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Dipanwita Pramanik

Content Writer | Updated On - Sep 19, 2025

CBSE Class 12 Hindi Elective exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.

The Hindi Elective Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.

The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 PDF (Set 3 - 29/1/3) is available for download here.

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solution

CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solution (Set 3 - 29/1/3) Download PDF Check Solution
CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 with Solutions Set 3 29 1 3


Question 1:

वर्ष 2024 का ‘पृथ्वी दिवस’ केंद्रित है –

  • (A) पर्यावरण
  • (B) प्लास्टिक
  • (C) जलवायु
  • (D) प्रदूषण
Correct Answer: (B) प्लास्टिक
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हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘पृथ्वी दिवस’ पर्यावरण जागरूकता का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसकी शुरुआत 1970 में हुई थी और तब से यह दिन वैश्विक समुदाय को प्रकृति के प्रति जागरूकता, संरक्षण और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करता आ रहा है।

वर्ष 2024 के पृथ्वी दिवस की थीम “Planet vs. Plastics” थी, जिसका आशय था ‘पृथ्वी बनाम प्लास्टिक’।

इसका मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक के खतरों को उजागर करना और 2040 तक प्लास्टिक उत्पादन को 60% तक कम करने की वैश्विक मांग को बढ़ावा देना था।

इस थीम के तहत स्कूलों, संगठनों, सरकारों और नागरिकों को यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

प्लास्टिक अपशिष्ट नदियों, महासागरों, मछलियों, पक्षियों और अंततः मानव शरीर में माइक्रोप्लास्टिक के रूप में प्रवेश कर रहा है, जिससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

इसलिए वर्ष 2024 का प्रमुख फोकस प्लास्टिक के खिलाफ वैश्विक अभियान चलाना, पुनः प्रयोग को बढ़ावा देना, बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को अपनाना और प्लास्टिक निर्मूलन के लिए नीति-निर्माताओं पर दबाव डालना था।

पृथ्वी दिवस के इस अभियान ने युवाओं और स्कूलों को विशेष रूप से प्रेरित किया, जिन्होंने स्वैच्छिक प्रयासों के माध्यम से प्लास्टिक-फ्री कैम्पेन, सफाई अभियान और पर्यावरणीय शिक्षा कार्यक्रमों में भाग लिया।


निष्कर्षतः, यह स्पष्ट है कि वर्ष 2024 में पृथ्वी दिवस का केंद्र बिंदु प्लास्टिक था, न कि केवल पर्यावरण या जलवायु।
Quick Tip: लंबे उत्तर में विषय की पृष्ठभूमि, समस्या का विस्तार, वर्तमान संदर्भ और निष्कर्ष को जोड़ने से उत्तर अधिक विश्लेषणात्मक और समृद्ध बनता है।


Question 2:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘सभी लोग जाग जाएँ’ का आशय है –

  • (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ।
  • (B) समय पर अपने कर्तव्य की पूर्ति करें।
  • (C) अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करें।
  • (D) पारंपरिक अंधविश्वासों से मुक्त हो जाएँ।
Correct Answer: (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ।
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गद्यांश में ‘सभी लोग जाग जाएँ’ का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया गया है, जो पाठकों को पर्यावरणीय संकट के प्रति जागरूक करने का आह्वान है।

आज पृथ्वी प्लास्टिक, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से संकट में है। इस संदर्भ में लेखक का कहना है कि “सभी लोग जाग जाएँ” एक चेतावनी है कि यदि हम समय रहते सचेत नहीं हुए, तो न केवल हमारा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संकट में पड़ सकता है।

यह वाक्य केवल शाब्दिक जागरण नहीं बल्कि चेतना, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता की आवश्यकता को दर्शाता है। इसमें भाव यह है कि हर व्यक्ति को पृथ्वी की रक्षा को व्यक्तिगत और सामूहिक दायित्व समझकर सक्रिय रूप से योगदान करना चाहिए।

इसलिए सही उत्तर है: (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ।
Quick Tip: ‘जागना’ जैसे शब्द प्रतीकात्मक होते हैं — इनका आशय केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक चेतना से होता है। ऐसे शब्दों के संदर्भ को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


Question 3:

पृथ्वी की माँ से तुलना का आधार है –

  • (A) पालन-पोषण का गुण
  • (B) रक्षा करने का गुण
  • (C) जन्म देने का गुण
  • (D) सहन करने का गुण
Correct Answer: (A) पालन-पोषण का गुण
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पृथ्वी को 'माँ' कहने का आधार केवल सांस्कृतिक या भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यवहारिक भी है। जैसे माँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उन्हें आहार, सुरक्षा और पोषण प्रदान करती है, वैसे ही पृथ्वी भी हमें जल, अन्न, खनिज, वायु, वनस्पति, पशु और अन्य आवश्यक प्राकृतिक संसाधन देती है।

माँ की तरह, पृथ्वी भी सभी जीवों की देखभाल करती है और जीवन चक्र को बनाए रखती है, बिना किसी भेदभाव के। यही पालन-पोषण का गुण पृथ्वी में निहित है।

इसलिए, ‘माँ’ की उपमा पृथ्वी को देना पूरी तरह उपयुक्त है और इसका आधार है: (A) पालन-पोषण का गुण।
Quick Tip: ‘पृथ्वी = माँ’ जैसी उपमाओं के साथ जुड़े गुणों को समझना महत्वपूर्ण है — केवल भावात्मक दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं होता।


Question 4:

प्रकृति के प्रति गांधीजी का क्या दृष्टिकोण था ?

Correct Answer:
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गांधीजी का प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण सह-अस्तित्व पर आधारित था। वे प्रकृति को केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि एक पूजनीय तत्व मानते थे। उनका मानना था कि मनुष्य को प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए, जितना उसकी आवश्यकता हो, और उसे लालच से बचना चाहिए।

उन्होंने ‘ट्रस्टीशिप’ का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार मनुष्य को प्राकृतिक संसाधनों का रक्षक बनकर, भावी पीढ़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए उनका उपयोग करना चाहिए।

गांधीजी के अनुसार, यदि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन नहीं होगा, तो न केवल संसाधनों का क्षय होगा, बल्कि नैतिक पतन भी होगा।
Quick Tip: गांधीजी के विचारों में सादगी, संयम और सह-अस्तित्व की भावना थी, जो पर्यावरण संरक्षण के मूल सिद्धांतों को दर्शाती है।


Question 5:

बढ़ती हुई आबादी के कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं ?

Correct Answer:
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बढ़ती जनसंख्या के कारण अनेक सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इनमें प्रमुख हैं —

1. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन

2. रोजगार, जल, भोजन और आवास की कमी

3. वनों की कटाई और जैव विविधता में ह्रास

4. प्रदूषण में वृद्धि — वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण

5. स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा पर दबाव

इन दुष्परिणामों से न केवल पर्यावरण असंतुलित हो रहा है, बल्कि सामाजिक असमानता और गरीबी भी बढ़ रही है।
Quick Tip: जब भी आप जनसंख्या विषय पर लिखें, तो "प्राकृतिक संसाधनों पर प्रभाव" और "सामाजिक-आर्थिक परिणाम" दोनों को अवश्य जोड़ें।


Question 6:

गैर-नवीकरणीय ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और पुनः निर्मित नहीं हो सकते, जैसे — कोयला, पेट्रोलियम, डीजल, प्राकृतिक गैस।

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: वे स्रोत जो प्रकृति द्वारा निरंतर उपलब्ध होते हैं और पुनः उपयोग योग्य होते हैं, जैसे — सूर्य की ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, जैविक अपशिष्ट से ऊर्जा।

मुख्य अंतर: गैर-नवीकरणीय ऊर्जा पर्यावरण को अधिक प्रदूषित करती है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा स्वच्छ, हरित और दीर्घकालिक होती है।
Quick Tip: हर उत्तर में उदाहरण ज़रूर दें — जैसे "सौर ऊर्जा" या "कोयला" — यह उत्तर को स्पष्ट और प्रभावशाली बनाता है।


Question 7:

प्रकृति की रक्षा प्रत्येक मनुष्य के लिए क्यों आवश्यक है ?

