
CBSE Class 12 Hindi Elective exam was conducted on March 15, 2025 from 10:30 AM to 1:30 PM. 16.9 lakh students appeared for the exam across 7,330 centers in India and 26 other countries.
The Hindi Elective Question paper is divided into three parts: Reading Comprehension, Writing Skills, and Literature, with an aggregate of 80 marks for the theory paper and 20 marks given for internal assessment.
The paper contains a combination of Multiple Choice Questions (MCQs) (20%), Short Answer Questions (30%), and Long Answer Questions (50%), intended to measure students' understanding, language skill, and literary analysis.
CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 PDF (Set 3 - 29/2/3) is available for download here.
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इस समस्या के समाधान के लिए मजबूत इच्छाशक्ति के साथ सामूहिक रूप से सही दिशा में कदम उठाना होगा।
जंगलों को शीतलता और हरियाली का प्रतीक क्यों माना जाता है ?
गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वन पारिस्थितिक तंत्र का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें शीतलता का प्रतीक माना जाता है।
आगे बताया गया है कि ये धरती के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं, जिसके बिगड़ने से अब समस्याएँ आ रही हैं।
विकल्प (B) गद्यांश के केंद्रीय वैज्ञानिक तर्क "तापमान नियंत्रण" के सबसे निकट है।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में वैज्ञानिक या तथ्यात्मक कारणों को प्राथमिकता दें, न कि केवल भावनात्मक या सौंदर्यपरक विकल्पों को।
सूखे की अवधि बढ़ने से क्या अभिप्राय है ? इस प्रश्न के उत्तर में दिए गए कथनों में से कौन सा/से कथन सत्य हैं ?
(I) लंबे समय तक वर्षा का न होना ।
(II) पेड़-पौधों पर फल-फूलों का न होना ।
(III) लंबी अवधि तक तापमान का गरम बने रहना ।
(IV) हवा में नमी की मात्रा का कम होना ।
गद्यांश में " 'dry period' यानी सूखे की अवधि" का उल्लेख है, जिसका सामान्य अर्थ लंबी अवधि तक वर्षा न होना (I) है।
साथ ही, गद्यांश में लिखा है, "तापमान बढ़ रहा है जिसके कारण नमी कम हो रही है", जो कथन (IV) की पुष्टि करता है।
अतः (I) और (IV) दोनों कथन गद्यांश के संदर्भ में सही स्थिति को दर्शाते हैं।
Quick Tip: 'अभिप्राय' पूछते समय गद्यांश में दिए गए कारण और प्रभाव (Cause and Effect) दोनों को ध्यान में रखकर विकल्प चुनें।
निम्नलिखित कथन तथा परिणाम को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन : जलवायु परिवर्तन के कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है ।
परिणाम : वातावरण में नमी कम हो रही है और दावानल की घटनाएँ बढ़ रही हैं ।
गद्यांश की पहली वजह में स्पष्ट लिखा है: "जलवायु परिवर्तन के कारण... तापमान बढ़ रहा है" (कथन सत्य)।
इसके आगे लिखा है: "जिसके कारण नमी कम हो रही है... नतीजातन जंगलों में... आग (दावानल) की घटनाएँ... सामने आने लगी हैं" (परिणाम सत्य)।
अतः कथन और परिणाम दोनों गद्यांश के अनुसार पूर्णतः सही हैं।
Quick Tip: गद्यांश में 'जिसके कारण' या 'नतीजतन' जैसे योजक शब्दों (Connectors) से कथन और परिणाम के संबंध की पुष्टि करें।
'वनोपज' से क्या अभिप्राय है ? उदाहरण सहित लिखिए ।
'वनोपज' शब्द 'वन' + 'उपज' से बना है, जिसका अर्थ है वनों से प्राप्त होने वाली सामग्री या उत्पाद।
उदाहरण के लिए: सूखी लकड़ी, घास, गोंद, शहद, फल, जड़ी-बूटियाँ आदि।
गद्यांश में बताया गया है कि लोग इन्हीं वनोपजों से अपना गुजारा करते थे।
Quick Tip: संधि-विच्छेद (वन + उपज) के माध्यम से शब्द का अर्थ निकालें और सामान्य ज्ञान से उदाहरण जोड़ें।
जंगल की आग अब रिहायशी इलाकों तक क्यों पहुँचने लगी है ?
गद्यांश के अनुसार, लोगों ने खुद को वनों से अलग कर लिया है, जिससे वनों का प्रबंधन रुक गया है।
वन बढ़ते हुए गाँवों तक पहुँच गए हैं (या गाँवों का विस्तार वनों की ओर हुआ है)।
लोगों की वनों पर निर्भरता कम होने से वे आग बुझाने में रुचि नहीं लेते, जिससे आग फैलकर रिहायशी इलाकों तक आ जाती है।
Quick Tip: उत्तर में 'मानवीय अलगाव' (Human disconnect) और 'भौगोलिक विस्तार' (Expansion) दोनों बिंदुओं का समावेश करें।
मनुष्य का जंगलों से रिश्ता खत्म होने के क्या दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं ?
रिश्ता खत्म होने से स्थानीय लोगों ने वनों का प्रबंधन और सफाई (सूखी पत्तियों को हटाना) बंद कर दिया है।
इसके फलस्वरूप जंगलों में आग (दावानल) की घटनाएँ अनियंत्रित हो गई हैं।
अब लोग आग बुझाने का प्रयास नहीं करते, जिससे वन संपदा और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
Quick Tip: 'दुष्परिणाम' में समस्या के बढ़ने और नियंत्रण के समाप्त होने की बात लिखें।
बढ़ते तापमान का जंगलों की आग से क्या संबंध है ?
