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Dipanwita Pramanik

Content Writer | Updated On - Sep 19, 2025

CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 1 - 2/1/1) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 1 - 2/1/1) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solutions Set 1 - 211


Question 1:

रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?

Correct Answer:
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रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का मूल कारण है मनुष्य का अपने ही विचारों की प्रतिक्रिया से घिर जाना।

वह अपने विचारों को वास्तविकता मान बैठता है और उनके अनुसार ही दुख, असंतोष, क्रोध आदि में उलझ जाता है।

इससे वह वर्तमान को नहीं देख पाता और विचारों की भूलभुलैया में उलझकर जीवन को कठिन और जटिल बना लेता है।
Quick Tip: उत्तर देते समय लेखक का नाम आने पर उसके विचारों का सार स्पष्ट शब्दों में लिखें।


Question 2:

‘दो रंग जुड़ते हैं तो एक नया ही रंग बन जाता है’ — पंक्ति का क्या आशय है ?

Correct Answer:
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इस पंक्ति का आशय यह है कि विरोधी या भिन्न तत्वों के मेल से भी कुछ नया, सुंदर और सार्थक जन्म लेता है।

यह जीवन का संकेत है कि केवल समानताओं से नहीं, विविधताओं के मेल से ही समग्रता आती है।

यह कथन सांप्रदायिक सौहार्द, सह-अस्तित्व और विविधता में एकता की भावना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: पंक्तियों के अर्थ बताते समय केवल शब्दार्थ नहीं, भावार्थ को केंद्र में रखें।


Question 3:

‘प्रकृति हर दिन होली खेलती है’ — से क्या अभिप्राय है ? इसके माध्यम से क्या संदेश दिया गया है ?

Correct Answer:
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इसका अभिप्राय है कि प्रकृति प्रत्येक दिन रंगों का उत्सव मनाती है — जैसे सूर्योदय-सूर्यास्त, मौसम, आकाश, फूलों आदि के विविध रंग।

लेखक बताना चाहता है कि हमें भी जीवन में रोज़ कुछ नया देखना, अनुभव करना और उत्सव की भावना अपनानी चाहिए।

इसका संदेश है कि जीवन को रंगों और आनंद से भरपूर बनाया जा सकता है अगर हम देखने का दृष्टिकोण बदलें।
Quick Tip: जब प्रश्न दो भागों में हो (अभिप्राय और संदेश), तो दोनों का उत्तर अलग पैराग्राफ में दें।


Question 4:

‘‘है दीप एक ....... सूर्य से भी भारी’’ — पंक्ति का आशय है —

  • (A) एक अकेली ज्योति व्यक्ति, संपूर्ण सौरजगत को भी रोशन करने में समर्थ है।
  • (B) सूर्य की तुलना दीपक के प्रकाश से अधिक शक्तिशाली व्यक्ति बनने से सम्बन्ध है।
  • (C) दीपक अपने प्रकाश से सूर्य को चुनौती देता है और भव्य बन जाता है।
  • (D) एक व्यक्ति अकेला ही संसार में अंधकार मिटा सकता है अगर भावनाएं पवित्र रहती हैं।
Correct Answer: (A) एक अकेली ज्योति व्यक्ति, संपूर्ण सौरजगत को भी रोशन करने में समर्थ है।
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यह पंक्ति एक रूपक के रूप में प्रयुक्त हुई है, जहाँ ‘‘दीप’’ व्यक्ति का प्रतीक है और ‘‘सूर्य’’ बाह्य जगत की विशालता और शक्तियों का।

यहाँ कवि यह कह रहा है कि एक अकेला व्यक्ति भी अगर संकल्पशील हो, तो वह संसार के विशालतम शक्तियों से भी अधिक प्रभावी कार्य कर सकता है।

दीपक, जो अपेक्षाकृत छोटा है, फिर भी अपने प्रकाश से अंधकार मिटाता है — उसी प्रकार एक सच्चा, जागरूक, सत्पथ पर चलने वाला व्यक्ति भी समाज में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

पंक्ति का आशय यह नहीं कि दीपक सूर्य से भौतिक रूप में भारी है, बल्कि यह मानवीय ऊर्जा, आस्था और प्रेरणा की महत्ता को दर्शाता है।


प्रश्न विश्लेषण:

(A) यह विकल्प भावार्थ के सबसे निकट है — क्योंकि यह “दीप” को व्यक्ति के रूप में रूपांतरित करता है।

(B) सूर्य की तुलना की जगह व्यक्ति के महत्व पर जोर देना आवश्यक है, जो इसमें नहीं है।

(C) यह पंक्ति के मूल भाव से भटकाव करता है, अतः यह अतिशयोक्ति है।

(D) यह भी आंशिक रूप से सही है, परंतु विकल्प (A) भाव के निकटतम है।
Quick Tip: जब कोई पंक्ति प्रतीकात्मक हो, तो उसके शब्दों के पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझें और विकल्पों में उसी के अनुरूप उत्तर चुनें।


Question 5:

‘इंसानी जीवन की रात मिटा’ — से क्या अभिप्राय है ?

  • (A) शोषित वर्ग के जीवन से रात्रि को दूर करना
  • (B) शोषित वर्ग के घरों को प्रकाशित करना
  • (C) इंसानों के जीवन से अंधकार को दूर करना
  • (D) शोषित वर्ग के अभावों को दूर कर, उन्हें अधिकार देना
Correct Answer: (D) शोषित वर्ग के अभावों को दूर कर, उन्हें अधिकार देना
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पंक्ति ‘‘इंसानी जीवन की रात मिटा’’ का अर्थ केवल भौतिक रात्रि का अंत नहीं है, बल्कि यह एक गहरा रूपक है जो शोषित, पीड़ित, और वंचित वर्गों के जीवन में व्याप्त अज्ञानता, असमानता और अभाव के अंधकार को इंगित करता है।

‘‘रात’’ यहाँ अज्ञान, दरिद्रता, सामाजिक भेदभाव और अधिकारों से वंचितता का प्रतीक है।

इसलिए जब कवि कहता है कि ‘‘इंसानी जीवन की रात मिटा’’, तो उसका आशय यह है कि— समाज को ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे वंचित वर्गों को समान अधिकार, संसाधन और सम्मान मिले।


प्रश्न विश्लेषण:

(A) केवल ‘‘रात्रि को दूर करना’’ एक सतही और भौतिक व्याख्या है।

(B) घरों को प्रकाशित करना केवल प्रतीकात्मक रूप से सीमित अर्थ है।

(C) यह उत्तर भी निकट है, परंतु इसमें ‘‘शोषित वर्ग’’ पर स्पष्ट ध्यान नहीं है।

(D) यह उत्तर सबसे सटीक और व्यापक है — क्योंकि यह अधिकार देने की सामाजिक चेतना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: जब प्रश्न में ‘अभिप्राय’ पूछा जाए, तो प्रतीक के पीछे छिपे सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक अर्थों को केंद्र में रखें।


Question 6:

कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुसंगत कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:



\begin{tabular{|l|l|
\hline
कॉलम-1 & कॉलम-2

\hline
(क) मध्यम दीपक & (1) लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन

