
CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.
The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.
The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 2 - 2/1/2) is available for download here.
| CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 2 - 2/1/2) | Download PDF | Check Solution |

‘‘है दीप एक ....... सूर्य से भी भारी’’ — पंक्ति का आशय है —
यह पंक्ति एक रूपक का उदाहरण है, जिसमें "दीप" को व्यक्ति और "सूर्य" को बाह्य जगत की विशालता और शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कवि इस विचार को व्यक्त कर रहे हैं कि एक अकेला व्यक्ति भी अगर संकल्पित हो, तो वह संसार की सबसे बड़ी शक्तियों से भी अधिक प्रभावी कार्य कर सकता है।
दीपक, जो छोटा होता है, फिर भी अपने प्रकाश से अंधकार को दूर करता है — उसी तरह एक सच्चा, जागरूक और सकारात्मक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
यह पंक्ति यह नहीं कहती कि दीपक सूर्य से भौतिक रूप से भारी है, बल्कि यह मानवीय ऊर्जा, विश्वास और प्रेरणा की शक्ति को दर्शाती है।
प्रश्न विश्लेषण:
(A) यह विकल्प सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह "दीप" को व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है।
(B) सूर्य की तुलना को व्यक्तित्व के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो इस विकल्प में नहीं है।
(C) यह पंक्ति के भावार्थ से भटकता है, अतः यह विकल्प अतिशयोक्ति है।
(D) यह भी आंशिक रूप से सही है, परंतु विकल्प (A) सबसे उपयुक्त है।
Quick Tip: जब कोई पंक्ति रूपक (metaphor) का उपयोग करती हो, तो उसके शब्दों के पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझने का अभ्यास करें और उसी के अनुरूप उत्तर चुनें।
‘इंसानी जीवन की रात मिटा’ — से क्या अभिप्राय है ?
"इंसानी जीवन की रात मिटा" का अर्थ केवल भौतिक रात्रि का अंत नहीं है, बल्कि यह एक रूपक है जो शोषित, पीड़ित और वंचित वर्गों के जीवन में व्याप्त अज्ञानता, असमानता और अभाव के अंधकार को व्यक्त करता है।
यह "रात" अज्ञान, दरिद्रता, सामाजिक भेदभाव और अधिकारों से वंचितता का प्रतीक है।
इसलिए, जब कवि कहता है "इंसानी जीवन की रात मिटा", तो इसका आशय यह है कि समाज को ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिससे वंचित वर्गों को समान अधिकार, संसाधन और सम्मान मिले।
प्रश्न विश्लेषण:
(A) केवल "रात्रि को दूर करना" एक सतही और भौतिक अर्थ है।
(B) घरों को प्रकाशित करना एक सीमित और प्रतीकात्मक अर्थ है।
(C) यह उत्तर भी समीप है, परंतु "शोषित वर्ग" पर स्पष्ट ध्यान नहीं देता।
(D) यह सबसे सटीक और व्यापक है क्योंकि यह अधिकार देने की सामाजिक चेतना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: जब "अभिप्राय" पूछा जाए, तो शब्दों के पीछे छिपे सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक अर्थों को समझना आवश्यक होता है।
कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुसंगत कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
\begin{tabular{|l|l|
\hline
कॉलम-1 & कॉलम-2
\hline
(क) मध्यम दीपक & (1) लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन
(ख) झंझापथ & (2) विपरीत परिस्थितियाँ
(ग) आहत पद & (3) घायल अंग
\hline
\end{tabular
इस प्रकार के प्रश्नों में प्रतीकों या पदों के अर्थ का विश्लेषण करना आवश्यक होता है:
(क) मध्यम दीपक — लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन:
यह दीपक की सीमित ज्योति को प्रतीक बनाकर उस प्रयास को दर्शाता है जो सीमित साधनों के बावजूद लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है।
इसलिए इसका मेल (1) से है।
(ख) झंझापथ — विपरीत परिस्थितियाँ:
‘झंझा’ अर्थात तूफान और ‘पथ’ यानी रास्ता, यह एक कठिन और संघर्षमय मार्ग को दर्शाता है।
इसलिए यह (2) से संबंधित है।
(ग) आहत पद — घायल अंग:
‘आहत पद’ सीधे तौर पर चोटिल या जख्मी पैर का संकेत है, जो ‘घायल अंग’ का प्रतीक है।
इसलिए यह (3) से मेल खाता है।
इस प्रकार सभी युग्म सही हैं:
क-1, ख-2, ग-3
Quick Tip: जब मिलान वाले प्रश्न होते हैं, तो पहले सभी पदों के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझें और फिर सही मिलान करें, इससे त्रुटि की संभावना कम होती है।
“इंसान स्वयं सवेरा का रूप धारण कर आ रहा है” — पंक्ति के माध्यम से किसे क्या चेतावनी दी गई है ?
यह पंक्ति प्रतीकात्मक रूप में अंधकार के प्रतीकों को यह चेतावनी देती है कि अब इंसान स्वयं प्रकाश, परिवर्तन और नवजागरण का रूप धारण कर आ गया है।
"सवेरा" यहाँ नवचेतना, नई सोच और सामाजिक क्रांति का प्रतीक है।
इसका आशय यह है कि अब कोई भी अन्याय, शोषण या अज्ञानता का अंधकार टिकने वाला नहीं है, क्योंकि जनमानस स्वयं बदलाव लाने को तैयार है।
यह उन सभी शक्तियों को चेतावनी है जो अंधकार, अन्याय और शोषण के पक्षधर हैं।
Quick Tip: जब प्रश्न में ‘किसे चेतावनी दी गई है’ पूछा जाए, तो उत्तर में चेतावनी प्राप्तकर्ता और चेतावनी का उद्देश्य दोनों स्पष्ट रूप से बताएं।
‘‘वनखंड जलाती है एक चिनगारी’’ — पंक्ति से क्या अभिप्राय है ?
इस पंक्ति का आशय यह है कि छोटी-सी घटना, भावना या विचार भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन ला सकता है।
‘‘एक चिनगारी’’ यहाँ प्रतीक है — क्रांति, आक्रोश या जागरूकता के छोटे बीज का, जो पूरे समाज को आंदोलित कर सकता है।
जैसे एक छोटी चिनगारी पूरे जंगल को जला सकती है, वैसे ही एक सजग विचार, एक सत्य भाषण या छोटा विद्रोह भी पूरे तंत्र को बदल सकता है।
यह पंक्ति चेतावनी और प्रेरणा दोनों है — कि किसी को भी छोटा या तुच्छ न समझा जाए।
Quick Tip: जब कोई रूपक दिया गया हो, तो उसके वास्तविक प्रभाव और भावनात्मक असर को व्याख्या में शामिल करें।
‘‘इंसानी युग आने और स्वर्ग के दो कदम दूर रह जाने’’ — से क्या आशय है ?