तापमान बढ़ने से वातावरण और मिट्टी में नमी कम हो जाती है।
नमी की कमी से पेड़-पौधे और पत्तियाँ (विशेषकर चीड़ की) सूख जाती हैं और अत्यधिक ज्वलनशील हो जाती हैं।
मार्च-अप्रैल में उच्च तापमान के कारण ये सूखी पत्तियाँ 'बारूद' की तरह काम करती हैं, जिससे आग तेजी से फैलती है।
Quick Tip: वैज्ञानिक चक्र को समझाएं: तापमान वृद्धि \(\rightarrow\) शुष्कता \(\rightarrow\) आग।
'है आधी रात अर्ध जग पड़ा अँधेरे में' - पंक्ति के संदर्भ में लिखिए कि अँधेरे में जगने वाला 'आधा जग' कौन है ?
कविता में समाज को दो वर्गों में बाँटा गया है: एक जो 'सुख की दुनिया' है और सो रहा है (संपन्न वर्ग)।
दूसरा 'आधा जग' जो अँधेरे (दुःख/अभाव) में जाग रहा है।
प्रगतिवादी साहित्य में यह 'जागने वाला' वर्ग श्रमिक या शोषित वर्ग होता है जो संघर्ष कर रहा है।
Quick Tip: 'अँधेरा' यहाँ दुःख और संघर्ष का प्रतीक है, और उसमें जीने वाला वर्ग शोषित वर्ग है।
'मिट्टी में मिले सितारे' से क्या अभिप्राय है ?
'सितारे' चमक और प्रतिभा का प्रतीक हैं और 'मिट्टी' निम्न या गरीब परिवेश का।
कवि उन वीरों की बात कर रहा है जो गरीबी में जन्म लेने के बावजूद 'प्रलय' लाने की क्षमता रखते हैं।
अगली पंक्तियों में 'राख ढके अंगारे' भी इसी विद्रोही स्वभाव की पुष्टि करता है, अतः 'क्रांतिवीर' सही है।
Quick Tip: काव्यांश के तेवर (Revolutionary tone) को पहचानें। 'अंगारे' और 'प्रलय' शब्द क्रांति की ओर इशारा करते हैं।
निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए ।
कथन : सुविधाभोगी संपन्न वर्ग अपने महलों में सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है ।
कारण : आधा संसार अर्ध रात्रि में भी जागकर उनकी रक्षा कर रहा है ।
कथन सत्य है: काव्यांश में 'सुख की दुनिया सोती' है, अर्थात संपन्न वर्ग निश्चिंत है।
कारण सत्य है: 'आधा जग' जाग रहा है। सामाजिक व्यवस्था में, श्रमिक/सेवक वर्ग (चौकीदार, पुलिस, मजदूर) के जागने और कार्य करने के कारण ही संपन्न वर्ग सुरक्षित सो पाता है।
इसलिए, शोषितों का 'जागना' (श्रम/रक्षा) ही अमीरों के 'सोने' (सुख) का आधार है। यह एक कटु सत्य है जिसे कवि उभार रहा है।
Quick Tip: सामाजिक सत्य (Social Reality) को समझें—संपन्नता अक्सर दूसरों के श्रम और त्याग पर टिकी होती है।
'हम सोच रहे ...... हम बिराने हैं ' - पंक्ति क्या संकेत करती है ?
'बिराने' का अर्थ है 'पराया' या 'अजनबी'।
कवि यह संकेत कर रहा है कि अपने ही देश या समाज (घर) में शोषित वर्ग को परायापन महसूस हो रहा है।
उनके पुराने संबंध टूट गए हैं और उन्हें समाज की मुख्य धारा से अलग-थलग कर दिया गया है।
Quick Tip: 'बिराना' शब्द 'Alienation' (अलगाव) की भावना को व्यक्त करता है।
'हम राख नहीं हैं राख ढके अंगारे हैं' - पंक्ति का क्या आशय है ?
'राख' ऊपर से शांत और ठंडी दिखती है, लेकिन उसके नीचे 'अंगारे' (आग) छिपी हो सकती है।
इसका आशय है कि शोषित वर्ग को कमजोर या निस्तेज न समझा जाए; उनके भीतर क्रोध और क्रांति की आग धधक रही है।
वे समय आने पर जल उठेंगे और अन्याय का प्रतिकार करेंगे।
Quick Tip: प्रतीकात्मक अर्थ: राख = निष्क्रियता, अंगारे = शक्ति/क्रोध।
'हर बार धरा पर हमने प्रलय उतारे हैं' - पंक्ति के संदर्भ में शोषित वर्ग के सामर्थ्य का उल्लेख कीजिए ।
'प्रलय' का अर्थ है विनाश, लेकिन यहाँ यह पुरानी दमनकारी व्यवस्था के विनाश और बदलाव के संदर्भ में है।
यह पंक्ति शोषित वर्ग की अपार शक्ति को दर्शाती है कि वे केवल सहने के लिए नहीं हैं, बल्कि वे इतिहास बदलने की ताकत रखते हैं।
जब भी अत्याचार बढ़ता है, आम आदमी ही क्रांति लाकर सत्ता को पलटता है।
Quick Tip: साहित्य में 'प्रलय' अक्सर 'क्रांति' (Revolution) का पर्याय होता है जो नवनिर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।
पत्रकारिता की भाषा में 'डेड लाइन' से आप क्या समझते हैं ? (शब्द सीमा - लगभग 20 शब्द)
समाचार माध्यमों में किसी समाचार को कवर करने या उसे प्रकाशित/प्रसारित करने के लिए निर्धारित अंतिम समय-सीमा को 'डेड लाइन' (Deadline) कहते हैं।
इसके बाद प्राप्त समाचार का महत्त्व कम या समाप्त हो जाता है।
Quick Tip: डेड लाइन = वह समय रेखा जिसके पार समाचार 'मृत' (Dead) या पुराना हो जाता है।
आर्थिक मामलों के पत्रकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसे माना जाता है ? (शब्द सीमा - लगभग 40 शब्द)
आर्थिक पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अर्थशास्त्र की जटिल शब्दावली और आंकड़ों को सामान्य पाठक की समझ के अनुकूल सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाए।
पत्रकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि आम पाठक भी आर्थिक समाचारों के महत्त्व और उनके प्रभाव को समझ सके।
Quick Tip: आर्थिक खबरें अक्सर नीरस और क्लिष्ट होती हैं, उन्हें 'रोचक' और 'बोधगम्य' बनाना ही मुख्य कार्य है।
संचार का सबसे पुराना और लोकप्रिय माध्यम होने पर भी समाचार-पत्रों की तुलना में टी.वी. की लोकप्रियता का कारण लिखिए। (शब्द सीमा - लगभग 40 शब्द)
टी.वी. एक दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम है, जिसमें समाचारों को घटते हुए देखा जा सकता है, जो इसे अधिक विश्वसनीय और सजीव बनाता है।
इसके अतिरिक्त, टी.वी. देखने के लिए साक्षर होना आवश्यक नहीं है, जिससे इसकी पहुँच अनपढ़ वर्ग तक भी होती है, जबकि समाचार-पत्र केवल साक्षर लोग ही पढ़ सकते हैं।
Quick Tip: मुख्य अंतर: साक्षरता की अनिवार्यता (अखबार में है, टीवी में नहीं) और 'लाइव' विजुअल्स।
फीचर लेखन का निश्चित ढाँचा या फॉर्मूला नहीं होता, फिर भी एक सजीव रोचक फीचर कैसे लिखा जा सकता है ?
