
The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.
The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 1 - 2/5/1) is available for download here.
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मनुष्य अनुचित कार्यों को क्यों छोड़ना चाहता है ?
गद्यांश की पहली पंक्ति में उल्लेख है कि "मनुष्य अपने अनुचित कार्यों... के संबंध में दुखी होता है"।
मनुष्य उन कृत्यों के नकारात्मक परिणामों (दुख) को देख-सुन चुका होता है।
चूँकि ये कार्य उसे पीड़ा या दुख देते हैं, इसलिए वह उन्हें छोड़ना चाहता है।
अतः विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: Directly correlate the question with the first sentence of the passage. The key emotion mentioned is 'Dukhi' (Sad/Sorrowful).
गद्यांश के अनुसार व्यक्ति के कृत्यों पर उसे किस प्रकार के परामर्श मिलते हैं ?
गद्यांश में लिखा है: "उसे परामर्श और उपदेश भी उसी प्रकार के मिलते रहते हैं, जिनमें सुधार करने की अपेक्षा रहती है।"
'सुधार करने की अपेक्षा' का अर्थ है कि परामर्श का उद्देश्य 'सुधार' (Reform) लाना है।
इसलिए, ऐसे परामर्श को 'सुधारात्मक' (Reformative) कहा जाएगा।
Quick Tip: Identify keywords: 'Sudhar karne ki apeksha' implies 'Sudharatmak' (Reformative) advice.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
कथन I : मन अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने के लिए सहमत हो जाता है ।
कथन II : मन को अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने के लिए कोई परामर्श नहीं मिलता ।
कथन III : मन अभ्यस्त प्रकृति छोड़ने से असहमत ही रहता है ।
कथन IV : सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण व्यक्ति का मन अवांछनीय कृत्यों को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता ।
गद्यांश के अनुसार कौन-से कथन सही हैं ?
कथन I गलत है क्योंकि गद्यांश कहता है, "किंतु जब छोड़ने की बात आती है तो मन मुकर जाता है।"
कथन II गलत है क्योंकि गद्यांश में "परामर्श और उपदेश... मिलते रहते हैं" लिखा है।
कथन III सही है क्योंकि गद्यांश के अनुसार, "अभ्यस्त प्रकृति को छोड़ने के लिए मन सहमत नहीं होता।"
कथन IV सही है। गद्यांश के अंतिम अनुच्छेद में "दिखावा" (Social Prestige) और "कुप्रथाओं" का उल्लेख है, जहाँ लोग सामाजिक दबाव या दिखावे के कारण पुरानी रीतियों (अवांछनीय कृत्यों) को नहीं छोड़ पाते।
अतः कथन III और IV सत्य हैं।
Quick Tip: Verify each statement against the text. Statement IV relates to the example of 'expensive weddings' and 'show-off' (Dikhava) in the last paragraph.
अवांछनीय स्वभाव की हानियाँ कौन-कौन सी हैं ?
गद्यांश के अनुसार, अवांछनीय स्वभाव या बुरी आदतों की मुख्य हानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. आर्थिक तंगी (Financial Crunch): धन का अपव्यय होता है।
2. बदनामी (Defamation): समाज में प्रतिष्ठा गिरती है।
3. स्वास्थ्य की क्षति (Health Loss): शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है।
4. मनोमालिन्य (Mental Disharmony): मन में ग्लानि और अशांति रहती है।
Quick Tip: Locate the list in the passage: "Arthik tangi, badnami, swasthya ki kshati, manomalinya".
मनुष्य का मनोबल टूटने का क्या परिणाम होता है ?
जब मनुष्य का मनोबल टूट जाता है, तो वह मानसिक रूप से अत्यंत दुर्बल हो जाता है।
उसे यह विश्वास नहीं रहता कि उसका सुधार संभव है।
वह यह मान लेता है कि उसका पूरा जीवन अब इन्हीं बुराइयों के साथ बीतेगा और उसे दुर्व्यसनों से मुक्ति नहीं मिलेगी।
परिणामस्वरूप, वह प्रयास करना छोड़ देता है और निराशा के गर्त में डूब जाता है।
Quick Tip: Focus on the psychological impact: Loss of hope (Vishwas nahi hota) and acceptance of defeat (Mukti nahi milegi).
मनुष्य दुष्प्रवृत्तियों को क्यों नहीं छोड़ पाता ?
मनुष्य के दुष्प्रवृत्तियों को न छोड़ पाने के मुख्य कारण हैं:
1. अभ्यस्त प्रकृति (Habituated Nature): मन को पुरानी आदतों पर चलने की आदत हो जाती है।
2. मन की असहमति: बुद्धि और तर्क के बावजूद, 'मन' छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता और मुकर जाता है।
3. परिणाम का भय: व्यक्ति को लगता है कि आदत छोड़ने से उसे कष्ट होगा (जैसे नशे की लत छोड़ने पर शारीरिक कष्ट)।
4. दिखावा और सामाजिक दबाव: कई बार 'दिखावे' (Social Show-off) के कारण भी कुरीतियाँ नहीं छूटतीं।
Quick Tip: Synthesize points from both paragraphs: The internal resistance of the 'Mind' and external factors like 'Social Show-off'.
जिस काम को मनुष्य नहीं करने की सोचता है, उसी काम को वह फिर से क्यों करने लग जाता है ?
मनुष्य जिस काम को न करने का निश्चय करता है, उसे पुनः कर बैठता है क्योंकि उसका 'मन' अभ्यस्त चिंतन (Habituated Thinking) का गुलाम होता है।
जब कार्य करने का समय आता है, तो तार्किक बुद्धि हार जाती है और पुरानी आदतें (संस्कार) हावी हो जाती हैं।
मनुष्य अपने मन की दुर्बलता और पुराने ढर्रे पर चलने की सहज प्रवृत्ति के कारण उसी कार्य को दोहराता है।
Quick Tip: Phrase to use: 'Abhyast chintan par chal padte hain' (Following the habituated path of thinking).
दान को जीवन का झरना क्यों कहा गया है ?
