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Sanghamitra Deb

Content Writer | Updated On - Dec 12, 2025

CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 2 - 2/4/2) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 2 - 2/4/2) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solutions Set 2 2 4 2

Question 1:

तरु शिखर पर जाकर कौन बैठ गया है ?

  • (A) सूर्य रूपी पक्षी
  • (B) संध्या रूपी पक्षी
  • (C) थका-हारा पक्षी
  • (D) समय रूपी पक्षी
Correct Answer: (B) संध्या रूपी पक्षी
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काव्यांश की पहली दो पंक्तियाँ हैं: "सिमटा पंख साँझ की लाली / जा बैठी अब तरु शिखरों पर"।


कवि ने यहाँ 'साँझ' (संध्या) का मानवीकरण एक पक्षी के रूप में किया है।


शाम की लालिमा को ऐसे चित्रित किया गया है मानो कोई पक्षी दिन भर उड़ने के बाद पंख समेटकर पेड़ की सबसे ऊँची डाली (शिखर) पर बैठ गया हो।


अतः सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: मानवीकरण (Personification) को पहचानें: 'पंख समेटना' और 'बैठना' पक्षी की क्रियाएँ हैं जो साँझ पर आरोपित हैं।


Question 2:

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए :


  • (A) 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
  • (B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (C) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • (D) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
Correct Answer: (A) 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
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पद्यांश की पंक्तियों के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है:


1. ज्योति-स्तंभ: "ज्योति स्तंभ-सा धँस सरिता में / सूर्य क्षितिज पर..."। डूबता हुआ सूर्य नदी के जल में एक ज्योति के खंभे जैसा प्रतिबिंबित हो रहा है। (1 का संबंध iii से)


2. केंचुल-सा: "केंचुल-सा / लगता चितकबरा गंगाजल"। गंगा का पानी केंचुल (साँप की खाल) जैसा चितकबरा लग रहा है। (2 का संबंध ii से)


3. दीपशिखा: "दीप शिखा-सा ज्वलित कलश"। मंदिर का कलश दीये की लौ (दीपशिखा) की तरह चमक रहा है। (3 का संबंध i से)


सही कूट: 1-(iii), 2-(ii), 3-(i), जो विकल्प (A) में है।
Quick Tip: काव्यांश में उपमाओं (Similes) को ढूँढें—'सा' शब्द के साथ। जैसे: 'स्तंभ-सा सूर्य', 'केंचुल-सा गंगाजल'।


Question 3:

स्नेह रूपी बंधन में कौन-कौन बंधे हैं ?

  • (A) लहर, जलधार, रेत
  • (B) लहर, रेत, अग्नि
  • (C) हवा, रेत, पानी
  • (D) हवा, लहर, अग्नि
Correct Answer: (C) हवा, रेत, पानी
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काव्यांश में पंक्ति है: "सिकता, सलिल, समीर सदा से / स्नेह पाश में बंधे समुज्ज्वल"।


यहाँ प्रयुक्त तत्सम शब्दों के अर्थ हैं:

- सिकता = रेत (Sand)

- सलिल = पानी (Water/River)

- समीर = हवा (Wind)


अतः रेत, पानी और हवा स्नेह बंधन में बंधे हैं।


सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: शब्दार्थ ज्ञान महत्त्वपूर्ण है: सिकता = बालू/रेत।


Question 4:

संध्या के समय गंगा नदी कैसी प्रतीत हो रही है ?

Correct Answer:
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संध्या के समय गंगा नदी चितकबरी और केंचुल (साँप की उतारी हुई खाल) जैसी प्रतीत हो रही है।


धूप और छाँव के प्रभाव ('धूपछाँह के रंग की रेती') के कारण नदी का जल कहीं चमकीला (रजत) और कहीं गहरा (नील) दिख रहा है।


डूबते सूर्य का प्रतिबिंब जल में एक धंसे हुए 'ज्योति स्तंभ' जैसा लग रहा है।
Quick Tip: दृश्य बिंबों (Visual Imagery) का उल्लेख करें: 'चितकबरा', 'रजत', 'ज्योति स्तंभ'।


Question 5:

संध्याकालीन प्रकृति की सुंदरता का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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कवि ने संध्याकालीन प्रकृति को अत्यंत सुंदर और जादुई बताया है:


1. आकाश: शाम की लालिमा एक पक्षी की तरह पेड़ों के शिखरों पर विश्राम कर रही है।


2. पेड़-पौधे: पीपल के पत्ते तांबे के रंग (ताम्रपर्ण) के चमक रहे हैं।


3. जल-स्रोत: झरने सोने (स्वर्णिम) जैसे बह रहे हैं।


4. समग्र वातावरण: रेत, हवा और पानी एक शांत और उज्ज्वल स्नेह-बंधन में बंधे हुए प्रतीत होते हैं।
Quick Tip: प्रकृति के विभिन्न तत्वों (पेड़, झरने, आकाश) के लिए प्रयुक्त विशेषणों (स्वर्णिम, ताम्रपर्ण) का प्रयोग करें।


Question 6:

संध्या के नदी तट के दृश्य का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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नदी तट पर शाम के समय एक अद्भुत दृश्य उपस्थित है:


1. रेत: रेत धूप-छाँव के मिश्रित रंगों वाली दिख रही है।


2. लहरें: हवा के कारण लहरों पर साँप जैसी आकृतियाँ (सर्पांकित) बन रही हैं।


3. वातावरण: पास के मंदिर में शंख और घंटे बज रहे हैं, जिसकी ध्वनि से लहरों में भी एक लयबद्ध कंपन महसूस हो रहा है।


4. प्रकाश: मंदिर का कलश दीपशिखा की तरह चमक रहा है और आकाश में नीरांजन (आरती) कर रहा है।
Quick Tip: दृश्य (Sight) और ध्वनि (Sound) का मिश्रण वर्णन को सजीव बनाता है।


Question 7:

लेखक का उद्देश्य होता है :