इस पंक्ति का आशय यह है कि यदि मनुष्य मानवता, करुणा, और समानता के मार्ग पर चलता रहे, तो वह स्वर्ग-सदृश संसार की रचना कर सकता है।
“इंसानी युग” अर्थात ऐसा काल जहाँ मानव के भीतर की श्रेष्ठतम संवेदनाएँ हावी हों — और स्वर्ग से तात्पर्य है शांति, समता और प्रेमपूर्ण जीवन।
पंक्ति संकेत करती है कि मनुष्य स्वर्ग जैसी स्थिति तक पहुँचने के बहुत करीब है, लेकिन वह अंतिम दो कदम — यानी आत्म-नियंत्रण, सत्य और सेवा — अभी उठाने बाकी हैं।
Quick Tip: जब पंक्ति में “दूर रह जाना” या “निकटता” की बात हो, तो उसके पीछे की अधूरी प्रक्रिया या चेतावनी को ज़रूर स्पष्ट करें।
‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ — से अभिप्राय है —
इस पंक्ति में व्यक्ति की आत्म-अवहेलना पर प्रकाश डाला गया है।
यह कथन संकेत करता है कि हम अपनी मौलिक पहचान और विशिष्ट गुणों से अनभिज्ञ रहते हैं।
जब हम अपने 'रंग' नहीं पहचानते, तो हम स्वयं को दूसरों की दृष्टि से आंकते हैं।
यह आत्मचिंतन और आत्मबोध की कमी को दर्शाता है, जिससे व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं कर पाता।
Quick Tip: प्रश्न में प्रयुक्त प्रतीकात्मक भाषा के अर्थ को समझना बहुत आवश्यक होता है — शब्दों के पीछे छिपे भाव को पकड़ने का अभ्यास करें।
‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ — पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है —
पंक्ति ‘‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’’ का तात्पर्य है कि जीवन केवल एकतरफा अनुभवों का नाम नहीं है — यह विभिन्न भावनाओं, परिस्थितियों और अनुभवों का समुच्चय है।
‘‘बहुरंगी’’ शब्द यहाँ रूपक (metaphor) के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जिसका तात्पर्य जीवन में विभिन्न रंगों यानी सुख और दुख दोनों के अस्तित्व से है।
यह एक संकेत है कि जीवन कभी पूर्ण रूप से सुखमय या दुखमय नहीं होता, बल्कि उसमें विविध अनुभव — जैसे आनंद, पीड़ा, संतोष, असंतोष — सभी समाहित रहते हैं।
प्रश्न विश्लेषण:
प्रश्न पूछता है कि ‘‘बहुरंगी’’ शब्द से क्या अर्थ निकाला जाए?
अब विकल्पों पर ध्यान दें:
(A) केवल रंग-बिरंगा होना सतही अर्थ है, प्रतीकात्मक नहीं।
(B) केवल दुख-तकलीफ जीवन का आंशिक पहलू है, सम्पूर्ण नहीं।
(C) यह सबसे उपयुक्त विकल्प है — क्योंकि इसमें सुख और दुख दोनों की उपस्थिति की बात है।
(D) ‘‘बहुत विशाल होना’’ संदर्भ से मेल नहीं खाता।
इसलिए सही उत्तर है: (C) जीवन में सुख-दुख का होना।
Quick Tip: जब प्रश्न में रूपक या प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग हो, तो उसका केवल शाब्दिक नहीं बल्कि भावार्थ (emotional or symbolic meaning) समझना ज़रूरी होता है।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
कथन: प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।
कारण: प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।
कथन यह कहता है कि — ‘‘प्रकृति के कई रंग हैं और उनमें कोई होड़ नहीं है।”
यह विचार प्रकृति की विविधता, संतुलन और सामंजस्य को दर्शाता है — कि रंग अलग-अलग हैं लेकिन प्रतिस्पर्धा नहीं करते।
यह एक रूपक है, जो मानव जीवन में विविध भावनाओं, भूमिकाओं या तरीकों के सह-अस्तित्व की ओर संकेत करता है।
कारण कहता है — “प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।”
यह कथन भी सत्य है, क्योंकि सुबह, दोपहर, संध्या, मौसम आदि के आधार पर प्रकृति अपने रंग बदलती रहती है।
लेकिन यह कथन कथन की व्याख्या नहीं करता — यानी यह यह नहीं समझा रहा कि रंगों में होड़ क्यों नहीं है।
प्रश्न विश्लेषण:
(A) कारण तो सही है, कथन भी — अतः यह विकल्प गलत है।
(B) दोनों कथन ग़लत नहीं हैं — यह भी अस्वीकार्य है।
(C) यह बिल्कुल उपयुक्त है — दोनों वाक्य सत्य हैं, पर कारण कथन की सटीक व्याख्या नहीं करता।
(D) यह तभी सही होता जब कारण कथन की व्याख्या करता — जो यहाँ नहीं है।
इसलिए सही उत्तर है: (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
Quick Tip: Assertion-Reason आधारित प्रश्नों में दोनों वाक्यों को अलग-अलग सत्यता के आधार पर परखें, फिर यह देखें कि क्या कारण, कथन को स्पष्ट करता है या नहीं।
प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?
लेखक प्रकृति के विविध रंगों और सहजता के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि हमारा जीवन भी विविध अनुभवों, भावनाओं और घटनाओं से परिपूर्ण है।
प्रकृति का कोई रंग श्रेष्ठ या हीन नहीं होता — सभी रंग मिलकर ही उसे पूर्ण बनाते हैं।
इसी प्रकार हमें जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता, प्रेम-घृणा सभी को स्वीकार करना चाहिए।
लेखक यह भी बताना चाहता है कि जैसे प्रकृति में कोई होड़ नहीं, वैसे ही इंसान को भी प्रतिस्पर्धा छोड़कर सौहार्द्रपूर्ण जीवन अपनाना चाहिए।
Quick Tip: प्रश्न में यदि “क्या संदेश देना चाहता है” पूछा जाए, तो लेखक के उद्देश्य और भाव का सार स्पष्ट करें।
रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?
रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का मूल कारण है मनुष्य का अपने ही विचारों की प्रतिक्रिया से घिर जाना।
वह अपने विचारों को वास्तविकता मान बैठता है और उनके अनुसार ही दुख, असंतोष, क्रोध आदि में उलझ जाता है।
इससे वह वर्तमान को नहीं देख पाता और विचारों की भूलभुलैया में उलझकर जीवन को कठिन और जटिल बना लेता है।
Quick Tip: उत्तर देते समय लेखक का नाम आने पर उसके विचारों का सार स्पष्ट शब्दों में लिखें।
‘दो रंग जुड़ते हैं तो एक नया ही रंग बन जाता है’ — पंक्ति का क्या आशय है ?
इस पंक्ति का आशय यह है कि विरोधी या भिन्न तत्वों के मेल से भी कुछ नया, सुंदर और सार्थक जन्म लेता है।
यह जीवन का संकेत है कि केवल समानताओं से नहीं, विविधताओं के मेल से ही समग्रता आती है।
यह कथन सांप्रदायिक सौहार्द, सह-अस्तित्व और विविधता में एकता की भावना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: पंक्तियों के अर्थ बताते समय केवल शब्दार्थ नहीं, भावार्थ को केंद्र में रखें।
‘प्रकृति हर दिन होली खेलती है’ — से क्या अभिप्राय है ? इसके माध्यम से क्या संदेश दिया गया है ?
इसका अभिप्राय है कि प्रकृति प्रत्येक दिन रंगों का उत्सव मनाती है — जैसे सूर्योदय-सूर्यास्त, मौसम, आकाश, फूलों आदि के विविध रंग।
लेखक बताना चाहता है कि हमें भी जीवन में रोज़ कुछ नया देखना, अनुभव करना और उत्सव की भावना अपनानी चाहिए।
इसका संदेश है कि जीवन को रंगों और आनंद से भरपूर बनाया जा सकता है अगर हम देखने का दृष्टिकोण बदलें।
Quick Tip: जब प्रश्न दो भागों में हो (अभिप्राय और संदेश), तो दोनों का उत्तर अलग पैराग्राफ में दें।
विचार करने और उन्हें व्यक्त करने की प्रक्रिया निबंध लेखन के परिचित विषयों के साथ क्यों नहीं हो पाती ?