फीचर को रोचक बनाने के लिए 'कथात्मक शैली' (Storytelling style) का प्रयोग करना चाहिए।
इसमें पात्रों, घटनाओं, अनुभूतियों और मानवीय रुचि (Human Interest) के पहलुओं को शामिल करना चाहिए।
भाषा सरल, दिल को छूने वाली और चित्रात्मक होनी चाहिए ताकि पाठक उससे जुड़ाव महसूस करे।
Quick Tip: फीचर = तथ्य + कल्पना + भावना। इसे रपोर्ताज से अलग बनाने वाला तत्त्व 'लेखकीय दृष्टिकोण' है।
क्या पत्रकारीय लेखन को जल्दी में लिखा गया साहित्य माना जा सकता है ? स्पष्ट कीजिए ।
हाँ, विद्वानों ने पत्रकारिता को 'जल्दी में लिखा गया साहित्य' कहा है।
साहित्य की तरह पत्रकारिता भी समाज का दर्पण है और मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करती है।
अंतर यह है कि साहित्य शाश्वत मूल्यों पर आधारित होता है और उसे रचने का समय मिलता है, जबकि पत्रकारिता तात्कालिक घटनाओं पर आधारित होती है और इसे 'डेड लाइन' के दबाव में लिखा जाता है।
Quick Tip: मैथ्यू आर्नोल्ड ने पत्रकारिता को 'Literature in a hurry' कहा था।
विशेष लेखन की भाषा-शैली सामान्य लेखन से अलग कैसे है ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।
विशेष लेखन (Specialized Reporting) में उस विशिष्ट विषय की तकनीकी शब्दावली (Technical Jargon) का प्रयोग किया जाता है।
सामान्य लेखन की भाषा आम बोलचाल की होती है, लेकिन विशेष लेखन में विषय के अनुसार शब्द बदल जाते हैं।
उदाहरण: क्रिकेट की खबर में 'हैट्रिक', 'मेडन ओवर', 'एलबीडब्ल्यू' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है जो सामान्य लेखन में नहीं होता।
Quick Tip: हर 'बीट' (Beat) की अपनी भाषा होती है। उसे डिकोड करना ही विशेष लेखन है।
कविता लेखन के संदर्भ में छंद से क्या अभिप्राय है ? कविता रचना में इसका महत्त्व स्पष्ट कीजिए ।
छंद (Meter) कविता की आंतरिक लय को अनुशासित करने वाला तत्त्व है। यह वर्णों या मात्राओं की निश्चित व्यवस्था है।
महत्त्व:
1. छंद कविता में संगीतात्मकता (Musicality) और प्रवाह लाता है।
2. यह कविता को गद्य से अलग करता है और उसे स्मृति में रखना आसान बनाता है।
3. यह भावों को एक सुंदर और सुगठित ढाँचा प्रदान करता है।
Quick Tip: छंद कविता का 'कंकाल' (Skeleton) है जो उसे ढांचा और मजबूती देता है, जबकि भाव उसका 'रक्त' है।
"स्थिति तथा परिवेश की माँग के अनुसार क्लिष्ट भाषा में भी लिखे गए संवाद दर्शकों तक आसानी से संप्रेषित हो जाते हैं ।" उदाहरण सहित इसकी पुष्टि कीजिए ।
नाटक या फिल्म में संवाद केवल शब्दों से नहीं, बल्कि पात्र के अभिनय, ध्वनि और दृश्य परिवेश (Situation) से भी समझे जाते हैं।
यदि कोई ऋषि या राजा कठिन तत्सम शब्दों का प्रयोग करता है, तो दर्शक उसकी वेशभूषा और हाव-भाव से उस कथन का भाव समझ लेते हैं।
उदाहरण: रामायण या महाभारत धारावाहिकों में प्रयुक्त क्लिष्ट हिंदी भी दर्शकों को समझ आ जाती है क्योंकि दृश्य संदर्भ स्पष्ट होता है।
Quick Tip: संवाद 'दृश्य' (Visual) का हिस्सा होते हैं, इसलिए शब्द कठिन होने पर भी 'भाव' (Emotion) पहुँच जाता है।
कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है ? वर्णन कीजिए ।
कहानी और मानव जीवन का संबंध अटूट है। हम अपनी दुनिया को कहानियों के माध्यम से ही समझते हैं।
कहानियाँ हमारे अनुभवों, कल्पनाओं और सपनों को व्यक्त करती हैं।
ये नैतिक मूल्यों और जीवन की सीख को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाती हैं। हर व्यक्ति के जीवन की अपनी एक कहानी होती है।
Quick Tip: कहानी विधा मानव स्वभाव का हिस्सा है। बच्चे से लेकर बूढ़े तक, सब में 'कथा-तत्व' विद्यमान होता है।
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(क) ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन
(ख) साप्ताहिक बाज़ार में जब मैंने एक बच्चे को रोते देखा
(ग) मुझे कक्षा का मॉनिटर बनना क्यों पसंद है !
