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Dipanwita Pramanik

Content Writer | Updated On - Sep 19, 2025

CBSE Class 12 Hindi Elective exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Elective Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 PDF (Set 1 - 29/1/1) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solution (Set 1 - 29/1/1) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solutions Set 1 29 1 1


Question 1:

वर्ष 2024 का ‘पृथ्वी दिवस’ केंद्रित है –

  • (A) पर्यावरण
  • (B) प्लास्टिक
  • (C) जलवायु
  • (D) प्रदूषण
Correct Answer: (B) प्लास्टिक
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हर वर्ष 22 अप्रैल को 'पृथ्वी दिवस' पर्यावरण जागरूकता का एक वैश्विक अवसर होता है। इसकी शुरुआत 1970 में हुई थी और तब से यह दिन प्रकृति संरक्षण और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।


वर्ष 2024 में पृथ्वी दिवस की थीम थी “Planet vs. Plastics” — जिसका तात्पर्य है ‘पृथ्वी बनाम प्लास्टिक’। यह थीम इस बात पर केंद्रित थी कि वर्ष 2040 तक प्लास्टिक उत्पादन को 60% तक घटाया जाए।


इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। माइक्रोप्लास्टिक जल, भोजन और यहां तक कि शरीर में प्रवेश कर अनेक बीमारियों का कारण बन सकता है।


इसलिए, वर्ष 2024 का पृथ्वी दिवस प्लास्टिक उन्मूलन और जागरूकता के लिए समर्पित रहा। Quick Tip: किसी विशेष दिवस की थीम को समझने के लिए उसके उद्देश्य, वैश्विक संदर्भ और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखें।


Question 2:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘सभी लोग जाग जाएँ’ का आशय है –

  • (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ।
  • (B) समय पर अपने कर्तव्य की पूर्ति करें।
  • (C) अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करें।
  • (D) पारंपरिक अंधविश्वासों से मुक्त हो जाएँ।
Correct Answer: (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ।
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गद्यांश में प्रयुक्त वाक्य ‘‘सभी लोग जाग जाएँ’’ केवल शाब्दिक जागरण नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक है। इसका आशय है कि आज के गंभीर पारिस्थितिकी संकटों — जैसे जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्लास्टिक संकट — के प्रति समाज को सजग होना चाहिए।


यह वाक्य एक प्रकार का सामूहिक आह्वान है कि प्रत्येक व्यक्ति पृथ्वी की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अपनी भूमिका निभाए।


इसलिए यह स्पष्ट है कि इसका अर्थ है: (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ। Quick Tip: 'जागना' जैसे प्रतीकात्मक शब्दों का विश्लेषण करते समय केवल उनके सतही अर्थ पर नहीं, उनके गहरे भावार्थ पर ध्यान दें।


Question 3:

पृथ्वी की माँ से तुलना का आधार है –

  • (A) पालन-पोषण का गुण
  • (B) रक्षा करने का गुण
  • (C) जन्म देने का गुण
  • (D) सहन करने का गुण
Correct Answer: (A) पालन-पोषण का गुण
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पृथ्वी को ‘माँ’ कहे जाने का मुख्य आधार उसका पालन-पोषण का गुण है। जिस प्रकार माँ अपने बच्चों को बिना किसी भेदभाव के आहार, संरक्षण और स्नेह प्रदान करती है, उसी तरह पृथ्वी भी सभी जीवों को जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएँ — जैसे जल, अन्न, वायु, खनिज, और ऊर्जा — प्रदान करती है।

यह तुलना इसलिए सटीक है क्योंकि पृथ्वी सभी प्राणियों का पोषण करती है, उनका अस्तित्व बनाए रखती है और उन्हें जीवन जीने का आधार देती है।


इसलिए विकल्प (A) — पालन-पोषण का गुण — सबसे उपयुक्त उत्तर है। Quick Tip: जब किसी उपमा का अर्थ पूछा जाए, तो उस उपमा में निहित क्रिया या गुण को पहचानें — जैसे ‘माँ’ शब्द में प्रमुख गुण है — पालन-पोषण।


Question 4:

प्रकृति के प्रति गांधीजी का क्या दृष्टिकोण था ?

Correct Answer:
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गांधीजी का प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण संवेदनशील, संतुलित और सह-अस्तित्व आधारित था। वे प्रकृति को केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि एक जीवंत सत्ता मानते थे।

उनके विचार में मनुष्य को प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए, जितनी उसकी आवश्यकताएँ हों — न कि लालचवश। उन्होंने ‘ट्रस्टीशिप’ (Trusteeship) का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार मनुष्य को पृथ्वी के संसाधनों का केवल प्रबंधक (caretaker) बनना चाहिए, उपभोक्ता नहीं।

उनकी दृष्टि में अगर प्रकृति का दोहन बिना विवेक के किया गया, तो न केवल पर्यावरण नष्ट होगा बल्कि नैतिक पतन भी होगा।
Quick Tip: गांधीजी के पर्यावरणीय दृष्टिकोण को उनके ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ और ‘सह-अस्तित्व’ के सिद्धांत से जोड़कर समझना सहायक होता है।


Question 5:

बढ़ती हुई आबादी के कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं ?

Correct Answer:
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बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण अनेक गंभीर दुष्परिणाम उत्पन्न हो रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:


प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन — जल, भूमि, वन, खनिज आदि पर असहनीय दबाव।
आवास, भोजन और रोजगार की कमी — विशेषकर शहरी क्षेत्रों में।
वनों की कटाई और जैव विविधता में गिरावट — जिससे पारिस्थितिकी असंतुलित हो रही है।
प्रदूषण में वृद्धि — वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण में तीव्र विस्तार।
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर बोझ — जिससे इनका स्तर गिरता जा रहा है।


इन सब दुष्परिणामों का सीधा असर समाज की संरचना, आर्थिक असमानता और पर्यावरणीय स्थायित्व पर पड़ता है। Quick Tip: जनसंख्या से जुड़ी समस्याओं को लिखते समय उन्हें सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक — तीनों दृष्टिकोणों से जरूर जोड़ें।


Question 6:

गैर-नवीकरणीय ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और पुनः निर्मित नहीं हो सकते, जैसे — कोयला, पेट्रोलियम, डीजल, प्राकृतिक गैस।

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जो प्रकृति द्वारा निरंतर उपलब्ध होते हैं और पुनः उपयोग योग्य होते हैं, जैसे — सूर्य की ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा।

मुख्य अंतर: गैर-नवीकरणीय ऊर्जा पर्यावरण को अधिक प्रदूषित करती है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा स्वच्छ, हरित और दीर्घकालिक होती है।
Quick Tip: हर उत्तर में उदाहरण ज़रूर दें — जैसे "सौर ऊर्जा" या "कोयला" — यह उत्तर को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाता है।


Question 7:

प्रकृति की रक्षा प्रत्येक मनुष्य के लिए क्यों आवश्यक है ?

Correct Answer:
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प्रकृति ही मानव जीवन का मूल आधार है। वायु, जल, भोजन, औषधियाँ, ऊर्जा — सब प्रकृति से प्राप्त होते हैं। यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, तो मानव जीवन संकट में पड़ जाता है।

प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी — ये सभी समस्याएं तब उत्पन्न होती हैं जब मनुष्य प्रकृति का दोहन करता है।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह वृक्ष लगाए, जल बचाए, प्लास्टिक का उपयोग कम करे और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ाए।

केवल सरकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।
Quick Tip: पर्यावरण विषयों पर उत्तर लिखते समय "व्यक्तिगत जिम्मेदारी" को ज़रूर शामिल करें — यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है।


Question 8:

‘धँसती ही जाती पृथ्वी में बड़ों-बड़ों की हस्ती’ — पंक्ति का आशय है —

  • (A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है।
  • (B) पृथ्वी में बड़े-बड़े समा जाते हैं।
  • (C) शक्तिशालियों का जीवन क्षणभंगुर है।
  • (D) शक्तिशालियों का अधःपतन निश्चित है।
Correct Answer: (A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है।
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इस पंक्ति में नश्वरता की भावना को अत्यंत गहन रूप से प्रकट किया गया है।

यह बताता है कि चाहे कोई व्यक्ति कितना ही महान, शक्तिशाली या प्रभावशाली क्यों न हो,

अंततः उसका अस्तित्व भी इसी पृथ्वी में समा जाता है — अर्थात् नाश को प्राप्त हो जाता है।

‘बड़ों-बड़ों की हस्ती’ का ‘पृथ्वी में धँस जाना’ इस सच्चाई को उजागर करता है

कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है।

यह जीवन की क्षणभंगुरता और विनम्रता के भाव को समझाने वाली पंक्ति है।
Quick Tip: कविता में प्रयुक्त प्रतीकों को समझने के लिए उनके पीछे के दर्शन को पकड़ने का अभ्यास करें — इससे अर्थ ग्रहण और उत्तर निर्धारण में आसानी होती है।


Question 9:

शक्तिहीन का क्या हश्र होता है ?