(ख) झंझापथ & (2) विपरीत परिस्थितियाँ

(ग) आहत पद & (3) घायल अंग

\hline
\end{tabular

  • (A) क-2, ख-3, ग-1
  • (B) क-1, ख-2, ग-3
  • (C) क-3, ख-1, ग-2
  • (D) क-1, ख-3, ग-2
Correct Answer: (B) क-1, ख-2, ग-3
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इस प्रकार के प्रश्नों में प्रतीकों या पदों के भावार्थ का विश्लेषण करना आवश्यक होता है:

(क) मध्यम दीपक — लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन:

यह दीपक की सीमित ज्योति को प्रतीक बनाकर उस प्रयास को दर्शाता है जो सीमित साधनों के बावजूद लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग बनाती है।

अतः इसका मेल (1) से है।


(ख) झंझापथ — विपरीत परिस्थितियाँ:

‘झंझा’ अर्थात तूफान और ‘पथ’ यानी रास्ता, यह कठिन और संघर्षमय मार्ग का संकेत है।

अतः यह (2) के अनुकूल है।


(ग) आहत पद — घायल अंग:

‘आहत पद’ सीधे तौर पर चोटिल या ज़ख्मी पैर को दर्शाता है — जो ‘घायल अंग’ का प्रतीक है।

इसलिए यह (3) से मेल खाता है।


इस प्रकार सभी युग्म सटीक हैं:

क-1, ख-2, ग-3
Quick Tip: मिलान वाले प्रश्नों में सबसे पहले सभी पदों के भावार्थ को स्पष्ट रूप से समझें — फिर मिलान करें, यह त्रुटि की संभावना को कम करता है।


Question 7:

“इंसान स्वयं सवेरा का रूप धारण कर आ रहा है” — पंक्ति के माध्यम से किसे क्या चेतावनी दी गई है ?

Correct Answer:
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यह पंक्ति प्रतीकात्मक रूप में अंधकार के प्रतीकों को चेतावनी देती है कि अब इंसान स्वयं प्रकाश, परिवर्तन और नवजागरण का रूप धारण कर आ गया है।

‘‘सवेरा’’ यहाँ नवचेतना, नई सोच और नई सामाजिक क्रांति का प्रतीक है।

इसका आशय है कि — अब कोई भी अन्याय, शोषण या अज्ञानता का अंधकार टिकने वाला नहीं, क्योंकि जनमानस स्वयं बदलाव लाने को तैयार है।

यह चेतावनी है उन सभी शक्तियों को जो अंधकार, अन्याय और शोषण के पक्षधर हैं।
Quick Tip: जब प्रश्न ‘किसे चेतावनी दी गई है’ पूछे, तो उत्तर में चेतावनी प्राप्तकर्ता और चेतावनी का उद्देश्य दोनों स्पष्ट करें।


Question 8:

‘‘वनखंड जलाती है एक चिनगारी’’ — पंक्ति से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
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इस पंक्ति का आशय यह है कि छोटी-सी घटना, भावना या विचार भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन ला सकता है।

‘‘एक चिनगारी’’ यहाँ प्रतीक है — क्रांति, आक्रोश या जागरूकता के छोटे बीज का, जो पूरे समाज को आंदोलित कर सकता है।

जैसे एक छोटी चिनगारी पूरे जंगल को जला सकती है, वैसे ही एक सजग विचार, एक सत्य भाषण या छोटा विद्रोह भी पूरे तंत्र को बदल सकता है।

यह पंक्ति चेतावनी और प्रेरणा दोनों है — कि किसी को भी छोटा या तुच्छ न समझा जाए।
Quick Tip: जब कोई रूपक दिया गया हो, तो उसके वास्तविक प्रभाव और भावनात्मक असर को व्याख्या में शामिल करें।


Question 9:

‘‘इंसानी युग आने और स्वर्ग के दो कदम दूर रह जाने’’ — से क्या आशय है ?

Correct Answer:
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इस पंक्ति का आशय यह है कि यदि मनुष्य मानवता, करुणा, और समानता के मार्ग पर चलता रहे, तो वह स्वर्ग-सदृश संसार की रचना कर सकता है।

“इंसानी युग” अर्थात ऐसा काल जहाँ मानव के भीतर की श्रेष्ठतम संवेदनाएँ हावी हों — और स्वर्ग से तात्पर्य है शांति, समता और प्रेमपूर्ण जीवन।

पंक्ति संकेत करती है कि मनुष्य स्वर्ग जैसी स्थिति तक पहुँचने के बहुत करीब है, लेकिन वह अंतिम दो कदम — यानी आत्म-नियंत्रण, सत्य और सेवा — अभी उठाने बाकी हैं।
Quick Tip: जब पंक्ति में “दूर रह जाना” या “निकटता” की बात हो, तो उसके पीछे की अधूरी प्रक्रिया या चेतावनी को ज़रूर स्पष्ट करें।


Question 10:

राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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सर्दी की एक खुशनुमा सुबह थी। हम सब परिवार के साथ जयपुर से दिल्ली लौट रहे थे। पिताजी हाइवे पर गाड़ी चला रहे थे — चारों ओर खेतों की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और तेज़ गति से दौड़ती हमारी कार। सबकुछ एकदम सामान्य था कि अचानक...

गाड़ी “खर्र...खर्र...” की आवाज़ के साथ बंद हो गई।

हाइवे पर ऐसी स्थिति बहुत विचित्र और असहज होती है। चारों ओर तेज़ रफ्तार गाड़ियाँ और हमारी गाड़ी बगल में एक ओर रुकी हुई — मानो किसी युद्ध के बीच ठहरा हुआ सिपाही।


पिताजी उतरकर बोनट खोलते हैं। मम्मी चिंतित चेहरा लिए बैठी हैं, और मैं मोबाइल से सिग्नल खोजने की कोशिश कर रहा हूँ। हाइवे के उस एकांत मोड़ पर ना कोई मिस्त्री, ना पेट्रोल पंप और न ही कोई दुकान। गाड़ी की चुप्पी ने वातावरण को और रहस्यमय बना दिया।


तभी दूर से एक ट्रक आकर रुकता है। उसमें से एक बुज़ुर्ग ड्राइवर नीचे उतरते हैं और बिना कहे पिताजी की मदद करने लगते हैं। उनके पास एक साधारण टूलबॉक्स होता है, और कुछ ही मिनटों में गाड़ी फिर से स्टार्ट हो जाती है।


हम सबने मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया, और पिताजी की आँखों में वह नम चमक थी — "अजनबी भी कभी-कभी सबसे अपने हो जाते हैं।"


उस दिन समझ में आया कि हाइवे केवल मंज़िल तक नहीं ले जाता — वह इंसानियत, धैर्य और भरोसे की राह भी बनाता है।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में कल्पना, भावनाएँ और एक घटना के माध्यम से पाठक को अंत तक बाँधे रखना आवश्यक होता है। अंत में कोई नैतिक या भावनात्मक निष्कर्ष ज़रूर जोड़ें।


Question 11:

बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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शादी शब्द सुनते ही मेरे मन में उत्सव, हँसी, हलचल और ढेर सारी मिठास घुल जाती है। लेकिन जब शादी अपने बड़े भाई की हो, तो यह उत्सव मेरे जीवन का एक सबसे खास अनुभव बन जाता है।

