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Sanghamitra Deb

Content Writer | Updated On - Dec 10, 2025

CBSE Class 12 Hindi Core exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 3 - 2/2/3) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solution (Set 3 - 2/2/3) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 with Solutions (Set 3 2-2-3)

Question 1:

संगीत वह अमूल्य निधि है जो –

  • (A) मानव को ब्रह्म तक ले जाने का मार्ग है।
  • (B) अतृप्त साधनों की पूर्ति में सहायक है।
  • (C) हमारे लक्ष्य पर पहुँचने का मार्ग है।
  • (D) कुछ ही लोगों के लिए सुखकारक है।
Correct Answer: (A) मानव को ब्रह्म तक ले जाने का मार्ग है।
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गद्यांश की पहली कुछ पंक्तियों में ही संगीत के महत्त्व का वर्णन किया गया है।


गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा है: ''आनंद प्रदान करने वाली आध्यात्मिक साधना है। मानव को ब्रह्म तक ले जाने वाला मार्ग है।''


यहाँ लेखक संगीत को ईश्वर (ब्रह्म) प्राप्ति का साधन बता रहे हैं।


अतः विकल्प (A) गद्यांश के अनुसार पूर्णतः सही है।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में उत्तर हमेशा गद्यांश में दी गई जानकारी के आधार पर ही दें, न कि अपने निजी ज्ञान के आधार पर।


Question 2:

संगीत के प्रभाव को भारतीयों ने कब पहचाना ?

  • (A) हमारी सभ्यता से भी पहले
  • (B) हमारी सभ्यता के प्रारंभ में
  • (C) यूनानी सभ्यता के आगमन पर
  • (D) सृष्टि की रचना होते ही
Correct Answer: (B) हमारी सभ्यता के प्रारंभ में
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गद्यांश के पहले अनुच्छेद में एक वाक्य है: ''संगीत के इस स्वभाव और ध्येय को हमारी सभ्यता के प्रारंभ में ही हमारे देश के लोगों ने पहचान लिया था।''


यह पंक्ति सीधे तौर पर बताती है कि भारतीयों ने इसे 'सभ्यता के प्रारंभ' में पहचाना।


अन्य विकल्प जैसे 'सभ्यता से पहले' या 'यूनानी आगमन' गद्यांश में कहीं नहीं दिए गए हैं।


इसलिए, विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: प्रश्न में पूछे गए कालखंड (Time period) को गद्यांश में ढूँढें (Scan करें), इससे सही उत्तर जल्दी और सटीक मिलता है।


Question 3:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यान से पढ़कर सर्वाधिक उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : संगीत जन-जीवन के उल्लास को प्रकट करने का प्रभावी साधन है।

कारण : हमारे सभी कार्य किसी न किसी प्रकार के संगीत से आरंभ होते हैं।

  • (A) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
  • (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
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गद्यांश में उल्लेख है कि हमारे यहाँ जन्म से मृत्यु तक और घरेलू कार्यों (खेत, चौपाल) में संगीत शामिल रहता है।


चूँकि हमारे सभी कार्य संगीत से आरंभ होते हैं (कारण), इसी व्यापकता के कारण लेखक निष्कर्ष निकालते हैं कि यह जन-जीवन के उल्लास को प्रकट करने का प्रभावी साधन है (कथन)।


गद्यांश में ये दोनों बातें एक-दूसरे से जुड़ी हुई लिखी गई हैं।


अतः कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही पुष्टि करता है।
Quick Tip: अभिकथन-कारण (Assertion-Reason) प्रश्नों में 'क्योंकि' (because) लगाकर वाक्यों को जोड़कर देखें। यदि अर्थ सही बनता है, तो व्याख्या सही होती है।


Question 4:

भारतीय जनमानस में संगीत की क्या महत्ता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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गद्यांश के अनुसार भारतीय जनमानस में संगीत की महत्ता के दो मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:


1. आध्यात्मिक साधन: संगीत को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा (ब्रह्म) से जोड़ने वाला आध्यात्मिक मार्ग माना गया है।


2. जीवन का अभिन्न अंग: यह जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार और दैनिक कार्यों में समाहित है, जो जीवन के उल्लास और विषाद दोनों को व्यक्त करता है।
Quick Tip: लघु उत्तरीय प्रश्नों में मुख्य शब्दों (Keywords) को रेखांकित करना या बुलेट्स में लिखना अच्छे अंक दिलाता है।


Question 5:

‘संगीत जीवन-पर्यंत हमारे साथ बना रहता है’ – किन्हीं चार उदाहरणों से इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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गद्यांश में स्पष्ट किया गया है कि संगीत जन्म से मृत्यु तक साथ रहता है। इसके चार उदाहरण हैं:


1. जन्म के समय: बच्चे के जन्म की खुशी में सोहर या बधाई गीत गाए जाते हैं।


2. मुंडन/नामकरण: इन संस्कारों के दौरान भी मंगल गीत गाए जाते हैं।


3. विवाह: विवाह के विभिन्न रस्मों में संगीत की प्रधानता होती है।


4. मृत्यु: जीवन के अंत समय में भी शोक गीतों या भजनों के रूप में संगीत साथ रहता है।
Quick Tip: गद्यांश में दी गई सूची (List) को ध्यान से पढ़ें और पूछे गए उदाहरणों की संख्या (यहाँ 4) पूरी लिखें।


Question 6:

रचनात्मक कार्यों में संगीत की भूमिका को स्पष्ट करने वाले दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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रचनात्मक कार्यों में संगीत की भूमिका निम्नलिखित है:


1. सामूहिक स्फूर्ति: संगीत काम करने वालों में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर देता है, जिससे थकान कम महसूस होती है।


2. एकाग्रता और लय: यह कार्यों में एक लय (Rhythm) प्रदान करता है, जिससे कठिन और श्रमसाध्य कार्य भी सरलता से और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो जाते हैं।
Quick Tip: 'भूमिका' का अर्थ है उस वस्तु का प्रभाव या योगदान। गद्यांश में 'स्फूर्ति' और 'प्रेरणा' जैसे शब्द इसका उत्तर हैं।


Question 7:

गाँवों में संगीत की लोकप्रियता को प्रकट करने वाले दो उदाहरणों का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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गाँवों में संगीत की लोकप्रियता के दो उदाहरण:


1. कृषि कार्यों में: खेतों में फसल काटते या बुवाई करते समय किसान सामूहिक रूप से लोकगीत गाते हैं।


2. घरेलू कार्यों में: महिलाएं चक्की पीसते समय या धान कूटते समय गीत गाती हैं, जिससे उनका श्रम हल्का हो जाता है।
Quick Tip: 'गाँव' के संदर्भ में 'खेत' और 'चक्की' जैसे शब्द गद्यांश में ढूँढकर उत्तर तैयार करें।


Question 8:

