ ही उस सन्नाटे को चुनौती देती थी।


Question 39:

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :


भक्तिन के संस्कार ऐसे हैं कि वह कारागार से वैसे ही डरती है, जैसे यमलोक से। ऊँची दीवार देखते ही वह आँख मूँदकर बेहोश हो जाना चाहती है। उसकी यह कमजोरी इतनी प्रसिद्धि पा चुकी है कि लोग मेरे जेल जाने की संभावना बता-बताकर उसे चिढ़ाते रहते हैं। वह डरती नहीं, यह कहना असत्य होगा; पर डर से भी अधिक महत्त्व मेरे साथ का ठहरता है। चुपचाप मुझसे पूछने लगती है कि वह अपनी कै धोती साबुन से साफ़ कर ले, जिससे मुझे वहाँ उसके लिए लज्जित न होना पड़े। क्या-क्या सामान बाँध ले, जिससे मुझे वहाँ किसी प्रकार की असुविधा न हो सके। ऐसी यात्रा में किसी को किसी के साथ जाने का अधिकार नहीं, यह आश्वासन भक्तिन के लिए कोई मूल्य नहीं रखता। वह मेरे न जाने की कल्पना से इतनी प्रसन्न नहीं होती, जितनी अपने साथ न जा सकने की संभावना से अपमानित।


(i).
भक्तिन किससे और कैसे डरती है ?

  • (A) लेखिका से यमराज की तरह
  • (B) ज़मींदार से यमराज की तरह
  • (C) कारागार से यमलोक की तरह
  • (D) पिंजड़े से बाघ की तरह
Correct Answer: (C) कारागार से यमलोक की तरह
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गद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट लिखा है: "भक्तिन... कारागार से वैसे ही डरती है, जैसे यमलोक से।" वह जेल की ऊँची दीवारों को देखकर ही बेहोश हो जाना चाहती है। Quick Tip: गद्यांश की पहली पंक्ति में ही उत्तर सीधा-सीधा दिया गया है।


Question 40:

‘ऐसी यात्रा में किसी को किसी के साथ जाने का अधिकार नहीं’ पंक्ति में ‘ऐसी यात्रा’ से अभिप्राय है :

  • (A) जेल यात्रा
  • (B) तीर्थ यात्रा
  • (C) अंतिम यात्रा
  • (D) शोभा यात्रा
Correct Answer: (A) जेल यात्रा
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गद्यांश में संदर्भ 'जेल जाने' का चल रहा है। लेखिका के जेल जाने की संभावना पर भक्तिन साथ जाना चाहती है। अतः 'ऐसी यात्रा' का अर्थ 'जेल यात्रा' है जहाँ कानूनन कोई सेवक साथ नहीं जा सकता। Quick Tip: हालाँकि 'अंतिम यात्रा' में भी कोई साथ नहीं जाता, लेकिन यहाँ प्रसंग (Context) जेल का है, मृत्यु का नहीं।


Question 41:

निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए :

  • (A) भक्तिन के मन में कारागार का कोई डर नहीं।
  • (B) भक्तिन के मन में कारागार से भी बड़ा डर लेखिका का साथ छूटने का है।
  • (C) भक्तिन के मन में कारागार से बड़ा कोई डर नहीं है।
  • (D) भक्तिन कारागार छोड़कर, सब जगह लेखिका के साथ जाना चाहती है।
Correct Answer: (B) भक्तिन के मन में कारागार से भी बड़ा डर लेखिका का साथ छूटने का है।
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गद्यांश में लिखा है: "वह डरती नहीं, यह कहना असत्य होगा; पर डर से भी अधिक महत्त्व मेरे साथ का ठहरता है।" इसका अर्थ है कि यद्यपि वह जेल से डरती है, लेकिन लेखिका से अलग होने का डर उस डर से भी बड़ा है, इसलिए वह जेल जाने को भी तैयार हो जाती है। Quick Tip: भक्तिन का समर्पण (Devotion) ही उसका सबसे बड़ा गुण है, जो भय पर भी विजय पा लेता है।


Question 42:

गद्यांश के आधार पर भक्तिन की चारित्रिक विशेषताओं के संदर्भ में कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :


  • (A) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (B) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • (C) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
  • (D) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
Correct Answer: (A) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
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विश्लेषण:


1. भक्तिन की निडरता: गद्यांश कहता है, "वह डरती नहीं, यह कहना असत्य होगा"। अर्थात वह निडर नहीं है। (1-iii)
2. सामान का बाँधना: लेखिका को असुविधा न हो इसलिए सामान बाँधना उसकी व्यवस्था/योजना को दर्शाता है, जिसे प्रबंध कौशल कहा जा सकता है। (2-i)
3. लेखिका के साथ न जा पाना: गद्यांश की अंतिम पंक्ति कहती है, "...अपने साथ न जा सकने की संभावना से अपमानित।" (3-ii)

