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Sanghamitra Deb

Content Writer | Updated On - Dec 10, 2025

CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 1 - 2/4/1) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 1 - 2/4/1) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solutions (Set 1 2-4-1)

Question 1:

लेखक का उद्देश्य होता है :

  • (A) आर्थिक उपार्जन
  • (B) भावनाओं की अभिव्यक्ति
  • (C) मान-सम्मान की प्राप्ति
  • (D) पाठकों की संतुष्टि
Correct Answer: (B) भावनाओं की अभिव्यक्ति
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गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है: "मगर जो अनुभूति, पीड़ा, हर्षोल्लास लेखक के हृदय में उपजता है, उनको अभिव्यक्त किया ही जाना है, भले ही पाठक कम हों या न हों।"


इससे स्पष्ट होता है कि लेखक का मुख्य उद्देश्य अपने हृदय के भावों (अनुभूति, पीड़ा आदि) को व्यक्त करना होता है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: गद्यांश में 'अभिव्यक्त' शब्द पर ध्यान दें, जो सीधे 'अभिव्यक्ति' विकल्प से मेल खाता है।


Question 2:

चेखव का उदाहरण यहाँ क्यों दिया गया है ?

  • (A) आरंभिक समय के संघर्ष से न घबराने के लिए
  • (B) लेखक के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए
  • (C) लेखन-कर्म की जटिलता को बताने के लिए
  • (D) कहानी के नायक की सहनशीलता दर्शाने के लिए
Correct Answer: (B) लेखक के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए
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गद्यांश में चेखव की कहानी का उदाहरण यह बताने के लिए दिया गया है कि लेखक को अपने विचारों को व्यक्त करने में कितनी पीड़ा और संघर्ष का सामना करना पड़ता है।


कहानी का नायक (लेखक) अपनी व्यथा सुनाने के लिए कोई श्रोता नहीं पाता और अंततः घोड़े को अपनी कहानी सुनाता है।


यह स्थिति लेखक के जीवन की विडंबना और कठिनाई (श्रोता/पाठक का अभाव) को दर्शाती है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: उदाहरण का उद्देश्य हमेशा उससे ठीक पहले या बाद में कही गई मुख्य बात को सिद्ध करना होता है। यहाँ 'कष्टदायक' स्थिति मुख्य संदर्भ है।


Question 3:

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :

कथन : अनेक शीर्ष लेखक प्रारंभ में पाठक-प्रकाशक नहीं मिलने से नैराश्य के गर्त में नहीं डूबे।

कारण : विचारों की सत्यता और आगामी उपयोगिता के प्रति उन्हें कोई शंका नहीं रहती।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • (B) कारण सही है, किंतु कथन ग़लत है।
  • (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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गद्यांश के अनुसार, शीर्ष लेखक निराशा में नहीं डूबे (कथन सत्य है)।


गद्यांश की अगली पंक्ति "जिनके पास कुछ ठोस कहने-लिखने को है, वे कभी थमेंगे नहीं" का अर्थ है कि उन्हें अपने लेखन की सार्थकता (सत्यता और उपयोगिता) पर विश्वास था।


चूँकि उन्हें अपने विचारों पर विश्वास था (कारण), इसलिए वे निराश नहीं हुए (कथन)।


अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Quick Tip: 'क्योंकि' लगाकर वाक्यों को जोड़ें: "वे निराश नहीं हुए क्योंकि उन्हें अपने विचारों की सत्यता पर कोई शंका नहीं थी।" यह तर्क सही बैठता है।


Question 4:

लेखन कर्म का रूप क्यों बदल रहा है ?

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार, लेखन कर्म का रूप बदलने के मुख्य कारण हैं:


1. डिजिटल चकाचौंध: आधुनिक युग में डिजिटल माध्यमों के प्रभाव के कारण लोगों की रुचि पढ़ने-लिखने के बजाय 'बोलने-सुनने' (Audio-Visual) में अधिक हो गई है।


2. पाठकों की कमी: पुस्तकों के प्रसार में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है, जिससे लेखक अपना रास्ता बदल रहे हैं।
Quick Tip: 'रूप बदलना' का कारण 'डिजिटल क्रांति' और 'रुझान में बदलाव' है।


Question 5:

लेखक को ‘मशीनी-क्रिया’ क्यों नहीं कहा जा सकता ?

Correct Answer:
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लेखन को 'मशीनी-क्रिया' नहीं कहा जा सकता क्योंकि:


1. भावनात्मक जुड़ाव: इसमें लेखक के हृदय की गहन अनुभूतियाँ, पीड़ा और हर्षोल्लास शामिल होते हैं, जो मशीन में संभव नहीं।


2. वैचारिक संघर्ष: लेखन के लिए विचारों से जूझना पड़ता है और अथक निष्ठा व श्रम की आवश्यकता होती है, जो एक यांत्रिक प्रक्रिया से भिन्न है।
Quick Tip: मशीन केवल कार्य कर सकती है, महसूस नहीं। लेखन 'महसूस करने' (Feeling) का नाम है।


Question 6:

डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र में क्या प्रभाव दिखाई देता है ?

Correct Answer:
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डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र पर निम्नलिखित प्रभाव दिखाई देता है:


1. रुझान में परिवर्तन: लोगों का झुकाव अब 'पढ़ने-लिखने' के पारंपरिक माध्यमों के बजाय डिजिटल माध्यमों पर 'जानने, सीखने और समझने' की ओर अधिक है।


2. माध्यम का बदलाव: 'बोलने-सुनने' (Audio/Video content) की प्रवृत्ति बढ़ गई है, जिससे लिखित शब्द की गरिमा प्रभावित हो रही है।
Quick Tip: 'डिजिटल क्रांति' \(\rightarrow\) 'पढ़ने से सुनने की ओर पलायन'।


Question 7:

‘नए किरदारों की आवश्यकता तो बरकरार रहेगी’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इस पंक्ति का आशय है कि चाहे तकनीक कितनी भी बदल जाए या माध्यम कितने भी आधुनिक (कंप्यूटरी) हो जाएँ, कहानियों और लेखन के मूल तत्व यानी 'मानवीय संवेदनाओं और पात्रों' (किरदारों) की ज़रूरत हमेशा बनी रहेगी।


तकनीक माध्यम बदल सकती है, लेकिन लोक-जीवन की कहानियों और उनके पात्रों की प्रामाणिकता और महत्त्व कभी समाप्त नहीं होगा।
Quick Tip: 'पात्र' (Characters) कहानी की आत्मा होते हैं, जिन्हें तकनीक प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।


Question 8:

तरु शिखर पर जाकर कौन बैठ गया है ?