Correct Answer:
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प्रकृति ही मानव जीवन का मूल आधार है। वायु, जल, भोजन, औषधियाँ, ऊर्जा — सब प्रकृति से प्राप्त होते हैं। यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है, तो मानव जीवन संकट में पड़ जाता है।

प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी — ये सभी समस्याएं तब उत्पन्न होती हैं जब मनुष्य प्रकृति का दोहन करता है।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह वृक्ष लगाए, जल बचाए, प्लास्टिक का उपयोग कम करे और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ाए।

केवल सरकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।
Quick Tip: पर्यावरण विषयों पर उत्तर लिखते समय "व्यक्तिगत जिम्मेदारी" को ज़रूर शामिल करें — यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है।


Question 8:

‘धँसती ही जाती पृथ्वी में बड़ों-बड़ों की हस्ती’ — पंक्ति का आशय है —

  • (A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है।
  • (B) पृथ्वी में बड़े-बड़े समा जाते हैं।
  • (C) शक्तिशालियों का जीवन क्षणभंगुर है।
  • (D) शक्तिशालियों का अधःपतन निश्चित है।
Correct Answer: (A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है।
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इस पंक्ति में नश्वरता की भावना को अत्यंत गहन रूप से प्रकट किया गया है।

यह बताता है कि चाहे कोई व्यक्ति कितना ही महान, शक्तिशाली या प्रभावशाली क्यों न हो,

अंततः उसका अस्तित्व भी इसी पृथ्वी में समा जाता है — अर्थात् नाश को प्राप्त हो जाता है।

‘बड़ों-बड़ों की हस्ती’ का ‘पृथ्वी में धँस जाना’ इस सच्चाई को उजागर करता है

कि संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है।

यह जीवन की क्षणभंगुरता और विनम्रता के भाव को समझाने वाली पंक्ति है।
Quick Tip: कविता में प्रयुक्त प्रतीकों को समझने के लिए उनके पीछे के दर्शन को पकड़ने का अभ्यास करें — इससे अर्थ ग्रहण और उत्तर निर्धारण में आसानी होती है।


Question 9:

शक्तिहीन का क्या हश्र होता है ?

  • (A) थक-हार कर बैठ जाता है।
  • (B) लोग उनको पनपने नहीं देते।
  • (C) लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते।
  • (D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है।
Correct Answer: (D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है।
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यह प्रश्न जीवन की कठोर सच्चाई को उजागर करता है।

जो व्यक्ति शक्तिहीन होता है, वह संघर्षों का सामना करने में अक्षम होता है।

उसकी न तो कोई प्रभावशाली उपस्थिति होती है और न ही समाज में टिके रहने की क्षमता।

इसलिए, अंततः वह समाज और इतिहास दोनों में विलीन हो जाता है — अर्थात उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

यह विकल्प ‘अस्तित्व नष्ट हो जाता है’ न केवल सबसे उपयुक्त है, बल्कि यह विषय की गंभीरता को भी दर्शाता है।
Quick Tip: जब विकल्पों में 'अंतिम परिणाम' से जुड़ा कोई प्रश्न हो, तो सोचें कि सबसे गहन और पूर्ण प्रभाव क्या होगा — उत्तर उसी आधार पर तय करें।


Question 10:

कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाले कथन है/हैं —



(I) संसार में जीने के लिए शक्तिशाली बनना पड़ेगा।

(II) हार मानने वालों के लिए मातृभूमि मरण-भूमि के समान है।

(III) यहाँ सब एक-दूसरे के विरोधी हैं।

  • (A) केवल (I)
  • (B) केवल (II)
  • (C) (I) और (II) दोनों ही
  • (D) (I) और (III) दोनों ही
Correct Answer: (C) (I) और (II) दोनों ही
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इस प्रश्न में कविता के केंद्रीय भाव को समझने की आवश्यकता है।

कविता का मूल संदेश यह है कि जीवन संघर्षमय है और केवल वही व्यक्ति इसमें टिक सकता है जो शक्तिशाली है।

(I) कथन इस विचार को स्पष्ट करता है कि संसार में जीवित रहने के लिए शक्ति आवश्यक है।

(II) कथन भी कविता की भावनात्मक तीव्रता को दर्शाता है — हार मानने वालों को मातृभूमि तक त्याग देती है, जो कविता में प्रयुक्त भावनात्मक अभिव्यक्ति है।

(III) कथन कविता की भावना से मेल नहीं खाता क्योंकि कविता में सामूहिक विरोध का नहीं बल्कि व्यक्ति की आंतरिक शक्ति और संघर्ष की बात है।

इसलिए सही उत्तर है: (I) और (II) दोनों ही।
Quick Tip: केंद्रीय भाव समझते समय पूरे काव्यांश के स्वर और उद्देश्य को ध्यान में रखें — केवल शब्दों से नहीं, भावना से समझें।


Question 11:

अपने को विद्रोही कौन और क्यों मानते हैं ?

Correct Answer:
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इस कविता में कवि स्वयं को विद्रोही मानता है।

वह इसलिए कि वह समाज की रूढ़िवादी, पलायनवादी और निष्क्रिय सोच का विरोध करता है।

कवि शक्ति को धर्म और निर्बलता को पाप मानता है, जो उसकी विद्रोही भावना को स्पष्ट करता है।

वह जीवन की कठिनाइयों से भागने के स्थान पर उनका सामना करने और शक्तिशाली बनने को प्रेरित करता है।

कवि समाज में व्याप्त हीन भावना, आत्म-निराशा और आत्म-विस्मृति के विरुद्ध विद्रोह करता है।

उसका यह विद्रोह केवल बाह्य व्यवस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि आत्मबल के जागरण का आह्वान है।

वह कहता है कि जो अपनी क्षमताओं को नहीं पहचानते, वे स्वयं से ही धोखा करते हैं — और इसलिए वह अपने को सच्चा विद्रोही मानता है।
Quick Tip: जब कोई कवि या लेखक स्वयं को ‘विद्रोही’ कहता है, तो उसका अर्थ केवल विरोध नहीं होता — उसमें परिवर्तन की चेतना छिपी होती है।


Question 12:

इस काव्यांश के माध्यम से क्या सीख दी गई है ?

Correct Answer:
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इस काव्यांश से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में अस्तित्व बनाए रखने के लिए शक्ति, साहस और आत्मबल आवश्यक हैं।

यह कविता जीवन को एक संघर्ष मानती है और बताती है कि केवल वे ही व्यक्ति टिकते हैं जो अपने सामर्थ्य का विकास करते हैं।

जो लोग संघर्ष से डरते हैं, जो हार मान लेते हैं — वे मिट जाते हैं, उनका कोई मूल्य नहीं रह जाता।

कवि हमें बताता है कि शक्तिहीन व्यक्ति का हश्र अस्तित्वविहीनता होता है और शक्तिशाली बनने से ही समाज में प्रतिष्ठा मिलती है।

यह कविता आत्म-निरीक्षण, आत्मबल और कर्तव्यबोध की चेतना को जाग्रत करती है।

यह हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, आत्मबल विकसित करने और समाज में योगदान देने की प्रेरणा देती है।
Quick Tip: कविता की सीख को केवल शब्दों से नहीं, भावों और प्रतीकों से भी समझें — तभी उसका मर्म स्पष्ट होता है।


Question 13:

गर्जना करने वाले बादलों का, वृक्षों के मस्तक पर अभिषेक करना क्या दर्शाता है ?

