Zollege is here for to help you!!
Need Counselling
Dipanwita Pramanik's profile photo

Dipanwita Pramanik

Content Writer | Updated On - Sep 19, 2025

CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 3 - 2/1/3) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 3 - 2/1/3) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solutions Set 3 - 213


Question 1:

‘हमें अपने रंगों का पता नहीं है’ — से अभिप्राय है —

  • (A) अपने स्वभाव का ज्ञान नहीं है।
  • (B) जीवन की विविधता का ज्ञान नहीं है।
  • (C) अपनी विशेषताओं का ज्ञान नहीं है।
  • (D) अपनी परंपराओं का ज्ञान नहीं है।
Correct Answer: (C) अपनी विशेषताओं का ज्ञान नहीं है।
View Solution



इस पंक्ति में व्यक्ति की आत्म-अवहेलना पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

यह कथन इस बात को इंगीत करता है कि हम अपनी असली पहचान और विशिष्ट गुणों से अनभिज्ञ रहते हैं।

जब हम अपने 'रंग' को नहीं पहचानते, तो हम खुद को दूसरों की नजर से आंकते हैं।

यह आत्मचिंतन और आत्मबोध की कमी को दर्शाता है, जिसके कारण व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता।
Quick Tip: प्रश्न में प्रयुक्त प्रतीकात्मक भाषा के सही अर्थ को समझना बेहद महत्वपूर्ण है — शब्दों के पीछे छिपे वास्तविक भाव को समझने का अभ्यास करें।


Question 2:

‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’ — पंक्ति में जीवन के बहुरंगी होने का अर्थ है —

  • (A) जीवन का रंग-बिरंगा होना
  • (B) जीवन में दुख-तकलीफ का होना
  • (C) जीवन में सुख-दुख का होना
  • (D) जीवन का बहुत विशाल होना
Correct Answer: (C) जीवन में सुख-दुख का होना
View Solution



पंक्ति ‘‘हम भूल जाते हैं कि जीवन बहुरंगी है’’ का तात्पर्य यह है कि जीवन केवल एकतरफा अनुभवों का नाम नहीं है — यह विभिन्न भावनाओं, परिस्थितियों और अनुभवों का मिश्रण है।


‘‘बहुरंगी’’ शब्द यहाँ रूपक (metaphor) के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जिसका मतलब है जीवन में विभिन्न रंगों यानी सुख और दुख दोनों के अस्तित्व से।

यह संकेत करता है कि जीवन कभी पूरी तरह से सुखमय या पूरी तरह से दुखमय नहीं होता, बल्कि इसमें आनंद, पीड़ा, संतोष, असंतोष जैसे विविध अनुभव समाहित होते हैं।


प्रश्न विश्लेषण:

प्रश्न पूछता है कि ‘‘बहुरंगी’’ शब्द से क्या अर्थ निकाला जाए?

अब विकल्पों पर विचार करें:

(A) केवल रंग-बिरंगा होना सतही अर्थ है, यह प्रतीकात्मक नहीं है।

(B) केवल दुख-तकलीफ जीवन का एक हिस्सा हैं, पूरी कहानी नहीं।

(C) यह सबसे उपयुक्त विकल्प है, क्योंकि इसमें सुख और दुख दोनों के अस्तित्व की बात की गई है।

(D) ‘‘बहुत विशाल होना’’ संदर्भ से मेल नहीं खाता।


इसलिए सही उत्तर है: (C) जीवन में सुख-दुख का होना।
Quick Tip: जब कोई प्रश्न रूपक या प्रतीकात्मक भाषा का उपयोग करता है, तो उसका शाब्दिक नहीं बल्कि भावार्थ (emotional or symbolic meaning) समझना जरूरी होता है।


Question 3:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:


कथन: प्रकृति के कई रंग हैं और रंगों में कोई होड़ नहीं है।

कारण: प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।

  • (A) कारण सही है किंतु कथन गलत है।
  • (B) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
View Solution



कथन यह कहता है — ‘‘प्रकृति के कई रंग हैं और उनमें कोई होड़ नहीं है।”

यह वाक्य प्रकृति की विविधता, संतुलन और सामंजस्य को दर्शाता है — कि रंग अलग-अलग हैं लेकिन वे एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा नहीं करते।

यह एक रूपक है, जो मानव जीवन में विभिन्न भावनाओं, भूमिकाओं या तरीकों के सह-अस्तित्व की ओर संकेत करता है।


कारण कहता है — “प्रकृति सहज ही एक दिन में कई रंग बदलती है।”

यह कथन भी सत्य है, क्योंकि सुबह, दोपहर, संध्या, मौसम आदि के आधार पर प्रकृति अपने रंग बदलती रहती है।

लेकिन यह कथन कथन की व्याख्या नहीं करता — अर्थात यह यह नहीं बताता कि रंगों में होड़ क्यों नहीं है।


प्रश्न विश्लेषण:

(A) कारण सही है, कथन भी सही है — अतः यह विकल्प गलत है।

(B) दोनों कथन गलत नहीं हैं — यह विकल्प अस्वीकार्य है।

(C) यह सही विकल्प है — क्योंकि दोनों कथन सही हैं, परंतु कारण कथन की सटीक व्याख्या नहीं करता।

(D) यह सही होगा जब कारण कथन की व्याख्या करता, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है।


इसलिए सही उत्तर है: (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
Quick Tip: Assertion-Reason आधारित प्रश्नों में दोनों वाक्यों की सत्यता का मूल्यांकन करें और यह देखें कि क्या कारण कथन को स्पष्ट करता है या नहीं।


Question 4:

प्रकृति के माध्यम से लेखक हमें क्या संदेश देना चाहता है ?

Correct Answer:
View Solution



लेखक प्रकृति के विविध रंगों और सहजता के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि हमारा जीवन भी विविध अनुभवों, भावनाओं और घटनाओं से भरा हुआ है।

प्रकृति का कोई भी रंग श्रेष्ठ या हीन नहीं होता — सभी रंग मिलकर ही उसे पूर्ण बनाते हैं।

इसी प्रकार हमें जीवन में सुख-दुख, सफलता-असफलता, प्रेम-घृणा सभी को स्वीकार करना चाहिए।

लेखक यह भी बताना चाहता है कि जैसे प्रकृति में कोई होड़ नहीं, वैसे ही इंसान को भी प्रतिस्पर्धा छोड़कर सौहार्द्रपूर्ण जीवन अपनाना चाहिए।
Quick Tip: जब प्रश्न में “क्या संदेश देना चाहता है” पूछा जाए, तो लेखक के उद्देश्य और भाव का सार स्पष्ट करें।


Question 5:

रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का क्या कारण है ?

Correct Answer:
View Solution



रे विलियम्स के अनुसार जीवन की जटिलता का मूल कारण है मनुष्य का अपने ही विचारों की प्रतिक्रिया से घिर जाना।

वह अपने विचारों को वास्तविकता मान बैठता है और उनके अनुसार ही दुख, असंतोष, क्रोध आदि में उलझ जाता है।

इससे वह वर्तमान को नहीं देख पाता और विचारों की भूलभुलैया में उलझकर जीवन को कठिन और जटिल बना लेता है।
Quick Tip: उत्तर देते समय लेखक का नाम आने पर उसके विचारों का सार स्पष्ट शब्दों में लिखें।


Question 6:

‘दो रंग जुड़ते हैं तो एक नया ही रंग बन जाता है’ — पंक्ति का क्या आशय है ?

Correct Answer:
View Solution



इस पंक्ति का आशय यह है कि विरोधी या भिन्न तत्वों के मेल से भी कुछ नया, सुंदर और सार्थक जन्म लेता है।

यह जीवन का संकेत है कि केवल समानताओं से नहीं, विविधताओं के मेल से ही समग्रता आती है।

यह कथन सांप्रदायिक सौहार्द, सह-अस्तित्व और विविधता में एकता की भावना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: पंक्तियों के अर्थ बताते समय केवल शब्दार्थ नहीं, भावार्थ को केंद्र में रखें।


Question 7:

‘प्रकृति हर दिन होली खेलती है’ — से क्या अभिप्राय है ? इसके माध्यम से क्या संदेश दिया गया है ?