  • (A) सूर्य रूपी पक्षी
  • (B) संध्या रूपी पक्षी
  • (C) थका-हारा पक्षी
  • (D) समय रूपी पक्षी
Correct Answer: (B) संध्या रूपी पक्षी
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काव्यांश की पंक्तियाँ हैं: "सिमटा पंख साँझ की लाली / जा बैठी अब तरु शिखरों पर"।


यहाँ 'साँझ की लाली' (शाम की लालिमा) का मानवीकरण किया गया है। उसे 'पंख समेटकर' पेड़ की फुनगी पर बैठे हुए दिखाया गया है।


अर्थात्, संध्या (शाम) एक पक्षी के रूप में पेड़ के शिखर पर बैठी है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'पंख सिमटना' पक्षी का गुण है। यहाँ 'साँझ' पर यह आरोपण किया गया है, इसलिए यह रूपक अलंकार है।


Question 9:

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए :


  • (A) 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
  • (B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (C) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • (D) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
Correct Answer: (A) 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
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पद्यांश के अनुसार मिलान:

1. ज्योति-स्तंभ: "ज्योति स्तंभ-सा धँस सरिता में / सूर्य क्षितिज पर..."। सूर्य नदी में ज्योति स्तंभ जैसा लग रहा है। (1 \(\rightarrow\) iii)

2. केंचुल-सा: "केंचुल-सा / लगता चितकबरा गंगाजल"। गंगाजल केंचुल (साँप की खाल) जैसा लग रहा है। (2 \(\rightarrow\) ii)

3. दीपशिखा: "दीप शिखा-सा ज्वलित कलश"। मंदिर का कलश दीये की लौ जैसा चमक रहा है। (3 \(\rightarrow\) i)


सही क्रम: 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)।
Quick Tip: कविता की पंक्तियों में 'सा' (उपमा वाचक शब्द) के पहले और बाद के शब्दों को देखें। 'दीपशिखा-सा ... कलश'।


Question 10:

स्नेह रूपी बंधन में कौन-कौन बंधे हैं ?

  • (A) लहर, जलधार, रेत
  • (B) लहर, रेत, अग्नि
  • (C) हवा, रेत, पानी
  • (D) हवा, लहर, अग्नि
Correct Answer: (C) हवा, रेत, पानी
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काव्यांश की पंक्तियाँ हैं: "सिकता, सलिल, समीर सदा से / स्नेह पाश में बंधे समुज्ज्वल"।


यहाँ शब्दों के अर्थ हैं:

सिकता = रेत (Sand)

सलिल = पानी (Water)

समीर = हवा (Wind)


अतः हवा, रेत और पानी स्नेह बंधन में बंधे हैं।


विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: तत्सम शब्दों के अर्थ याद रखें: सिकता (रेत), सलिल (जल), समीर (वायु)।


Question 11:

संध्या के समय गंगा नदी कैसी प्रतीत हो रही है ?

Correct Answer:
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संध्या के समय गंगा नदी चितकबरी (spotted) और 'केंचुल' (साँप की उतारी हुई खाल) जैसी प्रतीत हो रही है।


सूर्य की किरणें और छाया के मिलन (धूपछाँह) के कारण नदी का जल 'रजत' (चाँदी) जैसा चमक रहा है, जिसमें बादलों का पीला प्रतिबिंब भी दिखाई दे रहा है।
Quick Tip: 'केंचुल' और 'चितकबरा' शब्द नदी के दृश्य वर्णन के मुख्य विशेषण हैं।


Question 12:

संध्याकालीन प्रकृति की सुंदरता का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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कविता में संध्याकालीन प्रकृति का अत्यंत मनोरम चित्रण है:


1. शाम की लालिमा पक्षी की तरह पेड़ों की चोटियों पर बैठ गई है।


2. पीपल के पत्ते तांबे के रंग (ताम्रपर्ण) के हो गए हैं और झरनों का जल सोने (स्वर्णिम) जैसा लग रहा है।


3. वातावरण में एक शांत और जादुई सौंदर्य छाया हुआ है जहाँ रेत, हवा और पानी एक दूसरे से स्नेहभाव से मिले हुए हैं।
Quick Tip: वर्णन में रंगों (लाल, ताम्र, स्वर्णिम) और उपमानों (पक्षी, केंचुल) का प्रयोग उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।


Question 13:

संध्या के नदी तट के दृश्य का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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नदी तट पर रेत धूप-छाँव के रंग की दिखाई दे रही है।


हवा चलने से नदी की लहरों पर साँप जैसी आकृतियाँ (सर्पांकित) बन रही हैं।


नीली लहरों में हलचल है और मंदिर के शंख-घंटों की ध्वनि से लहरों में भी एक लययुक्त कंपन हो रहा है।
Quick Tip: 'धूपछाँह की रेती' और 'अनिल उर्मियों से सर्पांकित' वाक्यांशों को अपने शब्दों में पिरोकर लिखें।


Question 14:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(i) भीषण गर्मी में बादलों का बरसना

Correct Answer:
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भीषण गर्मी में बादलों का बरसना


जेठ-आषाढ़ की भीषण गर्मी जब धरती को तवे की तरह तपा देती है, तब आसमान में घुमड़ते काले बादल किसी वरदान से कम नहीं लगते।


सूरज की तपिश से झुलसते पेड़-पौधे, सूखते तालाब और प्यासे पशु-पक्षी सभी व्याकुल होकर आसमान की ओर निहारते हैं।


ऐसे में जब ठंडी हवा के झोंकों के साथ बादलों का आगमन होता है, तो रोम-रोम पुलकित हो उठता है।


पहली बूंद गिरते ही मिट्टी की सौंधी सुगंध वातावरण में फैल जाती है, जो मन को एक असीम शांति देती है।


बारिश की फुहारों में भीगना और गर्मी से राहत पाना बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को आनंदित कर देता है।