(क) ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन
ओलंपिक खेल विश्व के सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजन हैं, जहाँ प्रदर्शन करना किसी भी देश के लिए गौरव की बात होती है।
भारत का ओलंपिक इतिहास हॉकी के 8 स्वर्ण पदकों से चमकता रहा है, लेकिन व्यक्तिगत खेलों में हम पीछे थे।
हाल के वर्षों में स्थिति बदली है और भारतीय खिलाड़ियों ने कुश्ती, शूटिंग, और बैडमिंटन जैसे खेलों में अपनी पहचान बनाई है।
टोक्यो ओलंपिक 2020 भारत के लिए ऐतिहासिक रहा, जहाँ हमने 1 स्वर्ण सहित कुल 7 पदक जीते।
नीरज चोपड़ा का जेवलिन थ्रो में स्वर्ण जीतना भारतीय खेल जगत में एक नए युग की शुरुआत है।
अब सरकार और समाज खेलों को गंभीरता से ले रहे हैं, जिससे उम्मीद है कि भविष्य में भारत खेल महाशक्ति बनेगा।
Quick Tip: तीनों विषय अलग प्रकृति के हैं: पहला तथ्यात्मक (Factual), दूसरा संस्मरणात्मक (Narrative), और तीसरा विचारात्मक (Reflective)। अपनी रुचि और शब्दावली (Vocabulary) के अनुसार ही विषय चुनें।
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(क) ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन
(ख) साप्ताहिक बाज़ार में जब मैंने एक बच्चे को रोते देखा
(ग) मुझे कक्षा का मॉनिटर बनना क्यों पसंद है !
(ख) साप्ताहिक बाज़ार में जब मैंने एक बच्चे को रोते देखा
गर्मियों की छुट्टियों में, एक शाम मैं अपने मित्र के साथ स्थानीय साप्ताहिक बाज़ार (मंगल बाज़ार) गया था।
वहाँ बहुत भीड़ थी और चारों तरफ सब्ज़ी वालों और फेरीवालों का शोर-शराबा था।
अचानक, एक खिलौने की दुकान के पास मुझे एक 5-6 साल का बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रोता हुआ दिखाई दिया।
उसके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था; वह अपने माता-पिता से बिछड़ गया था और उन्हें इधर-उधर ढूँढ़ रहा था।
मैं तुरंत उसके पास गया, उसे चुप कराया और उसे पानी पिलाया, फिर मैं उसे पास के पुलिस सहायता बूथ पर ले गया।
वहाँ लाउडस्पीकर से घोषणा करवाई गई, जिसे सुनकर घबराए हुए उसके माता-पिता दौड़ते हुए आए।
बच्चे को सुरक्षित अपने माता-पिता की गोद में देखकर मुझे जो आत्मसंतुष्टि मिली, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
Quick Tip: तीनों विषय अलग प्रकृति के हैं: पहला तथ्यात्मक (Factual), दूसरा संस्मरणात्मक (Narrative), और तीसरा विचारात्मक (Reflective)। अपनी रुचि और शब्दावली (Vocabulary) के अनुसार ही विषय चुनें।
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :
(क) ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन
(ख) साप्ताहिक बाज़ार में जब मैंने एक बच्चे को रोते देखा
(ग) मुझे कक्षा का मॉनिटर बनना क्यों पसंद है !
(ग) मुझे कक्षा का मॉनिटर बनना क्यों पसंद है !
विद्यालय जीवन में हर छात्र की कुछ रुचियाँ होती हैं, और मेरी रुचि कक्षा का मॉनिटर बनने में है।
मुझे मॉनिटर बनना इसलिए पसंद है क्योंकि यह मुझे जिम्मेदारी और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है।
जब अध्यापक कक्षा में नहीं होते, तब कक्षा को नियंत्रित करना और शांत रखना मेरे नेतृत्व कौशल (Leadership Skills) को निखारता है।
शिक्षकों का मुझ पर विश्वास करना मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाता है और मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा देता है।
इसके अलावा, मॉनिटर बनकर मुझे अपने सहपाठियों की समस्याओं को सुलझाने और उनकी मदद करने का अवसर मिलता है।
यह पद मुझे भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए अभी से तैयार करता है।
Quick Tip: तीनों विषय अलग प्रकृति के हैं: पहला तथ्यात्मक (Factual), दूसरा संस्मरणात्मक (Narrative), और तीसरा विचारात्मक (Reflective)। अपनी रुचि और शब्दावली (Vocabulary) के अनुसार ही विषय चुनें।
'सरोज-स्मृति' कविता के आधार पर लिखिए कि सरोज का विवाह करते समय निराला जी को 'शकुंतला' का स्मरण क्यों हो आया ?