Correct Answer:
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यह पंक्ति अत्यंत प्रतीकात्मक और भाव-गर्भित है।

बादल जो आकाश में गरजते हैं — वे केवल गम्भीर ध्वनि नहीं करते, बल्कि अंततः बरसकर पृथ्वी की प्यास भी बुझाते हैं।

जब वही बादल वृक्षों के मस्तक (शीर्ष) पर जलधाराओं का अभिषेक करते हैं, तो यह दर्शाता है कि महान व्यक्ति केवल आडंबर नहीं करते, वे अपने कार्यों से भी संसार को लाभ पहुँचाते हैं।

यह पंक्ति इस बात का संकेत देती है कि शक्ति का उपयोग परोपकार में हो — यह आदर्श है।

गर्जना करने वाले बादल यदि बरसें नहीं, तो उनका अस्तित्व व्यर्थ है।

इसी तरह, जो शक्तिशाली हैं, उन्हें अपने सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के कल्याण हेतु करना चाहिए।

यह पंक्ति हमें अहंकार रहित, सेवा भाव से युक्त सामर्थ्य की ओर प्रेरित करती है।
Quick Tip: प्राकृतिक प्रतीकों के पीछे छिपे नैतिक और दार्शनिक संकेतों को समझने का अभ्यास करें — इससे उत्तर अधिक गहन बनते हैं।


Question 14:

चित्रकला, संगीतकला या नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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कविता लेखन एक ऐसी कलात्मक अभिव्यक्ति है, जो केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं सीखी जा सकती।

चित्रकला, संगीत या नृत्य की भाँति कविता के भी कुछ नियम होते हैं, जैसे लय, छंद, अलंकार, परंतु ये केवल बाह्य ढाँचा प्रदान करते हैं।

कविता की आत्मा होती है — भाव, अनुभूति और संवेदना।

जब तक व्यक्ति के भीतर गहन संवेदनशीलता, कल्पना शक्ति और आत्मानुभूति न हो, वह कविता नहीं रच सकता।

इसे मात्र अभ्यास से नहीं, बल्कि भीतर की चेतना और अभिव्यक्ति की आकुलता से ही पैदा किया जा सकता है।

इसलिए कविता लेखन पूरी तरह सिखाई नहीं जा सकती — यह आत्मबोध और आत्मविकास से उपजती है।
Quick Tip: सृजनात्मक विधाओं का मूल तत्व केवल विधि नहीं, बल्कि भीतर से उपजी भावना होती है — यह उत्तर में अवश्य झलके।


Question 15:

नाटक के मंच-निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों लिखे जाते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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नाटक के मंच-निर्देश दर्शकों और कलाकारों के लिए तत्क्षणिक क्रिया का संकेत होते हैं।

चूंकि नाटक एक जीवंत मंचीय माध्यम है, इसमें हर क्रिया मंच पर ‘अभी’ हो रही होती है।

इसलिए निर्देश भी वर्तमान काल में ही दिए जाते हैं, जैसे — "अभिनेता धीरे से प्रवेश करता है", "पृष्ठभूमि में संगीत बजता है", "पात्र चौंककर बोलता है"।

वर्तमान काल मंच पर गतिशीलता और सजीवता का आभास कराता है, जिससे दर्शक और अभिनेता दोनों दृश्य से जुड़ाव अनुभव करते हैं।

यदि निर्देश भूतकाल में लिखे जाएँ, तो वे दृश्य की सक्रियता और सजीवता को बाधित कर देंगे।
Quick Tip: उदाहरण सहित कारण स्पष्ट करें — जैसे “दाएँ ओर जाता है” बनाम “गया” — इससे काल प्रयोग का महत्त्व उजागर होता है।


Question 16:

कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का सबसे अधिक प्रभावशाली तरीका कौन सा है? उदाहरण सहित लिखिए।

Correct Answer:
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कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का सबसे प्रभावशाली तरीका होता है — उन्हें उनके कर्मों, संवादों और प्रतिक्रियाओं के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत करना।

किसी पात्र के बारे में केवल बताना नहीं, बल्कि कहानी की घटनाओं में उसकी भूमिका को दिखाना अधिक प्रभावशाली होता है।

उदाहरणतः प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ में हामिद का चरित्र उसकी दादी के लिए चिमटा खरीदने के निर्णय से स्पष्ट होता है।

यह एक क्रियात्मक और भावनात्मक चित्रण है, जहाँ पाठक स्वयं पात्र को समझता है।

इस विधा से पाठक पात्र के व्यवहार, सोच और मूल्यों को गहराई से महसूस करता है — यह प्रभाव बहुत अधिक होता है।
Quick Tip: “बताओ मत — दिखाओ” का सिद्धांत रचनात्मक लेखन में विशेष रूप से चरित्र चित्रण में अपनाया जाता है।


Question 17:

पत्रकारिता की भाषा में मुखड़ा किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है? (शब्द सीमा — लगभग 20 शब्द)

Correct Answer:
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पत्रकारिता में समाचार की शुरुआत में आने वाला संक्षिप्त भाग जिसे समाचार का सार कहा जा सके, उसे ‘मुखड़ा’ कहा जाता है।

यह समाचार की सबसे महत्वपूर्ण बातों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

मुखड़े का उद्देश्य पाठक का ध्यान खींचना और उसे पूरी खबर पढ़ने के लिए प्रेरित करना होता है।

यह मुख्य रूप से 5Ws और 1H (Who, What, When, Where, Why, How) में से आवश्यक तथ्यों को शामिल करता है।

एक अच्छा मुखड़ा समाचार को सशक्त बनाता है और उसकी विश्वसनीयता को स्थापित करता है।
Quick Tip: मुखड़ा ऐसा होना चाहिए जो खबर के पूरे स्वरूप को एक ही झलक में प्रस्तुत कर दे — स्पष्ट, सटीक और रोचक।


Question 18:

“जनसंचार के माध्यम आपस में प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक और सहयोगी हैं” — सिद्ध कीजिए। (शब्द सीमा — लगभग 40 शब्द)

Correct Answer:
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वर्तमान समय में जनसंचार के विविध माध्यम — जैसे अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया — एक-दूसरे के सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।

अखबार में छपी खबर टीवी पर विस्तारित होती है, और फिर सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाती है।

रेडियो उन्हीं खबरों को सुनने योग्य बनाता है और विस्तृत इंटरव्यू प्रसारित करता है।

ये सभी माध्यम एक-दूसरे की सीमाओं की पूर्ति करते हैं और मिलकर व्यापक जनजागरण में सहायक बनते हैं।

अतः इन्हें प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि संवादात्मक पूरक कहा जा सकता है।
Quick Tip: संचार माध्यमों की भूमिका को अलग-अलग प्लेटफॉर्म की विशेषताओं के साथ जोड़कर लिखें — इससे उत्तर व्यावहारिक बनता है।


Question 19:

बीट किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (शब्द सीमा — लगभग 40 शब्द)

Correct Answer:
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पत्रकारिता में ‘बीट’ से तात्पर्य है — किसी विशेष क्षेत्र या विषय की नियमित रिपोर्टिंग।

हर पत्रकार को एक निश्चित बीट दी जाती है — जैसे शिक्षा, अपराध, राजनीति, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि।

उदाहरणतः शिक्षा बीट में स्कूल, परीक्षा, परिणाम और नीतियों की खबरें शामिल होती हैं।

बीट रिपोर्टिंग से पत्रकार उस क्षेत्र का विशेषज्ञ बनता है और उसकी रिपोर्टिंग अधिक गहराई और तथ्यपरक होती है।

बीट पत्रकारिता से समाचार की गुणवत्ता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण में वृद्धि होती है।
Quick Tip: बीट का चयन उस पत्रकार की रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार होता है — उदाहरण अवश्य दें।


Question 20:

समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से संबंधित जानकारी को क्यों शामिल किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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समाचार पत्र-पत्रिकाओं का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं बल्कि पाठकों को विविध विषयों से जोड़ना होता है।

विज्ञान, राजनीति, खेल, संस्कृति, मनोरंजन, अर्थशास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्र जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े होते हैं।

इनकी जानकारी देना पाठकों की समझ, रुचि और जागरूकता को बढ़ाता है।

इससे पाठकों को सम्पूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण मिलता है जो लोकतंत्र और सामाजिक संवाद के लिए आवश्यक है।

इसलिए विविध विषयों की सामग्री समाचार माध्यमों का अभिन्न अंग होती है।
Quick Tip: पत्र-पत्रिकाएँ समाज का दर्पण होती हैं — विविध विषयों की प्रस्तुति से वे पाठक के ज्ञान-संसार को समृद्ध करती हैं।


Question 21:

दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में मुद्रित माध्यम के पाठकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं?