मोर नाचने लगते हैं और किसान के चेहरे पर नई फसल की उम्मीद खिल उठती है।


सचमुच, भीषण गर्मी के बाद बादलों का बरसना केवल एक मौसम का बदलना नहीं, बल्कि जीवन में नए उत्साह का संचार है।
Quick Tip: प्रकृति चित्रण वाले लेखों में 'संवेदी बिंबों' (Sensory Images) जैसे 'सौंधी सुगंध', 'ठंडी हवा', 'काले बादल' का प्रयोग करें।


Question 15:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(ii) ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत

Correct Answer:
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ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत


तकनीक के युग में मोबाइल और इंटरनेट ने बच्चों के बचपन को मैदानी खेलों से छीनकर स्क्रीन तक सीमित कर दिया है।


आजकल 'ऑनलाइन गेमिंग' बच्चों और किशोरों में एक गंभीर नशे की तरह फैल चुका है।


पबजी, फ्री-फायर जैसे हिंसक खेलों में बच्चे घंटों बिता देते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और नींद प्रभावित हो रही है।


इस लत का सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है; उनमें आक्रामकता, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी देखी जा रही है।


वर्चुअल दुनिया में जीतने की होड़ उन्हें वास्तविक दुनिया के रिश्तों और जिम्मेदारियों से दूर कर रही है।


आवश्यकता है कि अभिभावक सतर्क रहें, बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें और उन्हें आउटडोर गेम्स के लिए प्रेरित करें।
Quick Tip: समस्या-प्रधान लेखों में: समस्या \(\rightarrow\) प्रभाव (शारीरिक/मानसिक) \(\rightarrow\) समाधान (जागरूकता/नियंत्रण) का क्रम अपनाएं।


Question 16:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(iii) शहरों की तरफ भागता ग्रामीण

Correct Answer:
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शहरों की तरफ भागता ग्रामीण


आजादी के दशकों बाद भी 'पलायन' भारत की एक कड़वी सच्चाई है।


गाँवों में रोजगार की कमी, कृषि में अनिश्चितता और सुख-सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों को शहर की ओर भागने पर मजबूर करता है।


शहर की चकाचौंध और बेहतर जीवन की उम्मीद में ग्रामीण अपना घर-बार छोड़कर आते हैं, लेकिन यहाँ की भीड़ और महँगाई में अक्सर खो जाते हैं।


परिणामस्वरूप, गाँव वीरान हो रहे हैं और शहरों में झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ रही है।


गाँवों में केवल बुजुर्ग रह गए हैं और कृषि संस्कृति दम तोड़ रही है।


इस अंधी दौड़ को रोकने के लिए गाँवों में ही रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी ताकि 'ग्राम स्वराज्य' का सपना सच हो सके।
Quick Tip: पलायन (Migration) के दो पहलू होते हैं: 'पुश फैक्टर' (गाँव की समस्याएँ) और 'पुल फैक्टर' (शहर का आकर्षण)—दोनों का जिक्र करें।


Question 17:

भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल कार्य क्यों है ?

Correct Answer:
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भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना इसलिए मुश्किल है क्योंकि लेखन एक अनुशासित और व्यवस्थित कला है।


बोलते समय हम व्याकरण या क्रम का उतना ध्यान नहीं रखते, लेकिन लिखते समय विचारों में तार्किकता, स्पष्टता और भाषा की शुद्धता होना अनिवार्य है।


अमूर्त भावनाओं को सही और सटीक शब्दों में पिरोना हर किसी के लिए सहज नहीं होता, इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है।
Quick Tip: बोलना 'सहज' है, जबकि लिखना 'सचेत' (Conscious) प्रयास है—यही मुख्य कठिनाई है।


Question 18:

सिनेमा, रंगमंच और रेडियो नाटक में क्या अंतर है ?

Correct Answer:
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सिनेमा: यह दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम है जो पूर्व-रिकॉर्डेड और संपादित (Edited) होता है। इसमें 'रीटेक' की सुविधा होती है।


रंगमंच (Theater): यह एक 'जीवंत' (Live) माध्यम है जहाँ दर्शक और अभिनेता आमने-सामने होते हैं। इसमें गलती सुधारने (रीटेक) का मौका नहीं मिलता।


रेडियो नाटक: यह केवल श्रव्य (Audio) माध्यम है। इसमें दृश्य नहीं होते, सब कुछ ध्वनि, संवाद और संगीत के माध्यम से श्रोता की कल्पना में रचा जाता है।
Quick Tip: अंतर का आधार: सिनेमा = कैमरा/एडिटिंग, रंगमंच = लाइव अभिनय, रेडियो = केवल ध्वनि।


Question 19:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय संवादों को किस प्रकार नाटकीय बनाया जा सकता है ?

Correct Answer:
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संवादों को नाटकीय बनाने के लिए उन्हें छोटा, प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।


लंबे वर्णनात्मक संवादों के बजाय ऐसे संवाद लिखे जाने चाहिए जो पात्रों के अंतर्द्वंद्व या आपसी संघर्ष को प्रकट करें।


संवादों में 'क्रिया' (Action) का भाव होना चाहिए, जो कहानी को आगे बढ़ाए और दर्शकों को बांधे रखे।
Quick Tip: नाटकीय संवाद = संघर्ष (Conflict) + गति (Movement)।


Question 20:

समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में ‘संपादक के नाम पत्र’ का क्या महत्त्व है ?