कवि ने कहा है: "दान तो जीवन का झरना है... जीवन का अभियान दान-बल से अजस्र चलता है।"
झरना निरंतर बहता रहता है, जो गतिशीलता का प्रतीक है। उसी प्रकार, दान से जीवन का प्रवाह (Flow) और गति बनी रहती है।
यदि दान को रोक दिया जाए, तो जीवन रुक जाता है (मृत्यु समान)। अतः 'निरंतरता' (Continuity) ही सही संदर्भ है।
Quick Tip: Metaphor analysis: Fountain/Stream (Jharna) = Continuous Flow = Continuity of Life (Nirantarata).
‘अंतिम मोल चुकाने वाला’ से अभिप्राय है :
कविता में 'अंतिम मोल चुकाने' का अर्थ है अपना सब कुछ न्योछावर कर देना।
संदर्भ यह है: "जहाँ कहीं है ज्योति जगत में... वहाँ खड़ा है कोई अंतिम मोल चुकाने वाला।"
अर्थात्, दुनिया में जहाँ भी प्रकाश (भलाई/ज्ञान) है, वह किसी ऐसे व्यक्ति के त्याग का परिणाम है जिसने अपना 'स्वत्व' (Selfhood) त्याग कर परोपकार किया है।
Quick Tip: Interpret the symbolism: 'Jyoti' (Light) comes from the sacrifice of the 'wick/oil'. Hence, 'Antim Mol' is total self-sacrifice.
कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाला/वाले कथन है/हैं :
(I) दान से जीवन को गति मिलना
(II) परोपकार की प्रेरणा
(III) मृत्यु का वरण करना
विकल्प :
कथन (I) सही है क्योंकि कविता की शुरुआत ही "जीवन का अभियान दान-बल से अजस्र चलता है" से होती है।
कथन (II) सही है क्योंकि पूरी कविता में स्नेह का दीया जलाने और फल देने (परोपकार) की प्रेरणा दी गई है।
कथन (III) गलत है। कविता 'आत्मघात' (कीट का मरना) को नहीं, बल्कि 'आत्मदान' (सार्थक त्याग) को महत्त्व देती है। मृत्यु का वरण करना लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन देना लक्ष्य है।
अतः विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: Distinguish between 'Suicide' (Death) and 'Sacrifice' (Life-giving). The poem celebrates the latter.
कवि ने लोगों के द्वारा दान को क्या मान लेने की बात कही है ?
कवि ने लोगों से कहा है कि वे दान को 'अहंकार' या 'स्वत्व का त्याग' (एहसान) न मानें।
पंक्तियाँ हैं: "अहंकारवश उसे स्वत्व का त्याग मान लेते हैं। यह न स्वत्व का त्याग, दान तो जीवन का झरना है।"
कवि चाहता है कि लोग दान को जीवन की एक सहज, स्वाभाविक प्रक्रिया और कर्तव्य मानें, न कि अपनी महानता का प्रमाण।
Quick Tip: The poet contrasts 'Svatva ka tyag' (Sacrifice of ownership - Egotistical) with 'Jeevan ka jharna' (Natural flow - Selfless).
वृक्ष और फलों का उदाहरण यहाँ किस उद्देश्य से दिया गया है ?
वृक्ष और फलों का उदाहरण 'निस्वार्थ त्याग' और 'नवजीवन' की प्रक्रिया को समझाने के लिए दिया गया है।
वृक्ष अपने फल किसी पर 'कृपा' करने के लिए नहीं गिराते, बल्कि यह उनका स्वभाव है।
पुराने फलों का गिरना (त्याग) ही नए फलों (नये जीवन) के आने का मार्ग प्रशस्त करता है।
यह दर्शाता है कि त्याग (दान) सृजन और नवीनीकरण के लिए आवश्यक है।
Quick Tip: Use the cyclical argument: Old leaves/fruits fall \(\rightarrow\) Space created \(\rightarrow\) New life emerges. This validates 'Daan' as necessary for renewal.
आत्मदान करने वाले लोग अमर क्यों हो जाते हैं ?
'आत्मदान' करने वाले लोग अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं।
शारीरिक रूप से मृत्यु के मुख में पड़ने के बावजूद, उनके सत्कर्म, विचार और उनके द्वारा फैलाई गई 'ज्योति' (प्रेरणा) संसार में जीवित रहती है।
इस कीर्ति और प्रभाव के कारण वे मरकर भी अमर कहलाते हैं।
Quick Tip: Concept: Physical death vs. Immortal Legacy. 'Self-giving' (Aatmadan) creates a legacy that defies death.
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(i) वैज्ञानिक आविष्कारों का आधुनिक भारत
शीर्षक : वैज्ञानिक आविष्कारों का आधुनिक भारत
स्वतंत्रता के बाद से भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है।
आज का 'आधुनिक भारत' पूरी तरह से वैज्ञानिक आविष्कारों पर आधारित है।
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में 'चंद्रयान-3' और 'आदित्य L-1' की सफलता ने भारत को विश्व के अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में भारत एक महाशक्ति बनकर उभरा है।
'डिजिटल इंडिया' अभियान और UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसे आविष्कारों ने आम आदमी के जीवन को सुगम और पारदर्शी बना दिया है।
गाँव-गाँव में इंटरनेट की पहुँच ने शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खोले हैं।
चिकित्सा के क्षेत्र में, भारत ने स्वदेशी कोरोना वैक्सीन बनाकर न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि दुनिया की मदद भी की।
रक्षा क्षेत्र में 'ब्रह्मोस' और 'अग्नि' जैसी मिसाइलें हमारी सुरक्षा को अभेद्य बना रही हैं।
निष्कर्षतः, वैज्ञानिक आविष्कार आधुनिक भारत के विकास की रीढ़ हैं।
यदि हम इन आविष्कारों का उपयोग मानव कल्याण और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर करें, तो भारत जल्द ही 'विश्वगुरु' बन सकता है।
Quick Tip: Essay Structure: Start with a strong opening statement about progress. Use current examples like Chandrayaan or UPI to show 'Modernity'. Conclude with a futuristic positive note.