Correct Answer:
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मुद्रित माध्यम जैसे अखबार और पत्रिकाएँ पाठकों को समाचार पढ़ने की स्वतंत्रता, समय का चयन और गहराई से अध्ययन की सुविधा देते हैं।

पाठक किसी भी समाचार को बार-बार पढ़ सकते हैं, विश्लेषण कर सकते हैं और उसे सहेजकर रख सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, मुद्रित माध्यम बिना किसी तकनीकी बाधा के उपलब्ध रहते हैं और इंटरनेट या बिजली पर निर्भर नहीं होते।

ये आत्मनिर्भर, शांति से पठन योग्य और अध्ययन पर केंद्रित माध्यम होते हैं।
Quick Tip: मुद्रित माध्यम स्थायित्व, विश्वसनीयता और पुनरावलोकन की दृष्टि से आज भी श्रेष्ठ माने जाते हैं।


Question 22:

‘खोजी रिपोर्ट’ और ‘इन डेpth रिपोर्ट’ के अंतर को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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‘खोजी रिपोर्ट’ (Investigative Report) किसी छिपी हुई सच्चाई, भ्रष्टाचार या षड्यंत्र को उजागर करने वाली रिपोर्ट होती है।

यह रिपोर्ट पत्रकार द्वारा गहन जांच, गुप्त स्रोतों और दस्तावेज़ों की सहायता से तैयार की जाती है।

वहीं ‘इन डेpth रिपोर्ट’ किसी ज्ञात विषय पर गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करती है — इसका उद्देश्य होता है किसी विषय के सभी पक्षों को विस्तार से समझाना।

अतः खोजी रिपोर्ट रहस्योद्घाटन प्रधान होती है जबकि इन डेpth रिपोर्ट व्याख्यात्मक और विस्तृत होती है।
Quick Tip: खोजी रिपोर्ट 'नया उजागर' करती है, जबकि इन डेpth रिपोर्ट 'ज्ञात का विस्तार' करती है — यह मूलभूत अंतर याद रखें।


Question 23:

नाटक प्रतियोगिता में जब मैंने महिला पात्र का अभिनय किया — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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हमारे विद्यालय में वार्षिक नाट्य प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें मुझे एक ऐतिहासिक नारी पात्र का अभिनय सौंपा गया — रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका।

पहले तो मुझे संकोच हुआ कि मैं एक महिला पात्र को कैसे निभा पाऊँगा, लेकिन जब मैंने उसकी जीवनी पढ़ी, उसके संवादों को आत्मसात किया, तब समझ आया कि यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि उस स्त्री की भावना को मंच पर जीना है।

मैंने उसकी वेशभूषा, चाल, हाव-भाव और मुख-मुद्राओं को अभ्यास के ज़रिए साकार किया।

जैसे ही मंच पर प्रवेश किया और संवाद बोले — "मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी", तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

उस क्षण मैंने समझा कि एक कलाकार के लिए लिंग नहीं, भाव और प्रस्तुति प्रधान होती है।

यह अनुभव न केवल अभिनय की दृष्टि से बल्कि स्त्री-शक्ति की समझ के स्तर पर भी मेरे लिए प्रेरणादायक रहा।

उस दिन मुझे अभिनय के माध्यम से स्त्री संवेदना, संघर्ष और शक्ति को दर्शाने का अवसर मिला, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।
Quick Tip: ऐसे लेखन में भावनाओं, मंचीय अनुभव, और आत्मबोध को केंद्र में रखें — पाठक जुड़ाव अनुभव करता है।


Question 24:

खेलों से प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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खेल केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं होते, बल्कि वे चरित्र निर्माण, अनुशासन और आत्म-नियंत्रण का माध्यम भी होते हैं।

मैंने जब पहली बार अपनी स्कूल की फुटबॉल टीम में भाग लिया, तब लगा कि प्रतियोगिता का मतलब है — हर हाल में जीतना।

लेकिन जैसे-जैसे खेल में अनुभव बढ़ा, मैंने जाना कि सच्ची प्रतिस्पर्धा वह होती है जहाँ हम अपनी श्रेष्ठता को साबित करने के साथ-साथ विरोधी का सम्मान भी बनाए रखते हैं।

हमारी टीम ने एक बार फाइनल मैच बहुत करीबी अंतर से हारा, लेकिन विरोधी टीम की खेल भावना, सहयोग और हार्दिकता ने हमें सीख दी कि खेल में पराजय से बड़ा मूल्य 'सम्मान' है।

वास्तव में, खेलों में ईमानदारी, टीम भावना, और हार को स्वीकारने की शक्ति — ये ही प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना हैं।

खेल हमें सिखाते हैं कि जीवन भी एक मैदान है, जहाँ हार-जीत से ज़्यादा ज़रूरी होता है — प्रयास और संयम।
Quick Tip: खेल आधारित लेखन में केवल परिणाम नहीं — प्रक्रिया, मनोविज्ञान और मूल्यबोध को भी शामिल करें।


Question 25:

वरिष्ठ व्यक्तियों के प्रति हमारे कर्तव्य — लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :

Correct Answer:
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वरिष्ठ नागरिक समाज की वह निधि हैं, जिनके अनुभवों से हम सीखकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

हमारे माता-पिता, दादा-दादी, गुरुजन — इन सभी ने जीवन में संघर्ष किया है, जिसने उन्हें परिपक्व और मार्गदर्शक बनाया है।

हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें न केवल सम्मान दें, बल्कि उनके अनुभव को सुनें, समझें और अपनी दिनचर्या में उन्हें स्थान दें।

आज की तेज़ी से भागती दुनिया में बुज़ुर्गों को उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, जो चिंताजनक है।

वरिष्ठों की देखभाल केवल भौतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक समर्थन भी उतना ही आवश्यक है।

उन्हें बातचीत, सैर, पूजा-पाठ, और पारिवारिक फैसलों में भागीदार बनाना — हमारे कर्तव्यों का हिस्सा होना चाहिए।

क्योंकि आज जो वरिष्ठ हैं, कल हम होंगे — और जैसा व्यवहार हम आज करेंगे, वही हमारे भविष्य का प्रतिबिंब बनेगा।
Quick Tip: ऐसे विषयों पर लेखन करते समय केवल कर्तव्यों की सूची न दें — सहानुभूति और व्यवहारिक उदाहरण शामिल करें।


Question 26:

(क)
लागेउ माँह परे अब पाला~। बिरह काल भएउ जड़ काला~॥

पहिल पहिल तन रूई जो झाँपे~। रहिल रहिल अधिको हिय काँपे~॥

आई सूर होइ तपु रे नाहाँ~। तेहि बिनु जाड़ न छूटे माँहँ~॥

एहि मास उपजै रस मूलू~। तूँ सो भँवर मोर जोबन फूलू~॥

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह पद्यांश रीतिकालीन काव्य परंपरा के अंतर्गत आता है जिसमें नायिका के प्रेम-विरह और उसकी मनोदशा का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है।


प्रसंग:

यह पद उस समय का चित्रण करता है जब नायिका अपने प्रिय के वियोग में तड़प रही है। ऋतु, मौसम, शरीर और मन — सब पर विरह का प्रभाव स्पष्ट झलकता है।


व्याख्या:

नायिका कहती है कि अब उस पर प्रेम का गहरा प्रभाव पड़ चुका है और वह मोहित हो चुकी है।

विरह का समय इतना कठोर और पीड़ादायक है कि यह शीत ऋतु की तरह हृदय को ठिठुरा देता है।

शरीर के प्रत्येक अंग में कंपन है, रोम-रोम काँप रहा है — यह कंपकंपी केवल ठंड की नहीं, बल्कि प्रिय से बिछोह की है।

उसका तप (सहनशक्ति) टूटने लगी है, और बिना प्रियतम के वह किसी भी ताप (कष्ट) को सहन नहीं कर सकती।

वह कहती है कि यही मास (मौसम) है जिसमें रस पैदा होता है — यह रस केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रेमरस है।

नायिका अपने प्रिय को ‘भँवरा’ और स्वयं को ‘फूल’ कहती है — यह अनुप्रासिक चित्रण प्रेम के सौंदर्य को गहराई से दर्शाता है।


निष्कर्ष:

यह काव्यांश विरह शृंगार का उत्कृष्ट उदाहरण है जिसमें ऋतु, शरीर और प्रेम का संबंध गहराई से जुड़ा हुआ है। नायिका की तड़प, संवेदना और प्रतीकात्मक भाषा भावप्रवण चित्र बनाते हैं।
Quick Tip: “भँवरा और फूल” जैसे प्रतीकों का प्रयोग श्रृंगार काव्य की विशिष्ट शैली है — इन्हें केवल सौंदर्य वर्णन न मानें, इनमें गहरी पीड़ा निहित होती है।


Question 27:

यह वह विश्वास, नहीं जो अपनी लघुता में भी काँपा,

वह पीड़ा, जिस की गहराई को स्वयं उसी ने नापा~;