Correct Answer:
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'संपादक के नाम पत्र' स्तंभ समाचार पत्र में आम पाठकों की आवाज़ होता है।


इसका महत्त्व इसलिए है क्योंकि इसके माध्यम से पाठक विभिन्न जन-समस्याओं और मुद्दों को उठा सकते हैं और उन पर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं।


यह समाचार पत्र को समाज से जोड़ता है और पाठकों को लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी का अवसर देता है।
Quick Tip: यह स्तंभ 'लोकतंत्र का मंच' है जहाँ जनता अपनी बात रखती है।


Question 21:

इंटरनेट पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इंटरनेट पर समाचारों के प्रकाशन या आदान-प्रदान को इंटरनेट पत्रकारिता (Cyber Journalism) कहते हैं।


यह मुद्रित, रेडियो और टेलीविजन तीनों माध्यमों का संगम (Convergence) है, जिसमें टेक्स्ट, चित्र, ध्वनि और वीडियो सभी एक साथ उपलब्ध होते हैं।


इसकी सबसे बड़ी विशेषता 'तात्कालिकता' (Real-time updates) और 'इंटरएक्टिविटी' है, जहाँ पाठक तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है और दुनिया के किसी भी कोने से समाचार पढ़ सकता है।
Quick Tip: कीवर्ड्स: 'कन्वर्जेंस' (संगम) और 'तात्कालिकता' (Immediacy)।


Question 22:

मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यमों (Print Media) में लेखन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:


1. भाषा की शुद्धता: मुद्रित शब्द स्थायी होते हैं, इसलिए व्याकरण, वर्तनी और भाषा के मानक रूप का कड़ाई से पालन करना चाहिए।


2. तारतम्यता (Flow): वाक्यों और अनुच्छेदों के बीच एक सहज प्रवाह होना चाहिए ताकि पाठक बंधा रहे।


3. तथ्यात्मक सटीकता: प्रकाशित समाचार का गलत होना विश्वसनीयता को कम करता है, अतः तथ्यों की जाँच अनिवार्य है।


4. शब्द-सीमा: अखबार या पत्रिका में स्थान (Space) सीमित होता है, इसलिए बात को संक्षिप्त और सटीक रूप में लिखना चाहिए।
Quick Tip: प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती 'स्पेस' (स्थान) और सबसे बड़ी ताकत 'स्थायित्व' है—इन्हीं के अनुसार नियम बनते हैं।


Question 23:

विशेष रिपोर्ट किसे कहते हैं ? यह कैसे तैयार की जाती है और इसके लेखन की शैली स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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विशेष रिपोर्ट: सामान्य समाचारों से हटकर किसी विशिष्ट घटना, समस्या या मुद्दे की गहरी छानबीन (Investigation) और विश्लेषण करके लिखी गई रिपोर्ट को 'विशेष रिपोर्ट' कहते हैं।


तैयारी: इसे तैयार करने के लिए तथ्यों को एकत्र करना, सर्वेक्षण करना, संबंधित लोगों के साक्षात्कार लेना और आंकड़ों का विश्लेषण करना पड़ता है।


शैली: इसकी भाषा सरल और सहज होती है। यह प्राय: 'उल्टा पिरामिड शैली' या 'फीचर शैली' (कथात्मक) में लिखी जाती है। इसमें तथ्यों के साथ-साथ विश्लेषण और व्याख्या पर अधिक जोर दिया जाता है।
Quick Tip: विशेष रिपोर्ट = तथ्य + विश्लेषण (Deep Dive)। यह 'ब्रेकिंग न्यूज़' से अलग 'व्याख्यात्मक' होती है।


Question 24:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य कैसे विभाजित किए जाते हैं ?

Correct Answer:
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कहानी को नाटक में बदलते समय दृश्यों का विभाजन मुख्य रूप से स्थान (Place) और समय (Time) के आधार पर किया जाता है।


1. स्थान परिवर्तन: यदि कहानी का घटनास्थल बदलता है (जैसे घर से बाज़ार), तो नाटक में एक नया दृश्य शुरू होता है।


2. समय परिवर्तन: यदि घटनाओं के बीच समय का लंबा अंतराल हो (जैसे सुबह से शाम), तो भी दृश्य बदल दिया जाता है।


एक ही स्थान और एक ही समय में घटित होने वाली घटना को एक दृश्य (Scene) के अंतर्गत रखा जाता है।
Quick Tip: नाटक में 'कैमरा' नहीं होता, इसलिए 'पर्दा गिरना' या 'लाइट्स ऑफ' ही दृश्य बदलने का माध्यम है, जो स्थान/समय बदलने पर होता है।


Question 25:

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :

  • (A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
  • (B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
  • (D) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
Correct Answer: (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
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कविता 'छोटा मेरा खेत' में रूपकों का प्रयोग किया गया है। सही मिलान इस प्रकार है:


1. छोटा मेरा खेत: कवि ने अपने 'कागज के पन्ने' (i) को एक चौकोना खेत माना है जहाँ वह रचना करता है।


2. अंकुर फूटना: जब विचार का बीज कल्पना का खाद-पानी पाकर विकसित होता है, तो वह 'शब्दों' (iii) के रूप में बाहर आता है। इसे ही अंकुर फूटना कहा गया है।


3. पल्लवित पुष्पित होना: जब शब्दों में भाव और रस भर जाता है, तो वह एक पूर्ण 'साहित्यिक कृति' (ii) का रूप धारण कर लेती है।


अतः सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: रूपक अलंकार (Metaphor) को समझें: खेत = कागज, बीज = विचार, अंकुर = शब्द।


Question 26:

कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है :

  • (A) विचार और अभिव्यक्ति का
  • (B) कवि के परिश्रम का
  • (C) कल्पना का
  • (D) शब्दों का
Correct Answer: (A) विचार और अभिव्यक्ति का
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कविता के अनुसार, "कल्पना के रसायनों को पी / बीज गल गया निःशेष"।


यहाँ 'बीज' उस प्रारंभिक विचार या अनुभूति (Idea/Thought) का प्रतीक है जो कवि के मन में उत्पन्न होता है।


यही विचार अभिव्यक्ति का रूप लेकर कविता (फसल) बनता है।


'शब्द' तो अंकुर हैं जो बीज से निकलते हैं, और 'कल्पना' वह रसायन (खाद) है जो बीज को पकाता है।


अतः बीज 'विचार और अभिव्यक्ति' का मूल है।
Quick Tip: सृजन प्रक्रिया: विचार (बीज) + कल्पना (खाद) \(\rightarrow\) शब्द (अंकुर) \(\rightarrow\) कविता (फसल)।


Question 27:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।

कारण : असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • (B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
  • (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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कवि ने साहित्य के रस को 'अक्षय पात्र' कहा है जो कभी खाली नहीं होता।


कथन सही है कि साहित्य की रसधारा 'कालजयी' (Timeless) होती है, अर्थात् समय का उस पर प्रभाव नहीं पड़ता।


कारण भी सही है कि इसे युगों-युगों तक असंख्य पाठकों द्वारा पढ़ा (लूटा) जाता है, फिर भी इसका आनंद कम नहीं होता।


