
The Hindi Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.
The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.
CBSE Class 12 Hindi Core Question Paper 2025 PDF (Set 3 - 2/4/3) is available for download here.
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लेखक का उद्देश्य होता है :
गद्यांश की दूसरी पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा है: "मगर जो अनुभूति, पीड़ा, हर्षोल्लास लेखक के हृदय में उपजता है, उनको अभिव्यक्त किया ही जाना है।"
यहाँ लेखक स्पष्ट करते हैं कि चाहे पाठक कम हों या न हों, लेखक के मन के भावों का प्रकट होना अनिवार्य है।
आर्थिक लाभ या मान-सम्मान गद्यांश में गौण माने गए हैं, मुख्य बल 'अभिव्यक्ति' पर है।
अतः सही विकल्प (B) है।
Quick Tip: गद्यांश में 'उद्देश्य' या 'वृत्ति' से संबंधित वाक्यों को रेखांकित करें; यहाँ 'अभिव्यक्त किया जाना' वाक्यांश निर्णायक है।
चेखव का उदाहरण यहाँ क्यों दिया गया है ?
गद्यांश में चेखव की कहानी का जिक्र यह बताने के लिए किया गया है कि लेखक को अपनी बात कहने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है।
कहानी में नायक अपनी व्यथा सुनाना चाहता है, पर कोई सुनने वाला नहीं मिलता, अंततः उसे घोड़े को कहानी सुनानी पड़ती है।
यह उदाहरण लेखक की 'पीड़ा' और 'श्रोता के अभाव' रूपी कठिनाई को मार्मिक ढंग से उजागर करता है।
अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: उदाहरण (Example) का कार्य मुख्य विचार को पुष्ट करना होता है। यहाँ मुख्य विचार 'लेखक की पीड़ा/संघर्ष' है।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : अनेक शीर्ष लेखक प्रारंभ में पाठक-प्रकाशक नहीं मिलने से नैराश्य के गर्त में नहीं डूबे।
कारण : विचारों की सत्यता और आगामी उपयोगिता के प्रति उन्हें कोई शंका नहीं रहती।
गद्यांश के अनुसार, शीर्ष लेखक शुरुआती असफलताओं (पाठक न मिलना) से निराश नहीं हुए। यह कथन सत्य है।
गद्यांश में इसका कारण भी बताया गया है: "जिनके पास कुछ ठोस कहने-लिखने को है, वे कभी थमेंगे नहीं।"
अर्थात् उन्हें अपने विचारों की 'ठोसता' (सत्यता) और भविष्य में उनके महत्त्व (उपयोगिता) पर पूरा भरोसा था।
इसी विश्वास (कारण) के चलते वे निराश नहीं हुए (कथन)। अतः व्याख्या सही है।
Quick Tip: अभिकथन-कारण में 'क्योंकि' (Because) लगाकर पढ़ें: "वे निराश नहीं हुए क्योंकि उन्हें अपने विचारों पर भरोसा था।"
लेखन कर्म का रूप क्यों बदल रहा है ?
गद्यांश के अनुसार, लेखन कर्म का रूप बदलने के मुख्य कारण हैं:
1. डिजिटल क्रांति: आधुनिक तकनीक और डिजिटल चकाचौंध ने लोगों की आदतों को बदल दिया है।
2. माध्यम में बदलाव: अब लोगों का रुझान 'पढ़ने-लिखने' के बजाय 'बोलने-सुनने' (Audio-Visual) और 'देखने' की ओर अधिक हो गया है, जिससे लिखित शब्द की गरिमा प्रभावित हुई है।
Quick Tip: यहाँ 'रूप बदलना' का अर्थ है पारंपरिक लेखन से डिजिटल/दृश्य माध्यमों की ओर संक्रमण।
लेखक को ‘मशीनी-क्रिया’ क्यों नहीं कहा जा सकता ?
लेखन को 'मशीनी-क्रिया' नहीं कहा जा सकता क्योंकि:
1. संवेदना: मशीनें भावनाहीन होती हैं, जबकि लेखन का आधार ही मानवीय संवेदनाएँ, पीड़ा और हर्षोल्लास है।
2. वैचारिक संघर्ष: लेखन में विचारों से जूझना पड़ता है, शब्दों का चयन करना पड़ता है और हृदय की गहराइयों को छूना पड़ता है, जो एक यांत्रिक प्रक्रिया (Mechanical Process) नहीं हो सकती।
Quick Tip: अंतर स्पष्ट करें: मशीन = दोहराव (Repetition), लेखन = अनुभूति (Feeling)।
डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र में क्या प्रभाव दिखाई देता है ?
डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है:
1. रुझान में परिवर्तन: अब अधिसंख्य लोग 'जानने, सीखने और समझने' के लिए पुस्तकों के बजाय डिजिटल माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं।
2. पढ़ने की संस्कृति का ह्रास: 'पढ़ने-लिखने' की जगह 'बोलने-सुनने' (Audio-Visual content) को प्राथमिकता मिल रही है।
Quick Tip: प्रभाव (Effect) = पठन संस्कृति में कमी और डिजिटल/दृश्य माध्यमों की वृद्धि।
‘नए किरदारों की आवश्यकता तो बरकरार रहेगी’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि माध्यम चाहे मुद्रित (Print) हो या डिजिटल, कहानियों की आत्मा यानी 'पात्र' (Characters) हमेशा जरूरी रहेंगे।
समाज बदल सकता है, तकनीक बदल सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और जीवन-संघर्षों को व्यक्त करने वाले नए-नए किरदारों का सृजन अनिवार्य बना रहेगा।
तकनीक पात्रों को नहीं रच सकती, उन्हें लेखक ही गढ़ेगा।
Quick Tip: 'किरदार' कहानी का मानवीय चेहरा होते हैं, जो तकनीक से स्वतंत्र और अपरिहार्य हैं।
तरु शिखर पर जाकर कौन बैठ गया है ?