निराला जी को अपनी पुत्री सरोज के विवाह के समय शकुंतला की याद इसलिए आई क्योंकि दोनों की स्थितियों में समानता थी।
जिस प्रकार शकुंतला माँ-विहीन थी और उसके पिता कण्व ने ही उसका पालन-पोषण और विदाई की थी, उसी प्रकार सरोज भी माँ-विहीन थी और निराला जी ही माता-पिता दोनों का कर्तव्य निभा रहे थे।
हालाँकि, निराला जी यह भी स्पष्ट करते हैं कि शकुंतला की विदाई का दृश्य और सरोज की विदाई का भाव अलग था, क्योंकि शकुंतला को शिक्षा और परिवेश अलग मिला था।
Quick Tip: तुलना का आधार 'मातृहीनता' और 'पिता द्वारा विदाई' है।
'वसंत आया' कविता की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए ।
'वसंत आया' कविता की मूल संवेदना आधुनिक मानव का प्रकृति से टूटा हुआ रिश्ता है।
आज मनुष्य इतना यांत्रिक हो गया है कि उसे वसंत के आने का पता प्रकृति के परिवर्तनों (जैसे हवा, पत्ते, कोयल की कूक) से नहीं, बल्कि कैलेंडर और दफ्तर की छुट्टियों से चलता है।
कवि इस विडंबना को उजागर करता है कि हम प्रकृति को महसूस करने के बजाय उसे केवल तार्किक रूप से जानते हैं।
Quick Tip: संवेदना का केंद्र: 'प्रकृति से अलगाव' और 'अनुभव के स्थान पर ज्ञान (कैलेंडर) पर निर्भरता'।
प्रेम अनुभूति का वर्णन करना नायिका के लिए कठिन क्यों है ? विद्यापति रचित 'पद' के आधार पर लिखिए ।
विद्यापति के पद में नायिका के लिए प्रेम अनुभूति का वर्णन करना इसलिए कठिन है क्योंकि प्रेम क्षण-प्रतिक्षण बदलता रहता है और नित्य नवीन लगता है।
नायिका कहती है कि वह जन्म-जन्मांतर से अपने प्रिय (कृष्ण) का रूप देख रही है, फिर भी उसके नेत्र तृप्त नहीं हुए हैं।
प्रेम की गहराई और तीव्रता इतनी अधिक है कि उसे शब्दों की सीमित परिधि में बाँधना या समझाना संभव नहीं है।
Quick Tip: मुख्य पंक्ति याद रखें: "सखि हे, की पूछसि अनुभव मोय... छन छन नूतन होय।" (प्रेम हर पल नया होता है)।
भरत अपने और राम के बिछोह का कारण किसे मानते हैं ?
काव्यांश की पहली पंक्ति में भरत कहते हैं - "बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।।"
अर्थात् विधाता (भाग्य) मेरे और राम के प्रेम को सहन नहीं कर सका, इसलिए उसने माता को माध्यम बनाकर बीच में दरार डाल दी।
अंततः वे अपने 'अभाग' (दुर्भाग्य) को ही इस विछोह का मुख्य कारण मानते हैं।
Quick Tip: 'बिधि' का अर्थ 'भाग्य' या 'विधाता' है। भरत विनम्रतापूर्वक दोष भाग्य पर मढ़ते हैं।
काव्यांश में 'करोड़ों दुराचारों' जैसा किसे कहा गया है ?
पंक्ति है: "मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।"
भरत कहते हैं कि यह सोचना भी कि 'माता नीच/बुरी है और मैं साधु/सदाचारी हूँ', हृदय में करोड़ों दुराचारों (कुचाली) को लाने के समान है।
वे अपनी माँ की निंदा करके खुद को श्रेष्ठ साबित करना पाप मानते हैं।
Quick Tip: 'कोटि कुचाली' का संदर्भ 'आत्म- प्रशंसा' और 'मात्र-निंदा' के विचार से है।
'कोदो के पौधे से शालिधान की बाली कैसे आएगी' इस भाव से मिलती-जुलती कहावत है -
काव्यांश में पंक्ति है: "फरइ कि कोदव बालि सुसाली।" अर्थात् क्या कोदो (मोटा अनाज) के पौधे से उत्तम धान (शाली) की बाली उग सकती है?
इसका भाव है कि जैसा बीज/मूल होगा, वैसा ही फल होगा।
यह भाव 'बोए पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय' कहावत से पूर्णतः मेल खाता है।
Quick Tip: यहाँ 'वंशानुगत प्रभाव' (Heredity) की बात की गई है—कैकेयी (बबूल/कोदो) से भरत (आम/शाली) कैसे अच्छे हो सकते हैं।
राम के लिए वनवास की इच्छा का दोषी काव्यांश में बताया गया है -
भरत कहते हैं: "मोर अभाग उदधि अवगाहू" (मेरा दुर्भाग्य अथाह सागर जैसा है)।
वे मानते हैं कि उनके दुर्भाग्य के कारण ही यह सब अनर्थ हुआ है।
इसलिए, राम के वनवास का मूल दोषी वे अपने 'अभाग' (दुर्भाग्य) को मानते हैं।
Quick Tip: भरत का चरित्र 'आत्म-ग्लानि' (Self-reproach) से भरा है, इसलिए वे दोष 'भाग्य' या 'स्वयं' पर लेते हैं।
इस काव्यांश के मूल भाव को दर्शाने वाला कथन है -
पूरे काव्यांश में भरत अपनी माता के कृत्य और अपने अस्तित्व को लेकर दुखी हैं (आत्मपरिताप)।
साथ ही, वे राम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा ("गुरु गोसाई साहिब सिय रामू") और प्रेम प्रकट कर रहे हैं।
अतः विकल्प (B) काव्यांश के केंद्रीय भाव को सही व्यक्त करता है।
Quick Tip: 'आत्मपरिताप' (Remorse/Self-pity) और 'भ्रातृ-प्रेम' (Brotherly love) इस प्रसंग के दो मुख्य स्तंभ हैं।
एहि मास उपजै रस मूलू । तूँ सो भँवर मोर जोबन फूलू ।।
नैन चुवहिं जस माँहुट नीरू । तेहि जल अंग लाग सर चीरू ।।
टूटहिं बूंद परहिं जस ओला । बिरह पवन होई मारैं झोला ।।
केहिक सिंगार को पहिर पटोरा । गियँ नहिं हार रही होइ डोरा ।।
अथवा
संदर्भ: यह काव्यांश 'मलिक मुहम्मद जायसी' द्वारा रचित महाकाव्य 'पद्मावत' के 'बारहमासा' अंश (नागमती वियोग वर्णन) से लिया गया है।
प्रसंग: इसमें 'माघ' महीने की कड़ाके की सर्दी में नागमती की विरह वेदना का मार्मिक चित्रण किया गया है।
व्याख्या:
कवि कहते हैं कि इस महीने (माघ) में काम-भावना (रस मूल) जाग्रत होती है। नागमती कहती है कि "हे प्रिय! तुम भ्रमर हो और मेरा यौवन फूल के समान है (जो तुम्हारे बिना व्यर्थ है)।"
उसकी आँखों से आँसू ऐसे टपक रहे हैं जैसे माघ की वर्षा (महावट) हो रही हो। उन आँसुओं से भीगे वस्त्र उसके शरीर पर बाण (सर) की तरह चुभ रहे हैं।
आँसुओं की बूँदें ठंडी होकर ओलों की तरह गिर रही हैं और विरह रूपी पवन उसे झकझोर रहा है।
पति के बिना वह किसके लिए श्रृंगार करे? वह सूखकर इतनी दुर्बल हो गई है कि गले का हार भी उसके लिए भारी बोझ (डोरा) बन गया है।
Quick Tip: कीवर्ड्स: 'माघ मास', 'महावट' (सर्दियों की बारिश), और 'विरह की अतिशयोक्ति'।
जो है वह खड़ा है
बिना किसी स्तंभ के
जो नहीं है उसे थामे है
राख और रोशनी के ऊँचे-ऊँचे स्तंभ
आग के स्तंभ
और पानी के स्तंभ
धुएँ के
खुशबू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ
किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्घ्य
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टाँग से
बिलकुल बेखबर !