चूँकि आनंद कभी समाप्त नहीं होता, इसीलिए इसे कालजयी कहा जाता है। अतः कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Quick Tip: 'कालजयी' का अर्थ ही है जो समय की सीमाओं से परे हो और कभी नष्ट न हो।


Question 28:

‘झूमने लगे फल’ का आशय है :

  • (A) बीज अंकुरित होने लगे
  • (B) फल हवा के संपर्क से झूमने लगे
  • (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
  • (D) बीज फूलों का रूप धारण करने लगे
Correct Answer: (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
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काव्यांश में 'फल' का अर्थ कविता से मिलने वाला 'रस' या 'आनंद' है।


जब खेती पक जाती है तो फल झूमते हैं; उसी प्रकार जब कवि की रचना पूरी हो जाती है, तो वह पाठकों को अलौकिक आनंद देने लगती है।


यह कवि के सृजन कर्म (परिश्रम) का परिणाम (प्रतिफल) है।


अतः लाक्षणिक अर्थ में यह 'परिश्रम का प्रतिफल' मिलने का सूचक है।
Quick Tip: साहित्यिक खेती में: फल = रसास्वादन/आनंद/कृति की पूर्णता।


Question 29:

‘बीज गल गया निःशेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है ?

  • (A) खेतों में फ़सल उगाने के लिए बीजों को मिट्टी में बोना पड़ता है।
  • (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
  • (C) बीजों के गलने पर ही खेतों में फ़सल के अंकुर फूटते हैं।
  • (D) कल्पना के संसर्ग बिना साहित्यिक कृति की रचना असंभव है।
Correct Answer: (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
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'बीज गल गया निःशेष' का प्रतीकात्मक अर्थ है 'अहंकार' का मिटना।


जिस प्रकार बीज को वृक्ष बनने के लिए अपना अस्तित्व मिट्टी में मिलाना पड़ता है, उसी प्रकार एक रचनाकार को महान कृति रचने के लिए अपने 'अहं' (Ego) को मिटाना पड़ता है।


जब तक रचनाकार स्वयं को और अपने पूर्वाग्रहों को गला नहीं देता, तब तक निष्पक्ष और व्यापक रचना का जन्म नहीं हो सकता।


अतः यह आत्म-त्याग की ओर संकेत करता है।
Quick Tip: अहंकार का विसर्जन (Ego dissolution) ही नवनिर्माण की पहली शर्त है—यही इस पंक्ति का दार्शनिक भाव है।


Question 30:

‘बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से जैसे धुल गई हो’ – ‘उषा’ कविता से उद्धृत इस पंक्ति में किस सिल के और कौन-से केसर से धुलने की बात कही गई है ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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कवि शमशेर बहादुर सिंह ने 'बहुत काली सिल' का प्रयोग अंधेरे से घिरे आकाश के लिए किया है। भोर के समय आकाश गहरा नीला-काला होता है जो पत्थर की सिल जैसा लगता है।


'लाल केसर' का प्रयोग सूर्योदय से पहले की लालिमा (सूर्य की लाल किरणों) के लिए किया गया है।


कवि कल्पना करता है कि जैसे किसी ने काली सिल को लाल केसर मिले पानी से धो दिया हो, वैसे ही सुबह की लालिमा ने रात के अंधेरे को धोकर आकाश को साफ और रंगीन बना दिया है।
Quick Tip: बिंब (Image) को पहचानें: काली सिल = रात का अंधेरा, लाल केसर = सुबह की लालिमा।


Question 31:

‘कविता के बहाने’ पाठ के आधार पर चिड़िया और कविता का संबंध स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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कवि कुंवर नारायण ने चिड़िया और कविता के संबंध को विपरीत (Contrast) रूप में दर्शाया है।


चिड़िया की उड़ान की एक सीमा है; वह केवल आकाश या भौतिक दुनिया में उड़ सकती है (बाहर-भीतर, इस घर-उस घर)।


इसके विपरीत, कविता की उड़ान असीमित और अनंत है। वह कल्पना के पंख लगाकर कहीं भी (मानव मन, भूत-भविष्य) जा सकती है।


इसलिए कवि कहता है—"कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने"।
Quick Tip: तुलना का आधार 'सीमा' (Limit) है—चिड़िया ससीम है, कविता असीम है।


Question 32:

‘पतंग’ कविता में ‘बच्चों का सूरज के सामने आने’ से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
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'बच्चों का सूरज के सामने आने' का अभिप्राय उनके डर के खत्म होने और आत्मविश्वास के बढ़ने से है।


पतंग उड़ाते समय जब बच्चे छतों के खतरनाक किनारों से गिरकर बच जाते हैं, तो वे निडर हो जाते हैं।


वे अब 'सुनहले सूरज' (जो तेज और ऊर्जा का प्रतीक है) के सामने और भी अधिक साहस, उत्साह और सीना तानकर आते हैं।


यह उनकी अदम्य जिजीविषा और भयमुक्त बचपन को दर्शाता है।
Quick Tip: सूरज यहाँ 'चुनौती' और 'प्रकाश' दोनों का प्रतीक है; उसके सामने आने का मतलब है चुनौतियों को स्वीकारना।


Question 33:

कवितावली के छंदों के आधार पर तत्कालीन आर्थिक विषमताओं का वर्णन करते हुए लिखिए कि वर्तमान समय में क्या स्थिति है ।

Correct Answer:
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तुलसीदास जी ने 'कवितावली' में अपने समय की भीषण गरीबी और बेरोजगारी का चित्रण किया है।


उस समय किसान के पास खेती, भिखारी को भीख, व्यापारी को व्यापार और नौकर को नौकरी नहीं थी ("किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी...").