  • (A) थक-हार कर बैठ जाता है।
  • (B) लोग उनको पनपने नहीं देते।
  • (C) लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते।
  • (D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है।
Correct Answer: (D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है।
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यह प्रश्न जीवन की कठोर सच्चाई को उजागर करता है।

जो व्यक्ति शक्तिहीन होता है, वह संघर्षों का सामना करने में अक्षम होता है।

उसकी न तो कोई प्रभावशाली उपस्थिति होती है और न ही समाज में टिके रहने की क्षमता।

इसलिए, अंततः वह समाज और इतिहास दोनों में विलीन हो जाता है — अर्थात उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

यह विकल्प ‘अस्तित्व नष्ट हो जाता है’ न केवल सबसे उपयुक्त है, बल्कि यह विषय की गंभीरता को भी दर्शाता है।
Quick Tip: जब विकल्पों में 'अंतिम परिणाम' से जुड़ा कोई प्रश्न हो, तो सोचें कि सबसे गहन और पूर्ण प्रभाव क्या होगा — उत्तर उसी आधार पर तय करें।


Question 10:

कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाले कथन है/हैं —



(I) संसार में जीने के लिए शक्तिशाली बनना पड़ेगा।

(II) हार मानने वालों के लिए मातृभूमि मरण-भूमि के समान है।

(III) यहाँ सब एक-दूसरे के विरोधी हैं।

  • (A) केवल (I)
  • (B) केवल (II)
  • (C) (I) और (II) दोनों ही
  • (D) (I) और (III) दोनों ही
Correct Answer: (C) (I) और (II) दोनों ही
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इस प्रश्न में कविता के केंद्रीय भाव को समझने की आवश्यकता है।

कविता का मूल संदेश यह है कि जीवन संघर्षमय है और केवल वही व्यक्ति इसमें टिक सकता है जो शक्तिशाली है।

(I) कथन इस विचार को स्पष्ट करता है कि संसार में जीवित रहने के लिए शक्ति आवश्यक है।

(II) कथन भी कविता की भावनात्मक तीव्रता को दर्शाता है — हार मानने वालों को मातृभूमि तक त्याग देती है, जो कविता में प्रयुक्त भावनात्मक अभिव्यक्ति है।

(III) कथन कविता की भावना से मेल नहीं खाता क्योंकि कविता में सामूहिक विरोध का नहीं बल्कि व्यक्ति की आंतरिक शक्ति और संघर्ष की बात है।

इसलिए सही उत्तर है: (I) और (II) दोनों ही।
Quick Tip: केंद्रीय भाव समझते समय पूरे काव्यांश के स्वर और उद्देश्य को ध्यान में रखें — केवल शब्दों से नहीं, भावना से समझें।


Question 11:

अपने को विद्रोही कौन और क्यों मानते हैं ?

Correct Answer:
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इस कविता में कवि स्वयं को विद्रोही मानता है।

वह इसलिए कि वह समाज की रूढ़िवादी, पलायनवादी और निष्क्रिय सोच का विरोध करता है।

कवि शक्ति को धर्म और निर्बलता को पाप मानता है, जो उसकी विद्रोही भावना को स्पष्ट करता है।

वह जीवन की कठिनाइयों से भागने के स्थान पर उनका सामना करने और शक्तिशाली बनने को प्रेरित करता है।

कवि समाज में व्याप्त हीन भावना, आत्म-निराशा और आत्म-विस्मृति के विरुद्ध विद्रोह करता है।

उसका यह विद्रोह केवल बाह्य व्यवस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि आत्मबल के जागरण का आह्वान है।

वह कहता है कि जो अपनी क्षमताओं को नहीं पहचानते, वे स्वयं से ही धोखा करते हैं — और इसलिए वह अपने को सच्चा विद्रोही मानता है।
Quick Tip: जब कोई कवि या लेखक स्वयं को ‘विद्रोही’ कहता है, तो उसका अर्थ केवल विरोध नहीं होता — उसमें परिवर्तन की चेतना छिपी होती है।


Question 12:

इस काव्यांश के माध्यम से क्या सीख दी गई है ?

Correct Answer:
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इस काव्यांश से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में अस्तित्व बनाए रखने के लिए शक्ति, साहस और आत्मबल आवश्यक हैं।

यह कविता जीवन को एक संघर्ष मानती है और बताती है कि केवल वे ही व्यक्ति टिकते हैं जो अपने सामर्थ्य का विकास करते हैं।

जो लोग संघर्ष से डरते हैं, जो हार मान लेते हैं — वे मिट जाते हैं, उनका कोई मूल्य नहीं रह जाता।

कवि हमें बताता है कि शक्तिहीन व्यक्ति का हश्र अस्तित्वविहीनता होता है और शक्तिशाली बनने से ही समाज में प्रतिष्ठा मिलती है।

यह कविता आत्म-निरीक्षण, आत्मबल और कर्तव्यबोध की चेतना को जाग्रत करती है।

यह हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, आत्मबल विकसित करने और समाज में योगदान देने की प्रेरणा देती है।
Quick Tip: कविता की सीख को केवल शब्दों से नहीं, भावों और प्रतीकों से भी समझें — तभी उसका मर्म स्पष्ट होता है।


Question 13:

गर्जना करने वाले बादलों का, वृक्षों के मस्तक पर अभिषेक करना क्या दर्शाता है ?

Correct Answer:
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यह पंक्ति अत्यंत प्रतीकात्मक और भाव-गर्भित है।

बादल जो आकाश में गरजते हैं — वे केवल गम्भीर ध्वनि नहीं करते, बल्कि अंततः बरसकर पृथ्वी की प्यास भी बुझाते हैं।

जब वही बादल वृक्षों के मस्तक (शीर्ष) पर जलधाराओं का अभिषेक करते हैं, तो यह दर्शाता है कि महान व्यक्ति केवल आडंबर नहीं करते, वे अपने कार्यों से भी संसार को लाभ पहुँचाते हैं।

यह पंक्ति इस बात का संकेत देती है कि शक्ति का उपयोग परोपकार में हो — यह आदर्श है।

गर्जना करने वाले बादल यदि बरसें नहीं, तो उनका अस्तित्व व्यर्थ है।

इसी तरह, जो शक्तिशाली हैं, उन्हें अपने सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के कल्याण हेतु करना चाहिए।

यह पंक्ति हमें अहंकार रहित, सेवा भाव से युक्त सामर्थ्य की ओर प्रेरित करती है।
Quick Tip: प्राकृतिक प्रतीकों के पीछे छिपे नैतिक और दार्शनिक संकेतों को समझने का अभ्यास करें — इससे उत्तर अधिक गहन बनते हैं।


Question 14:

पत्रकारिता की भाषा में मुखड़ा किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है? (शब्द सीमा — लगभग 20 शब्द)

Correct Answer:
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पत्रकारिता में समाचार की शुरुआत में आने वाला संक्षिप्त भाग जिसे समाचार का सार कहा जा सके, उसे ‘मुखड़ा’ कहा जाता है।

यह समाचार की सबसे महत्वपूर्ण बातों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

मुखड़े का उद्देश्य पाठक का ध्यान खींचना और उसे पूरी खबर पढ़ने के लिए प्रेरित करना होता है।