  • (A) आर्थिक उपार्जन
  • (B) भावनाओं की अभिव्यक्ति
  • (C) मान-सम्मान की प्राप्ति
  • (D) पाठकों की संतुष्टि
Correct Answer: (B) भावनाओं की अभिव्यक्ति
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गद्यांश की दूसरी पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा है: "मगर जो अनुभूति, पीड़ा, हर्षोल्लास लेखक के हृदय में उपजता है, उनको अभिव्यक्त किया ही जाना है।"


यहाँ लेखक स्पष्ट करते हैं कि चाहे पाठक कम हों या न हों, लेखक के मन के भावों का प्रकट होना अनिवार्य है।


आर्थिक लाभ या मान-सम्मान गद्यांश में गौण माने गए हैं, मुख्य बल 'अभिव्यक्ति' पर है।


अतः सही विकल्प (B) है।
Quick Tip: गद्यांश में 'उद्देश्य' या 'वृत्ति' से संबंधित वाक्यों को रेखांकित करें; यहाँ 'अभिव्यक्त किया जाना' वाक्यांश निर्णायक है।


Question 8:

चेखव का उदाहरण यहाँ क्यों दिया गया है ?

  • (A) आरंभिक समय के संघर्ष से न घबराने के लिए
  • (B) लेखक के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए
  • (C) लेखन-कर्म की जटिलता को बताने के लिए
  • (D) कहानी के नायक की सहनशीलता दर्शाने के लिए
Correct Answer: (B) लेखक के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए
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गद्यांश में चेखव की कहानी का जिक्र यह बताने के लिए किया गया है कि लेखक को अपनी बात कहने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है।


कहानी में नायक अपनी व्यथा सुनाना चाहता है, पर कोई सुनने वाला नहीं मिलता, अंततः उसे घोड़े को कहानी सुनानी पड़ती है।


यह उदाहरण लेखक की 'पीड़ा' और 'श्रोता के अभाव' रूपी कठिनाई को मार्मिक ढंग से उजागर करता है।


अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: उदाहरण (Example) का कार्य मुख्य विचार को पुष्ट करना होता है। यहाँ मुख्य विचार 'लेखक की पीड़ा/संघर्ष' है।


Question 9:

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :

कथन : अनेक शीर्ष लेखक प्रारंभ में पाठक-प्रकाशक नहीं मिलने से नैराश्य के गर्त में नहीं डूबे।

कारण : विचारों की सत्यता और आगामी उपयोगिता के प्रति उन्हें कोई शंका नहीं रहती।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • (B) कारण सही है, किंतु कथन ग़लत है।
  • (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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गद्यांश के अनुसार, शीर्ष लेखक शुरुआती असफलताओं (पाठक न मिलना) से निराश नहीं हुए। यह कथन सत्य है।


गद्यांश में इसका कारण भी बताया गया है: "जिनके पास कुछ ठोस कहने-लिखने को है, वे कभी थमेंगे नहीं।"


अर्थात् उन्हें अपने विचारों की 'ठोसता' (सत्यता) और भविष्य में उनके महत्त्व (उपयोगिता) पर पूरा भरोसा था।


इसी विश्वास (कारण) के चलते वे निराश नहीं हुए (कथन)। अतः व्याख्या सही है।
Quick Tip: अभिकथन-कारण में 'क्योंकि' (Because) लगाकर पढ़ें: "वे निराश नहीं हुए क्योंकि उन्हें अपने विचारों पर भरोसा था।"


Question 10:

लेखन कर्म का रूप क्यों बदल रहा है ?

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार, लेखन कर्म का रूप बदलने के मुख्य कारण हैं:


1. डिजिटल क्रांति: आधुनिक तकनीक और डिजिटल चकाचौंध ने लोगों की आदतों को बदल दिया है।


2. माध्यम में बदलाव: अब लोगों का रुझान 'पढ़ने-लिखने' के बजाय 'बोलने-सुनने' (Audio-Visual) और 'देखने' की ओर अधिक हो गया है, जिससे लिखित शब्द की गरिमा प्रभावित हुई है।
Quick Tip: यहाँ 'रूप बदलना' का अर्थ है पारंपरिक लेखन से डिजिटल/दृश्य माध्यमों की ओर संक्रमण।


Question 11:

लेखक को ‘मशीनी-क्रिया’ क्यों नहीं कहा जा सकता ?

Correct Answer:
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लेखन को 'मशीनी-क्रिया' नहीं कहा जा सकता क्योंकि:


1. संवेदना: मशीनें भावनाहीन होती हैं, जबकि लेखन का आधार ही मानवीय संवेदनाएँ, पीड़ा और हर्षोल्लास है।


2. वैचारिक संघर्ष: लेखन में विचारों से जूझना पड़ता है, शब्दों का चयन करना पड़ता है और हृदय की गहराइयों को छूना पड़ता है, जो एक यांत्रिक प्रक्रिया (Mechanical Process) नहीं हो सकती।
Quick Tip: अंतर स्पष्ट करें: मशीन = दोहराव (Repetition), लेखन = अनुभूति (Feeling)।


Question 12:

डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र में क्या प्रभाव दिखाई देता है ?

Correct Answer:
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डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है:


1. रुझान में परिवर्तन: अब अधिसंख्य लोग 'जानने, सीखने और समझने' के लिए पुस्तकों के बजाय डिजिटल माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं।


2. पढ़ने की संस्कृति का ह्रास: 'पढ़ने-लिखने' की जगह 'बोलने-सुनने' (Audio-Visual content) को प्राथमिकता मिल रही है।
Quick Tip: प्रभाव (Effect) = पठन संस्कृति में कमी और डिजिटल/दृश्य माध्यमों की वृद्धि।


Question 13:

‘नए किरदारों की आवश्यकता तो बरकरार रहेगी’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इस पंक्ति का आशय है कि माध्यम चाहे मुद्रित (Print) हो या डिजिटल, कहानियों की आत्मा यानी 'पात्र' (Characters) हमेशा जरूरी रहेंगे।


समाज बदल सकता है, तकनीक बदल सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और जीवन-संघर्षों को व्यक्त करने वाले नए-नए किरदारों का सृजन अनिवार्य बना रहेगा।


तकनीक पात्रों को नहीं रच सकती, उन्हें लेखक ही गढ़ेगा।
Quick Tip: 'किरदार' कहानी का मानवीय चेहरा होते हैं, जो तकनीक से स्वतंत्र और अपरिहार्य हैं।


Question 14:

पत्रकारीय विशेषज्ञता से क्या अभिप्राय है ? यह कैसे हासिल की जाती है ?