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ पाठ्यपुस्तक 'अंतरा भाग-2' में संकलित कविता 'बनारस' से ली गई हैं, जिसके रचयिता 'केदारनाथ सिंह' हैं।
प्रसंग: कवि बनारस शहर की प्राचीन आध्यात्मिकता, आस्था और उसके द्वंद्वात्मक स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं।
व्याख्या:
कवि कहते हैं कि यह शहर बिना किसी भौतिक खंभों के खड़ा है; यह केवल लोगों की आस्था और विश्वास पर टिका है।
यहाँ 'जो नहीं है' (ईश्वरीय सत्ता/अदृश्य शक्ति), उसे राख, रोशनी, आग, पानी और प्रार्थना के लिए उठे हज़ारों हाथों ने थाम रखा है।
यह शहर सदियों से गंगा के जल में अपनी एक टाँग पर खड़ा होकर किसी अदृश्य सूर्य को अर्घ्य दे रहा है। 'एक टाँग पर खड़ा होना' उसकी गहरी तपस्या और आस्था में लीन होने का प्रतीक है।
यह अपनी दूसरी टाँग (आधुनिकता या बदलाव) से बिलकुल अनजान है, अर्थात् यह अपनी प्राचीनता में ही मग्न है।
Quick Tip: बनारस 'आस्था का शहर' है। यहाँ 'स्तंभ' ईंट-पत्थर के नहीं, बल्कि विश्वास और परंपराओं के हैं।
गद्यांश का वर्ण्य विषय है -
असगर वजाहत की यह लघु कथा 'चार हाथ' पूँजीवादी व्यवस्था पर एक व्यंग्य है।
गद्यांश में मिल मालिक के बेतुके ख्यालों (जैसे मज़दूरों के चार हाथ लगाना) के माध्यम से यह दिखाया गया है कि शोषक वर्ग किस हद तक जाकर मुनाफ़ा कमाना चाहता है।
यह उनकी अमानवीय और लालची मनोवृत्ति को उजागर करता है।
Quick Tip: व्यंग्य का मुख्य निशाना 'मिल मालिक' (पूँजीपति) की सोच है, न कि केवल मज़दूरों की दशा।
मिल मालिक के दिमाग में तरह-तरह के खयाल क्यों आया करते थे ?
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है: "अगर मज़दूरों के चार हाथ हों तो काम कितना तेज़ी से हो और मुनाफ़ा कितना ज़्यादा।"
यद्यपि वह उत्पादन (काम तेज़ी से) बढ़ाना चाहता है, लेकिन उसका अंतिम और मुख्य उद्देश्य 'मुनाफ़ा' (आमदनी) बढ़ाना ही है।
पूँजीपति की हर सोच के केंद्र में आर्थिक लाभ (Income/Profit) होता है।
Quick Tip: 'मुनाफ़ा' शब्द गद्यांश में कुंजी है। मुनाफ़ा = आमदनी में वृद्धि।
मिल मालिक की मिल में आदमी बनाने का कारण था -
गद्यांश के अनुसार, मालिक ने सोचा कि अगर मिल में आदमी भी चीज़ों की तरह बनने लगेंगे, तो "तब मज़दूरी भी नहीं देनी पड़ेगी"।
अतः उसका मुख्य उद्देश्य मज़दूरी के खर्च को बचाना था।
Quick Tip: पूँजीपति मज़दूर को इंसान नहीं, बल्कि एक सस्ता संसाधन या मशीन बनाना चाहता है ताकि खर्च (मज़दूरी) न हो।
मिल मालिक ने वैज्ञानिकों को नौकरी पर क्यों रखा ?