कुर्स्ता, अपमान, अवज्ञा के धुँधलाते कड़वे तम में

यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक, अमुक्त – नेत्र,

उल्लंब-बाहु, यह चिर-अखंड अपनापा~।

जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भी भक्ति को दे दो --

यह दीप, अकेला, स्नेह भरा

है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो~।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह पद्यांश प्रसिद्ध कवि अज्ञेय की कविता “यह दीप अकेला” का अंश है, जिसमें कवि एक सशक्त, दृढ़ और निर्भीक आत्मा की गाथा गाता है। यह काव्य उस व्यक्ति की वंदना करता है जो भीतर से आहत होते हुए भी समाज और सृजन के प्रति समर्पित रहता है।


प्रसंग:

कवि यहाँ उस ‘दीप’ की प्रतीकात्मक व्याख्या करता है जो अकेला, स्नेह से भरा, किंतु समाज में उपेक्षित है। यह दीप प्रतीक है उस संवेदनशील रचनाकार का जो संघर्षों, अपमानों और अंधकार के बीच भी अपनी लौ को बुझने नहीं देता।


व्याख्या:

यह विश्वास वह नहीं है जो अपनी लघुता के कारण डगमगा जाए, बल्कि वह है जो भीतर की पीड़ा को भी नापता है।

कवि कहता है कि यह वह भावना है जो अज्ञान, अपमान और कुंठा के धुँधलके में भी आशा की मशाल जलाए रखती है।

यह अनुतप्त, जागरूक और अनभिव्यक्त भावनाओं की वह ऊर्जा है जो थकती नहीं, जो चिर-जीवंत समर्पण में रत रहती है।

यह केवल भावना नहीं, तपस्या है — जिसने पीड़ा को सहा है, जिया है, समझा है।

कवि इस आत्मा को ‘जिज्ञासु’, ‘प्रबुद्ध’, ‘श्रद्धामय’ कहकर संबोधित करता है और समाज से माँग करता है कि इसे भी अपनी “पंक्ति” में स्थान दिया जाए।

यह दीप अकेला है — फिर भी वह गर्व, स्नेह और धैर्य से भरा है। यह अपराजेय चेतना का प्रतीक है।


निष्कर्ष:

इस पद्यांश में कवि अज्ञेय ने रचनाकार, संवेदनशील व्यक्ति और समाज के उपेक्षित भावकों के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता की माँग की है। यह दीप वास्तव में आत्मबल, समर्पण और करुणा का प्रतीक है।
Quick Tip: यहाँ ‘दीप’, ‘विश्वास’, ‘स्नेह’ और ‘अपमान’ जैसे प्रतीकों के गहरे अर्थ हैं — उत्तर में उनके प्रतीकात्मक महत्व को स्पष्ट करना अत्यावश्यक है।


Question 28:

‘कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंग’ पंक्ति के माध्यम से राम के प्रति भरत के किस विश्वास का परिचय मिलता है?



(I) राम उनके आग्रह पर अयोध्या लौट चलेंगे।

(II) राम भरत से बहुत प्रेम करते हैं।

(III) राम उनका मन नहीं तोड़ेंगे।

(IV) राम उन्हें क्षमा कर देंगे।

  • (A) केवल (I)
  • (B) केवल (III)
  • (C) (I) और (III) दोनों
  • (D) (II) और (IV) दोनों
Correct Answer: (C) (I) और (III) दोनों
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‘कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंग’ — इस पंक्ति में भरत की राम पर गहन श्रद्धा और विश्वास झलकता है।

भरत को यह पूर्ण विश्वास है कि राम उनके आग्रह को टालेंगे नहीं।

वे मानते हैं कि राम कभी उनका मन नहीं तोड़ते, और यदि वे मन से विनती करेंगे, तो राम अवश्य अयोध्या लौटेंगे।

इस विश्वास से यह संकेत मिलता है कि भरत के लिए राम केवल भाई ही नहीं, बल्कि आदर्श भी हैं, जो सदा उनकी भावना का आदर करते हैं।

इस प्रकार (I) “राम उनके आग्रह पर अयोध्या लौट चलेंगे” और (III) “राम उनका मन नहीं तोड़ेंगे” — दोनों कथन उपयुक्त हैं।
Quick Tip: पद्यांश का भावार्थ केवल शाब्दिक नहीं, आत्मीय होना चाहिए — तभी सही विकल्प चुना जा सकता है।


Question 29:

राम की किस प्रकृति का वर्णन यहाँ किया गया है?

  • (A) कृपापूर्ण
  • (B) क्षमापूर्ण
  • (C) दयापूर्ण
  • (D) प्रेमपूर्ण
Correct Answer: (A) कृपापूर्ण
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पद्यांश की पंक्तियों में “मैं प्रभु कृपा भीख जोंही” और “त्रिलोकनाथ अति कृपालु” जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है।

इन पंक्तियों में कवि भरत यह संकेत करते हैं कि राम परम कृपालु हैं, जो सभी पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

यह ‘कृपापूर्ण’ स्वभाव उनके चरित्र की विशेषता है — वे करुणा और भक्ति से भरकर भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

भरत को आशा है कि प्रभु उनकी भी प्रार्थना स्वीकार करेंगे, क्योंकि वे कृपा के सागर हैं।

इसलिए विकल्प (A) “कृपापूर्ण” राम की प्रकृति का सबसे उपयुक्त वर्णन है।
Quick Tip: जब किसी पात्र की विशेषता पूछी जाए, तो मूल शब्दों और विशेषणों पर ध्यान दें — जैसे “कृपा”, “भीख”, “कृपालु”।


Question 30:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए:


कथन: भरत ने राम के समक्ष कभी मुँह नहीं खोला।

कारण: शिष्टाचार की परंपरा रही है कि बड़ों के सामने विनम्रता का व्यवहार किया जाता है।

  • (A) कथन गलत है किंतु कारण सही है।
  • (B) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
  • (C) कथन सही है किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  • (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।
Correct Answer: (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है।
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कथन सही है क्योंकि तुलसीदासजी के अनुसार भरत अत्यंत विनयी, मर्यादित और संयमी चरित्र हैं।

उन्होंने राम के समक्ष कभी अनुचित ढंग से अपनी बात नहीं रखी और सदा मर्यादा का पालन किया।

कारण भी उचित है — भारतीय संस्कृति में बड़ों के सामने शांत, शालीन और नम्र व्यवहार की परंपरा रही है।

भरत के व्यवहार में यह शिष्टाचार पूरी तरह परिलक्षित होता है।

इसलिए दोनों कथन और कारण सही हैं तथा कारण, कथन की उपयुक्त व्याख्या करता है।
Quick Tip: ‘कथन-कारण’ आधारित प्रश्नों में यह अवश्य देखें कि क्या कारण वास्तव में कथन को स्पष्ट करता है या केवल संबंधित लगता है।


Question 31:

भरत ने राम के स्वभाव की किस विशेषता का उल्लेख किया है?

  • (A) दूसरों पर दया करने की
  • (B) शत्रु को क्षमा करने की
  • (C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की
  • (D) शरणागत पर कृपा करने की
Correct Answer: (C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की
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पद्यांश में भरत राम के उस स्वभाव का वर्णन करते हैं जिसमें वे अत्यंत शांत, संयमी और क्षमाशील हैं।

भरत कहते हैं कि राम तो ऐसे हैं कि वे अपराधी पर भी क्रोध नहीं करते, और किसी का भी अपकार नहीं सोचते।

उनका यह भाव उनके ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ स्वरूप को प्रमाणित करता है।

यह विशेषता केवल उदारता नहीं बल्कि पूर्ण आत्मसंयम और क्षमा के आदर्श को दर्शाती है।

इसलिए विकल्प (C) “अपराधी पर भी क्रोध न करने की” सबसे उपयुक्त है।
Quick Tip: जब स्वभाव की विशेषता पूछी जाए, तो पात्र की सबसे विशिष्ट और चरम प्रतिक्रिया पर ध्यान दें — जैसे राम की क्रोधहीनता।


Question 32:

‘पुलकि सरीर सभाँ भए ठाड़े’ — पंक्ति के माध्यम से किसकी मनोदशा का वर्णन किया गया है?