लोग पेट भरने के लिए गलत कार्य करने और अपनी संतान तक बेचने को मजबूर थे।


वर्तमान स्थिति: आज भी स्थिति पूरी तरह नहीं बदली है। बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी अब भी ज्वलंत समस्याएं हैं। श्रमिक वर्ग आज भी आजीविका के लिए पलायन और संघर्ष कर रहा है, जो तुलसी के समय की याद दिलाता है।
Quick Tip: उत्तर में 'बेरोजगारी' और 'भुखमरी' शब्दों का प्रयोग करें और 'अतीत' की तुलना 'वर्तमान' से करें।


Question 34:

‘छोटा मेरा खेत’ कविता खेतों के रूपक में बँधी कवि-कर्म के रूपक को व्यक्त करने वाली कविता है ।’ सिद्ध कीजिए ।

Correct Answer:
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यह कथन पूर्णतः सत्य है क्योंकि कवि उमाशंकर जोशी ने खेती की पूरी प्रक्रिया को काव्य-रचना (कवि-कर्म) पर आरोपित किया है:


1. खेत: कागज का पन्ना।

2. बीज: मन में आया विचार/क्षण।

3. खाद-पानी: कवि की कल्पना और भावनात्मक आवेग।

4. अंकुर: शब्द और अभिव्यक्ति।

5. फसल/कटाई: तैयार कविता और उससे मिलने वाला शाश्वत आनंद (रस)।


इस प्रकार, कवि ने बड़ी कुशलता से खेती के रूपकों के माध्यम से साहित्य सृजन की प्रक्रिया को समझाया है।
Quick Tip: चरणबद्ध रूपक (Step-by-step Metaphor) याद रखें: कागज \(\rightarrow\) खेत, विचार \(\rightarrow\) बीज, शब्द \(\rightarrow\) अंकुर।


Question 35:

‘जग-जीवन को भार’ की तरह लेकर फिरने वाला कवि उससे निरपेक्ष क्यों नहीं रह पाता ? ‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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कवि हरिवंशराय बच्चन कहते हैं कि यद्यपि दुनिया के रीति-रिवाज और समस्याएँ उनके लिए एक 'भार' (बोझ) की तरह हैं, फिर भी वे दुनिया से पूरी तरह कटकर (निरपेक्ष) नहीं रह सकते।


इसका कारण यह है कि उनका अस्तित्व और पहचान इसी समाज से जुड़ी है।


वे कहते हैं, "फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ"। उनका दुनिया से रिश्ता 'प्रीति-कलह' (प्यार और तकरार) का है।


वे समाज में रहकर ही अपने कष्टों और प्रेम को अनुभव करते हैं, इसलिए वे संसार से विमुख नहीं हो सकते।
Quick Tip: मनुष्य एक 'सामाजिक प्राणी' है—यही कारण है कि कष्ट देने वाली दुनिया को भी वह छोड़ नहीं पाता।


Question 36:

बाज़ार में सद्भाव का ह्रास कब दिखाई देता है ?

  • (A) जब लोग अपनी परचेंजिंग पावर का प्रदर्शन करते हैं ।
  • (B) जब लोग आपस में ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं ।
  • (C) जब बाज़ार में धनी और निर्धन के बीच अंतर किया जाता है ।
  • (D) जब बाज़ार में अपनों को अधिक महत्त्व दिया जाता है ।
Correct Answer: (B) जब लोग आपस में ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं ।
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गद्यांश में लिखा है: "इस सद्भाव के ह्रास पर आदमी आपस में भाई-भाई और सुहृद... नहीं रह जाते हैं और आपस में कोरे ग्राहक और बेचक (विक्रेता) की तरह व्यवहार करते हैं।"


इसका अर्थ है कि जब मानवीय रिश्ते खत्म हो जाते हैं और केवल व्यावसायिक संबंध (खरीदने-बेचने का) रह जाता है, तब सद्भाव नष्ट हो जाता है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'ह्रास' का अर्थ है 'कमी'। रिश्तों की जगह जब 'सौदा' ले ले, तो सद्भाव खत्म हो जाता है।


Question 37:

बाज़ार में सद्भाव के ह्रास का क्या दुष्परिणाम निकलता है ?

  • (A) लोगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है ।
  • (B) आपसी प्रेम-भाव कम होने लगता है ।
  • (C) ग्राहक का शोषण होने लगता है ।
  • (D) पैसों का अभाव खलने लगता है ।
Correct Answer: (C) ग्राहक का शोषण होने लगता है ।
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गद्यांश में उल्लेख है कि सद्भाव घटने पर लोग "एक-दूसरे को ठगने की घात में" रहते हैं।


आगे लिखा है: "एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दिखता है... कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है।"


'शिकार होना' या 'ठगा जाना' स्पष्ट रूप से शोषण (Exploitation) की ओर संकेत करता है।


अतः सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: 'ठगना' और 'शिकार होना' = शोषण।


Question 38:

‘ऐसे बाज़ार मानवता के लिए विडंबना हैं’ – पंक्ति में किस बाज़ार की ओर संकेत किया गया है ?

  • (A) जिस बाज़ार में लोगों की आवश्यकताओं का लाभ उठाकर शोषण किया जाए ।
  • (B) जिस बाज़ार में वस्तुओं को आकर्षक रूप से सजाकर रखा जाए ।
  • (C) जिस बाज़ार में सामाजिक समता की अवहेलना की जाए ।
  • (D) जिस बाज़ार में आर्थिक विषमता का बोलबाला दिखाई दे ।
Correct Answer: (A) जिस बाज़ार में लोगों की आवश्यकताओं का लाभ उठाकर शोषण किया जाए ।
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गद्यांश में ऐसे बाज़ार की आलोचना की गई है जहाँ "आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता; बल्कि शोषण होने लगता है"।


जहाँ कपट और छल से ग्राहक को लूटा जाता है, वह बाज़ार मानवता के लिए शाप (विडंबना) है।


इसलिए विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: बाज़ार का असली उद्देश्य 'आवश्यकता पूरी करना' है, न कि 'शोषण करना'। जो बाज़ार शोषण करे, वह विडंबना है।


Question 39:

आत्मीयजन और पड़ोसी भी ग्राहक के रूप में दिखाई देना, किस प्रवृत्ति का सूचक है ?