Correct Answer:
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पत्रकारीय विशेषज्ञता (Specialized Reporting): सामान्य समाचारों से आगे बढ़कर, किसी विशेष क्षेत्र (जैसे अर्थशास्त्र, खेल, अपराध, विज्ञान) की गहरी जानकारी और विश्लेषण के साथ की गई रिपोर्टिंग को पत्रकारीय विशेषज्ञता कहते हैं।


कैसे हासिल होती है:


1. गहन अध्ययन: संबंधित विषय की पुस्तकें पढ़ने और निरंतर अपडेट रहने से।


2. अनुभव: उस क्षेत्र (Beat) में लंबे समय तक काम करने और विश्वसनीय स्रोतों को विकसित करने से।


3. रुचि: विषय के प्रति स्वाभाविक जिज्ञासा और निरंतर सीखने की ललक से।
Quick Tip: सामान्य रिपोर्टर 'सूचना' देता है, जबकि विशेषज्ञ रिपोर्टर उस सूचना के 'मायने' (Meaning) और 'प्रभाव' को समझाता है।


Question 15:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य कैसे विभाजित किए जाते हैं ?

\

Correct Answer:
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कहानी को नाटक में बदलते समय दृश्यों का विभाजन मुख्य रूप से 'स्थान' (Space) और 'समय' (Time) के आधार पर किया जाता है।


1. स्थान परिवर्तन: यदि कहानी में घटना एक स्थान (जैसे घर) से दूसरे स्थान (जैसे पार्क) पर स्थानांतरित होती है, तो नाटक में वहाँ दृश्य बदलना पड़ता है।


2. समय परिवर्तन: यदि एक ही स्थान पर घटना घट रही है लेकिन समय बदल गया है (जैसे सुबह के बाद शाम), तो भी नया दृश्य शुरू होता है।


प्रत्येक दृश्य एक निश्चित समय और स्थान (Space-Time block) में घटित होने वाली एक इकाई है।
Quick Tip: सूत्र याद रखें: नया स्थान या नया समय = नया दृश्य।


Question 16:

मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यमों (Print Media) के लिए लेखन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:


1. भाषा की शुद्धता: मुद्रित शब्द स्थायी होते हैं, इसलिए व्याकरण, वर्तनी और वाक्य विन्यास बिल्कुल सही होने चाहिए।


2. तारतम्यता (Flow): वाक्यों और पैराग्राफ में जुड़ाव होना चाहिए ताकि पाठक का प्रवाह न टूटे।


3. तथ्यात्मक सटीकता: प्रकाशित होने के बाद गलती सुधारी नहीं जा सकती, इसलिए तथ्यों की गहन जाँच अनिवार्य है।


4. संक्षिप्तता: सीमित जगह (Space) होने के कारण अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए और बात को सटीक तरीके से कहना चाहिए।
Quick Tip: प्रिंट मीडिया की प्रकृति 'स्थायी' और 'सीमित स्थान' वाली है, इसलिए इसमें 'शुद्धता' और 'संक्षिप्तता' सबसे महत्वपूर्ण हैं।


Question 17:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(i) भीषण गर्मी में बादलों का बरसना

Correct Answer:
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भीषण गर्मी में बादलों का बरसना


जेठ-आषाढ़ की तपती दुपहरी जब धरती का सीना छलनी कर देती है और लू के थपेड़ों से जन-जीवन त्रस्त हो जाता है, तब आसमान में काले बादलों का उमड़ना किसी दैवीय वरदान जैसा लगता है।


सूरज की प्रखर किरणों से झुलसते पेड़-पौधे और सूखी नदियाँ मानो आकाश की ओर टकटकी लगाए प्रार्थना करती हैं।


ऐसे में जब काली घटाएँ घिरती हैं और पहली बूंद धरती को चूमती है, तो मिट्टी की सौंधी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठता है।


बारिश की फुहारें तन और मन की तपन को बुझा देती हैं। मोर खुशी से नाचने लगते हैं और किसान के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है।


भीषण गर्मी के बाद यह वर्षा केवल पानी नहीं, बल्कि जीवन और उम्मीद बनकर बरसती है, जो प्रकृति को पुनः हरा-भरा और जीवंत बना देती है।
Quick Tip: प्रकृति वर्णन में 'संवेदी बिंब' (Sensory details) जैसे—सौंधी गंध, मोर का नाचना, लू का थपेड़ा—लेख को प्रभावशाली बनाते हैं।


Question 18:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(ii) ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत

Correct Answer:
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ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत


आधुनिक तकनीकी युग में 'ऑनलाइन गेमिंग' बच्चों और युवाओं के लिए एक गंभीर नशा बन गया है।


जहाँ पहले बच्चे शाम होते ही खेल के मैदानों की ओर भागते थे, वहीं अब वे कमरों में बंद होकर मोबाइल स्क्रीन पर अंगुलियां नचाते हैं।


पबजी, फ्री-फायर जैसे खेलों ने उन्हें ऐसा जकड़ा है कि वे अपनी पढ़ाई, नींद और सामाजिक जीवन को भूल चुके हैं।


इस लत का दुष्प्रभाव उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बच्चों में मोटापा, आंखों की कमजोरी, चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है।


वर्चुअल दुनिया की यह लत उन्हें वास्तविकता से काट रही है।


आवश्यकता है कि अभिभावक और समाज इस खतरे को पहचानें, स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें और बच्चों को रचनात्मक व मैदानी गतिविधियों की ओर मोड़ें।
Quick Tip: समस्या-प्रधान लेख: कारण (तकनीक) \(\rightarrow\) प्रभाव (सेहत/समाज पर) \(\rightarrow\) समाधान (संतुलन/जागरूकता)।


Question 19:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(iii) शहरों की तरफ भागता ग्रामीण

Correct Answer:
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शहरों की तरफ भागता ग्रामीण