  • (A) भरत
  • (B) राम
  • (C) लक्ष्मण
  • (D) कैकेयी
Correct Answer: (A) भरत
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‘पुलकि सरीर सभाँ भए ठाड़े’ — इस पंक्ति में “पुलकित शरीर” और “स्तब्ध खड़े रह जाना” जैसे भावों से भरत की मनोदशा को चित्रित किया गया है।

भरत राम के दर्शन से अत्यंत भावविभोर हो जाते हैं।

वे इतने अधिक भावुक और श्रद्धावान हो जाते हैं कि उनका शरीर रोमांचित हो उठता है और वे अवाक् होकर खड़े रह जाते हैं।

यह चित्रण केवल भौतिक स्थिति नहीं, बल्कि भरत की आत्मिक भक्ति और राम के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है।

इसलिए सही उत्तर है — (A) भरत।
Quick Tip: पद में प्रयुक्त क्रियाओं (जैसे “पुलकि”, “सभाँ भए ठाड़े”) के आधार पर पात्र की पहचान करें — ये मनोदशा के संकेत होते हैं।


Question 33:

‘देवसेना का गीत’ से उद्धृत ‘मेरी करुणा हा-हा खाती’ पंक्ति के सन्दर्भ में देवसेना की विरह वेदना को स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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यह पंक्ति देवसेना के उस मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को प्रकट करती है जब वह अपने प्रिय की अनुपस्थिति में अपार पीड़ा अनुभव कर रही होती है।

“हा-हा खाती” में विलाप, व्याकुलता और हताशा का तीव्र स्वर है।

कवयित्री देवसेना की स्थिति ऐसी है कि करुणा स्वयं उसका हृदय चीरती प्रतीत होती है — वह पीड़ा इतनी गहरी है कि वह स्वयं ही अपना विलाप सुन रही है।

यह आत्म-अभिव्यक्ति उसकी निर्बलता नहीं बल्कि उसकी भावप्रवणता और संवेदनशीलता को दर्शाती है।

विरह की यह अवस्था उसे अंधकार, अकेलापन और आंतरिक टूटन से भर देती है।
Quick Tip: ‘हा-हा’ जैसे ध्वन्यात्मक शब्दों में नायिका की पीड़ा का उच्चतम रूप प्रकट होता है — इनका भाव स्पष्ट करें।


Question 34:

‘बनारस’ कविता में प्रयुक्त ‘धीरे-धीरे’ विशेषण बनारस शहर की किस विशेषता को प्रकट करता है?

Correct Answer:
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‘धीरे-धीरे’ विशेषण बनारस शहर की उस सांस्कृतिक गति को दर्शाता है जो शोर-शराबे और भाग-दौड़ से परे है।

यहाँ जीवन, मृत्यु, धर्म, उत्सव और शृंगार — सब कुछ सहज गति से घटता है।

बनारस का समय ठहरा नहीं है, पर वह जल्दबाज़ नहीं — वह परंपरा, स्मृति और चेतना में धीरे-धीरे बहता है।

यह विशेषण बताता है कि बनारस की आत्मा आक्रामक नहीं, बल्कि आत्मीय, चिंतनशील और धैर्यशील है।

‘धीरे-धीरे’ में एक शांति, स्थिरता और गहराई छिपी है जो बनारस की सबसे अनूठी पहचान है।
Quick Tip: ‘धीरे-धीरे’ केवल गति नहीं, बनारस की आत्मा और जीवन-दृष्टि का प्रतीक है — उत्तर में यही भाव उभारेँ।


Question 35:

‘तोड़ो’ कविता के सन्दर्भ में लिखिए कि ‘जोड़ने’ से पूर्व ‘तोड़ने’ की प्रक्रिया क्यों आवश्यक है?

Correct Answer:
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‘तोड़ो’ कविता में कवि संकेत करता है कि समाज में व्याप्त रूढ़ियाँ, अंधविश्वास, अन्याय और परंपरागत जड़ताएँ व्यक्ति की स्वतंत्रता और सृजनशीलता को रोकती हैं।

जब तक इन बाधाओं को ‘तोड़ा’ नहीं जाएगा, तब तक कोई नया समाज, विचार या संबंध ‘जुड़’ नहीं सकता।

यह तोड़ना विनाश के लिए नहीं, बल्कि नव निर्माण के लिए है।

कवि यह स्पष्ट करता है कि सच्चा जोड़ वहीं संभव है जहाँ पुराने, अप्रामाणिक ढाँचे नष्ट कर दिए गए हों।

इसलिए ‘तोड़ो’ एक चेतना है — एक चुनौती है — एक जागरण है जो ‘जोड़ो’ की नींव तैयार करता है।
Quick Tip: ‘तोड़ो’ का अर्थ नकारात्मक रूप में न लें — यह रचनात्मक बदलाव की पूर्वशर्त है।


Question 36:

(क)
बड़ी हवेली अब नाममात्र को ही बड़ी हवेली है~।

जहाँ दिनभर नौकर-नौकरानियाँ और जन-मज़दूरों की भीड़ लगी रहती थी,

वहाँ आज हवेली की बड़ी बहुरिया अपने हाथ से सूखा में अनाज लेकर फटक रही है~।

इन हाथों से सिर्फ़ मेंहदी लगाकर ही गाँव नाइन परिवार पालती थी~।

कहाँ गए वे दिन~? हरगोबिन ने लंबी साँस ली~।

\medskip

बड़े बैसा के मरने के बाद ही तीनों भाइयों ने आपस में लड़ाई-झगड़ा शुरू किया~।

देवता ने जमीन पर दावे करके दबाव किया, फिर तीनों भाई गाँव छोड़कर शहर में जा बसे,

रह गई बड़ी बहुरिया — कहाँ जाती बेचारी~! भगवान भले आदमी को ही कष्ट देते हैं~।

नहीं तो पट्टे की बीघा में बड़े बैसा क्यों मरते~?

\ldots{बड़ी बहुरिया की देह से जेवर खींच-खींचकर बँटवारे की लालच पूरी हुई~।

हरगोबिन ने देखती हुई आँखों से दीवार तोड़-झरोन लोहा

बनारसी साड़ी को तीन टुकड़े करके बँटवारा किया था, निर्दय भाइयों ने~।

बेचारी बड़ी बहुरिया~!

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह गद्यांश पाठ ‘संवदिया’ से लिया गया है, जिसमें लेखक ने एक सामंती परिवार की पतनशील अवस्था का चित्रण किया है। यह अंश समाज में घट रही सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक टूटन का प्रतीक है।


प्रसंग:

यह गद्यांश उस समय का चित्रण करता है जब हरगोबिन बड़ी हवेली आता है और वहाँ की वीरानी देखकर चौंक उठता है। वह स्थान, जहाँ कभी रौनक और वैभव था, अब उजाड़ और निष्प्राण हो गया है।


व्याख्या:

बड़ी हवेली, जो कभी संपन्नता, वैभव और जनसंपर्क का केंद्र थी — अब केवल एक नाम भर रह गई है।

जहाँ पहले नौकर-चाकरों और किसानों की चहल-पहल थी, वहीं अब केवल बड़ी बहुरिया अकेले अपने हाथों से चूल्हा-चौका करती दिखाई देती है।

हरगोबिन के मन में प्रश्न उठता है — कहाँ गए वे दिन, वह समृद्धि, वह परिवार का साझा जीवन?

गद्यांश के अगले भाग में स्पष्ट होता है कि बड़े भैया की मृत्यु के बाद तीनों भाइयों में आपसी झगड़े, ज़मीन-जायदाद का बँटवारा, और रिश्तों की दरारें बढ़ गईं।

तीनों भाई गाँव छोड़कर शहर चले गए और बड़ी बहुरिया को अकेला छोड़ दिया। न वह घर की रही, न समाज की।

यह चित्रण केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने का पतन है जहाँ संयुक्त परिवार और आत्मीयता की भावना थी।


निष्कर्ष:

यह गद्यांश सामंती संस्कृति के विघटन, पारिवारिक एकता के ह्रास और स्त्री की उपेक्षा का गहन चित्र प्रस्तुत करता है। बड़ी हवेली की वीरानी दरअसल बदलते समाज की चेतावनी है।
Quick Tip: ‘बड़ी हवेली’ यहाँ केवल भवन नहीं, एक सांस्कृतिक और पारिवारिक व्यवस्था का प्रतीक है — उत्तर में यह प्रतीक स्पष्ट करें।


Question 37:

शिवालिक की सूखी नीसर पहाड़ियों पर मुस्कुराते हुए ये वृक्ष खड़ेताली हैं, अलमस्त हैं~।

मैं किसी का नाम नहीं जानता, कुल नहीं जानता, शील नहीं जानता पर लगता है,

ये जैसे मुझे अनादि काल से जानते हैं~।

इनमें से एक छोटा-सा, बहुत ही भोला पेड़ है, पत्ते छोटे भी हैं, बड़े भी हैं~।

फूलों से तो ऐसा लगता है कि कुछ पूछते रहते हैं~।

अनजाने की आदत है, मुस्कुराना जान पड़ता है~।

मन ही मन ऐसा लगता है कि क्या मुझे भी इन्हें पहचानता~?