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(ii) लुप्त हो रहे जंगलों का दुष्परिणाम
शीर्षक : लुप्त हो रहे जंगलों का दुष्परिणाम
वन हमारी पृथ्वी के 'फेफड़े' हैं, जो हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं।
परंतु, औद्योगीकरण और शहरीकरण की दौड़ में जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, जिसके भयंकर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा दुष्परिणाम 'ग्लोबल वार्मिंग' (वैश्विक तापन) है।
जंगलों के कम होने से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और मौसम चक्र बिगड़ गया है।
असमय बारिश, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ अब आम हो गई हैं।
जंगली जानवरों के आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे वे रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है।
पहाड़ों पर भूस्खलन की घटनाएँ भी पेड़ों की कटाई का ही परिणाम हैं।
जंगलों के लुप्त होने से जड़ी-बूटियाँ और जैव-विविधता भी खत्म हो रही है।
यदि हम अब भी नहीं चेते, तो वह दिन दूर नहीं जब पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
अतः 'एक पेड़, एक जिंदगी' के मंत्र को अपनाना ही एकमात्र उपाय है।
Quick Tip: Focus on Cause and Effect: Cutting trees \(\rightarrow\) Global Warming/Disasters. Use terms like 'Global Warming', 'Biodiversity', and 'Natural Disasters'.
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(iii) हमारे अधिकार और कर्तव्य
शीर्षक : हमारे अधिकार और कर्तव्य
किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के विकास के लिए 'अधिकार' और 'कर्तव्य' एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
भारतीय संविधान ने हमें छह मौलिक अधिकार दिए हैं, जिनमें समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा और शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रमुख हैं।
ये अधिकार हमें सम्मानपूर्वक जीने और अपनी प्रगति करने का अवसर देते हैं।
परंतु, अधिकार कभी भी अकेले नहीं आते; उनके साथ कर्तव्य भी जुड़े होते हैं।
अक्सर हम अपने अधिकारों के लिए तो लड़ते हैं, लेकिन कर्तव्यों को भूल जाते हैं।
संविधान में वर्णित हमारे मौलिक कर्तव्य, जैसे- राष्ट्रध्वज का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, और पर्यावरण को बचाना, उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं जितने अधिकार।
गांधीजी ने कहा था, "सच्चा अधिकार कर्तव्य पालन से ही प्राप्त होता है।"
यदि हर नागरिक केवल अपने अधिकारों की माँग करे और कर्तव्यों का पालन न करे, तो समाज में अराजकता फैल जाएगी।
अतः एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें अधिकारों का भोग करते हुए, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए।
Quick Tip: Key Quote: "Rights and duties are two sides of the same coin." Balance the essay by mentioning Fundamental Rights first, then transitioning to Fundamental Duties.
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन-सा है ? उसकी सबसे बड़ी विशेषता का उल्लेख करते हुए लिखिए कि इसकी भाषा कैसी होनी चाहिए ।
सबसे पुराना माध्यम: जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम 'मुद्रित माध्यम' (Print Media) है, जैसे समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ।
विशेषता: इसकी सबसे बड़ी विशेषता है 'स्थायित्व' (Permanence)। बोले गए शब्द हवा में विलीन हो जाते हैं, लेकिन लिखित शब्द एक रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रहते हैं। पाठक इन्हें अपनी सुविधानुसार धीरे-धीरे या बार-बार पढ़ सकता है।
भाषा: इसकी भाषा व्याकरण सम्मत, शुद्ध और प्रवाहमय होनी चाहिए। इसमें वर्तनी की अशुद्धियाँ नहीं होनी चाहिए क्योंकि लिखित रूप लंबे समय तक प्रमाण के रूप में रहता है।
Quick Tip: Key Terms: Print Media (Mudrit), Stability/Permanence (Sthayitva), Grammatical Accuracy (Vyakaranik Shuddhata).
समाचार लेखन के छह ककारों से आप क्या समझते हैं ? इन ककारों की समाचार लेखन में भूमिका स्पष्ट कीजिए ।
छह ककार: समाचार लेखन में किसी भी घटना का विवरण देने के लिए छह प्रश्नवाचक शब्दों का उत्तर दिया जाता है, जिन्हें 'छह ककार' कहते हैं: क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों और कैसे।
भूमिका:
1. सूचनात्मक (Intro): पहले चार ककार (क्या, कौन, कब, कहाँ) समाचार के मुखड़े (Intro) में प्रयुक्त होते हैं। ये पाठकों को तत्काल तथ्यात्मक जानकारी देते हैं।
2. विवरणात्मक (Body): अंतिम दो ककार (क्यों और कैसे) समाचार की बॉडी में आते हैं। ये घटना के कारण और विश्लेषण को विस्तार से समझाते हैं।
इनके बिना कोई भी समाचार पूर्ण और विश्वसनीय नहीं माना जाता।
Quick Tip: Divide the 6 Kakars: 4 (Info) for Intro + 2 (Analysis) for Body. This structure creates the 'Inverted Pyramid'.
विशेष लेखन क्या है ? विशेष लेखन और डेस्क का क्या संबंध है ? स्पष्ट कीजिए ।
विशेष लेखन: सामान्य समाचारों से हटकर किसी विशेष विषय (जैसे खेल, अर्थशास्त्र, विज्ञान, कृषि) पर गहरी जानकारी और विश्लेषण के साथ किया गया लेखन 'विशेष लेखन' कहलाता है।
डेस्क से संबंध: समाचार पत्रों में अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग 'डेस्क' (विभाग) होते हैं। जैसे खेल की खबरें 'स्पोर्ट्स डेस्क' पर और व्यापार की खबरें 'बिज़नेस डेस्क' पर तैयार होती हैं।
विशेष लेखन करने वाले पत्रकार अपने संबंधित 'डेस्क' पर ही कार्य करते हैं, जहाँ उस विषय की विशेषज्ञता वाले संपादक खबरों को अंतिम रूप देते हैं।
Quick Tip: 'Vishesh Lekhan' = Niche/Specialized reporting. 'Desk' = The specific department handling that niche.