काव्यांश की पहली दो पंक्तियाँ हैं: "सिमटा पंख साँझ की लाली / जा बैठी अब तरु शिखरों पर"।
कवि ने यहाँ 'साँझ' (संध्या) का मानवीकरण एक पक्षी के रूप में किया है।
शाम की लालिमा को ऐसे चित्रित किया गया है मानो कोई पक्षी दिन भर उड़ने के बाद पंख समेटकर पेड़ की सबसे ऊँची डाली (शिखर) पर बैठ गया हो।
अतः सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: मानवीकरण (Personification) को पहचानें: 'पंख समेटना' और 'बैठना' पक्षी की क्रियाएँ हैं जो साँझ पर आरोपित हैं।
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए :
पद्यांश की पंक्तियों के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है:
1. ज्योति-स्तंभ: "ज्योति स्तंभ-सा धँस सरिता में / सूर्य क्षितिज पर..."। डूबता हुआ सूर्य नदी के जल में एक ज्योति के खंभे जैसा प्रतिबिंबित हो रहा है। (1 का संबंध iii से)
2. केंचुल-सा: "केंचुल-सा / लगता चितकबरा गंगाजल"। गंगा का पानी केंचुल (साँप की खाल) जैसा चितकबरा लग रहा है। (2 का संबंध ii से)
3. दीपशिखा: "दीप शिखा-सा ज्वलित कलश"। मंदिर का कलश दीये की लौ (दीपशिखा) की तरह चमक रहा है। (3 का संबंध i से)
सही कूट: 1-(iii), 2-(ii), 3-(i), जो विकल्प (A) में है।
Quick Tip: काव्यांश में उपमाओं (Similes) को ढूँढें—'सा' शब्द के साथ। जैसे: 'स्तंभ-सा सूर्य', 'केंचुल-सा गंगाजल'।
स्नेह रूपी बंधन में कौन-कौन बंधे हैं ?
काव्यांश में पंक्ति है: "सिकता, सलिल, समीर सदा से / स्नेह पाश में बंधे समुज्ज्वल"।
यहाँ प्रयुक्त तत्सम शब्दों के अर्थ हैं:
- सिकता = रेत (Sand)
- सलिल = पानी (Water/River)
- समीर = हवा (Wind)
अतः रेत, पानी और हवा स्नेह बंधन में बंधे हैं।
सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: शब्दार्थ ज्ञान महत्त्वपूर्ण है: सिकता = बालू/रेत।
संध्या के समय गंगा नदी कैसी प्रतीत हो रही है ?
संध्या के समय गंगा नदी चितकबरी और केंचुल (साँप की उतारी हुई खाल) जैसी प्रतीत हो रही है।
धूप और छाँव के प्रभाव ('धूपछाँह के रंग की रेती') के कारण नदी का जल कहीं चमकीला (रजत) और कहीं गहरा (नील) दिख रहा है।
डूबते सूर्य का प्रतिबिंब जल में एक धंसे हुए 'ज्योति स्तंभ' जैसा लग रहा है।
Quick Tip: दृश्य बिंबों (Visual Imagery) का उल्लेख करें: 'चितकबरा', 'रजत', 'ज्योति स्तंभ'।
संध्याकालीन प्रकृति की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
कवि ने संध्याकालीन प्रकृति को अत्यंत सुंदर और जादुई बताया है:
1. आकाश: शाम की लालिमा एक पक्षी की तरह पेड़ों के शिखरों पर विश्राम कर रही है।
2. पेड़-पौधे: पीपल के पत्ते तांबे के रंग (ताम्रपर्ण) के चमक रहे हैं।
3. जल-स्रोत: झरने सोने (स्वर्णिम) जैसे बह रहे हैं।
4. समग्र वातावरण: रेत, हवा और पानी एक शांत और उज्ज्वल स्नेह-बंधन में बंधे हुए प्रतीत होते हैं।
Quick Tip: प्रकृति के विभिन्न तत्वों (पेड़, झरने, आकाश) के लिए प्रयुक्त विशेषणों (स्वर्णिम, ताम्रपर्ण) का प्रयोग करें।
संध्या के नदी तट के दृश्य का वर्णन कीजिए।
नदी तट पर शाम के समय एक अद्भुत दृश्य उपस्थित है:
1. रेत: रेत धूप-छाँव के मिश्रित रंगों वाली दिख रही है।
2. लहरें: हवा के कारण लहरों पर साँप जैसी आकृतियाँ (सर्पांकित) बन रही हैं।
3. वातावरण: पास के मंदिर में शंख और घंटे बज रहे हैं, जिसकी ध्वनि से लहरों में भी एक लयबद्ध कंपन महसूस हो रहा है।
4. प्रकाश: मंदिर का कलश दीपशिखा की तरह चमक रहा है और आकाश में नीरांजन (आरती) कर रहा है।
Quick Tip: दृश्य (Sight) और ध्वनि (Sound) का मिश्रण वर्णन को सजीव बनाता है।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(i) भीषण गर्मी में बादलों का बरसना
भीषण गर्मी में बादलों का बरसना
जेठ और आषाढ़ की तपती दुपहरी जब धरती का सीना छलनी कर देती है और लू के थपेड़ों से जन-जीवन त्रस्त हो जाता है, तब आसमान में काले बादलों का उमड़ना किसी दैवीय वरदान जैसा लगता है।
सूरज की प्रखर किरणों से झुलसते पेड़-पौधे और सूखी नदियाँ मानो आकाश की ओर टकटकी लगाए प्रार्थना करती हैं।
ऐसे में जब काली घटाएँ घिरती हैं और पहली बूंद धरती को चूमती है, तो मिट्टी की सौंधी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठता है।
बारिश की फुहारें तन और मन की तपन को बुझा देती हैं।
मोर खुशी से नाचने लगते हैं और किसान के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है।
भीषण गर्मी के बाद यह वर्षा केवल पानी नहीं, बल्कि जीवन और उम्मीद बनकर बरसती है, जो प्रकृति को पुनः हरा-भरा और जीवंत बना देती है।