Correct Answer:
View Solution



इसका अभिप्राय है कि प्रकृति प्रत्येक दिन रंगों का उत्सव मनाती है — जैसे सूर्योदय-सूर्यास्त, मौसम, आकाश, फूलों आदि के विविध रंग।

लेखक बताना चाहता है कि हमें भी जीवन में रोज़ कुछ नया देखना, अनुभव करना और उत्सव की भावना अपनानी चाहिए।

इसका संदेश है कि जीवन को रंगों और आनंद से भरपूर बनाया जा सकता है अगर हम देखने का दृष्टिकोण बदलें।
Quick Tip: जब प्रश्न दो भागों में हो (अभिप्राय और संदेश), तो दोनों का उत्तर अलग पैराग्राफ में दें।


Question 8:

‘‘है दीप एक ....... सूर्य से भी भारी’’ — पंक्ति का आशय है —

  • (A) एक अकेली ज्योति व्यक्ति, संपूर्ण सौरजगत को भी रोशन करने में समर्थ है।
  • (B) सूर्य की तुलना दीपक के प्रकाश से अधिक शक्तिशाली व्यक्ति बनने से सम्बन्ध है।
  • (C) दीपक अपने प्रकाश से सूर्य को चुनौती देता है और भव्य बन जाता है।
  • (D) एक व्यक्ति अकेला ही संसार में अंधकार मिटा सकता है अगर भावनाएं पवित्र रहती हैं।
Correct Answer: (A) एक अकेली ज्योति व्यक्ति, संपूर्ण सौरजगत को भी रोशन करने में समर्थ है।
View Solution



यह पंक्ति एक रूपक के रूप में प्रयुक्त हुई है, जहाँ ‘‘दीप’’ व्यक्ति का प्रतीक है और ‘‘सूर्य’’ बाह्य जगत की विशालता और शक्तियों का।

यहाँ कवि यह कह रहा है कि एक अकेला व्यक्ति भी अगर संकल्पशील हो, तो वह संसार के विशालतम शक्तियों से भी अधिक प्रभावी कार्य कर सकता है।

दीपक, जो अपेक्षाकृत छोटा है, फिर भी अपने प्रकाश से अंधकार मिटाता है — उसी प्रकार एक सच्चा, जागरूक, सत्पथ पर चलने वाला व्यक्ति भी समाज में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

पंक्ति का आशय यह नहीं कि दीपक सूर्य से भौतिक रूप में भारी है, बल्कि यह मानवीय ऊर्जा, आस्था और प्रेरणा की महत्ता को दर्शाता है।


प्रश्न विश्लेषण:

(A) यह विकल्प भावार्थ के सबसे निकट है — क्योंकि यह “दीप” को व्यक्ति के रूप में रूपांतरित करता है।

(B) सूर्य की तुलना की जगह व्यक्ति के महत्व पर जोर देना आवश्यक है, जो इसमें नहीं है।

(C) यह पंक्ति के मूल भाव से भटकाव करता है, अतः यह अतिशयोक्ति है।

(D) यह भी आंशिक रूप से सही है, परंतु विकल्प (A) भाव के निकटतम है।
Quick Tip: जब कोई पंक्ति प्रतीकात्मक हो, तो उसके शब्दों के पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझें और विकल्पों में उसी के अनुरूप उत्तर चुनें।


Question 9:

‘इंसानी जीवन की रात मिटा’ — से क्या अभिप्राय है ?

  • (A) शोषित वर्ग के जीवन से रात्रि को दूर करना
  • (B) शोषित वर्ग के घरों को प्रकाशित करना
  • (C) इंसानों के जीवन से अंधकार को दूर करना
  • (D) शोषित वर्ग के अभावों को दूर कर, उन्हें अधिकार देना
Correct Answer: (D) शोषित वर्ग के अभावों को दूर कर, उन्हें अधिकार देना
View Solution



पंक्ति ‘‘इंसानी जीवन की रात मिटा’’ का अर्थ केवल भौतिक रात्रि का अंत नहीं है, बल्कि यह एक गहरा रूपक है जो शोषित, पीड़ित, और वंचित वर्गों के जीवन में व्याप्त अज्ञानता, असमानता और अभाव के अंधकार को इंगित करता है।

‘‘रात’’ यहाँ अज्ञान, दरिद्रता, सामाजिक भेदभाव और अधिकारों से वंचितता का प्रतीक है।

इसलिए जब कवि कहता है कि ‘‘इंसानी जीवन की रात मिटा’’, तो उसका आशय यह है कि— समाज को ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे वंचित वर्गों को समान अधिकार, संसाधन और सम्मान मिले।


प्रश्न विश्लेषण:

(A) केवल ‘‘रात्रि को दूर करना’’ एक सतही और भौतिक व्याख्या है।

(B) घरों को प्रकाशित करना केवल प्रतीकात्मक रूप से सीमित अर्थ है।

(C) यह उत्तर भी निकट है, परंतु इसमें ‘‘शोषित वर्ग’’ पर स्पष्ट ध्यान नहीं है।

(D) यह उत्तर सबसे सटीक और व्यापक है — क्योंकि यह अधिकार देने की सामाजिक चेतना को भी दर्शाता है।
Quick Tip: जब प्रश्न में ‘अभिप्राय’ पूछा जाए, तो प्रतीक के पीछे छिपे सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक अर्थों को केंद्र में रखें।


Question 10:

कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुसंगत कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:



\begin{tabular{|l|l|
\hline
कॉलम-1 & कॉलम-2

\hline
(क) मध्यम दीपक & (1) लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन

(ख) झंझापथ & (2) विपरीत परिस्थितियाँ

(ग) आहत पद & (3) घायल अंग

\hline
\end{tabular

  • (A) क-2, ख-3, ग-1
  • (B) क-1, ख-2, ग-3
  • (C) क-3, ख-1, ग-2
  • (D) क-1, ख-3, ग-2
Correct Answer: (B) क-1, ख-2, ग-3
View Solution



इस प्रकार के प्रश्नों में प्रतीकों या पदों के भावार्थ का विश्लेषण करना आवश्यक होता है:

(क) मध्यम दीपक — लक्ष्य प्राप्ति के सीमित साधन:

यह दीपक की सीमित ज्योति को प्रतीक बनाकर उस प्रयास को दर्शाता है जो सीमित साधनों के बावजूद लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग बनाती है।

अतः इसका मेल (1) से है।


(ख) झंझापथ — विपरीत परिस्थितियाँ:

‘झंझा’ अर्थात तूफान और ‘पथ’ यानी रास्ता, यह कठिन और संघर्षमय मार्ग का संकेत है।

अतः यह (2) के अनुकूल है।


(ग) आहत पद — घायल अंग:

‘आहत पद’ सीधे तौर पर चोटिल या ज़ख्मी पैर को दर्शाता है — जो ‘घायल अंग’ का प्रतीक है।

इसलिए यह (3) से मेल खाता है।


इस प्रकार सभी युग्म सटीक हैं:

क-1, ख-2, ग-3
Quick Tip: मिलान वाले प्रश्नों में सबसे पहले सभी पदों के भावार्थ को स्पष्ट रूप से समझें — फिर मिलान करें, यह त्रुटि की संभावना को कम करता है।


Question 11:

“इंसान स्वयं सवेरा का रूप धारण कर आ रहा है” — पंक्ति के माध्यम से किसे क्या चेतावनी दी गई है ?