नाट्य रूपांतरण करते समय कहानी के किन तत्त्वों को नाटक में ढालना मुश्किल होता है ?
कहानी का नाटक में रूपांतरण करते समय निम्नलिखित तत्त्वों को ढालना सबसे कठिन होता है:
1. मनोवैज्ञानिक द्वंद्व: पात्रों के मन में चल रही उथल-पुथल या सोच (Internal Monologue) को मंच पर दिखाना कठिन है, क्योंकि नाटक में सब कुछ दृश्य और संवाद के माध्यम से ही कहना होता है।
2. लंबे विवरणात्मक अंश: कहानी में लेखक वातावरण का लंबा वर्णन कर सकता है, लेकिन नाटक में इसे केवल सेट-डिजाइन या संक्षिप्त संवादों से ही दिखाया जा सकता है।
3. लेखक की अपनी टिप्पणी: कहानी में लेखक अपनी राय सीधे लिख देता है, जो नाटक में संभव नहीं है।
Quick Tip: Key challenge: Converting 'Mental thoughts' into 'Visual Action/Dialogue' without using a narrator.
नए और अप्रत्याशित विषय पर लिखने से आप क्या समझते हैं ? इसका अभ्यास न होने पर क्या हानि होती है ?
अर्थ: 'नए और अप्रत्याशित विषय' वे होते हैं जो पारंपरिक नहीं होते और जिनके लिए पहले से कोई तैयारी नहीं की जा सकती (जैसे 'दीवार घड़ी की आत्मकथा' या 'अचानक हुई बारिश')। इस पर लिखना छात्र की मौलिक सोच और रचनात्मकता की परीक्षा है।
हानि: यदि इसका अभ्यास न हो, तो छात्र 'रटंत विद्या' पर निर्भर हो जाते हैं। परीक्षा में अचानक कोई नया विषय आने पर वे विचारशून्य हो जाते हैं और अपने भावों को व्यवस्थित रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। इससे उनकी मौलिक अभिव्यक्ति की क्षमता कुंठित हो जाती है।
Quick Tip: Focus: It tests 'Creativity' vs 'Rote Learning'. Lack of practice leads to mental block during exams.
रेडियो को श्रोताओं से संचालित माध्यम क्यों माना जाता है ? मुद्रित माध्यमों की तुलना में रेडियो के श्रोताओं को कौन-सी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं ?
श्रोताओं से संचालित: रेडियो एक 'श्रव्य माध्यम' (Audio Medium) है। इसमें शब्द और ध्वनि ही सब कुछ है। चूंकि यह पूरी तरह सुनने पर निर्भर है, इसलिए श्रोता की एकाग्रता ही इसे संचालित करती है।
अनुपलब्ध सुविधाएँ (मुद्रित की तुलना में):
1. दुबारा पढ़ने की सुविधा: अखबार को हम कभी भी, कहीं भी और बार-बार पढ़ सकते हैं, लेकिन रेडियो बुलेटिन एक बार प्रसारित हो गया तो निकल गया। उसे तत्काल रिवाइंड नहीं किया जा सकता।
2. कठिन शब्दों का अर्थ: पढ़ते समय हम रुककर शब्दकोश देख सकते हैं, लेकिन रेडियो में धाराप्रवाह प्रसारण के कारण यह संभव नहीं है।
3. क्रमबद्धता की बाध्यता: रेडियो में हमें समाचार उसी क्रम में सुनने पड़ते हैं जैसा ब्रॉडकास्टर सुना रहा है, हम अपनी मर्जी से पन्ने पलटकर पहले खेल समाचार नहीं सुन सकते।
Quick Tip: Radio is Linear (Time-bound). Print is Non-linear (Space-bound). This difference defines the limitations.
समाचार लेखन में साक्षात्कार का क्या महत्त्व है ? साक्षात्कार के लिए साक्षात्कारकर्ता में किन गुणों की अपेक्षा होती है ?
महत्त्व: साक्षात्कार (Interview) समाचार लेखन के लिए कच्चा माल (Raw Material) जुटाने का एक प्रमुख साधन है। किसी घटना, राय या स्थिति पर स्पष्टता पाने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों से सवाल पूछकर ही पत्रकार प्रामाणिक खबरें निकालते हैं।
अपेक्षित गुण:
1. पूर्व तैयारी: विषय और साक्षात्कार देने वाले व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।
2. विनम्रता और धैर्य: कड़वे सवाल भी विनम्रता से पूछने की कला होनी चाहिए।
3. तटस्थता: अपनी राय थोपने के बजाय सामने वाले के विचारों को सही ढंग से रिकॉर्ड करने की क्षमता होनी चाहिए।
4. प्रत्युत्पन्नमति (Presence of Mind): उत्तर में से ही नया पूरक प्रश्न निकालने की समझ होनी चाहिए।
Quick Tip: Interview is not just Q/&A; it's a tool to extract information. Key qualities: Homework (Research) and Soft Skills (Politeness).
अर्थ जगत की पत्रकारिता के महत्त्व को रेखांकित करते हुए बताइए कि आर्थिक मामलों के पत्रकार में क्या विशेषताएँ होनी चाहिए ?
महत्त्व: अर्थ जगत (Business) की पत्रकारिता आम आदमी को महंगाई, शेयर बाजार, बजट और सरकारी नीतियों के प्रभाव के बारे में जागरूक करती है। देश की आर्थिक सेहत का लेखा-जोखा इसी पत्रकारिता से मिलता है।
पत्रकार की विशेषताएँ:
1. विषय ज्ञान: उसे अर्थशास्त्र के मूल सिद्धांतों और शब्दावली (जैसे- मुद्रास्फीति, जीडीपी, सेंसेक्स) की गहरी समझ होनी चाहिए।
2. विश्लेषण क्षमता: उसे आंकड़ों (Data) को पढ़ने और उनका विश्लेषण करने की क्षमता होनी चाहिए।
3. सरलीकरण: आर्थिक खबरें अक्सर जटिल होती हैं। एक अच्छे पत्रकार को कठिन तकनीकी शब्दों को आसान भाषा में समझाने की कला आनी चाहिए ताकि सामान्य पाठक भी समझ सके।
Quick Tip: Business Journalism bridges the gap between 'Complex Data' and 'Common Man'. Simplification is the key skill.