Quick Tip: प्रकृति वर्णन में 'संवेदी बिंब' (Sensory details) जैसे—सौंधी गंध, मोर का नाचना, लू का थपेड़ा—लेख को प्रभावशाली बनाते हैं।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(ii) ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत
ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत
आधुनिक तकनीकी युग में 'ऑनलाइन गेमिंग' बच्चों और युवाओं के लिए एक गंभीर नशा बन गया है।
जहाँ पहले बच्चे शाम होते ही खेल के मैदानों की ओर भागते थे, वहीं अब वे कमरों में बंद होकर मोबाइल स्क्रीन पर अंगुलियां नचाते हैं।
पबजी, फ्री-फायर जैसे खेलों ने उन्हें ऐसा जकड़ा है कि वे अपनी पढ़ाई, नींद और सामाजिक जीवन को भूल चुके हैं।
इस लत का दुष्प्रभाव उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
बच्चों में मोटापा, आंखों की कमजोरी, चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है।
वर्चुअल दुनिया की यह लत उन्हें वास्तविकता से काट रही है।
आवश्यकता है कि अभिभावक और समाज इस खतरे को पहचानें, स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें और बच्चों को रचनात्मक व मैदानी गतिविधियों की ओर मोड़ें।
Quick Tip: समस्या-प्रधान लेख: कारण (तकनीक) \(\rightarrow\) प्रभाव (सेहत/समाज पर) \(\rightarrow\) समाधान (संतुलन/जागरूकता)।
निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(iii) शहरों की तरफ भागता ग्रामीण
शहरों की तरफ भागता ग्रामीण
गाँवों से शहरों की ओर पलायन आज भारत की एक प्रमुख समस्या है।
गाँवों में रोजगार के अभाव, कृषि में घाटा और बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) की कमी के कारण ग्रामीण युवा शहरों की ओर भाग रहे हैं।
शहर की चमक-दमक उन्हें आकर्षित करती है, लेकिन वहाँ जाकर वे अक्सर भीड़, प्रदूषण और महंगी जीवनशैली के जाल में फँस जाते हैं।
इस पलायन से जहाँ एक ओर गाँव वीरान और बुजुर्गों के आश्रय स्थल बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहरों में जनसंख्या का दबाव और मलिन बस्तियाँ बढ़ रही हैं।
खेती और लोक-संस्कृति खतरे में है।
यदि गाँवों में ही रोजगार और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ ('स्मार्ट विलेज'), तो इस पलायन को रोका जा सकता है और ग्राम-जीवन को पुनः समृद्ध किया जा सकता है।
Quick Tip: पलायन के 'पुश फैक्टर' (गाँव की कमी) और 'पुल फैक्टर' (शहर का आकर्षण) दोनों का उल्लेख करें।
भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल कार्य क्यों है ?
भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना इसलिए मुश्किल है क्योंकि लेखन एक अनुशासित और सचेत प्रक्रिया है।
बोलते समय हम व्याकरण, क्रम या भाषा की शुद्धता का उतना ध्यान नहीं रखते, लेकिन लिखते समय विचारों में तार्किकता और सुगठित ढांचा होना आवश्यक है।
अमूर्त भावनाओं को सही शब्दों में पिरोना और उन्हें पाठक तक सटीक रूप में पहुँचाना अभ्यास की मांग करता है।
यह मानसिक श्रम और भाषाई कौशल मांगता है, जो हर किसी के लिए सहज नहीं होता।
Quick Tip: बोलना 'स्वाभाविक' है, जबकि लिखना 'अर्जित कौशल' है, जिसमें भाषा और विचार के संतुलन की आवश्यकता होती है।
सिनेमा, रंगमंच और रेडियो नाटक में क्या अंतर है ?
सिनेमा: यह एक दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम है जो पूर्व-रिकॉर्डेड और संपादित (Edited) होता है। इसमें 'रीटेक' की सुविधा होती है।
रंगमंच (Theater): यह एक 'जीवंत' (Live) माध्यम है जहाँ अभिनेता और दर्शक प्रत्यक्ष सामने होते हैं। इसमें गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।
रेडियो नाटक: यह केवल श्रव्य (Audio) माध्यम है।
इसमें दृश्य नहीं होते, सारा प्रभाव ध्वनि, संवाद और संगीत के माध्यम से श्रोता की कल्पनाशक्ति पर निर्भर करता है।
Quick Tip: मुख्य अंतर: सिनेमा = तकनीक/एडिटिंग, रंगमंच = जीवंतता, रेडियो = ध्वनि/कल्पना।
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय संवादों को किस प्रकार नाटकीय बनाया जा सकता है ?
संवादों को नाटकीय बनाने के लिए उन्हें छोटा, चुटीला और क्रियात्मक (Action-oriented) होना चाहिए।
लंबे भाषणों के बजाय ऐसे संवाद लिखे जाने चाहिए जो पात्रों के आपसी संघर्ष (Conflict) या मनोदशा को तुरंत प्रकट करें।
संवाद केवल सूचना देने वाले नहीं, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने वाले होने चाहिए।
उनमें अनकहे भावों (Subtext) की गूंज होनी चाहिए जो दर्शकों को बांधे रखे।
Quick Tip: नाटकीय संवाद का नियम: 'कम शब्दों में अधिक प्रभाव' और 'संघर्ष का प्रकटीकरण'।
समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में ‘संपादक के नाम पत्र’ का क्या महत्त्व है ?