निबंध लेखन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विचारों की गहराई और उनकी मौलिक प्रस्तुति भी होता है। परिचित विषयों पर जब कोई छात्र लिखता है, तो वह अक्सर रटंत शैली या पुस्तकीय उत्तरों तक सीमित रह जाता है।
ऐसे विषय सोचने की बजाय बस लिख देने की प्रवृत्ति को जन्म देते हैं, जिससे रचनात्मकता और विश्लेषण का अभाव हो जाता है।
चूंकि विषय पहले से ज्ञात होता है, छात्र उस पर चिंतन करने के बजाय सीधे उत्तर लिखने लगते हैं — जिससे विचारों की नवीनता और गहराई बाधित हो जाती है।
इसलिए, निबंध लेखन में नवीन, विचारोत्तेजक तथा बहुआयामी विषयों का चयन अधिक प्रभावी होता है।
Quick Tip: परिचित विषयों पर भी यदि दृष्टिकोण नया हो, तो निबंध प्रभावशाली बन सकता है — प्रयास करें कि विषय के सामान्य पक्षों के बजाय विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाएँ।
नाटकलेख और फिल्म-पटकथा से रेडियो नाट्यलेखन किस प्रकार भिन्न है? स्पष्ट कीजिए।
रेडियो नाट्यलेखन पूरी तरह श्रव्य माध्यम है, जबकि फिल्म-पटकथा और नाटक दृश्य माध्यमों पर आधारित होते हैं।
रेडियो नाटकों में दृश्य नहीं होते, इसलिए लेखन में संवाद, ध्वनि प्रभाव और संगीत ही वातावरण निर्माण के उपकरण होते हैं।
दर्शक दृश्य नहीं देखता, वह सब कुछ केवल सुनकर कल्पना करता है। इसलिए पात्रों की भावनाएँ, स्थान-परिवर्तन और घटनाओं की गति संवादों और ध्वनियों से प्रकट करनी होती है।
इसके विपरीत, फिल्म और मंचीय नाटक दृश्य-प्रस्तुति के कारण अधिक स्वाभाविक संकेतों से काम लेते हैं। रेडियो नाट्यलेखन में भाषा अधिक प्रभावशाली और वर्णनात्मक होनी चाहिए।
Quick Tip: रेडियो लेखन में कल्पना को जगाने वाली भाषा और श्रवण के अनुकूल रचना शैली आवश्यक होती है — यह दृश्य माध्यमों से इसकी सबसे बड़ी भिन्नता है।
‘वॉयस ओवर’ क्या है ? नाटक में इसका क्या महत्त्व है ?
‘वॉयस ओवर’ वह ध्वनि होती है जो मंच पर हो रही क्रियाओं के समानांतर पार्श्व में सुनाई देती है — वह पात्र के विचार, कथावाचक की आवाज़ या कोई संदेश हो सकता है।
नाटक में ‘वॉयस ओवर’ का प्रयोग दृश्य में गहराई, संदर्भ या किसी भाव को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।
यह तकनीक दर्शक को पात्र की आंतरिक स्थिति से जोड़ने, समय या स्थान परिवर्तन की सूचना देने और कथा को गतिशील बनाने में सहायक होती है।
रेडियो नाटकों में यह और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि वहाँ दृश्य संकेत नहीं होते।
Quick Tip: ‘वॉयस ओवर’ का प्रयोग सटीक स्थान पर और उपयुक्त गति व भाव के साथ हो, तभी वह दर्शक या श्रोता पर प्रभाव छोड़ता है।
समाचार-पत्र में विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से संबंधित जानकारी का होना क्यों आवश्यक है ?
समाचार-पत्र समाज का दर्पण होता है और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक खबरें देना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग, क्षेत्र और विषय की जानकारी प्रस्तुत करना होता है।
यदि समाचार-पत्र में शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण, खेल, स्वास्थ्य, संस्कृति जैसे विविध विषयों का समावेश नहीं होगा, तो यह संपूर्ण समाज के लिए अधूरी जानकारी देगा।
विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी से पाठक जागरूक बनता है, सोच विकसित करता है और अपने निर्णयों में विवेकपूर्ण होता है।
समाचार-पत्र तभी प्रभावशाली और लोकप्रिय बनता है, जब वह सबके लिए कुछ न कुछ उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करता है।
Quick Tip: समाचार-पत्र की विश्वसनीयता और उपयोगिता उसकी विषय-वस्तु की विविधता और संतुलन पर निर्भर करती है।
संचार का कौन सा माध्यम आपको सर्वाधिक पसंद है और क्यों ? कारण सहित उत्तर लिखिए।
मुझे डिजिटल मीडिया सबसे अधिक पसंद है, विशेषकर मोबाइल आधारित एप्लिकेशन जैसे समाचार ऐप, यूट्यूब और पॉडकास्ट।
इस माध्यम की सबसे बड़ी विशेषता है — तत्क्षणता, बहुविषयकता और पोर्टेबिलिटी।
जहाँ चाहें, जब चाहें, अपनी सुविधा अनुसार सामग्री प्राप्त करना आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इसके साथ ही डिजिटल माध्यम इंटरेक्टिव भी होता है — हम चाहें तो प्रतिक्रिया दे सकते हैं, साझा कर सकते हैं या अपनी पसंद की सामग्री चुन सकते हैं।
मुझे यह माध्यम इसलिए पसंद है क्योंकि यह मेरे ज्ञान, मनोरंजन और संवाद — तीनों ज़रूरतों को एक साथ पूरा करता है।
Quick Tip: उत्तर में तर्क स्पष्ट हों और व्यक्तिगत अनुभव के साथ सामाजिक दृष्टिकोण भी झलकना चाहिए — इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है।
राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
सर्दी की एक खुशनुमा सुबह थी। हम सब परिवार के साथ जयपुर से दिल्ली लौट रहे थे। पिताजी हाइवे पर गाड़ी चला रहे थे — चारों ओर खेतों की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और तेज़ गति से दौड़ती हमारी कार। सबकुछ एकदम सामान्य था कि अचानक...