मैं न सिर्फ एक मेहमान था, बल्कि आयोजक, संदेशवाहक, सजावटकर्ता, और सबसे ज़रूरी — भाई का दाहिना हाथ भी।


भाई की बारात से पहले ही घर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। मैं हर रिश्तेदार की “तू ही बता” सूची में सबसे ऊपर था — किसी को चाय चाहिए तो किसी को माला, किसी को होटल पहुँचना था तो किसी को मेहंदीवाली बुलानी थी।

मेरी भूमिका थी — हर परेशानी से पहले उसका हल ढूँढ लेना।

संगीत की रात को मैंने खुद ही सबका डांस कोऑर्डिनेट किया और भाई के लिए एक छोटा सा सरप्राइज़ परफ़ॉर्मेंस भी रखा।

सबसे ज्यादा मज़ा तो वरमाला के समय जूता चुराई में आया — बहनों की टीम से भिड़कर जूता लेकर भागना और फिर मोलभाव करना, यह एक अलग ही रोमांच था।


शादी के हर पल में मैं इतना व्यस्त था कि खुद को भूल बैठा। लेकिन जब विदाई के समय भाई ने गले लगाकर कहा —

“तेरे बिना यह शादी अधूरी रह जाती।”

तो मेरी सारी थकान और चिंता एक मुस्कान में बदल गई।


यह शादी सिर्फ भाई की नहीं थी, यह मेरे रिश्तों की, ज़िम्मेदारी की और जीवन के नए रंगों की शुरुआत थी।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में निजी अनुभवों को जीवंत चित्रों और भावनात्मक घटनाओं के साथ प्रस्तुत करें — यह लेख को प्रभावशाली बनाता है।


Question 12:

जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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एक समय था जब सुबह की शुरुआत कोयल की कूक, गौरैया की चहचहाहट और खेतों में दौड़ते हिरणों की छवि से होती थी। लेकिन आज?

हमने विकास के नाम पर प्रकृति की सबसे सुंदर रचना — जीव-जंतुओं — को धीरे-धीरे मिटा दिया।

अब शहरों में गौरैया ढूँढना दुर्लभ है, जंगलों में बाघ गिने-चुने रह गए हैं, और कई पक्षियाँ हमारे नाम तक भूल गई हैं।


बचपन में जब दादी कहानियाँ सुनाती थीं, तो उनमें शेर, सियार, तोता, हाथी, साँप सब जीवंत होते थे। आज वही कहानियाँ बच्चों को कल्पना लगती हैं, हकीकत नहीं।

हमने अपने लालच में जंगल काट डाले, जलाशय सुखा दिए, और रासायनिक खेती से ज़मीन को ज़हर बना दिया — और इसके साथ ही हमने अनजाने में कई प्रजातियों को समाप्ति की कगार पर पहुँचा दिया।


क्या हम भूल गए हैं कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है?

यह पेड़ों, पक्षियों, जलचर, नभचर और धरती पर रेंगते हर प्राणी की है।

यदि जीव-जंतु नहीं होंगे, तो पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) असंतुलित हो जाएगा — और इसका प्रभाव अंततः हमारे अस्तित्व पर भी पड़ेगा।


अब भी समय है — हम प्रकृति से जुड़ें, जैव विविधता को बचाएँ, पक्षियों के लिए पानी रखें, जंगलों को काटने से रोकेँ और बच्चों को उनके अधिकारों सहित इन प्राणियों से भी परिचित कराएँ।

हम जितनी जल्दी यह समझेंगे कि ‘उनका जीवन भी हमारा जीवन है’, उतना ही सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।
Quick Tip: पर्यावरण संबंधी लेखों में आँकड़ों से अधिक भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखें।


Question 13:

“जिन विचारों को कह डालना हमारे लिए कठिन नहीं होता, उन्हें लिख डालने का नियंत्रण एक चुनौती की तरह लगता है” क्यों ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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बोलना एक सहज प्रक्रिया है, जिसमें भावनाएँ, स्वर और मुद्राएँ विचारों को अभिव्यक्त करने में सहायता करती हैं। लेकिन लेखन एक अनुशासित, संरचित और शांत प्रक्रिया है।

जब हम विचारों को लिखते हैं, तो हमें शब्दों का चयन, व्याकरण, क्रमबद्धता, और अर्थ की सटीकता का ध्यान रखना पड़ता है।

लेखन में आत्मनियंत्रण की ज़रूरत होती है — क्योंकि वही विचार जो मौखिक रूप से सरल लगते हैं, वे लिखते समय बार-बार संशोधन माँगते हैं।

इसलिए, लेखन केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि संयम, स्पष्टता और अनुशासन का माध्यम बन जाता है।
Quick Tip: बोलने और लिखने के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण और भाषा की बारीकियों का ज़िक्र ज़रूर करें।


Question 14:

रेडियो नाटक में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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रेडियो नाटक दृश्यहीन माध्यम है, जहाँ श्रोता केवल सुनकर पूरी घटना को कल्पना में गढ़ता है। ऐसे में संवादों की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।

संवाद न केवल पात्रों की भावनाएँ प्रकट करते हैं, बल्कि स्थान, वातावरण, घटना की तीव्रता और गति भी निर्धारित करते हैं।

रेडियो नाटक में संवाद ही दृश्य का स्थान लेते हैं, और उनकी आवाज़, ठहराव, और लय से श्रोता दृश्य की अनुभूति करता है।
Quick Tip: रेडियो नाटक में संवाद केवल संवाद नहीं, बल्कि दृश्य का माध्यम होते हैं — इस बिंदु को केंद्र में रखें।


Question 15:

उल्टा पिरामिड शैली के विकास की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।

Correct Answer:
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उल्टा पिरामिड शैली पत्रकारिता में प्रयुक्त एक लेखन पद्धति है, जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण जानकारी पहले दी जाती है और उसके बाद सहायक विवरण आते हैं।

इस शैली का विकास 19वीं शताब्दी में टेलीग्राफ के प्रयोग के साथ हुआ, जब समाचार संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से भेजने की ज़रूरत थी।

इस शैली में प्रमुख तथ्य (कब, कहाँ, क्या, क्यों, कैसे) शुरू में दिए जाते हैं, ताकि पाठक कम समय में पूरी खबर की मूल बात समझ सके।
Quick Tip: उत्तर में शैली के इतिहास, उपयोग और उद्देश्य तीनों बिंदुओं को ज़रूर शामिल करें।


Question 16:

आर्थिक मामलों के पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती क्या है ?