'संपादक के नाम पत्र' स्तंभ समाचार पत्र में लोकतंत्र और जनमत का प्रतीक है।
यह आम पाठकों को अपनी राय, शिकायतें और सुझाव रखने का मंच प्रदान करता है।
इसके माध्यम से पाठक विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बहस करते हैं और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हैं।
यह अखबार को एकतरफा संचार के बजाय 'संवादात्मक' बनाता है और पाठकों के साथ जुड़ाव बढ़ाता है।
Quick Tip: यह पाठकों का अपना 'कोना' है, जो अखबार की विश्वसनीयता और जुड़ाव बढ़ाता है।
इंटरनेट पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
इंटरनेट पर समाचारों के संकलन, लेखन, प्रकाशन और आदान-प्रदान को इंटरनेट पत्रकारिता (Cyber Journalism) कहते हैं।
यह प्रिंट, रेडियो और टीवी का संगम (Convergence) है, जिसमें टेक्स्ट, चित्र, ध्वनि और वीडियो एक साथ उपलब्ध होते हैं।
इसकी सबसे बड़ी विशेषताएँ हैं—तात्कालिकता (Real-time updates), विश्वव्यापी पहुँच और इंटरएक्टिविटी (पाठक की तुरंत प्रतिक्रिया)।
यह समाचारों को दुनिया के किसी भी कोने में तुरंत पहुँचाने का सबसे तेज माध्यम है।
Quick Tip: कीवर्ड्स: 'कन्वर्जेंस' (Convergence) और '24x7 अपडेट्स'।
मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?
मुद्रित माध्यमों (Print Media) के लिए लेखन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
1. भाषा की शुद्धता: इसमें लिखित शब्द स्थायी होते हैं, इसलिए व्याकरण, वर्तनी और वाक्य विन्यास बिल्कुल सही होने चाहिए।
2. तारतम्यता (Flow): वाक्यों और पैराग्राफ में जुड़ाव होना चाहिए ताकि पाठक का प्रवाह न टूटे।
3. तथ्यात्मक सटीकता: प्रकाशित होने के बाद गलती सुधारी नहीं जा सकती, इसलिए तथ्यों की गहन जाँच अनिवार्य है।
4. संक्षिप्तता: सीमित जगह (Space) होने के कारण अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए और बात को सटीक तरीके से कहना चाहिए।
Quick Tip: प्रिंट मीडिया की प्रकृति 'स्थायी' और 'सीमित स्थान' वाली है, इसलिए इसमें 'शुद्धता' और 'संक्षिप्तता' सबसे महत्वपूर्ण हैं।
कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य कैसे विभाजित किए जाते हैं ?
कहानी को नाटक में बदलते समय दृश्यों का विभाजन मुख्य रूप से 'स्थान' (Space) और 'समय' (Time) के आधार पर किया जाता है।
1. स्थान परिवर्तन: यदि कहानी में घटना एक स्थान (जैसे घर) से दूसरे स्थान (जैसे पार्क) पर स्थानांतरित होती है, तो नाटक में वहाँ दृश्य बदलना पड़ता है।
2. समय परिवर्तन: यदि एक ही स्थान पर घटना घट रही है लेकिन समय बदल गया है (जैसे सुबह के बाद शाम), तो भी नया दृश्य शुरू होता है।
प्रत्येक दृश्य एक निश्चित समय और स्थान (Space-Time block) में घटित होने वाली एक इकाई है।
Quick Tip: सूत्र याद रखें: नया स्थान या नया समय = नया दृश्य।
मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ?
विशेष रिपोर्ट किसे कहते हैं ? यह कैसे तैयार की जाती है ?
विशेष रिपोर्ट (Special Report): सामान्य समाचारों से हटकर किसी विशिष्ट घटना, समस्या या मुद्दे की गहरी छानबीन (Investigation) और विश्लेषण करके लिखी गई रिपोर्ट को 'विशेष रिपोर्ट' कहते हैं।
तैयारी: इसे तैयार करने के लिए रिपोर्टर को तथ्यों को एकत्र करना पड़ता है।
इसके लिए सर्वेक्षण करना, संबंधित लोगों के साक्षात्कार लेना और पुराने आंकड़ों का विश्लेषण करना आवश्यक होता है।
इसकी भाषा सरल होती है और इसे प्रायः फीचर शैली या उल्टा पिरामिड शैली में लिखा जाता है।
Quick Tip: विशेष रिपोर्ट = तथ्य + विश्लेषण (Deep Dive)। यह 'ब्रेकिंग न्यूज़' से अलग 'व्याख्यात्मक' होती है।
‘कविता एक खेल है बच्चों के बहाने’ – पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि कविता और बच्चे में क्या समानता है ।
कवि कुंवर नारायण के अनुसार, कविता और बच्चे दोनों ही बंधनमुक्त और रचनात्मक होते हैं।
बच्चों के खेल में किसी प्रकार की सीमा (देश, काल, जाति) नहीं होती; वे अपने खेल से सभी घरों को एक कर देते हैं।
उसी प्रकार कविता भी शब्दों का एक खेल है जो सीमाओं से परे है।
कविता और बच्चे दोनों में ही अपार संभावनाएँ और ऊर्जा होती है जो आत्मीयता से सबको जोड़ती है।
दोनों का मूल स्वभाव 'सृजन' और 'निर्दोषता' है।
Quick Tip: समानता का आधार: 'निर्दोषिता', 'सृजनात्मकता' और 'सीमाहीनता'।
‘पतंग’ कविता के आधार पर पतंग की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए ।
'पतंग' कविता में आलोक धन्वा ने पतंग को बाल-सुलभ इच्छाओं, उमंगों और उच्च आकांक्षाओं का प्रतीक माना है।
आसमान में उड़ती हुई रंग-बिरंगी पतंगें बच्चों के सपनों की ऊंचाइयों को दर्शाती हैं।
पतंग की नाजुकता बच्चों की कोमलता का प्रतीक है।
उसकी ऊँची उड़ान बच्चों के असीम उत्साह, साहस और कल्पना की उड़ान को व्यक्त करती है।
यह उस 'रंगीन दुनिया' का बिंब है जहाँ बच्चे अपनी धुन में खोए रहते हैं।
Quick Tip: पतंग = सपने/उमंगें। धागा = संयम/जुड़ाव।
‘पतंग’ कविता में ‘बच्चों का सूरज के सामने आने’ से क्या अभिप्राय है ?