‘पैंट और चप्पल’ प्रतीकार्थ हैं –

  • (A) शरीर के अधोभाग में धारण करने वाली चीजों के
  • (B) दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजों के
  • (C) शरीर को आराम पहुँचाने वाली चीजों के
  • (D) शरीर की सुंदरता को बढ़ाने वाली चीजों के
Correct Answer: (B) दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजों के
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कविता में 'पैंट और चप्पल' का उल्लेख आम आदमी के सामान्य अस्तित्व को दर्शाने के लिए किया गया है।


ये वस्तुएँ एक साधारण व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं।


कवि कहना चाहता है कि नक्शे या व्यवस्था ने मनुष्य के अस्तित्व को केवल इन भौतिक और दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक सीमित कर दिया है।


अतः यह दैनिक जीवन का प्रतीक है।
Quick Tip: कविता में प्रयुक्त साधारण वस्तुओं के नाम अक्सर 'आम आदमी' या 'यथार्थ' के प्रतीक होते हैं, शाब्दिक अर्थ पर न जाएँ।


Question 9:

‘वल्दियत’ शब्द इशारा करता है

  • (A) नक्शे में खींचे गए निशान की ओर
  • (B) देश और समाज से मिली परंपराओं की ओर
  • (C) पुरखों और परंपरा से मिली विरासत की ओर
  • (D) वालिद से मिली संपत्ति और विरासत की ओर
Correct Answer: (C) पुरखों और परंपरा से मिली विरासत की ओर
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'वल्दियत' का शाब्दिक अर्थ 'पिता का नाम' या 'पितृत्व' होता है।


काव्यांश के संदर्भ में, यह हमारी पहचान, हमारे पूर्वजों (पुरखों) और उनसे प्राप्त संस्कारों या परंपराओं का द्योतक है।


सर्वेक्षण या नक्शे में इसे केवल एक आँकड़े (Data) के रूप में दर्ज कर लिया गया है।


विकल्प (C) इस भाव को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है।
Quick Tip: कठिन शब्दों का संदर्भ समझें। 'वल्दियत' पहचान का हिस्सा है जो हमें हमारे पूर्वजों से जोड़ती है।


Question 10:

काव्यांश में प्रयुक्त ‘बाजरे की रोटियाँ और धनिये-पोदीने की चटनी’ प्रतीकार्थ है –

  • (A) हमारे स्वाद का
  • (B) ग्रामीण भोजन का
  • (C) पारंपरिक भोजन का
  • (D) सादे भोजन का
Correct Answer: (B) ग्रामीण भोजन का
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'बाजरा', 'धनिया' और 'पोदीना' मुख्य रूप से भारतीय ग्रामीण परिवेश के भोजन हैं।


कवि ने इन खाद्य पदार्थों के माध्यम से उस ग्रामीण संस्कृति और जीवनशैली को इंगित किया है जिसे आधुनिक विकास के नक्शों में समेटा जा रहा है।


यह शहरी पिज्जा-बर्गर संस्कृति के विपरीत ठेठ 'ग्रामीण भोजन' और जीवन का प्रतीक है।


अतः विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: भोजन के उदाहरण अक्सर सांस्कृतिक परिवेश (Cultural Context) को दर्शाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।


Question 11:

‘नब्ज और स्मृतियाँ नप चुके हैं’ – का क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
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'नब्ज' जीवन की धड़कन का प्रतीक है और 'स्मृतियाँ' हमारी यादों और भावनाओं का।


'नप चुके हैं' का अर्थ है कि व्यवस्था ने मानवीय संवेदनाओं, भावनाओं और निजी यादों को भी सरकारी आँकड़ों और फाइलों में कैद कर लिया है।


इसका अभिप्राय है मानवीयता का मशीनीकरण या दस्तावेजीकरण हो जाना, जहाँ भावनाओं का कोई मोल नहीं है, बस वे एक रिकॉर्ड हैं।
Quick Tip: 'नपना' यहाँ एक नकारात्मक संदर्भ में है—किसी जीवित/भावनात्मक चीज़ को जड़ वस्तु की तरह मापना।


Question 12:

‘नदियों को नक्शे में ही रहना अच्छा लगता है’ – पंक्ति के माध्यम से क्या कटाक्ष किया गया है ?

Correct Answer:
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यह पंक्ति एक तीखा व्यंग्य (कटाक्ष) है।


वास्तविकता में नदियाँ सूख रही हैं, प्रदूषित हैं और मर रही हैं।


'नक्शे में रहना अच्छा लगता है' का अर्थ है कि वे केवल नक्शों पर ही सुरक्षित और भरी-पूरी दिखती हैं।


ज़मीनी हकीकत और कागजी दस्तावेज़ों के बीच के अंतर को उजागर करना ही कवि का उद्देश्य है।
Quick Tip: व्यंग्य को पहचानने के लिए देखें कि क्या कही गई बात वास्तविकता के विपरीत है। यहाँ नदियों का 'सुखी' होना केवल नक्शे तक सीमित है।


Question 13:

‘हम नक्शे से बाहर छूट तो नहीं जाएँगे’ – पंक्ति में प्रयुक्त ‘हम’ कौन हैं और उनकी क्या चिंता है ?

Correct Answer:
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यहाँ 'हम' समाज के सामान्य, गरीब या हाशिए पर खड़े लोग हैं।


उनकी चिंता यह है कि विकास की इस अंधी दौड़ और दस्तावेजीकरण में कहीं उनका अस्तित्व ही न मिट जाए।


उन्हें डर है कि नई व्यवस्था या नक्शे में उन्हें जगह मिलेगी भी या नहीं, यानी वे बेघर या पहचान-विहीन तो नहीं हो जाएँगे।
Quick Tip: कविता के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न अक्सर असुरक्षा या अनिश्चितता की भावना को व्यक्त करता है।


Question 14:

रेडियो को श्रोताओं से संचालित माध्यम क्यों माना जाता है ?

Correct Answer:
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रेडियो पूर्णतः एक श्रव्य माध्यम (Audio Medium) है।


इसमें दृश्य (Visuals) नहीं होते, इसलिए जो कुछ भी प्रसारित होता है, उसका चित्र श्रोता को अपने मन में बनाना पड़ता है।


श्रोता की कल्पनाशक्ति ही रेडियो कार्यक्रम को पूरा करती है। यदि श्रोता ध्यान न दे या कल्पना न करे, तो संचार अधूरा रह जाएगा।


इसलिए इसे श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी से संचालित माध्यम माना जाता है।
Quick Tip: रेडियो = ध्वनि + श्रोता की कल्पना। यही समीकरण इसे अन्य माध्यमों से अलग करता है।


Question 15:

समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विशेष लेखन का कार्य विषय-विशेषज्ञों से करवाने के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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समाचार पत्रों में खेल, अर्थशास्त्र, विज्ञान, विदेश नीति आदि जटिल विषय होते हैं।


1. गहन जानकारी: सामान्य पत्रकार के पास इन विषयों की तकनीकी और गहरी समझ नहीं होती, जो एक विशेषज्ञ के पास होती है।


2. विश्लेषण: विशेषज्ञ केवल सूचना नहीं देते, बल्कि घटनाओं का विश्लेषण (Analysis) कर उनके प्रभाव को समझाते हैं।


3. विश्वसनीयता: विशेषज्ञ द्वारा लिखा गया लेख पाठकों के लिए अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय होता है।
Quick Tip: विशेष लेखन (Specialized Reporting) का उद्देश्य सूचना से आगे बढ़कर 'मायने समझाना' होता है, जो विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।


Question 16:

कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्यों का विभाजन किस प्रकार किया जाता है ?