Correct Answer:
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आर्थिक पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती है — जटिल आर्थिक तथ्यों को सरल, स्पष्ट और निष्पक्ष रूप में प्रस्तुत करना।

अर्थव्यवस्था से जुड़े विषय जैसे बजट, मुद्रास्फीति, शेयर बाज़ार, जीडीपी आदि आम जनता के लिए कठिन हो सकते हैं। पत्रकार को इन्हें इस प्रकार प्रस्तुत करना होता है कि न तो तथ्यों की सटीकता कम हो, न ही समझने में कठिनाई हो।

इसके अलावा, राजनीतिक और कॉर्पोरेट दबाव भी एक बड़ी चुनौती है जो निष्पक्ष रिपोर्टिंग में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
Quick Tip: जब “सबसे बड़ी चुनौती” पूछा जाए, तो केवल समस्या नहीं, उसके कारण और प्रभाव भी उल्लेख करें।


Question 17:

इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की तुलना में मुद्रित माध्यम के पाठकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं ?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यम जैसे समाचार पत्र और पत्रिकाएँ पाठकों को अनेक विशेष सुविधाएँ प्रदान करते हैं:


स्थायित्व: एक बार पढ़ी गई खबर को बार-बार पढ़ा जा सकता है।
गहराई: मुद्रित लेखन अधिक विश्लेषणात्मक और संतुलित होता है।
विश्वसनीयता: प्रूफरीडिंग और संपादन के कारण इसकी विश्वसनीयता अधिक होती है।
संग्रहणीयता: मुद्रित सामग्री को संग्रह किया जा सकता है भविष्य के उपयोग हेतु।
विज्ञापन या शोर से मुक्ति: इसमें विज़ुअल डिस्ट्रैक्शन कम होते हैं।


इसके विपरीत, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम अधिक त्वरित लेकिन कभी-कभी सतही होते हैं।
Quick Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में दोनों पक्षों को स्पष्ट करते हुए मुद्रित माध्यम की विशेषताओं को बिंदुवार लिखें।


Question 18:

व्यक्तिचित्र फीचर को रोचक, पठनीय और प्रभावशाली रूप में किस प्रकार तैयार किया जा सकता है ?

Correct Answer:
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व्यक्तिचित्र (Personality Feature) को रोचक, पठनीय और प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:


साक्षात्कार आधारित प्रस्तुति: व्यक्ति से लिए गए सजीव उद्धरण लेख को विश्वसनीय बनाते हैं।
वैयक्तिक अनुभव: लेखक यदि उस व्यक्ति से जुड़ा रहा हो, तो लेख में आत्मीयता आती है।
संदर्भ निर्माण: उसका सामाजिक, राजनीतिक या सांस्कृतिक योगदान स्पष्ट करना चाहिए।
भाषा का प्रवाह: लेख की भाषा संवादात्मक, सहज और चित्रात्मक होनी चाहिए।
कथात्मक शैली: जीवन की घटनाओं को कथा शैली में प्रस्तुत करने से पाठक जुड़ाव महसूस करता है।


इस प्रकार व्यक्तिचित्र फीचर तथ्यों के साथ भावना, शैली के साथ संवेदना और शोध के साथ प्रस्तुति का सुंदर समन्वय होना चाहिए।
Quick Tip: व्यक्तिचित्र केवल जीवनी नहीं — एक जीवंत चित्र है, जिसमें पाठक उस व्यक्ति से जुड़ता है।


Question 19:

संवाददाता और विशेष संवाददाता के बीच के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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संवाददाता वह होता है जो दैनिक समाचार, घटनाएँ, प्रेस विज्ञप्तियाँ, सामान्य गतिविधियों की रिपोर्टिंग करता है। वहीं, विशेष संवाददाता किसी विशेष क्षेत्र (जैसे न्याय, रक्षा, विदेश नीति) में विशेषज्ञता रखता है और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग करता है।


मुख्य अंतर:


संवाददाता — हर क्षेत्र की सामान्य रिपोर्टिंग करता है।

विशेष संवाददाता — किसी एक विषय पर विशेष अध्ययन व अनुभव के साथ गहराई से रिपोर्ट करता है।



उदाहरण:


संवाददाता: विधानसभा की दैनिक कार्रवाई का विवरण देना।

विशेष संवाददाता: बजट पर विस्तृत विश्लेषण देना या सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का प्रभाव बताना।
Quick Tip: अंतर बताने वाले प्रश्नों में परिभाषा + तुलना + उदाहरण का त्रिक सबसे प्रभावी होता है।


Question 20:

कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण किस प्रकार किया जा सकता है ?

Correct Answer:
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कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण करते समय लेखक को यह ध्यान रखना चाहिए कि पात्रों का वास्तविक स्वभाव, संवाद शैली, व्यवहार और मनोभाव नाटक के मंच पर भी उसी तरह जीवंत हों। रूपांतरण हेतु:


पात्रों के संवादों को नाटकीय भाषा में ढालना।
आंतरिक मनोवृत्तियों को अभिनय योग्य रूप में व्यक्त करना।
नायक, खलनायक, सहायक पात्र — सभी के मध्य संतुलन बनाए रखना।
मंचीय निर्देश (Stage Directions) का समुचित उपयोग करना।
दृश्यविधान और पात्रों के प्रवेश-निर्गमन की योजना स्पष्ट होनी चाहिए।


कथा से नाटक बनाते समय पात्रों के चरित्र-निर्माण में गहराई और संवादों में सजीवता अत्यंत आवश्यक होती है।
Quick Tip: रूपांतरण लेखन में पात्रों के हावभाव, भाषाशैली और मंचीय अनुकूलता को केंद्र में रखें।


Question 21:

काव्यांश का प्रमुख विषय है —

  • (A) समय की आर्थिक स्थिति का वर्णन
  • (B) जाति–पाँति जनित भेदभाव का वर्णन
  • (C) समय में विसंगतिगत भेदभाव का वर्णन
  • (D) धर्म के नाम पर हो रहे आडंबरों का वर्णन
Correct Answer: (B) जाति–पाँति जनित भेदभाव का वर्णन
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काव्यांश में तुलसीदास और कबीर जैसे संतों के प्रति समाज के दोहरे मापदंडों को उजागर किया गया है।

कबीर की बेटी को ‘देवी’ नहीं माना गया और तुलसी को ‘ब्राह्मण’ होते हुए भी रामभक्ति का सम्मान नहीं मिला — यह स्पष्ट करता है कि जाति के आधार पर भेदभाव किया गया।

काव्यांश का केंद्र बिंदु यह है कि सच्चे संतों की शिक्षा, लेखनी और साधना को जातिगत सोच और सामाजिक संकीर्णता के कारण नकारा गया।

यह भेदभाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था में गहराई से जड़ें जमाए जातिवाद को दर्शाता है।


पंक्तियों का भावार्थ:

"काहू की बेटी सो देवी न कहाय" — बेटी को केवल जाति के कारण सम्मान नहीं मिला।
"तुलसी सतसंग गुनाय" — तुलसी की भक्ति को उसकी जाति की वजह से संदेह की दृष्टि से देखा गया।
"माँगी के लेखनी, महिता को सोचौ" — सच्चे लेखकों की लेखनी भी तिरस्कृत की गई।


अतः इन पंक्तियों का मुख्य विषय जाति-पाँति जनित भेदभाव ही है।
Quick Tip: काव्य आधारित प्रश्नों में मूल पंक्तियों का भाव समझें और उसके सामाजिक/दार्शनिक अर्थ पर ध्यान दें।


Question 22:

“काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब” — पंक्ति के माध्यम से कटाक्ष किया गया है —