Correct Answer:
View Solution



यह पंक्ति प्रतीकात्मक रूप में अंधकार के प्रतीकों को चेतावनी देती है कि अब इंसान स्वयं प्रकाश, परिवर्तन और नवजागरण का रूप धारण कर आ गया है।

‘‘सवेरा’’ यहाँ नवचेतना, नई सोच और नई सामाजिक क्रांति का प्रतीक है।

इसका आशय है कि — अब कोई भी अन्याय, शोषण या अज्ञानता का अंधकार टिकने वाला नहीं, क्योंकि जनमानस स्वयं बदलाव लाने को तैयार है।

यह चेतावनी है उन सभी शक्तियों को जो अंधकार, अन्याय और शोषण के पक्षधर हैं।
Quick Tip: जब प्रश्न ‘किसे चेतावनी दी गई है’ पूछे, तो उत्तर में चेतावनी प्राप्तकर्ता और चेतावनी का उद्देश्य दोनों स्पष्ट करें।


Question 12:

‘‘वनखंड जलाती है एक चिनगारी’’ — पंक्ति से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
View Solution



इस पंक्ति का आशय यह है कि छोटी-सी घटना, भावना या विचार भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन ला सकता है।

‘‘एक चिनगारी’’ यहाँ प्रतीक है — क्रांति, आक्रोश या जागरूकता के छोटे बीज का, जो पूरे समाज को आंदोलित कर सकता है।

जैसे एक छोटी चिनगारी पूरे जंगल को जला सकती है, वैसे ही एक सजग विचार, एक सत्य भाषण या छोटा विद्रोह भी पूरे तंत्र को बदल सकता है।

यह पंक्ति चेतावनी और प्रेरणा दोनों है — कि किसी को भी छोटा या तुच्छ न समझा जाए।
Quick Tip: जब कोई रूपक दिया गया हो, तो उसके वास्तविक प्रभाव और भावनात्मक असर को व्याख्या में शामिल करें।


Question 13:

‘‘इंसानी युग आने और स्वर्ग के दो कदम दूर रह जाने’’ — से क्या आशय है ?

Correct Answer:
View Solution



इस पंक्ति का आशय यह है कि यदि मनुष्य मानवता, करुणा, और समानता के मार्ग पर चलता रहे, तो वह स्वर्ग-सदृश संसार की रचना कर सकता है।

“इंसानी युग” अर्थात ऐसा काल जहाँ मानव के भीतर की श्रेष्ठतम संवेदनाएँ हावी हों — और स्वर्ग से तात्पर्य है शांति, समता और प्रेमपूर्ण जीवन।

पंक्ति संकेत करती है कि मनुष्य स्वर्ग जैसी स्थिति तक पहुँचने के बहुत करीब है, लेकिन वह अंतिम दो कदम — यानी आत्म-नियंत्रण, सत्य और सेवा — अभी उठाने बाकी हैं।
Quick Tip: जब पंक्ति में “दूर रह जाना” या “निकटता” की बात हो, तो उसके पीछे की अधूरी प्रक्रिया या चेतावनी को ज़रूर स्पष्ट करें।


Question 14:

राजमार्ग (हाइवे) पर पिताजी की गाड़ी का अचानक बंद हो जाना — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
View Solution



सर्दी की एक खुशनुमा सुबह थी। हम सब परिवार के साथ जयपुर से दिल्ली लौट रहे थे। पिताजी हाइवे पर गाड़ी चला रहे थे — चारों ओर खेतों की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और तेज़ गति से दौड़ती हमारी कार। सबकुछ एकदम सामान्य था कि अचानक...

गाड़ी “खर्र...खर्र...” की आवाज़ के साथ बंद हो गई।

हाइवे पर ऐसी स्थिति बहुत विचित्र और असहज होती है। चारों ओर तेज़ रफ्तार गाड़ियाँ और हमारी गाड़ी बगल में एक ओर रुकी हुई — मानो किसी युद्ध के बीच ठहरा हुआ सिपाही।


पिताजी उतरकर बोनट खोलते हैं। मम्मी चिंतित चेहरा लिए बैठी हैं, और मैं मोबाइल से सिग्नल खोजने की कोशिश कर रहा हूँ। हाइवे के उस एकांत मोड़ पर ना कोई मिस्त्री, ना पेट्रोल पंप और न ही कोई दुकान। गाड़ी की चुप्पी ने वातावरण को और रहस्यमय बना दिया।


तभी दूर से एक ट्रक आकर रुकता है। उसमें से एक बुज़ुर्ग ड्राइवर नीचे उतरते हैं और बिना कहे पिताजी की मदद करने लगते हैं। उनके पास एक साधारण टूलबॉक्स होता है, और कुछ ही मिनटों में गाड़ी फिर से स्टार्ट हो जाती है।


हम सबने मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया, और पिताजी की आँखों में वह नम चमक थी — "अजनबी भी कभी-कभी सबसे अपने हो जाते हैं।"


उस दिन समझ में आया कि हाइवे केवल मंज़िल तक नहीं ले जाता — वह इंसानियत, धैर्य और भरोसे की राह भी बनाता है।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में कल्पना, भावनाएँ और एक घटना के माध्यम से पाठक को अंत तक बाँधे रखना आवश्यक होता है। अंत में कोई नैतिक या भावनात्मक निष्कर्ष ज़रूर जोड़ें।


Question 15:

बड़े भाई / बहन की शादी में मेरी भूमिका — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
View Solution



शादी शब्द सुनते ही मेरे मन में उत्सव, हँसी, हलचल और ढेर सारी मिठास घुल जाती है। लेकिन जब शादी अपने बड़े भाई की हो, तो यह उत्सव मेरे जीवन का एक सबसे खास अनुभव बन जाता है।

मैं न सिर्फ एक मेहमान था, बल्कि आयोजक, संदेशवाहक, सजावटकर्ता, और सबसे ज़रूरी — भाई का दाहिना हाथ भी।


भाई की बारात से पहले ही घर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। मैं हर रिश्तेदार की “तू ही बता” सूची में सबसे ऊपर था — किसी को चाय चाहिए तो किसी को माला, किसी को होटल पहुँचना था तो किसी को मेहंदीवाली बुलानी थी।

मेरी भूमिका थी — हर परेशानी से पहले उसका हल ढूँढ लेना।

संगीत की रात को मैंने खुद ही सबका डांस कोऑर्डिनेट किया और भाई के लिए एक छोटा सा सरप्राइज़ परफ़ॉर्मेंस भी रखा।

सबसे ज्यादा मज़ा तो वरमाला के समय जूता चुराई में आया — बहनों की टीम से भिड़कर जूता लेकर भागना और फिर मोलभाव करना, यह एक अलग ही रोमांच था।


शादी के हर पल में मैं इतना व्यस्त था कि खुद को भूल बैठा। लेकिन जब विदाई के समय भाई ने गले लगाकर कहा —

“तेरे बिना यह शादी अधूरी रह जाती।”

तो मेरी सारी थकान और चिंता एक मुस्कान में बदल गई।


यह शादी सिर्फ भाई की नहीं थी, यह मेरे रिश्तों की, ज़िम्मेदारी की और जीवन के नए रंगों की शुरुआत थी।
Quick Tip: रचनात्मक लेख में निजी अनुभवों को जीवंत चित्रों और भावनात्मक घटनाओं के साथ प्रस्तुत करें — यह लेख को प्रभावशाली बनाता है।


Question 16:

जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
View Solution



एक समय था जब सुबह की शुरुआत कोयल की कूक, गौरैया की चहचहाहट और खेतों में दौड़ते हिरणों की छवि से होती थी। लेकिन आज?

हमने विकास के नाम पर प्रकृति की सबसे सुंदर रचना — जीव-जंतुओं — को धीरे-धीरे मिटा दिया।

अब शहरों में गौरैया ढूँढना दुर्लभ है, जंगलों में बाघ गिने-चुने रह गए हैं, और कई पक्षियाँ हमारे नाम तक भूल गई हैं।


बचपन में जब दादी कहानियाँ सुनाती थीं, तो उनमें शेर, सियार, तोता, हाथी, साँप सब जीवंत होते थे। आज वही कहानियाँ बच्चों को कल्पना लगती हैं, हकीकत नहीं।

हमने अपने लालच में जंगल काट डाले, जलाशय सुखा दिए, और रासायनिक खेती से ज़मीन को ज़हर बना दिया — और इसके साथ ही हमने अनजाने में कई प्रजातियों को समाप्ति की कगार पर पहुँचा दिया।


क्या हम भूल गए हैं कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है?