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कविता 'छोटा मेरा खेत' के अनुसार मिलान इस प्रकार है:
1. छोटा मेरा खेत : कवि ने इसे 'कागज का पन्ना' कहा है। अतः 1-(i)।
2. अंकुर फूटना : जब भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, तब 'शब्द के अंकुर' फूटते हैं। अतः 2-(iii)।
3. पल्लवित पुष्पित होना : जब रचना पूरी होकर रस देने लगती है, तो वह 'साहित्यिक कृति का रूप' धारण कर लेती है। अतः 3-(ii)।
सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: Metaphor Match: Khet = Paper, Seed = Idea/Thought, Sprout = Word, Fruit/Flower = Completed Literary Work.
कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है :
कवि कर्म में 'बीज' उस क्षणिक भावावेश या मौलिक 'विचार' (Idea) का प्रतीक है जो कवि के मन में उत्पन्न होता है।
यही विचार बाद में अभिव्यक्ति पाकर कविता का रूप लेता है।
अतः बीज 'विचार और अभिव्यक्ति' का द्योतक है।
Quick Tip: The 'Seed' (Beej) is the raw emotion or thought (Vichar) that dissolves (transforms) to create the poem.
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।
कारण : असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।
कथन सत्य है: साहित्य का रस (आनंद) 'अक्षय' होता है और समय के साथ नष्ट नहीं होता (कालजयी)।
कारण सत्य है: साहित्य को जितनी बार और जितने भी पाठकों द्वारा पढ़ा जाए, उसका आनंद कम नहीं होता।
चूँकि आनंद कभी समाप्त नहीं होता (कारण), इसीलिए कृति कालजयी होती है (कथन)। अतः व्याख्या सही है।
Quick Tip: Literature's 'Ras' is Akshay (inexhaustible), unlike material wealth. This makes it timeless (Kaljayee).
‘झूमने लगे फल’ का आशय है :
यहाँ 'फल' का झूमना साहित्यिक कृति के संपन्न होने और उससे प्राप्त होने वाले आनंद (रस) का प्रतीक है।
कवि की साधना और सृजन प्रक्रिया (परिश्रम) जब पूर्ण होती है, तो रचना रूपी 'फल' प्राप्त होता है जो पाठकों को आनंदित करता है।
अतः यह 'परिश्रम का प्रतिफल' (Result of hard work/creation) मिलने का सूचक है।
Quick Tip: In poetry context: Fruit (Fal) = The final Poem/Literature = The Result/Reward of the poet's labor.
‘बीज गल गया निःशेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है ?
जिस प्रकार बीज अपना अस्तित्व मिटाकर (गलकर) ही पौधे को जन्म देता है, उसी प्रकार कवि को अपना 'अहंकार' (Ego) मिटाना पड़ता है।
जब 'मैं' (Self/Ego) तिरोहित होता है, तभी एक श्रेष्ठ और सार्वभौमिक रचना का जन्म होता है।
अतः यह पंक्ति 'स्वयं के त्याग' (Self-sacrifice/Dissolution of Ego) का संकेत देती है।
Quick Tip: Symbolism: Melting Seed (Beej Galna) = Dissolution of Ego (Aham ka tyag) for creation.
फ़िराक की रुबाइयों में उभरे घरेलू जीवन के बिंबों का सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में माँ और बच्चे के वात्सल्य और घरेलू जीवन के अत्यंत सुंदर दृश्य (बिंब) उकेरे गए हैं।
कवि ने दैनिक जीवन के सहज प्रसंगों का चित्रण किया है, जैसे - माँ द्वारा बच्चे को नहलाना, उसके उलझे बाल सुलझाना, और उसे 'प्यार से देखना'।
दिवाली के दृश्य में 'रूपवती मुखड़े' और 'घर में पुताई' से लिपे-पुते घर का बिंब है। रक्षाबंधन पर 'राखी के लच्छों' की चमक बिजली जैसी बताई गई है।
ये बिंब अत्यंत सजीव हैं और पाठक को भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार के प्रेम और त्योहारों की मिठास का अनुभव कराते हैं।
Quick Tip: Keywords: Vatsalya (Motherly love), Gharelu Bimb (Domestic imagery), Sahajta (Simplicity). Mention bathing, combing, Diwali, Rakhi scenes.
‘‘तुलसीदास स्वभाव से सीधे-सरल थे, किंतु हृदय से स्वाभिमानी और भक्ति से ओत-प्रोत थे।’’ ‘कवितावली’ के उक्त कथन के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
तुलसीदास जी का स्वभाव निश्छल था, लेकिन वे अपनी भक्ति और सिद्धांतों को लेकर अत्यंत स्वाभिमानी थे।
'कवितावली' के सवैये "धूत कहौ, अवधूत कहौ..." में वे समाज की परवाह किए बिना कहते हैं कि "काहू की बेटी सों बेटा न ब्याहब" (मुझे किसी की बेटी से बेटे का ब्याह नहीं करना, न किसी की जाति बिगाड़नी है)।
वे स्पष्ट कहते हैं - "माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो" (माँग कर खा लूँगा और मस्जिद में सो जाऊँगा), लेकिन दास केवल राम का ही रहूँगा।
यह फक्कड़पन और निडरता उनके गहरे आत्म-विश्वास और अनन्य राम-भक्ति का परिचायक है।
Quick Tip: Quote the line "Maangi kai khaibo, maseet ko soibo..." to prove his indifference to social status and his pride in being 'Ram's Slave' (Gulam).