गाड़ी “खर्र...खर्र...” की आवाज़ के साथ बंद हो गई।
हाइवे पर ऐसी स्थिति बहुत विचित्र और असहज होती है। चारों ओर तेज़ रफ्तार गाड़ियाँ और हमारी गाड़ी बगल में एक ओर रुकी हुई — मानो किसी युद्ध के बीच ठहरा हुआ सिपाही।
पिताजी उतरकर बोनट खोलते हैं। मम्मी चिंतित चेहरा लिए बैठी हैं, और मैं मोबाइल से सिग्नल खोजने की कोशिश कर रहा हूँ। हाइवे के उस एकांत मोड़ पर ना कोई मिस्त्री, ना पेट्रोल पंप और न ही कोई दुकान। गाड़ी की चुप्पी ने वातावरण को और रहस्यमय बना दिया।
तभी दूर से एक ट्रक आकर रुकता है। उसमें से एक बुज़ुर्ग ड्राइवर नीचे उतरते हैं और बिना कहे पिताजी की मदद करने लगते हैं। उनके पास एक साधारण टूलबॉक्स होता है, और कुछ ही मिनटों में गाड़ी फिर से स्टार्ट हो जाती है।
हम सबने मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया, और पिताजी की आँखों में वह नम चमक थी — "अजनबी भी कभी-कभी सबसे अपने हो जाते हैं।"
उस दिन समझ में आया कि हाइवे केवल मंज़िल तक नहीं ले जाता — वह इंसानियत, धैर्य और भरोसे की राह भी बनाता है।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में कल्पना, भावनाएँ और एक घटना के माध्यम से पाठक को अंत तक बाँधे रखना आवश्यक होता है। अंत में कोई नैतिक या भावनात्मक निष्कर्ष ज़रूर जोड़ें।
बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
शादी शब्द सुनते ही मेरे मन में उत्सव, हँसी, हलचल और ढेर सारी मिठास घुल जाती है। लेकिन जब शादी अपने बड़े भाई की हो, तो यह उत्सव मेरे जीवन का एक सबसे खास अनुभव बन जाता है।
मैं न सिर्फ एक मेहमान था, बल्कि आयोजक, संदेशवाहक, सजावटकर्ता, और सबसे ज़रूरी — भाई का दाहिना हाथ भी।
भाई की बारात से पहले ही घर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। मैं हर रिश्तेदार की “तू ही बता” सूची में सबसे ऊपर था — किसी को चाय चाहिए तो किसी को माला, किसी को होटल पहुँचना था तो किसी को मेहंदीवाली बुलानी थी।
मेरी भूमिका थी — हर परेशानी से पहले उसका हल ढूँढ लेना।
संगीत की रात को मैंने खुद ही सबका डांस कोऑर्डिनेट किया और भाई के लिए एक छोटा सा सरप्राइज़ परफ़ॉर्मेंस भी रखा।
सबसे ज्यादा मज़ा तो वरमाला के समय जूता चुराई में आया — बहनों की टीम से भिड़कर जूता लेकर भागना और फिर मोलभाव करना, यह एक अलग ही रोमांच था।
शादी के हर पल में मैं इतना व्यस्त था कि खुद को भूल बैठा। लेकिन जब विदाई के समय भाई ने गले लगाकर कहा —
“तेरे बिना यह शादी अधूरी रह जाती।”
तो मेरी सारी थकान और चिंता एक मुस्कान में बदल गई।
यह शादी सिर्फ भाई की नहीं थी, यह मेरे रिश्तों की, ज़िम्मेदारी की और जीवन के नए रंगों की शुरुआत थी।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में निजी अनुभवों को जीवंत चित्रों और भावनात्मक घटनाओं के साथ प्रस्तुत करें — यह लेख को प्रभावशाली बनाता है।
जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
एक समय था जब सुबह की शुरुआत कोयल की कूक, गौरैया की चहचहाहट और खेतों में दौड़ते हिरणों की छवि से होती थी। लेकिन आज?
हमने विकास के नाम पर प्रकृति की सबसे सुंदर रचना — जीव-जंतुओं — को धीरे-धीरे मिटा दिया।
अब शहरों में गौरैया ढूँढना दुर्लभ है, जंगलों में बाघ गिने-चुने रह गए हैं, और कई पक्षियाँ हमारे नाम तक भूल गई हैं।
बचपन में जब दादी कहानियाँ सुनाती थीं, तो उनमें शेर, सियार, तोता, हाथी, साँप सब जीवंत होते थे। आज वही कहानियाँ बच्चों को कल्पना लगती हैं, हकीकत नहीं।
हमने अपने लालच में जंगल काट डाले, जलाशय सुखा दिए, और रासायनिक खेती से ज़मीन को ज़हर बना दिया — और इसके साथ ही हमने अनजाने में कई प्रजातियों को समाप्ति की कगार पर पहुँचा दिया।
क्या हम भूल गए हैं कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है?
यह पेड़ों, पक्षियों, जलचर, नभचर और धरती पर रेंगते हर प्राणी की है।
यदि जीव-जंतु नहीं होंगे, तो पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) असंतुलित हो जाएगा — और इसका प्रभाव अंततः हमारे अस्तित्व पर भी पड़ेगा।
अब भी समय है — हम प्रकृति से जुड़ें, जैव विविधता को बचाएँ, पक्षियों के लिए पानी रखें, जंगलों को काटने से रोकेँ और बच्चों को उनके अधिकारों सहित इन प्राणियों से भी परिचित कराएँ।
हम जितनी जल्दी यह समझेंगे कि ‘उनका जीवन भी हमारा जीवन है’, उतना ही सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।
Quick Tip: पर्यावरण संबंधी लेखों में आँकड़ों से अधिक भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखें।
व्यक्तिचित्र फीचर को रोचक, पठनीय और प्रभावशाली रूप में किस प्रकार तैयार किया जा सकता है ?
व्यक्तिचित्र फीचर लेखन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संघर्ष, योगदान और मानवीय पहलुओं को जीवंत बनाना होता है।
इसके लिए लेख को कहानी जैसी शैली में लिखा जाना चाहिए, जिसमें घटनाएँ, संवाद, भावनाएँ और परिवेश का चित्रण हो।
लेख की शुरुआत एक प्रभावशाली प्रसंग या उद्धरण से हो सकती है, जो पाठक को आकर्षित करे।
पात्र के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं, उनकी विचारधारा और समाज पर प्रभाव को तथ्यात्मकता के साथ भावनात्मकता से जोड़ा जाना चाहिए।
भाषा सहज, सजीव और संवादपूर्ण होनी चाहिए। चित्रों, साक्षात्कार अंशों और वर्णनात्मक शैली का संतुलन लेख को प्रभावी बनाता है।
Quick Tip: व्यक्तिचित्र लेखन में लेखक को पत्रकार और रचनाकार — दोनों भूमिकाएँ निभानी पड़ती हैं। यही संतुलन लेख को पठनीय बनाता है।
संवाददाता और विशेष संवाददाता के बीच के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
संवाददाता सामान्यतः समाचार-पत्र, टीवी या डिजिटल मीडिया के लिए स्थानीय या रोज़मर्रा की घटनाओं की रिपोर्टिंग करता है। वह रोज़ सुबह से शाम तक शहर या क्षेत्र में होने वाली घटनाओं को कवर करता है।
विशेष संवाददाता (Special Correspondent) का कार्य क्षेत्र अधिक व्यापक, विषयगत और विश्लेषणात्मक होता है।
वह राजनीति, विदेश नीति, रक्षा, आर्थिक मामलों या किसी विशेष क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग करता है।
उदाहरण के लिए — दिल्ली में कार्यरत संवाददाता किसी सड़क हादसे, प्रेस कॉन्फ्रेंस या सरकारी घोषणाओं की रिपोर्टिंग करेगा, जबकि विशेष संवाददाता "भारत-चीन सीमा विवाद" या "चुनावी रुझानों का विश्लेषण" जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा।
Quick Tip: दोनों भूमिकाओं के दायरे और गहराई में अंतर होता है — यह अंतर समझकर ही पत्रकारिता के कार्य विभाजन को जाना जा सकता है।
कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण किस प्रकार किया जा सकता है ?
कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण करते समय लेखक को यह ध्यान रखना होता है कि अब वे केवल पाठ्य-पात्र नहीं, बल्कि मंचीय प्रस्तुति के जीवंत पात्र होंगे।
इसके लिए पात्रों की भाषा, भाव, हावभाव और संवाद इस तरह से विकसित करने पड़ते हैं कि वे रंगमंच पर दर्शकों से जुड़ सकें।
पात्रों के संवादों में स्वाभाविकता और मंचीय प्रभाव जरूरी होता है। उनका चरित्र-चित्रण अब वर्णनात्मक नहीं, बल्कि क्रियात्मक होना चाहिए।
कहानी में जहाँ केवल भावनात्मक अनुभूति दी जाती है, वहाँ नाटक में दृश्य, ध्वनि, प्रकाश और मंच-संचालन के माध्यम से वही बात दर्शकों तक पहुँचाई जाती है।
पात्रों की भूमिका को संवाद, गतिविधियों और मंचीय स्थितियों के माध्यम से आकार दिया जाता है।
Quick Tip: नाट्य रूपांतरण में 'दिखाना' (show) प्राथमिक होता है, 'कहना' (tell) गौण — यही बदलाव लेखक को ध्यान में रखना चाहिए।
‘आत्मपरिचय’ कविता से उद्धृत पंक्ति “मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ” के संदर्भ में लिखिए कि संसार के प्रति कवि की इस विरक्ति का क्या कारण है ?
‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि आत्मविश्लेषण करते हुए यह उद्घोष करता है कि वह कभी संसार का ध्यान नहीं करता।
यह कथन कवि की उस वैराग्यपूर्ण मनःस्थिति को दर्शाता है जहाँ वह संसार की चकाचौंध, लालच, और दिखावे से दूर स्वयं की आत्मा की ओर उन्मुख होता है।
कवि को लगता है कि समाज में छल-कपट, मिथ्याचार और बाह्य प्रदर्शन की प्रधानता है। ऐसे समाज से उसका मोहभंग हो चुका है।
वह आत्मसाक्षात्कार को अधिक महत्त्व देता है, इसलिए वह बाह्य जगत की ओर ध्यान नहीं देता।
कवि की यह विरक्ति दरअसल एक उच्चतर जीवन-मूल्य की ओर उसका रुझान और मानसिक स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है।
Quick Tip: विचारप्रधान कविताओं की व्याख्या करते समय भाव, संदर्भ और मूल दृष्टिकोण — तीनों का संतुलन ज़रूरी होता है।
लेखन के लिए आपकी दृष्टि में कथ्य (भाव) अधिक महत्त्वपूर्ण है या माध्यम? — ‘बात सीधी थी पर’ कविता के संदर्भ में तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
‘बात सीधी थी पर’ कविता की विशेषता यही है कि उसमें कथ्य अत्यंत सशक्त है — सीधे, स्पष्ट और प्रखर भावों को कवि ने सहज भाषा में प्रस्तुत किया है।
लेखन में कथ्य (भाव) को अधिक महत्त्व दिया जाना चाहिए क्योंकि वही रचना की आत्मा है।
यदि भाव प्रबल और सजीव हों, तो माध्यम अपने आप प्रभावशाली हो जाता है।
इस कविता में कवि ने नारी की संवेदना, प्रश्न और आत्मसम्मान की बात बिना अलंकारों और शैलीगत चमत्कारों के सीधे तौर पर कही — यही इसकी ताकत है।
इसलिए कथ्य ही रचना की प्रभावशीलता का मूल आधार होता है, माध्यम उसकी अभिव्यक्ति का साधन मात्र।
Quick Tip: प्रस्तावना में पक्ष स्पष्ट करें, फिर उदाहरण द्वारा उसे पुष्ट करें — इससे उत्तर तार्किक बनता है।
‘उगता’ कविता भोर की आसमानी गति को धरती की जीवन भरी हलचल से जोड़ने वाली कविता है। पुष्टि कीजिए।
‘उगता’ कविता में कवि ने सूर्योदय को केवल प्राकृतिक दृश्य के रूप में नहीं, बल्कि जीवन की आशा, सृजन और कर्म से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
भोर की रोशनी जैसे ही धरती पर फैलती है, जीवन गतिशील हो उठता है — किसान खेत की ओर, पक्षी उड़ान को तैयार, नदी बहने को उत्सुक।
कविता में यह दिखाया गया है कि आसमान की हलचल केवल दृश्यगत परिवर्तन नहीं, बल्कि ऊर्जा का प्रवाह है जो सम्पूर्ण जीवन में चेतना भर देता है।
यह कविता भोर को प्रतीक बनाकर संघर्ष, श्रम और जीवन की शुरुआत को जोड़ती है — इसीलिए यह धरती और आकाश के संवाद की कविता बन जाती है।
Quick Tip: पुष्टि-प्रकार के उत्तरों में उदाहरण और विश्लेषण दोनों शामिल होने चाहिए — केवल पुनरुक्ति न हो।
‘सदा पंक पर ही होता, जल विप्लव प्लावन’ — पंक्ति में प्रयुक्त ‘पंक’ और ‘विप्लव’ शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में 'पंक' (कीचड़) और 'विप्लव' (उथल-पुथल) प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त हुए हैं।
‘पंक’ यहाँ जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और विषम परिस्थितियों का प्रतीक है, जबकि ‘विप्लव प्लावन’ का अर्थ है— परिवर्तनकारी संघर्ष और उन्नति की लहर।
कवि यह कहना चाहता है कि वास्तविक उन्नति और परिवर्तन उन्हीं परिस्थितियों में उत्पन्न होते हैं, जहाँ संघर्ष, अवरोध और असहजता हो।
सहज, शांत और स्थिर जीवन में नवाचार या बदलाव नहीं होता। जैसे कमल की उत्पत्ति कीचड़ में होती है, वैसे ही क्रांति जीवन की जटिलताओं से जन्म लेती है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक कविता की व्याख्या करते समय शब्दों के गहरे अर्थ और उनके प्रसंगगत संकेतों को अवश्य जोड़ें।
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में ‘यह अवसर खो देंगे’ — पंक्ति में कौन से अवसर को खोने की बात कही जा रही है ? इससे मीडिया कर्मी के किस व्यवहार का पता लगता है ?