यह पेड़ों, पक्षियों, जलचर, नभचर और धरती पर रेंगते हर प्राणी की है।

यदि जीव-जंतु नहीं होंगे, तो पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) असंतुलित हो जाएगा — और इसका प्रभाव अंततः हमारे अस्तित्व पर भी पड़ेगा।


अब भी समय है — हम प्रकृति से जुड़ें, जैव विविधता को बचाएँ, पक्षियों के लिए पानी रखें, जंगलों को काटने से रोकेँ और बच्चों को उनके अधिकारों सहित इन प्राणियों से भी परिचित कराएँ।

हम जितनी जल्दी यह समझेंगे कि ‘उनका जीवन भी हमारा जीवन है’, उतना ही सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।
Quick Tip: पर्यावरण संबंधी लेखों में आँकड़ों से अधिक भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखें।


Question 17:

“जिन विचारों को कह डालना हमारे लिए कठिन नहीं होता, उन्हें लिख डालने का निमंत्रण एक चुनौती की तरह लगता है” क्यों ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



किसी विचार को बोलकर व्यक्त करना तात्कालिक होता है, उसमें व्यक्ति का हाव-भाव, ध्वनि, और प्रसंग मदद करते हैं।

लेकिन लिखना एक अनुशासित, सटीक और स्पष्ट प्रक्रिया है जिसमें भावनाओं और विचारों को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना होता है।

लेखन में शुद्धता, गहराई और व्याकरणिक सजगता भी अपेक्षित होती है, जिससे विचारों को सही रूप में प्रस्तुत करना चुनौतीपूर्ण बन जाता है।

इसलिए कहने में जो सहजता होती है, वही लिखने में अनुशासन और पुनर्विचार की माँग करती है।
Quick Tip: लेखन की प्रक्रिया को 'विचार-परिष्करण' से जोड़ें — यह उत्तर को दार्शनिक गहराई देता है।


Question 18:

रेडियो नाटक में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



रेडियो नाटक एक श्रव्य माध्यम है जिसमें दृश्य प्रस्तुति नहीं होती, अतः संवाद ही कथा को आगे बढ़ाते हैं।

संवाद पात्रों के चरित्र, भावनाएँ, स्थितियाँ और घटनाओं को श्रोताओं तक पहुँचाने का एकमात्र माध्यम होते हैं।

रेडियो में संवादों के माध्यम से ही स्थान-परिवर्तन, समय-गति, वातावरण और संबंधों की जानकारी दी जाती है।

इसलिए रेडियो नाटक में संवादों को प्रभावशाली, सजीव और श्रवण-संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक होता है।
Quick Tip: रेडियो में 'दिखाना नहीं, सुनवाना' प्रमुख होता है — यह बात संवाद-लेखन में प्रमुख रहती है।


Question 19:

उल्टा पिरामिड शैली के विकास की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘उल्टा पिरामिड’ शैली पत्रकारिता में समाचार लेखन की वह शैली है जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण जानकारी पहले दी जाती है और फिर क्रमशः कम महत्वपूर्ण तथ्य जोड़े जाते हैं।

इस शैली की उत्पत्ति 19वीं सदी में टेलीग्राफ के युग में हुई, जहाँ संक्षिप्तता और प्रभावी संवाद अनिवार्य था।

इसमें पाठक पहले ही अनुच्छेद में विषय, क्या, कब, कहाँ, क्यों, और कैसे (5W1H) से अवगत हो जाता है।

यह शैली आज भी समाचारपत्रों, वेबसाइटों और न्यूज़ पोर्टलों में प्रयोग की जाती है।
Quick Tip: शैली के उद्भव, प्रयोजन और वर्तमान प्रयोग को संक्षेप में शामिल करना आवश्यक है।


Question 20:

आर्थिक मामलों के पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती क्या है ?

Correct Answer:
View Solution



आर्थिक पत्रकारिता में सबसे बड़ी चुनौती है — जटिल आँकड़ों और नीतियों को आमजन की भाषा में सरलता से प्रस्तुत करना।

आर्थिक विषय गूढ़, विश्लेषणात्मक और दीर्घकालिक प्रभावों से जुड़े होते हैं।

पत्रकार को तथ्यों की प्रामाणिकता, आँकड़ों की व्याख्या, और नीति-प्रभाव का निष्पक्ष मूल्यांकन करना होता है।

इसके अतिरिक्त, सरकार, कॉर्पोरेट और निवेशकों के हितों से संतुलन बनाए रखना भी एक चुनौती है।
Quick Tip: चुनौती को एक वाक्य में बाँधें और फिर उदाहरण या कारणों से विस्तार करें — उत्तर स्पष्ट बनता है।


Question 21:

इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की तुलना में मुद्रित माध्यम के पाठकों को कौन–कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं ?

Correct Answer:
View Solution



मुद्रित माध्यम पाठकों को गहराई से पढ़ने, चिन्तन करने और सामग्री को संग्रहीत करने की सुविधा देता है।

यह माध्यम बिना बिजली, नेटवर्क या उपकरण के भी उपलब्ध रहता है — इसलिए हर वर्ग के लिए सुलभ है।

मुद्रित समाचार को रेखांकित, संग्रहित और दोबारा संदर्भित किया जा सकता है।

विज्ञापन कम होते हैं और पाठक का ध्यान भटकता नहीं। यह दीर्घकालिक स्मृति और गंभीरता को प्रोत्साहित करता है।
Quick Tip: उत्तर में सुविधा और सुलभता दोनों को स्पष्ट करें — और तुलना को संतुलित रखें।


Question 22:

व्यक्तिचित्र फीचर को रोचक, पठनीय और प्रभावशाली रूप में किस प्रकार तैयार किया जा सकता है ?

Correct Answer:
View Solution



व्यक्तिचित्र फीचर लेखन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संघर्ष, योगदान और मानवीय पहलुओं को जीवंत बनाना होता है।

इसके लिए लेख को कहानी जैसी शैली में लिखा जाना चाहिए, जिसमें घटनाएँ, संवाद, भावनाएँ और परिवेश का चित्रण हो।

लेख की शुरुआत एक प्रभावशाली प्रसंग या उद्धरण से हो सकती है, जो पाठक को आकर्षित करे।

पात्र के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं, उनकी विचारधारा और समाज पर प्रभाव को तथ्यात्मकता के साथ भावनात्मकता से जोड़ा जाना चाहिए।

भाषा सहज, सजीव और संवादपूर्ण होनी चाहिए। चित्रों, साक्षात्कार अंशों और वर्णनात्मक शैली का संतुलन लेख को प्रभावी बनाता है।
Quick Tip: व्यक्तिचित्र लेखन में लेखक को पत्रकार और रचनाकार — दोनों भूमिकाएँ निभानी पड़ती हैं। यही संतुलन लेख को पठनीय बनाता है।


Question 23:

संवाददाता और विशेष संवाददाता के बीच के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



संवाददाता सामान्यतः समाचार-पत्र, टीवी या डिजिटल मीडिया के लिए स्थानीय या रोज़मर्रा की घटनाओं की रिपोर्टिंग करता है। वह रोज़ सुबह से शाम तक शहर या क्षेत्र में होने वाली घटनाओं को कवर करता है।

विशेष संवाददाता (Special Correspondent) का कार्य क्षेत्र अधिक व्यापक, विषयगत और विश्लेषणात्मक होता है।

वह राजनीति, विदेश नीति, रक्षा, आर्थिक मामलों या किसी विशेष क्षेत्र में गहन रिपोर्टिंग करता है।

उदाहरण के लिए — दिल्ली में कार्यरत संवाददाता किसी सड़क हादसे, प्रेस कॉन्फ्रेंस या सरकारी घोषणाओं की रिपोर्टिंग करेगा, जबकि विशेष संवाददाता "भारत-चीन सीमा विवाद" या "चुनावी रुझानों का विश्लेषण" जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा।
Quick Tip: दोनों भूमिकाओं के दायरे और गहराई में अंतर होता है — यह अंतर समझकर ही पत्रकारिता के कार्य विभाजन को जाना जा सकता है।


Question 24:

कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण किस प्रकार किया जा सकता है ?