Correct Answer:
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नाटक एक दृश्य-श्रव्य माध्यम है, अतः इसमें 'दृश्य' (Scene) सबसे छोटी इकाई होती है।


कहानी को नाटक में बदलते समय दृश्यों का विभाजन दो मुख्य आधारों पर होता है:


1. स्थान परिवर्तन (Change of Place): जैसे ही कहानी की घटना का स्थान बदलता है (उदा. घर से बाज़ार), एक नया दृश्य शुरू करना पड़ता है।


2. समय परिवर्तन (Change of Time): यदि घटना का समय बदलता है (उदा. सुबह से रात), तो भी दृश्य बदल दिया जाता है।


कथ्य (Content) को इन्हीं देश-काल के खाँचों में बाँटकर दृश्य लिखे जाते हैं।
Quick Tip: नाटक में 'पर्दा गिरना' या 'ब्लैकआउट' दृश्य परिवर्तन का संकेत है, जो हमेशा स्थान या समय बदलने पर होता है।


Question 17:

नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन संबंधी कुछ सुझाव लिखिए।

Correct Answer:
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नए और अप्रत्याशित विषयों (Creative Writing) पर लिखते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:


1. मौलिकता: विषय के प्रति अपना निजी नजरिया और विचार प्रस्तुत करें, न कि रटी-रटाई बातें।


2. शैली: लेखन की शैली रोचक और प्रवाहमयी होनी चाहिए। 'मैं' शैली का प्रयोग किया जा सकता है।


3. खुलापन: विषय से जुड़े हर पहलू—संवेदना, तर्क, और कल्पना—को मुक्त भाव से शब्द दें।


4. भाषा: भाषा सहज, सरल और विषय के अनुकूल होनी चाहिए।
Quick Tip: ऐसे लेखन में 'क्या सही है' से ज्यादा 'आप क्या सोचते हैं' महत्त्वपूर्ण होता है।


Question 18:

संवादों से संबंधित वो कौन से तथ्य हैं जो रेडियो नाटक पर विशेष रूप से लागू होते हैं ?

Correct Answer:
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रेडियो नाटक में संवाद ही सब कुछ होते हैं क्योंकि वहाँ दृश्य नहीं होता। मुख्य तथ्य:


1. दृश्य-सूचक: संवादों के माध्यम से ही पता चलना चाहिए कि पात्र कहाँ है और क्या कर रहा है (उदा. "अरे! तुम अभी तक यहाँ पार्क में बैठे हो?")।


2. चरित्र-चित्रण: पात्रों की उम्र, वर्ग और मनोदशा का पता उनकी भाषा और बोलने के लहजे से ही लगना चाहिए।


3. संक्षिप्तता: संवाद छोटे और स्वाभाविक होने चाहिए ताकि श्रोता आसानी से समझ सकें।
Quick Tip: रेडियो नाटक का नियम: "जो दिखता नहीं, वह संवाद में बोला जाना चाहिए।"


Question 19:

संचार के इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के आ जाने पर भी मुद्रित माध्यमों की लोकप्रियता बने रहने के क्या कारण हैं ?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यमों (Print Media) की लोकप्रियता के कारण:


1. स्थायित्व (Permanence): हम इन्हें सुरक्षित रख सकते हैं और अपनी सुविधानुसार कभी भी पढ़ सकते हैं।


2. चिंतन-मनन: लिखित शब्द पाठक को सोचने और विश्लेषण करने का अवसर देते हैं, जो टीवी/रेडियो की तेज गति में संभव नहीं।


3. भाषा का मानक: ये भाषा के शुद्ध और व्याकरण-सम्मत रूप को बनाए रखते हैं।
Quick Tip: प्रिंट मीडिया की ताकत उसका 'स्थायित्व' और 'गंभीरता' है।


Question 20:

हिंदी वेब पत्रकारिता की क्या स्थिति है ?

Correct Answer:
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हिंदी वेब पत्रकारिता वर्तमान में बहुत तेजी से विस्तार कर रही है।


1. प्रमुख समाचार पत्रों (जैसे दैनिक जागरण, भास्कर) के अपने ई-संस्करण और पोर्टल उपलब्ध हैं।


2. 'वेबदुनिया' जैसे स्वतंत्र हिंदी पोर्टल ने इसे नई पहचान दी है।


3. यूनिकोड (Unicode) फोंट के आने से हिंदी में टाइप करना और पढ़ना आसान हो गया है, जिससे इसकी पहुँच वैश्विक हो गई है।
Quick Tip: वेब पत्रकारिता = इंटरनेट पर समाचार। हिंदी में यूनिकोड फोंट इसके विस्तार का मुख्य तकनीकी कारण है।


Question 21:

विशेष लेखन की भाषा-शैली सामान्य लेखन से अलग कैसे है ?

Correct Answer:
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विशेष लेखन (जैसे कारोबार, खेल, विज्ञान) की अपनी एक विशिष्ट तकनीकी शब्दावली (Jargon) होती है।


1. तकनीकी शब्द: सामान्य लेखन में बोलचाल की भाषा होती है, जबकि विशेष लेखन में उस विषय के 'पारिभाषिक शब्दों' (जैसे क्रिकेट में 'LBW', व्यापार में 'तेजड़िए') का प्रयोग होता है।


2. लक्षित पाठक: इसकी भाषा उस विषय में रुचि रखने वाले विशेष वर्ग को ध्यान में रखकर लिखी जाती है, जो सामान्य समाचार से अधिक औपचारिक और सटीक होती है।
Quick Tip: हर 'बीट' (Beat) या क्षेत्र की अपनी डिक्शनरी होती है; यही विशेष लेखन की पहचान है।


Question 22:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(i) मित्रों के साथ स्टेडियम में मैच देखने का आनंद

Correct Answer:
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मित्रों के साथ स्टेडियम में मैच देखने का आनंद


क्रिकेट या किसी भी खेल का असली रोमांच स्टेडियम में ही महसूस होता है, और यदि साथ में मित्र हों, तो यह आनंद दोगुना हो जाता है।


पिछले रविवार मुझे अपने दोस्तों के साथ फिरोजशाह कोटला मैदान में भारत और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच देखने का अवसर मिला।