‘यह अवसर खो देंगे’ पंक्ति में उस मानवीय क्षण को खोने की बात हो रही है, जब किसी पीड़ित या अपाहिज की असहाय अवस्था को कैमरे में कैद किया जाना है।
यह पंक्ति मीडिया कर्मियों के भीतर मानवीय संवेदना के स्थान पर अवसरवादिता के प्रवेश को उजागर करती है।
मीडिया अब घटनाओं को 'कवर' नहीं करता, बल्कि ‘कैश’ करने का माध्यम बना है। कैमरे की निगाह अब पीड़ा नहीं, दृश्य की सनसनी खोजती है।
कविता इस व्यवहार की आलोचना करती है कि कैसे मीडिया कर्मी केवल फ़्रेम और ‘मोमेंट’ के पीछे दौड़ते हैं, न कि पीड़ित की पीड़ा को समझने के लिए।
Quick Tip: कविता का संदर्भ केवल शब्दों तक सीमित न रखें — उसमें छिपे सामाजिक संकेतों को अवश्य उजागर करें।
‘पतंग’ कविता से उद्धृत पंक्ति – ‘डाल की तरह लवलीन वेग से’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
‘डाल की तरह लवलीन वेग से’ पंक्ति में कवि ने पतंग की गति और प्रकृति को दर्शाने के लिए सुंदर उपमा का प्रयोग किया है।
यहाँ ‘डाल’ (पेड़ की शाखा) की भाँति ‘लवलीन’ (समर्पित, स्नेह में डूबी) गति का तात्पर्य यह है कि पतंग हवा में एक लयबद्ध, सौम्य और आकर्षक ढंग से आगे बढ़ती है।
यह गति केवल भौतिक नहीं, बल्कि सौंदर्यबोध और मानसिक रमता की प्रतीक भी है।
कवि के लिए पतंग केवल उड़ती वस्तु नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, उल्लास और सृजनशीलता की प्रतीक बन जाती है — जो सहजता से आकाश की ऊँचाई की ओर अग्रसर होती है।
Quick Tip: ‘उपमा’ और ‘गति’ संबंधी पंक्तियों की व्याख्या करते समय उनमें छिपे भावों को सजीव उदाहरणों से जोड़ना प्रभावशाली होता है।
काव्यांश का प्रमुख विषय है —
काव्यांश में तुलसीदास और कबीर जैसे संतों के प्रति समाज के दोहरे मापदंडों को उजागर किया गया है।
कबीर की बेटी को ‘देवी’ नहीं माना गया और तुलसी को ‘ब्राह्मण’ होते हुए भी रामभक्ति का सम्मान नहीं मिला — यह स्पष्ट करता है कि जाति के आधार पर भेदभाव किया गया।
काव्यांश का केंद्र बिंदु यह है कि सच्चे संतों की शिक्षा, लेखनी और साधना को जातिगत सोच और सामाजिक संकीर्णता के कारण नकारा गया।
यह भेदभाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था में गहराई से जड़ें जमाए जातिवाद को दर्शाता है।
पंक्तियों का भावार्थ:
"काहू की बेटी सो देवी न कहाय" — बेटी को केवल जाति के कारण सम्मान नहीं मिला।
"तुलसी सतसंग गुनाय" — तुलसी की भक्ति को उसकी जाति की वजह से संदेह की दृष्टि से देखा गया।
"माँगी के लेखनी, महिता को सोचौ" — सच्चे लेखकों की लेखनी भी तिरस्कृत की गई।
अतः इन पंक्तियों का मुख्य विषय जाति-पाँति जनित भेदभाव ही है।
Quick Tip: काव्य आधारित प्रश्नों में मूल पंक्तियों का भाव समझें और उसके सामाजिक/दार्शनिक अर्थ पर ध्यान दें।
“काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब” — पंक्ति के माध्यम से कटाक्ष किया गया है —
पंक्ति ‘‘काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब’’ का अर्थ है — हम किसी विशेष जाति की बेटी के साथ अपने बेटे का विवाह नहीं करेंगे।
यह पंक्ति समाज में प्रचलित जातिगत संकीर्णता और ऊँच-नीच की भावना को उजागर करती है।
यहाँ स्पष्ट रूप से जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर कटाक्ष किया गया है, जहाँ विवाह का निर्णय गुण, स्वभाव या शिक्षा के आधार पर नहीं बल्कि जाति के आधार पर लिया जाता है।
यह कटाक्ष इस बात पर है कि प्रेम, समझदारी और मानवता से ऊपर जातिगत अहंकार को रखा गया है। यह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि संत साहित्य के मूल विचार — समभाव और समानता — के विरुद्ध भी है।
विश्लेषण:
(A) सामान्य जातिवाद पर तो है, पर वैवाहिक संदर्भ प्रमुख है।
(B) सबसे सटीक विकल्प — क्योंकि विवाह ही इस पंक्ति का संदर्भ है।
(C) यह लैंगिक असमानता की बात करता है, जो यहाँ केंद्र में नहीं है।
(D) यह व्यापक उत्तर है, लेकिन अपेक्षित विशिष्टता नहीं देता।
Quick Tip: जब प्रश्न में "कटाक्ष किया गया है" पूछा जाए, तो लेखक की आलोचना का केंद्र बिंदु साफ़-साफ़ पहचानें — और उसी के अनुसार उत्तर दें।
तुलसीदास स्वयं को किसका दास मानते हैं ?
तुलसीदास अपनी रचनाओं में सदैव भगवान राम को ही सर्वोपरि मानते हैं। उनकी भक्ति रामकेंद्रित है और वह स्वयं को “राम का दास” कहते हैं।
यह उनकी भक्ति की पराकाष्ठा और समर्पण की चरम सीमा को दर्शाता है।
उनकी पंक्तियाँ जैसे — “तुलसीदास चिरंजीव रघुपति दास” — उनके इस भाव को स्पष्ट करती हैं कि वे न तो समाज, न परिस्थितियों, न ही किसी नियम के अधीन हैं — वे केवल राम के भक्त हैं।
रामचरितमानस और अन्य काव्य रचनाओं में भी तुलसीदास ने स्वयं को ‘राम का सेवक’, ‘राम का कीर्तिगायक’ और ‘राम का अनन्य दास’ कहा है।
Quick Tip: जब किसी कवि या भक्त की आत्म-व्याख्या पूछी जाए, तो उसकी काव्यधारा और भक्ति केंद्र को पहचानना अत्यंत आवश्यक होता है।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
कथन: परंपरावादी एवं रूढ़िवादी समाज में रहते हुए भी तुलसी निर्विकार जीवन व्यतीत कर रहे थे।
कारण: वे सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त थे।
कथन सही है — तुलसीदास एक अत्यंत परंपरावादी और जातिवादी समाज में रहते हुए भी भक्ति और साहित्य के माध्यम से निर्लिप्त और निर्विकार जीवन जीते रहे।
उन्होंने समाज की कुरीतियों को उजागर किया लेकिन स्वयं उनके प्रभाव में नहीं आए। उनके जीवन में आत्मनिष्ठा, भक्ति और साधना का स्थान सर्वोपरि था।
परंतु कारण गलत व्याख्या करता है — तुलसीदास सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त नहीं थे, बल्कि वे तो समाज को दिशा देने वाले संत कवि थे। उन्होंने रामचरितमानस जैसी रचना के माध्यम से समाज में नैतिक और धार्मिक चेतना को जागृत किया।
अतः कथन तो सत्य है, लेकिन जो कारण दिया गया है, वह कथन की सटीक व्याख्या नहीं करता।
Quick Tip: Assertion-Reason (कथन-कारण) वाले प्रश्नों में सबसे पहले दोनों को अलग-अलग सत्यापित करें, फिर संबंध पर विचार करें।
‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ — से आशय है —
पंक्ति ‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ का शाब्दिक अर्थ है — न किसी से कुछ लेना और न किसी को कुछ देना।
यहाँ यह पंक्ति समाज में व्याप्त उस भावना की ओर संकेत करती है जहाँ लोग एक-दूसरे से पूर्ण रूप से कटे रहते हैं — न संबंध, न संवाद, न व्यवहार।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो जाता है और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेता है।
इसका भावार्थ है — “किसी से कोई संबंध न रखना”, और यह समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता, उदासीनता और आत्मकेन्द्रित प्रवृत्ति की आलोचना करता है।
विकल्पों का विश्लेषण:
(A) यह केवल शब्दों का अनुवाद है, भाव नहीं दर्शाता।
(B) यह संवाद की नैतिकता है, जबकि यहाँ संबंध विच्छेद का संदर्भ है।
(C) बिल्कुल सटीक — यह भाव को पूरी तरह प्रस्तुत करता है।
(D) यह संदर्भ से हटकर है।
Quick Tip: लोकोक्तियों और भाव-पंक्तियों के प्रश्न में शाब्दिक अर्थ नहीं, भावार्थ को पहचानें — वही उत्तर को सही दिशा देता है।
वैश्वीकरण के इस दौर में क्या भगत जी का चरित्र बाज़ार को सार्थकता और समाज में शांति स्थापित कर सकता है ? ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर लिखिए।
‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में भगत जी ऐसे व्यक्ति के प्रतीक हैं जो सादगी, आत्मनिर्भरता और लोककल्याण की भावना से प्रेरित जीवन जीते हैं।
आज के वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद से भरे समाज में, जहाँ सब कुछ लाभ-हानि और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है, भगत जी का जीवन बाजार को एक नैतिक दिशा प्रदान कर सकता है।
वे आत्मनिर्भरता के पक्षधर हैं, अपने श्रम से उत्पन्न वस्तुओं को ही महत्व देते हैं, और समाज में सहयोग व सौहार्द को प्राथमिकता देते हैं।
यदि बाजार में भगत जी जैसे मूल्य प्रवेश करें — तो न केवल शांति, बल्कि विश्वास, समरसता और स्थायित्व की स्थापना संभव है।
Quick Tip: पाठ आधारित उत्तरों में चरित्र और सन्दर्भ को वर्तमान संदर्भों से जोड़कर लिखना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।
‘शिरीष के फूल’ पाठ में कबीर को शिरीष की भाँति क्यों बताया गया है ?