Correct Answer:
View Solution



कहानी के पात्रों का नाट्य रूपांतरण करते समय लेखक को यह ध्यान रखना होता है कि अब वे केवल पाठ्य-पात्र नहीं, बल्कि मंचीय प्रस्तुति के जीवंत पात्र होंगे।

इसके लिए पात्रों की भाषा, भाव, हावभाव और संवाद इस तरह से विकसित करने पड़ते हैं कि वे रंगमंच पर दर्शकों से जुड़ सकें।

पात्रों के संवादों में स्वाभाविकता और मंचीय प्रभाव जरूरी होता है। उनका चरित्र-चित्रण अब वर्णनात्मक नहीं, बल्कि क्रियात्मक होना चाहिए।

कहानी में जहाँ केवल भावनात्मक अनुभूति दी जाती है, वहाँ नाटक में दृश्य, ध्वनि, प्रकाश और मंच-संचालन के माध्यम से वही बात दर्शकों तक पहुँचाई जाती है।

पात्रों की भूमिका को संवाद, गतिविधियों और मंचीय स्थितियों के माध्यम से आकार दिया जाता है।
Quick Tip: नाट्य रूपांतरण में 'दिखाना' (show) प्राथमिक होता है, 'कहना' (tell) गौण — यही बदलाव लेखक को ध्यान में रखना चाहिए।


Question 25:

काव्यांश का प्रमुख विषय है —

  • (A) समय की आर्थिक स्थिति का वर्णन
  • (B) जाति–पाँति जनित भेदभाव का वर्णन
  • (C) समय में विसंगतिगत भेदभाव का वर्णन
  • (D) धर्म के नाम पर हो रहे आडंबरों का वर्णन
Correct Answer: (B) जाति–पाँति जनित भेदभाव का वर्णन
View Solution



काव्यांश में तुलसीदास और कबीर जैसे संतों के प्रति समाज के दोहरे मापदंडों को उजागर किया गया है।

कबीर की बेटी को ‘देवी’ नहीं माना गया और तुलसी को ‘ब्राह्मण’ होते हुए भी रामभक्ति का सम्मान नहीं मिला — यह स्पष्ट करता है कि जाति के आधार पर भेदभाव किया गया।

काव्यांश का केंद्र बिंदु यह है कि सच्चे संतों की शिक्षा, लेखनी और साधना को जातिगत सोच और सामाजिक संकीर्णता के कारण नकारा गया।

यह भेदभाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था में गहराई से जड़ें जमाए जातिवाद को दर्शाता है।


पंक्तियों का भावार्थ:

"काहू की बेटी सो देवी न कहाय" — बेटी को केवल जाति के कारण सम्मान नहीं मिला।
"तुलसी सतसंग गुनाय" — तुलसी की भक्ति को उसकी जाति की वजह से संदेह की दृष्टि से देखा गया।
"माँगी के लेखनी, महिता को सोचौ" — सच्चे लेखकों की लेखनी भी तिरस्कृत की गई।


अतः इन पंक्तियों का मुख्य विषय जाति-पाँति जनित भेदभाव ही है।
Quick Tip: काव्य आधारित प्रश्नों में मूल पंक्तियों का भाव समझें और उसके सामाजिक/दार्शनिक अर्थ पर ध्यान दें।


Question 26:

“काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब” — पंक्ति के माध्यम से कटाक्ष किया गया है —

  • (A) समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था पर
  • (B) जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर
  • (C) पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता पर
  • (D) समाज की विघटनकारी व्यवस्था पर
Correct Answer: (B) जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर
View Solution



पंक्ति ‘‘काहूकी बेटी सो बेटा न ब्याहब’’ का अर्थ है — हम किसी विशेष जाति की बेटी के साथ अपने बेटे का विवाह नहीं करेंगे।

यह पंक्ति समाज में प्रचलित जातिगत संकीर्णता और ऊँच-नीच की भावना को उजागर करती है।

यहाँ स्पष्ट रूप से जाति आधारित वैवाहिक प्रथा पर कटाक्ष किया गया है, जहाँ विवाह का निर्णय गुण, स्वभाव या शिक्षा के आधार पर नहीं बल्कि जाति के आधार पर लिया जाता है।


यह कटाक्ष इस बात पर है कि प्रेम, समझदारी और मानवता से ऊपर जातिगत अहंकार को रखा गया है। यह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि संत साहित्य के मूल विचार — समभाव और समानता — के विरुद्ध भी है।


विश्लेषण:

(A) सामान्य जातिवाद पर तो है, पर वैवाहिक संदर्भ प्रमुख है।

(B) सबसे सटीक विकल्प — क्योंकि विवाह ही इस पंक्ति का संदर्भ है।

(C) यह लैंगिक असमानता की बात करता है, जो यहाँ केंद्र में नहीं है।

(D) यह व्यापक उत्तर है, लेकिन अपेक्षित विशिष्टता नहीं देता।
Quick Tip: जब प्रश्न में "कटाक्ष किया गया है" पूछा जाए, तो लेखक की आलोचना का केंद्र बिंदु साफ़-साफ़ पहचानें — और उसी के अनुसार उत्तर दें।


Question 27:

तुलसीदास स्वयं को किसका दास मानते हैं ?

  • (A) नियमों का
  • (B) परिस्थितियों का
  • (C) स्वयं का
  • (D) राम का
Correct Answer: (D) राम का
View Solution



तुलसीदास अपनी रचनाओं में सदैव भगवान राम को ही सर्वोपरि मानते हैं। उनकी भक्ति रामकेंद्रित है और वह स्वयं को “राम का दास” कहते हैं।

यह उनकी भक्ति की पराकाष्ठा और समर्पण की चरम सीमा को दर्शाता है।

उनकी पंक्तियाँ जैसे — “तुलसीदास चिरंजीव रघुपति दास” — उनके इस भाव को स्पष्ट करती हैं कि वे न तो समाज, न परिस्थितियों, न ही किसी नियम के अधीन हैं — वे केवल राम के भक्त हैं।


रामचरितमानस और अन्य काव्य रचनाओं में भी तुलसीदास ने स्वयं को ‘राम का सेवक’, ‘राम का कीर्तिगायक’ और ‘राम का अनन्य दास’ कहा है।
Quick Tip: जब किसी कवि या भक्त की आत्म-व्याख्या पूछी जाए, तो उसकी काव्यधारा और भक्ति केंद्र को पहचानना अत्यंत आवश्यक होता है।


Question 28:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :


कथन: परंपरावादी एवं रूढ़िवादी समाज में रहते हुए भी तुलसी निर्विकार जीवन व्यतीत कर रहे थे।

कारण: वे सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त थे।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (C) कथन सही है लेकिन कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
View Solution



कथन सही है — तुलसीदास एक अत्यंत परंपरावादी और जातिवादी समाज में रहते हुए भी भक्ति और साहित्य के माध्यम से निर्लिप्त और निर्विकार जीवन जीते रहे।

उन्होंने समाज की कुरीतियों को उजागर किया लेकिन स्वयं उनके प्रभाव में नहीं आए। उनके जीवन में आत्मनिष्ठा, भक्ति और साधना का स्थान सर्वोपरि था।


परंतु कारण गलत व्याख्या करता है — तुलसीदास सामाजिक उत्तरदायित्वों से मुक्त नहीं थे, बल्कि वे तो समाज को दिशा देने वाले संत कवि थे। उन्होंने रामचरितमानस जैसी रचना के माध्यम से समाज में नैतिक और धार्मिक चेतना को जागृत किया।


अतः कथन तो सत्य है, लेकिन जो कारण दिया गया है, वह कथन की सटीक व्याख्या नहीं करता।
Quick Tip: Assertion-Reason (कथन-कारण) वाले प्रश्नों में सबसे पहले दोनों को अलग-अलग सत्यापित करें, फिर संबंध पर विचार करें।


Question 29:

‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ — से आशय है —

  • (A) न लेना एक, न देना दो
  • (B) किसी से कोई बुरी बात न कहना
  • (C) किसी से कोई संबंध न रखना
  • (D) बिना वजह की मुसीबत होना
Correct Answer: (C) किसी से कोई संबंध न रखना
View Solution