गाँवों से शहरों की ओर पलायन आज भारत की एक प्रमुख समस्या है।


गाँवों में रोजगार के अभाव, कृषि में घाटा और बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) की कमी के कारण ग्रामीण युवा शहरों की ओर भाग रहे हैं।


शहर की चमक-दमक उन्हें आकर्षित करती है, लेकिन वहाँ जाकर वे अक्सर भीड़, प्रदूषण और महंगी जीवनशैली के जाल में फँस जाते हैं।


इस पलायन से जहाँ एक ओर गाँव वीरान और बुजुर्गों के आश्रय स्थल बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहरों में जनसंख्या का दबाव और मलिन बस्तियाँ बढ़ रही हैं।


खेती और लोक-संस्कृति खतरे में है।


यदि गाँवों में ही रोजगार और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ ('स्मार्ट विलेज'), तो इस पलायन को रोका जा सकता है और ग्राम-जीवन को पुनः समृद्ध किया जा सकता है।
Quick Tip: पलायन के 'पुश फैक्टर' (गाँव की कमी) और 'पुल फैक्टर' (शहर का आकर्षण) दोनों का उल्लेख करें।


Question 20:

भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल कार्य क्यों है ?

Correct Answer:
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भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना इसलिए मुश्किल है क्योंकि लेखन एक अनुशासित और सचेत प्रक्रिया है।


बोलते समय हम व्याकरण, क्रम या भाषा की शुद्धता का उतना ध्यान नहीं रखते, लेकिन लिखते समय विचारों में तार्किकता और सुगठित ढांचा होना आवश्यक है।


अमूर्त भावनाओं को सही शब्दों में पिरोना और उन्हें पाठक तक सटीक रूप में पहुँचाना अभ्यास की मांग करता है, जो हर किसी के लिए सहज नहीं होता।
Quick Tip: बोलना 'स्वाभाविक' है, जबकि लिखना 'अर्जित कौशल' है, जिसमें भाषा और विचार के संतुलन की आवश्यकता होती है।


Question 21:

सिनेमा, रंगमंच और रेडियो नाटक में क्या अंतर है ?

Correct Answer:
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1. सिनेमा: यह एक दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम है जो पूर्व-रिकॉर्डेड और संपादित (Edited) होता है। इसमें 'रीटेक' की सुविधा होती है।


2. रंगमंच (Theater): यह एक 'जीवंत' (Live) माध्यम है जहाँ अभिनेता और दर्शक प्रत्यक्ष सामने होते हैं। इसमें गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।


3. रेडियो नाटक: यह केवल श्रव्य (Audio) माध्यम है। इसमें दृश्य नहीं होते, सारा प्रभाव ध्वनि, संवाद और संगीत के माध्यम से श्रोता की कल्पनाशक्ति पर निर्भर करता है।
Quick Tip: मुख्य अंतर: सिनेमा = तकनीक/एडिटिंग, रंगमंच = जीवंतता, रेडियो = ध्वनि/कल्पना।


Question 22:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय संवादों को किस प्रकार नाटकीय बनाया जा सकता है ?

Correct Answer:
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संवादों को नाटकीय बनाने के लिए उन्हें छोटा, चुटीला और क्रियात्मक (Action-oriented) होना चाहिए।


लंबे भाषणों के बजाय ऐसे संवाद हों जो पात्रों के आपसी संघर्ष या मनोदशा को तुरंत प्रकट करें।


संवाद केवल सूचना देने वाले नहीं, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने वाले और दर्शकों को बांधने वाले होने चाहिए।
Quick Tip: नाटकीय संवाद का नियम: 'कम शब्दों में अधिक प्रभाव' और 'संघर्ष का प्रकटीकरण'।


Question 23:

समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में ‘संपादक के नाम पत्र’ का क्या महत्त्व है ?

Correct Answer:
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'संपादक के नाम पत्र' स्तंभ समाचार पत्र में लोकतंत्र और जनमत का प्रतीक है।


यह आम पाठकों को अपनी राय, शिकायतें और सुझाव रखने का मंच प्रदान करता है।


इसके माध्यम से पाठक विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बहस करते हैं और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हैं।


यह अखबार को एकतरफा संचार के बजाय 'संवादात्मक' बनाता है।
Quick Tip: यह पाठकों का अपना 'कोना' है, जो अखबार की विश्वसनीयता और जुड़ाव बढ़ाता है।


Question 24:

इंटरनेट पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इंटरनेट पर समाचारों के संकलन, लेखन, प्रकाशन और आदान-प्रदान को इंटरनेट पत्रकारिता (Cyber Journalism) कहते हैं।


यह प्रिंट, रेडियो और टीवी का संगम (Convergence) है, जिसमें टेक्स्ट, चित्र, ध्वनि और वीडियो एक साथ उपलब्ध होते हैं।


इसकी सबसे बड़ी विशेषताएँ हैं—तात्कालिकता (Real-time updates), विश्वव्यापी पहुँच और इंटरएक्टिविटी (पाठक की तुरंत प्रतिक्रिया)।
Quick Tip: कीवर्ड्स: 'कन्वर्जेंस' (Convergence) और '24x7 अपडेट्स'।


Question 25:

‘कविता एक खेल है बच्चों के बहाने’ – पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि कविता और बच्चे में क्या समानता है ।

Correct Answer:
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कवि कुंवर नारायण के अनुसार, कविता और बच्चे दोनों ही बंधनमुक्त और रचनात्मक होते हैं।


जिस प्रकार बच्चों के खेल में किसी प्रकार की सीमा (देश, काल, जाति) नहीं होती और वे अपने खेल से सभी घरों को एक कर देते हैं।


उसी प्रकार कविता भी शब्दों का एक खेल है जो सीमाओं से परे है।


कविता और बच्चे दोनों में ही अपार संभावनाएँ और ऊर्जा होती है जो आत्मीयता से सबको जोड़ती है।
Quick Tip: समानता का आधार: 'निर्दोषिता', 'सृजनात्मकता' और 'सीमाहीनता'।


Question 26:

‘पतंग’ कविता के आधार पर पतंग की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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'पतंग' कविता में आलोक धन्वा ने पतंग को बाल-सुलभ इच्छाओं, उमंगों और उच्च आकांक्षाओं का प्रतीक माना है।


आसमान में उड़ती हुई रंग-बिरंगी पतंगें बच्चों के सपनों की ऊंचाइयों को दर्शाती हैं।


पतंग की नाजुकता बच्चों की कोमलता का और उसकी ऊँची उड़ान उनके असीम उत्साह और साहस का प्रतीक है।


यह उस 'दुनिया' का बिंब है जहाँ बच्चे अपनी धुन में खोए रहते हैं।
Quick Tip: पतंग = सपने/उमंगें। धागा = संयम/जुड़ाव।


Question 27:

‘पतंग’ कविता में ‘बच्चों का सूरज के सामने आने’ से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
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'सूरज के सामने आने' का अभिप्राय है—चुनौतियों का डटकर सामना करना और निडर होना।


जब बच्चे छतों के खतरनाक किनारों से गिरकर बच जाते हैं, तो उनका भय समाप्त हो जाता है।


वे अब और अधिक आत्मविश्वास और साहस के साथ 'सुनहले सूरज' (तेज और प्रकाश का प्रतीक) का सामना करते हैं।


यह उनकी अदम्य जिजीविषा और विजय-भाव को दर्शाता है।
Quick Tip: सूरज यहाँ केवल प्रकाश नहीं, बल्कि 'जीवन की चुनौतियों' और 'ऊर्जा' का प्रतीक है।


Question 28:

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :

  • (A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
  • (B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
  • (D) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
Correct Answer: (C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
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कवि ने 'छोटा मेरा खेत' कविता में खेती के रूपकों का प्रयोग किया है:


1. छोटा मेरा खेत: कवि ने 'कागज के पन्ने' (i) को अपना चौकोना खेत माना है।


2. अंकुर फूटना: जब विचार और कल्पना मिलती है, तो 'भावनाओं को शब्द मिलते हैं' (iii), जिसे अंकुर फूटना कहा गया है।


3. पल्लवित पुष्पित होना: जब रचना पूर्ण हो जाती है, तो वह एक 'साहित्यिक कृति का रूप धारण करती है' (ii), जो फूलों से लदी फसल समान है।


अतः सही मिलान: 1-(i), 2-(iii), 3-(ii), जो विकल्प (C) में है।
Quick Tip: रूपक (Metaphor) को डिकोड करें: खेत = कागज, अंकुर = शब्द, फसल = कृति।


Question 29:

कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है :

  • (A) विचार और अभिव्यक्ति का
  • (B) कवि के परिश्रम का
  • (C) कल्पना का
  • (D) शब्दों का
Correct Answer: (A) विचार और अभिव्यक्ति का
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कविता में 'बीज' उस प्रारंभिक क्षण या विचार (Idea) का प्रतीक है जो कवि के मन में अचानक आता है।


यही विचार अभिव्यक्ति का माध्यम पाकर कविता बनता है।


'कल्पना' तो वह रसायन है जो बीज को गलाता है, और 'शब्द' अंकुर हैं।


अतः मूल बीज 'विचार और अभिव्यक्ति' का ही होता है।
Quick Tip: सृजन की शुरुआत 'विचार' (Thought/Idea) से होती है, वही बीज है।


Question 30:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।

कारण : असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • (B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
  • (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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कवि ने साहित्य के रस (अमृत धारा) को 'अक्षय पात्र' कहा है।


कथन सत्य है क्योंकि साहित्य समय की सीमाओं को पार कर अमर (कालजयी) हो जाता है।


कारण भी सत्य है क्योंकि इसे पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ पढ़ती हैं ("लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती"), फिर भी इसका आनंद बना रहता है।


चूँकि आनंद कभी खत्म नहीं होता (कारण), इसीलिए यह कालजयी है (कथन)। व्याख्या सही है।
Quick Tip: साहित्य का रस भौतिक रस (जैसे गन्ने का रस) से अलग है; यह बांटने से बढ़ता है, कम नहीं होता।


Question 31:

‘झूमने लगे फल’ का आशय है :

  • (A) बीज अंकुरित होने लगे
  • (B) फल हवा के संपर्क से झूमने लगे
  • (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
  • (D) बीज फूलों का रूप धारण करने लगे
Correct Answer: (C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
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काव्यांश में 'फल' का लाक्षणिक अर्थ कविता का आनंद (रस) या कृति की पूर्णता है।


जब खेती पक जाती है तो फल लद जाते हैं और झूमते हैं। उसी प्रकार, जब कवि का सृजन-कर्म (परिश्रम) पूरा हो जाता है, तो उससे प्राप्त होने वाला आनंद पाठकों को मिलने लगता है।


अतः यह 'परिश्रम के प्रतिफल' का सूचक है।
Quick Tip: खेती में फल = अंतिम उत्पाद। काव्य में फल = रसास्वादन/सफलता।


Question 32:

‘बीज गल गया निःशेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है ?

  • (A) खेतों में फ़सल उगाने के लिए बीजों को मिट्टी में बोना पड़ता है।
  • (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
  • (C) बीजों के गलने पर ही खेतों में फ़सल के अंकुर फूटते हैं।
  • (D) कल्पना के संसर्ग बिना साहित्यिक कृति की रचना असंभव है।
Correct Answer: (B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
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'बीज गल गया निःशेष' का दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थ है 'अहंकार का विसर्जन'।


जिस तरह बीज को पेड़ बनने के लिए अपना अस्तित्व मिटाना पड़ता है, उसी तरह रचनाकार को महान कृति रचने के लिए अपने 'मैं' (Ego) को मिटाना पड़ता है।


आत्म-त्याग और समर्पण के बिना नवनिर्माण संभव नहीं है।


अतः विकल्प (B) सबसे गहरा और सही अर्थ देता है।
Quick Tip: विनाश में ही निर्माण छिपा है। 'गलना' यहाँ 'समर्पण' (Surrender) का प्रतीक है।


Question 33:

कवितावली के छंदों के आधार पर तत्कालीन आर्थिक विषमताओं का वर्णन करते हुए लिखिए कि वर्तमान समय में क्या स्थिति है ।

  • (A) See Solution
  • (B) See Solution
  • (C) See Solution
  • (D) See Solution
Correct Answer: (A) See Solution
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तुलसीदास जी ने 'कवितावली' में अपने समय की भयंकर गरीबी, बेरोजगारी और अकाल का यथार्थ चित्रण किया है।


उस समय किसानों के पास खेती, व्यापारियों के पास व्यापार और भिखारियों के लिए भीख तक नहीं थी ("किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी...").