‘शिरीष के फूल’ पाठ में शिरीष वृक्ष को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है — जो बाहर से कोमल परंतु भीतर से अत्यंत दृढ़ होता है।
कबीर के व्यक्तित्व में भी यही विशेषता थी — वे वाणी में मधुर, भाव में करुणाशील और व्यवहार में अत्यंत तेजस्वी एवं अडिग थे।
वे न धर्म से डरते थे, न समाज से — पर उनकी आलोचना में भी करुणा और आत्मीयता होती थी।
शिरीष की कोमलता और दृढ़ता का यह द्वंद्व कबीर के संत स्वभाव और क्रांतिकारी विचारों को एक साथ व्यक्त करता है।
Quick Tip: जब पात्र या व्यक्ति को किसी प्रतीक से जोड़ा जाए, तो उसमें बाह्य और आंतरिक गुणों की तुलना ज़रूर करें।
‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ से उद्धृत कथन ‘दासता केवल कानूनी पराधीनता ही नहीं है’ — का आशय स्पष्ट कीजिए।
यह कथन इस ओर संकेत करता है कि दासता केवल वह नहीं होती जब कोई व्यक्ति क़ानूनन गुलाम हो, बल्कि वह मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी हो सकती है।
जाति व्यवस्था और श्रम विभाजन ने भारतीय समाज में मानसिक गुलामी को जन्म दिया — जहाँ एक वर्ग स्वयं को श्रेष्ठ और अन्य को हीन मानता रहा।
यह दासता कानूनी नहीं थी, लेकिन लोगों की सोच, उनके अधिकारों और अवसरों को नियंत्रित करती थी।
इसलिए जब तक मानसिक स्वतंत्रता, समानता और आत्मगौरव नहीं होगा — तब तक सामाजिक दासता बनी रहेगी, चाहे क़ानून कुछ भी कहे।
Quick Tip: ऐसे उद्धरणों की व्याख्या करते समय ऐतिहासिक, सामाजिक और मानसिक स्तरों की व्याप्ति ज़रूर स्पष्ट करें।
‘लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए’ – ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में यह वाक्य क्यों और किस संदर्भ में कहा गया ?
‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में यह वाक्य लोकजीवन की अनुभवजन्य समझ और व्यावहारिक विवेक को दर्शाने के लिए कहा गया है।
यह कथन उस समय आता है जब लेखक भगत जी से पूछते हैं कि क्या बाजार जाना आवश्यक है — तो भगत जी जवाब में यह वाक्य कहते हैं।
इसका आशय है कि यदि कोई कठिन परिस्थिति टालना संभव नहीं है, तो उससे निपटने की तैयारी ज़रूरी है।
बाज़ार यदि आवश्यक है, तो हमें उसका सामना सजगता और तैयारी से करना चाहिए — यह सूझबूझ और स्वीकार्यता का प्रतीक है।
Quick Tip: ऐसे वाक्यों की व्याख्या करते समय प्रतीकात्मक अर्थ और जीवन-दृष्टि को जोड़ना महत्वपूर्ण होता है।
अनावृष्टि दूर करने के लिए गाँव के बच्चों और गाँव वालों द्वारा किए गए उपायों को आप कितना उचित मानते हैं ? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के संदर्भ में तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में गाँव के लोगों और बच्चों ने अनावृष्टि से निपटने के लिए जो उपाय किए, वे पारंपरिक, सामूहिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रेरित थे।
जैसे — बच्चों द्वारा मेंढ़क की शादी, गीत गाना, पूजा आदि — ये सब उपाय वैज्ञानिक नहीं होते, पर वे सामुदायिक सहभागिता और आशा का संचार करते हैं।
लेखक यह संकेत करता है कि ये परंपराएँ लोगों की मानसिकता को संभालने का कार्य करती हैं और संघर्ष में विश्वास बनाए रखती हैं।
इसलिए ऐसे उपाय समाज को जोड़ते हैं, प्रेरित करते हैं, और सांस्कृतिक अस्मिता को जीवित रखते हैं — यद्यपि इनके पीछे वैज्ञानिक कारण नहीं भी हो सकते।
Quick Tip: पारंपरिक उपायों की व्याख्या करते समय सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों का संतुलन रखें।
शिरीष के माध्यम से लेखक ने, ‘कालजयी अवधूत की भाँति विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल खड़े रहने की प्रेरणा दी है।’ पुष्टि कीजिए।
‘शिरीष के फूल’ पाठ में लेखक ने शिरीष वृक्ष को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है जो अत्यंत कोमल भी है और भीतर से दृढ़ भी।
शिरीष की यही विशेषता उसे कालजयी अवधूत की तरह बनाती है — जो विपरीत परिस्थितियों में भी डगमगाए नहीं, बल्कि मौन शक्ति के साथ खड़ा रहे।
लेखक ने कठिन समय में डटे रहने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और कोमलता में भी शक्ति होने का संदेश शिरीष के माध्यम से दिया है।
इसलिए यह वृक्ष मात्र प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मनुष्य के आदर्श व्यवहार का प्रतीक बन जाता है।
Quick Tip: ‘पुष्टि करें’ जैसे प्रश्नों में कथन को दोहराएँ नहीं — उसके समर्थन में तर्क और उदाहरण अवश्य दें।
गद्यांश में ‘नरो वा कुंजरो वा’ का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है ?