स्टेडियम के अंदर घुसते ही हज़ारों दर्शकों का शोर और उत्साह देखकर रोंगटे खड़े हो गए।


टीवी पर मैच देखना एक बात है, लेकिन वहां हर चौके-छक्के पर भीड़ की गूंज और 'इंडिया-इंडिया' के नारे एक अलग ही जोश भर देते हैं।


दोस्तों के साथ चेहरों पर तिरंगा पेंट करवाना, हर विकेट पर गले मिलना और बीच-बीच में खाने-पीने का दौर, सब कुछ यादगार था।


धूप और भीड़ की धक्का-मुक्की भी उस रोमांच के आगे फीकी लग रही थी।


वह अनुभव केवल खेल देखने का नहीं, बल्कि सामूहिकता और दोस्ती के जश्न का था, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता।
Quick Tip: रचनात्मक लेखन में अपने निजी अनुभवों (Personal Experience) और संवेदी विवरणों (Sensory Details) जैसे 'शोर', 'रंग', 'जोश' का प्रयोग करें।


Question 23:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(ii) किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत

Correct Answer:
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किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत


आज के डिजिटल युग में मोबाइल और कंप्यूटर किशोरों के जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं, लेकिन इनका अत्यधिक प्रयोग अब एक गंभीर 'लत' या बीमारी का रूप ले चुका है।


सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, किशोरों की नज़रें स्क्रीन पर गड़ी रहती हैं।


सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और वेब सीरीज़ की दुनिया ने उन्हें वास्तविक दुनिया और मैदानी खेलों से दूर कर दिया है।


इस लत का सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है; आँखों की कमजोरी, मोटापा, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आम समस्याएँ बन गई हैं।


वे परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने के बजाय वर्चुअल दुनिया में जीना पसंद करने लगे हैं।


समय रहते इस पर नियंत्रण आवश्यक है, जिसके लिए माता-पिता को स्क्रीन टाइम निर्धारित करना चाहिए और बच्चों को बाहरी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए।
Quick Tip: समस्या-प्रधान लेखों में: समस्या का परिचय \(\rightarrow\) कारण \(\rightarrow\) प्रभाव \(\rightarrow\) समाधान का ढांचा (Structure) अपनाएं।


Question 24:

निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

(iii) मेरे क्षेत्र का मुख्य चौराहा

Correct Answer:
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मेरे क्षेत्र का मुख्य चौराहा


मेरे शहर का 'घंटाघर चौराहा' न केवल यातायात का केंद्र है, बल्कि हमारे क्षेत्र की धड़कन भी है।


यहाँ दिन निकलते ही चहल-पहल शुरू हो जाती है जो देर रात तक थमती नहीं है।


चौराहे के बीचों-बीच एक पुरानी एतिहासिक मूर्ति लगी है, जिसके चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की क्यारी है।


एक तरफ सब्ज़ी वालों की कतारें हैं तो दूसरी तरफ ऑटो-रिक्शा का स्टैंड, जहाँ हमेशा सवारियों के लिए आपाधापी मची रहती है।


लाल बत्ती होते ही वाहनों का शोर थम जाता है और हरी बत्ती होते ही इंजनों की घरघराहट से पूरा वातावरण गूंज उठता है।


शाम के समय यहाँ चाट-पकौड़ी के ठेलों पर भीड़ उमड़ पड़ती है।


यह चौराहा केवल रास्तों का मिलन स्थल नहीं, बल्कि विभिन्न वर्गों और पेशों के लोगों का मिलन स्थल भी है।
Quick Tip: दृश्य वर्णन (Descriptive Writing) में 'चित्रमय भाषा' (Imagery) का प्रयोग करें ताकि पाठक उस स्थान की कल्पना कर सके।


Question 25:

‘छोटा मेरा खेत’ कविता के आधार पर लिखिए कि कागज रूपी खेत में पैदा होने वाले कविता रूपी फल की क्या विशेषता है ?

Correct Answer:
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कवि उमाशंकर जोशी के अनुसार, धरती के खेत में पैदा होने वाला अनाज या फल नश्वर होता है, वह एक समय के बाद समाप्त हो जाता है।


इसके विपरीत, कागज रूपी खेत में पैदा होने वाला 'कविता रूपी फल' (साहित्यिक रस) अनंत और शाश्वत होता है।


यह फल समय के साथ सड़ता या खत्म नहीं होता, बल्कि युगों-युगों तक पाठकों को आनंद और तृप्ति प्रदान करता रहता है।


इसकी कटाई अनंत बार की जा सकती है, फिर भी यह कम नहीं होता।
Quick Tip: तुलनात्मक उत्तर लिखें: अनाज (नश्वर) बनाम कविता (अक्षय/अनंत)। 'अक्षय पात्र' शब्द का प्रयोग प्रभावी होगा।


Question 26:

‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के आधार पर लिखिए कि टी.वी. पर शारीरिक पीड़ा झेलने वाले व्यक्ति से जुड़ा साक्षात्कार क्या सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम कहा जा सकता है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
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नहीं, इसे सच्चे अर्थों में सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम नहीं कहा जा सकता।


ऊपरी तौर पर यह अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा को समाज के सामने लाने का दावा करता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य व्यावसायिक होता है।


संचालक का प्रयास पीड़ित की वेदना को कुरेदकर उसे और दर्शकों को रुलाना होता है ताकि कार्यक्रम की टी.आर.पी. (TRP) और लोकप्रियता बढ़ सके।


कवि ने इसे 'सामाजिक उद्देश्य के नाम पर क्रूरता' कहा है, क्योंकि इसमें संवेदनशीलता की जगह संवेदनहीनता और बाज़ारवाद हावी होता है।
Quick Tip: उत्तर में 'व्यावसायिकता' (Commercialization) और 'संवेदनहीनता' (Insensitivity) जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।


Question 27:

‘बात सीधी थी पर’ कविता में भाषा के चक्कर में बात का टेढ़ी फँस जाना’ से क्या अभिप्राय है ?