  • (A) समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था पर
  • (B) जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर
  • (C) पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता पर
  • (D) समाज की विघटनकारी व्यवस्था पर
Correct Answer: (B) जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर
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पंक्ति ‘‘काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब’’ का अर्थ है — हम किसी विशेष जाति की बेटी के साथ अपने बेटे का विवाह नहीं करेंगे।

यह पंक्ति समाज में प्रचलित जातिगत संकीर्णता और ऊँच-नीच की भावना को उजागर करती है।

यहाँ स्पष्ट रूप से जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर कटाक्ष किया गया है, जहाँ विवाह का निर्णय गुण, स्वभाव या शिक्षा के आधार पर नहीं बल्कि जाति के आधार पर लिया जाता है।


यह कटाक्ष इस बात पर है कि प्रेम, समझदारी और मानवता से ऊपर जातिगत अहंकार को रखा गया है। यह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि संत साहित्य के मूल विचार — समभाव और समानता — के विरुद्ध भी है।


विश्लेषण:

(A) सामान्य जातिवाद पर तो है, पर वैवाहिक संदर्भ प्रमुख है।

(B) सबसे सटीक विकल्प — क्योंकि विवाह ही इस पंक्ति का संदर्भ है।

(C) यह लैंगिक असमानता की बात करता है, जो यहाँ केंद्र में नहीं है।

(D) यह व्यापक उत्तर है, लेकिन अपेक्षित विशिष्टता नहीं देता।
Quick Tip: जब प्रश्न में "कटाक्ष किया गया है" पूछा जाए, तो लेखक की आलोचना का केंद्र बिंदु साफ़-साफ़ पहचानें — और उसी के अनुसार उत्तर दें।


Question 23:

तुलसीदास स्वयं को किसका दास मानते हैं ?

  • (A) नियमों का
  • (B) परिस्थितियों का
  • (C) स्वयं का
  • (D) राम का
Correct Answer: (D) राम का
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तुलसीदास अपनी रचनाओं में सदैव भगवान राम को ही सर्वोपरि मानते हैं। उनकी भक्ति रामकेंद्रित है और वह स्वयं को “राम का दास” कहते हैं।

यह उनकी भक्ति की पराकाष्ठा और समर्पण की चरम सीमा को दर्शाता है।

उनकी पंक्तियाँ जैसे — “तुलसीदास चिरंजीव रघुपति दास” — उनके इस भाव को स्पष्ट करती हैं कि वे न तो समाज, न परिस्थितियों, न ही किसी नियम के अधीन हैं — वे केवल राम के भक्त हैं।


रामचरितमानस और अन्य काव्य रचनाओं में भी तुलसीदास ने स्वयं को ‘राम का सेवक’, ‘राम का कीर्तिगायक’ और ‘राम का अनन्य दास’ कहा है।
Quick Tip: जब किसी कवि या भक्त की आत्म-व्याख्या पूछी जाए, तो उसकी काव्यधारा और भक्ति केंद्र को पहचानना अत्यंत आवश्यक होता है।


Question 24:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :


कथन: परंपरावादी एवं रूढ़िवादी समाज में रहते हुए भी तुलसी निर्विकार जीवन व्यतीत कर रहे थे।

कारण: वे सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त थे।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
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कथन सही है — तुलसीदास एक अत्यंत परंपरावादी और जातिवादी समाज में रहते हुए भी भक्ति और साहित्य के माध्यम से निर्लिप्त और निर्विकार जीवन जीते रहे।

उन्होंने समाज की कुरीतियों को उजागर किया लेकिन स्वयं उनके प्रभाव में नहीं आए। उनके जीवन में आत्मनिष्ठा, भक्ति और साधना का स्थान सर्वोपरि था।


परंतु कारण गलत व्याख्या करता है — तुलसीदास सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त नहीं थे, बल्कि वे तो समाज को दिशा देने वाले संत कवि थे। उन्होंने रामचरितमानस जैसी रचना के माध्यम से समाज में नैतिक और धार्मिक चेतना को जागृत किया।


अतः कथन तो सत्य है, लेकिन जो कारण दिया गया है, वह कथन की सटीक व्याख्या नहीं करता।
Quick Tip: Assertion-Reason (कथन-कारण) वाले प्रश्नों में सबसे पहले दोनों को अलग-अलग सत्यापित करें, फिर संबंध पर विचार करें।


Question 25:

‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ — से आशय है —

  • (A) न लेना एक, न देना दो
  • (B) किसी से कोई बुरी बात न कहना
  • (C) किसी से कोई संबंध न रखना
  • (D) बिना वजह की मुसीबत होना
Correct Answer: (C) किसी से कोई संबंध न रखना
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पंक्ति ‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ का शाब्दिक अर्थ है — न किसी से कुछ लेना और न किसी को कुछ देना।

यहाँ यह पंक्ति समाज में व्याप्त उस भावना की ओर संकेत करती है जहाँ लोग एक-दूसरे से पूर्ण रूप से कटे रहते हैं — न संबंध, न संवाद, न व्यवहार।

ऐसी स्थिति में व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो जाता है और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेता है।


इसका भावार्थ है — “किसी से कोई संबंध न रखना”, और यह समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता, उदासीनता और आत्मकेन्द्रित प्रवृत्ति की आलोचना करता है।


विकल्पों का विश्लेषण:

(A) यह केवल शब्दों का अनुवाद है, भाव नहीं दर्शाता।

(B) यह संवाद की नैतिकता है, जबकि यहाँ संबंध विच्छेद का संदर्भ है।

(C) बिल्कुल सटीक — यह भाव को पूरी तरह प्रस्तुत करता है।

(D) यह संदर्भ से हटकर है।
Quick Tip: लोकोक्तियों और भाव-पंक्तियों के प्रश्न में शाब्दिक अर्थ नहीं, भावार्थ को पहचानें — वही उत्तर को सही दिशा देता है।


Question 26:

‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर लिखिए कि जग की ओर ध्यान न देने वाला कवि जन–जीवन का भार लिए क्यों फिरता है ?

Correct Answer:
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‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि स्वयं को एक संवेदनशील, विचारशील और आत्ममुग्ध व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है। वह दिखावे, यश, मान–सम्मान या दुनिया की भीड़ में खोने की बजाय मानवता के दर्द और जीवन की विडंबनाओं को अपने भीतर जीता है।


वह बाहरी जगत की ओर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मन आंतरिक पीड़ा, जन–जीवन के संघर्ष, और मानवीय करुणा से भरा है। वह दुनिया की चकाचौंध से दूर रहकर उस भार को ढो रहा है, जिसे बहुतों ने अनदेखा कर दिया।

यह भार है — दुखियों की व्यथा, समाज की असमानता, पीड़ितों की पुकार और जीवन की वास्तविकता का।


कवि अकेला होते हुए भी संपूर्ण जन–जीवन की संवेदना को अपने भीतर जी रहा है — यही कारण है कि वह बिना दिखावे के, चुपचाप, जन–जीवन का भार लिए फिरता है।
Quick Tip: जब प्रश्न आत्मकेंद्रित कविता पर हो, तो कवि की अंतरात्मा, संवेदना और दृष्टिकोण को केंद्र में रखें।


Question 27:

‘बात सीधी थी पर’ कविता से उद्धृत पंक्ति ‘भाषा को सूक्ष्मता से बरतने’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि कवि ने भाषा की सहजता पर क्यों बल दिया है ?