यह मुख्य रूप से 5Ws और 1H (Who, What, When, Where, Why, How) में से आवश्यक तथ्यों को शामिल करता है।

एक अच्छा मुखड़ा समाचार को सशक्त बनाता है और उसकी विश्वसनीयता को स्थापित करता है।
Quick Tip: मुखड़ा ऐसा होना चाहिए जो खबर के पूरे स्वरूप को एक ही झलक में प्रस्तुत कर दे — स्पष्ट, सटीक और रोचक।


Question 15:

“जनसंचार के माध्यम आपस में प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक और सहयोगी हैं” — सिद्ध कीजिए। (शब्द सीमा — लगभग 40 शब्द)

Correct Answer:
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वर्तमान समय में जनसंचार के विविध माध्यम — जैसे अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया — एक-दूसरे के सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।

अखबार में छपी खबर टीवी पर विस्तारित होती है, और फिर सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाती है।

रेडियो उन्हीं खबरों को सुनने योग्य बनाता है और विस्तृत इंटरव्यू प्रसारित करता है।

ये सभी माध्यम एक-दूसरे की सीमाओं की पूर्ति करते हैं और मिलकर व्यापक जनजागरण में सहायक बनते हैं।

अतः इन्हें प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि संवादात्मक पूरक कहा जा सकता है।
Quick Tip: संचार माध्यमों की भूमिका को अलग-अलग प्लेटफॉर्म की विशेषताओं के साथ जोड़कर लिखें — इससे उत्तर व्यावहारिक बनता है।


Question 16:

बीट किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (शब्द सीमा — लगभग 40 शब्द)

Correct Answer:
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पत्रकारिता में ‘बीट’ से तात्पर्य है — किसी विशेष क्षेत्र या विषय की नियमित रिपोर्टिंग।

हर पत्रकार को एक निश्चित बीट दी जाती है — जैसे शिक्षा, अपराध, राजनीति, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि।

उदाहरणतः शिक्षा बीट में स्कूल, परीक्षा, परिणाम और नीतियों की खबरें शामिल होती हैं।

बीट रिपोर्टिंग से पत्रकार उस क्षेत्र का विशेषज्ञ बनता है और उसकी रिपोर्टिंग अधिक गहराई और तथ्यपरक होती है।

बीट पत्रकारिता से समाचार की गुणवत्ता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण में वृद्धि होती है।
Quick Tip: बीट का चयन उस पत्रकार की रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार होता है — उदाहरण अवश्य दें।


Question 17:

समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से संबंधित जानकारी को क्यों शामिल किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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समाचार पत्र-पत्रिकाओं का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं बल्कि पाठकों को विविध विषयों से जोड़ना होता है।

विज्ञान, राजनीति, खेल, संस्कृति, मनोरंजन, अर्थशास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्र जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े होते हैं।

इनकी जानकारी देना पाठकों की समझ, रुचि और जागरूकता को बढ़ाता है।

इससे पाठकों को सम्पूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण मिलता है जो लोकतंत्र और सामाजिक संवाद के लिए आवश्यक है।

इसलिए विविध विषयों की सामग्री समाचार माध्यमों का अभिन्न अंग होती है।
Quick Tip: पत्र-पत्रिकाएँ समाज का दर्पण होती हैं — विविध विषयों की प्रस्तुति से वे पाठक के ज्ञान-संसार को समृद्ध करती हैं।


Question 18:

दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में मुद्रित माध्यम के पाठकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यम जैसे अखबार और पत्रिकाएँ पाठकों को समाचार पढ़ने की स्वतंत्रता, समय का चयन और गहराई से अध्ययन की सुविधा देते हैं।

पाठक किसी भी समाचार को बार-बार पढ़ सकते हैं, विश्लेषण कर सकते हैं और उसे सहेजकर रख सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, मुद्रित माध्यम बिना किसी तकनीकी बाधा के उपलब्ध रहते हैं और इंटरनेट या बिजली पर निर्भर नहीं होते।

ये आत्मनिर्भर, शांति से पठन योग्य और अध्ययन पर केंद्रित माध्यम होते हैं।
Quick Tip: मुद्रित माध्यम स्थायित्व, विश्वसनीयता और पुनरावलोकन की दृष्टि से आज भी श्रेष्ठ माने जाते हैं।


Question 19:

‘खोजी रिपोर्ट’ और ‘इन डेpth रिपोर्ट’ के अंतर को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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‘खोजी रिपोर्ट’ (Investigative Report) किसी छिपी हुई सच्चाई, भ्रष्टाचार या षड्यंत्र को उजागर करने वाली रिपोर्ट होती है।

यह रिपोर्ट पत्रकार द्वारा गहन जांच, गुप्त स्रोतों और दस्तावेज़ों की सहायता से तैयार की जाती है।

वहीं ‘इन डेpth रिपोर्ट’ किसी ज्ञात विषय पर गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करती है — इसका उद्देश्य होता है किसी विषय के सभी पक्षों को विस्तार से समझाना।

अतः खोजी रिपोर्ट रहस्योद्घाटन प्रधान होती है जबकि इन डेpth रिपोर्ट व्याख्यात्मक और विस्तृत होती है।
Quick Tip: खोजी रिपोर्ट 'नया उजागर' करती है, जबकि इन डेpth रिपोर्ट 'ज्ञात का विस्तार' करती है — यह मूलभूत अंतर याद रखें।


Question 20:

नाटक प्रतियोगिता में जब मैंने महिला पात्र का अभिनय किया — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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हमारे विद्यालय में वार्षिक नाट्य प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें मुझे एक ऐतिहासिक नारी पात्र का अभिनय सौंपा गया — रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका।

पहले तो मुझे संकोच हुआ कि मैं एक महिला पात्र को कैसे निभा पाऊँगा, लेकिन जब मैंने उसकी जीवनी पढ़ी, उसके संवादों को आत्मसात किया, तब समझ आया कि यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि उस स्त्री की भावना को मंच पर जीना है।

मैंने उसकी वेशभूषा, चाल, हाव-भाव और मुख-मुद्राओं को अभ्यास के ज़रिए साकार किया।

जैसे ही मंच पर प्रवेश किया और संवाद बोले — "मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी", तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

उस क्षण मैंने समझा कि एक कलाकार के लिए लिंग नहीं, भाव और प्रस्तुति प्रधान होती है।

यह अनुभव न केवल अभिनय की दृष्टि से बल्कि स्त्री-शक्ति की समझ के स्तर पर भी मेरे लिए प्रेरणादायक रहा।

उस दिन मुझे अभिनय के माध्यम से स्त्री संवेदना, संघर्ष और शक्ति को दर्शाने का अवसर मिला, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।
Quick Tip: ऐसे लेखन में भावनाओं, मंचीय अनुभव, और आत्मबोध को केंद्र में रखें — पाठक जुड़ाव अनुभव करता है।


Question 21:

खेलों से प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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खेल केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं होते, बल्कि वे चरित्र निर्माण, अनुशासन और आत्म-नियंत्रण का माध्यम भी होते हैं।

मैंने जब पहली बार अपनी स्कूल की फुटबॉल टीम में भाग लिया, तब लगा कि प्रतियोगिता का मतलब है — हर हाल में जीतना।

लेकिन जैसे-जैसे खेल में अनुभव बढ़ा, मैंने जाना कि सच्ची प्रतिस्पर्धा वह होती है जहाँ हम अपनी श्रेष्ठता को साबित करने के साथ-साथ विरोधी का सम्मान भी बनाए रखते हैं।

हमारी टीम ने एक बार फाइनल मैच बहुत करीबी अंतर से हारा, लेकिन विरोधी टीम की खेल भावना, सहयोग और हार्दिकता ने हमें सीख दी कि खेल में पराजय से बड़ा मूल्य 'सम्मान' है।

वास्तव में, खेलों में ईमानदारी, टीम भावना, और हार को स्वीकारने की शक्ति — ये ही प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना हैं।

खेल हमें सिखाते हैं कि जीवन भी एक मैदान है, जहाँ हार-जीत से ज़्यादा ज़रूरी होता है — प्रयास और संयम।
Quick Tip: खेल आधारित लेखन में केवल परिणाम नहीं — प्रक्रिया, मनोविज्ञान और मूल्यबोध को भी शामिल करें।