  • (A) समतावादी
  • (B) उपभोक्तावादी
  • (C) अनैतिकतावादी
  • (D) रूढ़िवादी
Correct Answer: (B) उपभोक्तावादी
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जब हम अपने मित्रों और पड़ोसियों को भी केवल 'ग्राहक' या 'विक्रेता' की नज़र से देखते हैं, तो यह उपभोक्तावादी संस्कृति (Consumerism) का लक्षण है।


इस संस्कृति में हर संबंध को 'लाभ-हानि' और 'व्यापार' के तराजू पर तौला जाता है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: उपभोक्तावाद (Consumerism) वह सोच है जहाँ हर व्यक्ति और वस्तु 'कमोडिटी' (उपभोग की वस्तु) बन जाती है।


Question 40:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘मायावी शास्त्र’ का अभिप्राय है :

  • (A) कल्पना से परिपूर्ण शास्त्र
  • (B) चकाचौंध से परिपूर्ण शास्त्र
  • (C) अर्थशास्त्र की व्याख्या करने वाला शास्त्र
  • (D) छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र
Correct Answer: (D) छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र
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लेखक ने उस अर्थशास्त्र को 'मायावी' और 'अनीति-शास्त्र' कहा है जो बाज़ार के कपट और शोषण को बढ़ावा देता है।


'मायावी' का अर्थ यहाँ जादुई नहीं, बल्कि भ्रामक और छल-पूर्ण है।


ऐसा शास्त्र जो धन कमाने के लिए नैतिकता को ताक पर रख दे, वह छल-कपट का शास्त्र है।


अतः विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: लेखक जैनेंद्र कुमार के अनुसार अनैतिक अर्थशास्त्र = अनीति शास्त्र = मायावी शास्त्र।


Question 41:

पितृसत्तात्मक प्रधान समाज में भक्तिन ने अपनी बेटियों के हक की लड़ाई किस प्रकार लड़ी और उसका क्या परिणाम निकला ?

Correct Answer:
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पितृसत्तात्मक समाज में, पति की मृत्यु के बाद भक्तिन के जेठ और जिठौत (जेठ के बेटे) उसकी संपत्ति हड़पना चाहते थे।


भक्तिन ने हार नहीं मानी। उसने गुरु से कान फुकवाकर (कंठी माला पहनकर) पत्नी-धर्म निभाने और गृहस्वामिनी बने रहने की घोषणा की। उसने अपनी बेटियों की शादी करके उन्हें अधिकार दिलाए।


परिणाम: यद्यपि उसे परिवार के षड्यंत्रों (जैसे विधवा बेटी का जबरन विवाह का प्रयास) का सामना करना पड़ा और अंततः गांव छोड़ना पड़ा, लेकिन उसने लंबे समय तक अपने और अपनी बेटियों के अस्तित्व और स्वाभिमान की रक्षा की।
Quick Tip: भक्तिन का संघर्ष 'अकेली औरत' बनाम 'पूरा पितृसत्तात्मक समाज' था।


Question 42:

‘अपनी ज़रूरत को पीछे रखकर दूसरे के कल्याण के लिए दे देना, त्याग होता है।’ ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के संदर्भ में इसका आशय उदाहरण सहित दीजिए।

Correct Answer:
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जीजी लेखक को समझाती हैं कि जब आपके पास बहुत कुछ हो और आप थोड़ा दान दें, तो वह त्याग नहीं है।


सच्चा त्याग तब है जब आपके पास स्वयं किसी चीज़ (जैसे पानी) की कमी हो, फिर भी आप अपनी ज़रूरत रोककर उसे दूसरों के कल्याण (इंद्रसेना/समाज) के लिए दे दें।


उदाहरण: भीषण गर्मी और सूखे में, जब पीने का पानी भी मुश्किल से मिलता था, तब भी जीजी और गाँव की महिलाएँ संचित पानी को इंद्रसेना पर फेंक देती थीं। यह उनका अपनी प्यास के ऊपर लोक-कल्याण को प्राथमिकता देना था।
Quick Tip: 'त्याग' वही है जिसमें 'कष्ट' सहना पड़े। अभाव में दान देना ही श्रेष्ठ है।


Question 43:

शिरीष के माध्यम से लेखक ने कालजयी अवधूत की भाँति विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल खड़े रहने की प्रेरणा दी है। स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने शिरीष के फूल की तुलना एक अवधूत (संन्यासी) से की है।


जेठ की जलती दुपहरी और लू में जब सारी वनस्पति सूख जाती है, तब भी शिरीष हरा-भरा रहता है और फूलों से लदा रहता है।


वह वायुमंडल से रस खींचकर जीवित रहता है।


इसके माध्यम से लेखक प्रेरणा देते हैं कि मनुष्य को भी संघर्षों, दुखों और विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। उसे शिरीष की तरह अनासक्त और अविचल रहकर अपनी जिजीविषा और सृजनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
Quick Tip: शिरीष = अजेय जीवन शक्ति (Indomitable Life Force)। संदेश: संघर्ष में भी मुस्कुराना।


Question 44:

‘जीवन में प्राय: सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है ।’ कथन का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि महादेवी जी ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है ?

Correct Answer:
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इस कथन का आशय है कि अक्सर व्यक्ति के नाम का अर्थ उसके जीवन की वास्तविकता के ठीक विपरीत होता है।


महादेवी वर्मा जी ने यह कथन पाठ की नायिका भक्तिन के संदर्भ में कहा है।


भक्तिन का असली नाम 'लक्ष्मी' (धन की देवी) था, जो समृद्धि का प्रतीक है।


किंतु उसका वास्तविक जीवन घोर निर्धनता, अभावों और संघर्षों से भरा हुआ था।


उसके नाम और उसके भाग्य में यह विडंबनापूर्ण विरोधाभास देखकर ही लेखिका ने यह टिप्पणी की। इसी कारण भक्तिन ने लेखिका से अनुरोध किया था कि उसे उसके असली नाम से न पुकारा जाए।
Quick Tip: विरोधाभास (Irony) को स्पष्ट करें: नाम = लक्ष्मी (अमीर), स्थिति = गरीब।


Question 45:

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में पानी के लिए गुहार लगाते बच्चों की टोली में ‘गगरी फूटी बैल पियासा’ की बात क्यों की जा रही है ? स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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लोकगीत की पंक्ति "गगरी फूटी बैल पियासा" भारतीय किसान की बदनसीबी और अभाव को दर्शाती है।


इसका अर्थ है कि बादलों के आने या बारिश होने (संसाधन मिलने) के बावजूद, हमारी व्यवस्था रूपी गगरी फूटी हुई है, इसलिए उसमें कुछ संचित नहीं हो पाता।