Correct Answer:
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‘भाषा को सूक्ष्मता से बरतने’ का तात्पर्य है — भाषा का प्रयोग सोच-समझकर, अर्थ की गहराई को बनाए रखते हुए करना।

कवि का मानना है कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदना, विचार और भावों की अभिव्यक्ति का सूक्ष्म उपकरण है।


‘बात सीधी थी पर’ कविता में कवि उस विडंबना को प्रकट करता है कि कैसे सरल बातों को भी तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उनका अर्थ बदल जाता है। इसलिए कवि कहता है कि भाषा को सहजता से और ईमानदारी से बरतना चाहिए।


कठिन, दिखावटी या जटिल भाषा लोगों को भ्रमित कर सकती है, जबकि सहज भाषा सत्य को प्रभावी रूप में प्रकट करती है।
Quick Tip: भाषा पर आधारित प्रश्नों में "अर्थ", "प्रभाव", और "प्रयोग शैली" तीनों पहलुओं पर उत्तर केंद्रित करें।


Question 28:

‘उषा’ कविता में प्रातःकालीन आकाश में होने वाले सूर्योदय का गतिशील चित्रण हुआ है – पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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‘उषा’ कविता में कवि ने प्रातःकालीन आकाश का अत्यंत सुंदर और जीवंत चित्रण किया है। कविता में सूर्य का उदय एक धीरे-धीरे प्रकट होती चेतना, ऊर्जा और गति के रूप में दिखाया गया है।


रात की शांति को चीरकर उषा की किरणें धीरे-धीरे आकाश को रंगने लगती हैं, जैसे कोई चित्रकार कैनवास पर रंग भर रहा हो। पक्षियों का कलरव, पेड़ों की हरियाली, और आकाश के बदलते रंग — ये सब कविता में गतिशीलता और सजीवता को दर्शाते हैं।


कवि ने न सिर्फ दृश्य को दर्शाया है, बल्कि उस अनुभव की गति, संवेदना और परिवर्तनशीलता को भी शब्दों में बाँधा है। यही कविता की विशेषता है कि यह एक दृश्य को ठहराकर नहीं, बल्कि विकासमान प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है।
Quick Tip: प्राकृतिक दृश्य-चित्रण पर आधारित प्रश्नों में ‘गति’, ‘परिवर्तन’, और ‘सजीवता’ को मुख्य बिंदु बनाकर उत्तर दें।


Question 29:

“सदा पंक पर ही होता, जल विप्लव प्लावन” — पंक्ति में प्रयुक्त ‘पंक’ और ‘विप्लव’ शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इस पंक्ति में ‘पंक’ का अर्थ होता है — कीचड़ या गंदगी, और ‘विप्लव प्लावन’ का अर्थ है — बाढ़ या विकराल जलप्रलय।

यहाँ इन शब्दों का प्रयोग केवल प्राकृतिक स्थितियों के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्थिति के प्रतीक रूप में किया गया है।


‘पंक’ दर्शाता है — समाज में फैली जड़ता, रूढ़िवादिता और नैतिक गंदगी। जबकि ‘विप्लव’ संकेत करता है — क्रांति, परिवर्तन और उथल-पुथल।


पंक्ति का आशय है कि प्रकृति में भी सृजन और जीवन ‘पंक’ जैसी कठिन परिस्थितियों में ही होता है। उसी प्रकार समाज में भी परिवर्तन और पुनरुत्थान विप्लव और संघर्ष से ही आता है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक प्रश्नों में शब्दों के शब्दार्थ के साथ-साथ भावार्थ को सामाजिक या सांस्कृतिक संदर्भ में जोड़ें।


Question 30:

‘कैमरे में बंद अपाहिज़’ कविता में “यह अवसर खो देंगे” — पंक्ति में कौन से अवसर को खोने की बात कही जा रही है ? इससे मीडियाकर्मी के किस व्यवहार का पता लगता है ?

Correct Answer:
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यहाँ ‘अवसर’ का अर्थ है — दुर्घटना, पीड़ा, दुख या असामान्य स्थिति को कैमरे में कैद करने का मौका। कवि यह दिखाना चाहता है कि कुछ मीडिया कर्मी केवल संवेदनशील समाचारों को “ब्रेकिंग न्यूज़” की तरह प्रस्तुत करने में रुचि रखते हैं।


“यह अवसर खो देंगे” — यह वाक्य दर्शाता है कि वे वास्तविक मदद की जगह दृश्य कैद करने को प्राथमिकता देते हैं।


इससे मीडियाकर्मियों के संवेदनहीन, अवसरवादी और प्रदर्शनप्रिय व्यवहार का पता चलता है — जहाँ मानवता से अधिक “खबर” मायने रखती है।
Quick Tip: मीडिया पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्नों में नैतिकता, संवेदना और पेशेवर दृष्टिकोण — तीनों का संतुलन ज़रूरी है।


Question 31:

‘पतंग’ कविता से उद्धृत पंक्ति — “डाल की तरह लचकते वेग से” का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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यह पंक्ति पतंग की गति और लयात्मकता को दर्शाती है। डाल की तरह लचकना — यह एक सुंदर उपमा है, जो बताती है कि पतंग हवा में इतने लचीले और तेज़ वेग से बह रही है जैसे पेड़ की कोई शाखा लहराती हो।


इसका आशय यह भी है कि पतंग गतिशीलता, सौंदर्य और लयात्मक संतुलन का प्रतीक है। यह पंक्ति उस सौंदर्य का चित्र खींचती है जिसमें पतंग हवा से संघर्ष करती हुई भी सौम्यता और तालमेल बनाए रखती है।
Quick Tip: प्राकृतिक उपमाओं के अर्थ स्पष्ट करते समय सौंदर्यबोध, गति और कल्पनाशीलता पर ज़रूर प्रकाश डालें।


Question 32:

गद्यांश में ‘नरो वा कुंजरो वा’ का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है ?

  • (A) महाभारत के प्रसंग से अवगत कराने के लिए
  • (B) भक्तिन को युधिष्ठिर के समर्थक रखने के लिए
  • (C) भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
  • (D) भक्तिन को युधिष्ठिर से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए
Correct Answer: (C) भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
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इस प्रश्न में ‘नरो वा कुंजरो वा’ श्लोक का प्रयोग उस स्थिति को रेखांकित करने के लिए किया गया है जहाँ सत्य को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

भक्तिन का चरित्र इसी स्थिति में अपनी नैतिक दृढ़ता और सत्यनिष्ठा को बनाए रखता है।

गद्यांश में इसका उल्लेख इसीलिए किया गया है कि पाठक यह समझ सके कि भक्तिन के लिए धर्मसंकट की स्थिति में भी सिद्धांत महत्वपूर्ण थे —

और उसने अपनी चारित्रिक विशेषता को किसी भी भ्रम या मोह से प्रभावित नहीं होने दिया।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में किसी पंक्ति के उपयोग का विश्लेषण करते समय उसका संदर्भ और उद्देश्य दोनों पर ध्यान दें।


Question 33:

भक्तिन घर में पड़े पैसों को मटकी में छिपाकर किस उद्देश्य से रखती थी ?