Question 22:

वरिष्ठ व्यक्तियों के प्रति हमारे कर्तव्य — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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वरिष्ठ नागरिक समाज की वह निधि हैं, जिनके अनुभवों से हम सीखकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

हमारे माता-पिता, दादा-दादी, गुरुजन — इन सभी ने जीवन में संघर्ष किया है, जिसने उन्हें परिपक्व और मार्गदर्शक बनाया है।

हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें न केवल सम्मान दें, बल्कि उनके अनुभव को सुनें, समझें और अपनी दिनचर्या में उन्हें स्थान दें।

आज की तेज़ी से भागती दुनिया में बुज़ुर्गों को उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, जो चिंताजनक है।

वरिष्ठों की देखभाल केवल भौतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक समर्थन भी उतना ही आवश्यक है।

उन्हें बातचीत, सैर, पूजा-पाठ, और पारिवारिक फैसलों में भागीदार बनाना — हमारे कर्तव्यों का हिस्सा होना चाहिए।

क्योंकि आज जो वरिष्ठ हैं, कल हम होंगे — और जैसा व्यवहार हम आज करेंगे, वही हमारे भविष्य का प्रतिबिंब बनेगा।
Quick Tip: ऐसे विषयों पर लेखन करते समय केवल कर्तव्यों की सूची न दें — सहानुभूति और व्यवहारिक उदाहरण शामिल करें।


Question 23:

चित्रकला, संगीतकला या नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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कविता लेखन एक ऐसी कलात्मक अभिव्यक्ति है, जो केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं सीखी जा सकती।

चित्रकला, संगीत या नृत्य की भाँति कविता के भी कुछ नियम होते हैं, जैसे लय, छंद, अलंकार, परंतु ये केवल बाह्य ढाँचा प्रदान करते हैं।

कविता की आत्मा होती है — भाव, अनुभूति और संवेदना।

जब तक व्यक्ति के भीतर गहन संवेदनशीलता, कल्पना शक्ति और आत्मानुभूति न हो, वह कविता नहीं रच सकता।

इसे मात्र अभ्यास से नहीं, बल्कि भीतर की चेतना और अभिव्यक्ति की आकुलता से ही पैदा किया जा सकता है।

इसलिए कविता लेखन पूरी तरह सिखाई नहीं जा सकती — यह आत्मबोध और आत्मविकास से उपजती है।
Quick Tip: सृजनात्मक विधाओं का मूल तत्व केवल विधि नहीं, बल्कि भीतर से उपजी भावना होती है — यह उत्तर में अवश्य झलके।


Question 24:

नाटक के मंच-निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों लिखे जाते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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नाटक के मंच-निर्देश दर्शकों और कलाकारों के लिए तत्क्षणिक क्रिया का संकेत होते हैं।

चूंकि नाटक एक जीवंत मंचीय माध्यम है, इसमें हर क्रिया मंच पर ‘अभी’ हो रही होती है।

इसलिए निर्देश भी वर्तमान काल में ही दिए जाते हैं, जैसे — "अभिनेता धीरे से प्रवेश करता है", "पृष्ठभूमि में संगीत बजता है", "पात्र चौंककर बोलता है"।

वर्तमान काल मंच पर गतिशीलता और सजीवता का आभास कराता है, जिससे दर्शक और अभिनेता दोनों दृश्य से जुड़ाव अनुभव करते हैं।

यदि निर्देश भूतकाल में लिखे जाएँ, तो वे दृश्य की सक्रियता और सजीवता को बाधित कर देंगे।
Quick Tip: उदाहरण सहित कारण स्पष्ट करें — जैसे “दाएँ ओर जाता है” बनाम “गया” — इससे काल प्रयोग का महत्त्व उजागर होता है।


Question 25:

कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का सबसे अधिक प्रभावशाली तरीका कौन सा है? उदाहरण सहित लिखिए।

Correct Answer:
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कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का सबसे प्रभावशाली तरीका होता है — उन्हें उनके कर्मों, संवादों और प्रतिक्रियाओं के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत करना।

किसी पात्र के बारे में केवल बताना नहीं, बल्कि कहानी की घटनाओं में उसकी भूमिका को दिखाना अधिक प्रभावशाली होता है।

उदाहरणतः प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ में हामिद का चरित्र उसकी दादी के लिए चिमटा खरीदने के निर्णय से स्पष्ट होता है।

यह एक क्रियात्मक और भावनात्मक चित्रण है, जहाँ पाठक स्वयं पात्र को समझता है।

इस विधा से पाठक पात्र के व्यवहार, सोच और मूल्यों को गहराई से महसूस करता है — यह प्रभाव बहुत अधिक होता है।
Quick Tip: “बताओ मत — दिखाओ” का सिद्धांत रचनात्मक लेखन में विशेष रूप से चरित्र चित्रण में अपनाया जाता है।


Question 26:

‘कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंग’ पंक्ति के माध्यम से राम के प्रति भरत के किस विश्वास का परिचय मिलता है?



(I) राम उनके आग्रह पर अयोध्या लौट चलेंगे।

(II) राम भरत से बहुत प्रेम करते हैं।

(III) राम उनका मन नहीं तोड़ेंगे।

(IV) राम उन्हें क्षमा कर देंगे।

  • (A) केवल (I)
  • (B) केवल (III)
  • (C) (I) और (III) दोनों
  • (D) (II) और (IV) दोनों
Correct Answer: (C) (I) और (III) दोनों
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‘कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंग’ — इस पंक्ति में भरत की राम पर गहन श्रद्धा और विश्वास झलकता है।

भरत को यह पूर्ण विश्वास है कि राम उनके आग्रह को टालेंगे नहीं।

वे मानते हैं कि राम कभी उनका मन नहीं तोड़ते, और यदि वे मन से विनती करेंगे, तो राम अवश्य अयोध्या लौटेंगे।

इस विश्वास से यह संकेत मिलता है कि भरत के लिए राम केवल भाई ही नहीं, बल्कि आदर्श भी हैं, जो सदा उनकी भावना का आदर करते हैं।

इस प्रकार (I) “राम उनके आग्रह पर अयोध्या लौट चलेंगे” और (III) “राम उनका मन नहीं तोड़ेंगे” — दोनों कथन उपयुक्त हैं।
Quick Tip: पद्यांश का भावार्थ केवल शाब्दिक नहीं, आत्मीय होना चाहिए — तभी सही विकल्प चुना जा सकता है।


Question 27:

राम की किस प्रकृति का वर्णन यहाँ किया गया है?

  • (A) कृपापूर्ण
  • (B) क्षमापूर्ण
  • (C) दयापूर्ण
  • (D) प्रेमपूर्ण
Correct Answer: (A) कृपापूर्ण
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पद्यांश की पंक्तियों में “मैं प्रभु कृपा भीख जोंही” और “त्रिलोकनाथ अति कृपालु” जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है।

इन पंक्तियों में कवि भरत यह संकेत करते हैं कि राम परम कृपालु हैं, जो सभी पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

यह ‘कृपापूर्ण’ स्वभाव उनके चरित्र की विशेषता है — वे करुणा और भक्ति से भरकर भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

भरत को आशा है कि प्रभु उनकी भी प्रार्थना स्वीकार करेंगे, क्योंकि वे कृपा के सागर हैं।

इसलिए विकल्प (A) “कृपापूर्ण” राम की प्रकृति का सबसे उपयुक्त वर्णन है।
Quick Tip: जब किसी पात्र की विशेषता पूछी जाए, तो मूल शब्दों और विशेषणों पर ध्यान दें — जैसे “कृपा”, “भीख”, “कृपालु”।


Question 28:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए:


कथन: भरत ने राम के समक्ष कभी मुँह नहीं खोला।

कारण: शिष्टाचार की परंपरा रही है कि बड़ों के सामने विनम्रता का व्यवहार किया जाता है।

  • (A) कथन गलत है किंतु कारण सही है।
  • (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
  • (C) कथन सही है किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  • (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।
Correct Answer: (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।
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कथन सही है क्योंकि तुलसीदासजी के अनुसार भरत अत्यंत विनयी, मर्यादित और संयमी चरित्र हैं।

उन्होंने राम के समक्ष कभी अनुचित ढंग से अपनी बात नहीं रखी और सदा मर्यादा का पालन किया।

कारण भी उचित है — भारतीय संस्कृति में बड़ों के सामने शांत, शालीन और नम्र व्यवहार की परंपरा रही है।

भरत के व्यवहार में यह शिष्टाचार पूरी तरह परिलक्षित होता है।

इसलिए दोनों कथन और कारण सही हैं तथा कारण, कथन की उपयुक्त व्याख्या करता है।
Quick Tip: ‘कथन-कारण’ आधारित प्रश्नों में यह अवश्य देखें कि क्या कारण वास्तव में कथन को स्पष्ट करता है या केवल संबंधित लगता है।


Question 29:

भरत ने राम के स्वभाव की किस विशेषता का उल्लेख किया है?