पेट की आग बुझाने के लिए लोग अधार्मिक कार्य करने और अपनी संतानों को बेचने के लिए विवश थे।


वर्तमान स्थिति: आज भी भारत में आर्थिक विषमता और बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यद्यपि सरकारी योजनाएँ हैं, फिर भी श्रमिक और निम्न वर्ग आज भी आजीविका के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है, जो तुलसी के समय की पीड़ा से मेल खाता है।
Quick Tip: तुलना का आधार 'पेट की आग' (Hunger) और 'रोजगार का अभाव' (Unemployment) है।


Question 34:

‘छोटा मेरा खेत’ कविता खेतों के रूपक में बँधी कवि-कर्म के रूपक को व्यक्त करने वाली कविता है ।’ सिद्ध कीजिए ।

  • (A) See Solution
  • (B) See Solution
  • (C) See Solution
  • (D) See Solution
Correct Answer: (A) See Solution
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कवि उमाशंकर जोशी ने इस कविता में कृषि कर्म के माध्यम से काव्य-सृजन की प्रक्रिया को समझाया है, जो पूर्णतः सटीक है:


1. कागज का पन्ना = चौकोना खेत: जिस पर कवि अपने विचारों की खेती करता है।


2. विचार/अनुभूति = बीज: जो मन में अचानक आता है और रोपा जाता है।


3. कल्पना = रसायन/खाद: जो विचार को विकसित करती है।


4. शब्द = अंकुर: जो अभिव्यक्ति का रूप लेते हैं।


5. कविता/रस = फसल: जो अनंत काल तक पाठकों को आनंद देती है।
Quick Tip: यह 'सांगरूपक' (Extended Metaphor) का बेहतरीन उदाहरण है।


Question 35:

‘जग-जीवन को भार’ की तरह लेकर फिरने वाला कवि उससे निरपेक्ष क्यों नहीं रह पाता ? ‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।

  • (A) See Solution
  • (B) See Solution
  • (C) See Solution
  • (D) See Solution
Correct Answer: (A) See Solution
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कवि हरिवंशराय बच्चन स्वीकार करते हैं कि सांसारिक जिम्मेदारियाँ और समस्याएँ एक 'भार' (बोझ) के समान हैं।


फिर भी, वे इस दुनिया से पूरी तरह कटकर (निरपेक्ष) नहीं रह सकते क्योंकि उनका अस्तित्व और पहचान इसी समाज से जुड़ी है।


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है; उसे अपने सुख-दुख और प्रेम को बांटने के लिए दुनिया की आवश्यकता होती है।


इसलिए कवि का संसार से रिश्ता 'प्रीति-कलह' (Love-Hate) का है; वे इसे छोड़ नहीं सकते, भले ही यह कष्टकारी हो।
Quick Tip: 'निरपेक्ष' न होने का कारण 'सामाजिकता' और 'आपसी जुड़ाव' है।


Question 36:

‘भक्तिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि एक बच्ची का पाँच वर्ष की अवस्था में ब्याह और नौ वर्ष की अवस्था में गौना कर उसे ससुराल विदा करना, तत्कालीन भारतीय समाज की किस कुरीति की ओर संकेत करता है । वर्तमान भारतीय समाज में क्या स्थिति है ? स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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भक्तिन का विवाह 5 वर्ष और गौना 9 वर्ष की आयु में होना तत्कालीन भारतीय समाज में व्याप्त बाल-विवाह (Child Marriage) की कुरीति को दर्शाता है।


उस समय लड़कियों को शिक्षा और विकास का अवसर दिए बिना, बचपन में ही गृहस्थी के बोझ तले दबा दिया जाता था।


वर्तमान स्थिति: आज स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बाल-विवाह कानूनन अपराध है और लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।


हालाँकि, कुछ पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में यह कुरीति अब भी चोरी-छिपे जीवित है, लेकिन सामाजिक जागरूकता के कारण इसमें भारी कमी आई है।
Quick Tip: अंतर स्पष्ट करें: अतीत = अशिक्षा/बाल-विवाह, वर्तमान = शिक्षा/कानूनी अधिकार।


Question 37:

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में लेखक ने कौन-से मेघों के उमड़ने-गरजने और बरसने की बात कही है और उनके बरसने पर भी गगरी फूटी की फूटी और बैल पियासे क्यों रह जाते हैं ?

Correct Answer:
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यहाँ लेखक ने सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों रूपी मेघों की बात कही है जो फाइलों में उमड़ते-गरजते हैं और बजट (पैसा) बरसाते हैं।


लेकिन 'गगरी फूटी की फूटी' रहने का अर्थ है भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन वाली व्यवस्था, जिसके कारण विकास का लाभ (पानी) नीचे तक नहीं पहुँचता।


'बैल पियासे' रहने का प्रतीक है कि देश का आम आदमी और किसान तमाम योजनाओं के बावजूद अभाव और गरीबी में ही जी रहा है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक अर्थ: मेघ = योजनाएँ, फूटी गगरी = भ्रष्टाचार, प्यासा बैल = जनता।


Question 38:

शिरीष के फल और फूलों को देखकर लेखक को किनकी याद हो आती है और क्यों ?

Correct Answer:
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शिरीष के फूलों की कोमलता और फलों की कठोरता देखकर लेखक को नेताओं और सत्ताधारियों की याद आती है।


शिरीष के फल पक जाने के बाद भी डाल छोड़ते नहीं हैं, जब तक कि नए फल उन्हें धक्का मारकर गिरा न दें।


इसी प्रकार, समाज में कई नेता और बुजुर्ग अपनी कुर्सी (सत्ता) से तब तक चिपके रहते हैं जब तक कि युवा पीढ़ी उन्हें जबरदस्ती हटा न दे।


लेखक को यह 'अधिकार-लिप्सा' और 'परिवर्तन-विरोधी' मानसिकता शिरीष के फलों जैसी लगती है।
Quick Tip: शिरीष के फल = जिद्दी राजनेता जो पद नहीं छोड़ना चाहते।


Question 39:

‘जीवन में प्राय: सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है ।’ कथन का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि महादेवी जी ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है ?