पहचानता तो हूँ, अथवा वहम है~।

लगता है, बहुत बार देख चुका हूँ~।

पहचानता हूँ~।

उजाले के साथ, मुझे उसकी छाया पहचानती है~।

नाम भूल जाता हूँ~।

प्रायः भूल जाता हूँ~।

रूप देखकर सोच: पहचान जाता हूँ, नाम नहीं आता~।

पर नाम ऐसा है कि जब वह पेड़ के पहले ही हाज़िर हो ले जाए तब तक का रूप की पहचान अपूर्ण रह जाती है।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:

यह गद्यांश एक दार्शनिक और आत्ममंथन से भरा हुआ चित्र है जिसमें लेखक शिवालिक की पहाड़ियों पर खड़े अनाम वृक्षों के माध्यम से व्यक्ति की पहचान और उसकी सीमाओं की बात करता है। यह प्रकृति के माध्यम से आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करता है।


प्रसंग:

लेखक पहाड़ियों पर उगे ऐसे वृक्षों को देखता है जिनके न तो नाम पता हैं, न जात-पाँत, न कुल-शील। फिर भी वे वहाँ खड़े हैं — अस्तित्व में हैं। लेखक उनके अस्तित्व से अपनी पहचान की जटिलता की तुलना करता है।


व्याख्या:

लेखक कहता है — मैं इन वृक्षों का कुछ नहीं जानता — न नाम, न कुल, न गुण — जैसे कोई मुझे अनादि काल से जानता हो।

वह एक छोटा-सा पेड़ देखता है, जिसका न कोई नाम है, न पहचान — फिर भी वह मुस्कुराता है।

यह दृश्य लेखक को झकझोरता है — क्या पहचान का आधार नाम और रूप ही है?

लेखक इस द्वंद्व को स्वीकार करता है — वह कहता है कि पहचानने का अर्थ केवल जानना नहीं होता, पहचानने का अर्थ है “पहचान पाना”।

नाम और रूप मिलने से पहले जो अनुभूति आती है — वही असली पहचान होती है। यह एक आध्यात्मिक और गूढ़ भाव है कि कभी-कभी हम कुछ को बिना जाने भी पहचान लेते हैं।

यह गद्यांश बाह्य जानकारी और आंतरिक बोध के भेद को स्पष्ट करता है।


निष्कर्ष:

यह गद्यांश दर्शन, आत्मबोध और पहचान की प्रक्रिया पर आधारित है। लेखक ने प्रकृति के माध्यम से गहन विचार प्रकट किया है कि नाम, वंश और विशेषता से परे भी पहचान संभव है — जब हृदय स्वतः कहे — “मैं जानता हूँ इसे”।
Quick Tip: ‘पहचान’ और ‘जानना’ दो अलग भाव हैं — उत्तर में इनके बीच का अंतर स्पष्ट करें; यही लेखक का मूल संदेश है।


Question 38:

लेखक के पिता की किसमें रुचि थी?

  • (A) फ़ारसी और हिंदी भाषा मिलाने में
  • (B) फ़ारसी और हिंदी गद्य मिलाने में
  • (C) नाटक और कविता मिलाकर पढ़ने में
  • (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में
Correct Answer: (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में
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पाठ में यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि लेखक के पिता को हिंदी और फ़ारसी की उक्ति-शैली को मिलाकर बोलने में विशेष आनंद आता था।

वे दोनों भाषाओं की अभिव्यक्तियों, मुहावरों और कहावतों को मिलाकर एक विशेष प्रकार की भाषिक शैली में संवाद करते थे।

यह उनकी भाषाई सौंदर्य-बोध और सांस्कृतिक समन्वय की रुचि को दर्शाता है।

इसलिए सबसे उपयुक्त उत्तर है — (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में।
Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में पाठ के वर्णनात्मक अंशों को ध्यान से पढ़ें — विशेष रूप से पात्र की आदत, व्यवहार या भाषा शैली से संबंधित।


Question 39:

गद्यांश में रामचरितमानस और रामचंद्रिका का उल्लेख क्यों किया गया है?

  • (A) हिंदी साहित्य के विराट रूप का परिचय देने के लिए।
  • (B) घर के धार्मिक वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
  • (C) लेखक के पिता की भक्ति भावना का उल्लेख करने के लिए।
  • (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
Correct Answer: (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
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पाठ में लेखक ने अपने पारिवारिक वातावरण का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस और रामचंद्रिका जैसे ग्रंथों का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

ये दोनों ग्रंथ उस समय न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से भी घर-घर में पढ़े और सुने जाते थे।

इन ग्रंथों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि लेखक का पारिवारिक वातावरण धार्मिक ही नहीं, बल्कि साहित्यिक रुचियों से भी परिपूर्ण था।

पिता द्वारा इन ग्रंथों का अध्ययन और उनके भावों की प्रस्तुति, इस साहित्यिक वातावरण को और भी जीवंत बनाती है।

अतः सही उत्तर है — (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए।
Quick Tip: जब दो ग्रंथों का विशेष रूप से उल्लेख हो, तो यह देखें कि उनका प्रयोजन धार्मिक है या साहित्यिक वातावरण चित्रित करना — संदर्भ महत्वपूर्ण है।


Question 40:

लेखक के मन में भारतेन्दु के संबंध में मधुर भावना जागने का कारण था –

  • (A) पिता द्वारा चिताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना।
  • (B) हिंदी साहित्य जगत के प्रसिद्ध कवि और नाटककार होना।
  • (C) बचपन में सत्य हरिशचंद्र नाटकों का मंचन करना।
  • (D) बचपन में सत्य हरिशचंद्र के नाटकों का मंचन देखना।
Correct Answer: (A) पिता द्वारा चिताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना।
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लेखक के हृदय में भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रति जो विशेष स्नेह और श्रद्धा उत्पन्न हुई, उसका प्रमुख कारण था—

उनके पिता द्वारा भारतेन्दु के नाटकों का भावपूर्ण एवं चिताकर्षक ढंग से पाठ करना।

लेखक बचपन में जब अपने पिता से इन नाटकों को सुनते थे, तो वे पात्र और घटनाएँ उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती थीं।

इस प्रक्रिया ने लेखक की भावनाओं में भारतेन्दु के प्रति मधुर भावना और गहरी आत्मीयता उत्पन्न की।

यह स्पष्ट करता है कि साहित्यिक अभिरुचि का विकास बाल्यकाल में पारिवारिक वातावरण द्वारा होता है।

लेखक ने स्वयं बताया है कि पिता की वाणी और उनका भाव प्रदर्शन नाटकों को जीवंत बना देता था,

जिससे लेखक का मन भारतेन्दु की रचनात्मकता की ओर खिंचता चला गया।
Quick Tip: लेखक के बचपन की घटनाओं और पारिवारिक प्रभावों को समझना साहित्यिक रुचियों के विकास को जानने का सशक्त माध्यम है।


Question 41:

गद्यांश में प्रयुक्त ‘अवस्था’ शब्द का अर्थ है –

  • (A) हालत
  • (B) दशा
  • (C) आयु
  • (D) स्थिति
Correct Answer: (C) आयु
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‘अवस्था’ शब्द का अर्थ गद्यांश में उस स्थिति को दर्शाने के लिए किया गया है, जहाँ किसी व्यक्ति की उम्र या जीवन काल को इंगित किया गया है। यह शब्द कई संदर्भों में प्रयुक्त हो सकता है, लेकिन यहाँ इसका अर्थ स्पष्ट रूप से ‘आयु’ है, जो जीवन की अवस्था को सूचित करता है। इसलिए सही उत्तर है — (C) आयु।
Quick Tip: प्रश्न में प्रयुक्त शब्द का सही अर्थ समझने के लिए उसका संदर्भ अवश्य देखें। 'अवस्था' जैसे शब्द विभिन्न संदर्भों में भिन्न अर्थ दे सकते हैं।