‘बादल-राग’ कविता के आधार पर लिखिए कि बादलों के आगमन का प्रकृति और किसानों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
'बादल-राग' कविता में बादलों का आगमन 'क्रांति' का प्रतीक है।
प्रकृति पर प्रभाव: मूसलाधार वर्षा से पृथ्वी गर्भ में सोए बीज (अंकुर) प्रसन्न होकर सिर उठा लेते हैं। छोटे पौधे (शोषित वर्ग के प्रतीक) खिलखिलाते हैं और झूमते हैं। प्रकृति हरी-भरी और स्वच्छ हो जाती है।
किसानों पर प्रभाव: किसान बादलों को देखकर उल्लास से भर जाते हैं। उन्हें लगता है कि वर्षा से उनकी फसल लहलहाएगी और उनके कष्ट दूर होंगे।
कवि निराला ने दिखाया है कि बादल 'विप्लव के वीर' हैं, जो शोषण (गर्मी/दुख) को खत्म कर नवजीवन लाते हैं।
Quick Tip: Contrast: Clouds bring fear to the rich (big buildings/mountains) but joy/hope to the poor (farmers/small plants).
‘उषा’ कविता में भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौका क्यों कहा गया है ?
कवि शमशेर बहादुर सिंह ने भोर (सूर्योदय से पहले) के आकाश की तुलना 'राख से लिपे हुए चौके' (रसोई के स्थान) से की है।
इसके मुख्य कारण हैं:
1. रंग: भोर के समय आकाश का रंग गहरा स्लेटी (Grey) या मटमैला होता है, जो राख के रंग जैसा दिखता है।
2. पवित्रता: चौका (रसोई) लिपे जाने के बाद अत्यंत पवित्र माना जाता है। सुबह का वातावरण भी शांत और पवित्र होता है।
3. नमी: कवि ने कोष्ठक में लिखा है - "(अभी गीला पड़ा है)"। यह सुबह की ओस और वातावरण की नमी (ताज़गी) को दर्शाता है, जैसे लिपा हुआ चौका सूखने से पहले गीला होता है।
Quick Tip: Three key points: Colour (Grey/Ash), Sanctity (Purity of Chauka), and Moisture (Geela pada hai - Humidity/Dew).
जब शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति से उसके दुख के बारे में पूछा जाता है, तो वह अपने दुख को क्यों नहीं व्यक्त कर पाता ? ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के संदर्भ में लिखिए।
शारीरिक चुनौती का सामना कर रहा व्यक्ति (अपाहिज) मीडिया के कैमरे और चुभते हुए सवालों के सामने घबरा जाता है।
साक्षात्कार लेने वाला व्यक्ति संवेदनहीन होकर पूछता है - "क्या आप अपाहिज हैं? आपको कैसा लगता है?"
ये प्रश्न उसे अपने दुख को साझा करने का अवसर देने के बजाय उसका मजाक उड़ाते हुए प्रतीत होते हैं।
उस पर कैमरे के सामने 'रोने' और नाटकीयता का दबाव होता है।
इस कृत्रिमता, क्रूरता और डर के कारण उसका गला रुंध जाता है और वह अपना वास्तविक दुख व्यक्त नहीं कर पाता, केवल मौन रह जाता है।
Quick Tip: Reason: Insensitivity of the media, pressure to perform/cry, and the mockery inherent in the questions paralyze him.
कोई बात पेचीदा कैसे हो जाती है ? ‘बात सीधी थी’ कविता के आधार पर लिखिए।
'बात सीधी थी पर' कविता के अनुसार, एक सीधी-सादी बात तब पेचीदा (मुश्किल) हो जाती है जब हम उसे व्यक्त करने के लिए कठिन और चमत्कारिक भाषा का प्रयोग करने लगते हैं।
कवि अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने या वाहवाही लूटने के चक्कर में शब्दों के जाल (तोड़ना-मरोड़ना, घुमाना) में फँस जाता है।
भाषा को अलंकृत बनाने के प्रयास में बात का मूल अर्थ (भाव) खो जाता है और वह केवल शब्दों का खेल बनकर रह जाती है।
इस प्रकार, सरलता के अभाव में भाषा क्लिष्ट और बात प्रभावहीन हो जाती है।
Quick Tip: Root Cause: The obsession with linguistic jugglery (Bhasha ka chakkar) ruins the simplicity of the content (Kathya).
भक्तिन किससे और कैसे डरती है ?
गद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट लिखा है: "वह कारागार से वैसे ही डरती है, जैसे यमलोक से।"
भक्तिन जेल की ऊँची दीवारें देखते ही भयभीत हो जाती है और बेहोश होना चाहती है।
अतः सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: Direct text retrieval: "Karagar se waise hi darti hai jaise Yamlok se."
‘ऐसी यात्रा में किसी को किसी के साथ जाने का अधिकार नहीं’ पंक्ति में ‘ऐसी यात्रा’ से अभिप्राय है :
गद्यांश में प्रसंग चल रहा है कि भक्तिन 'जेल' जाने से डरती है, लेकिन लेखिका के जेल जाने की संभावना पर वह भी साथ जाना चाहती है।
लेखिका कहती है कि "ऐसी यात्रा" (अर्थात् जेल जाने की स्थिति) में कानूनन किसी सेवक को मालिक के साथ जाने का अधिकार नहीं होता।
अतः यहाँ 'ऐसी यात्रा' का संदर्भ 'जेल यात्रा' से है।
Quick Tip: Context is King. While "Antim Yatra" fits the phrase generally, in THIS specific paragraph, they are discussing going to jail (Karagar).
निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए गद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए :
यद्यपि भक्तिन जेल से बहुत डरती है (कथन A और C गलत हैं), फिर भी वह जेल जाने को तैयार है।
इसका कारण यह है कि "वह डर से भी अधिक महत्त्व मेरे (लेखिका के) साथ का ठहराती है।"
उसे जेल का डर तो है, लेकिन 'लेखिका से अलग होने का डर' (साथ छूटने का डर) उससे भी बड़ा है। इसलिए वह अपना डर जीतकर साथ चलने की जिद करती है।
अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: Logic: Fear of Jail < Fear of Separation. Hence, she chooses Jail.