पंक्ति ‘‘लेबोको एक न देबको दोऊ’’ का शाब्दिक अर्थ है — न किसी से कुछ लेना और न किसी को कुछ देना।

यहाँ यह पंक्ति समाज में व्याप्त उस भावना की ओर संकेत करती है जहाँ लोग एक-दूसरे से पूर्ण रूप से कटे रहते हैं — न संबंध, न संवाद, न व्यवहार।

ऐसी स्थिति में व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो जाता है और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेता है।


इसका भावार्थ है — “किसी से कोई संबंध न रखना”, और यह समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता, उदासीनता और आत्मकेन्द्रित प्रवृत्ति की आलोचना करता है।


विकल्पों का विश्लेषण:

(A) यह केवल शब्दों का अनुवाद है, भाव नहीं दर्शाता।

(B) यह संवाद की नैतिकता है, जबकि यहाँ संबंध विच्छेद का संदर्भ है।

(C) बिल्कुल सटीक — यह भाव को पूरी तरह प्रस्तुत करता है।

(D) यह संदर्भ से हटकर है।
Quick Tip: लोकोक्तियों और भाव-पंक्तियों के प्रश्न में शाब्दिक अर्थ नहीं, भावार्थ को पहचानें — वही उत्तर को सही दिशा देता है।


Question 30:

‘आत्मपरिचय’ कविता के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘आत्मपरिचय’ कविता आत्मचिंतन, आत्मविश्लेषण और आत्मबोध की प्रक्रिया को प्रस्तुत करती है।

इस कविता में कवि बाह्य दुनिया की चकाचौंध से हटकर अपने भीतर झांकता है और अपने जीवन, सोच और अनुभवों का विश्लेषण करता है।

वह दुनिया के बारे में जानने से पहले स्वयं को जानने की आवश्यकता महसूस करता है।

कविता में प्रयुक्त भाषा, भाव और दृष्टिकोण इस ओर संकेत करते हैं कि कवि का उद्देश्य स्वयं को पहचानना और अपनी सीमाओं के भीतर गहराई तक पहुँचना है।

इसलिए ‘आत्मपरिचय’ शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त और विषय की आत्मा के अनुरूप है।
Quick Tip: शीर्षक की सार्थकता बताते समय उसका भाव, प्रतीक और कविता की मूल संवेदना से संबंध स्पष्ट करें।


Question 31:

‘बात सीधी थी पर’ कविता से उद्धृत पंक्ति ‘भाषा के चक्कर में जरा टेढ़ी फँस गई’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



इस पंक्ति में कवि यह संकेत करता है कि सीधे-सपाट और सच्चे विचार जब भाषा की जटिलताओं और औपचारिकताओं में उलझ जाते हैं, तो उनका वास्तविक अर्थ या असर कहीं खो जाता है।

कई बार लेखक या कवि अपने भाव को इतनी भाषा-कला में लपेट देता है कि मूल बात स्पष्ट नहीं रह जाती — वही स्थिति यहाँ दिखाई गई है।

पंक्ति इस बात की आलोचना है कि भाषा संप्रेषण का माध्यम होने के बजाय कई बार बाधा बन जाती है।
Quick Tip: भाषा और संप्रेषण के संबंध को स्पष्ट करें — कविता के भाव से जोड़ना ज़रूरी है।


Question 32:

‘उगता’ कविता में कवि ने भोर के नभ की पवित्रता, निर्मलता और उज्ज्वलता को किन रूपों में प्रस्तुत किया है ? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘उगता’ कविता में भोर केवल एक समय नहीं, बल्कि ऊर्जा, उम्मीद और नवीन आरंभ का प्रतीक है।

कवि ने भोर की निर्मलता को नीले आकाश, ताजगी भरी हवा और प्रकाश के स्पर्श के माध्यम से दर्शाया है।

भोर की उज्ज्वलता लोगों के कार्यों में जागृति, पक्षियों के कलरव और किसानों की व्यस्तता में दिखाई देती है।

पवित्रता के रूप में यह समय ध्यान, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है — यह एक आध्यात्मिक अनुभव भी बन जाता है।

इस प्रकार कवि ने भोर को दृश्य, भाव और क्रिया तीनों रूपों में प्रस्तुत किया है।
Quick Tip: प्राकृतिक प्रतीकों को व्याख्यायित करते समय भावनात्मक, सौंदर्यात्मक और क्रियात्मक पक्षों का समावेश करें।


Question 33:

‘सदा पंक पर ही होता, जल विप्लव प्लावन’ – पंक्ति में प्रयुक्त ‘पंक’ और ‘विप्लव’ शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



इस पंक्ति में 'पंक' (कीचड़) और 'विप्लव' (उथल-पुथल) प्रतीकात्मक रूप में प्रयुक्त हुए हैं।

‘पंक’ यहाँ जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और विषम परिस्थितियों का प्रतीक है, जबकि ‘विप्लव प्लावन’ का अर्थ है— परिवर्तनकारी संघर्ष और उन्नति की लहर।

कवि यह कहना चाहता है कि वास्तविक उन्नति और परिवर्तन उन्हीं परिस्थितियों में उत्पन्न होते हैं, जहाँ संघर्ष, अवरोध और असहजता हो।

सहज, शांत और स्थिर जीवन में नवाचार या बदलाव नहीं होता। जैसे कमल की उत्पत्ति कीचड़ में होती है, वैसे ही क्रांति जीवन की जटिलताओं से जन्म लेती है।
Quick Tip: प्रतीकात्मक कविता की व्याख्या करते समय शब्दों के गहरे अर्थ और उनके प्रसंगगत संकेतों को अवश्य जोड़ें।


Question 34:

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता में ‘यह अवसर खो देंगे’ — पंक्ति में कौन से अवसर को खोने की बात कही जा रही है ? इससे मीडिया कर्मी के किस व्यवहार का पता लगता है ?

Correct Answer:
View Solution



‘यह अवसर खो देंगे’ पंक्ति में उस मानवीय क्षण को खोने की बात हो रही है, जब किसी पीड़ित या अपाहिज की असहाय अवस्था को कैमरे में कैद किया जाना है।

यह पंक्ति मीडिया कर्मियों के भीतर मानवीय संवेदना के स्थान पर अवसरवादिता के प्रवेश को उजागर करती है।

मीडिया अब घटनाओं को 'कवर' नहीं करता, बल्कि ‘कैश’ करने का माध्यम बना है। कैमरे की निगाह अब पीड़ा नहीं, दृश्य की सनसनी खोजती है।

कविता इस व्यवहार की आलोचना करती है कि कैसे मीडिया कर्मी केवल फ़्रेम और ‘मोमेंट’ के पीछे दौड़ते हैं, न कि पीड़ित की पीड़ा को समझने के लिए।
Quick Tip: कविता का संदर्भ केवल शब्दों तक सीमित न रखें — उसमें छिपे सामाजिक संकेतों को अवश्य उजागर करें।


Question 35:

‘पतंग’ कविता से उद्धृत पंक्ति – ‘डाल की तरह लवलीन वेग से’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘डाल की तरह लवलीन वेग से’ पंक्ति में कवि ने पतंग की गति और प्रकृति को दर्शाने के लिए सुंदर उपमा का प्रयोग किया है।

यहाँ ‘डाल’ (पेड़ की शाखा) की भाँति ‘लवलीन’ (समर्पित, स्नेह में डूबी) गति का तात्पर्य यह है कि पतंग हवा में एक लयबद्ध, सौम्य और आकर्षक ढंग से आगे बढ़ती है।

यह गति केवल भौतिक नहीं, बल्कि सौंदर्यबोध और मानसिक रमता की प्रतीक भी है।

कवि के लिए पतंग केवल उड़ती वस्तु नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, उल्लास और सृजनशीलता की प्रतीक बन जाती है — जो सहजता से आकाश की ऊँचाई की ओर अग्रसर होती है।
Quick Tip: ‘उपमा’ और ‘गति’ संबंधी पंक्तियों की व्याख्या करते समय उनमें छिपे भावों को सजीव उदाहरणों से जोड़ना प्रभावशाली होता है।


Question 36:

गद्यांश में ‘नरो वा कुंजरो वा’ का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है ?