अतः विकल्प (A) सही है। Quick Tip: सुमेलित करते समय सबसे स्पष्ट जोड़ी को पहले मिलाएँ। 'साथ न जा पाना = अपमानित' गद्यांश के अंत में साफ लिखा है।


Question 43:

गद्यांश का केन्द्रीय भाव हो सकता है :

  • (A) भक्तिन की दूरदर्शिता
  • (B) महादेवी के प्रति आत्मीयता
  • (C) भक्तिन का कारावास से भय
  • (D) भक्तिन का प्रबंध-कौशल
Correct Answer: (B) महादेवी के प्रति आत्मीयता
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इस गद्यांश का मूल केंद्र बिंदु भक्तिन का लेखिका (महादेवी) के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण है। वह जेल जैसे भयानक स्थान (यमलोक) जाने को भी तैयार है, केवल इसलिए क्योंकि वह लेखिका का साथ नहीं छोड़ना चाहती। यह उसकी आत्मीयता और स्वामी-भक्ति को दर्शाता है। Quick Tip: केंद्रीय भाव हमेशा गद्यांश के भावनात्मक पक्ष (Emotional Core) को दर्शाता है।


Question 44:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :


(i).
यशोधर बाबू के परिवार में विचारों की भिन्नता के बावजूद अधिकांश एक ही छत के नीचे रह रहे हैं – इसका क्या कारण रहा होगा ? क्या वर्तमान परिवारों में भी यह परंपरा देखी जा सकती है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
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यशोधर बाबू ('सिल्वर वेडिंग' कहानी के मुख्य पात्र) पारंपरिक मूल्यों वाले व्यक्ति हैं, जबकि उनका परिवार (पत्नी और बच्चे) आधुनिक विचारों का समर्थक है। विचारों में भारी मतभेद और आए दिन की कलह के बावजूद वे एक ही छत के नीचे रहते हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. परंपरा और संस्कार: यशोधर बाबू भारतीय संयुक्त परिवार परंपरा में विश्वास रखते हैं और परिवार को टूटने से बचाना अपना कर्तव्य मानते हैं।

2. आर्थिक निर्भरता: यद्यपि बच्चे कमाऊ हैं, फिर भी पिता का घर एक सुरक्षित आश्रय है।

3. सामाजिक प्रतिष्ठा: समाज में परिवार की एकता बनाए रखना प्रतिष्ठा का विषय होता है।


वर्तमान संदर्भ: हाँ, आज भी कई भारतीय परिवारों में यह देखा जा सकता है। इसे 'समझौता' या 'Adjustment' कहा जा सकता है जहाँ भावात्मक जुड़ाव कम होने पर भी सुविधा, सुरक्षा या सामाजिक दबाव के कारण लोग साथ रहते हैं। हालाँकि, एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ने से यह परंपरा अब धीरे-धीरे कम हो रही है।
Quick Tip: उत्तर में 'पीढ़ी का अंतराल' (Generation Gap) और 'संक्रमण काल' (Transitional Phase) जैसे शब्दों का प्रयोग करें।


Question 45:

कथानायक को अपने मनचाहे लक्ष्य तक पहुँचाने में आप सर्वाधिक योगदान किसका मानते हैं और क्यों ? ‘जूझ’ पाठ के आधार पर तर्कपूर्ण ढंग से अपने विचार लिखिए।

Correct Answer:
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'जूझ' आत्मकथात्मक उपन्यास अंश में कथानक (आनंदा) को उसके लक्ष्य (कवि बनने/शिक्षा प्राप्त करने) तक पहुँचाने में सर्वाधिक योगदान उसके मराठी शिक्षक श्री सौंदलगेकर का है।

कारण:

1. प्रेरणा का स्रोत: सौंदलगेकर मास्टर जी ने ही आनंदा को कविता पढ़ने और रचने की कला सिखाई। उन्होंने उसे बताया कि कविता अपने आस-पास के जीवन पर भी रची जा सकती है।

2. आत्मविश्वास जगाना: उन्होंने आनंदा की तुतलाती कविताओं की प्रशंसा की, उसे छंद, लय और अलंकार का ज्ञान दिया और भरी कक्षा में उससे कविता पाठ करवाया।