  • (A) दूसरों पर दया करने की
  • (B) शत्रु को क्षमा करने की
  • (C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की
  • (D) शरणागत पर कृपा करने की
Correct Answer: (C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की
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पद्यांश में भरत राम के उस स्वभाव का वर्णन करते हैं जिसमें वे अत्यंत शांत, संयमी और क्षमाशील हैं।

भरत कहते हैं कि राम तो ऐसे हैं कि वे अपराधी पर भी क्रोध नहीं करते, और किसी का भी अपकार नहीं सोचते।

उनका यह भाव उनके ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ स्वरूप को प्रमाणित करता है।

यह विशेषता केवल उदारता नहीं बल्कि पूर्ण आत्मसंयम और क्षमा के आदर्श को दर्शाती है।

इसलिए विकल्प (C) “अपराधी पर भी क्रोध न करने की” सबसे उपयुक्त है।
Quick Tip: जब स्वभाव की विशेषता पूछी जाए, तो पात्र की सबसे विशिष्ट और चरम प्रतिक्रिया पर ध्यान दें — जैसे राम की क्रोधहीनता।


Question 30:

‘पुलकि सरीर सभाँ भए ठाड़े’ — पंक्ति के माध्यम से किसकी मनोदशा का वर्णन किया गया है?

  • (A) भरत
  • (B) राम
  • (C) लक्ष्मण
  • (D) कैकेयी
Correct Answer: (A) भरत
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‘पुलकि सरीर सभाँ भए ठाड़े’ — इस पंक्ति में “पुलकित शरीर” और “स्तब्ध खड़े रह जाना” जैसे भावों से भरत की मनोदशा को चित्रित किया गया है।

भरत राम के दर्शन से अत्यंत भावविभोर हो जाते हैं।

वे इतने अधिक भावुक और श्रद्धावान हो जाते हैं कि उनका शरीर रोमांचित हो उठता है और वे अवाक् होकर खड़े रह जाते हैं।

यह चित्रण केवल भौतिक स्थिति नहीं, बल्कि भरत की आत्मिक भक्ति और राम के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

इसलिए सही उत्तर है — (A) भरत।
Quick Tip: पद में प्रयुक्त क्रियाओं (जैसे “पुलकि”, “सभाँ भए ठाड़े”) के आधार पर पात्र की पहचान करें — ये मनोदशा के संकेत होते हैं।


Question 31:

‘देवसेना का गीत’ कविता के आधार पर लिखिए कि देवसेना के जीवन की विडंबना किसे कहा गया है और क्यों?

Correct Answer:
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‘देवसेना का गीत’ कविता में कवि ने देवसेना नामक स्त्री के माध्यम से एक आदर्श, त्यागमयी और समर्पित स्त्री की विडंबना को उकेरा है।

देवसेना ने जीवन भर दूसरों के लिए जिया — अपने पति, समाज, परंपराओं के लिए — किंतु अंततः उसके त्याग, प्रेम और आत्मनिष्ठा की कोई सराहना नहीं हुई।

विडंबना यह है कि वह स्वयं का कोई स्थान न बना सकी; उसका ‘गीत’ किसी ने नहीं सुना।

वह एक ऐसी स्त्री का प्रतीक है जिसकी संवेदनाएँ समाज ने नहीं समझीं, जिसने सदा मौन पीड़ा को ही ओढ़ा।

इसलिए देवसेना के जीवन की विडंबना उस स्त्री की कहानी है जो सबकी होती है, पर स्वयं अपनी नहीं होती।
Quick Tip: विडंबना को समझते समय यह देखिए कि पात्र के त्याग या गुणों के बावजूद उसे क्या नहीं मिला — यही उसका ‘विपर्यय’ है।


Question 32:

‘तोड़ो’ कविता का कवि सृजन का आकांक्षी है, विध्वंस का नहीं। सिद्ध कीजिए।

Correct Answer:
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‘तोड़ो’ कविता में कवि बार-बार ‘तोड़ने’ की बात करता है, लेकिन यह तोड़ना केवल विनाश का संकेत नहीं है।

वह पुरानी, जड़, अन्यायपूर्ण और रूढ़िवादी व्यवस्थाओं को तोड़ने की बात करता है — ताकि सृजन और नवीनता का मार्ग प्रशस्त हो सके।

कवि का उद्देश्य समाज में नयापन, प्रगति और जागरण लाना है।

इसलिए ‘तोड़ो’ का अर्थ है — परिवर्तन के लिए प्रतिरोध।

वह विध्वंस का समर्थक नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण का स्वप्नद्रष्टा है।

वह चाहता है कि हम संकीर्णताओं को तोड़कर नए विचारों और मूल्यबोध की ओर बढ़ें।
Quick Tip: जब कविता में ‘तोड़ो’ या ऐसे तीव्र शब्द हों, तो यह देखें कि उनका उद्देश्य विनाश है या नव निर्माण।


Question 33:

‘जो है वह सुलगाता है। जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचाखियाँ’ — पंक्ति के सन्दर्भ में ‘सुलगाने’ और ‘पचाखियाँ फेंकने’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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इस पंक्ति में गहन प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग हुआ है।

‘जो है वह सुलगाता है’ — इसका अर्थ है कि जिसके पास सोच, चेतना और संवेदना है, वह अपने भीतर मंथन करता है, संघर्ष करता है, जलता है।

वह सृजन की पीड़ा से गुजरता है।

जबकि ‘जो नहीं है’ — यानी जो खोखला है, ज्ञानविहीन है — वह केवल शोर करता है, दिखावे की क्रियाएँ करता है।

‘पचाखियाँ फेंकने’ का आशय है — सतही प्रदर्शन करना, केवल उपस्थिति जताना।

यह अंतर दर्शाता है कि गहराई वाले लोग अंदर से ‘सुलगते’ हैं और खोखले लोग बाहरी शोर में मग्न रहते हैं।
Quick Tip: कविता में क्रियाओं के प्रतीकात्मक अर्थ निकालना अनिवार्य होता है — विशेषकर जब वे भावनात्मक या बौद्धिक द्वंद्व को दर्शाती हैं।


Question 34:

निम्नलिखित काव्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:


आगहन देवस घटा निशि बारी।

दूसर, दुख सो जाइ किमि कारी॥

अब धनि देवस बिरह भा राती।

जरे बिरह ज्यों दीपक बाती॥

काँपा हिया जनावा सीऊ।

तो पै जाइ होइ सँग पीऊ॥

घर घर चीर रचा सब काहूँ।

मोरे रूप रंग ले गा नाहूँ॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह पद्यांश रीतिकालीन कवि द्वारा रचित विरह-वर्णन की कोमलतम अभिव्यक्ति है, जिसमें नायिका अपने प्रेमी के वियोग में दग्ध होकर प्रकृति से लेकर समाज तक सबको संबोधित करती है।


प्रसंग:

यह पद प्रेम-विरह में तड़पती नायिका के हृदय की व्यथा को प्रकट करता है। वह ऋतु, समय, वस्त्र और सौंदर्य को व्यर्थ मानती है, क्योंकि उसका प्रियतम उससे दूर है।


व्याख्या:

नायिका कहती है कि यह अगहन (मार्गशीर्ष) मास है, आकाश में बादल घिर आए हैं, रात की घटा गहराई है — परंतु यह मौसम किसी और के लिए सुखद हो सकता है, मेरे लिए तो दुःख का कारण है।

अब तो मेरा प्रियतम देव (प्रेमी) ही इस रात का धन है — और उसका वियोग दीपक की बाती की तरह मेरे अंतर को जला रहा है।

उसका स्मरण हृदय को कंपा देता है और उसे पाने की उत्कंठा शरीर को व्याकुल कर देती है।

वह कहती है कि समाज की अन्य नारियाँ जहाँ अपने लिए वस्त्र-आभूषण और श्रृंगार की सामग्री से सजती हैं, वहीं मेरा सौंदर्य व्यर्थ है — क्योंकि मेरा प्रिय ही मुझे अपनाए बिना इन रूप-रंगों का कोई मूल्य नहीं।


निष्कर्ष:

यह पद्यांश श्रृंगार रस विशेषकर विरह शृंगार का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ नायिका की भावात्मक पीड़ा, प्रकृति से तादात्म्य और सामाजिक असंतोष — तीनों भाव एक साथ गहराई से व्यक्त हुए हैं।
Quick Tip: रीतिकालीन कविताओं में प्रतीकों (जैसे दीपक-बाती, घटा, चीर) का भावार्थ पहचानना अनिवार्य है — वे सीधे नायिका की मनोदशा का चित्रण करते हैं।


Question 35:

निम्नलिखित काव्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:



यह जन है — गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा?

पनडुब्बा — ये मोती सच्चे फिर कौन कूती लाएगा?

यह सम्भावना — ऐसी आग हटेगा बिसला सुलगाएगा।

यह अदितीय — यह मेरा — यह मैं स्वयं विसर्जित —

यह दीप, अकेला, स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्तियों को दे दो।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह पद प्रसिद्ध कवि अज्ञेय की रचना ‘यह दीप अकेला’ से लिया गया है। इसमें कवि व्यक्ति और समाज की अंतःक्रियाओं को लेकर भावनात्मक और दार्शनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।


प्रसंग:

यह पद्यांश उस भावभूमि पर रचा गया है जहाँ कवि आमजन, उसकी अभिव्यक्ति, और उसकी उपेक्षा के विरोध में अपनी सर्जनात्मक चेतना को प्रस्तुत करता है।


व्याख्या:

कवि कहता है — यह ‘जन’ वह है जो गीत रचता है, राग गाता है, सृजन करता है। यदि वह न रहे तो फिर कौन गाएगा?

जनता का अस्तित्व ही वह ‘पनडुब्बा’ है जो गहरे उतरकर असली मोती (सत्य, सृजन, संवेदना) खोजकर लाता है।

कवि इस जन की “संभावना” को उस अग्नि की तरह मानता है जो किसी को भी जलाकर पुनः जीवन दे सकती है।

“यह अद्वितीय, यह मेरा, यह मैं स्वयं विसर्जित” — पंक्तियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि यह ‘मैं’ (कवि या संवेदनशील व्यक्ति) पूर्ण समर्पित है।

“यह दीप, अकेला, स्नेह भरा” — कवि की आत्माभिव्यक्ति है, जिसमें वह अपने भीतर के प्रेम, आशा और संघर्ष की लौ को पाठकों को सौंपता है।

कवि की अंतिम विनती है — समाज के गर्व, शक्ति और मदमस्त व्यवहार के बीच — इस एकाकी दीप (स्वर) को भी थोड़ी-सी जगह दी जाए।


निष्कर्ष:

यह कविता उस रचनात्मक व्यक्ति की चेतना का प्रतीक है, जो अकेले होते हुए भी सृजन, संघर्ष और प्रेम का दीप जलाए रखता है। यह पद्य सामाजिक संवेदना, आत्म-त्याग और कविता की सामाजिक उपयोगिता को दर्शाता है।
Quick Tip: अज्ञेय की कविता में प्रतीकों (दीप, मोती, पनडुब्बा) के गहरे अर्थ होते हैं — इन्हें समझे बिना भाव स्पष्ट नहीं होता।


Question 36:

लेखक के पिता की किसमें रुचि थी?

  • (A) फ़ारसी और हिंदी भाषा मिलाने में
  • (B) फ़ारसी और हिंदी गद्य मिलाने में
  • (C) नाटक और कविता मिलाकर पढ़ने में
  • (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में
Correct Answer: (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में
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पाठ में यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि लेखक के पिता को हिंदी और फ़ारसी की उक्ति-शैली को मिलाकर बोलने में विशेष आनंद आता था।

वे दोनों भाषाओं की अभिव्यक्तियों, मुहावरों और कहावतों को मिलाकर एक विशेष प्रकार की भाषिक शैली में संवाद करते थे।

यह उनकी भाषाई सौंदर्य-बोध और सांस्कृतिक समन्वय की रुचि को दर्शाता है।

इसलिए सबसे उपयुक्त उत्तर है — (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में पाठ के वर्णनात्मक अंशों को ध्यान से पढ़ें — विशेष रूप से पात्र की आदत, व्यवहार या भाषा शैली से संबंधित।


Question 37:

गद्यांश में रामचरितमानस और रामचंद्रिका का उल्लेख क्यों किया गया है?

  • (A) हिंदी साहित्य के विराट रूप का परिचय देने के लिए।
  • (B) घर के धार्मिक वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
  • (C) लेखक के पिता की भक्ति भावना का उल्लेख करने के लिए।
  • (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
Correct Answer: (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
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पाठ में लेखक ने अपने पारिवारिक वातावरण का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस और रामचंद्रिका जैसे ग्रंथों का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

ये दोनों ग्रंथ उस समय न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से भी घर-घर में पढ़े और सुने जाते थे।

इन ग्रंथों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि लेखक का पारिवारिक वातावरण धार्मिक ही नहीं, बल्कि साहित्यिक रुचियों से भी परिपूर्ण था।

पिता द्वारा इन ग्रंथों का अध्ययन और उनके भावों की प्रस्तुति, इस साहित्यिक वातावरण को और भी जीवंत बनाती है।

अतः सही उत्तर है — (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
Quick Tip: जब दो ग्रंथों का विशेष रूप से उल्लेख हो, तो यह देखें कि उनका प्रयोजन धार्मिक है या साहित्यिक वातावरण चित्रित करना — संदर्भ महत्वपूर्ण है।


Question 38:

लेखक के मन में भारतेन्दु के संबंध में मधुर भावना जागने का कारण था –

  • (A) पिता द्वारा चिताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना।
  • (B) हिंदी साहित्य जगत के प्रसिद्ध कवि और नाटककार होना।
  • (C) बचपन में सत्य हरिशचंद्र नाटकों का मंचन करना।
  • (D) बचपन में सत्य हरिशचंद्र के नाटकों का मंचन देखना।
Correct Answer: (A) पिता द्वारा चिताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना।
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लेखक के हृदय में भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रति जो विशेष स्नेह और श्रद्धा उत्पन्न हुई, उसका प्रमुख कारण था—

उनके पिता द्वारा भारतेन्दु के नाटकों का भावपूर्ण एवं चिताकर्षक ढंग से पाठ करना।

लेखक बचपन में जब अपने पिता से इन नाटकों को सुनते थे, तो वे पात्र और घटनाएँ उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती थीं।

इस प्रक्रिया ने लेखक की भावनाओं में भारतेन्दु के प्रति मधुर भावना और गहरी आत्मीयता उत्पन्न की।

यह स्पष्ट करता है कि साहित्यिक अभिरुचि का विकास बाल्यकाल में पारिवारिक वातावरण द्वारा होता है।

लेखक ने स्वयं बताया है कि पिता की वाणी और उनका भाव प्रदर्शन नाटकों को जीवंत बना देता था,

जिससे लेखक का मन भारतेन्दु की रचनात्मकता की ओर खिंचता चला गया।
Quick Tip: लेखक के बचपन की घटनाओं और पारिवारिक प्रभावों को समझना साहित्यिक रुचियों के विकास को जानने का सशक्त माध्यम है।