  • (A) महाभारत के प्रसंग से अवगत कराने के लिए
  • (B) भक्तिन को युधिष्ठिर के समर्थक रखने के लिए
  • (C) भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
  • (D) भक्तिन को युधिष्ठिर से श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए
Correct Answer: (C) भक्तिन की चारित्रिक विशेषता स्पष्ट करने के लिए
View Solution



इस प्रश्न में ‘नरो वा कुंजरो वा’ श्लोक का प्रयोग उस स्थिति को रेखांकित करने के लिए किया गया है जहाँ सत्य को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

भक्तिन का चरित्र इसी स्थिति में अपनी नैतिक दृढ़ता और सत्यनिष्ठा को बनाए रखता है।

गद्यांश में इसका उल्लेख इसीलिए किया गया है कि पाठक यह समझ सके कि भक्तिन के लिए धर्मसंकट की स्थिति में भी सिद्धांत महत्वपूर्ण थे —

और उसने अपनी चारित्रिक विशेषता को किसी भी भ्रम या मोह से प्रभावित नहीं होने दिया।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में किसी पंक्ति के उपयोग का विश्लेषण करते समय उसका संदर्भ और उद्देश्य दोनों पर ध्यान दें।


Question 37:

भक्तिन घर में पड़े पैसों को मटकी में छिपाकर किस उद्देश्य से रखती थी ?

  • (A) पैसों को सँभालकर रखने
  • (B) अन्य सेवकों की दृष्टि से बचाने
  • (C) आपातकाल में काम आने
  • (D) स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने
Correct Answer: (A) पैसों को सँभालकर रखने
View Solution



गद्यांश में भक्तिन की सरलता और उसके जीवन की व्यवस्था को दर्शाते हुए यह बताया गया है कि वह अपने घर में पैसे मटकी में छिपाकर रखती थी।

यह क्रिया न तो किसी चोरी से डरकर थी, न ही दिखावे के लिए। उसका उद्देश्य था — पैसों को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से सँभालकर रखना।


भक्तिन के पास सीमित आय थी, इसलिए वह अपने सीमित संसाधनों को संभालकर रखने में विश्वास रखती थी। उसका यह व्यवहार उसके अनुभव, समझदारी और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

यह क्रिया एक मध्यवर्गीय या निम्नवर्गीय गृहिणी की व्यवहारिक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है, जो पारिवारिक भविष्य की चिंता में वर्तमान को सुव्यवस्थित रखती है।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में “क्यों” को पहचानना मुख्य होता है — केवल ‘क्या किया’ नहीं, बल्कि ‘किसलिए किया’ पर ध्यान दें।


Question 38:

‘थोड़ा बहुत झूठ बोलना’ के समर्थन में भक्तिन अपना आदर्श किसे मानती थी ?

  • (A) हरिश्चंद्र
  • (B) यमराज
  • (C) युधिष्ठिर
  • (D) महादेवी
Correct Answer: (B) यमराज
View Solution



गद्यांश में भक्तिन अपने विचारों का समर्थन करने के लिए यमराज का उल्लेख करती है। वह कहती है कि “यमराज भी कभी-कभी थोड़ा झूठ बोल देते होंगे।”

यह पंक्ति इस बात का संकेत है कि भक्तिन अपने व्यवहार — विशेषतः “थोड़ा बहुत झूठ बोलना” — को सामान्य और मानवीय मानती थी, और इसे उचित ठहराने के लिए यमराज जैसे देवता को भी उदाहरणस्वरूप प्रस्तुत करती है।


यह दर्शाता है कि भक्तिन सीधे-सादे, व्यावहारिक जीवन की पक्षधर थी, और जीवन में कभी-कभार ‘झूठ’ को वह नैतिक दोष नहीं मानती थी, बल्कि परिस्थिति की मांग समझती थी।

यमराज जैसे न्याय के देवता को उदाहरण बनाकर वह अपनी व्यावहारिक नैतिकता को दर्शाती है।
Quick Tip: यदि कोई पात्र अपने विचार को किसी चरित्र से जोड़ता है, तो उस पात्र का नाम उत्तर में सही ढंग से पहचानना ज़रूरी होता है — यह प्रतीकात्मक व्याख्या में मदद करता है।


Question 39:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए :


कथन : भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा।

कारण : समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करती थी।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है किंतु कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है किंतु कारण कथन की गलत व्याख्या करता है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
  • (A) खूब मन लगाकर काम करती थी
  • (B) बातों को ढालकर बताती थी
  • (C) उनके सामने नहीं आती थी
  • (D) बातों को स्पष्ट रूप से बताती थी
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
View Solution



गद्यांश में भक्तिन को एक जटिल चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है — वह व्यवहारिक है, सच्चरित्र भी है, परंतु उसके कार्यों में स्थिति के अनुसार लचीलापन भी देखा जाता है।

इसलिए यह कहना कि “भक्तिन अच्छी है” — यह एक सीधा निष्कर्ष नहीं हो सकता, क्योंकि उसमें अच्छाई के साथ व्यावहारिक चतुराई भी है।


वहीं कारण — “समय और परिस्थिति के अनुसार मूल तथ्यों में जोड़-घटाव करना” — इस कथन की पूरी सच्चाई दर्शाता है।

यह कारण इस कथन को स्पष्ट करता है कि भक्तिन का आचरण स्थायी नहीं, बल्कि स्थितियों पर आधारित था।
Quick Tip: Assertion-Reason प्रश्नों में यह जानना ज़रूरी होता है कि दोनों कथन सही हैं या नहीं — और क्या कारण, कथन की व्याख्या करता है। यदि हाँ, तो उत्तर ‘(D)’ होता है।


Question 40:

वैश्वीकरण के इस दौर में क्या भगत जी का चरित्र बाज़ार को सार्थकता और समाज में शांति स्थापित कर सकता है ? ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
View Solution



‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में भगत जी ऐसे व्यक्ति के प्रतीक हैं जो सादगी, आत्मनिर्भरता और लोककल्याण की भावना से प्रेरित जीवन जीते हैं।

आज के वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद से भरे समाज में, जहाँ सब कुछ लाभ-हानि और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है, भगत जी का जीवन बाजार को एक नैतिक दिशा प्रदान कर सकता है।

वे आत्मनिर्भरता के पक्षधर हैं, अपने श्रम से उत्पन्न वस्तुओं को ही महत्व देते हैं, और समाज में सहयोग व सौहार्द को प्राथमिकता देते हैं।

यदि बाजार में भगत जी जैसे मूल्य प्रवेश करें — तो न केवल शांति, बल्कि विश्वास, समरसता और स्थायित्व की स्थापना संभव है।
Quick Tip: पाठ आधारित उत्तरों में चरित्र और सन्दर्भ को वर्तमान संदर्भों से जोड़कर लिखना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।


Question 41:

‘शिरीष के फूल’ पाठ में कबीर को शिरीष की भाँति क्यों बताया गया है ?

Correct Answer:
View Solution



‘शिरीष के फूल’ पाठ में शिरीष वृक्ष को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है — जो बाहर से कोमल परंतु भीतर से अत्यंत दृढ़ होता है।

कबीर के व्यक्तित्व में भी यही विशेषता थी — वे वाणी में मधुर, भाव में करुणाशील और व्यवहार में अत्यंत तेजस्वी एवं अडिग थे।

वे न धर्म से डरते थे, न समाज से — पर उनकी आलोचना में भी करुणा और आत्मीयता होती थी।

शिरीष की कोमलता और दृढ़ता का यह द्वंद्व कबीर के संत स्वभाव और क्रांतिकारी विचारों को एक साथ व्यक्त करता है।
Quick Tip: जब पात्र या व्यक्ति को किसी प्रतीक से जोड़ा जाए, तो उसमें बाह्य और आंतरिक गुणों की तुलना ज़रूर करें।


Question 42:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ से उद्धृत कथन ‘दासता केवल कानूनी पराधीनता ही नहीं है’ — का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



यह कथन इस ओर संकेत करता है कि दासता केवल वह नहीं होती जब कोई व्यक्ति क़ानूनन गुलाम हो, बल्कि वह मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी हो सकती है।

जाति व्यवस्था और श्रम विभाजन ने भारतीय समाज में मानसिक गुलामी को जन्म दिया — जहाँ एक वर्ग स्वयं को श्रेष्ठ और अन्य को हीन मानता रहा।

यह दासता कानूनी नहीं थी, लेकिन लोगों की सोच, उनके अधिकारों और अवसरों को नियंत्रित करती थी।

इसलिए जब तक मानसिक स्वतंत्रता, समानता और आत्मगौरव नहीं होगा — तब तक सामाजिक दासता बनी रहेगी, चाहे क़ानून कुछ भी कहे।
Quick Tip: ऐसे उद्धरणों की व्याख्या करते समय ऐतिहासिक, सामाजिक और मानसिक स्तरों की व्याप्ति ज़रूर स्पष्ट करें।


Question 43:

‘लू में जाना हो तो पानी पीकर जाना चाहिए’ – ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में यह वाक्य क्यों और किस संदर्भ में कहा गया ?