Correct Answer:
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'भाषा के चक्कर में बात का टेढ़ी फँस जाना' का अभिप्राय है कि सहज और सरल बात को कहने के लिए जब कठिन या बनावटी भाषा का प्रयोग किया जाता है, तो अर्थ स्पष्ट होने के बजाय उलझ जाता है।


कवि अपनी सीधी सादी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए क्लिष्ट शब्दों और अलंकारिक भाषा का प्रयोग करने लगा।


परिणामस्वरूप, मूल कथ्य (Content) या भाव भाषा के जाल में दब गया और बात अपनी सार्थकता खो बैठी।


अर्थात्, चमत्कार प्रदर्शन के लोभ में कथ्य की सहजता नष्ट हो गई।
Quick Tip: 'साध्य' (बात) और 'साधन' (भाषा) का सही संतुलन न होने पर ही बात 'टेढ़ी' फँसती है।


Question 28:

‘खतरनाक परिस्थितियों का सामना कर मनुष्य और अधिक सक्षम बनता है ।’ – ‘पतंग’ कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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'पतंग' कविता में कवि आलोक धन्वा बताते हैं कि जब बच्चे छतों के खतरनाक किनारों से गिरकर बच जाते हैं, तो उनका भय समाप्त हो जाता है।


इस खतरनाक अनुभव के बाद वे और अधिक निडर और साहसी हो जाते हैं।


अब वे 'सुनहले सूरज' के सामने और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ आते हैं।


कवि का आशय है कि कठिनाइयों और संकटों का सामना करने से मनुष्य की जिजीविषा (जीने की इच्छा) और क्षमता मजबूत होती है, वह डरने के बजाय चुनौतियों को स्वीकारना सीख जाता है।
Quick Tip: 'गिरकर संभलना' ही डर को खत्म करता है—यही इस प्रश्न का मूल भाव है।


Question 29:

कविता और फूल दोनों के महकने को समान मानते हुए भी कवि ने यह क्यों कहा है कि ‘कविता का खिलना फूल क्या जाने ।’ ‘कविता के बहाने’ पाठ के आधार पर लिखिए।

Correct Answer:
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कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि फूल के खिलने और महकने की एक सीमा होती है; वह खिलता है और अंततः मुरझा कर नष्ट हो जाता है।


फूल की सुगंध भी एक निश्चित समय और स्थान तक ही सीमित रहती है।


इसके विपरीत, कविता एक बार खिलती है (रची जाती है) तो वह अमर हो जाती है।


वह समय और स्थान की सीमाओं से परे, पीढ़ियों तक पाठकों को अपने रस और अर्थ की सुगंध से सराबोर करती रहती है।


कविता की यह शाश्वतता और व्यापकता फूल की समझ (सामर्थ्य) से बाहर है, इसलिए कवि ने कहा 'फूल क्या जाने'।
Quick Tip: तर्क: फूल = सीमित/नश्वर, कविता = असीमित/शाश्वत। 'शाश्वतता' (Eternity) मुख्य बिंदु है।


Question 30:

‘बादल राग’ कविता के आधार पर लिखिए कि ऊँची-ऊँची अट्टालिकाओं में रहने वाला पूँजीपति वर्ग किससे और क्यों भयभीत हो जाता है ?

Correct Answer:
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पूँजीपति वर्ग 'बादलों' की गर्जना अर्थात् क्रांति (Revolution) के स्वर से भयभीत हो जाता है।


कवि निराला के अनुसार, बादल शोषित वर्ग के रक्षक और शोषणकर्ता (पूँजीपति) के विनाशक हैं।


जब क्रांति रूपी तूफानी बारिश होती है, तो उसका सबसे ज्यादा असर बड़े पेड़ों या महलों (विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग) पर पड़ता है, न कि छोटे पौधों (आम आदमी) पर।


पूँजीपतियों को डर है कि यह सामाजिक क्रांति उनके वैभव, सत्ता और सुख-सुविधाओं की ऊँची इमारतों (अट्टालिकाओं) को धराशायी कर देगी।
Quick Tip: प्रतीक समझें: बादल = क्रांति/विद्रोह, अट्टालिकाएँ = शोषण का गढ़। डर 'विनाश' और 'सत्ता छिनने' का है।


Question 31:

काव्यांश में तुलसीदास ने वर्णन किया है –

  • (A) अपने समय की सामाजिक विषमता का
  • (B) अपने समय की आर्थिक विषमता का
  • (C) समाज में बढ़ते अंधविश्वासों का
  • (D) श्रमहीन लोगों के विभिन्न प्रयासों का
Correct Answer: (D) श्रमहीन लोगों के विभिन्न प्रयासों का
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काव्यांश की पंक्तियों में कवि ने 'किसबी', 'किसान', 'बनिक', 'भिखारी', 'भाट', 'चोर', 'चेटकी' आदि विभिन्न वर्गों का उल्लेख किया है जिनके पास कोई काम (श्रम) नहीं है।


काम न होने के कारण वे 'पेट भरने' के लिए (पेट को पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि) तरह-तरह के जतन या प्रयास कर रहे हैं।


यहाँ तक कि वे धर्म-अधर्म और अपनी संतान बेचने जैसे कृत्य भी कर रहे हैं।


अतः यह गद्यांश मुख्य रूप से बेरोजगार/श्रमहीन लोगों द्वारा पेट की आग बुझाने के लिए किए जा रहे 'विभिन्न प्रयासों' का चित्रण करता है।
Quick Tip: प्रश्न के विकल्पों को ध्यान से देखें। यहाँ 'प्रयासों' (Actions listed: climbing, hunting, selling) का वर्णन सबसे सटीक उत्तर है।


Question 32:

पेट की आग को शांत करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा कर्म नहीं किया जा रहा था ?

  • (A) पर्वतों पर चढ़ना
  • (B) गुणों को गढ़ना
  • (C) व्यापार करना
  • (D) घने जंगलों में घूमना
Correct Answer: (C) व्यापार करना
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काव्यांश की दूसरी पंक्ति में स्पष्ट लिखा है: "बनिक को बनिज न..."


अर्थात् बनिए (व्यापारी) के पास 'बनिज' (व्यापार) नहीं है।


अन्य सभी कर्म किए जा रहे हैं: 'चढ़त गिरि' (पर्वतों पर चढ़ना), 'गुन गढ़त' (गुण सीखना/दिखाना), 'अटत गहन-गन' (घने जंगलों में घूमना)।


अतः 'व्यापार करना' वह कर्म है जो नहीं हो पा रहा है।
Quick Tip: नकारात्मक प्रश्न (Negative Questions) में 'न' या 'नहीं' शब्द को रेखांकित करें और पद्यांश से मिलान करें।


Question 33:

बड़वाग्नि कहते हैं –

  • (A) समुद्र की आग को
  • (B) जंगल की आग को
  • (C) पेट की आग को
  • (D) सूर्य से प्राप्त आग को
Correct Answer: (A) समुद्र की आग को
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'बड़वाग्नि' (बड़वानल) शब्द का अर्थ 'समुद्र में लगने वाली आग' होता है।


कवि ने पंक्ति लिखी है: "आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेट की", अर्थात् पेट की आग समुद्र की आग से भी बड़ी (भयंकर) है।


जंगल की आग को 'दावाग्नि' और पेट की आग को 'जठराग्नि' कहते हैं।


अतः सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: शब्दावली याद रखें: बड़वाग्नि (समुद्र), दावाग्नि (जंगल), जठराग्नि (पेट)।


Question 34:

काव्यांश के अनुसार ‘पेट की आग’ को किस प्रकार बुझाया जा सकता है ?