गद्यांश में लिखा है: "उसने यह काम करने के लिए बड़े वैज्ञानिकों को... नौकर रखा।"
'यह काम' से तात्पर्य उसके पिछले विचार से है - "अगर मज़दूरों के चार हाथ हों"।
वैज्ञानिकों को विशेष रूप से इसी असंभव कार्य को संभव करने के लिए रखा गया था।
Quick Tip: संदर्भ को पीछे के वाक्य से जोड़ें जहाँ 'चार हाथ' का विचार आया था।
निम्नलिखित कथन तथा परिणाम को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : वैज्ञानिकों ने कई साल तक शोध और प्रयोग करने के बाद आदमी के चार हाथ हो जाने की कल्पना को नकार दिया ।
परिणाम : वैज्ञानिकों को मिल मालिक ने नौकरी से निकाल दिया और स्वयं कोशिश करने लगा ।
गद्यांश के अनुसार, वैज्ञानिकों ने शोध के बाद कहा "ऐसा असंभव है कि आदमी के चार हाथ हो जाएँ" (कथन सही)।
इसके बाद, "मिल मालिक वैज्ञानिकों से नाराज़ हो गया। उसने उन्हें नौकरी से निकाल दिया और अपने-आप इस काम को पूरा करने... जुट गया" (परिणाम सही)।
अतः दोनों घटनाएँ गद्यांश में दिए गए क्रम और तथ्यों के अनुसार सही हैं।
Quick Tip: कथन-परिणाम प्रश्नों में घटनाओं के क्रम और उनकी सत्यता की जाँच सीधे गद्यांश की पंक्तियों से करें।
'प्रेमघन की छाया स्मृति' पाठ के आधार पर उदाहरण सहित इस कथन की पुष्टि कीजिए कि 'प्रेमघन चौधरी एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे' ।
लेखक रामचंद्र शुक्ल ने चौधरी बदरीनारायण 'प्रेमघन' के रईसी ठाठ-बाट का सजीव चित्रण किया है।
वे एक संपन्न और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, जिनके रहन-सहन में राजसी झलक थी।
उनके बाल कंधों तक लंबे थे और वे अक्सर बरामदे में मसनद लगाकर बैठते थे।
त्योहारों, विशेषकर होली पर उनके यहाँ खूब नाच-रंग और उत्सव होता था।
उनकी बातचीत का ढंग भी निराला और व्यंग्यपूर्ण होता था; वे नौकरों से सीधे मुँह बात नहीं करते थे, जो उनकी रईसी ऐंठन को दर्शाता था।
Quick Tip: 'रईस' का अर्थ केवल धन से नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला (Lifestyle) और मिज़ाज (Attitude) से है।
'अतिथि देवो भव' की भावना का साकार रूप लेखक को यास्सेर अराफ़ात के आतिथ्य सत्कार में कैसे दिखाई दिया ?
भीष्म साहनी ने अपने संस्मरण 'गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात' में अराफ़ात के आतिथ्य का भावपूर्ण वर्णन किया है।
जब लेखक ट्यूनीशिया में अराफ़ात से मिले, तो एक बड़े नेता होने के बावजूद अराफ़ात ने उनका स्वागत बेहद अपनत्व से किया।
उन्होंने स्वयं लेखक के लिए चाय बनाई और अपने हाथों से फल (सेब) छीलकर खिलाया।
उनका यह व्यवहार और विनम्रता 'अतिथि देवो भव' की भारतीय परंपरा का ही जीवंत उदाहरण प्रतीत हुआ।
Quick Tip: उदाहरण में 'फल छीलना' और 'चाय बनाना' जैसे कार्यों का उल्लेख करना आवश्यक है जो उनकी विनम्रता दर्शाते हैं।
'पहचान' कहानी के संदर्भ में लिखिए कि राजा की सफलता का क्या राज है ?
असगर वजाहत की कहानी 'पहचान' में राजा की सफलता का राज 'जनता का अंधा, बहरा और गूँगा' होना है।
राजा ने जनता को आदेश दिया कि वे अपनी आँखें बंद कर लें, कानों में पिघला सीसा डलवा लें और मुँह सिलवा लें।
जनता ने इसे राज्य के विकास के लिए आवश्यक मानकर स्वीकार कर लिया।
इस प्रकार, जब जनता न कुछ देख पाई, न सुन पाई और न बोल पाई, तो राजा बिना किसी विरोध के मनमाने ढंग से शासन करता रहा।
Quick Tip: यह कहानी एक 'प्रतीककथा' (Allegory) है। यहाँ अंधा-बहरा होना 'जागरूकता की कमी' का प्रतीक है।
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
संवदिया डटकर खाता है और 'अफर' कर सोता है, किंतु हरगोबिन को नींद नहीं आ रही है। यह उसने क्या किया ? क्या कर दिया ? वह किसलिए आया था ? वह झूठ क्यों बोला ? नहीं, नहीं सुबह उठते ही वह बूढ़ी माता को बड़ी बहुरिया का सही संवाद सुना देगा - अक्षर-अक्षर, 'मायजी, आपकी इकलौती बेटी बहुत कष्ट में है। आज ही किसी को भेजकर बुलावा लीजिए। नहीं तो वह सचमुच कुछ कर बैठेगी। आखिर, किसके लिए वह इतना सहेगी! बड़ी बहुरिया ने कहा है, भाभी के बच्चों की जूठन खाकर वह एक कोने में पड़ी रहेगी !'
रात भर हरगोबिन को नींद नहीं आई। आँखों के सामने बड़ी बहुरिया बैठी रही - सिसकती, आँसू पोंछती हुई।
संदर्भ एवं प्रसंग:
यह गद्यांश फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित प्रसिद्ध कहानी 'संदिया' से लिया गया है।
हरगोबिन (संदिया) बड़ी बहुरिया का संदेश लेकर उनके मायके गया था, लेकिन शर्म और स्वाभिमान के कारण वह उनकी गरीबी का हाल नहीं सुना सका और खाली हाथ लौट आया। यह दृश्य उसके लौटने के बाद का है।
व्याख्या:
हरगोबिन अत्यंत भूखा था, फिर भी उससे खाया नहीं गया। उसका पेट भूख से नहीं, बल्कि झूठ बोलने और कर्तव्य पूरा न कर पाने की ग्लानि (Guilt) से भरा हुआ था (इसे 'अफर' कहा गया है)।
वह सोच रहा था कि वह बड़ी बहुरिया से क्या कहेगा? क्या वह झूठ बोलेगा कि सब ठीक है?