Question 39:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘अवस्था’ शब्द का अर्थ है –

  • (A) हालत
  • (B) दशा
  • (C) आयु
  • (D) स्थिति
Correct Answer: (C) आयु
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‘अवस्था’ शब्द का अर्थ गद्यांश में उस स्थिति को दर्शाने के लिए किया गया है, जहाँ किसी व्यक्ति की उम्र या जीवन काल को इंगित किया गया है। यह शब्द कई संदर्भों में प्रयुक्त हो सकता है, लेकिन यहाँ इसका अर्थ स्पष्ट रूप से ‘आयु’ है, जो जीवन की अवस्था को सूचित करता है। इसलिए सही उत्तर है — (C) आयु।
Quick Tip: प्रश्न में प्रयुक्त शब्द का सही अर्थ समझने के लिए उसका संदर्भ अवश्य देखें। 'अवस्था' जैसे शब्द विभिन्न संदर्भों में भिन्न अर्थ दे सकते हैं।


Question 40:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :


कथन: बचपन में लेखक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र में कोई अंतर नहीं कर पाता था।

कारण: लेखक की बाल–बुद्धि नाम की समानता के कारण दोनों को एक ही समझती थी।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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इस प्रश्न में लेखक के बचपन की सोच और तर्क को दर्शाया गया है। लेखक बचपन में राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र को एक ही समझता था क्योंकि नाम समान थे।

बाल्यावस्था में तर्कशीलता की जगह नाम जैसी चीजों से पहचान बनाई जाती है।

इसलिए कथन सही है और उसका कारण भी पूरी तरह उपयुक्त है।

कारण स्पष्ट रूप से कथन की व्याख्या करता है, जिससे यह उत्तर सबसे उचित बनता है।
Quick Tip: 'कथन और कारण' आधारित प्रश्नों में दोनों वाक्यों को स्वतंत्र और फिर संयुक्त रूप से जांचें — तभी सही उत्तर सुनिश्चित किया जा सकता है।


Question 41:

‘परिवेश का व्यक्तित्व निर्माण पर प्रभाव पड़ता है’ – आचार्य रामचंद्र शुक्ल के व्यक्तित्व के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिवेश व्यक्ति के चरित्र और दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित करता है।

उनका ग्रामीण परिवेश, अनुशासित पारिवारिक पृष्ठभूमि और सतत अध्ययनशील प्रवृत्ति उन्हें गंभीर चिंतक और राष्ट्रहितकारी लेखक बनाने में सहायक रही।

उनकी कृतियों में सामाजिक यथार्थ, जनजागरण और आलोचनात्मक दृष्टिकोण प्रमुख हैं, जो उनके सामाजिक और शैक्षिक परिवेश का सीधा प्रभाव है।

शुक्ल जी की साहित्यिक दृष्टि, गद्य शैली, और विचारधारा को उनके परिवेश ने ही आकार दिया।
Quick Tip: व्यक्तित्व की चर्चा करते समय लेखक के परिवेश, शिक्षा, और सामाजिक अनुभवों को जोड़ें।


Question 42:

हेरोल्डिन संवेदनशील था, उसके द्वारा बड़ी बहरिया के संवाद को न पहुँचाने को आप कहाँ तक उचित मानते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

Correct Answer:
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हेरोल्डिन का पत्र न पहुँचाना उसकी गहरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

वह नहीं चाहता था कि युद्धभूमि में तैनात सैनिक भावनात्मक रूप से विचलित हों।

हालाँकि उसका उद्देश्य नेक था, फिर भी किसी का व्यक्तिगत पत्र रोकना सूचनात्मक अधिकार का उल्लंघन है।

यह कार्य नैतिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता, क्योंकि इससे संवाद और विश्वास की प्रक्रिया बाधित होती है।

इसलिए उसका कृत्य सहानुभूतिपूर्ण होने के बावजूद पूर्णतः उचित नहीं कहा जा सकता।
Quick Tip: तर्क आधारित उत्तर में पक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों का संतुलन बनाकर निष्कर्ष दें।


Question 43:

विस्थापन के विरोध में पेड़ों का सूखना क्या दर्शाता है ? ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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पेड़ों का सूखना विस्थापन की पीड़ा का प्रतीक है।

जैसे मनुष्य अपनी जड़ों से कटकर अस्तित्व संकट में पड़ता है, वैसे ही पेड़ भी अपने मूल स्थान से हटने पर जीवित नहीं रह सकते।

यह भावात्मक जुड़ाव और पर्यावरणीय असंतुलन दोनों को दर्शाता है।

‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ इस बात की ओर संकेत करता है कि एक बार अपना स्थान खो देने के बाद पुनः वही जीवन संभव नहीं।

यह प्रकृति और मनुष्य के आपसी संबंध की टूटन को उजागर करता है।
Quick Tip: प्रतीकों की व्याख्या करते समय पाठ की भावभूमि और संवेदनात्मक गहराई को ज़रूर जोड़ें।


Question 44:

निम्नलिखित पंक्तियों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:


\begin{quote
“हरगोविन भाई, तुमको एक संवाद ले जाना है। आज ही। बोलो, जाओगे न?”

“कहाँ?”

“मेरी माँ के पास।”

हरगोविन बड़ी बहुरिया की छलछलाई आँखों में डूब गया, “कहिए, क्या संवाद है?”

संवाद सुनाते समय बड़ी बहुरिया सिसकने लगी। हरगोविन की आँखें भी भर आईं।

बड़ी हवेली की लक्ष्मी को पहली बार इस तरह सिसकते देखा है हरगोविन ने।

वह बोला, “बड़ी बहुरिया, दिल को कड़ा कीजिए।”

“और कितना कड़ा करूँ दिल?... माँ से कहना, मैं भाई-भाभियों की नौकरी करके पेट पालूँगी।

बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहूँगी, लेकिन यहाँ अब नहीं... अब नहीं रह सकूँगी।

कहना, यदि माँ मुझे यहाँ से नहीं ले जाएगी तो मैं किसी दिन गढ़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी...

बघेला-साग खाकर कब तक जीऊँ? किसलिए... किसके लिए?”
\end{quote

Correct Answer:
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यह मार्मिक अंश प्रेमचंदीय यथार्थवाद की गहराई और सामाजिक संरचना के पतन का परिचायक है। इसमें एक बहू की संवेदनात्मक पीड़ा, अपमान, उपेक्षा और आत्मसम्मान की टूटन का अत्यंत भावनात्मक चित्रण है।

बड़ी बहुरिया, जो कभी हवेली की लक्ष्मी थी, आज अपने ही घर में पराई बन गई है। उसका अपने बेटे हरगोविन से संवाद उसकी असहनीय पीड़ा को उजागर करता है।

"हरगोविन भाई, तुमको एक संवाद ले जाना है" — यह वाक्य एक साधारण सूचना न होकर एक माँ के पास अपनी व्यथा भेजने का आख़िरी प्रयास है। वह ‘संवाद’ जो बहू अपने मायके नहीं, अपनी माँ के पास भेज रही है, उसमें उसके टूटते हुए आत्मबल और आत्मसम्मान की गुहार है।

जब वह कहती है — “बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहूँगी, लेकिन यहाँ अब नहीं...” — तो यह स्त्री की करुण गाथा बन जाती है। यह स्त्री-जीवन के उस पक्ष को उजागर करती है जहाँ घर-परिवार में सम्मान का स्थान नहीं बचता।

"किसी दिन पोखरे में डूब मरूँगी" — यह आत्महत्या की धमकी नहीं, बल्कि परिस्थितियों से उपजी गहन निराशा की अभिव्यक्ति है। इस संवाद से यह स्पष्ट होता है कि जब परिवार में अपने ही पराए हो जाएँ, तब जीवन भार बन जाता है।

हरगोविन का उसकी आँखों में देखना और कहना — "दिल को कड़ा कीजिए" — एक असहाय पुरुष की स्थिति को भी दर्शाता है, जो चाहकर भी कोई समाधान नहीं दे सकता।

यह संवाद केवल एक महिला की व्यथा नहीं है, बल्कि उस समाज का आइना है जहाँ बुजुर्गों का अपमान, महिलाओं की उपेक्षा और पारिवारिक विघटन आम हो चुका है।
Quick Tip: सप्रसंग व्याख्या करते समय पात्रों की भावनात्मक गहराई, सामाजिक संकेत और कथन के पीछे छिपी पीड़ा को स्पष्ट करना अत्यंत आवश्यक होता है।


Question 45:

निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:


\begin{quote
कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्या!