'सूरज के सामने आने' का अभिप्राय है—चुनौतियों का डटकर सामना करना और निडर होना।
जब बच्चे छतों के खतरनाक किनारों से गिरकर बच जाते हैं, तो उनका भय समाप्त हो जाता है।
वे अब और अधिक आत्मविश्वास और साहस के साथ 'सुनहले सूरज' (तेज और प्रकाश का प्रतीक) का सामना करते हैं।
यह उनकी अदम्य जिजीविषा और विजय-भाव को दर्शाता है।
वे सूरज की तपिश और तेज से घबराते नहीं, बल्कि उसका स्वागत करते हैं।
Quick Tip: सूरज यहाँ केवल प्रकाश नहीं, बल्कि 'जीवन की चुनौतियों' और 'ऊर्जा' का प्रतीक है।
कवितावली के छंदों के आधार पर तत्कालीन आर्थिक विषमताओं का वर्णन करते हुए लिखिए कि वर्तमान समय में क्या स्थिति है ।
तुलसीदास जी ने 'कवितावली' में अपने समय की भयंकर गरीबी, बेरोजगारी और अकाल का यथार्थ चित्रण किया है।
उस समय किसानों के पास खेती, व्यापारियों के पास व्यापार और भिखारियों के लिए भीख तक नहीं थी ("किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी...").
पेट की आग बुझाने के लिए लोग अधार्मिक कार्य करने और अपनी संतानों को बेचने के लिए विवश थे।
वर्तमान स्थिति: आज भी भारत में आर्थिक विषमता और बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यद्यपि सरकारी योजनाएँ हैं, फिर भी श्रमिक और निम्न वर्ग आज भी आजीविका के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है, जो तुलसी के समय की पीड़ा से मेल खाता है।
Quick Tip: तुलना का आधार 'पेट की आग' (Hunger) और 'रोजगार का अभाव' (Unemployment) है।
‘छोटा मेरा खेत’ कविता खेतों के रूपक में बँधी कवि-कर्म के रूपक को व्यक्त करने वाली कविता है ।’ सिद्ध कीजिए ।
कवि उमाशंकर जोशी ने इस कविता में कृषि कर्म के माध्यम से काव्य-सृजन की प्रक्रिया को समझाया है, जो पूर्णतः सटीक है:
1. कागज का पन्ना = चौकोना खेत: जिस पर कवि अपने विचारों की खेती करता है।
2. विचार/अनुभूति = बीज: जो मन में अचानक आता है और रोपा जाता है।
3. कल्पना = रसायन/खाद: जो विचार को विकसित करती है।
4. शब्द = अंकुर: जो अभिव्यक्ति का रूप लेते हैं।
5. कविता/रस = फसल: जो अनंत काल तक पाठकों को आनंद देती है।
इस प्रकार, खेती और कविता का यह रूपक अत्यंत सार्थक बन पड़ा है।
Quick Tip: यह 'सांगरूपक' (Extended Metaphor) का बेहतरीन उदाहरण है।
‘जग-जीवन को भार’ की तरह लेकर फिरने वाला कवि उससे निरपेक्ष क्यों नहीं रह पाता ? ‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
कवि हरिवंशराय बच्चन स्वीकार करते हैं कि सांसारिक जिम्मेदारियाँ और समस्याएँ एक 'भार' (बोझ) के समान हैं।
फिर भी, वे इस दुनिया से पूरी तरह कटकर (निरपेक्ष) नहीं रह सकते क्योंकि उनका अस्तित्व और पहचान इसी समाज से जुड़ी है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है; उसे अपने सुख-दुख और प्रेम को बांटने के लिए दुनिया की आवश्यकता होती है।
कवि कहते हैं, "फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ"।
इसलिए उनका संसार से रिश्ता 'प्रीति-कलह' (Love-Hate) का है; वे इसे छोड़ नहीं सकते, भले ही यह कष्टकारी हो।
Quick Tip: 'निरपेक्ष' न होने का कारण 'सामाजिकता' और 'आपसी जुड़ाव' है।
कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए :
कवि ने 'छोटा मेरा खेत' कविता में खेती के रूपकों का प्रयोग किया है:
1. छोटा मेरा खेत: कवि ने 'कागज के पन्ने' (i) को अपना चौकोना खेत माना है, जिस पर वह रचना करता है।
2. अंकुर फूटना: जब विचार और कल्पना मिलती है, तो 'भावनाओं को शब्द मिलते हैं' (iii), जिसे अंकुर फूटना कहा गया है।
3. पल्लवित पुष्पित होना: जब रचना पूर्ण हो जाती है, तो वह एक 'साहित्यिक कृति का रूप धारण करती है' (ii), जो फूलों से लदी फसल समान है।
अतः सही मिलान: 1-(i), 2-(iii), 3-(ii), जो विकल्प (C) में है।
Quick Tip: रूपक (Metaphor) को डिकोड करें: खेत = कागज, अंकुर = शब्द, फसल = कृति।
कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है :
कविता में 'बीज' उस प्रारंभिक क्षण या विचार (Idea) का प्रतीक है जो कवि के मन में अचानक आता है।
यही विचार अभिव्यक्ति का माध्यम पाकर कविता बनता है।
'कल्पना' तो वह रसायन है जो बीज को गलाता है, और 'शब्द' अंकुर हैं।
अतः मूल बीज 'विचार और अभिव्यक्ति' का ही होता है।
इसी से पूरी रचना का विस्तार होता है।
Quick Tip: सृजन की शुरुआत 'विचार' (Thought/Idea) से होती है, वही बीज है।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।
कारण : असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।
कवि ने साहित्य के रस (अमृत धारा) को 'अक्षय पात्र' कहा है।
कथन सत्य है क्योंकि साहित्य समय की सीमाओं को पार कर अमर (कालजयी) हो जाता है।
कारण भी सत्य है क्योंकि इसे पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ पढ़ती हैं ("लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती"), फिर भी इसका आनंद बना रहता है।
चूँकि आनंद कभी खत्म नहीं होता (कारण), इसीलिए यह कालजयी है (कथन)।
अतः कारण, कथन की सही पुष्टि करता है।
Quick Tip: साहित्य का रस भौतिक रस (जैसे गन्ने का रस) से अलग है; यह बांटने से बढ़ता है, कम नहीं होता।
‘झूमने लगे फल’ का आशय है :
काव्यांश में 'फल' का लाक्षणिक अर्थ कविता का आनंद (रस) या कृति की पूर्णता है।
जब खेती पक जाती है तो फल लद जाते हैं और झूमते हैं।
उसी प्रकार, जब कवि का सृजन-कर्म (परिश्रम) पूरा हो जाता है, तो उससे प्राप्त होने वाला आनंद पाठकों को मिलने लगता है।
अतः यह 'परिश्रम के प्रतिफल' का सूचक है।
Quick Tip: खेती में फल = अंतिम उत्पाद। काव्य में फल = रसास्वादन/सफलता।
‘बीज गल गया निःशेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है ?