बड़ी बहुरिया, जो आस लगाए बैठी थी कि मायके से बुलावा या मदद आई होगी, उसका करुण चेहरा हरगोबिन की आँखों के सामने घूम रहा था।
वह मानसिक द्वंद्व में फँसा था कि कैसे उस असहाय नारी का सामना करे जिसे उसने निराश किया है।
Quick Tip: व्याख्या में हरगोबिन की 'मनोदशा' (Mental state) और 'स्वामिभक्ति' (Loyalty) को मुख्य बिंदु बनाएँ।
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
यह जो मेरे सामने कुटज का लहराता पौधा खड़ा है वह नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय जीवनी शक्ति की घोषणा कर रहा है। इसीलिए यह इतना आकर्षक है। नाम है कि हज़ारों वर्ष से जीता चला आ रहा है। कितने नाम और गए। दुनिया उनको भूल गई, वे दुनिया को भूल गए। मगर कुटज है कि संस्कृत की निरंतर स्फीयमान शब्द राशि में जो जमके बैठा, सो बैठा ही है। और रूप की तो बात ही क्या है ! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।
संदर्भ एवं प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध 'कुटज' से उद्धृत हैं।
लेखक हिमालय की सूखी और कठोर चट्टानों पर उगने वाले 'कुटज' के पौधे को देखकर उसकी जीवनी शक्ति (Jijivisha) का वर्णन कर रहे हैं।
व्याख्या:
लेखक कहते हैं कि कुटज का पौधा अपराजित जीवन शक्ति का प्रतीक है। यह हज़ारों वर्षों से कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है।
दुनिया भले ही इसके नाम और अस्तित्व को भूल गई हो, लेकिन यह अपनी मस्ती में खड़ा है।
यह किसी की परवाह नहीं करता (मनमौजी है)। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जहाँ कोई जलस्रोत नहीं दिखता, वहाँ यह कठोर पत्थरों (पाषाण की कारा) को भेदकर, न जाने कहाँ से रस (पानी) खींच लेता है।
यह हमें सिखाता है कि विषम परिस्थितियों में भी कैसे सरस और स्वाभिमानी बना रहा जा सकता है।
Quick Tip: कुटज 'अजेय जीवन शक्ति' (Invincible Life Force) का प्रतीक है। शब्दों का चयन तत्सम प्रधान रखें।
'अपना मालवा खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में.....' पाठ में विक्रमादित्य, भोज और मुंज आदि राजाओं का उल्लेख किस संदर्भ में आया है ? स्पष्ट कीजिए ।
लेखक प्रभाश जोशी ने मालवा के इतिहास और वहां की समृद्ध जल-संरक्षण परंपरा को दर्शाने के लिए इन राजाओं का उल्लेख किया है।
विक्रमादित्य, भोज और मुंज जैसे महान शासकों ने मालवा की भौगोलिक स्थिति और पानी के महत्त्व को गहराई से समझा था।
उन्होंने पठारी क्षेत्र होने के बावजूद बारिश के पानी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर तालाब, कुएँ और बावड़ियाँ बनवाईं।
इन राजाओं के दूरदर्शी प्रयासों के कारण ही मालवा धरती के गर्भ में पानी सहेज पाया और वहाँ "पग-पग नीर, डग-डग रोटी" (पानी और भोजन की प्रचुरता) संभव हो सकी।
लेखक आज की 'खाऊ-उजाड़ू' सभ्यता (जो इन स्रोतों को नष्ट कर रही है) की तुलना उन राजाओं की निर्माणकारी बुद्धिमत्ता से करते हैं।
Quick Tip: संदर्भ 'जल-प्रबंधन' (Water Management) का है। प्राचीन राजा 'निर्माता' थे, जबकि आधुनिक सभ्यता 'विनाशक' है।
झोंपड़ी जला दिए जाने के बाद भी सूरदास का किसी से प्रतिशोध न लेना, उसके स्वभाव की किस विशेषता को दर्शाता है ? सूरदास जैसे चरित्र की वर्तमान समय में क्या प्रासंगिकता है ? स्पष्ट कीजिए ।
झोंपड़ी जलाए जाने पर भी प्रतिशोध न लेना सूरदास की 'क्षमाशीलता', 'धैर्य' और 'सकारात्मक सोच' को दर्शाता है।
वह मानता है कि बदला लेना विनाश की ओर ले जाता है, जबकि नवनिर्माण ही जीवन का सत्य है। उसका कथन "हम सौ लाख बार बनाएँगे" उसकी हार न मानने वाली जिजीविषा (Resilience) का प्रतीक है।
वर्तमान समय में सूरदास का चरित्र अत्यंत प्रासंगिक है। आज जब समाज में छोटी-छोटी बातों पर हिंसा, क्रोध और अवसाद (Depression) बढ़ रहा है, सूरदास हमें संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
वह सिखाता है कि विपत्तियाँ चाहे कितनी भी बड़ी हों, मनुष्य को निराश होने के बजाय पुनः निर्माण के लिए तत्पर रहना चाहिए।
Quick Tip: सूरदास का मूल मंत्र है: 'पुनर्निर्माण' (Reconstruction)। वह विध्वंस का जवाब सृजन से देता है।
'इसे 'सेस', 'सारद' भी नहीं बयान कर सकते' - 'बिस्कोहर की माटी' पाठ में यह कथन किस संदर्भ में कहा गया ? इसका क्या आशय है ? इस संदर्भ में अपने विचार स्पष्ट कीजिए ।
यह कथन पाठ में माँ द्वारा बच्चे को दूध पिलाने (स्तनपान) के दृश्य और उस समय माँ के चेहरे पर झलकने वाली भाव-भंगिमा के संदर्भ में कहा गया है।
लेखक का आशय है कि माँ और शिशु के बीच का यह संबंध और दृश्य इतना पवित्र, सुंदर और अद्भुत होता है कि शब्दों में इसका वर्णन करना असंभव है।
'सेस' (हज़ारों मुख वाले शेषनाग) और 'सारद' (विद्या की देवी सरस्वती) भी अपनी पूरी क्षमता के साथ इस वात्सल्य भाव की गहराई को व्यक्त नहीं कर सकते।
मेरे विचार में, यह कथन मातृत्व की गरिमा को सर्वोच्च स्थान देता है। यह अहसास इतना सूक्ष्म और दिव्य है कि यह केवल अनुभव किया जा सकता है, कहा नहीं जा सकता।
Quick Tip: 'सेस' (शेषनाग) और 'सारद' (सरस्वती) का प्रयोग उपमेय की महानता और 'अनिर्वचनीयता' (Ineffability) को दर्शाने के लिए किया गया है।
*The article might have information for the previous academic years, please refer the official website of the exam.