पूर्व और अपर समुद्र-महौदधि और रत्नाकर – दोनों को दोनों भुजाओं से थामता हुआ

हिमालय ‘पृथ्वी का मानदंड’ कहा जाए तो गलत क्या है? कालिदास ने ऐसा ही कहा था।

इसी के पाद-देश में यह श्रृंखला दूर तक लोटी हुई है, लोग इसे शिवालिक श्रृंखला कहते हैं।

‘शिवालिक’ का क्या अर्थ है? ‘शिवालिक’ या शिव के जटाजूट का निचला हिस्सा तो नहीं है।

लगता तो ऐसा ही है। शिव की लटियायी जटा ही इतनी सूखी, नीरस और कठोर हो सकती है।

वैसे, अलकनंदा का स्रोत यहाँ से काफी दूरी पर है, लेकिन शिव का अलक तो दूर-दूर तक

छितराया ही रहता होगा। संपूर्ण हिमालय को देखकर तो किसी के मन में समाधिस्थ महादेव की

मूर्ति स्पष्ट हुई होगी।
\end{quote

Correct Answer:
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यह गद्यांश भारत के सांस्कृतिक गौरव — हिमालय — की महिमा और उसके पौराणिक, भौगोलिक तथा साहित्यिक महत्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। लेखक यहाँ हिमालय की भव्यता को ‘पृथ्वी का मानदंड’ कहते हुए न केवल कालिदास की प्रशंसा को उद्धृत करते हैं, बल्कि उसे शिव से जोड़कर एक गूढ़ प्रतीकात्मक व्याख्या भी करते हैं।

हिमालय के सौंदर्य और उसकी दिव्यता को ‘शोभा-निकेतन’ कहकर लेखक उसकी भव्यता को मानवीय सौंदर्य के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इसके दोनों ओर फैले समुद्र और रत्नाकर को उसकी भुजाओं से पकड़ते हुए दर्शाया गया है, जिससे यह एक विराट देवशक्ति का आभास देता है।

‘शिवालिक’ शब्द की व्युत्पत्ति पर लेखक की व्यंजना-शक्ति भी प्रकट होती है। वे इसे शिव की ‘जटा’ का रूप मानते हैं — जो सूखी, नीरस और कठोर हैं — ठीक शिव के व्रत और संयम की तरह। इस कल्पना से लेखक एक ठोस भौगोलिक रूप को आध्यात्मिक प्रतीक में रूपांतरित करते हैं।

शिव का ‘अलक’ — अर्थात अलकनंदा — और उनका समाधिस्थ रूप हिमालय की ऊँचाइयों में लेखक को स्पष्ट दिखाई देता है। यह पर्यावरण और अध्यात्म, भूगोल और संस्कृति का एक सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।

इस गद्यांश में शैली की सौंदर्यात्मकता, गहन सांस्कृतिक चेतना और कल्पनाशीलता का अद्भुत समावेश है, जिससे हिमालय केवल एक पर्वत न रहकर भारतीय चेतना का मूर्त रूप बन जाता है।
Quick Tip: जब व्याख्या में प्रतीकात्मक भाषा (जैसे ‘शिव की जटा’) हो, तो उसे केवल भाव नहीं बल्कि संदर्भ और संस्कृति से भी जोड़कर समझना चाहिए।


Question 46:

‘सूर्दास की झोंपड़ी’ पाठ के संदर्भ में सच्चे खिलाड़ी की पहचान बताते हुए उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए कि सूरदास जीवन रूपी संयम का सच्चा खिलाड़ी था।

Correct Answer:
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सूरदास की झोंपड़ी पाठ में सूरदास एक दृष्टिहीन व्यक्ति होते हुए भी आत्मबल, सहिष्णुता और समाज-कल्याण की भावना से ओतप्रोत जीवन जीता है।

वह मात्र शब्दों का ही नहीं, बल्कि आचरण का भी सच्चा साधक है। जब हरगोविंद जैसे स्वार्थी व्यक्ति द्वारा उसे उखाड़ने की कोशिश होती है, तब भी वह न तो क्रोधित होता है और न ही किसी से प्रतिशोध की भावना रखता है।

सूरदास सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और अपने अधिकारों के लिए दृढ़ता से खड़ा होता है।

सच्चे खिलाड़ी की यही पहचान होती है कि वह हार-जीत की परवाह किए बिना निरंतर प्रयत्न करता है।

सूरदास ने न केवल अपने संयम और सहनशीलता से संघर्ष किया, बल्कि समाज को यह सिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मबल ही सबसे बड़ी शक्ति है।
Quick Tip: एक सच्चे खिलाड़ी की पहचान केवल मैदान में नहीं, जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी होती है — पाठ में इस बात को गहराई से रेखांकित किया गया है।


Question 47:

‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में वर्णित ग्रामीण जीवन की झांकी प्रस्तुत कीजिए।

Correct Answer:
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‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में ग्रामीण जीवन की मिट्टी की सोंधी सुगंध को बड़ी आत्मीयता से प्रस्तुत किया गया है।

लेखक ने ग्रामीण परिवेश के विविध पहलुओं — जैसे कच्चे मकान, तालाब, गाँव की चौपाल, खेतों में मेहनत करते किसान, और आत्मीय संबंधों से जुड़े ग्रामवासियों — का अत्यंत भावनात्मक और यथार्थ चित्रण किया है।

पाठ में बताया गया है कि गाँव में सुख-दुख बाँटने की संस्कृति है, जहाँ हर कोई एक-दूसरे के लिए खड़ा होता है।

बच्चों के खेलने, औरतों के गीत गाने तथा पुरुषों के मेहनत से जीवन जीने का चित्र जीवन्त हो उठता है।

यह पाठ न केवल ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों का वर्णन करता है, बल्कि उनकी संस्कृति, सामूहिकता और श्रम की गरिमा को भी उजागर करता है।
Quick Tip: गद्यांशों में दिए गए परिवेश का गहराई से अध्ययन करें — विशेष रूप से ग्रामीण जीवन की चित्रात्मकता को पहचानने का अभ्यास करें।


Question 48:

‘डा–डा रोटी पाप–पग नीर’ वाले मालवा की वर्तमान स्थिति ‘अपना मालवा खाओ–उजाड़ो सभ्यता में’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। स्थिति के कारणों को स्पष्ट करते हुए यह भी लिखिए कि इसे कैसे सुधारा जा सकता है ?

Correct Answer:
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'डा–डा रोटी पाप–पग नीर' वाला मालवा कभी आत्मनिर्भर, पर्यावरण से जुड़ा और संस्कृति-समृद्ध क्षेत्र था। वहाँ के लोग संयमित जीवनशैली अपनाते थे।

लेकिन 'अपना मालवा खाओ–उजाड़ो' सभ्यता में मालवा का वर्तमान स्वरूप अत्यंत चिंताजनक है।

वनों की अंधाधुंध कटाई, भूजल स्तर का गिरना, रासायनिक खेती और उद्योगों के अतिक्रमण के कारण वहाँ की भूमि, जल और जीवनशैली सभी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

लोगों की जीवन शैली भी भौतिकतावादी हो गई है, जिससे परंपरागत ज्ञान, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन टूट गया है।

इसे सुधारने के लिए स्थायी कृषि पद्धतियाँ अपनानी होंगी, जल-संरक्षण के प्रयास करने होंगे और पारंपरिक संसाधनों की ओर लौटना होगा।

इसके साथ-साथ जन-जागरूकता और सरकार की नीति-निर्माण में जनभागीदारी ज़रूरी है।
Quick Tip: समस्या-आधारित प्रश्नों में केवल कारण नहीं, समाधान भी अवश्य जोड़ें — इससे उत्तर संतुलित और प्रभावी होता है।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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