'बीज गल गया निःशेष' का दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थ है 'अहंकार का विसर्जन'।
जिस तरह बीज को पेड़ बनने के लिए अपना अस्तित्व मिट्टी में मिटाना पड़ता है, उसी तरह रचनाकार को महान कृति रचने के लिए अपने 'मैं' (Ego) को मिटाना पड़ता है।
जब तक रचनाकार अपने पूर्वाग्रहों और अहंकार को गलाता नहीं, तब तक व्यापक और महान साहित्य का सृजन नहीं हो सकता।
अतः यह आत्म-त्याग और समर्पण की ओर संकेत करता है।
Quick Tip: विनाश में ही निर्माण छिपा है। 'गलना' यहाँ 'समर्पण' (Surrender) का प्रतीक है।
‘भक्तिन’ पाठ परिस्थितिवश अक्खड़ बनी, पर महादेवी जी के आत्मीयता से परिपूर्ण स्त्री-अस्मिता के संघर्ष की कहानी है।' इस कथन की पुष्टि कीजिए।
‘भक्तिन’ (लक्ष्मीन) का जीवन दुर्भाग्य और संघर्षों की एक लंबी गाथा थी।
बचपन में सौतेली माँ का दुर्व्यवहार, कम उम्र में विवाह, और युवावस्था में विधवा हो जाने पर ससुराल वालों द्वारा संपत्ति हड़पने के षड्यंत्रों ने उसे कठोर और अक्खड़ बना दिया था।
यह उसका अक्खड़पन नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और स्वाभिमान को बचाने के लिए पहनी गई एक ढाल थी।
महादेवी जी के संपर्क में आने पर, भक्तिन का सेवा-भाव और समर्पण यह सिद्ध करता है कि वह भीतर से अत्यंत स्नेहपूर्ण थी।
उसने हार नहीं मानी, बल्कि परिस्थितियों से लोहा लिया, जो उसकी 'स्त्री-अस्मिता' के संघर्ष को दर्शाता है।
अतः यह कहानी केवल एक सेविका की नहीं, बल्कि एक स्वाभिमानी स्त्री के संघर्ष और जिजीविषा की है।
Quick Tip: Focus on the duality of Bhaktin's character: 'Akkhad' (stubborn) due to harsh society vs 'Atmiya' (affectionate) towards the author.
‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में जीजी का कोई पूजा-विधान, त्योहार अनुष्ठान लेखक के बिना पूरा नहीं होता था, क्यों ? आपके घर में भी क्या यही स्थिति है और आप इस संदर्भ में क्या करते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
जीजी लेखक (धर्मवीर भारती) को अपने बेटे से भी अधिक स्नेह करती थीं और उन्हें 'ऋषि-मुनि' जैसा पावन मानती थीं।
उनका विश्वास था कि यदि अनुष्ठान या पुण्य कार्य लेखक के हाथों से होगा, तो उसका पूरा फल लेखक को ही प्राप्त होगा।
इसीलिए, चाहे वह इंदर सेना पर पानी फेंकना हो या जन्माष्टमी/गोवर्धन पूजा, वह हर रस्म लेखक से ही करवाती थीं।
(व्यक्तिगत प्रतिक्रिया): हाँ, भारतीय परिवारों में यह आम बात है। घर के बुजुर्ग अक्सर बच्चों को पूजा-पाठ में शामिल करते हैं ताकि वे अपनी परंपराओं से जुड़ें।
इस संदर्भ में, मैं उनके विश्वास का सम्मान करता हूँ। भले ही मैं विज्ञान में विश्वास रखता हूँ, पर उनके स्नेह और संतोष के लिए मैं उन रस्मों में सहभागी बन जाता हूँ, क्योंकि रिश्तों में तर्क से ज़्यादा भावनाएँ महत्त्वपूर्ण होती हैं।
Quick Tip: The core emotion here is 'Vatsalya' (motherly love). The scientific view of the author bows down to the emotional logic of Jiji.
‘शिरीष के फूल’ पाठ के आधार पर लिखिए कि ‘पुराने की अधिकार-लिप्सा का समय रहते सावधान होने’ का प्रसंग पाठ में किस संदर्भ में आया है। इसके माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है ?
लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के वृक्ष पर लटके पुराने, सूखे फलों (खड़खड़ाते हुए) का उदाहरण दिया है जो तब तक अपना स्थान नहीं छोड़ते जब तक नए फल उन्हें धक्का देकर गिरा न दें।
इस प्रसंग के माध्यम से लेखक ने समाज और राजनीति में जमे उन नेताओं और बुजुर्गों पर व्यंग्य किया है जो सत्ता और पद (कुर्सी) के मोह में फँसे रहते हैं।
लेखक का संदेश है कि 'अधिकार-लिप्सा' (सत्ता का लालच) व्यर्थ है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
समय रहते सम्मानपूर्वक अपना पद नई पीढ़ी को सौंप देना चाहिए। यदि वे स्वेच्छा से नहीं हटते, तो 'महाकाल' (समय/मृत्यु) उन्हें अपमानजनक तरीके से हटा देता है।
Quick Tip: Link the biological process (shedding leaves/fruits) to the socio-political lesson (generational shift and letting go of power).