Question 42:

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :


कथन: बचपन में लेखक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र में कोई अंतर नहीं कर पाता था।

कारण: लेखक की बाल–बुद्धि नाम की समानता के कारण दोनों को एक ही समझती थी।

  • (A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  • (B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  • (C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
  • (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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इस प्रश्न में लेखक के बचपन की सोच और तर्क को दर्शाया गया है। लेखक बचपन में राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र को एक ही समझता था क्योंकि नाम समान थे।

बाल्यावस्था में तर्कशीलता की जगह नाम जैसी चीजों से पहचान बनाई जाती है।

इसलिए कथन सही है और उसका कारण भी पूरी तरह उपयुक्त है।

कारण स्पष्ट रूप से कथन की व्याख्या करता है, जिससे यह उत्तर सबसे उचित बनता है।
Quick Tip: 'कथन और कारण' आधारित प्रश्नों में दोनों वाक्यों को स्वतंत्र और फिर संयुक्त रूप से जांचें — तभी सही उत्तर सुनिश्चित किया जा सकता है।


Question 43:

‘उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ जी के बातचीत करने में एक विलक्षण वक्रता थी।’ उदाहरण सहित इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Correct Answer:
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‘प्रेमघन’ जी की भाषा में व्यंग्य, चातुर्य और तीव्र बौद्धिकता की अनूठी झलक मिलती थी। उनकी वक्रोक्ति शैली सुनने वाले को गहरे तक प्रभावित करती थी।

‘प्रेमचन्द की छाया स्मृति’ पाठ में लेखक उल्लेख करता है कि प्रेमघन जी बातों ही बातों में किसी की मूर्खता को उजागर कर देते थे।

उदाहरण के लिए, जब किसी ने उन्हें कहा कि वह अंग्रेज़ी नहीं पढ़ सकता, तो प्रेमघन जी बोले — “तब तुम संस्कृत पढ़ लो, जिससे और कुछ न हो, चेहरा तो गंभीर बना रहेगा।”

यहाँ स्पष्ट होता है कि उनकी वाणी में चतुरता और हास्य के साथ-साथ एक गूढ़ बौद्धिक व्यंग्य भी होता था।
Quick Tip: प्रमाण के लिए पाठ से वाक्यात्मक उदाहरण ज़रूर दें, ताकि “वक्रता” की विशेषता स्पष्ट हो।


Question 44:

‘बड़े भैया के मरने के बाद ही जैसे सब खेल खत्म हो गया।’ — ‘संवदिया’ पाठ से उद्धृत इस कथन में किस खेल के खत्म होने की बात हो रही है? स्पष्ट कीजिए।

Correct Answer:
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यह कथन ‘संवदिया’ पाठ में एक गहरी पारिवारिक और सामाजिक त्रासदी को प्रकट करता है।

‘खेल खत्म हो गया’ से आशय है — संयुक्त परिवार, आपसी संबंधों, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक समृद्धि का अंत।

बड़े भैया के जीवित रहते परिवार एकजुट था, हवेली आबाद थी, नौकर-चाकर और बहुरिया की इज्जत थी।

उनकी मृत्यु के बाद भाइयों में झगड़ा हुआ, ज़मीन-जायदाद बंट गई, और सब शहर भाग गए — हवेली सूनी हो गई।

इस प्रकार यह कथन दर्शाता है कि एक व्यक्ति की उपस्थिति परिवार की नींव थी — उसके जाने से सब बिखर गया।
Quick Tip: ‘खेल’ का अर्थ प्रतीकात्मक है — केवल गतिविधियाँ नहीं, बल्कि संयुक्त जीवन का प्रतीक।


Question 45:

औद्योगीकरण के नाम पर अपने घर और गाँव से विस्थापित लोगों की स्थिति का वर्णन ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के सन्दर्भ में कीजिए।

Correct Answer:
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‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ में लेखक ने ग्रामीण क्षेत्र से शहरी उद्योगों के लिए विस्थापित लोगों की पीड़ा को व्यक्त किया है।

औद्योगीकरण के नाम पर जिन लोगों को उनके खेत, घर और ज़मीन से हटाया गया, उन्हें कभी भी उनकी पूर्ण गरिमा नहीं मिल सकी।

लेखक बताता है कि ये लोग शहरों में मजदूरी करते हैं, अनजान गलियों में खो जाते हैं, और उनकी पहचान मिट जाती है।

वह यह भी कहता है कि ये लोग कभी वापस नहीं लौटते — न शारीरिक रूप से, न मानसिक रूप से।

औद्योगीकरण का विकास उन लोगों के लिए विनाश बन गया है जो अपनी माटी से उखाड़ दिए गए हैं।
Quick Tip: विस्थापन केवल भौगोलिक नहीं — सांस्कृतिक और भावनात्मक पीड़ा का कारण भी है। उत्तर में यह भाव अवश्य दिखे।


Question 46:

‘सूरदास की झोंपड़ी’ से उद्धृत कथन “हम सो लाख बार घर बनाएँगे” के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक सोच का होना क्यों अनिवार्य है।

Correct Answer:
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यह कथन आशा, आत्मबल और जीवटता का प्रतीक है। सूरदास की झोंपड़ी भले ही उजड़ जाती है, लेकिन उनका संकल्प अडिग है — “हम लाख बार घर बनाएँगे”।

यह सकारात्मक सोच हमें जीवन की कठिनाइयों से जूझने का संबल देती है।

जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, परंतु जो व्यक्ति विफलताओं से डरता नहीं, बल्कि उनसे सीखकर पुनः खड़ा होता है, वही आगे बढ़ता है।

सूरदास जैसे चरित्र हमें सिखाते हैं कि केवल सुविधाएँ नहीं, बल्कि साहस और सकारात्मक दृष्टि जीवन निर्माण की असली नींव हैं।
Quick Tip: “सकारात्मक सोच” को केवल भावना नहीं — व्यवहार में उतारने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत करें।


Question 47:

‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में वर्णित ग्रामीण जीवन की झाँकी प्रस्तुत कीजिए।

Correct Answer:
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‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में लेखक ने उत्तर प्रदेश के बिस्कोहर गाँव के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति, आपसी सहयोग और आत्मगौरव का मार्मिक चित्र खींचा है।

गाँव में रहने वाले पात्र जैसे — रामलखन मिश्र, बड़की बहू, चौधरी — सभी अपने-अपने ढंग से गाँव की आत्मा को जीवित रखते हैं।

यहाँ जीवन भले ही कठिन और सीमित संसाधनों वाला है, लेकिन संबंधों में अपनापन, भाषा में मिठास और स्वभाव में सादगी स्पष्ट दिखती है।

ग्राम्य जीवन के रीति-रिवाज़, मेल-जोल, धार्मिकता, और श्रमशीलता पाठ में सहज रूप से प्रकट हुए हैं।
Quick Tip: झाँकी केवल दृश्य चित्र नहीं — उसमें भाव, परंपरा और संबंध की आत्मा भी समाहित करें।


Question 48:

‘डगा-डगा रोटी पग-पग नीर’ वाले मालवा की वर्तमान स्थिति ‘अपना मालवा खाऊ-उजाऊ सभ्यता में’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। स्थिति के कारणों को स्पष्ट करते हुए यह भी लिखिए कि इसे कैसे सुधारा जा सकता है।

Correct Answer:
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कभी हरियाली और जल-संपन्नता के लिए प्रसिद्ध मालवा आज सूखा, पलायन और बेरोजगारी से जूझ रहा है।

पाठ में बताया गया है कि मालवा की पहचान रही उपजाऊ भूमि, जल संसाधन और संतुलित पर्यावरण — अब अंधाधुंध बोरिंग, रासायनिक खेती, और जल-जंगल का दोहन होने से नष्टप्राय हैं।

कृषि पर निर्भर ग्रामीण जीवन संकट में है और लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

इस स्थिति से उबरने के लिए पारंपरिक जल-संचयन, जैविक खेती, वृक्षारोपण और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है।

मालवा की मिट्टी की गरिमा को पुनः स्थापित करने के लिए जन-जागरूकता और नीति-सहायता दोनों जरूरी हैं।
Quick Tip: कारण और समाधान दोनों संतुलित रूप से उत्तर में सम्मिलित हों — तभी उत्तर प्रभावी होगा।

*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.

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