  • (A) समुद्र के जल से
  • (B) पसीने के जल से
  • (C) परिश्रम के बल से
  • (D) राम रूपी कृपाजल से
Correct Answer: (D) राम रूपी कृपाजल से
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काव्यांश की अंतिम पंक्ति है: "तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें"


यहाँ 'घनस्याम' का अर्थ है 'काला बादल' (वर्षा करने वाला)। तुलसीदास जी कहते हैं कि पेट की इस भयंकर आग को केवल राम रूपी बादल ही (अपनी कृपा की वर्षा से) बुझा सकता है।


कवि का मानना है कि दरिद्रता और भूख का समाधान ईश्वरीय कृपा में ही है।


अतः विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: रूपक अलंकार को समझें: राम = घनश्याम (बादल), कृपा = जल।


Question 35:

काव्यांश के आधार पर तुलसीदास के विषय में क्या धारणा बनती है ? उचित विकल्प का चयन कीजिए ।

(i) राम के प्रति दृढ़ आस्था रखने वाले संत

(ii) समाज को राम भक्ति से जोड़ने वाले साधक

(iii) सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग रचनाकार

(iv) सामाजिक उत्तरदायित्वों से विमुक्त वैरागी संत

विकल्प :

  • (A) (i) और (ii) दोनों
  • (B) (i) और (iii) दोनों
  • (C) (iii) और (ii) दोनों
  • (D) (i) और (iv) दोनों
Correct Answer: (B) (i) और (iii) दोनों
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इस काव्यांश में तुलसीदास जी ने समाज की तत्कालीन भीषण गरीबी और बेरोजगारी का यथार्थ चित्रण किया है, जिससे सिद्ध होता है कि वे केवल एक वैरागी नहीं, बल्कि 'सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग रचनाकार' (iii) हैं।


साथ ही, वे इसका समाधान 'राम घनस्याम' (श्री राम की कृपा) में देखते हैं, जो यह दर्शाता है कि वे 'राम के प्रति दृढ़ आस्था रखने वाले संत' (i) हैं।


कथन (iv) गलत है क्योंकि वे समाज से विमुक्त (कटे हुए) नहीं हैं।


अतः कथन (i) और (iii) सही हैं, जो विकल्प (B) में हैं।
Quick Tip: तुलसीदास भक्त कवि होने के साथ-साथ एक लोकनायक और समाज-दृष्टा भी थे, यह उनके साहित्य की मुख्य विशेषता है।


Question 36:

बाज़ार के आकर्षण से बचने के लिए ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में दिए गए उपायों का उल्लेख करते हुए लिखिए कि आप उनसे कहाँ तक सहमत हैं ।

Correct Answer:
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लेखक जैनेंद्र कुमार के अनुसार, बाज़ार के जादुई आकर्षण से बचने का सबसे सशक्त उपाय है कि बाज़ार जाते समय 'मन खाली' न हो।


इसका अर्थ है कि उपभोक्ता को अपनी आवश्यकताओं का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए कि उसे क्या खरीदना है।


जब मन लक्ष्य (खरीदारी की सूची) से भरा होता है, तो बाज़ार की चकाचौंध उस पर प्रभाव नहीं डाल पाती।


मैं इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि जब हम बिना उद्देश्य के बाज़ार जाते हैं, तो विज्ञापनों और सजावट के प्रभाव में आकर अनावश्यक वस्तुएँ खरीद लेते हैं।


यह संयम न केवल फिजूलखर्ची रोकता है, बल्कि बाज़ार को 'सार्थकता' भी प्रदान करता है।
Quick Tip: 'मन खाली होना' (उद्देश्यहीनता) और 'मन भरा होना' (लक्ष्य की स्पष्टता)—इन दो मुहावरों के अंतर को स्पष्ट करना ही उत्तर का सार है।


Question 37:

‘‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में मेंढक मंडली पर पानी फेंकना जीजी की दृष्टि में पानी पाने के लिए पानी के लिए बीज बोना है ।’ क्या आप भी जीजी के इस विचारों से सहमत हैं ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए ।

Correct Answer:
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जीजी का तर्क था कि 'त्याग' के बिना कुछ प्राप्त नहीं होता; जैसे किसान फसल पाने के लिए पहले खेत में बीज बोता है, वैसे ही इंद्रदेव से पानी पाने के लिए हमें पहले पानी का अर्घ्य (त्याग) देना पड़ता है।


वे इसे पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि 'पानी की बुवाई' मानती थीं।


वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण से मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ क्योंकि भीषण गर्मी और जल-संकट के समय पानी फेंकना संसाधन की बर्बादी है और यह एक अंधविश्वास है।


परंतु, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह तर्क समाज में 'सामूहिकता' और 'त्याग' की भावना को जीवित रखने का कार्य करता है, जो संकट के समय लोगों को निराशा से बचाता है।
Quick Tip: उत्तर में 'तर्क' (Logic) और 'विश्वास' (Faith) के द्वंद्व को संतुलित रखें। 'बुवाई' रूपक (Metaphor) का विश्लेषण करें।


Question 38:

‘‘पहलवान की ढोलक’ पाठ व्यक्तिगत सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि एकदम नयी व्यवस्था के आरोपित हो जाने का प्रतीक है ।’ सिद्ध कीजिए ।

Correct Answer:
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श्यामनगर के पुराने राजा कुश्ती और लोक कलाओं के प्रेमी थे, इसलिए उन्होंने लुट्टन पहलवान को राजदरबार में सम्मान दिया।


राजा की मृत्यु के बाद, विलायत से पढ़कर आए नए राजकुमार ने सत्ता संभाली।


राजकुमार की रुचि भारतीय कुश्ती में नहीं, बल्कि घुड़सवारी जैसे पश्चिमी खेलों में थी।


उसने आते ही पहलवान को 'खर्चिला' बताकर दरबार से निकाल दिया।


यह घटना केवल एक राजा के बदलने (सत्ता परिवर्तन) की नहीं थी, बल्कि यह लोक संस्कृति और कलाओं को आश्रय देने वाली पुरानी सामंती व्यवस्था के स्थान पर एक रूखी और व्यावहारिक आधुनिक व्यवस्था के थोपे जाने का प्रतीक थी।
Quick Tip: 'सत्ता परिवर्तन' (Change of Ruler) और 'व्यवस्था परिवर्तन' (Change of System/Values) के अंतर को समझाएं।


Question 39:

‘भक्तिन की कंजूसी के प्राण पूंजीभूत होते-होते पर्वताकार बन चुके थे ।’ – पंक्ति का आशय है –

  • (A) पैसों के प्रति भक्तिन का प्रेम पर्वतों का रूप ले चुका था ।
  • (B) पैसों के प्रति भक्तिन के प्रेम की गाथा दूर-दूर तक फैल चुकी थी ।
  • (C) भक्तिन एक-एक पैसा कंजूसी से खर्च करती थी ।
  • (D) एक-एक पैसा जमा करके भक्तिन ने मोटी पूँजी बना ली थी ।
Correct Answer: (A) पैसों के प्रति भक्तिन का प्रेम पर्वतों का रूप ले चुका था ।
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लेखिका ने 'कंजूसी के प्राण' शब्द का प्रयोग भक्तिन के स्वभाव के लिए किया है।