बाज़ार में सद्भाव का ह्रास कब दिखाई देता है ?
गद्यांश की पंक्ति स्पष्ट कहती है: "इस सद्भाव के ह्रास पर आदमी आपस में भाई-भाई और सुहृद... नहीं जाते हैं और आपस में कोरे ग्राहक और बेचक की तरह व्यवहार करते हैं।"
इसका अर्थ है कि जब मानवीय रिश्ते खत्म हो जाते हैं और केवल व्यापारिक संबंध (खरीदने-बेचने का) रह जाता है, तब सद्भाव का ह्रास (कमी) दिखाई देता है।
विकल्प (B) गद्यांश के इस विचार को सही-सही प्रस्तुत करता है।
Quick Tip: Identify the direct correlation in the text: Loss of Goodwill = Treating each other merely as 'Buyer and Seller'.
बाज़ार में सद्भाव के ह्रास का क्या दुष्परिणाम निकलता है ?
गद्यांश के अनुसार, जब सद्भाव घटता है, तो लोग एक-दूसरे को "ठगने की घात" में रहते हैं।
लेखक आगे लिखता है, "लोगों में आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता; बल्कि शोषण होने लगता है।"
अतः सद्भाव की कमी का सीधा और गंभीर परिणाम 'शोषण' (Exploitation) है।
Quick Tip: Trace the chain of events in the passage: Less Goodwill \(\rightarrow\) Deceit \(\rightarrow\) Exploitation (Shoshan).
‘ऐसे बाज़ार मानवता के लिए विडंबना हैं’ – पंक्ति में किस बाज़ार की ओर संकेत किया गया है ?
गद्यांश में 'विडंबना' उन बाज़ारों के लिए कहा गया है जहाँ "कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है।"
बाज़ार का मूल उद्देश्य आवश्यकताओं की पूर्ति है, लेकिन जब बाज़ार इसका उल्टा करके "आवश्यकताओं का शोषण" करने लगे, तो वह मानवता के लिए अभिशाप या विडंबना बन जाता है।
अतः विकल्प (A) सही है क्योंकि यह शोषण के पहलू को उजागर करता है।
Quick Tip: The phrase "Manavata ke liye vidambana" is explicitly linked to markets that prioritize profit/exploitation over service/needs.
आत्मीयजन और पड़ोसी भी ग्राहक के रूप में दिखाई देना, किस प्रवृत्ति का सूचक है ?
रिश्तों में भी लाभ-हानि देखना और हर व्यक्ति को केवल 'ग्राहक' या 'विक्रेता' की नज़र से देखना 'उपभोक्तावादी संस्कृति' (Consumerism) का लक्षण है।
उपभोक्तावाद में मानवीय मूल्यों की जगह वस्तुओं और उपभोग को प्रधानता दी जाती है।
इसलिए, यह प्रवृत्ति 'उपभोक्तावादी' (B) है।
Quick Tip: When relationships are commodified, the ideology is Consumerism (Upbhoktavad).
गद्यांश में प्रयुक्त ‘मायावी शास्त्र’ का अभिप्राय है :
गद्यांश के अंत में लिखा है: "वह मायावी शास्त्र है, वह अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।"
इससे पहले बताया गया है कि ऐसा बाज़ार "कपट को बढ़ाता है"।
अतः 'मायावी' का यहाँ अर्थ जादू या कल्पना नहीं, बल्कि 'छल', 'धोखा' और 'अनीति' है।
इसलिए विकल्प (D) "छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र" सही उत्तर है।
Quick Tip: Contextual Vocabulary: Here 'Mayaavi' is used negatively to mean deceptive/unethical (Aniti), not magical.
‘जीवन में प्रायः सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है।’ कथन का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि महादेवी जी ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है ?
महादेवी वर्मा ने यह कथन अपनी सेविका 'भक्तिन' के संदर्भ में कहा है, जिसका असली नाम 'लक्ष्मीन' (लक्ष्मी) था।
लक्ष्मी का अर्थ होता है 'धन और समृद्धि की देवी', लेकिन भक्तिन का वास्तविक जीवन घोर दरिद्रता और अभावों से भरा था।
उसके नाम और उसकी स्थिति में ज़मीन-आसमान का अंतर था।
इसी विरोधाभास को देखकर लेखिका ने टिप्पणी की कि दुनिया में अक्सर लोगों के नाम उनके गुणों या भाग्य से मेल नहीं खाते (जैसे 'अमर' नाम वाला मर जाता है)। हमें अक्सर नाम के अर्थ के विपरीत जीवन जीना पड़ता है।
Quick Tip: Explain the irony: A woman named 'Goddess of Wealth' living in extreme poverty. This irony is the 'Virodhabhas'.
‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में पानी के लिए गुहार लगाते बच्चों की टोली में ‘गगरी फूटी बैल पियासा’ की बात क्यों की जा रही है ? स्पष्ट कीजिए।
'गगरी फूटी बैल पियासा' लोकगीत की एक पंक्ति है जिसका गहरा प्रतीकात्मक अर्थ है।
शाब्दिक अर्थ में, बच्चे गा रहे हैं कि बादल आए, वर्षा की उम्मीद जगी, लेकिन गगरी (बर्तन) फूटी होने के कारण पानी नहीं रुका और बैल (जो खेती का आधार है) प्यासा रह गया।
लेखक धर्मवीर भारती के अनुसार, यह देश की भ्रष्ट व्यवस्था पर व्यंग्य है।
सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं (वर्षा) के रूप में पैसा भेजा जाता है, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ("फूटी गगरी") के कारण वह रिस जाता है।
परिणामस्वरूप, आम जनता ("प्यासा बैल") तक लाभ नहीं पहुँचता और वे अभाव में ही जीते रहते हैं।
Quick Tip: Decode the symbolism: Rain = Funds/Resources, Broken Pot = Corruption/Leakage, Thirsty Ox = Common Man/Beneficiary.
‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि जाति आधारित श्रम विभाजन का देश के आर्थिक पहलू पर क्या प्रभाव पड़ता है ।
डॉ. अंबेडकर मानते हैं कि जाति प्रथा आर्थिक विकास के लिए हानिकारक है।
जाति प्रथा में श्रम का विभाजन व्यक्ति की 'रुचि' या 'क्षमता' के आधार पर न होकर 'जन्म' के आधार पर होता है।
इससे व्यक्ति को मजबूरी में वह काम करना पड़ता है जिसमें उसका मन नहीं लगता।
जब काम में दिल और दिमाग नहीं लगता, तो व्यक्ति 'टालू' काम करता है और उसकी कार्यकुशलता (Efficiency) कम हो जाती है।
यह स्थिति समाज में बेरोजगारी और कम उत्पादकता को जन्म देती है, जो अंततः देश की आर्थिक प्रगति को बाधित करती है।
Quick Tip: Keywords for marks: 'Aruchi' (Lack of interest), 'Vivashata' (Compulsion), 'Akaryakushalata' (Inefficiency), 'Arthik Hani' (Economic loss).
‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी में भूषण द्वारा ‘बब्बा, आप तो हद करते हैं, जो बात आप जानते ही नहीं, आपसे क्यों पूछें’ कथन किस संदर्भ में कहा गया और क्यों ? इस कथन के संदर्भ में भूषण के चरित्र की समीक्षा कीजिए।
संदर्भ: यह कथन भूषण ने अपने पिता यशोधर बाबू से तब कहा जब उन्होंने किसी आधुनिक वस्तु (संभवतः ड्रेसिंग गाउन या पार्टी के आयोजन) के बारे में अनभिज्ञता जताई या उस पर सवाल उठाया।
क्यों: भूषण को लगता है कि उसके पिता दकियानूसी ख्यालात के हैं और आधुनिक युग के तौर-तरीकों से अनजान हैं। उसे लगता है कि उनसे राय लेना समय की बर्बादी है।
चरित्र समीक्षा: यह कथन भूषण की संवेदनहीनता और अहंकार को दर्शाता है।
वह पढ़ा-लिखा और कमाऊ अवश्य है, लेकिन उसमें बड़ों के प्रति सम्मान (लहज़ा) नहीं है।
वह अपने पिता को समझने या उन्हें साथ लेकर चलने के बजाय उन्हें उपेक्षित करता है। यह दो पीढ़ियों के बीच की 'संवादहीनता' (Communication Gap) और मूल्यों के टकराव का प्रतीक है।
Quick Tip: Highlight the 'Generation Gap'. Bhushan is the symbol of modern insensitivity, while Yashodhar Babu represents neglected tradition.
‘जूझ’ कहानी में छात्रों को अनुशासन में रखने के लिए अध्यापकों द्वारा किए जाने वाले कठोर व्यवहार का उल्लेख किया गया है। आपकी दृष्टि में क्या छात्रों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित है ? वर्तमान समय में इसमें क्या परिवर्तन आया है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
'जूझ' कहानी में मंत्री नामक अध्यापक छड़ी का प्रयोग करते थे, जिससे छात्रों में दहशत रहती थी और वे पढ़ाई करते थे।
औचित्य: मेरी दृष्टि में ऐसा व्यवहार सर्वथा अनुचित है। भय से अनुशासन तो लाया जा सकता है, लेकिन शिक्षा के प्रति प्रेम नहीं। शारीरिक दंड छात्र के आत्मविश्वास को तोड़ देता है और उसके मानसिक विकास को रोकता है।
वर्तमान परिवर्तन: आज के दौर में शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदल गई है। 'शारीरिक दंड' (Corporal Punishment) को कानूनन अपराध माना जाता है।
अब शिक्षक 'तानाशाह' नहीं, बल्कि 'सुगमकर्ता' (Facilitator) और मित्र की भूमिका में हैं।
आज मनोविज्ञान पर आधारित शिक्षण विधियों का प्रयोग होता है जहाँ प्रेम, प्रोत्साहन और संवाद से बच्चों को सिखाया जाता है, जो एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य बदलाव है।
Quick Tip: Structure: Context (Story) \(\rightarrow\) Your Opinion (Negative on punishment) \(\rightarrow\) Modern Scenario (Child-centric/Legal ban).
‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में बौद्ध स्तूप को नागर भारत का सबसे पुराना लैंडस्केप कहा गया है, इसके सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
'अतीत में दबे पाँव' पाठ में लेखक ओम थानवी ने मोहनजोदड़ो के 'गढ़' (Citadel) वाले हिस्से पर स्थित बौद्ध स्तूप को भारत का सबसे पुराना 'लैंडस्केप' कहा है।
यह स्तूप मोहनजोदड़ो सभ्यता (5000 वर्ष पुरानी) के खंडहरों के ऊपर, बहुत बाद में (कुषाण काल में, लगभग 25 सदी पहले) बनाया गया था।
सौंदर्य: यह स्तूप शहर के सबसे ऊँचे चबूतरे पर स्थित है, जहाँ से पूरा मोहनजोदड़ो दिखता है।
धूप या साँझ की रोशनी में इसकी पक्की ईंटें और गोलाकार बनावट एक अद्भुत दृश्य उपस्थित करते हैं।
यह अकेला खड़ा स्तूप एक प्रहरी जैसा लगता है जो दर्शकों को इतिहास के रोमांस और गंभीरता से भर देता है। यह पुरातत्व और पर्यटन दोनों की दृष्टि से अद्वितीय है।
Quick Tip: Essential Details: Mohenjodaro, High Mound (Garh), Buddhist Stupa (2nd Century AD), View of the civilization ruins.
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.