Correct Answer:
View Solution



‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में यह वाक्य लोकजीवन की अनुभवजन्य समझ और व्यावहारिक विवेक को दर्शाने के लिए कहा गया है।

यह कथन उस समय आता है जब लेखक भगत जी से पूछते हैं कि क्या बाजार जाना आवश्यक है — तो भगत जी जवाब में यह वाक्य कहते हैं।

इसका आशय है कि यदि कोई कठिन परिस्थिति टालना संभव नहीं है, तो उससे निपटने की तैयारी ज़रूरी है।

बाज़ार यदि आवश्यक है, तो हमें उसका सामना सजगता और तैयारी से करना चाहिए — यह सूझबूझ और स्वीकार्यता का प्रतीक है।
Quick Tip: ऐसे वाक्यों की व्याख्या करते समय प्रतीकात्मक अर्थ और जीवन-दृष्टि को जोड़ना महत्वपूर्ण होता है।


Question 44:

अनावृष्टि दूर करने के लिए गाँव के बच्चों और गाँव वालों द्वारा किए गए उपायों को आप कितना उचित मानते हैं ? ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के संदर्भ में तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में गाँव के लोगों और बच्चों ने अनावृष्टि से निपटने के लिए जो उपाय किए, वे पारंपरिक, सामूहिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रेरित थे।

जैसे — बच्चों द्वारा मेंढ़क की शादी, गीत गाना, पूजा आदि — ये सब उपाय वैज्ञानिक नहीं होते, पर वे सामुदायिक सहभागिता और आशा का संचार करते हैं।

लेखक यह संकेत करता है कि ये परंपराएँ लोगों की मानसिकता को संभालने का कार्य करती हैं और संघर्ष में विश्वास बनाए रखती हैं।

इसलिए ऐसे उपाय समाज को जोड़ते हैं, प्रेरित करते हैं, और सांस्कृतिक अस्मिता को जीवित रखते हैं — यद्यपि इनके पीछे वैज्ञानिक कारण नहीं भी हो सकते।
Quick Tip: पारंपरिक उपायों की व्याख्या करते समय सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पक्षों का संतुलन रखें।


Question 45:

शिरीष के माध्यम से लेखक ने, ‘कालजयी अवधूत की भाँति विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल खड़े रहने की प्रेरणा दी है।’ पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘शिरीष के फूल’ पाठ में लेखक ने शिरीष वृक्ष को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है जो अत्यंत कोमल भी है और भीतर से दृढ़ भी।

शिरीष की यही विशेषता उसे कालजयी अवधूत की तरह बनाती है — जो विपरीत परिस्थितियों में भी डगमगाए नहीं, बल्कि मौन शक्ति के साथ खड़ा रहे।

लेखक ने कठिन समय में डटे रहने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और कोमलता में भी शक्ति होने का संदेश शिरीष के माध्यम से दिया है।

इसलिए यह वृक्ष मात्र प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मनुष्य के आदर्श व्यवहार का प्रतीक बन जाता है।
Quick Tip: ‘पुष्टि करें’ जैसे प्रश्नों में कथन को दोहराएँ नहीं — उसके समर्थन में तर्क और उदाहरण अवश्य दें।


Question 46:

‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यशोधर बाबू और उनके बच्चों के बीच वैचारिक मतभेद दिखाया गया है। इस प्रकार का मतभेद आपको भी अपने घर और आस–पड़ोस में दिखाई देता होगा। इस मतभेद के क्या कारण हैं, इन्हें कैसे कम किया जा सकता है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘सिल्वर वेडिंग’ कहानी में यशोधर बाबू और उनके बच्चों के बीच जीवन मूल्यों, सोच और व्यवहार को लेकर मतभेद है।

बच्चे आधुनिकता, सुविधा और उपभोग को महत्त्व देते हैं जबकि यशोधर बाबू आत्मगौरव, पारंपरिक मूल्यों और आत्मसम्मान के पक्षधर हैं।

ऐसा मतभेद आज भी हर पीढ़ी में देखने को मिलता है — जहाँ नई पीढ़ी तेज़, तर्कशील और व्यावसायिक होती है और पुरानी पीढ़ी भावनात्मक, अनुशासित और परंपरानिष्ठ।

इस मतभेद का कारण अनुभव और प्राथमिकताओं का अंतर है। इसे बातचीत, समझ और परस्पर सम्मान से कम किया जा सकता है।

जरूरी है कि दोनों पीढ़ियाँ एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझें — तभी वैचारिक सेतु बन सकता है।
Quick Tip: ऐसे उत्तरों में कहानी से संबंध जोड़ने के साथ समसामयिक सामाजिक दृष्टिकोण को जोड़ना आवश्यक होता है।


Question 47:

‘जूझ’ कहानी के आधार पर सिद्ध कीजिए कि प्रोत्साहन के शब्द व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा को बदलने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Correct Answer:
View Solution



‘जूझ’ कहानी में संघर्ष, अभाव और विषमता से जूझते पात्रों को यदि सबसे अधिक शक्ति किसी चीज़ से मिलती है तो वह है — प्रोत्साहन के शब्द।

बबलू जैसे पात्रों को जीवन की कठिनाइयों के बीच जब कोई साथ देता है, या कोई कहता है कि “तू कर सकता है”, तो वह आशा की लौ बन जाता है।

लेखक यह दर्शाता है कि सामाजिक व्यवस्थाएँ भले ही कठोर हों, लेकिन एक संवेदनशील संवाद, एक प्रेरणादायक वाक्य व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकता है।

कहानी यही बताती है कि शब्दों में केवल ध्वनि नहीं होती — उनमें संबल, समर्थन और संभावना भी होती है।
Quick Tip: उत्तर को प्रमाणित करते समय कहानी से सीधे संवाद या घटनाओं को उदाहरण के रूप में लें।


Question 48:

‘सिंधु घाटी सभ्यता मूलतः खेतिहर और पशुपालक सभ्यता थी।’ उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

Correct Answer:
View Solution



‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ से यह स्पष्ट होता है कि सिंधु घाटी सभ्यता मुख्यतः कृषि और पशुपालन पर आधारित थी।

इसका प्रमाण हमें मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और लोथल जैसी जगहों पर मिली ग्रेनरी (अनाज भंडारण) संरचनाओं से मिलता है।

कई मुहरों पर बैल, बैलगाड़ी, गाय और अन्य पालतू पशुओं की आकृतियाँ पाई गई हैं, जो पशुपालन की उपस्थिति को दर्शाती हैं।

वहाँ के लोग सिंचाई, बीजों के संरक्षण और खेतों की जोत प्रणाली को जानते थे।

इस प्रकार सिंधु सभ्यता एक व्यवस्थित, उत्पादक और श्रम-संपन्न समाज का द्योतक है जो मुख्यतः खेतिहर और पशुपालक था।
Quick Tip: ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते समय स्थान, वस्तु और प्रतीकों का उपयोग करें — यह उत्तर को प्रमाणिक बनाता है।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

Ask your question

Subscribe To Our News Letter

Get Latest Notification Of Colleges, Exams and News

© 2026 Patronum Web Private Limited