  • (A) पैसों को सँभालकर रखने
  • (B) अन्य सेवकों की दृष्टि से बचाने
  • (C) आपातकाल में काम आने
  • (D) स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने
Correct Answer: (A) पैसों को सँभालकर रखने
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गद्यांश में भक्तिन की सरलता और उसके जीवन की व्यवस्था को दर्शाते हुए यह बताया गया है कि वह अपने घर में पैसे मटकी में छिपाकर रखती थी।

यह क्रिया न तो किसी चोरी से डरकर थी, न ही दिखावे के लिए। उसका उद्देश्य था — पैसों को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से सँभालकर रखना।


भक्तिन के पास सीमित आय थी, इसलिए वह अपने सीमित संसाधनों को संभालकर रखने में विश्वास रखती थी। उसका यह व्यवहार उसके अनुभव, समझदारी और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

यह क्रिया एक मध्यवर्गीय या निम्नवर्गीय गृहिणी की व्यवहारिक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है, जो पारिवारिक भविष्य की चिंता में वर्तमान को सुव्यवस्थित रखती है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में “क्यों” को पहचानना मुख्य होता है — केवल ‘क्या किया’ नहीं, बल्कि ‘किसलिए किया’ पर ध्यान दें।


Question 34:

‘थोड़ा बहुत झूठ बोलना’ के समर्थन में भक्तिन अपना आदर्श किसे मानती थी ?

  • (A) हरिश्चंद्र
  • (B) यमराज
  • (C) युधिष्ठिर
  • (D) महादेवी
Correct Answer: (B) यमराज
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गद्यांश में भक्तिन अपने विचारों का समर्थन करने के लिए यमराज का उल्लेख करती है। वह कहती है कि “यमराज भी कभी-कभी थोड़ा झूठ बोल देते होंगे।”

यह पंक्ति इस बात का संकेत है कि भक्तिन अपने व्यवहार — विशेषतः “थोड़ा बहुत झूठ बोलना” — को सामान्य और मानवीय मानती थी, और इसे उचित ठहराने के लिए यमराज जैसे देवता को भी उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करती है।


यह दर्शाता है कि भक्तिन सीधे-सादे, व्यावहारिक जीवन की पक्षधर थी, और जीवन में कभी-कभार ‘झूठ’ को वह नैतिक दोष नहीं मानती थी, बल्कि परिस्थिति की मांग समझती थी।

यमराज जैसे न्याय के देवता को उदाहरण बनाकर वह अपनी व्यावहारिक नैतिकता को दर्शाती है।
Quick Tip: यदि कोई पात्र अपने विचार को किसी चरित्र से जोड़ता है, तो उस पात्र का नाम उत्तर में सही ढंग से पहचानना ज़रूरी होता है — यह प्रतीकात्मक व्याख्या में मदद करता है।


Question 35:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए :


कथन : भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा।

कारण : समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करती थी।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है किंतु कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
  • (A) खूब मन लगाकर काम करती थी
  • (B) बातों को ढालकर बताती थी
  • (C) उनके सामने नहीं आती थी
  • (D) बातों को स्पष्ट रूप से बताती थी
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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गद्यांश में भक्तिन को एक जटिल चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है — वह व्यवहारिक है, सच्चरित्र भी है, परंतु उसके कार्यों में स्थिति के अनुसार लचीलापन भी देखा जाता है।

इसलिए यह कहना कि “भक्तिन अच्छी है” — यह एक सीधा निष्कर्ष नहीं हो सकता, क्योंकि उसमें अच्छाई के साथ व्यावहारिक चतुराई भी है।


वहीं कारण — “समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करना” — इस कथन की पूरी सच्चाई दर्शाता है।

यह कारण इस कथन को स्पष्ट करता है कि भक्तिन का आचरण स्थायी नहीं, बल्कि स्थितियों पर आधारित था।
Quick Tip: Assertion-Reason प्रश्नों में यह जानना ज़रूरी होता है कि दोनों कथन सही हैं या नहीं — और क्या कारण, कथन की व्याख्या करता है। यदि हाँ, तो उत्तर ‘(D)’ होता है।


Question 36:

“लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए” – ‘बाजार दर्शन’ पाठ में यह वाक्य क्यों और किस संदर्भ में कहा गया ?

Correct Answer:
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यह वाक्य लेखक के द्वारा भारतीय समाज में साधारण किंतु गहरे अनुभव आधारित व्यवहार को दर्शाने के लिए प्रयोग किया गया है।

‘बाजार दर्शन’ में लेखक ने ग्रामीण भारत की ठोस, व्यावहारिक सोच को सामने रखा है।

वाक्य का आशय है कि अगर कठिन परिस्थितियों में जाना हो — जैसे लू के मौसम में बाहर निकलना — तो कुछ पूर्व तैयारी ज़रूरी होती है।

यह प्रतीकात्मक रूप से यह भी बताता है कि किसी कार्य को करने से पहले उसकी चुनौतियों को समझना और उसके लिए तैयार रहना आवश्यक है।
Quick Tip: ऐसे प्रतीकात्मक वाक्य शाब्दिक नहीं, व्यावहारिक दृष्टिकोण से व्याख्यायित करें — ये अनुभवजन्य जीवन दर्शन को दर्शाते हैं।


Question 37:

अनास्था दूर करने के लिए गाँव के बच्चों और गाँव वालों द्वारा किए गए उपायों को आप कितना उचित मानते हैं ? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के संदर्भ में तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
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‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में गाँव के बच्चे और गाँववाले आपसी सहयोग, आस्था और संघर्ष की भावना से अनास्था को दूर करने के उपाय अपनाते हैं।

बच्चों द्वारा गीत गाना, पूजा करना, परंपरागत उपाय अपनाना और सामूहिक भावना से काम लेना यह दर्शाता है कि वे हिम्मत नहीं हारते।

ये उपाय सामाजिक मनोबल को बढ़ाते हैं और कठिन परिस्थितियों में सामूहिक शक्ति को दर्शाते हैं।

इसलिए ये उपाय उचित हैं क्योंकि ये सांस्कृतिक चेतना, आत्मबल और आशावादी दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं।
Quick Tip: ऐसे उत्तरों में केवल उपाय न बताकर उनके सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर ज़रूर प्रकाश डालें।


Question 38:

शिल्पि के माध्यम से लेखक ने, ‘कालजयी अवधूत की भाँति विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल खड़े रहने की प्रेरणा दी है।’ पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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‘शिल्पि’ कहानी में मूर्तिकार अपने कार्य में पूरी निष्ठा और साधना के साथ लगा रहता है, चाहे समय कैसा भी हो।

उसके जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं — आर्थिक संकट, सामाजिक आलोचना, लेकिन वह अपने सृजनात्मक उद्देश्य से विचलित नहीं होता।

यह चरित्र लेखक की उस अवधारणा को पुष्ट करता है जहाँ एक साधक/अवधूत समाज और समय की सीमाओं से परे जाकर