'पूंजीभूत होते-होते पर्वताकार बन चुके थे' का अर्थ है कि धन संग्रह करने की उसकी प्रवृत्ति और पैसों के प्रति उसका मोह अत्यंत विशाल और दृढ़ हो गया था।


यहाँ 'पर्वताकार' शब्द का लाक्षणिक अर्थ 'अत्यधिक' या 'विशाल प्रेम/मोह' है।


अतः विकल्प (A) इस भावार्थ को सबसे सही ढंग से व्यक्त करता है।
Quick Tip: मुहावरेदार भाषा में शब्दों के भावार्थ को पकड़ें। 'पर्वत' यहाँ आकार या मात्रा की विशालता का प्रतीक है।


Question 40:

भक्तिन की किस ‘उदारता के डाइनामाइट’ ने महादेवी जी को आश्चर्यचकित कर दिया ?

  • (A) गाँव में महादेवी जी के रहने का प्रबंध अपनी पूँजी से करने
  • (B) महादेवी जी को शहर से गाँव ले जाने और रखने के प्रबंध ने
  • (C) अपने घर में महादेवी जी की सभी सुविधाओं का प्रबंध करने
  • (D) युद्ध की पृष्ठभूमि में महादेवी जी की सुरक्षा की चिंता करने
Correct Answer: (B) महादेवी जी को शहर से गाँव ले जाने और रखने के प्रबंध ने
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गद्यांश में वर्णन है कि युद्ध के भय और संकट के समय जब लोग भाग रहे थे, तब भक्तिन ने महादेवी जी को आश्वस्त किया।


उसने प्रस्ताव रखा कि वह उन्हें अपने गाँव ले जाएगी और वहां अपनी जमा-पूँजी से उनके रहने-खाने का सारा प्रबंध करेगी।


एक घोर कंजूस मानी जाने वाली महिला का अपने स्वामी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का यह प्रस्ताव ही वह 'डाइनामाइट' (विस्फोटक) था जिसने लेखिका को हैरान कर दिया।


अतः सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: 'डाइनामाइट' शब्द यहाँ एक चौंकाने वाली घटना (Surprise element) के लिए प्रयुक्त हुआ है—कंजूस का दानी बन जाना।


Question 41:

भक्तिन को नौकर कहना क्यों असंगत था ?

  • (A) उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व था ।
  • (B) वह निजी इच्छा के अनुरूप कार्य करती थी ।
  • (C) वह महादेवी जी के व्यक्तित्व से जुड़ी थी ।
  • (D) वह महादेवी जी की बात सुनकर हँस देती थी ।
Correct Answer: (C) वह महादेवी जी के व्यक्तित्व से जुड़ी थी ।
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गद्यांश में लेखिका स्पष्ट करती हैं कि भक्तिन और उनके बीच का संबंध स्वामी और सेवक का नहीं था।


वह महादेवी के सुख-दुख की साथी थी और उनका जीवन 'अंधेरे-उजाले' की तरह एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ा था।


नौकर को इच्छा होने पर हटाया जा सकता है, लेकिन भक्तिन महादेवी के जीवन का अनिवार्य अंग बन चुकी थी।


अतः विकल्प (C) सही है क्योंकि वह उनके व्यक्तित्व का विस्तार बन गई थी।
Quick Tip: उत्तर ढूँढते समय गद्यांश की उस पंक्ति पर ध्यान दें जहाँ संबंधों की तुलना (अंधेरे-उजाले) की गई है।


Question 42:

गद्यांश में अँधेरे-उजाले, आम और गुलाब का उदाहरण किस संदर्भ में दिया गया है ?

  • (A) भक्तिन और महादेवी जी के संबंधों के
  • (B) भक्तिन की चारित्रिक विशेषताओं के
  • (C) महादेवी जी की चारित्रिक विशेषताओं के
  • (D) संसार में प्रत्येक वस्तु के अस्तित्व के
Correct Answer: (A) भक्तिन और महादेवी जी के संबंधों के
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लेखिका ने तर्क दिया है कि जैसे हम अपनी परछाई (अंधेरे-उजाले) या अपने आंगन के पौधों (आम-गुलाब) को अपना 'सेवक' नहीं कहते, वे हमारे अस्तित्व का हिस्सा होते हैं।


ठीक उसी प्रकार भक्तिन भी महादेवी के जीवन का हिस्सा है, न कि कोई वेतनभोगी कर्मचारी।


यह उदाहरण उनके 'आत्मीय संबंधों' की गहराई और अपरिहार्यता को समझाने के लिए दिए गए हैं।


इसलिए विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: लेखक द्वारा दिए गए दृष्टांत (Examples) हमेशा किसी मुख्य तर्क को सिद्ध करने के लिए होते हैं; यहाँ वह तर्क 'संबंधों की प्रकृति' है।


Question 43:

महादेवी जी द्वारा भक्तिन को अपनी सेवा से न हटाने का कारण था, अपने प्रति उसका ________ । (रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए)

  • (A) सेवाभाव
  • (B) अपनत्व
  • (C) सरल व्यवहार
  • (D) निश्छल व्यवहार
Correct Answer: (B) अपनत्व
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गद्यांश में लिखा है: "भक्तिन का अनुराग इतना प्रख्यात हो चुका है कि मेरे लिए उसका परित्याग... कठिन है।"


'अनुराग' का अर्थ होता है गहरा प्रेम या लगाव।


दिए गए विकल्पों में 'अपनत्व' शब्द अनुराग के भाव (अपनेपन का अहसास) के सबसे निकट है।


वह सेविका की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह 'अपनत्व' रखती थी, इसलिए उसे हटाना संभव नहीं था।
Quick Tip: पर्यायवाची शब्दों का ज्ञान आवश्यक है। अनुराग \(\approx\) अपनत्व/प्रेम।


Question 44:

शिरीष के विषय में कालिदास और हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के विचारों के अंतर को स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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महाकवि कालिदास शिरीष के फूलों को अत्यंत कोमल मानते थे। उनका कहना था कि ये फूल केवल भंवरों के पदों का कोमल दबाव सह सकते हैं, पक्षियों का भार नहीं।


इसके ठीक विपरीत, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी शिरीष को एक कठोर अवधूत (संन्यासी) की तरह देखते थे।


द्विवेदी जी के अनुसार, शिरीष भयंकर गर्मी, लू और उमस में भी अविचल खड़ा रहता है और जीवन-रस खींचकर सरस बना रहता है।


जहाँ कालिदास ने उसकी कोमलता (सौंदर्य) को देखा, वहीं द्विवेदी जी ने उसकी जिजीविषा (संघर्ष शक्ति) को पहचाना।
Quick Tip: मुख्य अंतर: कालिदास = कोमलता (Aesthetic view), द्विवेदी जी = कठोरता/सहनशक्ति (Life force view)।


Question 45:

‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि आधुनिक समय में मनुष्य को व्यवसाय बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ जाती है ? पेशा बदलने की अनुमति नहीं होने का क्या दुष्परिणाम होता है ?