इस प्रश्न में ‘नरो वा कुंजरो वा’ श्लोक का प्रयोग उस स्थिति को रेखांकित करने के लिए किया गया है जहाँ सत्य को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
भक्तिन का चरित्र इसी स्थिति में अपनी नैतिक दृढ़ता और सत्यनिष्ठा को बनाए रखता है।
गद्यांश में इसका उल्लेख इसीलिए किया गया है कि पाठक यह समझ सके कि भक्तिन के लिए धर्मसंकट की स्थिति में भी सिद्धांत महत्वपूर्ण थे —
और उसने अपनी चारित्रिक विशेषता को किसी भी भ्रम या मोह से प्रभावित नहीं होने दिया।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में किसी पंक्ति के उपयोग का विश्लेषण करते समय उसका संदर्भ और उद्देश्य दोनों पर ध्यान दें।
भक्तिन घर में पड़े पैसों को मटकी में छिपाकर किस उद्देश्य से रखती थी ?
गद्यांश में भक्तिन की सरलता और उसके जीवन की व्यवस्था को दर्शाते हुए यह बताया गया है कि वह अपने घर में पैसे मटकी में छिपाकर रखती थी।
यह क्रिया न तो किसी चोरी से डरकर थी, न ही दिखावे के लिए। उसका उद्देश्य था — पैसों को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से सँभालकर रखना।
भक्तिन के पास सीमित आय थी, इसलिए वह अपने सीमित संसाधनों को संभालकर रखने में विश्वास रखती थी। उसका यह व्यवहार उसके अनुभव, समझदारी और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
यह क्रिया एक मध्यवर्गीय या निम्नवर्गीय गृहिणी की व्यवहारिक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है, जो पारिवारिक भविष्य की चिंता में वर्तमान को सुव्यवस्थित रखती है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में “क्यों” को पहचानना मुख्य होता है — केवल ‘क्या किया’ नहीं, बल्कि ‘किसलिए किया’ पर ध्यान दें।
‘थोड़ा बहुत झूठ बोलना’ के समर्थन में भक्तिन अपना आदर्श किसे मानती थी ?
गद्यांश में भक्तिन अपने विचारों का समर्थन करने के लिए यमराज का उल्लेख करती है। वह कहती है कि “यमराज भी कभी-कभी थोड़ा झूठ बोल देते होंगे।”
यह पंक्ति इस बात का संकेत है कि भक्तिन अपने व्यवहार — विशेषतः “थोड़ा बहुत झूठ बोलना” — को सामान्य और मानवीय मानती थी, और इसे उचित ठहराने के लिए यमराज जैसे देवता को भी उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करती है।
यह दर्शाता है कि भक्तिन सीधे-सादे, व्यावहारिक जीवन की पक्षधर थी, और जीवन में कभी-कभार ‘झूठ’ को वह नैतिक दोष नहीं मानती थी, बल्कि परिस्थिति की मांग समझती थी।
यमराज जैसे न्याय के देवता को उदाहरण बनाकर वह अपनी व्यावहारिक नैतिकता को दर्शाती है।
Quick Tip: यदि कोई पात्र अपने विचार को किसी चरित्र से जोड़ता है, तो उस पात्र का नाम उत्तर में सही ढंग से पहचानना ज़रूरी होता है — यह प्रतीकात्मक व्याख्या में मदद करता है।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए :
कथन : भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा।
कारण : समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करती थी।
गद्यांश में भक्तिन को एक जटिल चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है — वह व्यवहारिक है, सच्चरित्र भी है, परंतु उसके कार्यों में स्थिति के अनुसार लचीलापन भी देखा जाता है।
इसलिए यह कहना कि “भक्तिन अच्छी है” — यह एक सीधा निष्कर्ष नहीं हो सकता, क्योंकि उसमें अच्छाई के साथ व्यावहारिक चतुराई भी है।
वहीं कारण — “समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करना” — इस कथन की पूरी सच्चाई दर्शाता है।
यह कारण इस कथन को स्पष्ट करता है कि भक्तिन का आचरण स्थायी नहीं, बल्कि स्थितियों पर आधारित था।
Quick Tip: Assertion-Reason प्रश्नों में यह जानना ज़रूरी होता है कि दोनों कथन सही हैं या नहीं — और क्या कारण, कथन की व्याख्या करता है। यदि हाँ, तो उत्तर ‘(D)’ होता है।
अपनी ही शादी की पार्टी में से यशोधर बाबू पूजा के बहाने क्यों उठकर चले गए ? उनका मेहमानों के बीच से इस तरह उठकर चले जाना, आपकी दृष्टि में कहाँ तक उचित है ? ‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी के संदर्भ में तर्क–सम्मत उत्तर दीजिए।
‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यशोधर बाबू का पार्टी के बीच से उठकर पूजा के बहाने चले जाना, केवल एक क्रियात्मक घटना नहीं बल्कि उनके भीतर के संघर्ष का प्रतीक है।
वे भीतर ही भीतर अपनी पत्नी और परिवार से अलगाव की पीड़ा झेल रहे थे, और उस अवसर की चकाचौंध में भी अकेले थे।
उनका यह कदम सामाजिक औपचारिकता के स्थान पर आत्म-संवाद की ओर संकेत करता है। वे दिखावे के रिश्तों से ऊब चुके थे और अकेले रहकर अपने जीवन की विफलताओं को समझना चाहते थे।
इसलिए, उनका चला जाना औपचारिक रूप से अनुचित होते हुए भी भावनात्मक दृष्टि से पूरी तरह न्यायसंगत था।
Quick Tip: कहानी के चरित्रों के आंतरिक संघर्ष को समझना ही उनके व्यवहार की व्याख्या को गहराई देता है।
‘जूझ’ निम्न–मध्यमवर्गीय ग्रामीण समाज और जीवन से लड़ते–जुझते किसानों–मजदूरों के संघर्ष की कहानी है। उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
‘जूझ’ कहानी में लेखक ने उन पात्रों के जीवन को प्रस्तुत किया है जो सीमित संसाधनों और कठोर परिस्थितियों के बावजूद जीवन की आशा नहीं छोड़ते।
मुख्य पात्र जैसे बबलू, कन्हैया, सियाराम जैसे लोग गरीबी, असमानता, और सत्ता के शोषण से लड़ते हुए अपनी ज़मीन और स्वाभिमान को बचाने की कोशिश करते हैं।
कहानी में वर्षा का न होना, फसल का खराब होना, और साहूकारों का दबाव — ये सभी बातें ग्रामीण किसान-मजदूरों की वास्तविक समस्याएँ दर्शाती हैं।
‘जूझ’ इसलिए केवल कहानी नहीं बल्कि सामाजिक यथार्थ का प्रतिबिंब बन जाती है, जो संघर्षरत भारत की आवाज़ है।
Quick Tip: ‘पुष्टि करें’ जैसे प्रश्नों में कहानी से ठोस उदाहरण देने से उत्तर अधिक विश्वसनीय बनता है।
‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में सिंधु घाटी सभ्यता को एक सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से परिपक्व सभ्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ हैं — नगर नियोजन, जल निकासी प्रणाली, पक्के मकान, ग्रेनरी, स्नानघर और सुनियोजित सड़कों का निर्माण।
यहाँ के निवासी व्यापार, शिल्पकला और लेखन में दक्ष थे। उनकी मूर्तियाँ, मुद्राएँ और माप-तौल की प्रणाली उच्च बौद्धिक स्तर को दर्शाती हैं।
इस पाठ के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करता है कि सिंधु सभ्यता केवल प्राचीन नहीं, आधुनिक सोच की नींव भी थी।
Quick Tip: सभ्यता का वर्णन करते समय केवल सूची न दें, बल्कि प्रत्येक बिंदु को संदर्भ सहित स्पष्ट करें।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.