गद्यांश के आधार पर भक्तिन की चारित्रिक विशेषताओं के संदर्भ में कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
गद्यांश के अनुसार:
1. भक्तिन की निडरता : गद्यांश कहता है, "वह डरती नहीं, यह कहना असत्य होगा।" अर्थात् उसकी निडरता की बात 'असत्य' है। अतः 1-(iii)।
2. सामान का बाँधना : वह पूछती है "क्या-क्या सामान बाँध ले" (साबुन, धोती आदि)। यह उसके 'प्रबंध कौशल' (Management skill) को दर्शाता है। अतः 2-(i)।
3. लेखिका के साथ न जा पाना : वह कहती है कि मालकिन के जेल जाने पर अगर वह साथ न जा पाई, तो यह उसके लिए 'अपमान' (Insult) की बात होगी। अतः 3-(ii)।
सही मिलान: 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)। विकल्प (A)।
Quick Tip: Match the action to the quality/implication described in the text. Packing = Management; Not going = Insult; Fearlessness = Lie.
गद्यांश का केन्द्रीय भाव हो सकता है :
इस गद्यांश में भक्तिन के जेल जाने के डर का वर्णन तो है, लेकिन मुख्य बात यह है कि वह इस डर पर विजय प्राप्त करती है केवल 'महादेवी के साथ' रहने के लिए।
वह "डर से भी अधिक महत्त्व मेरे साथ का ठहराती है।"
अतः गद्यांश का मूल स्वर (Theme) भक्तिन का महादेवी के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और 'आत्मीयता' (Intimacy/Bond) है।
Quick Tip: The central theme is the driving force behind the character's actions. Here, Love/Loyalty overrides Fear.
‘आवश्यकता से अधिक खरीदारी ही बाज़ार में शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में तर्क सहित उत्तर दीजिए।
'बाज़ार दर्शन' पाठ में जैनेंद्र कुमार स्पष्ट करते हैं कि बाज़ार का मूल उद्देश्य आवश्यकताओं की पूर्ति है।
किंतु जब लोग 'परचेजिंग पावर' (क्रय शक्ति) के घमंड में आवश्यकता से अधिक, अनावश्यक वस्तुएं खरीदने लगते हैं, तो बाज़ार का संतुलन बिगड़ जाता है।
इससे बाज़ार में 'कपट' बढ़ता है। विक्रेता दाम बढ़ा देते हैं और असली ज़रूरतों की उपेक्षा होती है।
अनावश्यक माँग पैदा करने से महंगाई बढ़ती है, जो अंततः आम ग्राहक के 'शोषण' का कारण बनती है।
अतः फिजूलखर्ची न केवल धन का अपव्यय है, बल्कि अनैतिक बाज़ारवाद को बढ़ावा भी देती है।
Quick Tip: Logic: Excess Demand (Purchasing Power) \(\rightarrow\) Inflation/Deceit (Kapat) \(\rightarrow\) Exploitation (Shoshan).
‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में अनावृष्टि को दूर करने के लिए अंतिम उपाय के रूप में क्या किया जाता है ? इस उपाय के प्रति लेखक के दृष्टिकोण के विषय में अपनी राय स्पष्ट कीजिए।
अंतिम उपाय: जब पूजा-पाठ और सारे वैज्ञानिक प्रयास विफल हो जाते हैं और वर्षा नहीं होती (अनावृष्टि), तब गाँव के किशोरों की टोली 'इंदर सेना' घर-घर जाकर पानी मांगती है।
लोग अपने सहेज कर रखे हुए पानी को उन पर फेंकते हैं, यह मानकर कि यह इंद्र देवता को दिया गया अर्घ्य है, जिससे वे प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे।
लेखक का दृष्टिकोण: लेखक (धर्मवीर भारती) इसे 'अंधविश्वास' मानते हैं।
उनकी राय में, जब पानी की इतनी कमी है, तो उसे कीचड़ में बहाना 'पानी की निर्मम बर्बादी' है। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विरुद्ध है और देश की प्रगति में बाधक है।
Quick Tip: Identify the conflict: Faith (Water offering brings rain) vs Science (Wasting scarce water is irrational).
‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि गाँव में फैली महामारी के समय प्रकृति भी मनुष्य के दुख में दुखी थी।
'पहलवान की ढोलक' कहानी में हैजा और मलेरिया फैलने पर गाँव की स्थिति भयावह थी।
लेखक रेणु जी ने प्रकृति का मानवीकरण करते हुए दिखाया है कि वातावरण भी शोककुल था।
अमावस्या की रात ठंडी और 'भयावह' थी। तारे भी अपनी रोशनी से पृथ्वी का अंधकार नहीं मिटा पा रहे थे।
सन्नाटा इतना गहरा था कि झींगुरों की आवाज़ भी उसे काट नहीं पाती थी। उल्लू और सियारों का रोना माहौल को और डरावना बना रहा था।
ऐसा लगता था मानों प्रकृति भी निस्तब्ध होकर गाँव वालों की मृत्यु पर मौन रुदन कर रही हो।
Quick Tip: Use atmospheric details: 'Amavasya ki raat', 'Sannata' (Silence), 'Siyar ka rona' (Crying jackals) to show nature's empathy/horror.
शिरीष और कबीर दोनों को हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने एक ही श्रेणी में किस आधार पर रखा है ? स्पष्ट कीजिए।
लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के फूल और कबीरदास, दोनों को 'अनासक्त' (Detached) और 'फक्कड़' माना है।
शिरीष भीषण गर्मी और लू में भी बिना मुरझाए, मस्ती से फूलता है और जीवित रहता है।
उसी प्रकार, कबीरदास भी सामाजिक संघर्षों और विरोधों के बीच अपनी मस्ती में अडिग रहते थे।
दोनों में विपरीत परिस्थितियों में भी अजेय रहने की जिजीविषा और सरसता है।
इसी 'अनासक्त योगी' जैसी वृत्ति के आधार पर लेखक ने दोनों को एक ही श्रेणी में रखा है।
Quick Tip: Keyword: 'Anasakta Yogi' (Detached Hermit). Both thrive in adversity (Heat/Society) without being affected by it.
‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ — शीर्षक पाठ में अंबेडकर ने आदर्श-समाज का आधार किन तत्त्वों को माना है ? उनके अनुसार लोकतंत्र में क्या भाव होने चाहिए ?
डॉ. अंबेडकर ने अपने आदर्श समाज का आधार तीन तत्त्वों को माना है: स्वतंत्रता (Liberty), समता (Equality), और भ्रातृता (Fraternity/Brotherhood)।
उनके अनुसार, समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए कि कोई भी वांछित परिवर्तन तुरंत सभी को उपलब्ध हो सके।
लोकतंत्र में भाव: लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह 'सामूहिक जीवनचर्या' का एक तरीका है।
इसमें साथी नागरिकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव होना चाहिए।
समाज में 'दूध और पानी' के मिश्रण की तरह भाईचारा होना चाहिए, न कि केवल कानूनी रिश्ते।
Quick Tip: Remember the trinity: Liberty, Equality, Fraternity. Democracy is essentially 'Associated Living' (Samuhik Jeevancharya).
भक्तिन का कौन-सा गुण विस्मित कर देने वाला था और क्यों ?
भक्तिन का 'तर्क-वितर्क' (Argumentativeness) करने का गुण विस्मित कर देने वाला था।
वह अनपढ़ थी, लेकिन अपनी बात को सही साबित करने के लिए उसके पास अद्भुत तर्क होते थे।
जब लेखिका उसे सिर मुंडाने से मना करतीं, तो वह "तीरथ गए मुंडाए सिद्ध" कहकर उन्हें चुप करा देती।
हर नियम को अपनी सुविधानुसार ढाल लेने और शास्त्रार्थ में बड़ों-बड़ों को हरा देने की उसकी यह प्रतिभा सचमुच आश्चर्यजनक थी।
Quick Tip: Focus on her 'Wit' and 'Logic' (Tark-patuta). She used scriptures (Shastras) conveniently to win arguments.
यशोधर बाबू को अपने पारिवारिक सदस्यों से किस प्रकार की शिकायतें थीं ? ‘सिल्वर वैडिंग’ पाठ के आधार पर लिखिए।
यशोधर बाबू पुराने ख्यालातों के व्यक्ति थे और उन्हें अपने परिवार का आधुनिक व्यवहार पसंद नहीं था। उनकी मुख्य शिकायतें थीं:
1. पत्नी का बदलाव: पत्नी का बुढ़ापे में होठों पर लाली लगाना, बिना आस्तीन का ब्लाउज पहनना और ऊँची एड़ी की सैंडल पहनना उन्हें 'शमहाउ इम्प्रॉपर' लगता था।
2. बच्चों की उपेक्षा: बड़ा बेटा भूषण कमाता तो था, पर घर के फैसलों में पिता की राय नहीं लेता था।
3. संस्कारों की कमी: बच्चे रिश्तेदारों की उपेक्षा करते थे और घर में 'सिल्वर वैडिंग' जैसी विदेशी परंपराओं (चोंचलों) का आयोजन करते थे, जो यशोधर बाबू को पसंद नहीं था।
Quick Tip: Phrase to use: 'Somhow Improper'. This was his catchphrase for anything modern that violated tradition.
‘सौंदलगेकर की अध्यापन शैली के कारण लेखक के जीवन को एक नई दिशा मिली।’ ‘जूझ’ पाठ के आधार पर इस कथन के पक्ष में तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।
मराठी अध्यापक सौंदलगेकर कक्षा में कविताएँ गाकर और अभिनय के साथ पढ़ाते थे। उनका यह तरीका लेखक (आनंदा) को बहुत प्रभावित कर गया।
जीवन को नई दिशा:
1. काव्य-प्रेम: लेखक को कविता में रुचि जगी। वह खेत में काम करते हुए भैंस की पीठ पर कविताएँ लिखने लगा।
2. अकेलेपन से मित्रता: पहले लेखक को खेत में अकेलापन खलता था, लेकिन अब उसे अकेलापन अच्छा लगने लगा क्योंकि वह ऊँची आवाज़ में कविता गा सकता था।
3. रचनात्मकता: गुरु जी के प्रोत्साहन से लेखक ने स्वयं तुकबंदी और कविता रचना शुरू कर दी, जिससे वह एक सफल साहित्यकार बनने की राह पर चल पड़ा।
Quick Tip: Transformation: Loneliness (Boredom) \(\rightarrow\) Loneliness (Opportunity to sing/create). The teacher was the catalyst.
‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर लिखिए कि वे कौन-सी विशेषताएँ हैं, जो सिंधु घाटी सभ्यता को दूसरी सभ्यताओं से अलग ला खड़ा करती हैं ।
सिंधु घाटी सभ्यता (मोहनजोदड़ो और हड़प्पा) अपनी विशिष्ट 'नगर-योजना' और 'जन-सरोकार' के कारण अन्य सभ्यताओं से अलग है।
1. अडंबरहीनता: अन्य सभ्यताओं (जैसे मिस्र) में राजाओं के बड़े-बड़े महल और पिरामिड मिले हैं, लेकिन यहाँ कोई भव्य राजमहल या विशाल मंदिर नहीं मिला। यह 'प्रभुत्व या दिखावे' की सभ्यता नहीं थी।
2. आम आदमी को महत्त्व: यहाँ की वास्तुकला, पानी की निकासी (नालियाँ), और अन्नागार यह सिद्ध करते हैं कि यह सभ्यता आम नागरिकों की सुविधाओं पर केंद्रित थी।
3. लघुता में महत्ता: लेखक इसे "लघुता में महत्ता" (Low profile grandeur) वाली सभ्यता कहते हैं, जो अनुशासन और उपयोगिता पर आधारित थी, न कि ताकत के प्रदर्शन पर।
Quick Tip: Key differentiator: It was a 'Praja-poshak' (People-oriented) civilization, not 'Raaj-poshak' (King-oriented) or 'Dharm-poshak' (Religion-oriented).
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.