परिणामस्वरूप, कृषि का आधार 'बैल' (किसान/आम आदमी) प्यासा का प्यासा रह जाता है।


यह पंक्ति इस कड़वे सत्य को उजागर करती है कि तमाम योजनाओं और बारिश के बाद भी ज़मीनी स्तर पर संकट और प्यास यथावत बनी हुई है।
Quick Tip: प्रतीक समझें: गगरी = व्यवस्था/भाग्य, बैल = कृषि/आम जनता, प्यासा = अभाव।


Question 46:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि जाति आधारित श्रम विभाजन का देश के आर्थिक पहलू पर क्या प्रभाव पड़ता है ।

Correct Answer:
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डॉ. अंबेडकर के अनुसार, जाति प्रथा पर आधारित श्रम विभाजन देश के आर्थिक विकास के लिए बाधक है। इसके प्रमुख प्रभाव हैं:


1. अरुचिपूर्ण कार्य: इसमें मनुष्य को उसकी रुचि या क्षमता के अनुसार नहीं, बल्कि जन्म के आधार पर काम सौंपा जाता है। विवशता में किया गया काम 'अरुचि' पैदा करता है।


2. कार्यकुशलता में कमी: जब व्यक्ति मन लगाकर काम नहीं करता, तो उसकी उत्पादन क्षमता और कुशलता घट जाती है।


3. बेरोजगारी: तकनीकी बदलाव के समय पेशा बदलने की अनुमति न होने के कारण यह बेरोजगारी और भुखमरी का कारण बनता है।


4. पूँजी का ह्रास: यह प्रथा श्रम की गतिशीलता (Mobility of labor) को रोकती है, जिससे देश की आर्थिक प्रगति कुंठित हो जाती है।
Quick Tip: मुख्य बिंदु: 'स्वाभाविक रुचि का अभाव' \(\rightarrow\) 'कम उत्पादकता' \(\rightarrow\) 'आर्थिक हानि'।


Question 47:

‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी का प्रमुख पात्र वर्तमान में रहता है, किंतु अतीत को आदर्श मानता है । इससे उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा ? स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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यशोधर बाबू शारीरिक रूप से वर्तमान (आधुनिक समय) में जीते हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे अपने आदर्श 'किशनदा' के पुराने मूल्यों (अतीत) में ही रमे हुए हैं।


इसका उनके जीवन पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ा है:


1. पारिवारिक अलगाव: उनकी पत्नी और बच्चे समय के साथ बदल (आधुनिक हो) गए हैं, जबकि यशोधर बाबू लकीर के फकीर बने हुए हैं। इससे वे अपने ही घर में बेगानी और उपेक्षित महसूस करते हैं।


2. द्वंद्व: वे हर नई चीज़ (फ्रिज, पार्टी, ड्रेसिंग गाउन) को "समहाउ इम्प्रापर" (अनुचित) मानते हैं, जिससे वे न तो पूरी तरह परंपरा निभा पाते हैं और न ही आधुनिकता को अपना पाते हैं।


3. एकाकीपन: अतीत से चिपके रहने के कारण वे समाज और परिवार से कट गए हैं और एक कुंठित व एकाकी जीवन जीने को विवश हैं।
Quick Tip: यह कहानी 'जनरेशन गैप' (पीढ़ी अंतराल) की त्रासदी है। अतीत का मोह वर्तमान के सुख को नष्ट कर देता है।


Question 48:

आनंदा की शिक्षा फिर से शुरू करवाने के लिए उसकी माँ को झूठ का सहारा लेना पड़ा । क्या उसकी माँ द्वारा उठाया गया यह कदम उचित था ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए ।

Correct Answer:
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हाँ, आनंदा की माँ द्वारा उठाया गया यह कदम पूर्णतः उचित था।


आनंदा के पिता एक लापरवाह और स्वार्थी व्यक्ति थे जो बेटे को पढ़ाना नहीं चाहते थे ताकि वे स्वयं ऐश कर सकें और बेटा खेत में काम करे।


माँ ने दत्ता जी राव (गाँव के मुखिया) के पास जाकर झूठ बोला कि "पिताजी ने मुझे यहाँ भेजा है" ताकि राव साहब पिता को बुलाकर डांटें और बेटे को स्कूल भेजने के लिए बाध्य करें।


यह झूठ किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि एक बच्चे के भविष्य निर्माण और शिक्षा के महान उद्देश्य के लिए बोला गया था।


इसी झूठ के कारण आनंदा पढ़ सका और एक महान लेखक बन सका। नीतिशास्त्र भी कहता है कि व्यापक हित के लिए बोला गया झूठ पाप नहीं होता।
Quick Tip: तर्क: साध्य (शिक्षा/भविष्य) पवित्र था, इसलिए साधन (झूठ) भी न्यायसंगत हो गया।


Question 49:

‘सिंधु घाटी सभ्यता और संस्कृति का सामान भले ही अजायबघरों की शोभा बढ़ा रहा हो, शहर जहाँ था अब भी वहीं है ।’ – इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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लेखक ओम थानवी का आशय है कि खुदाई में मिली चल वस्तुएँ (जैसे मुहरें, औज़ार, मूर्तियाँ, खिलौने) तो दिल्ली, लाहौर और लंदन के संग्रहालयों (अजायबघरों) में चली गई हैं।


लेकिन, मुअनजोदड़ो का स्थापत्य (Architecture)—उसकी सड़कें, गलियाँ, पक्की ईंटों की दीवारें, स्नानघर और कोठार—आज भी उसी जगह पर मौजूद हैं।


हम आज भी उन सड़कों पर चलकर उस सभ्यता की धड़कन महसूस कर सकते हैं।


लाक्षणिक रूप में, इसका अर्थ यह भी है कि भारतीय संस्कृति में उस सभ्यता की निरंतरता आज भी हमारे रहन-सहन, बैलगाड़ियों और लोक-जीवन में जीवित है। सभ्यता भौतिक रूप से अजायबघर में है, पर सांस्कृतिक रूप से वह भारत की आत्मा में बसी है।
Quick Tip: दो पहलू: 1. अचल अवशेष (खंडहर) वहीं हैं। 2. सांस्कृतिक निरंतरता (Continuity) आज भी जीवित है।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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