Correct Answer:
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आधुनिक युग में औद्योगीकरण और तकनीक के कारण कार्य-प्रणाली में निरंतर परिवर्तन होता रहता है, जिससे कई बार पुराना पेशा अप्रासंगिक हो जाता है।


ऐसे में, अपनी आजीविका चलाने (पेट भरने) के लिए मनुष्य को अपना व्यवसाय बदलने की आवश्यकता पड़ती है।


यदि जाति प्रथा के कारण व्यक्ति को अपना पैतृक पेशा बदलने की अनुमति न हो, भले ही वह पेशा उसे भूखा मार दे, तो इसका सीधा दुष्परिणाम बेरोजगारी और भुखमरी होता है।


अंबेडकर जी के अनुसार, यह बंधन व्यक्ति की स्वतंत्रता और विकास को बाधित करता है।
Quick Tip: कीवर्ड्स: 'तकनीकी परिवर्तन' \(\rightarrow\) 'पेशा बदलने की आवश्यकता'। 'प्रतिबंध' \(\rightarrow\) 'भुखमरी/बेरोजगारी'।


Question 46:

‘बाज़ार दर्शन’ पाठ से उद्धृत कथन ‘तप की राह रेगिस्तान को जाती होगी, मोक्ष की राह वह नहीं है’ – का आशय स्पष्ट कीजिए ।

Correct Answer:
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जैनेंद्र कुमार का आशय है कि मन को बलात् (जबरदस्ती) दबाना या इच्छाओं का पूर्ण दमन करना (तप) जीवन को नीरस और सूखा बना देता है, जैसे रेगिस्तान जहाँ कोई जीवन नहीं होता।


सच्चा मोक्ष या जीवन की सार्थकता मन को मारने में नहीं, बल्कि मन को समझने और नियंत्रण में रखने में है।


इच्छाओं का निरोध (Control) करना सही है, लेकिन उनका हठपूर्वक दमन (Suppression) करना व्यक्ति को कुंठित कर देता है।


लेखक 'ठाठ देकर' मन को बंद करने के विरोधी हैं; वे जागरूकता के साथ चयन करने को ही सच्ची राह मानते हैं।
Quick Tip: 'रेगिस्तान' = शून्यता/सूखापन। लेखक 'दमन' (Repression) के खिलाफ हैं और 'संतुलन' (Balance) के पक्ष में।


Question 47:

“यह काम मैं अपने पैसे से करने को कह रहा हूँ, आपके पैसे से नहीं जो आप नुक्ताचीनी करें ।” ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी से उद्धृत इस कथन के संदर्भ में भूषण के चरित्र की समीक्षा कीजिए ।

Correct Answer:
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यशोधर बाबू का बेटा भूषण जब उन्हें ऊनी गाउन उपहार में देता है, तो वह यह अहंकारी वाक्य बोलता है। यह उसके चरित्र के निम्नलिखित पहलुओं को उजागर करता है:


1. आर्थिक दंभ: भूषण को अपनी अच्छी कमाई का घमंड है और वह पिता की कम आय या बचत का परोक्ष रूप से मजाक उड़ाता है।


2. संवेदनहीनता: उसे इस बात का भान नहीं है कि पिता के लिए उपहार की कीमत नहीं, बल्कि आदर और प्रेम मायने रखता है। उसके शब्द पिता के स्वाभिमान को चोट पहुँचाते हैं।


3. पीढ़ियों का अंतर: वह आधुनिक और व्यावहारिक तो है, लेकिन उसमें भारतीय मूल्यों और बड़ों के प्रति लिहाज की कमी है।
Quick Tip: चरित्र समीक्षा में 'कथन' (Dialogue) के पीछे छिपे 'भाव' (Tone) का विश्लेषण करें। यहाँ टोन 'एहसान जताने' की है।


Question 48:

‘एक आदर्श अध्यापक छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है ।’ – ‘जूझ’ कहानी के मास्टर सौंदलकर के चरित्र के माध्यम से इस कथन की पुष्टि कीजिए ।

Correct Answer:
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'जूझ' कहानी में मराठी शिक्षक सौंदलकर जी ने लेखक (आनंदा) के जीवन को एक नई दिशा दी।


1. शिक्षण शैली: वे कविताओं को केवल पढ़ाते नहीं थे, बल्कि उन्हें गाकर, अभिनय के साथ और स्वयं रसमग्न होकर सिखाते थे, जिससे लेखक में साहित्य के प्रति रुचि जागी।


2. प्रेरणा स्रोत: उन्होंने लेखक को छंद, लय और अलंकार का ज्ञान दिया और उसे विश्वास दिलाया कि वह भी कविता रच सकता है।


3. मार्गदर्शन: वे लेखक की आरंभिक रचनाओं की कमियाँ सुधारते और उसे प्रोत्साहित करते।


उनके इसी स्नेह और मार्गदर्शन ने एक खेत में काम करने वाले साधारण लड़के को एक सफल साहित्यकार बना दिया, जो आदर्श शिक्षक के प्रभाव को सिद्ध करता है।
Quick Tip: उदाहरण दें: कैसे शिक्षक ने छात्र के 'आत्मविश्वास' (Confidence) को जगाया।


Question 49:

‘मुअनजोदड़ो नगर-नियोजन की अनूठी मिसाल है ।’ उदाहरण सहित इस कथन की पुष्टि कीजिए ।

Correct Answer:
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मुअनजोदड़ो का नगर-नियोजन (Town Planning) इतना उन्नत था कि उसे आज के शहरों के लिए भी आदर्श माना जाता है:


1. ग्रिड प्रणाली: यहाँ की सड़कें सीधी थीं और एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिससे शहर व्यवस्थित आयताकार खंडों में बँटा था।


2. जल निकासी: गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों से बनी ढकी हुई नालियाँ थीं, जो मुख्य सड़क की नाली से मिलती थीं। यह उच्च स्तरीय सफाई व्यवस्था को दर्शाता है।


3. वास्तुकला: घरों के दरवाजे मुख्य सड़क पर न खुलकर गलियों में खुलते थे। हर घर में स्नानघर और कुएँ का होना उनकी नागरिक सुविधाओं की समझ को प्रकट करता है।
Quick Tip: मुख्य बिंदु: ग्रिड प्लान, ढकी नालियाँ, और पक्की ईंटें। ये तीन उदाहरण उत्तर को पूर्ण बनाते हैं।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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