सिर्फ अपने कार्य और संकल्प के प्रति ईमानदार रहता है।

यह प्रेरणा देता है कि विपरीत परिस्थितियाँ भी आत्मबल और धैर्य के मार्ग में बाधक नहीं बन सकतीं।
Quick Tip: कथाओं में प्रतीक पात्रों की पहचान कर उनके मूल संदेश को रेखांकित करें — यही पुष्टि का आधार होता है।


Question 39:

(i) वैश्वीकरण के इस दौर में क्या भगत जी का चरित्र बाज़ार को सार्थकता और समाज में शांति स्थापित कर सकता है ? ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में भगत जी का चरित्र एक संतुलित, नैतिक और शांति प्रिय दृष्टिकोण का प्रतीक है।

वह व्यक्ति साधारण जीवन जीते हुए भी गहन सामाजिक चेतना से युक्त है।

वह अपने व्यवहार से यह दिखाते हैं कि बाजार में भी लोभ, लालच और अव्यवस्था के बिना शांति और सहयोग से व्यापार किया जा सकता है।

आज के वैश्वीकरण के युग में जहाँ हर चीज़ लाभ केंद्रित हो चुकी है, वहाँ भगत जी जैसे चरित्र की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

उनका संयम, समाज के प्रति उत्तरदायित्व, तथा सबके हित में काम करने की भावना आज के समय में बाजार की नैतिकता को पुनः स्थापित करने में सहायक हो सकती है।
Quick Tip: चरित्र-आधारित प्रश्नों में पाठ से जुड़ी घटनाओं का संदर्भ देना उत्तर को और प्रासंगिक बनाता है।


Question 40:

(ii) ‘शिरीष के फूल’ पाठ में कबीर को शिरीष की भाँति क्यों बताया गया है ?

Correct Answer:
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‘शिरीष के फूल’ पाठ में कबीर को शिरीष वृक्ष की भाँति इसीलिए बताया गया है क्योंकि शिरीष बाहर से कोमल होने के बावजूद अपने भीतर कठोरता, स्थायित्व और आत्मबल रखता है।

कबीर भी समाज में व्याप्त कुरीतियों, रूढ़ियों और विषमताओं पर कठोर प्रहार करते हैं, परंतु उनका अंतर्मन करुणा, ममता और संवेदनशीलता से भरा होता है।

शिरीष की तरह ही कबीर भी बाहर से मृदु, परंतु विचारों में अडिग और सशक्त हैं।

यह उपमा कबीर की विचारधारा को प्रकृति से जोड़ती है और यह दिखाती है कि सच्चे संत विनम्र होते हुए भी आंतरिक रूप से अडिग होते हैं।
Quick Tip: प्रतीक और उपमा पर आधारित प्रश्नों में तुलना के सभी पक्षों को विस्तार से स्पष्ट करें।


Question 41:

(iii) ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ से उद्धृत कथन ‘दासता केवल कानूनी पराधीनता ही नहीं है’ – का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इस कथन का आशय यह है कि दासता केवल बाहरी या राजनीतिक रूप से गुलामी तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी हो सकती है।

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ में डॉ. अम्बेडकर यह स्पष्ट करते हैं कि जब किसी समुदाय को जन्म के आधार पर किसी विशेष श्रम या व्यवसाय तक सीमित कर दिया जाता है,

तो यह व्यवस्था सामाजिक गुलामी को जन्म देती है।

यह एक ऐसी मानसिक पराधीनता है जहाँ व्यक्ति अपनी अस्मिता, अधिकार और विकास की संभावनाओं से वंचित हो जाता है।

इसलिए दासता का तात्पर्य केवल कानून द्वारा बनाई गई गुलामी से नहीं, बल्कि सामाजिक-मानसिक जंजीरों से भी है।
Quick Tip: ऐसे गूढ़ विचारों वाले प्रश्नों में सामाजिक संदर्भ और लेखक की मंशा को अवश्य स्पष्ट करें।


Question 42:

(i) ‘अशोक बाबू की यह विशेषता है वह पुराने को अच्छा समझते हैं और वर्तमान से तालमेल नहीं बिठा पाते।’ क्यों? ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी के इस कथन के संबंध में तर्कपूर्ण विचार दीजिए कि क्या उनका यह व्यवहार उचित है?

Correct Answer:
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‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में अशोक बाबू का चरित्र पारंपरिक मूल्यों और जीवन की सरलता को पसंद करता है।

वह आधुनिक जीवन शैली और युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं को समझ नहीं पाते और इस कारण नए समय के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाते।

उनका यह व्यवहार उन लोगों की मानसिकता दर्शाता है जो परिवर्तन को नकारते हैं और अतीत में जीना पसंद करते हैं।

हालाँकि उनकी भावनाएँ गलत नहीं हैं, परंतु वर्तमान यथार्थ को न समझना व्यवहारिक दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।

एक संतुलन आवश्यक है — अतीत की अच्छाइयों को सँजोते हुए वर्तमान को स्वीकारना ही सही मार्ग है।
Quick Tip: पात्र की मानसिकता को आलोचनात्मक ढंग से समझना और संतुलन की भूमिका स्पष्ट करना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।


Question 43:

(ii) ‘झूठ’ कहानी आज के युवाओं के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करने की एक प्रेरक कथा है। उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

Correct Answer:
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‘झूठ’ कहानी का नायक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आत्मबल और ईमानदारी से संघर्ष करता है।

उसका जीवन गरीबी, असुरक्षा और संकोच से घिरा होता है, लेकिन वह अपने नैतिक मूल्यों से नहीं डिगता।

आज के युवाओं के लिए यह कहानी प्रेरणा देती है कि कठिनाइयों में भी साहस, परिश्रम और सच्चाई के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

उदाहरण के रूप में नायक का विद्यालय में प्रवेश लेने का संघर्ष और अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करते हुए गलत तरीकों को न अपनाना दर्शाता है कि संघर्षशीलता और ईमानदारी ही सफलता की असली राह है।
Quick Tip: उत्तर में प्रेरणा के तत्त्वों को उजागर करें और स्पष्ट उदाहरण देकर विषय को पाठ से जोड़ें।


Question 44:

(iii) सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ लेखक ने किस आधार पर कहा है ? वर्तमान समय में जल संरक्षण क्यों आवश्यक है ?

Correct Answer:
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लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को ‘जल-संस्कृति’ इस आधार पर कहा है कि उस सभ्यता में जल के संरक्षण, संग्रहण और वितरण की उत्कृष्ट प्रणाली थी।

मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी नगरियों में कुएँ, जल निकासी प्रणाली, स्नानागार और तालाबों की योजनाबद्ध संरचना इस बात का प्रमाण है कि वहाँ जल को प्राथमिकता दी जाती थी।

वर्तमान समय में जल की अत्यधिक खपत, जलवायु परिवर्तन और जल प्रदूषण जैसी समस्याएँ इस अमूल्य संसाधन को संकट में डाल रही हैं।

जल संरक्षण अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा विषय बन गया है।

हमें सिंधु सभ्यता से सीख लेकर जल का विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण करना चाहिए।
Quick Tip: इतिहास से वर्तमान की तुलना करके उत्तर को तर्कसंगत और समसामयिक बनाएँ।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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