Correct Answer:
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इस कथन का आशय है कि अक्सर व्यक्ति के नाम का अर्थ उसके जीवन की परिस्थितियों से मेल नहीं खाता, बल्कि उल्टा होता है।


महादेवी जी ने यह भक्तिन के संदर्भ में कहा है।


भक्तिन का वास्तविक नाम 'लक्ष्मी' (धन की देवी) था, जो संपन्नता का प्रतीक है।


किंतु उसका पूरा जीवन घोर गरीबी और संघर्ष में बीता। नाम और भाग्य में इस तीखे विरोधाभास (Irony) को देखकर ही लेखिका ने यह टिप्पणी की।
Quick Tip: लक्ष्मी (नाम) \(\neq\) गरीबी (जीवन)। यही विरोधाभास है।


Question 40:

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में पानी के लिए गुहार लगाते बच्चों की टोली में ‘गगरी फूटी बैल पियासा’ की बात क्यों की जा रही है ? स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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लोकगीत की पंक्ति 'गगरी फूटी बैल पियासा' का प्रयोग अभाव और व्यवस्था की विफलता को दर्शाने के लिए किया गया है।


इसका अर्थ है कि बादलों से पानी (संसाधन) तो मांगा जा रहा है, लेकिन हमारी संचयन की व्यवस्था (गगरी) ही टूटी हुई है।


परिणामस्वरूप, मेहनत करने वाला बैल (किसान/समाज) प्यासा ही रह जाता है।


यह पंक्ति इस सत्य को उजागर करती है कि बिना सही प्रबंधन के संसाधनों की मांग व्यर्थ है, क्योंकि लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुँचता।
Quick Tip: गगरी फूटी = System Failure. बैल पियासा = Suffering of common man.


Question 41:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि जाति आधारित श्रम विभाजन का देश के आर्थिक पहलू पर क्या प्रभाव पड़ता है ।

Correct Answer:
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डॉ. अंबेडकर के अनुसार, जाति आधारित श्रम विभाजन आर्थिक रूप से हानिकारक है। इसके प्रभाव:


1. अकुशलता: मनुष्य को रुचि के विरुद्ध पैतृक कार्य करना पड़ता है, जिससे वह 'टालू' काम करता है और उत्पादकता कम हो जाती है।


2. बेरोजगारी: उद्योग-धंधों में तकनीक बदलने पर भी पेशा बदलने की अनुमति न होने से व्यक्ति बेरोजगार हो जाता है।


3. गतिशीलता का अभाव: यह श्रम और पूँजी की गतिशीलता (Mobility) को रोकता है, जिससे आर्थिक विकास अवरुद्ध होता है।
Quick Tip: आर्थिक हानि के तीन कारण: अरुचि, कम उत्पादन, और बेरोजगारी।


Question 42:

बाज़ार में सद्भाव का ह्रास कब दिखाई देता है ?

  • (A) जब लोग अपनी परचेंजिंग पावर का प्रदर्शन करते हैं ।
  • (B) जब लोग आपस में ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं ।
  • (C) जब बाज़ार में धनी और निर्धन के बीच अंतर किया जाता है ।
  • (D) जब बाज़ार में अपनों को अधिक महत्त्व दिया जाता है ।
Correct Answer: (B) जब लोग आपस में ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं ।
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गद्यांश के अनुसार, बाज़ार में सद्भाव का ह्रास (कमी) तब होता है जब लोग एक-दूसरे को भाई-पड़ोसी न मानकर केवल 'ग्राहक' और 'बेचक' (विक्रेता) मानते हैं।


जब मानवीय संबंध खत्म होकर केवल व्यावसायिक (लाभ-हानि) संबंध रह जाते हैं, तो सद्भाव नष्ट हो जाता है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: सद्भाव मानवीय रिश्ते। ह्रास कोरा व्यापार।


Question 43:

बाज़ार में सद्भाव के ह्रास का क्या दुष्परिणाम निकलता है ?

  • (A) लोगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है ।
  • (B) आपसी प्रेम-भाव कम होने लगता है ।
  • (C) ग्राहक का शोषण होने लगता है ।
  • (D) पैसों का अभाव खलने लगता है ।
Correct Answer: (C) ग्राहक का शोषण होने लगता है ।
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सद्भाव घटने का सीधा परिणाम यह होता है कि लोग "एक-दूसरे को ठगने की घात में" रहते हैं।


लेखक लिखते हैं, "कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है।"


'शिकार होना' स्पष्ट रूप से शोषण (Exploitation) को दर्शाता है।


अतः विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: शोषण ही सद्भाव के अभाव का चरम परिणाम है।


Question 44:

‘ऐसे बाज़ार मानवता के लिए विडंबना हैं’ – पंक्ति में किस बाज़ार की ओर संकेत किया गया है ?

  • (A) जिस बाज़ार में लोगों की आवश्यकताओं का लाभ उठाकर शोषण किया जाए ।
  • (B) जिस बाज़ार में वस्तुओं को आकर्षक रूप से सजाकर रखा जाए ।
  • (C) जिस बाज़ार में सामाजिक समता की अवहेलना की जाए ।
  • (D) जिस बाज़ार में आर्थिक विषमता का बोलबाला दिखाई दे ।
Correct Answer: (A) जिस बाज़ार में लोगों की आवश्यकताओं का लाभ उठाकर शोषण किया जाए ।
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गद्यांश में उस बाज़ार को विडंबना कहा गया है जहाँ "आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता; बल्कि शोषण होने लगता है"।


जहाँ एक की हानि में दूसरा अपना लाभ देखता है और कपट का व्यवहार करता है।


अतः विकल्प (A) सही उत्तर है।
Quick Tip: बाज़ार का धर्म 'सेवा' है, 'शोषण' नहीं। जो बाज़ार शोषक है, वह विडंबना है।


Question 45:

आत्मीयजन और पड़ोसी भी ग्राहक के रूप में दिखाई देना, किस प्रवृत्ति का सूचक है ?