3. गुरु का सानिध्य: उन्होंने आनंदा को एक 'कवि' की दृष्टि दी, जिससे वह अकेलेपन में भी खेतों में काम करते हुए भैंस की पीठ पर कविता लिखने लगा।
यद्यपि माँ और दत्ता जी राव ने स्कूल भेजने में मदद की, लेकिन उसके व्यक्तित्व निर्माण और लेखक बनने में शिक्षक की भूमिका ही सर्वोपरि थी।
Quick Tip: 'गुरु-शिष्य परंपरा' और 'प्रोत्साहन' का महत्त्व इस उत्तर का मुख्य आधार है।


Question 46:

खुदाई में मिले अवशेषों के आधार पर क्या सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ कहा जा सकता है ? पक्ष या विपक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।

Correct Answer:
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हाँ, 'अतीत में दबे पाँव' पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता (विशेषकर मोहनजोदड़ो) को निश्चित रूप से 'जल-संस्कृति' कहा जा सकता है। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क हैं:

1. नदी तट पर बसावट: यह सभ्यता सिंधु नदी के किनारे फली-फूली।

2. अद्भुत जल-निकासी (Drainage): यहाँ की नालियाँ पक्की ईंटों से ढकी हुई थीं और एक सुव्यवस्थित ग्रिड प्लान के तहत बनी थीं, जो आज भी बेजोड़ है।

3. महाकुंड (Great Bath): मोहनजोदड़ो में मिला विशाल स्नानागार (महाकुंड) सामूहिक स्नान और अनुष्ठानों के लिए जल के महत्त्व को दर्शाता है।

4. कुओं का जाल: अकेले मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुएँ मिले हैं, जो इसे 'कुओं का शहर' बनाते हैं। हर घर में स्नानघर होना भी जल के प्रति उनकी जागरूकता को सिद्ध करता है।

इन प्रमाणों से स्पष्ट है कि जल का प्रबंधन और उपयोग इस सभ्यता की जीवन-शैली का अभिन्न अंग था।
Quick Tip: 'जल प्रबंधन' (Water Management) सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान है। उत्तर में 700 कुओं का आँकड़ा अवश्य लिखें।


Question 47:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :


(i).
शिरीष और कबीर दोनों को हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने एक ही श्रेणी में किस आधार पर रखा है ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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द्विवेदी जी ने शिरीष के फूल और कबीरदास दोनों को 'अवधूत' (मस्तमौला/संन्यासी) की श्रेणी में रखा है।
आधार:

1. मस्ती और फक्कड़पन: दोनों ही विषम परिस्थितियों में भी मस्त और बेपरवाह रहते हैं।

2. जीजीविषा: जैसे शिरीष भीषण गर्मी और लू में भी हरा-भरा रहकर कोमल फूल देता है, वैसे ही कबीर भी सांसारिक संघर्षों के बीच अनासक्त रहकर जीवन रस (ज्ञान) बाँटते हैं। दोनों अजेय जीवन-शक्ति के प्रतीक हैं।
Quick Tip: 'अवधूत' शब्द कीवर्ड है। इसका अर्थ है जो सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठ चुका हो।


Question 48:

‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ — शीर्षक पाठ में अंबेडकर ने आदर्श-समाज का आधार किन तत्त्वों को माना है ? उनके अनुसार लोकतंत्र में क्या भाव होने चाहिए ?

Correct Answer:
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डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आदर्श समाज का आधार तीन तत्त्वों को माना है:
स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व (भाईचारा)।

लोकतंत्र केवल शासन की पद्धति नहीं है, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति है। उनके अनुसार लोकतंत्र में 'दूध-पानी के मिश्रण' जैसा भाईचारा होना चाहिए, जहाँ समाज के सभी वर्गों में परस्पर सम्मान और संपर्क बना रहे। जाति-पाति की दीवारें नहीं होनी चाहिए। Quick Tip: फ्रांसीसी क्रांति का नारा 'Liberty, Equality, Fraternity' (स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व) ही अंबेडकर के आदर्श समाज का आधार है।


Question 49:

भक्तिन का कौन-सा गुण विस्मित कर देने वाला था और क्यों ?

Correct Answer:
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भक्तिन का सबसे विस्मित (हैरान) कर देने वाला गुण उसकी तर्क-शक्ति और अपनी बात को न्यायसंगत ठहराने की कला थी। वह किसी भी बात को अपने अनुकूल ढालने में माहिर थी। उदाहरण के लिए, जब लेखिका उसे सिर मुंडाने से रोकती, तो वह शास्त्रों का हवाला देकर कहती, "तीरथ गए मुंडाए सिद्ध"। वह झूठ को भी सत्य साबित करने के लिए सौ तर्क दे सकती थी, जिससे लेखिका भी निरुत्तर हो जाती थी। Quick Tip: भक्तिन अनपढ़ होते हुए भी व्यावहारिक बुद्धि (Street Smartness) में बहुत तेज थी।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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