  • (A) समतावादी
  • (B) उपभोक्तावादी
  • (C) अनैतिकतावादी
  • (D) रूढ़िवादी
Correct Answer: (B) उपभोक्तावादी
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जब रिश्तों पर व्यापार हावी हो जाता है और हम अपने मित्रों/परिजनों को भी 'वस्तु' या 'ग्राहक' की तरह देखने लगते हैं, तो यह उपभोक्तावादी संस्कृति (Consumerism) का लक्षण है।


यह संस्कृति हर चीज़ का बाज़ारीकरण कर देती है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: उपभोक्तावाद = हर संबंध का बाज़ारीकरण (Commodification of relations).


Question 46:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘मायावी शास्त्र’ का अभिप्राय है :

  • (A) कल्पना से परिपूर्ण शास्त्र
  • (B) चकाचौंध से परिपूर्ण शास्त्र
  • (C) अर्थशास्त्र की व्याख्या करने वाला शास्त्र
  • (D) छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र
Correct Answer: (D) छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र
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लेखक ने ऐसे अर्थशास्त्र को जो मानवीयता को भूलकर केवल धन और छल-कपट को केंद्र में रखता है, 'मायावी शास्त्र' कहा है।


गद्यांश में इसे 'अनीति-शास्त्र' भी कहा गया है जो कपट को बढ़ावा देता है।


अतः विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: अनीति-शास्त्र = मायावी शास्त्र = छल-कपट का शास्त्र।


Question 47:

हफ़्ते में दो-दो बार सिनेमा देखने वाले, गज़ल और फ़िल्मी गाने गुनगुनाने वाले यशोधर पंत ने बुढ़ापा क्यों ओढ़ लिया था ? ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर लिखिए । क्या आप उनकी सोच से सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए ।

Correct Answer:
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जवानी में जिंदादिल रहे यशोधर बाबू ने बुढ़ापा इसलिए ओढ़ लिया क्योंकि वे अपने बच्चों की आधुनिकता और बदलते परिवेश से तालमेल नहीं बिठा पाए।


किशनदा के प्रभाव में आकर उन्होंने मान लिया कि "वानप्रस्थ" (बुढ़ापा) के लिए कुछ नियम होते हैं, जैसे पूजा-पाठ करना और दुनियादारी से कटना।


यह उनके अकेलेपन और उपेक्षा से बचने का एक रक्षात्मक उपाय (Defense Mechanism) था।


सहमति/असहमति: मैं उनकी सोच से सहमत नहीं हूँ। समय से पहले खुद को बूढ़ा मान लेना और जीवन के आनंद (गाने, सिनेमा) को छोड़ देना सही नहीं है। व्यक्ति को समय के साथ बदलना (Adapt) चाहिए, न कि कुंठित होकर परंपरा की आड़ लेनी चाहिए।
Quick Tip: यशोधर बाबू का बुढ़ापा 'स्वाभाविक' कम और 'ओढ़ा हुआ' (मानसिक) ज्यादा था।


Question 48:

‘जूझ’ कहानी में कक्षा के प्रथम दिन आनंदा के साथ उसके सहपाठियों द्वारा की जाने वाली शरारतों का उल्लेख किया गया है । इस प्रकार की जाने वाली शरारतों के प्रति अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए लिखिए कि वर्तमान समय में उनमें क्या परिवर्तन आया है ।

Correct Answer:
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कहानी में, पहले दिन चव्हाण के लड़के ने आनंदा का गमछा खींच लिया, उसे हवा में उछाला और मास्टर जी की मेज पर रख दिया। साथ ही, उसे मिट्टी फेंककर तंग किया।


दृष्टिकोण: यह शरारत नहीं, बल्कि रैगिंग (Ragging) और मानसिक उत्पीड़न है। इससे नए छात्र का आत्मविश्वास टूटता है और उसका पढ़ाई से मोहभंग हो सकता है। यह अत्यंत निंदनीय है।


वर्तमान परिवर्तन: आज स्थिति बदली है। स्कूलों में रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून और नियम (Anti-ragging laws) हैं।


अब ऐसी हरकतों को 'अनुशासनहीनता' माना जाता है। हालाँकि, अब यह 'साइबर बुलिंग' जैसे नए रूपों में भी दिखाई देती है, लेकिन संस्थागत रूप से इस पर काफी रोक लगी है।
Quick Tip: उत्तर में 'रैगिंग' और 'आत्मविश्वास पर प्रभाव' जैसे बिंदुओं को जरूर शामिल करें।


Question 49:

‘सिंधु घाटी सभ्यता में कला या सुरुचि का महत्त्व था ।’ ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के आधार पर उदाहरण सहित इस कथन की पुष्टि कीजिए ।

Correct Answer:
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लेखक ओम थानवी के अनुसार, सिंधु घाटी सभ्यता केवल सुविधा-संपन्न ही नहीं, बल्कि कला और सौंदर्यबोध (Aesthetics) से परिपूर्ण थी। इसके उदाहरण हैं:


1. वास्तु-कला: नगर का सुव्यवस्थित ग्रिड नियोजन, पक्की नालियाँ और स्नानघर।


2. कलाकृतियाँ: खुदाई में मिली 'नर्तकी' की मूर्ति, 'दाढ़ी वाले नरेश' की मूर्ति, और मुहरों पर उकेरे गए जानवरों (बैल, एकश्रृंगी) के चित्र।


3. दैनिक वस्तुएँ: मिट्टी के बर्तनों पर बने चित्र, मनकों (Beads) के हार, और बच्चों के खिलौने।


यहाँ भव्य महलों या हथियारों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी में कला और सलीके (सुरुचि) का महत्त्व था।
Quick Tip: यह सभ्यता 'ताकत' (Power) की नहीं, बल्कि 'सौंदर्य' (Beauty) की पोषक थी।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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